राजस्थान न्यूज़: जयपुर। राजस्थान कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने राज्य की भाजपा सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए कई मुद्दों पर तीखे राजनीतिक हमले किए हैं। जयपुर में कांग्रेस ओबीसी (OBC) विभाग के सम्मेलन के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए डोटासरा ने शिक्षा विभाग में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार होने, तबादलों के नाम पर अवैध वसूली किए जाने और विपक्ष के प्रति राजनीतिक द्वेष भावना से काम करने के गंभीर आरोप सरकार पर मढ़े हैं। इसके साथ ही उन्होंने आरएलपी नेता हनुमान बेनीवाल के समर्थकों पर दर्ज मुकदमों के तरीके पर भी सवाल खड़े करते हुए इसे पूरी तरह गलत बताया और सरकार से इस मामले में निष्पक्ष कार्रवाई करने की मांग की। शिक्षा विभाग में 'तबादला उद्योग': डोटासरा की चुनौती- 'हिम्मत है तो मंत्री के करीबियों के फोन टैप कराए सरकार' डोटासरा ने वर्तमान शिक्षा मंत्री मदन दिलावर और सरकार को आड़े हाथों लेते हुए आरोप लगाया कि शिक्षा विभाग में इस समय सबसे बदतर हालात हैं। दलालों के जरिए वसूली: उन्होंने कहा कि शिक्षकों के तबादलों में जमकर पैसा लिया गया है और शिक्षा मंत्री के इर्द-गिर्द रहने वाले नजदीकी लोग 'दलाल' बनकर खुलेआम वसूली में लगे हैं। समसा (SAMSA) में इंटरव्यू वाली पोस्टों पर भी मोटी रकम लेकर पोस्टिंग दी जा रही है। फोन टैपिंग की चुनौती: डोटासरा ने सरकार को ललकारते हुए कहा कि अगर सरकार में थोड़ी भी हिम्मत है, तो वह शिक्षा मंत्री के पीए (PA), पीएसओ (PSO) और उनके करीबियों के फोन टैप करवाकर देख ले, दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। RSS पर निशाना: उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि इस तबादला उद्योग में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) 'तांडव नृत्य' कर रहा है। भ्रष्टाचार के इस खुले खेल से खुद बीजेपी के विधायक तक परेशान हैं और रो रहे हैं। वसुंधरा राजे पर बयान: 'वे दुखी आत्मा हैं, और दुखी आत्मा से हमेशा सच निकलता है' पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे द्वारा हाल ही में दिए गए बयान—'राजनीति और सामाजिक रिश्तों को अलग रखना चाहिए'—पर प्रतिक्रिया देते हुए डोटासरा ने कहा कि वसुंधरा राजे इस समय एक "दुखी आत्मा" हैं। उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि दुखी आत्मा के मुंह से हमेशा सच ही निकलता है। कल जब उन्होंने मंच से राजेंद्र राठौड़ और वर्तमान मुख्यमंत्री की तरफ देखा, तो उनकी कोई बात उन्हें चुभ गई थी। उनके खिलाफ कौन षड्यंत्र कर रहा है, यह सब जानते हैं। लेकिन वसुंधरा राजे ने जो बातें कहीं, वे बिल्कुल सही और अच्छी हैं। डोटासरा ने कहा कि राजनीति में इतना भी वैर-भाव या दुश्मनी नहीं होनी चाहिए कि कल को हम एक-दूसरे से आंखें भी न मिला सकें। राजनीतिक द्वेष का आरोप: 'मेरे रिश्तेदारों और पहचान वालों का कर दिया बाड़मेर-बांसवाड़ा ट्रांसफर' सरकार पर राजनीतिक बदले की भावना से काम करने का आरोप लगाते हुए डोटासरा ने पूर्व विधायक पंडित रामकिशन शर्मा की बात का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि पंडित रामकिशन ने कल बिल्कुल सही कहा था कि पहले राजनीति में वैचारिक विरोध होने के बावजूद नेता साथ बैठकर चाय पी लिया करते थे, लेकिन आजकल का माहौल ऐसा हो गया है कि विरोधी गाड़ियां टकराकर एक्सीडेंट तक करवा दें। अपनी बात रखते हुए डोटासरा ने दावा किया कि चूंकि वे मुख्यमंत्री और सरकार की कमियों के खिलाफ मुखर होकर बोलते हैं, इसलिए सरकार ने बदले की कार्रवाई करते हुए उनके सभी पहचान वालों, मित्रों और रिश्तेदारों (जो सरकारी सेवा में हैं) का तबादला दूर-दराज के इलाकों जैसे बांसवाड़ा और बाड़मेर में कर दिया है।
Read more 16th Jul 2026
राजस्थान न्यूज़: जयपुर। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने कहा कि राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से अधिसूचना जारी होते ही भाजपा पंचायत और निकाय चुनाव लड़ने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा कि पार्टी न्यायपालिका का सर्वोच्च सम्मान करती है और न्यायालय के प्रत्येक आदेश की नियमानुसार पालना की जाएगी। राठौड़ ने भाजपा पर चुनाव से बचने के लगाए जा रहे आरोपों को निराधार बताया। उन्होंने दावा किया कि पार्टी ने अब तक हुए उपचुनावों में करीब 85 प्रतिशत सीटों पर जीत दर्ज की है। ऐसे में भाजपा के चुनाव से पीछे हटने का कोई प्रश्न नहीं है। सरकार और संगठन दोनों चुनावी तैयारियों में सक्रिय हैं और केवल औपचारिक अधिसूचना का इंतजार किया जा रहा है। ‘अदालत के आदेश की अवमानना नहीं करेगी भाजपा’ मदन राठौड़ ने कहा कि भाजपा न्यायालय के निर्देशों का सम्मान करती है और चुनाव से जुड़ी सभी प्रक्रियाएं कानून के अनुसार पूरी की जाएंगी। पार्टी की ओर से किसी भी स्थिति में अदालत की अवमानना नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग की ओर से चुनाव कार्यक्रम घोषित होते ही प्रत्याशी चयन, संगठनात्मक समन्वय और प्रचार से संबंधित आगामी प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। वार्ड गठन और ओबीसी आरक्षण पर रखी बात निकाय चुनावों से जुड़े परिसीमन और वार्ड गठन के सवाल पर राठौड़ ने कहा कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के समय वार्डों का गठन अव्यवस्थित तरीके से किया गया था। वर्तमान सरकार ने व्यवस्था में सुधार करने का प्रयास किया है। ओबीसी आरक्षण से जुड़े विषय पर उन्होंने कहा कि आयोग की प्रक्रिया में कुछ तकनीकी अड़चनें आई हैं। इनका शीघ्र समाधान होने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप सभी आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी करेगी। डोटासरा के आरोपों पर पलटवार कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए मदन राठौड़ ने कहा कि भाजपा सरकार में स्थानांतरण सहित सभी प्रशासनिक कार्य पारदर्शिता के साथ किए जा रहे हैं। उन्होंने किसी प्रकार के लेन-देन के आरोपों को खारिज किया। राठौड़ ने कहा कि जरूरतमंद लोगों के कार्य प्राथमिकता के आधार पर किए जा रहे हैं। शिक्षकों की समस्याओं के समाधान के लिए भी सरकार लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस शासन के दौरान तबादलों को लेकर जिस प्रकार की शिकायतें सामने आती थीं, उसी आधार पर डोटासरा वर्तमान सरकार पर आरोप लगा रहे हैं। भाजपा सरकार में निर्णय पारदर्शिता और आवश्यकता के आधार पर लिए जाते हैं। आपातकाल के मुद्दे पर कांग्रेस को घेरा आपातकाल से संबंधित कांग्रेस के आरोपों पर राठौड़ ने कहा कि देश ने वास्तविक आपातकाल पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के शासनकाल में देखा था। उस समय नागरिक स्वतंत्रताओं पर प्रतिबंध लगाए गए, विपक्षी नेताओं और अन्य लोगों को जेलों में बंद किया गया तथा जबरन नसबंदी जैसी कार्रवाइयां हुईं। उन्होंने कहा कि वर्तमान भाजपा सरकार संविधान, कानून के शासन और नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। प्रदेश में कानून-व्यवस्था मजबूत है और विकास कार्य तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। ‘आरएसएस सामाजिक और सांस्कृतिक संगठन’ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े सवाल पर भाजपा प्रदेशाध्यक्ष ने कहा कि आरएसएस एक सामाजिक और सांस्कृतिक संगठन है, जिसका उद्देश्य राष्ट्रभक्ति, अनुशासन और सामाजिक समरसता से युक्त नागरिकों का निर्माण करना है। उन्होंने कहा कि भाजपा एक राजनीतिक दल है, जबकि आरएसएस समाज और राष्ट्र निर्माण के क्षेत्र में कार्य करता है। संगठन के बारे में पूरी जानकारी के बिना टिप्पणी करना उचित नहीं है। राठौड़ ने कहा कि महात्मा गांधी भी आरएसएस के एक कार्यक्रम में शामिल हुए थे और वहां सामाजिक समरसता के वातावरण की सराहना की थी। उन्होंने आरएसएस को राष्ट्रवादी और निष्कलंक संगठन बताते हुए कहा कि डोटासरा चाहें तो संघ के कार्यक्रमों में जाकर उसकी कार्यप्रणाली को समझ सकते हैं। विदेशी मंचों पर देश की आलोचना पर आपत्ति विदेशी मंचों पर भारतीय राजनीति और संस्थाओं की आलोचना से जुड़े सवाल पर राठौड़ ने कहा कि राजनीतिक नेताओं को अपनी बात देश के भीतर सक्षम संवैधानिक और लोकतांत्रिक मंचों पर तथ्यों के साथ रखनी चाहिए। उन्होंने राहुल गांधी पर विदेशों में भारत की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया। राठौड़ ने कहा कि अन्य राजनीतिक दलों के नेताओं को भी विदेशी मंचों का उपयोग देश की छवि खराब करने के लिए नहीं करना चाहिए। उनके अनुसार, ऐसा करना राजनीतिक प्रसिद्धि हासिल करने का माध्यम नहीं बनना चाहिए।
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राजस्थान न्यूज़: जयपुर। राजस्थान में लंबित पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों को लेकर हाईकोर्ट ने राज्य निर्वाचन आयोग, राज्य सरकार और ओबीसी आयोग से स्पष्ट समयबद्ध कार्यक्रम मांगा है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस संजीत पुरोहित की खंडपीठ ने गुरुवार को सुनवाई करते हुए राज्य निर्वाचन आयोग को सोमवार तक चुनाव की प्रस्तावित तारीख बताने के निर्देश दिए। अदालत ने ओबीसी आयोग से भी यह स्पष्ट करने को कहा कि वह अपनी रिपोर्ट कब तक प्रस्तुत करेगा। वहीं, राज्य सरकार को आरक्षण संबंधी लॉटरी निकालने की निश्चित तारीख बतानी होगी। हाईकोर्ट पहले ही राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग को 31 जुलाई तक पंचायत और निकाय चुनाव कराने का आदेश दे चुका है। राज्य चुनाव आयुक्त और ओबीसी आयोग के सचिव हुए पेश सुनवाई के दौरान राज्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह और ओबीसी आयोग के सदस्य सचिव अदालत के समक्ष उपस्थित रहे। पिछली सुनवाई में चुनाव प्रक्रिया शुरू नहीं होने पर हाईकोर्ट ने दोनों अधिकारियों को तलब किया था। अदालत ने राज्य निर्वाचन आयुक्त से पूछा कि पूर्व में निर्धारित समय-सीमा के बावजूद चुनाव कार्यक्रम क्यों जारी नहीं किया गया। खंडपीठ ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि न्यायालय के आदेशों की लगातार पालना नहीं होने से अवमानना की स्थिति बन रही है। चुनाव में देरी पर अदालत पहले भी सरकार और संबंधित आयोगों के कामकाज को लेकर कड़ी नाराजगी जता चुकी है। चुनाव आयुक्त बोले—तैयारी पूरी, आरक्षण लॉटरी का इंतजार राज्य निर्वाचन आयुक्त ने अदालत को बताया कि आयोग की चुनाव संबंधी तैयारियां पूरी हैं। आयोग को राज्य सरकार की ओर से आरक्षण का वर्गीकरण और लॉटरी प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार है। उन्होंने कहा कि सरकार आरक्षण की लॉटरी निकालकर आवश्यक विवरण आयोग को उपलब्ध करा दे तो दो दिन के भीतर चुनाव प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। आयोग ने चुनाव में देरी का प्रमुख कारण आरक्षण और संबंधित प्रशासनिक प्रक्रिया लंबित होना बताया। ओबीसी आयोग से पूछा—समय पर रिपोर्ट क्यों नहीं दी हाईकोर्ट ने ओबीसी आयोग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। अदालत ने कहा कि जब आयोग का गठन 9 मई 2025 को तीन महीने के लिए किया गया था तो निर्धारित अवधि में रिपोर्ट क्यों नहीं दी गई। खंडपीठ ने मौखिक टिप्पणी की कि यदि आयोग निर्धारित कार्य नहीं कर सकता तो उसे स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। अदालत ने आयोग को सोमवार तक रिपोर्ट प्रस्तुत करने की निश्चित तारीख बताने के निर्देश दिए। प्रदेश में ओबीसी आरक्षण के लिए आवश्यक आंकड़े जुटाने की प्रक्रिया हाल में भी जारी रही है। इसी रिपोर्ट के आधार पर पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों में आरक्षण का नया वर्गीकरण किया जाना है। सरकार को बतानी होगी लॉटरी की तारीख अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह सोमवार तक बताए कि आरक्षण निर्धारण के लिए लॉटरी कब निकाली जाएगी। सरकार द्वारा लॉटरी प्रक्रिया पूरी करने के बाद राज्य निर्वाचन आयोग वार्ड और पदवार आरक्षण के आधार पर चुनाव कार्यक्रम जारी कर सकेगा। हाईकोर्ट ने स्पष्ट संकेत दिया कि अब सामान्य या अनिश्चित जवाब स्वीकार नहीं किए जाएंगे। सरकार, निर्वाचन आयोग और ओबीसी आयोग को अपने-अपने हिस्से की प्रक्रिया के लिए ठोस तारीख प्रस्तुत करनी होगी।
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उदयपुर न्यूज़: शहर के सिविल लाइन थाना क्षेत्र में 75 वर्षीय बुजुर्ग महिला के हाथ से सोने की दो चूड़ियां पार होने का मामला सामने आया है। घटना कांता मारवाह मार्ग, पुलिस लाइन क्षेत्र की बताई जा रही है। पीड़िता के भतीजे ने सिविल लाइन थाने में रिपोर्ट देकर बाइक सवार बदमाशों पर वारदात को अंजाम देने का आरोप लगाया है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस के अनुसार कांता मारवाह मार्ग पुलिस लाइन अजमेर निवासी जितेन्द्र नारवानी पुत्र चिमनदास नारवानी ने रिपोर्ट दर्ज कराई है। रिपोर्ट में बताया गया कि उनकी चाची मीना नारवानी उम्र 75 वर्ष घर से पीछे वाली गली में गाय को रोटी खिलाने के लिए निकली थीं। गली में गाय नहीं मिलने पर वे मुख्य सड़क की ओर पुलिस लाइन चौराहे की तरफ जाने लगीं। इसी दौरान बाइक सवार 2 से 3 युवक उनके पीछे चलने लगे। आरोप है कि इनमें से एक युवक बाइक से उतरकर बुजुर्ग महिला के साथ-साथ चलने लगा और उनसे बातचीत करने की कोशिश करने लगा। कुछ देर बाद महिला को ऐसा महसूस हुआ कि उनकी आंखें बंद हो रही हैं और उन्हें ठीक से कुछ याद नहीं रहा। करीब पांच मिनट बाद जब महिला को होश आया तो उनके हाथों में पहनी सोने की दोनों चूड़ियां गायब थीं। इसी बीच बाइक सवार युवक मौके से फरार हो चुके थे। घटना से घबराई बुजुर्ग महिला घर लौटीं और परिजनों को पूरी बात बताई। इसके बाद परिजनों ने सिविल लाइन थाने पहुंचकर रिपोर्ट दर्ज कराई। रिपोर्ट में बाइक सवार युवकों पर सोने की चूड़ियां चोरी करने का आरोप लगाया गया है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच एएसआई कैलाश चंद को सौंपी है। फिलहाल पुलिस आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगालने और संदिग्ध युवकों की पहचान करने में जुटी है। बुजुर्ग महिला के साथ हुई इस घटना के बाद क्षेत्र में लोगों में चिंता का माहौल है। परिजनों ने पुलिस से जल्द आरोपियों की पहचान कर गिरफ्तारी और चोरी हुई ज्वेलरी बरामद करने की मांग की है।
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उदयपुर न्यूज़: अजमेर के बोर्ड ऑफिस की गली स्थित ओला शोरूम पर गुरुवार को ग्राहकों ने जमकर हंगामा किया और विरोध प्रदर्शन करते हुए जल्द समाधान की मांग की। बड़ी संख्या में पहुंचे ग्राहकों, विशेषकर महिलाओं ने आरोप लगाया कि उनकी इलेक्ट्रिक स्कूटी खराब होने के बाद सात महीने पहले सर्विस के लिए जमा कराई गई थी, लेकिन आज तक वाहन वापस नहीं मिला। उनका कहना है कि वे लगातार शोरूम के चक्कर लगा रही हैं, लेकिन हर बार केवल आश्वासन दिया जाता है। फोन करने पर भी संतोषजनक जवाब नहीं मिलता। प्रदर्शन के दौरान एक युवक ने आरोप लगाया कि उसके स्कूटर का स्टार्ट बटन बार-बार खराब हो जाता है। शिकायत करने पर केवल बटन बदल दिया जाता है, लेकिन मूल समस्या बनी रहती है। ग्राहकों का कहना है कि उन्होंने कंपनी के उच्च अधिकारियों से भी संपर्क किया, लेकिन वहां से भी कोई ठोस समाधान नहीं मिला। इससे नाराज ग्राहकों ने शोरूम के बाहर प्रदर्शन कर प्रबंधन के रवैये पर सवाल उठाए। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द समस्या का समाधान नहीं किया गया तो वे आंदोलन को और तेज करेंगे। मौके पर काफी देर तक अफरा-तफरी का माहौल बना रहा।
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अजमेर न्यूज़: 1100 वर्ष पूर्व स्थापित मंदिर की बड़ी है मान्यता, दूर दराज से पहुंचते हैं हजारों श्रद्धालु
Read more 31st Aug 2022
अजमेर न्यूज़: 1968 से कस्बे की धार्मिक संस्था श्री ब्रह्म पुष्कर सेवा संघ कर रही है इस अनूठी परंपरा का निर्वहन
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अजमेर न्यूज़: 10 टीमें 8 - 8 वार्डो में जाकर घूम रही गायों का करेंगीं प्राथमिक उपचार
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राष्ट्रीय न्यूज़: रायपुर: देशभर में प्रदूषण कम करने और कच्चे तेल के आयात को घटाने के लिए 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित ईंधन यानी E20 पेट्रोल के इस्तेमाल को तेजी से बढ़ावा दिया जा रहा है। इसी बीच छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से E20 पेट्रोल के कारण कार का इंजन पूरी तरह खराब होने का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। इस संवेदनशील मामले पर ऐतिहासिक सुनवाई करते हुए उपभोक्ता अदालत (कंज्यूमर कोर्ट) ने कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड और उसके अधिकृत (ऑथराइज्ड) डीलर को सेवा में गंभीर लापरवाही का दोषी माना है। कोर्ट ने ग्राहक के पक्ष में कड़ा फैसला सुनाते हुए आदेश दिया है कि कंपनी या तो पीड़ित ग्राहक को नई कार दे, अन्यथा वाहन की पूरी कीमत करीब 20.5 लाख रुपए ब्याज और अन्य खर्चों समेत लौटाए। E20 ईंधन से वाहन खराब होने पर ग्राहक को इस तरह का भारी मुआवजा दिए जाने का यह देश का पहला और ऐतिहासिक मामला है। इंजन नहीं था E20 के अनुकूल, फिर भी ग्राहक को धोखे से बेची पुरानी कार मामले की सुनवाई के दौरान कंज्यूमर कोर्ट ने पाया कि बेची गई कार का इंजन E20 फ्यूल (20% एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल) को झेलने के तकनीकी रूप से अनुकूल नहीं था, इसके बावजूद कंपनी और डीलर ने यह बात छिपाकर ग्राहक को गाड़ी बेच दी। इस मामले के पीड़ित डॉ. प्रेमराज देबता ने बताया कि उन्होंने जून 2024 में मारुति सुजुकी की प्रीमियम नेक्सा (NEXA) डीलरशिप से 'ग्रैंड विटारा स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड जेटा प्लस' (Grand Vitara Strong Hybrid Zeta Plus) कार खरीदी थी। कार खरीदते समय डीलर ने उन्हें भरोसा दिया था कि यह गाड़ी दिसंबर 2023 की मैन्युफैक्चरिंग (निर्मित) है। हालांकि, बाद में जब विवाद बढ़ा और उपभोक्ता आयोग के समक्ष रिकॉर्ड पेश हुए, तो एक और बड़ा धोखा सामने आया। रिकॉर्ड के अनुसार, वह कार वास्तव में जनवरी 2023 में मैन्युफैक्चर हुई थी, यानी डीलर ने ग्राहक को करीब डेढ़ साल पुराना स्टॉक धोखे से बेच दिया था। 5 महीने बाद अचानक बंद हुई हाइब्रिड कार, टैंक से निकला सफेद पदार्थ चूंकि डॉ. प्रेमराज देबता को अपने पेशे के सिलसिले में रोजाना करीब 150 से 200 किलोमीटर तक का लंबा सफर तय करना पड़ता था, इसीलिए उन्होंने बेहतर माइलेज के उद्देश्य से मारुति की महंगी स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड गाड़ी का चयन किया था। शुरुआती 5 महीनों तक तो वाहन का परफॉर्मेंस ठीक रहा, लेकिन 11 नवंबर 2024 को अचानक सफर के दौरान कार के डैशबोर्ड पर 'इंजन मालफंक्शन' (Engine Malfunction) का रेड अलर्ट आ गया और चलती गाड़ी बीच सड़क पर ही पूरी तरह बंद हो गई। इसके बाद कार को टो करके डीलरशिप के वर्कशॉप ले जाया गया। डीलर ने लगाया मिलावटी पेट्रोल का आरोप, पेट्रोल पंप की जांच में ईंधन निकला सही वर्कशॉप में जब तकनीकी जांच की गई, तो डीलरशिप के मैकेनिक्स और अधिकारियों ने कार की खराबी का ठीकरा मिलावटी पेट्रोल पर फोड़ दिया। उन्होंने कार का फ्यूल टैंक खाली किया। टैंक से निकाले गए पेट्रोल की जब जांच की गई, तो उसके नीचे एक अलग ही तरह का गाढ़ा सफेद पदार्थ जमा हुआ मिला (जो कि असल में पेट्रोल में मिश्रित एथेनॉल के इंजन पार्ट्स से रिएक्शन के कारण अलग होने से बना था)। इसके बाद डॉ. देबता ने तुरंत संबंधित पेट्रोल पंप और कार कंपनी से लिखित शिकायत दर्ज कराई। हालांकि, जब पेट्रोल पंप के ईंधन की आधिकारिक लैब जांच की गई, तो वहां का पेट्रोल पूरी तरह मानकों के अनुरूप और सही पाया गया। इसके बावजूद, वर्कशॉप से ठीक होकर आने के बाद भी डॉ. देबता की कार बार-बार तकनीकी खराबी के कारण बंद होती रही और उसका इंजन जवाब दे गया। 45 दिन का अल्टीमेटम: E20 कंपैटिबल नई कार दे कंपनी, वरना चुकाए पूरा हर्जाना परेशान होकर डॉ. प्रेमराज ने कंज्यूमर कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जहां तकनीकी विशेषज्ञों और दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने माना कि यह कार E20 ईंधन के अनुकूल नहीं थी और पुराना मॉडल होने के कारण एथेनॉल मिश्रण ने इसके इंजन को तबाह कर दिया। कंज्यूमर कोर्ट ने अपने सख्त आदेश में मारुति सुजुकी और डीलर को 45 दिनों का अल्टीमेटम दिया है। कोर्ट ने कहा है कि इस समयावधि के भीतर ग्राहक को उसी मॉडल की बिल्कुल नई कार दी जाए, जो पूरी तरह E20 फ्यूल कंपैटिबल (अनुकूल) हो। यदि कंपनी 45 दिनों में नई कार देने में विफल रहती है, तो उसे अनिवार्य रूप से वाहन की पूरी ऑन-रोड कीमत (लगभग 20.5 लाख रुपए), अदालती कार्रवाई का खर्च और मानसिक प्रताड़ना का हर्जाना ग्राहक के बैंक खाते में ट्रांसफर करना होगा।
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राष्ट्रीय न्यूज़: दिल्ली। भारतीय रेलवे की ऑनलाइन टिकट बुकिंग वेबसाइट IRCTC का नया बीटा वर्जन बुधवार रात 9 बजे लॉन्च कर दिया गया। यात्री मौजूदा IRCTC वेबसाइट के होमपेज पर उपलब्ध बीटा लिंक के माध्यम से नए पोर्टल का उपयोग कर सकते हैं। इसके साथ ही यूजर्स नए डिजाइन, सुविधाओं और टिकट बुकिंग के अनुभव को लेकर अपना फीडबैक भी दे सकेंगे।नए बीटा पोर्टल को पहले के मुकाबले अधिक साफ, सरल और उपयोगकर्ता के अनुकूल बनाया गया है। रेलवे का उद्देश्य टिकट बुकिंग के दौरान आने वाले अनावश्यक पॉप-अप, बार-बार कैप्चा और जटिल चरणों को कम कर यात्रियों को तेज और सुविधाजनक अनुभव देना है। यूजर्स से मिलने वाले सुझावों के आधार पर पोर्टल में आगे और सुधार किए जाएंगे। MNIT के छात्रों की शिकायत के बाद शुरू हुआ बदलाव रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने जून में जयपुर स्थित मालवीय राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान यानी MNIT के दौरे के दौरान विद्यार्थियों से संवाद किया था। इस दौरान छात्रों ने IRCTC की पुरानी वेबसाइट की धीमी गति, जटिल टिकट बुकिंग प्रक्रिया, बार-बार दिखाई देने वाले कैप्चा और यूजर इंटरफेस से जुड़ी समस्याएं बताई थीं। छात्रों की शिकायतों पर रेल मंत्री ने वेबसाइट को 15 जुलाई तक नया स्वरूप देने का आश्वासन दिया था। इसके बाद IRCTC और सेंटर फॉर रेलवे इन्फॉर्मेशन सिस्टम्स के अधिकारियों ने नए पोर्टल पर काम शुरू किया। लॉन्च से पहले छात्रों ने किया था बीटा वर्जन का रिव्यू वेबसाइट में बदलाव का सुझाव देने वाले MNIT जयपुर के छात्रों को 10 जुलाई को नए बीटा वर्जन का पूर्वावलोकन कराया गया था। IRCTC और CRIS के अधिकारियों ने विद्यार्थियों से डिजाइन, नेविगेशन और टिकट बुकिंग प्रक्रिया पर प्रतिक्रिया मांगी थी। रेलवे ने कहा था कि छात्रों के सुझावों के आधार पर पोर्टल को अधिक उपयोगी और सहज बनाने का प्रयास किया जा रहा है। बीटा परीक्षण का उद्देश्य खामियों की पहचान कर पूर्ण संस्करण लॉन्च होने से पहले उन्हें दूर करना है।
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गुप्त ध्वनि किरणों के साथ ओशो पर किसने हमला किया?...
गुप्त ध्वनि किरणों के साथ ओशो पर किसने हमला किया?... * ओशो के निजी दंत चिकित्सक देवगेट ओशो की मृत्यु से 4 दिन पहले हुई घटनाओं के बारे में बात करते हैं (शरीर को छोड़कर)... * 15 aजनवरी, 1990 को, मेरे जन्मदिन पर, मुझे शुन्यो से एक संदेश मिला: ओशो चाहते थे कि मैं उनके पेट का एक्स-रे ले। हम दंaत कक्ष में मिले। ओशो का शरीर पतला और बेकार लग रहा था, फिर भी मैंने उसे शक्तिशाली रूप से उपस्थित महसूस किया। मुझे शुन्यो से पता था कि वह हर दिन बीस घंटे से अधिक सो रहा था, हर शाम बुद्ध हॉल में कुछ क़ीमती मिनटों के लिए अपनी शारीरिक ऊर्जा को बचा रहा था। ओशो नेa मुझे बताया कि उसके हमलावरों की आवाज़ से उसका शरीर बहुत कमजोर हो गया था। उन्होंने कहा कि उनमें से शायद तीन, दो पुरुष और एक महिला, ध्वनि तरंगों पर ध्यानaa केंद्रित करने और अपने शरीर को लक्षित करने के लिए एक विशेष गठन में बैठे थे। यहां भारत में प्राचीन योगिक प्रथाएं हैं जहां लोग कुछ ध्वनियों, कुछ मंत्रों को जानते हैं, जो लोगों को नुक़सान पहुंचाने के लिए ध्वनि को केंद्रित कर सकते हैं। लेकिन मुझ पर हमला करaaने वाले ये लोग भारतीय नहीं हैं। वे वही लोग हैं जिन्होंने अमेरिका में पहले मुझे मारने की कोशिश की थी। वे तब सफल नहीं हो सके, और अब वे जो शुरू किया उसे पूरा कर ने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने मुझे बोलने से रोकने के लिए ज़हर की कोशिश की लेकिन मैं जारी रखने में कामयाब रहा। अब, पांच साल बाद वे वापस आ गए हैं। उन्होंने पहले बुद्ध हॉल में अपनी ध्वनि किरणों का उपयोग मेरे दिमाग़ पर हमला करने के लिए किया लेकिन मैं अपने दिमाग़ में नहीं हूं। मैं एक नो-मन हूं और उनकी आवाज़ का बहुत कम प्रभाव था। इसलिए उन्होंने अपनी रणनीति बदल दी, अब वे मेरे शरीर पर हमला कर रहे हैं। मेरे गरीब शरीर को उनकी किरणों से कोई सुरक्षा नहीं है। हर दिन यह कमजोर होता जाता है। वे मुझे मार नहीं सकते लेकिन वे मेरे शरीर को नुक़सान पहुंचा सकते हैं। अभी मेरे जिगर के क्षेत्र में बहुत दर्द हो रहा है। क्या आप इसे एक्स-रे कर सकते हैं? दुख की बात है, मैंने समझाया कि मेरी दंत एक्स-रे मशीन शायद अपर्याप्त थी क्योंकि यह केवल दांतों और जबड़े की छोटी फिल्में ले सकती थी, लेकिन हम कोशिश कर सकते थे। अमृतो को हमारे पास सबसे बड़ी एक्स-रे फ़िल्म मिली, जबकि मैंने इसकी बीम को चौड़ा करने के लिए डेंटल एक्स-रे मशीन के साथ जिग्गल किया। मैंने वह करने की कोशिश की जो ओशो पूछ रहा था। मैंने उसके जिगर के क्षेत्र की एक तस्वीर ली और फिर दंत विकास में बड़ी फ़िल्म विकसित करने में कामयाब रहा टैंक जिसे छोटी इंट्रा-ओरल डेंटल फ़िल्मों के लिए डिज़ाइन किया गया था, लेकिन परिणामी छवि धुंधली और अस्पष्ट थी। यह आख़िरी बार था जब मैंने ओशो को उसके भौतिक शरीर में देखा था। 19 जनवरी को शाम 4:30 बजे थे: मैं अपनी प्रेमिका के साथ अपने कमरे में था जब दरवाजे पर एक ज़रूरी दस्तक हुई। मनीषा, पीला और तनावग्रस्त दिख रही थी, ने पूछा कि क्या वह मेरे कमरे के फ़ोन का उपयोग कर सकती है। मुझे पता था कि वह केवल पूछेगी कि क्या कुछ असामान्य हो रहा है। अस्थायी सचिव के रूप में कार्य करते हुए वह इनर सर्कल के सदस्यों को फ़ोन कर रही थी और उन्हें कृष्णा हाउस में एक असाधारण बैठक में तुरंत आने के लिए कह रही थी। ओशो ने पंद्रह महीने पहले इक्कीस लोगों की एक कम्यून प्रबंधन टीम की स्थापना की थी, इसे इनर सर्कल का नाम दिया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका काम कम्यून के दिन-प्रतिदिन चलने का प्रबंधन करना था। मैं मूल चयन में नहीं था, लेकिन कुछ महीने बाद मुझे शामिल होने के लिए कहा गया था। फ़ोन करने के बाद, मनीषा ने कहा, “गीट, तुमने सुना कि मैं दूसरों को क्या बता रहा था। बैठक कृष्णा हाउस की छत पर ब्लू रूम में है। क्या आप वहां तुरंत जा सकते हैं?” इससे पहले कि मैं कोई सवाल पूछ पाता, वह जल्दी से गलियारे में चली गई, स्पष्ट रूप से एक और महत्वपूर्ण कार्य में शामिल थी। मैंने दोपहर के अधिकांश समय अजीब तरह से विपुल महसूस किया था। बाहरी मामलों की उथल-पुथल के बावजूद मैं कई दिनों से उत्साहित महसूस कर रहा था। मेरे दिल में ख़ुशी का एक अकथनीय नृत्य था। अंदर से मुझे उत्साह, आनंद महसूस हुआ। ब्लू रूम में पहुंचने पर, मैंने देखा कि अधिकांश इनर सर्कल पहले से ही वहां इकट्ठा हो चुके थे। माहौल तनावपूर्ण और तनावपूर्ण था। मेरा अपना उत्साह जगह से बाहर लग रहा था। मैं बैठ गया और इंतज़ार किया। कुछ मिनटों के बाद जयेश ने अमृतो के साथ प्रवेश किया। यह देखने के लिए संक्षेप में चारों ओर देखते हुए कि हम सभी मौजूद हैं, उन्होंने एक दृढ़, हालांकि शांत आवाज़ में कहा, “मुझे लगता है कि इसे लपेटने का कोई तरीक़ा नहीं है। मैं आपको सीधे बताऊंगा। ओशो ने कुछ समय पहले लगभग 4:45 बजे अपना शरीर छोड़ दिया था दोपहर।” स्तब्ध, मैंने अपनी घड़ी को देखा। शाम के 5:15 बजे थे। उपस्थित दो या तीन लोग रोने लगे। जयेश ने जल्दी से बीच में टोका, “देखो, मुझे तुम्हारी सारी मदद की ज़रूरत है। कृपया अभी तक अलग न हों। मुझे आप सभी की ज़रूरत है कि ओशो के भेजने को उतना ही सुंदर बनाने में मदद करें जितना वह हकदार है। यह आख़िरी चीज है जो हम उसके लिए कर सकते हैं भौतिक शरीर, चलो इसे अद्भुत बनाते हैं। उसने मुझे ठीक से बताया कि वह कैसे चाहता है कि ऐसा हो। उसने मुझे हर चीज के लिए विस्तृत निर्देश दिए, लेकिन मुझे यहां हर किसी की मदद की ज़रूरत है।” जयेश के शब्दों को सुनकर मेरा पहले का उत्साह सदमे में बदल गया था, लेकिन मैंने ओशो को अपने लोगों के साथ अपने अंतिम उत्सव का आनंद लेने में सक्षम बनाने के लिए हमारी मदद के लिए जयेश की अपील को स्पष्ट रूप से सुना। जैसे ही मैंने ब्लू रूम छोड़ा, जयेश ने मुझे बताया कि ओशो ने अनुरोध किया था कि मैं उनके शरीर को जलते हुए घाटों तक ले जाने के लिए एक वाहक बनूं। गतिविधि और भ्रमित भावनाओं के एक धुंध में मुझे याद है कि ओशो के इस अंतिम उपहार के लिए बेहद आभारी महसूस कर रहा था। - स्वामी देवगीत पुस्तक : ओशो - द फर्स्ट बुद्ध इन द डेंटल चेयर अध्याय: 17 अध्याय का नाम: ओशो का अंतिम दंत नाटक: अधिनियम V अंतिम सुनहरी झलक
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