राजस्थान न्यूज़: बांसवाड़ा में जांच के बाद सभी शैक्षणिक दस्तावेज पाए गए फर्जी, पूरी सेवा अवधि का वेतन और देय राशि होगी वसूल बांसवाड़ा। बांसवाड़ा जिले में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सरकारी नौकरी करने का गंभीर मामला सामने आया है। एक शिक्षक ने कथित रूप से फर्जी शैक्षणिक दस्तावेजों के सहारे करीब 35 साल तक सरकारी सेवा की, लेकिन सेवानिवृत्ति से ठीक एक दिन पहले उसकी सेवा समाप्त कर दी गई। जांच में दस्तावेज फर्जी पाए जाने के बाद जिला परिषद ने शिक्षक को राजकीय सेवा से बर्खास्त करने का आदेश जारी किया है। मामला धौलपुर जिले के फूलपुरा निवासी लक्ष्मीनारायण से जुड़ा है। उसने वर्ष 1992 में सामान्य श्रेणी अध्यापक पद के लिए आवेदन करते समय जो शैक्षणिक दस्तावेज प्रस्तुत किए थे, वे जांच में संदिग्ध पाए गए। वर्ष 2022 में उसके भाई की शिकायत के बाद मामले की जांच शुरू की गई थी। जांच पूरी होने पर सामने आया कि शिक्षक द्वारा प्रस्तुत सभी शैक्षणिक दस्तावेज फर्जी थे। जांच में यह भी सामने आया कि लक्ष्मीनारायण ने सैकण्डरी और सीनियर सैकण्डरी की अंकतालिकाओं में अंक बढ़ाकर उन्हें प्रथम श्रेणी का दर्शाया था। इसके अलावा बिना एसटीसी किए फर्जी अंकतालिका संलग्न कर दी गई थी। विभागीय रिकॉर्ड में संबंधित दस्तावेजों का कोई अस्तित्व नहीं मिला, जिसके बाद मामला गंभीर माना गया। शिक्षक ने इस कार्रवाई से बचने के लिए कानूनी राहत लेने का प्रयास भी किया, लेकिन विभिन्न स्तरों पर दस्तावेजों की जांच में वे फर्जी प्रमाणित हुए। इसके बाद जिला स्थापना समिति ने राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 91(3) के तहत उसे राजकीय सेवा से हटाने का निर्णय लिया। जिला परिषद की ओर से सोमवार को शिक्षक की सेवा समाप्त करने का आदेश जारी कर दिया गया। विशेष बात यह है कि यह कार्रवाई उसकी सेवानिवृत्ति से ठीक एक दिन पहले की गई। विभागीय जांच में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नियुक्ति प्राप्त करना प्रमाणित होने के बाद अब उससे पूरी सेवा अवधि के दौरान प्राप्त वेतन और अन्य देय राशि की वसूली की जाएगी। हेडिंग, विस्तृत खबर, मेटा कीवर्ड और मेटा डिस्क्रिप्शन : जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी गोपाललाल स्वर्णकार ने बताया कि आरोपी शिक्षक से पूरी सेवा राशि की वसूली की जाएगी। प्रशासन की इस कार्रवाई को सरकारी सेवा में दस्तावेज सत्यापन और नियुक्ति प्रक्रिया की गंभीरता से जोड़कर देखा जा रहा है। यह मामला सरकारी नौकरियों में दस्तावेज सत्यापन व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करता है। 35 साल तक फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सेवा करने का मामला सामने आने के बाद विभागीय स्तर पर रिकॉर्ड जांच और सत्यापन प्रक्रिया को और मजबूत करने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
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राजस्थान न्यूज़: जयपुर। राजस्थान में जल जीवन मिशन से जुड़े कथित भ्रष्टाचार मामले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने तत्कालीन जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग मंत्री महेश जोशी और निजी व्यक्ति संजय बड़ाया के खिलाफ अदालत में चालान पेश कर दिया है। एसीबी ने विशेष एसीबी न्यायाधीश राजेश कुमार दडिया की अदालत में करीब 3000 पेजों का आरोप पत्र प्रस्तुत किया। राज्य सरकार की ओर से लोक अभियोजक मंजुला जैन ने अदालत को बताया कि मामले में अनुसंधान अभी भी लंबित है और जांच जारी है। ऐसे में आगे की जांच के आधार पर मामले में और तथ्य या पूरक सामग्री सामने आ सकती है। अदालत में पेश किए गए चालान के बाद अब इस मामले में न्यायिक प्रक्रिया अगले चरण में आगे बढ़ेगी। जल जीवन मिशन में कथित रूप से बड़े पैमाने पर अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर एसीबी लंबे समय से जांच कर रही है। इस प्रकरण में टेंडर प्रक्रिया, कार्य आवंटन, भुगतान और संबंधित प्रशासनिक निर्णयों से जुड़े पहलुओं की जांच की जा रही है। आरोपों के अनुसार, जल जीवन मिशन के कार्यों में कथित रूप से वित्तीय अनियमितताएं हुईं, जिनकी जांच के बाद एसीबी ने अलग-अलग चरणों में आरोप पत्र दाखिल किए हैं। इस मामले में तत्कालीन अतिरिक्त मुख्य सचिव सुबोध अग्रवाल सहित 10 अन्य आरोपियों के खिलाफ भी पूर्व में चालान पेश किया जा चुका है। अब महेश जोशी और संजय बड़ाया के खिलाफ चालान पेश होने के बाद मामला और महत्वपूर्ण चरण में पहुंच गया है। एसीबी की ओर से अब तक कई चरणों में न्यायालय के समक्ष आरोप पत्र प्रस्तुत किए जा चुके हैं। मामले में पूर्व मंत्री महेश जोशी, संजय बड़ाया, दिनेश गोयल, कृष्णदीप गुप्ता, शुभांशु दीक्षित, सुशील शर्मा, विशाल सक्सेना, डी.के. गौड़, महेंद्र प्रकाश सोनी, मुकेश पाठक और निरिल कुमार वर्तमान में न्यायिक हिरासत में बताए जा रहे हैं। इन आरोपियों के विरुद्ध जांच एजेंसियों द्वारा आरोपों, दस्तावेजों और वित्तीय लेन-देन से जुड़े पहलुओं की जांच की जा रही है। एसीबी द्वारा चालान पेश किए जाने के बाद अब अदालत में आरोपों, दस्तावेजी साक्ष्यों और अभियोजन पक्ष की सामग्री पर विचार किया जाएगा। हालांकि, मामले में अंतिम निष्कर्ष न्यायालय की सुनवाई और विधिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। फिलहाल एसीबी की जांच जारी है और मामले में आगे पूरक चालान या अतिरिक्त तथ्य भी प्रस्तुत किए जा सकते हैं। जल जीवन मिशन केंद्र और राज्य सरकार की महत्वपूर्ण पेयजल योजना है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में घर-घर नल से जल उपलब्ध कराना है। ऐसे में इस योजना से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के आरोपों को गंभीर माना जा रहा है। मामले में चालान पेश होने के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में भी इस प्रकरण को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
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राजस्थान न्यूज़: जयपुर। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राजस्थान में सरकारी भुगतान तंत्र के ठप होने का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को पत्र लिखा है। गहलोत ने पत्र में राज्य की वित्तीय स्थिति को गंभीर बताते हुए सरकारी कर्मचारियों, पेंशनभोगियों, अस्पतालों, दवा विक्रेताओं, दुर्घटना पीड़ित परिवारों और छोटे ठेकेदारों को भुगतान नहीं मिलने का मुद्दा उठाया है। पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत ने पत्र में लिखा कि राजस्थान में सरकारी भुगतान तंत्र जिस तरह से ठप पड़ा है, वह गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि यह किसी एक विभाग या एक योजना की समस्या नहीं है, बल्कि कर्मचारी, पेंशनभोगी, दुर्घटना पीड़ित परिवार, अस्पताल, दवा विक्रेता और छोटे ठेकेदार तक अपने वैध भुगतान के लिए परेशान हो रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश के इतिहास में वित्तीय कुप्रबंधन का ऐसा स्वरूप पहले कभी नहीं देखा गया। पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से समय रहते हस्तक्षेप करने की मांग की। उन्होंने कहा कि सरकार को तत्काल प्रभाव से लंबित भुगतानों की समीक्षा कर प्रभावित वर्गों को राहत देनी चाहिए, ताकि आमजन और सेवा प्रदाताओं का सरकार पर भरोसा बना रहे। पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत ने आरजीएचएस योजना के तहत निजी अस्पतालों, डायग्नोस्टिक सेंटरों और दवा विक्रेताओं का करोड़ों रुपए का भुगतान महीनों से लंबित होने का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि राज्य मानवाधिकार आयोग को भी इस पर स्वतः संज्ञान लेना पड़ा। कई अस्पतालों द्वारा सेवाएं सीमित करने या एमओयू समाप्त करने तक की चेतावनी दी जा रही है। उन्होंने कहा कि कैशलेस इलाज का दावा करने वाली योजना में भी कर्मचारियों और पेंशनरों को पहले अपनी जेब से राशि जमा करानी पड़ रही है। गहलोत ने सुझाव दिया कि राज्य सरकार को अस्पतालों को लिखित गारंटी देकर पुनर्भुगतान के लिए पाबंद करना चाहिए, ताकि मरीजों को उपचार में परेशानी न हो। पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत ने मुख्यमंत्री चिरंजीवी और आयुष्मान दुर्घटना बीमा योजना से जुड़े भुगतान लंबित होने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि दुर्घटना में मृत्यु होने पर पीड़ित परिवार को पांच लाख रुपए की सहायता राशि मिलनी होती है, लेकिन कई मामलों में दावे स्वीकृत होने के बावजूद परिवारों को भुगतान नहीं मिल पाया है। उन्होंने इसे पीड़ित परिवारों के प्रति असंवेदनशीलता बताया। पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत ने रिटायर्ड कर्मचारियों के भुगतान को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि जीपीएफ, ग्रुप बीमा, ग्रेच्युटी और अर्जित अवकाश जैसी राशि कर्मचारी का अधिकार है, लेकिन सेवानिवृत्ति के बाद भी कई महीनों तक भुगतान नहीं हो रहा। उन्होंने सामाजिक सुरक्षा पेंशन के लंबित भुगतान का मुद्दा उठाते हुए कहा कि इससे बुजुर्ग, विधवा और दिव्यांग पेंशनभोगी सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं। पत्र में ट्रेजरी से पास हो चुके बिलों के भुगतान में देरी का भी उल्लेख किया गया। पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत ने कहा कि इसका सीधा असर सड़क, पेयजल और अन्य बुनियादी ढांचे से जुड़ी परियोजनाओं पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि छोटे ठेकेदारों को अपने वैध भुगतान के लिए अखबारों में विज्ञापन देकर सरकार का ध्यान आकर्षित करना पड़ रहा है, जो चिंताजनक स्थिति है। पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत ने कहा कि यह भुगतान संकट केवल प्रशासनिक लापरवाही का मामला नहीं है, बल्कि लाखों परिवारों की आजीविका और सम्मान से जुड़ा प्रश्न है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को अपने कर्मचारियों, पेंशनभोगियों और सेवा प्रदाताओं के भरोसे को बनाए रखना चाहिए, लेकिन वर्तमान स्थिति में यह भरोसा डगमगा रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि इस विषय की गंभीरता को देखते हुए तत्काल निर्णय लिया जाए और लंबित भुगतानों के समाधान के लिए स्पष्ट कार्ययोजना बनाई जाए। उन्होंने कहा कि समय पर कदम उठाने से प्रदेश के लाखों परिवारों को अनावश्यक संकट से राहत मिल सकेगी।
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उदयपुर न्यूज़: अजमेर के बोर्ड ऑफिस की गली स्थित ओला शोरूम पर गुरुवार को ग्राहकों ने जमकर हंगामा किया और विरोध प्रदर्शन करते हुए जल्द समाधान की मांग की। बड़ी संख्या में पहुंचे ग्राहकों, विशेषकर महिलाओं ने आरोप लगाया कि उनकी इलेक्ट्रिक स्कूटी खराब होने के बाद सात महीने पहले सर्विस के लिए जमा कराई गई थी, लेकिन आज तक वाहन वापस नहीं मिला। उनका कहना है कि वे लगातार शोरूम के चक्कर लगा रही हैं, लेकिन हर बार केवल आश्वासन दिया जाता है। फोन करने पर भी संतोषजनक जवाब नहीं मिलता। प्रदर्शन के दौरान एक युवक ने आरोप लगाया कि उसके स्कूटर का स्टार्ट बटन बार-बार खराब हो जाता है। शिकायत करने पर केवल बटन बदल दिया जाता है, लेकिन मूल समस्या बनी रहती है। ग्राहकों का कहना है कि उन्होंने कंपनी के उच्च अधिकारियों से भी संपर्क किया, लेकिन वहां से भी कोई ठोस समाधान नहीं मिला। इससे नाराज ग्राहकों ने शोरूम के बाहर प्रदर्शन कर प्रबंधन के रवैये पर सवाल उठाए। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द समस्या का समाधान नहीं किया गया तो वे आंदोलन को और तेज करेंगे। मौके पर काफी देर तक अफरा-तफरी का माहौल बना रहा।
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अजमेर न्यूज़: 1100 वर्ष पूर्व स्थापित मंदिर की बड़ी है मान्यता, दूर दराज से पहुंचते हैं हजारों श्रद्धालु
Read more 31st Aug 2022
अजमेर न्यूज़: 1968 से कस्बे की धार्मिक संस्था श्री ब्रह्म पुष्कर सेवा संघ कर रही है इस अनूठी परंपरा का निर्वहन
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अजमेर न्यूज़: 10 टीमें 8 - 8 वार्डो में जाकर घूम रही गायों का करेंगीं प्राथमिक उपचार
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राष्ट्रीय न्यूज़: अजमेर, 2 जुलाई। राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष श्री वासुदेव देवनानी ने प्रवासी राजस्थानी उद्योगपतियों एवं व्यापारियों से आह्वान किया है कि वे मातृभूमि राजस्थान से जुड़कर निवेश करें तथा प्रदेश के सर्वांगीण विकास में सक्रिय भागीदारी निभाएं। उन्होंने कहा कि राजस्थान आज निवेश, उद्योग, पर्यटन, आधारभूत संरचना एवं व्यापार के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है तथा यहां निवेश की अपार संभावनाएं उपलब्ध हैं। कोलकाता में आयोजित राजस्थान फोरम के कार्यक्रम में विधानसभा अध्यक्ष श्री देवनानी का भव्य अभिनंदन किया गया। कार्यक्रम में राजस्थान फ़ोरम के तत्वावधान में कोलकाता और हावड़ा की लगभग 15 से ज्यादा संस्थाओं ने श्री देवनानी का भव्य स्वागत और सम्मान किया। राजस्थान परिषद के महामंत्री श्री अरुण प्रकाश मल्लावत भी विशेष रूप से उपस्थित थे। इस अवसर पर देश के प्रतिष्ठित उद्योग समूह श्री सीमेंट के श्री हरिमोहन बांगड़ सहित अनेक उद्योगपति, व्यापारी एवं समाजसेवी उपस्थित रहे। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में विकसित भारत की ओर अग्रसर देश श्री देवनानी ने कहा कि देश आज प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में विकास की नई ऊंचाइयों को छू रहा है। वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में पूरे देश में व्यापक स्तर पर कार्य हो रहा है। इस राष्ट्रीय अभियान में प्रवासी राजस्थानी उद्योगपतियों एवं व्यापारियों की भूमिका भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने सभी से इस संकल्प में सहभागी बनने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में आगे बढ़ रहा राजस्थान उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान सुशासन, निवेश, औद्योगिक विकास एवं आधारभूत सुविधाओं के विस्तार के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति कर रहा है। राज्य सरकार की उद्योग एवं निवेश अनुकूल नीतियों तथा ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा देने वाले निर्णयों के कारण राजस्थान निवेशकों की पहली पसंद बनता जा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार उद्योगों को प्रोत्साहन देने, निवेशकों को सरल एवं पारदर्शी प्रक्रियाएं उपलब्ध कराने तथा रोजगार के नए अवसर सृजित करने के लिए प्रतिबद्ध है। ऐसे में प्रवासी राजस्थानी अपने अनुभव, संसाधन एवं पूंजी का उपयोग मातृभूमि के विकास में करें। राजस्थानियों ने देशभर में बढ़ाया सम्मान, अब मातृभूमि की सेवा का समय विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि राजस्थानियों ने देश के प्रत्येक क्षेत्र में अपनी मेहनत, ईमानदारी और उद्यमशीलता से विशिष्ट पहचान बनाई है तथा प्रदेश का गौरव बढ़ाया है। अब समय आ गया है कि प्रवासी राजस्थानी अपने अनुभव और संसाधनों के माध्यम से मातृभूमि राजस्थान की प्रगति में भी सक्रिय योगदान दें। उन्होंने कहा कि राजस्थान आज उद्योग, पर्यटन, शिक्षा, कृषि, अवसंरचना और नवाचार सहित प्रत्येक क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है तथा निवेश के लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध है। कोलकाता प्रवास के दौरान विधानसभा अध्यक्ष श्री देवनानी से अनेक प्रमुख उद्योगपतियों एवं व्यापारियों ने भेंट की। इस दौरान राजस्थान में निवेश, औद्योगिक विस्तार एवं विकास की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा हुई। उपस्थित उद्योगपतियों एवं व्यापारिक प्रतिनिधियों ने राजस्थान के विकास में अपनी सक्रिय भागीदारी निभाने का संकल्प दोहराया। इस अवसर पर इंटरनेशनल वैश्य फेडरेशन (वेस्ट बंगाल), श्री सालासर बालाजी सेवक वृंद (बांधाघाट), प्रेम मिल (कोलकाता), श्री श्याम मंदिर घुसुड़ीधाम, राजस्थान विकास परिषद, श्री बड़ाबाजार लोहापट्टी सेवा समिति, माहेश्वरी सभा (कोलकाता), श्री माहेश्वरी सेवा समिति, मानिकतल्ला चालता बागान लोहापट्टी दुर्गा पूजा कमेट, सुजानगढ़ नागरिक परिषद, श्री बड़ा बाजार लोहा पट्टी सेवा समिति के पदाधिकारी उपस्थित रहे। श्री देवनानी ने की मुख्यमंत्री श्री शुभेन्दु अधिकारी से मुलाकात राजस्थान फोरम द्वारा कोलकाता में आयोजित कार्यक्रम के पश्चात राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने पश्चिम बंगाल विधानसभा में मुख्यमंत्री श्री शुभेन्दु अधिकारी से शिष्टाचार भेंट की। भेंट के दौरान दोनों नेताओं के बीच समसामयिक विषयों, लोकतांत्रिक मूल्यों तथा विभिन्न राज्यों के विकास से जुड़े मुद्दों पर सौहार्दपूर्ण चर्चा हुई। उन्होंने मुख्यमंत्री को राजस्थान आने के न्यौता दिया। श्री देवनानी ने राजस्थान फोरम द्वारा आयोजित कार्यक्रम की सराहना करते हुए प्रवासी राजस्थानियों की सामाजिक एवं सांस्कृतिक भूमिका की भी प्रशंसा की। नवगठित सरकार के विधायकों को दी शुभकामनाएं श्री देवनानी ने इस अवसर पर नवगठित सरकार के विधायकों को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने तथा जनसेवा के प्रति समर्पित भाव से कार्य करने का आह्वान किया। कोलकाता प्रवास के दौरान विधानसभा अध्यक्ष श्री देवनानी विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक एवं व्यावसायिक कार्यक्रमों में भी भाग लेंगे।
Read more 2nd Jul 2026
राष्ट्रीय न्यूज़: अयोध्या। अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित चोरी के मामले को लेकर सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय को पुलिस ने सोमवार देर रात करीब 11:30 बजे अयोध्या के एक होटल में नजरबंद कर दिया। थोड़ी देर बाद उन्हें कृषि विश्वविद्यालय के गेस्ट हाउस ले जाया गया। कांग्रेस सांसद किशोरी लाल शर्मा, तनुज पूनिया और उज्जवल रमण सिंह को भी हाउस अरेस्ट किए जाने की जानकारी सामने आई है। अजय राय के नेतृत्व में कांग्रेस का डेलिगेशन चढ़ावा चोरी के विरोध में अयोध्या पहुंचा था। कांग्रेस नेताओं ने मंगलवार को ट्रस्ट कार्यालय के घेराव का ऐलान किया था। ट्रस्ट कार्यालय घेराव से पहले पुलिस की कार्रवाई कांग्रेस नेताओं के प्रस्तावित घेराव को देखते हुए पुलिस-प्रशासन ने पहले ही सख्त कदम उठाए। अजय राय को देर रात होटल में नजरबंद किया गया और बाद में उन्हें गेस्ट हाउस ले जाया गया। वहीं अन्य कांग्रेस सांसदों और नेताओं की गतिविधियों पर भी पुलिस ने निगरानी रखी। कांग्रेस का आरोप है कि चढ़ावे से जुड़े मामले में निष्पक्ष जांच और जवाबदेही तय होनी चाहिए। पार्टी का कहना है कि श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े विषय पर पारदर्शिता जरूरी है। राम जन्मभूमि मंदिर की ओर कूच कर रहे कार्यकर्ताओं को रोका इस बीच मंगलवार दोपहर करीब 12:30 बजे कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने राम जन्मभूमि मंदिर की ओर कूच किया। पुलिस ने मंदिर से करीब एक किलोमीटर पहले टेढ़ी बाजार क्षेत्र में उन्हें रोक दिया। रोके जाने पर कांग्रेस कार्यकर्ता आक्रोशित हो गए और पुलिस से धक्का-मुक्की करने लगे। स्थिति बिगड़ती देख पुलिस ने हल्का बल प्रयोग किया और कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया। पुलिसकर्मी कार्यकर्ताओं को पकड़कर वाहनों में ले जाते नजर आए। कांग्रेस ने कार्रवाई को बताया दमनकारी कांग्रेस नेताओं ने पुलिस कार्रवाई को लोकतांत्रिक विरोध को दबाने का प्रयास बताया है। पार्टी का कहना है कि चढ़ावा चोरी जैसा मामला करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा है और इस पर सवाल उठाना विपक्ष का अधिकार है। कांग्रेस ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि किसी स्तर पर गड़बड़ी सामने आती है तो जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई हो।
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गुप्त ध्वनि किरणों के साथ ओशो पर किसने हमला किया?...
गुप्त ध्वनि किरणों के साथ ओशो पर किसने हमला किया?... * ओशो के निजी दंत चिकित्सक देवगेट ओशो की मृत्यु से 4 दिन पहले हुई घटनाओं के बारे में बात करते हैं (शरीर को छोड़कर)... * 15 aजनवरी, 1990 को, मेरे जन्मदिन पर, मुझे शुन्यो से एक संदेश मिला: ओशो चाहते थे कि मैं उनके पेट का एक्स-रे ले। हम दंaत कक्ष में मिले। ओशो का शरीर पतला और बेकार लग रहा था, फिर भी मैंने उसे शक्तिशाली रूप से उपस्थित महसूस किया। मुझे शुन्यो से पता था कि वह हर दिन बीस घंटे से अधिक सो रहा था, हर शाम बुद्ध हॉल में कुछ क़ीमती मिनटों के लिए अपनी शारीरिक ऊर्जा को बचा रहा था। ओशो नेa मुझे बताया कि उसके हमलावरों की आवाज़ से उसका शरीर बहुत कमजोर हो गया था। उन्होंने कहा कि उनमें से शायद तीन, दो पुरुष और एक महिला, ध्वनि तरंगों पर ध्यानaa केंद्रित करने और अपने शरीर को लक्षित करने के लिए एक विशेष गठन में बैठे थे। यहां भारत में प्राचीन योगिक प्रथाएं हैं जहां लोग कुछ ध्वनियों, कुछ मंत्रों को जानते हैं, जो लोगों को नुक़सान पहुंचाने के लिए ध्वनि को केंद्रित कर सकते हैं। लेकिन मुझ पर हमला करaaने वाले ये लोग भारतीय नहीं हैं। वे वही लोग हैं जिन्होंने अमेरिका में पहले मुझे मारने की कोशिश की थी। वे तब सफल नहीं हो सके, और अब वे जो शुरू किया उसे पूरा कर ने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने मुझे बोलने से रोकने के लिए ज़हर की कोशिश की लेकिन मैं जारी रखने में कामयाब रहा। अब, पांच साल बाद वे वापस आ गए हैं। उन्होंने पहले बुद्ध हॉल में अपनी ध्वनि किरणों का उपयोग मेरे दिमाग़ पर हमला करने के लिए किया लेकिन मैं अपने दिमाग़ में नहीं हूं। मैं एक नो-मन हूं और उनकी आवाज़ का बहुत कम प्रभाव था। इसलिए उन्होंने अपनी रणनीति बदल दी, अब वे मेरे शरीर पर हमला कर रहे हैं। मेरे गरीब शरीर को उनकी किरणों से कोई सुरक्षा नहीं है। हर दिन यह कमजोर होता जाता है। वे मुझे मार नहीं सकते लेकिन वे मेरे शरीर को नुक़सान पहुंचा सकते हैं। अभी मेरे जिगर के क्षेत्र में बहुत दर्द हो रहा है। क्या आप इसे एक्स-रे कर सकते हैं? दुख की बात है, मैंने समझाया कि मेरी दंत एक्स-रे मशीन शायद अपर्याप्त थी क्योंकि यह केवल दांतों और जबड़े की छोटी फिल्में ले सकती थी, लेकिन हम कोशिश कर सकते थे। अमृतो को हमारे पास सबसे बड़ी एक्स-रे फ़िल्म मिली, जबकि मैंने इसकी बीम को चौड़ा करने के लिए डेंटल एक्स-रे मशीन के साथ जिग्गल किया। मैंने वह करने की कोशिश की जो ओशो पूछ रहा था। मैंने उसके जिगर के क्षेत्र की एक तस्वीर ली और फिर दंत विकास में बड़ी फ़िल्म विकसित करने में कामयाब रहा टैंक जिसे छोटी इंट्रा-ओरल डेंटल फ़िल्मों के लिए डिज़ाइन किया गया था, लेकिन परिणामी छवि धुंधली और अस्पष्ट थी। यह आख़िरी बार था जब मैंने ओशो को उसके भौतिक शरीर में देखा था। 19 जनवरी को शाम 4:30 बजे थे: मैं अपनी प्रेमिका के साथ अपने कमरे में था जब दरवाजे पर एक ज़रूरी दस्तक हुई। मनीषा, पीला और तनावग्रस्त दिख रही थी, ने पूछा कि क्या वह मेरे कमरे के फ़ोन का उपयोग कर सकती है। मुझे पता था कि वह केवल पूछेगी कि क्या कुछ असामान्य हो रहा है। अस्थायी सचिव के रूप में कार्य करते हुए वह इनर सर्कल के सदस्यों को फ़ोन कर रही थी और उन्हें कृष्णा हाउस में एक असाधारण बैठक में तुरंत आने के लिए कह रही थी। ओशो ने पंद्रह महीने पहले इक्कीस लोगों की एक कम्यून प्रबंधन टीम की स्थापना की थी, इसे इनर सर्कल का नाम दिया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका काम कम्यून के दिन-प्रतिदिन चलने का प्रबंधन करना था। मैं मूल चयन में नहीं था, लेकिन कुछ महीने बाद मुझे शामिल होने के लिए कहा गया था। फ़ोन करने के बाद, मनीषा ने कहा, “गीट, तुमने सुना कि मैं दूसरों को क्या बता रहा था। बैठक कृष्णा हाउस की छत पर ब्लू रूम में है। क्या आप वहां तुरंत जा सकते हैं?” इससे पहले कि मैं कोई सवाल पूछ पाता, वह जल्दी से गलियारे में चली गई, स्पष्ट रूप से एक और महत्वपूर्ण कार्य में शामिल थी। मैंने दोपहर के अधिकांश समय अजीब तरह से विपुल महसूस किया था। बाहरी मामलों की उथल-पुथल के बावजूद मैं कई दिनों से उत्साहित महसूस कर रहा था। मेरे दिल में ख़ुशी का एक अकथनीय नृत्य था। अंदर से मुझे उत्साह, आनंद महसूस हुआ। ब्लू रूम में पहुंचने पर, मैंने देखा कि अधिकांश इनर सर्कल पहले से ही वहां इकट्ठा हो चुके थे। माहौल तनावपूर्ण और तनावपूर्ण था। मेरा अपना उत्साह जगह से बाहर लग रहा था। मैं बैठ गया और इंतज़ार किया। कुछ मिनटों के बाद जयेश ने अमृतो के साथ प्रवेश किया। यह देखने के लिए संक्षेप में चारों ओर देखते हुए कि हम सभी मौजूद हैं, उन्होंने एक दृढ़, हालांकि शांत आवाज़ में कहा, “मुझे लगता है कि इसे लपेटने का कोई तरीक़ा नहीं है। मैं आपको सीधे बताऊंगा। ओशो ने कुछ समय पहले लगभग 4:45 बजे अपना शरीर छोड़ दिया था दोपहर।” स्तब्ध, मैंने अपनी घड़ी को देखा। शाम के 5:15 बजे थे। उपस्थित दो या तीन लोग रोने लगे। जयेश ने जल्दी से बीच में टोका, “देखो, मुझे तुम्हारी सारी मदद की ज़रूरत है। कृपया अभी तक अलग न हों। मुझे आप सभी की ज़रूरत है कि ओशो के भेजने को उतना ही सुंदर बनाने में मदद करें जितना वह हकदार है। यह आख़िरी चीज है जो हम उसके लिए कर सकते हैं भौतिक शरीर, चलो इसे अद्भुत बनाते हैं। उसने मुझे ठीक से बताया कि वह कैसे चाहता है कि ऐसा हो। उसने मुझे हर चीज के लिए विस्तृत निर्देश दिए, लेकिन मुझे यहां हर किसी की मदद की ज़रूरत है।” जयेश के शब्दों को सुनकर मेरा पहले का उत्साह सदमे में बदल गया था, लेकिन मैंने ओशो को अपने लोगों के साथ अपने अंतिम उत्सव का आनंद लेने में सक्षम बनाने के लिए हमारी मदद के लिए जयेश की अपील को स्पष्ट रूप से सुना। जैसे ही मैंने ब्लू रूम छोड़ा, जयेश ने मुझे बताया कि ओशो ने अनुरोध किया था कि मैं उनके शरीर को जलते हुए घाटों तक ले जाने के लिए एक वाहक बनूं। गतिविधि और भ्रमित भावनाओं के एक धुंध में मुझे याद है कि ओशो के इस अंतिम उपहार के लिए बेहद आभारी महसूस कर रहा था। - स्वामी देवगीत पुस्तक : ओशो - द फर्स्ट बुद्ध इन द डेंटल चेयर अध्याय: 17 अध्याय का नाम: ओशो का अंतिम दंत नाटक: अधिनियम V अंतिम सुनहरी झलक
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