राजस्थान न्यूज़: जयपुर। राजस्थान रिफाइनरी प्रोजेक्ट के तहत प्रदेश में एचपीसीएल द्वारा 304 नए पेट्रोल पंप खोले जाएंगे। इसके लिए राज्यभर में स्थान चिह्नित कर लिए गए हैं। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने शनिवार को सचिवालय में एचपीसीएल और एचपीसीएल राजस्थान रिफाइनरी लिमिटेड यानी एचआरआरएल के अधिकारियों के साथ बैठक कर इस संबंध में प्रगति की समीक्षा की। राजस्थान रिफाइनरी को प्रदेश की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट माना जा रहा है। करीब 80 हजार करोड़ रुपए के इस प्रोजेक्ट से राज्य में नए निवेश, उद्योग और रोजगार संवर्धन को बड़ा बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इसी कड़ी में एचपीसीएल प्रदेश में नए रिटेल आउटलेट्स स्थापित करेगा, जिन पर लगभग 400 करोड़ रुपए का निवेश किया जाएगा। 31 जुलाई तक तैयार होगी नई नीति बैठक में निर्णय लिया गया कि 31 जुलाई तक इस संबंध में नई नीति तैयार की जाएगी। इस नीति के तहत राज्य सरकार सरकारी भूमि एचपीसीएल को लीज पर उपलब्ध कराएगी, ताकि नए पेट्रोल पंप स्थापित किए जा सकें। इससे प्रदेश के विभिन्न जिलों में ईंधन आपूर्ति नेटवर्क मजबूत होगा और आमजन को बेहतर सुविधा मिल सकेगी। सरकार और एचपीसीएल के बीच समन्वय के साथ नए रिटेल आउटलेट्स की स्थापना को समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि भूमि, नीति और आवश्यक अनुमतियों से जुड़ी प्रक्रिया में तेजी लाई जाए। सरकारी खरीद में प्रेफरेंशियल सप्लायर का दर्जा देने का अनुरोध बैठक में एचपीसीएल और एचआरआरएल ने राज्य सरकार से अनुरोध किया कि आरटीपीपी अधिनियम के तहत सरकारी विभागों द्वारा ईंधन खरीद में उन्हें प्रेफरेंशियल सप्लायर का दर्जा दिया जाए। इसका उद्देश्य राजस्थान में स्थित एचआरआरएल रिफाइनरी की उत्पादन क्षमता का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करना है। राज्य सरकार ने एचपीसीएल और एचआरआरएल के साथ मिलकर इन पहलों को समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई। अधिकारियों ने कहा कि रिफाइनरी और उससे जुड़े निवेश से प्रदेश में औद्योगिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी। बैठक में कई वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद हाइब्रिड मोड पर हुई इस बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव खान अपर्णा अरोड़ा, अतिरिक्त मुख्य सचिव गृह भास्कर ए. सावंत, अतिरिक्त मुख्य सचिव उच्च शिक्षा कुलदीप रांका, अतिरिक्त मुख्य सचिव यूडीएच आलोक गुप्ता, प्रमुख सचिव वित्त वैभव गलारिया, प्रमुख सचिव राजस्व टी. रविकांत और एचपीसीएल के विपणन निदेशक अमित गर्ग सहित कई अधिकारी मौजूद रहे। बैठक में नए पेट्रोल पंपों की स्थापना, सरकारी भूमि की उपलब्धता, नीति निर्माण, एचआरआरएल की क्षमता के उपयोग और रिफाइनरी से जुड़े आगामी कार्यक्रमों पर विस्तार से चर्चा की गई। रिफाइनरी उद्घाटन को राज्यव्यापी आयोजन बनाने की तैयारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 4 जुलाई को प्रस्तावित पचपदरा रिफाइनरी उद्घाटन कार्यक्रम को राज्यव्यापी आयोजन बनाने की तैयारी भी तेज हो गई है। पचपदरा में भले ही बड़ी सभा नहीं होगी, लेकिन राज्य सरकार प्रदेश के हर जिले के लोगों को इस कार्यक्रम से जोड़ने की योजना बना रही है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने शुक्रवार को समीक्षा बैठक में निर्देश दिए थे कि कार्यक्रम का सीधा प्रसारण ग्राम पंचायतों, नगरपालिकाओं और जिला मुख्यालयों पर दिखाने की व्यवस्थाएं समय पर पूरी की जाएं। सरकार का प्रयास है कि राज्य के लाखों लोग इस ऐतिहासिक कार्यक्रम से सीधे जुड़ सकें। देश की पहली ग्रीनफील्ड रिफाइनरी-सह-पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स मुख्यमंत्री ने कहा था कि देश की पहली ग्रीनफील्ड एकीकृत रिफाइनरी-सह-पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स की शुरुआत राजस्थान के लिए गर्व का क्षण है। अधिकारियों ने उद्घाटन कार्यक्रम की तैयारियों को लेकर मुख्यमंत्री को प्रेजेंटेशन भी दिया था। राजस्थान रिफाइनरी के शुरू होने से प्रदेश में पेट्रोकेमिकल उद्योग, परिवहन, रोजगार, निवेश और सहायक उद्योगों को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है। नए पेट्रोल पंपों की स्थापना भी इसी व्यापक आर्थिक और औद्योगिक विस्तार का हिस्सा मानी जा रही है।
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राजस्थान न्यूज़: जयपुर। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने उदयपुर के कन्हैयालाल मर्डर केस को लेकर भाजपा पर बड़ा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि घटना को करीब चार वर्ष होने जा रहे हैं, लेकिन पीड़ित परिवार को अब तक न्याय नहीं मिल पाया है। गहलोत ने कहा कि भाजपा ने इस संवेदनशील मामले का उपयोग केवल चुनावी फायदे के लिए किया, लेकिन दोषियों को सजा दिलाने के लिए गंभीरता से प्रयास नहीं किए। अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि उदयपुर के कन्हैयालाल की नृशंस हत्या को चार वर्ष होने जा रहे हैं, लेकिन भाजपा की “डबल इंजन” सरकार में न्याय की उम्मीद आज भी अधूरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि एक सोची-समझी साजिश प्रतीत होती है, क्योंकि अपराधियों के भाजपा से संबंधों को लेकर सवाल उठे थे। गहलोत बोले- 180 में से सिर्फ 21 लोगों की गवाही गहलोत ने कहा कि मामले की जांच नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी यानी NIA के पास है और सुनवाई NIA की विशेष अदालत में चल रही है। केंद्र और राज्य, दोनों जगह भाजपा की सरकार होने के बावजूद अब तक 180 में से केवल 21 लोगों की गवाही हो पाई है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब जांच एजेंसी और सरकार दोनों के पास पर्याप्त संसाधन हैं, तो न्याय प्रक्रिया इतनी धीमी क्यों है। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि चुनाव के समय भाजपा ने इस मामले को लेकर बड़े-बड़े दावे किए और “5 लाख बनाम 50 लाख” जैसे मुद्दों को प्रचारित किया। गहलोत ने आरोप लगाया कि भाजपा की मंशा कभी पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की नहीं थी, बल्कि इस घटना के जरिए राजनीतिक लाभ लेने की थी। पीएम मोदी और अमित शाह पर भी निशाना अशोक गहलोत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि राजनीतिक रोटियां सेकने के बाद अब जब प्रधानमंत्री और गृहमंत्री राजस्थान आते हैं, तो कन्हैयालाल का नाम तक नहीं लेते, सजा की बात तो दूर है। गहलोत ने प्रदेशवासियों से अपील करते हुए कहा कि भाजपा के इस असली चरित्र को पहचानना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने केवल जनता की भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया और संवेदनशील घटना को चुनावी मुद्दा बनाकर छोड़ दिया। क्या था कन्हैयालाल हत्याकांड कन्हैयालाल हत्याकांड 28 जून 2022 को उदयपुर में हुआ था। दर्जी कन्हैयालाल की उनकी दुकान में बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। बताया गया था कि उन्होंने भाजपा की निलंबित प्रवक्ता नूपुर शर्मा के विवादित बयान के समर्थन में सोशल मीडिया पर पोस्ट किया था, जिसके बाद उन्हें धमकियां मिल रही थीं। हत्यारों ने इस वारदात का वीडियो बनाकर ऑनलाइन साझा किया था, जिससे पूरे देश में आक्रोश फैल गया था। घटना के बाद राजस्थान में सांप्रदायिक तनाव की स्थिति भी बनी थी। उस समय राज्य में अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार थी। तत्काल गिरफ्तारी के बाद NIA को सौंपी गई जांच घटना के बाद राजस्थान पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए दोनों मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया था। मामले की गंभीरता और आतंकी कनेक्शन की आशंका को देखते हुए जांच नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी को सौंप दी गई थी। इसके बाद से मामला NIA की विशेष अदालत में विचाराधीन है। गहलोत का कहना है कि जिस मामले को भाजपा ने चुनावों में बड़ा मुद्दा बनाया था, उसमें अब न्याय प्रक्रिया की धीमी रफ्तार पर सवाल उठना स्वाभाविक है। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार से पीड़ित परिवार को शीघ्र न्याय दिलाने के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की है। राजनीतिक बयानबाजी फिर तेज कन्हैयालाल हत्याकांड को लेकर गहलोत के बयान के बाद राजस्थान की राजनीति में एक बार फिर आरोप-प्रत्यारोप तेज हो सकते हैं। कांग्रेस इसे भाजपा की कथनी और करनी के अंतर से जोड़ रही है, वहीं भाजपा की ओर से इस मुद्दे पर पलटवार की संभावना है। फिलहाल मामला न्यायालय में विचाराधीन है और अंतिम निर्णय अदालत की प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा। लेकिन गहलोत के बयान ने इस संवेदनशील मामले को फिर से राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है।
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राजस्थान न्यूज़: जयपुर। जयपुर के रामनगरिया थाना क्षेत्र में मोमोज बेचने वाली युवती पर खौलता पानी गिरने के मामले में पुलिस विभाग ने कार्रवाई की है। आरोपी पुलिसकर्मी नरेंद्र को शनिवार देर रात लाइन हाजिर कर दिया गया। इसके साथ ही राज्य सरकार ने पीड़िता रेशु गुप्ता के इलाज का पूरा खर्च उठाने, परिवार को आर्थिक सहायता देने और पुनर्वास के लिए डेयरी बूथ आवंटित करने की घोषणा की है। मामला 19 जून की शाम करीब पौने सात बजे का है। घटना को लेकर 22 जून को पीड़िता रेशु गुप्ता की बड़ी बहन खुशबू गुप्ता ने एफआईआर दर्ज कराई थी। आरोप है कि पुलिसकर्मी ने रेशु की कार्ट को धक्का देकर पलट दिया, जिससे वह गर्म पानी से झुलस गई। वहीं, पुलिस के अनुसार उस समय जगतपुरा के महल रोड से मुख्यमंत्री का काफिला गुजरना था और काफिले से कुछ मिनट पहले पुलिसकर्मी सड़क किनारे लगे ठेलों को हटवा रहे थे। पुलिसकर्मी लाइन हाजिर, निष्पक्ष जांच शुरू सरकार की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, 19 जून को रामनगरिया क्षेत्र में मुख्यमंत्री के काफिले के गुजरने से पहले ट्रैफिक व्यवस्था के दौरान यह घटना हुई। इस दौरान रेशु गुप्ता अपने ठेले पर रखे गर्म पानी से झुलस गई थीं। मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस विभाग ने संबंधित पुलिसकर्मी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई करते हुए उसे लाइन हाजिर किया है। प्रकरण की निष्पक्ष जांच शुरू कर दी गई है। जांच में यह देखा जाएगा कि घटना किस परिस्थिति में हुई और इसमें किस स्तर पर लापरवाही या अनुचित व्यवहार हुआ। पुलिस विभाग ने स्पष्ट किया है कि जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। सरकार उठाएगी इलाज का पूरा खर्च राज्य सरकार ने पीड़िता रेशु गुप्ता के इलाज का पूरा खर्च उठाने की घोषणा की है। इसके अलावा पीड़ित परिवार को रोजगार के लिए आर्थिक सहायता भी उपलब्ध कराई जाएगी। स्थायी रोजगार के लिए परिवार को डेयरी बूथ आवंटित करने की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी। नगर निगम जयपुर ग्रेटर के आयुक्त ओम कसेरा और उपायुक्त नीलम मीना प्रताप नगर स्थित व्यास अपार्टमेंट में पीड़िता के घर पहुंचे। अधिकारियों ने परिवार से मुलाकात कर उनका हालचाल जाना और राज्य सरकार की ओर से हरसंभव सहायता का भरोसा दिलाया। 25 दिन पहले ही शुरू किया था मोमोज कार्ट पीड़िता रेशु गुप्ता ने बताया कि पिता लाल बहादुर गुप्ता के निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारी उन पर और उनकी बड़ी बहन खुशबू गुप्ता पर आ गई थी। बीएससी करने के बाद उन्होंने कई प्रतियोगी परीक्षाएं दीं, लेकिन चयन नहीं होने पर रोजगार के लिए करीब 25 दिन पहले महल रोड स्थित कैपिटल हाई स्ट्रीट पर ‘हेल्दी आटा मोमोज’ नाम से कार्ट लगानी शुरू की थी। रेशु और उनका परिवार इसी छोटे व्यवसाय के जरिए आजीविका चलाने की कोशिश कर रहा था। घटना के बाद परिवार आर्थिक और मानसिक रूप से कठिन स्थिति में है। सरकार की ओर से इलाज, आर्थिक सहायता और डेयरी बूथ आवंटन की घोषणा को परिवार के पुनर्वास की दिशा में राहत के रूप में देखा जा रहा है। घटना के बाद बढ़ी संवेदनशीलता मुख्यमंत्री काफिले की सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था के दौरान हुई इस घटना ने सड़क किनारे रोजगार करने वाले छोटे विक्रेताओं की सुरक्षा और सम्मानजनक व्यवहार को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि व्यवस्थाएं जरूरी हैं, लेकिन रोजी-रोटी कमाने वाले छोटे दुकानदारों और ठेला संचालकों के साथ संवेदनशील व्यवहार भी उतना ही जरूरी है। फिलहाल पुलिसकर्मी को लाइन हाजिर कर दिया गया है और मामले की जांच जारी है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही घटना की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
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अजमेर न्यूज़: 1100 वर्ष पूर्व स्थापित मंदिर की बड़ी है मान्यता, दूर दराज से पहुंचते हैं हजारों श्रद्धालु
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अजमेर न्यूज़: 1968 से कस्बे की धार्मिक संस्था श्री ब्रह्म पुष्कर सेवा संघ कर रही है इस अनूठी परंपरा का निर्वहन
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अजमेर न्यूज़: 10 टीमें 8 - 8 वार्डो में जाकर घूम रही गायों का करेंगीं प्राथमिक उपचार
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राष्ट्रीय न्यूज़: नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ के 135वें एपिसोड में भारत की रक्षा क्षमता, स्वदेशी विमान निर्माण, योग, समाजसेवा, खेल और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कई प्रेरक उदाहरणों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि समुद्र से लेकर आसमान तक भारत सुरक्षित है। प्रधानमंत्री ने हाल में सफलतापूर्वक परीक्षण की गई जमीन से हवा में मार करने वाली मिसाइलों का जिक्र करते हुए देश की बढ़ती रक्षा शक्ति को आत्मनिर्भर भारत की उपलब्धि बताया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जून महीने में देश ने विमानन क्षेत्र में भी एक बड़ी सफलता हासिल की है। मेड इन इंडिया अभियान के तहत तैयार C-295 विमान ने अपनी पहली सफल उड़ान पूरी कर ली है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में ऐसे 40 विमान भारत में ही बनाए जा रहे हैं। यह उपलब्धि भारत की स्वदेशी निर्माण क्षमता और रक्षा उत्पादन में बढ़ती आत्मनिर्भरता को दर्शाती है। नौसेना में शामिल स्वदेशी जहाजों का किया उल्लेख प्रधानमंत्री ने कहा कि हाल ही में उन्हें कोलकाता में नौसेना से जुड़े एक कार्यक्रम में शामिल होने का अवसर मिला। वहां INS दूनागिरी, INS संशोधक और INS अग्रय को भारतीय नौसेना के बेड़े में शामिल किया गया। उन्होंने कहा कि इन जहाजों की डिजाइन से लेकर मैन्युफैक्चरिंग तक सब कुछ स्वदेशी है। पीएम मोदी ने कहा कि भारत आज रक्षा क्षेत्र में तेजी से आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहा है। स्वदेशी तकनीक, भारतीय इंजीनियरिंग और देश के युवाओं की प्रतिभा के दम पर भारत समुद्र, जमीन और आसमान में अपनी सुरक्षा क्षमता को लगातार मजबूत कर रहा है। योगासन चैम्पियनशिप में भारत ने जीते 114 पदक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस से जुड़े कार्यक्रमों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस बार दुनिया के 2500 से अधिक स्थानों पर योग के कार्यक्रम आयोजित हुए। अहमदाबाद में आयोजित ‘विश्व योगासन चैम्पियनशिप’ की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि भारत ने इसमें शानदार प्रदर्शन किया। प्रधानमंत्री ने बताया कि भारत ने इस चैम्पियनशिप में कुल 114 पदक जीते, जिनमें 102 गोल्ड मेडल शामिल हैं। इस प्रदर्शन के साथ भारत पदक तालिका में पहले स्थान पर रहा। उन्होंने कहा कि योग अब केवल स्वास्थ्य का माध्यम नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक पहचान और वैश्विक योगदान का प्रतीक बन चुका है। महाराष्ट्र के पेठकर परिवार की सराहना ‘मन की बात’ में प्रधानमंत्री मोदी ने महाराष्ट्र के नांदेड़ जिले के बहादुरपुरा गांव के पेठकर परिवार का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि इस परिवार ने घर में विवाह के अवसर पर अपने गांव के लगभग साढ़े तीन हजार लोगों के लिए दुर्घटना बीमा की व्यवस्था की। हर व्यक्ति को एक लाख रुपए का बीमा कवर दिया गया। प्रधानमंत्री ने कहा कि सामाजिक अवसरों को समाजहित से जोड़ने की यह पहल प्रेरणादायक है। ऐसे उदाहरण दिखाते हैं कि समाज में सकारात्मक सोच और सामूहिक जिम्मेदारी की भावना कैसे बड़े बदलाव ला सकती है। नगालैंड की बेबी लीग और विमेन फुटसल लीग को बताया प्रेरक प्रधानमंत्री मोदी ने नगालैंड में चल रही दो खेल लीगों का उल्लेख करते हुए कहा कि ये सभी को प्रेरित कर सकती हैं। उन्होंने नगालैंड बेबी लीग का जिक्र किया, जिसमें 5 से 12 वर्ष तक के बच्चे भाग लेते हैं। यह लीग बच्चों की रफ्तार, प्रतिभा और खेल भावना को प्रोत्साहित करती है और तीन वर्ष पूरे कर चुकी है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने नगालैंड विमेन फुटसल लीग की भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि फुटसल को आम भाषा में इंडोर फुटबॉल कहा जाता है। इसमें पांच खिलाड़ी होते हैं और खेल छोटे मैदान पर तेज गति से खेला जाता है। इस खेल में खिलाड़ियों को तेजी से निर्णय लेने होते हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐसी लीगों से युवाओं और महिलाओं में खेल संस्कृति को बढ़ावा मिलता है।असम के हरगिला पक्षी और ‘हरगिला आर्मी’ की कहानी प्रधानमंत्री मोदी ने असम के दुर्लभ पक्षी ‘हरगिला’ का जिक्र करते हुए पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि हरगिला प्रकृति को स्वच्छ रखने में अहम भूमिका निभाता है, लेकिन असम के कुछ इलाकों में लंबे समय तक इसे अशुभ माना जाता था। लोग इसे अपने आसपास देखना पसंद नहीं करते थे और कई बार उन पेड़ों को भी काट दिया जाता था, जिन पर हरगिला के घोंसले होते थे। प्रधानमंत्री ने जीव-विज्ञानी पूर्णिमा देवी बर्मन के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि पूर्णिमा देवी ने लोगों के मन में बैठी गलत धारणा को बदलने का संकल्प लिया। उन्होंने महिलाओं और ग्रामीणों को विज्ञान के आधार पर समझाया। धीरे-धीरे महिलाएं इस अभियान से जुड़ती गईं और एक बड़ा बदलाव शुरू हुआ। पीएम मोदी ने कहा कि जिस पक्षी को कभी अशुभ मानकर भगाया जाता था, वही गांवों की पहचान बनने लगा। हजारों ग्रामीण महिलाएं हरगिला को बचाने के लिए आगे आईं और आज वे ‘हरगिला आर्मी’ के नाम से जानी जाती हैं। उन्होंने कहा कि यह उदाहरण दिखाता है कि सही जानकारी और जागरूकता से वर्षों पुरानी सोच भी बदली जा सकती है। नालंदा विश्वविद्यालय ने शास्त्रार्थ परंपरा को किया जीवंत प्रधानमंत्री मोदी ने नालंदा विश्वविद्यालय का उल्लेख करते हुए कहा कि इसने शास्त्रार्थ की प्राचीन भारतीय परंपरा को फिर से जीवंत किया है। उन्होंने कहा कि शास्त्रार्थ केवल अपनी बात रखने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह वाद-संवाद और मंथन की अनुशासित प्रक्रिया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि शास्त्रार्थ में तर्क और तथ्य के साथ अपनी बात रखना जरूरी होता है। साथ ही दूसरों के विचारों को धैर्य से सुनने और समझने की सीख भी इसी प्रक्रिया से मिलती है। उन्होंने प्रसन्नता जताई कि नालंदा विश्वविद्यालय ने शास्त्रार्थ को अपने दीक्षांत समारोह का हिस्सा बनाया। प्रधानमंत्री मोदी ने ‘मन की बात’ में कहा कि भारत की शक्ति केवल रक्षा, विज्ञान और तकनीक तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज की सकारात्मक पहल, खेल, योग, पर्यावरण संरक्षण और ज्ञान परंपरा भी देश की बड़ी ताकत हैं।
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राष्ट्रीय न्यूज़: नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने इंटेलिजेंस ब्यूरो यानी आईबी के स्पेशल डायरेक्टर महेश दीक्षित को देश की आंतरिक खुफिया एजेंसी का नया प्रमुख नियुक्त किया है। वे मौजूदा आईबी डायरेक्टर तपन कुमार डेका का स्थान लेंगे, जिनका कार्यकाल 30 जून 2026 को समाप्त हो रहा है। केंद्र सरकार ने महेश दीक्षित को दो वर्ष के लिए आईबी डायरेक्टर नियुक्त किया है। महेश दीक्षित 1993 बैच के आंध्र प्रदेश कैडर के आईपीएस अधिकारी हैं। वे फिलहाल इंटेलिजेंस ब्यूरो में स्पेशल डायरेक्टर के पद पर कार्यरत थे और एजेंसी के दूसरे सबसे वरिष्ठ अधिकारी माने जाते थे। खुफिया तंत्र, आंतरिक सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी अभियानों में उनके लंबे अनुभव को देखते हुए उन्हें यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है। जम्मू-कश्मीर में भी संभाल चुके हैं अहम जिम्मेदारी महेश दीक्षित इससे पहले जम्मू-कश्मीर में सब्सिडियरी इंटेलिजेंस ब्यूरो यानी एसआईबी के प्रमुख रह चुके हैं। जम्मू-कश्मीर जैसे संवेदनशील क्षेत्र में काम करने के दौरान उन्होंने सुरक्षा, खुफिया समन्वय और आतंकवाद विरोधी अभियानों से जुड़ी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। उन्हें आंतरिक सुरक्षा और खुफिया ऑपरेशन का अनुभवी अधिकारी माना जाता है। आईबी प्रमुख के रूप में महेश दीक्षित के सामने देश की आंतरिक सुरक्षा, आतंकवाद, साइबर चुनौतियों, कट्टरपंथी गतिविधियों, सीमा पार नेटवर्क और संगठित अपराध से जुड़े खुफिया तंत्र को और मजबूत करने की जिम्मेदारी होगी। बदलते सुरक्षा परिदृश्य में आईबी की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती तपन कुमार डेका का कार्यकाल 30 जून को होगा समाप्त मौजूदा आईबी डायरेक्टर तपन कुमार डेका का कार्यकाल 30 जून 2026 को पूरा हो रहा है। डेका 1988 बैच के हिमाचल प्रदेश कैडर के आईपीएस अधिकारी हैं। वे जुलाई 2022 से इंटेलिजेंस ब्यूरो के प्रमुख पद पर कार्यरत थे। केंद्र सरकार ने उनके कार्यकाल को दो बार विस्तार दिया था। तपन कुमार डेका को भी आतंकवाद विरोधी मामलों और आंतरिक सुरक्षा से जुड़े विषयों का अनुभवी अधिकारी माना जाता है। उनके कार्यकाल के दौरान आईबी ने कई संवेदनशील सुरक्षा मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अब उनके स्थान पर महेश दीक्षित देश की आंतरिक खुफिया एजेंसी की कमान संभालेंगे। आंतरिक सुरक्षा के लिहाज से अहम नियुक्ति इंटेलिजेंस ब्यूरो देश की प्रमुख आंतरिक खुफिया एजेंसी है। इसकी जिम्मेदारी देश के भीतर सुरक्षा से जुड़ी गतिविधियों पर नजर रखना, आतंकवाद और आंतरिक खतरे से संबंधित इनपुट जुटाना तथा केंद्र और राज्यों की सुरक्षा एजेंसियों के साथ समन्वय करना है। महेश दीक्षित की नियुक्ति को आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था में निरंतरता और अनुभव के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आईबी में लंबे समय तक कार्य करने और संवेदनशील क्षेत्रों में जिम्मेदारी संभालने के कारण वे एजेंसी की कार्यप्रणाली और सुरक्षा चुनौतियों से भली-भांति परिचित हैं। आने वाले समय में महेश दीक्षित के नेतृत्व में इंटेलिजेंस ब्यूरो की प्राथमिकता आतंरिक सुरक्षा तंत्र को और मजबूत करने, आधुनिक तकनीकी निगरानी क्षमता बढ़ाने और राज्यों के साथ खुफिया समन्वय को अधिक प्रभावी बनाने पर रह सकती है।
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गुप्त ध्वनि किरणों के साथ ओशो पर किसने हमला किया?...
गुप्त ध्वनि किरणों के साथ ओशो पर किसने हमला किया?... * ओशो के निजी दंत चिकित्सक देवगेट ओशो की मृत्यु से 4 दिन पहले हुई घटनाओं के बारे में बात करते हैं (शरीर को छोड़कर)... * 15 aजनवरी, 1990 को, मेरे जन्मदिन पर, मुझे शुन्यो से एक संदेश मिला: ओशो चाहते थे कि मैं उनके पेट का एक्स-रे ले। हम दंaत कक्ष में मिले। ओशो का शरीर पतला और बेकार लग रहा था, फिर भी मैंने उसे शक्तिशाली रूप से उपस्थित महसूस किया। मुझे शुन्यो से पता था कि वह हर दिन बीस घंटे से अधिक सो रहा था, हर शाम बुद्ध हॉल में कुछ क़ीमती मिनटों के लिए अपनी शारीरिक ऊर्जा को बचा रहा था। ओशो नेa मुझे बताया कि उसके हमलावरों की आवाज़ से उसका शरीर बहुत कमजोर हो गया था। उन्होंने कहा कि उनमें से शायद तीन, दो पुरुष और एक महिला, ध्वनि तरंगों पर ध्यानaa केंद्रित करने और अपने शरीर को लक्षित करने के लिए एक विशेष गठन में बैठे थे। यहां भारत में प्राचीन योगिक प्रथाएं हैं जहां लोग कुछ ध्वनियों, कुछ मंत्रों को जानते हैं, जो लोगों को नुक़सान पहुंचाने के लिए ध्वनि को केंद्रित कर सकते हैं। लेकिन मुझ पर हमला करaaने वाले ये लोग भारतीय नहीं हैं। वे वही लोग हैं जिन्होंने अमेरिका में पहले मुझे मारने की कोशिश की थी। वे तब सफल नहीं हो सके, और अब वे जो शुरू किया उसे पूरा कर ने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने मुझे बोलने से रोकने के लिए ज़हर की कोशिश की लेकिन मैं जारी रखने में कामयाब रहा। अब, पांच साल बाद वे वापस आ गए हैं। उन्होंने पहले बुद्ध हॉल में अपनी ध्वनि किरणों का उपयोग मेरे दिमाग़ पर हमला करने के लिए किया लेकिन मैं अपने दिमाग़ में नहीं हूं। मैं एक नो-मन हूं और उनकी आवाज़ का बहुत कम प्रभाव था। इसलिए उन्होंने अपनी रणनीति बदल दी, अब वे मेरे शरीर पर हमला कर रहे हैं। मेरे गरीब शरीर को उनकी किरणों से कोई सुरक्षा नहीं है। हर दिन यह कमजोर होता जाता है। वे मुझे मार नहीं सकते लेकिन वे मेरे शरीर को नुक़सान पहुंचा सकते हैं। अभी मेरे जिगर के क्षेत्र में बहुत दर्द हो रहा है। क्या आप इसे एक्स-रे कर सकते हैं? दुख की बात है, मैंने समझाया कि मेरी दंत एक्स-रे मशीन शायद अपर्याप्त थी क्योंकि यह केवल दांतों और जबड़े की छोटी फिल्में ले सकती थी, लेकिन हम कोशिश कर सकते थे। अमृतो को हमारे पास सबसे बड़ी एक्स-रे फ़िल्म मिली, जबकि मैंने इसकी बीम को चौड़ा करने के लिए डेंटल एक्स-रे मशीन के साथ जिग्गल किया। मैंने वह करने की कोशिश की जो ओशो पूछ रहा था। मैंने उसके जिगर के क्षेत्र की एक तस्वीर ली और फिर दंत विकास में बड़ी फ़िल्म विकसित करने में कामयाब रहा टैंक जिसे छोटी इंट्रा-ओरल डेंटल फ़िल्मों के लिए डिज़ाइन किया गया था, लेकिन परिणामी छवि धुंधली और अस्पष्ट थी। यह आख़िरी बार था जब मैंने ओशो को उसके भौतिक शरीर में देखा था। 19 जनवरी को शाम 4:30 बजे थे: मैं अपनी प्रेमिका के साथ अपने कमरे में था जब दरवाजे पर एक ज़रूरी दस्तक हुई। मनीषा, पीला और तनावग्रस्त दिख रही थी, ने पूछा कि क्या वह मेरे कमरे के फ़ोन का उपयोग कर सकती है। मुझे पता था कि वह केवल पूछेगी कि क्या कुछ असामान्य हो रहा है। अस्थायी सचिव के रूप में कार्य करते हुए वह इनर सर्कल के सदस्यों को फ़ोन कर रही थी और उन्हें कृष्णा हाउस में एक असाधारण बैठक में तुरंत आने के लिए कह रही थी। ओशो ने पंद्रह महीने पहले इक्कीस लोगों की एक कम्यून प्रबंधन टीम की स्थापना की थी, इसे इनर सर्कल का नाम दिया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका काम कम्यून के दिन-प्रतिदिन चलने का प्रबंधन करना था। मैं मूल चयन में नहीं था, लेकिन कुछ महीने बाद मुझे शामिल होने के लिए कहा गया था। फ़ोन करने के बाद, मनीषा ने कहा, “गीट, तुमने सुना कि मैं दूसरों को क्या बता रहा था। बैठक कृष्णा हाउस की छत पर ब्लू रूम में है। क्या आप वहां तुरंत जा सकते हैं?” इससे पहले कि मैं कोई सवाल पूछ पाता, वह जल्दी से गलियारे में चली गई, स्पष्ट रूप से एक और महत्वपूर्ण कार्य में शामिल थी। मैंने दोपहर के अधिकांश समय अजीब तरह से विपुल महसूस किया था। बाहरी मामलों की उथल-पुथल के बावजूद मैं कई दिनों से उत्साहित महसूस कर रहा था। मेरे दिल में ख़ुशी का एक अकथनीय नृत्य था। अंदर से मुझे उत्साह, आनंद महसूस हुआ। ब्लू रूम में पहुंचने पर, मैंने देखा कि अधिकांश इनर सर्कल पहले से ही वहां इकट्ठा हो चुके थे। माहौल तनावपूर्ण और तनावपूर्ण था। मेरा अपना उत्साह जगह से बाहर लग रहा था। मैं बैठ गया और इंतज़ार किया। कुछ मिनटों के बाद जयेश ने अमृतो के साथ प्रवेश किया। यह देखने के लिए संक्षेप में चारों ओर देखते हुए कि हम सभी मौजूद हैं, उन्होंने एक दृढ़, हालांकि शांत आवाज़ में कहा, “मुझे लगता है कि इसे लपेटने का कोई तरीक़ा नहीं है। मैं आपको सीधे बताऊंगा। ओशो ने कुछ समय पहले लगभग 4:45 बजे अपना शरीर छोड़ दिया था दोपहर।” स्तब्ध, मैंने अपनी घड़ी को देखा। शाम के 5:15 बजे थे। उपस्थित दो या तीन लोग रोने लगे। जयेश ने जल्दी से बीच में टोका, “देखो, मुझे तुम्हारी सारी मदद की ज़रूरत है। कृपया अभी तक अलग न हों। मुझे आप सभी की ज़रूरत है कि ओशो के भेजने को उतना ही सुंदर बनाने में मदद करें जितना वह हकदार है। यह आख़िरी चीज है जो हम उसके लिए कर सकते हैं भौतिक शरीर, चलो इसे अद्भुत बनाते हैं। उसने मुझे ठीक से बताया कि वह कैसे चाहता है कि ऐसा हो। उसने मुझे हर चीज के लिए विस्तृत निर्देश दिए, लेकिन मुझे यहां हर किसी की मदद की ज़रूरत है।” जयेश के शब्दों को सुनकर मेरा पहले का उत्साह सदमे में बदल गया था, लेकिन मैंने ओशो को अपने लोगों के साथ अपने अंतिम उत्सव का आनंद लेने में सक्षम बनाने के लिए हमारी मदद के लिए जयेश की अपील को स्पष्ट रूप से सुना। जैसे ही मैंने ब्लू रूम छोड़ा, जयेश ने मुझे बताया कि ओशो ने अनुरोध किया था कि मैं उनके शरीर को जलते हुए घाटों तक ले जाने के लिए एक वाहक बनूं। गतिविधि और भ्रमित भावनाओं के एक धुंध में मुझे याद है कि ओशो के इस अंतिम उपहार के लिए बेहद आभारी महसूस कर रहा था। - स्वामी देवगीत पुस्तक : ओशो - द फर्स्ट बुद्ध इन द डेंटल चेयर अध्याय: 17 अध्याय का नाम: ओशो का अंतिम दंत नाटक: अधिनियम V अंतिम सुनहरी झलक
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