राजस्थान न्यूज़: दौसा में पति की हत्या के आरोप में पत्नी गिरफ्तार, सबूत मिटाने के लिए नहाकर कपड़े धोए
राजस्थान न्यूज़: दौसा। दौसा जिले के सदर थाना क्षेत्र में पति की हत्या के मामले में पुलिस ने मृतक की पत्नी को गिरफ्तार किया है। पुलिस जांच में सामने आया है कि हत्या के बाद आरोपी महिला ने पहले नहाकर अपने कपड़े धोए, फिर किसी को शक न हो इसलिए शृंगार किया और रोते हुए लोगों को घटना की जानकारी दी। हालांकि पुलिस पूछताछ में उसका नाटक ज्यादा देर तक नहीं चल सका और उसने हत्या करना स्वीकार कर लिया। पुलिस के अनुसार मृतक रमेश बैरवा उम्र करीब 40 वर्ष मूल रूप से खवारावजी के निकट रामधन की ढाणी का निवासी था। वर्तमान में वह चावंड गांगलियावास में मकान बनाकर पत्नी ममता बैरवा और तीन बच्चों के साथ रह रहा था। शनिवार शाम पुलिस को सूचना मिली कि रमेश का शव घर से कुछ दूरी पर कीकरों के बीच पड़ा है। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को रामकरण जोशी राजकीय जिला चिकित्सालय पहुंचाया। गीले कपड़ों से पुलिस को हुआ शक जांच के दौरान पुलिस को मौके पर गीले कपड़े दिखाई दिए। इसी आधार पर पुलिस को संदेह हुआ और मृतक की पत्नी ममता बैरवा से पूछताछ की गई। पूछताछ के दौरान महिला कई सवालों के जवाब में उलझ गई। सख्ती से पूछताछ करने पर उसने हत्या करना स्वीकार कर लिया। इसके बाद पुलिस ने ममता बैरवा को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने मामले में विधि से संघर्षरत एक किशोर को भी निरुद्ध किया है। पुलिस ने गीले कपड़े जब्त कर लिए हैं। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि घटना के दौरान ममता के कपड़ों पर खून लग गया था। आरोप है कि सबूत मिटाने के लिए उसने पहले नहाकर कपड़े धोए और फिर रोने का नाटक करते हुए लोगों को बताया कि किसी ने रमेश की हत्या कर दी है। सिर पर पत्थर से वार करने का आरोप सूत्रों के अनुसार रमेश नशे का आदी बताया जा रहा है और नशे सहित अन्य कारणों से पति-पत्नी के बीच अक्सर विवाद होता रहता था। घटना वाले दिन भी दोनों के बीच कहासुनी हुई। बताया जा रहा है कि उस समय रमेश नशे में था। विवाद बढ़ने पर पत्नी ने कथित रूप से उसके सिर पर पत्थर से कई वार किए, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। वारदात के बाद महिला ने रिश्तेदारों को बताया कि किसी ने रमेश की हत्या कर दी है और उसका शव पेड़ों के बीच पड़ा है। पुलिस के अनुसार, प्रारंभिक पूछताछ में महिला ने हत्या की बात स्वीकार की है, लेकिन मामले की पूरी सच्चाई जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। एफएसएल जांच और कॉल डिटेल खंगालेगी पुलिस घटनास्थल से शराब की खाली बोतल भी मिली है। पुलिस यह जांच कर रही है कि हत्या में कोई और शामिल था या नहीं। इसके लिए एफएसएल जांच करवाई जा रही है। साथ ही आरोपी महिला की कॉल डिटेल भी खंगाली जा रही है, ताकि घटना से पहले और बाद की गतिविधियों का पता लगाया जा सके। सूत्रों के अनुसार, यह भी सामने आया है कि महिला कुछ समय के लिए पति से दूर दिल्ली में रही थी। पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है। फिलहाल मामले में आरोपी पत्नी को गिरफ्तार कर लिया गया है और आगे की जांच जारी है। परिजनों ने शव लेने से किया था इनकार शव अस्पताल पहुंचाए जाने के बाद परिजनों ने आरोपियों की गिरफ्तारी सहित अन्य मांगों को लेकर पहले शव लेने से इनकार कर दिया था। पुलिस और प्रशासन की समझाइश के बाद आगे की प्रक्रिया पूरी की गई। घटना के बाद क्षेत्र में सनसनी फैल गई और बड़ी संख्या में लोग मौके तथा अस्पताल परिसर में एकत्र हो गए। फिलहाल सदर थाना पुलिस हत्या के कारणों, घटना में शामिल संभावित अन्य लोगों और सबूत मिटाने की कोशिश से जुड़े पहलुओं की जांच कर रही है।
Read more 29th Jun 2026
राजस्थान न्यूज़: केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्यमंत्री भागीरथ चौधरी को खीरे की खेती के लिए करीब 99.60 लाख रुपए की सरकारी सब्सिडी मिलने के खुलासे के बाद अब इसी योजना से एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी केंद्रीय मत्स्य पालन,पशुपालन और डेयरी सचिन नरेश पाल गंगवार के परिवार को भी लाभ मिलने का मामला सामने आया है। रिपोर्ट के अनुसार, मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर यानी MIDH के तहत नेशनल हॉर्टिकल्चर बोर्ड ने यह सब्सिडी मंजूर की थी। भागीरथ चौधरी अजमेर से लोकसभा सांसद हैं और केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय में राज्य मंत्री हैं। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चौधरी के अलावा 1994 बैच के राजस्थान कैडर के आईएएस अधिकारी नरेश पाल गंगवार के परिवार के तीन सदस्यों को भी पिछले पांच वर्षों में इस योजना के तहत कुल 1.16 करोड़ रुपए से अधिक की सब्सिडी मिली है। गंगवार वर्तमान में मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय में सचिव हैं। NHB चलाता है कमर्शियल बागवानी की योजना ‘बागवानी फसलों के उत्पादन और कटाई के बाद प्रबंधन के जरिए कमर्शियल बागवानी का विकास’ नाम की यह योजना केंद्रीय कृषि मंत्रालय के तहत नेशनल हॉर्टिकल्चर बोर्ड द्वारा संचालित की जाती है। इस योजना का उद्देश्य खीरा, शिमला मिर्च, टमाटर और फूलों जैसी बागवानी फसलों की आधुनिक और व्यावसायिक खेती को बढ़ावा देना है।रिकॉर्ड के अनुसार, नरेश गंगवार ने वर्ष 2021-22 के लिए डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल एंड ट्रेनिंग यानी DoPT के पास अचल संपत्ति की वार्षिक घोषणा में इस योजना के तहत मंजूर एक प्रोजेक्ट की जानकारी दी थी। गंगवार ने रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सर्विस रूल्स के अनुसार उन्हें केवल बड़े पैमाने पर लाभ या प्रॉफिट से जुड़ी जानकारी ही देनी होती है। जयपुर जिले के प्रोजेक्ट्स के लिए मिली सब्सिडी रिपोर्ट के अनुसार, नरेश गंगवार के परिवार को मिली सभी सब्सिडी जयपुर जिले से जुड़े प्रोजेक्ट्स के लिए थी। उनकी मां बिंदुमती के नाम पर जोरपुरा, जोबनेर तहसील के भासिंगपुरा गांव में खीरे की खेती के प्रोजेक्ट के लिए जनवरी 2025 में 46.03 लाख रुपए की सब्सिडी बैंक खाते में आई। इस प्रोजेक्ट का क्षेत्रफल 8,880 वर्ग मीटर और लागत 99.38 लाख रुपए बताई गई है। इसी तरह नरेश गंगवार के बेटे कुमार रित्विक के नाम पर जोरपुरा, जोबनेर तहसील के ढाणी बोराज गांव में खीरे की खेती के प्रोजेक्ट के लिए मार्च 2023 में 46.49 लाख रुपए की सब्सिडी मिली। इस प्रोजेक्ट का क्षेत्रफल 8,736 वर्ग मीटर और लागत 97.94 लाख रुपए बताई गई है। फुलेरा तहसील के ढाणी बोराज गांव में खीरे की खेती के लिए गंगवार की पत्नी डॉ. रंजीता सिंह और अन्य के नाम पर सूचीबद्ध एक प्रोजेक्ट को वर्ष 2021-22 में 24.36 लाख रुपए की सब्सिडी मिली। इस प्रोजेक्ट का क्षेत्रफल 4,048 वर्ग मीटर और लागत 49.31 लाख रुपए बताई गई है।\ पत्नी, मां, बेटे और बेटी के नाम पर बताई संपत्ति नरेश गंगवार ने DoPT में 1 जनवरी 2026 को दाखिल 2024-25 की अचल संपत्ति घोषणा में ढाणी बोराज गांव की कृषि भूमि अपनी पत्नी, मां, बेटे और बेटी के नाम पर बताई है। घोषणा में खसरा नंबर 1203/544 और 1205/544 का उल्लेख किया गया है। घोषणा में यह भी बताया गया कि संबंधित भूमि पर कमर्शियल बागवानी के लिए NHB द्वारा 50 लाख रुपए का एक प्रोजेक्ट मंजूर किया गया है। इसमें बैंक लोन, NHB से सब्सिडी और मालिकों के योगदान से प्रोजेक्ट को फंड किए जाने की बात कही गई है। साथ ही ऑफिस, रेजिडेंस, वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम और बाउंड्री वॉल जैसे अन्य विकास कार्यों पर अलग से राशि खर्च किए जाने का उल्लेख है। AIS कंडक्ट रूल्स को लेकर दी सफाई ऑल इंडिया सर्विसेज कंडक्ट रूल्स, 1968 के अनुसार, अधिकारियों को अपनी खरीदी, विरासत, लीज या मॉर्गेज पर रखी गई अचल संपत्तियों की जानकारी देनी होती है, चाहे वह उनके नाम पर हो या परिवार के किसी सदस्य या आश्रित के नाम पर हो। रिपोर्ट के अनुसार, नरेश गंगवार ने अपने जवाब में कहा कि AIS कंडक्ट रूल्स के तहत ‘परिवार के सदस्य’ की परिभाषा में वही लोग आते हैं, जो पूरी तरह सरकारी कर्मचारी पर निर्भर हों। उन्होंने कहा कि उनकी मां बिंदुमती और बेटा कुमार रित्विक उन पर निर्भर नहीं हैं और यह बात उनके सर्विस रिकॉर्ड में भी दर्ज है। इसलिए उनके अनुसार, इनसे जुड़ी जानकारी वार्षिक संपत्ति रिटर्न में देना आवश्यक नहीं था। भागीरथ चौधरी मामले से बढ़ा विवाद इससे पहले केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी को परबतसर के पीह गांव स्थित अपने फार्म पर पॉली हाउस में खीरे की खेती के लिए 99.60 लाख रुपए की सब्सिडी मिलने का मामला सामने आया था। आरोप है कि केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री होने के साथ चौधरी ने अपने ही मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण वाले बोर्ड की योजना का लाभ लिया। चौधरी ने इस पर सफाई देते हुए कहा था कि उन्होंने किसान के नाते योजना का लाभ लिया है और कुछ भी छिपाकर नहीं किया। उन्होंने यह भी कहा कि पॉली हाउस और कोल्ड स्टोरेज से जुड़ी सब्सिडी वाला विभाग उनके पास नहीं, बल्कि दूसरे राज्य मंत्री के पास है। विपक्ष ने उठाए हितों के टकराव के सवाल इन खुलासों के बाद कांग्रेस और विपक्षी नेताओं ने केंद्र सरकार, मंत्री और संबंधित अधिकारियों पर सवाल उठाए हैं। विपक्ष का आरोप है कि आम किसान सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए दफ्तरों के चक्कर काटता है, जबकि प्रभावशाली लोगों और उनके परिवारों को बड़ी राशि की सब्सिडी मिल रही है। कांग्रेस नेताओं ने इसे हितों के टकराव और पारदर्शिता से जुड़ा गंभीर मामला बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि किसानों के लिए बनी योजनाओं का लाभ वास्तव में पात्र और जरूरतमंद किसानों तक पहुंचना चाहिए।फिलहाल इस मामले में मंत्री और आईएएस अधिकारी की ओर से सफाई दी गई है, लेकिन रिपोर्ट सामने आने के बाद सब्सिडी वितरण, पात्रता, हितों के टकराव और सेवा नियमों के पालन को लेकर सियासी और प्रशासनिक बहस तेज हो गई है।
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राजस्थान न्यूज़: जयपुर। यमुना जल समझौते को लेकर जल संसाधन मंत्री सुरेश रावत ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व को ऐतिहासिक बताया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के दृढ़ संकल्प और लगातार प्रयासों से वर्षों से लंबित यमुना जल समझौते को आगे बढ़ाने में सफलता मिली है। इस समझौते से शेखावाटी क्षेत्र को बड़ी राहत मिलेगी। सुरेश रावत ने कहा कि शेखावाटी के सीकर, चूरू और झुंझुनूं जिलों में लंबे समय से पेयजल संकट गंभीर समस्या रहा है। यमुना जल परियोजना के माध्यम से इन जिलों तक पानी पहुंचने का मार्ग साफ हुआ है। यह समझौता प्रदेश की जल सुरक्षा और शेखावाटी के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण कदम है। शेखावाटी को मिलेगा यमुना का पानी जल संसाधन मंत्री ने कहा कि इस परियोजना से शेखावाटी के गांवों और शहरों को पेयजल उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। यमुना का पानी पाइपलाइन के माध्यम से राजस्थान लाया जाएगा और चूरू जिले में प्रस्तावित जलाशय के जरिए इसे आगे वितरित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह परियोजना केवल पेयजल आपूर्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे क्षेत्र के सामाजिक और आर्थिक विकास को भी गति मिलेगी। पानी की उपलब्धता से भूजल पर निर्भरता कम होगी और लंबे समय से जल संकट झेल रहे लोगों को राहत मिलेगी। मुख्यमंत्री के प्रयासों को बताया निर्णायक सुरेश रावत ने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने सत्ता संभालने के बाद से ही राजस्थान के जल हितों को प्राथमिकता दी। उन्होंने केंद्र सरकार और हरियाणा सरकार के साथ लगातार संवाद कर इस महत्वपूर्ण समझौते को साकार करने में निर्णायक भूमिका निभाई। मंत्री ने कहा कि यह मुख्यमंत्री की राजनीतिक इच्छाशक्ति और प्रदेश के हितों के प्रति प्रतिबद्धता का परिणाम है कि दशकों से लंबित विषय अब समाधान की दिशा में आगे बढ़ा है। जल सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम जल संसाधन मंत्री ने कहा कि यमुना जल समझौता राजस्थान की दीर्घकालिक जल सुरक्षा के लिए बड़ा कदम है। इससे आने वाले समय में शेखावाटी क्षेत्र में पेयजल संकट को कम करने और जल प्रबंधन को मजबूत करने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि सरकार इस परियोजना को समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। आवश्यक प्रशासनिक, तकनीकी और वित्तीय प्रक्रियाओं को पूरा कर परियोजना को धरातल पर उतारने का काम किया जाएगा। दशकों की प्रतीक्षा को मिलेगा समाधान सुरेश रावत ने कहा कि शेखावाटी के लोग वर्षों से यमुना जल की प्रतीक्षा कर रहे थे। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में अब यह प्रतीक्षा समाप्त होने की दिशा में बढ़ रही है। उन्होंने इसे राजस्थान के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बताते हुए कहा कि यह समझौता प्रदेश के जल अधिकारों को मजबूत करने वाला निर्णय है।
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अजमेर न्यूज़: 1100 वर्ष पूर्व स्थापित मंदिर की बड़ी है मान्यता, दूर दराज से पहुंचते हैं हजारों श्रद्धालु
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राष्ट्रीय न्यूज़: नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ के 135वें एपिसोड में भारत की रक्षा क्षमता, स्वदेशी विमान निर्माण, योग, समाजसेवा, खेल और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कई प्रेरक उदाहरणों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि समुद्र से लेकर आसमान तक भारत सुरक्षित है। प्रधानमंत्री ने हाल में सफलतापूर्वक परीक्षण की गई जमीन से हवा में मार करने वाली मिसाइलों का जिक्र करते हुए देश की बढ़ती रक्षा शक्ति को आत्मनिर्भर भारत की उपलब्धि बताया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जून महीने में देश ने विमानन क्षेत्र में भी एक बड़ी सफलता हासिल की है। मेड इन इंडिया अभियान के तहत तैयार C-295 विमान ने अपनी पहली सफल उड़ान पूरी कर ली है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में ऐसे 40 विमान भारत में ही बनाए जा रहे हैं। यह उपलब्धि भारत की स्वदेशी निर्माण क्षमता और रक्षा उत्पादन में बढ़ती आत्मनिर्भरता को दर्शाती है। नौसेना में शामिल स्वदेशी जहाजों का किया उल्लेख प्रधानमंत्री ने कहा कि हाल ही में उन्हें कोलकाता में नौसेना से जुड़े एक कार्यक्रम में शामिल होने का अवसर मिला। वहां INS दूनागिरी, INS संशोधक और INS अग्रय को भारतीय नौसेना के बेड़े में शामिल किया गया। उन्होंने कहा कि इन जहाजों की डिजाइन से लेकर मैन्युफैक्चरिंग तक सब कुछ स्वदेशी है। पीएम मोदी ने कहा कि भारत आज रक्षा क्षेत्र में तेजी से आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहा है। स्वदेशी तकनीक, भारतीय इंजीनियरिंग और देश के युवाओं की प्रतिभा के दम पर भारत समुद्र, जमीन और आसमान में अपनी सुरक्षा क्षमता को लगातार मजबूत कर रहा है। योगासन चैम्पियनशिप में भारत ने जीते 114 पदक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस से जुड़े कार्यक्रमों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस बार दुनिया के 2500 से अधिक स्थानों पर योग के कार्यक्रम आयोजित हुए। अहमदाबाद में आयोजित ‘विश्व योगासन चैम्पियनशिप’ की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि भारत ने इसमें शानदार प्रदर्शन किया। प्रधानमंत्री ने बताया कि भारत ने इस चैम्पियनशिप में कुल 114 पदक जीते, जिनमें 102 गोल्ड मेडल शामिल हैं। इस प्रदर्शन के साथ भारत पदक तालिका में पहले स्थान पर रहा। उन्होंने कहा कि योग अब केवल स्वास्थ्य का माध्यम नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक पहचान और वैश्विक योगदान का प्रतीक बन चुका है। महाराष्ट्र के पेठकर परिवार की सराहना ‘मन की बात’ में प्रधानमंत्री मोदी ने महाराष्ट्र के नांदेड़ जिले के बहादुरपुरा गांव के पेठकर परिवार का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि इस परिवार ने घर में विवाह के अवसर पर अपने गांव के लगभग साढ़े तीन हजार लोगों के लिए दुर्घटना बीमा की व्यवस्था की। हर व्यक्ति को एक लाख रुपए का बीमा कवर दिया गया। प्रधानमंत्री ने कहा कि सामाजिक अवसरों को समाजहित से जोड़ने की यह पहल प्रेरणादायक है। ऐसे उदाहरण दिखाते हैं कि समाज में सकारात्मक सोच और सामूहिक जिम्मेदारी की भावना कैसे बड़े बदलाव ला सकती है। नगालैंड की बेबी लीग और विमेन फुटसल लीग को बताया प्रेरक प्रधानमंत्री मोदी ने नगालैंड में चल रही दो खेल लीगों का उल्लेख करते हुए कहा कि ये सभी को प्रेरित कर सकती हैं। उन्होंने नगालैंड बेबी लीग का जिक्र किया, जिसमें 5 से 12 वर्ष तक के बच्चे भाग लेते हैं। यह लीग बच्चों की रफ्तार, प्रतिभा और खेल भावना को प्रोत्साहित करती है और तीन वर्ष पूरे कर चुकी है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने नगालैंड विमेन फुटसल लीग की भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि फुटसल को आम भाषा में इंडोर फुटबॉल कहा जाता है। इसमें पांच खिलाड़ी होते हैं और खेल छोटे मैदान पर तेज गति से खेला जाता है। इस खेल में खिलाड़ियों को तेजी से निर्णय लेने होते हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐसी लीगों से युवाओं और महिलाओं में खेल संस्कृति को बढ़ावा मिलता है।असम के हरगिला पक्षी और ‘हरगिला आर्मी’ की कहानी प्रधानमंत्री मोदी ने असम के दुर्लभ पक्षी ‘हरगिला’ का जिक्र करते हुए पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि हरगिला प्रकृति को स्वच्छ रखने में अहम भूमिका निभाता है, लेकिन असम के कुछ इलाकों में लंबे समय तक इसे अशुभ माना जाता था। लोग इसे अपने आसपास देखना पसंद नहीं करते थे और कई बार उन पेड़ों को भी काट दिया जाता था, जिन पर हरगिला के घोंसले होते थे। प्रधानमंत्री ने जीव-विज्ञानी पूर्णिमा देवी बर्मन के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि पूर्णिमा देवी ने लोगों के मन में बैठी गलत धारणा को बदलने का संकल्प लिया। उन्होंने महिलाओं और ग्रामीणों को विज्ञान के आधार पर समझाया। धीरे-धीरे महिलाएं इस अभियान से जुड़ती गईं और एक बड़ा बदलाव शुरू हुआ। पीएम मोदी ने कहा कि जिस पक्षी को कभी अशुभ मानकर भगाया जाता था, वही गांवों की पहचान बनने लगा। हजारों ग्रामीण महिलाएं हरगिला को बचाने के लिए आगे आईं और आज वे ‘हरगिला आर्मी’ के नाम से जानी जाती हैं। उन्होंने कहा कि यह उदाहरण दिखाता है कि सही जानकारी और जागरूकता से वर्षों पुरानी सोच भी बदली जा सकती है। नालंदा विश्वविद्यालय ने शास्त्रार्थ परंपरा को किया जीवंत प्रधानमंत्री मोदी ने नालंदा विश्वविद्यालय का उल्लेख करते हुए कहा कि इसने शास्त्रार्थ की प्राचीन भारतीय परंपरा को फिर से जीवंत किया है। उन्होंने कहा कि शास्त्रार्थ केवल अपनी बात रखने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह वाद-संवाद और मंथन की अनुशासित प्रक्रिया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि शास्त्रार्थ में तर्क और तथ्य के साथ अपनी बात रखना जरूरी होता है। साथ ही दूसरों के विचारों को धैर्य से सुनने और समझने की सीख भी इसी प्रक्रिया से मिलती है। उन्होंने प्रसन्नता जताई कि नालंदा विश्वविद्यालय ने शास्त्रार्थ को अपने दीक्षांत समारोह का हिस्सा बनाया। प्रधानमंत्री मोदी ने ‘मन की बात’ में कहा कि भारत की शक्ति केवल रक्षा, विज्ञान और तकनीक तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज की सकारात्मक पहल, खेल, योग, पर्यावरण संरक्षण और ज्ञान परंपरा भी देश की बड़ी ताकत हैं।
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राष्ट्रीय न्यूज़: नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने इंटेलिजेंस ब्यूरो यानी आईबी के स्पेशल डायरेक्टर महेश दीक्षित को देश की आंतरिक खुफिया एजेंसी का नया प्रमुख नियुक्त किया है। वे मौजूदा आईबी डायरेक्टर तपन कुमार डेका का स्थान लेंगे, जिनका कार्यकाल 30 जून 2026 को समाप्त हो रहा है। केंद्र सरकार ने महेश दीक्षित को दो वर्ष के लिए आईबी डायरेक्टर नियुक्त किया है। महेश दीक्षित 1993 बैच के आंध्र प्रदेश कैडर के आईपीएस अधिकारी हैं। वे फिलहाल इंटेलिजेंस ब्यूरो में स्पेशल डायरेक्टर के पद पर कार्यरत थे और एजेंसी के दूसरे सबसे वरिष्ठ अधिकारी माने जाते थे। खुफिया तंत्र, आंतरिक सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी अभियानों में उनके लंबे अनुभव को देखते हुए उन्हें यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है। जम्मू-कश्मीर में भी संभाल चुके हैं अहम जिम्मेदारी महेश दीक्षित इससे पहले जम्मू-कश्मीर में सब्सिडियरी इंटेलिजेंस ब्यूरो यानी एसआईबी के प्रमुख रह चुके हैं। जम्मू-कश्मीर जैसे संवेदनशील क्षेत्र में काम करने के दौरान उन्होंने सुरक्षा, खुफिया समन्वय और आतंकवाद विरोधी अभियानों से जुड़ी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। उन्हें आंतरिक सुरक्षा और खुफिया ऑपरेशन का अनुभवी अधिकारी माना जाता है। आईबी प्रमुख के रूप में महेश दीक्षित के सामने देश की आंतरिक सुरक्षा, आतंकवाद, साइबर चुनौतियों, कट्टरपंथी गतिविधियों, सीमा पार नेटवर्क और संगठित अपराध से जुड़े खुफिया तंत्र को और मजबूत करने की जिम्मेदारी होगी। बदलते सुरक्षा परिदृश्य में आईबी की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती तपन कुमार डेका का कार्यकाल 30 जून को होगा समाप्त मौजूदा आईबी डायरेक्टर तपन कुमार डेका का कार्यकाल 30 जून 2026 को पूरा हो रहा है। डेका 1988 बैच के हिमाचल प्रदेश कैडर के आईपीएस अधिकारी हैं। वे जुलाई 2022 से इंटेलिजेंस ब्यूरो के प्रमुख पद पर कार्यरत थे। केंद्र सरकार ने उनके कार्यकाल को दो बार विस्तार दिया था। तपन कुमार डेका को भी आतंकवाद विरोधी मामलों और आंतरिक सुरक्षा से जुड़े विषयों का अनुभवी अधिकारी माना जाता है। उनके कार्यकाल के दौरान आईबी ने कई संवेदनशील सुरक्षा मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अब उनके स्थान पर महेश दीक्षित देश की आंतरिक खुफिया एजेंसी की कमान संभालेंगे। आंतरिक सुरक्षा के लिहाज से अहम नियुक्ति इंटेलिजेंस ब्यूरो देश की प्रमुख आंतरिक खुफिया एजेंसी है। इसकी जिम्मेदारी देश के भीतर सुरक्षा से जुड़ी गतिविधियों पर नजर रखना, आतंकवाद और आंतरिक खतरे से संबंधित इनपुट जुटाना तथा केंद्र और राज्यों की सुरक्षा एजेंसियों के साथ समन्वय करना है। महेश दीक्षित की नियुक्ति को आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था में निरंतरता और अनुभव के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आईबी में लंबे समय तक कार्य करने और संवेदनशील क्षेत्रों में जिम्मेदारी संभालने के कारण वे एजेंसी की कार्यप्रणाली और सुरक्षा चुनौतियों से भली-भांति परिचित हैं। आने वाले समय में महेश दीक्षित के नेतृत्व में इंटेलिजेंस ब्यूरो की प्राथमिकता आतंरिक सुरक्षा तंत्र को और मजबूत करने, आधुनिक तकनीकी निगरानी क्षमता बढ़ाने और राज्यों के साथ खुफिया समन्वय को अधिक प्रभावी बनाने पर रह सकती है।
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गुप्त ध्वनि किरणों के साथ ओशो पर किसने हमला किया?...
गुप्त ध्वनि किरणों के साथ ओशो पर किसने हमला किया?... * ओशो के निजी दंत चिकित्सक देवगेट ओशो की मृत्यु से 4 दिन पहले हुई घटनाओं के बारे में बात करते हैं (शरीर को छोड़कर)... * 15 aजनवरी, 1990 को, मेरे जन्मदिन पर, मुझे शुन्यो से एक संदेश मिला: ओशो चाहते थे कि मैं उनके पेट का एक्स-रे ले। हम दंaत कक्ष में मिले। ओशो का शरीर पतला और बेकार लग रहा था, फिर भी मैंने उसे शक्तिशाली रूप से उपस्थित महसूस किया। मुझे शुन्यो से पता था कि वह हर दिन बीस घंटे से अधिक सो रहा था, हर शाम बुद्ध हॉल में कुछ क़ीमती मिनटों के लिए अपनी शारीरिक ऊर्जा को बचा रहा था। ओशो नेa मुझे बताया कि उसके हमलावरों की आवाज़ से उसका शरीर बहुत कमजोर हो गया था। उन्होंने कहा कि उनमें से शायद तीन, दो पुरुष और एक महिला, ध्वनि तरंगों पर ध्यानaa केंद्रित करने और अपने शरीर को लक्षित करने के लिए एक विशेष गठन में बैठे थे। यहां भारत में प्राचीन योगिक प्रथाएं हैं जहां लोग कुछ ध्वनियों, कुछ मंत्रों को जानते हैं, जो लोगों को नुक़सान पहुंचाने के लिए ध्वनि को केंद्रित कर सकते हैं। लेकिन मुझ पर हमला करaaने वाले ये लोग भारतीय नहीं हैं। वे वही लोग हैं जिन्होंने अमेरिका में पहले मुझे मारने की कोशिश की थी। वे तब सफल नहीं हो सके, और अब वे जो शुरू किया उसे पूरा कर ने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने मुझे बोलने से रोकने के लिए ज़हर की कोशिश की लेकिन मैं जारी रखने में कामयाब रहा। अब, पांच साल बाद वे वापस आ गए हैं। उन्होंने पहले बुद्ध हॉल में अपनी ध्वनि किरणों का उपयोग मेरे दिमाग़ पर हमला करने के लिए किया लेकिन मैं अपने दिमाग़ में नहीं हूं। मैं एक नो-मन हूं और उनकी आवाज़ का बहुत कम प्रभाव था। इसलिए उन्होंने अपनी रणनीति बदल दी, अब वे मेरे शरीर पर हमला कर रहे हैं। मेरे गरीब शरीर को उनकी किरणों से कोई सुरक्षा नहीं है। हर दिन यह कमजोर होता जाता है। वे मुझे मार नहीं सकते लेकिन वे मेरे शरीर को नुक़सान पहुंचा सकते हैं। अभी मेरे जिगर के क्षेत्र में बहुत दर्द हो रहा है। क्या आप इसे एक्स-रे कर सकते हैं? दुख की बात है, मैंने समझाया कि मेरी दंत एक्स-रे मशीन शायद अपर्याप्त थी क्योंकि यह केवल दांतों और जबड़े की छोटी फिल्में ले सकती थी, लेकिन हम कोशिश कर सकते थे। अमृतो को हमारे पास सबसे बड़ी एक्स-रे फ़िल्म मिली, जबकि मैंने इसकी बीम को चौड़ा करने के लिए डेंटल एक्स-रे मशीन के साथ जिग्गल किया। मैंने वह करने की कोशिश की जो ओशो पूछ रहा था। मैंने उसके जिगर के क्षेत्र की एक तस्वीर ली और फिर दंत विकास में बड़ी फ़िल्म विकसित करने में कामयाब रहा टैंक जिसे छोटी इंट्रा-ओरल डेंटल फ़िल्मों के लिए डिज़ाइन किया गया था, लेकिन परिणामी छवि धुंधली और अस्पष्ट थी। यह आख़िरी बार था जब मैंने ओशो को उसके भौतिक शरीर में देखा था। 19 जनवरी को शाम 4:30 बजे थे: मैं अपनी प्रेमिका के साथ अपने कमरे में था जब दरवाजे पर एक ज़रूरी दस्तक हुई। मनीषा, पीला और तनावग्रस्त दिख रही थी, ने पूछा कि क्या वह मेरे कमरे के फ़ोन का उपयोग कर सकती है। मुझे पता था कि वह केवल पूछेगी कि क्या कुछ असामान्य हो रहा है। अस्थायी सचिव के रूप में कार्य करते हुए वह इनर सर्कल के सदस्यों को फ़ोन कर रही थी और उन्हें कृष्णा हाउस में एक असाधारण बैठक में तुरंत आने के लिए कह रही थी। ओशो ने पंद्रह महीने पहले इक्कीस लोगों की एक कम्यून प्रबंधन टीम की स्थापना की थी, इसे इनर सर्कल का नाम दिया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका काम कम्यून के दिन-प्रतिदिन चलने का प्रबंधन करना था। मैं मूल चयन में नहीं था, लेकिन कुछ महीने बाद मुझे शामिल होने के लिए कहा गया था। फ़ोन करने के बाद, मनीषा ने कहा, “गीट, तुमने सुना कि मैं दूसरों को क्या बता रहा था। बैठक कृष्णा हाउस की छत पर ब्लू रूम में है। क्या आप वहां तुरंत जा सकते हैं?” इससे पहले कि मैं कोई सवाल पूछ पाता, वह जल्दी से गलियारे में चली गई, स्पष्ट रूप से एक और महत्वपूर्ण कार्य में शामिल थी। मैंने दोपहर के अधिकांश समय अजीब तरह से विपुल महसूस किया था। बाहरी मामलों की उथल-पुथल के बावजूद मैं कई दिनों से उत्साहित महसूस कर रहा था। मेरे दिल में ख़ुशी का एक अकथनीय नृत्य था। अंदर से मुझे उत्साह, आनंद महसूस हुआ। ब्लू रूम में पहुंचने पर, मैंने देखा कि अधिकांश इनर सर्कल पहले से ही वहां इकट्ठा हो चुके थे। माहौल तनावपूर्ण और तनावपूर्ण था। मेरा अपना उत्साह जगह से बाहर लग रहा था। मैं बैठ गया और इंतज़ार किया। कुछ मिनटों के बाद जयेश ने अमृतो के साथ प्रवेश किया। यह देखने के लिए संक्षेप में चारों ओर देखते हुए कि हम सभी मौजूद हैं, उन्होंने एक दृढ़, हालांकि शांत आवाज़ में कहा, “मुझे लगता है कि इसे लपेटने का कोई तरीक़ा नहीं है। मैं आपको सीधे बताऊंगा। ओशो ने कुछ समय पहले लगभग 4:45 बजे अपना शरीर छोड़ दिया था दोपहर।” स्तब्ध, मैंने अपनी घड़ी को देखा। शाम के 5:15 बजे थे। उपस्थित दो या तीन लोग रोने लगे। जयेश ने जल्दी से बीच में टोका, “देखो, मुझे तुम्हारी सारी मदद की ज़रूरत है। कृपया अभी तक अलग न हों। मुझे आप सभी की ज़रूरत है कि ओशो के भेजने को उतना ही सुंदर बनाने में मदद करें जितना वह हकदार है। यह आख़िरी चीज है जो हम उसके लिए कर सकते हैं भौतिक शरीर, चलो इसे अद्भुत बनाते हैं। उसने मुझे ठीक से बताया कि वह कैसे चाहता है कि ऐसा हो। उसने मुझे हर चीज के लिए विस्तृत निर्देश दिए, लेकिन मुझे यहां हर किसी की मदद की ज़रूरत है।” जयेश के शब्दों को सुनकर मेरा पहले का उत्साह सदमे में बदल गया था, लेकिन मैंने ओशो को अपने लोगों के साथ अपने अंतिम उत्सव का आनंद लेने में सक्षम बनाने के लिए हमारी मदद के लिए जयेश की अपील को स्पष्ट रूप से सुना। जैसे ही मैंने ब्लू रूम छोड़ा, जयेश ने मुझे बताया कि ओशो ने अनुरोध किया था कि मैं उनके शरीर को जलते हुए घाटों तक ले जाने के लिए एक वाहक बनूं। गतिविधि और भ्रमित भावनाओं के एक धुंध में मुझे याद है कि ओशो के इस अंतिम उपहार के लिए बेहद आभारी महसूस कर रहा था। - स्वामी देवगीत पुस्तक : ओशो - द फर्स्ट बुद्ध इन द डेंटल चेयर अध्याय: 17 अध्याय का नाम: ओशो का अंतिम दंत नाटक: अधिनियम V अंतिम सुनहरी झलक
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