राजस्थान न्यूज़: जयपुर के जगतपुरा क्षेत्र में सोमवार को जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) ने बड़े पैमाने पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की। नंदपुरी अंडरपास से रेलवे लाइन के समानांतर बनी सड़क को 80 फीट चौड़ा करने के उद्देश्य से चलाए जा रहे अभियान के तहत अब तक 125 से अधिक अवैध निर्माणों को ध्वस्त किया जा चुका है। कार्रवाई के दौरान पांच धार्मिक स्थलों को भी हटाया गया है। पूरे क्षेत्र को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया है और सुरक्षा व्यवस्था के लिए लगभग 3 हजार पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं 4-मंजिला नूरानी मस्जिद का ढांचा: सड़क के बीचों-बीच आ रहे इस ऊंचे पक्के निर्माण को हटाने के लिए जेडीए की विशेष पोकलेन और कटर मशीनें काम कर रही हैं। 2 प्राचीन मंदिर: स्थानीय आस्था से जुड़े इन दोनों मंदिरों की मुख्य संरचनाओं और चबूतरे को हटाया जा रहा है। 1 सत्संग भवन (बड़ा हॉल): सार्वजनिक सभाओं और सत्संग के लिए बने इस बड़े पक्के हॉल को ढहाया जा रहा है। 1 मजार (दरगाह): सड़क मार्ग के एलाइनमेंट में आ रही इस पुरानी मजार को भी पूरी तरह से स्थानांतरित और साफ किया जा रहा है। प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अभूतपूर्व सुरक्षा इंतजाम किए हैं। कार्रवाई को देखते हुए जयपुर के कई क्षेत्रों में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई हैं। संभागीय आयुक्त वी. सरवन कुमार द्वारा जारी आदेश के अनुसार रविवार रात 12 बजे से सोमवार रात 12 बजे तक प्रभावित क्षेत्रों में 2G, 3G, 4G और 5G मोबाइल इंटरनेट सेवाएं निलंबित रहेंगी। इसके साथ ही व्हाट्सएप, फेसबुक, एक्स (पूर्व में ट्विटर) सहित अन्य इंटरनेट आधारित मैसेजिंग और सोशल मीडिया सेवाओं पर भी अस्थायी रोक लगाई गई है। स्थिति को नियंत्रित रखने के लिए नंदपुरी क्षेत्र में बिजली आपूर्ति भी अस्थायी रूप से बंद कर दी गई है। प्रशासन का उद्देश्य इंटरनेट और वाई-फाई के माध्यम से अफवाहों या भ्रामक सामग्री के प्रसार को रोकना बताया गया है। क्षेत्र में कई स्थानों पर बैरिकेडिंग कर आवाजाही सीमित कर दी गई है तथा संवेदनशील इलाकों में आम लोगों के प्रवेश पर रोक लगाई गई है। कार्रवाई के दौरान ड्रोन कैमरों के माध्यम से पूरे क्षेत्र की निगरानी की जा रही है। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। छतों पर चढ़े लोगों को पुलिस द्वारा सार्वजनिक उद्घोषणा प्रणाली के माध्यम से नीचे उतरने के निर्देश दिए गए। साथ ही लोगों से अपील की गई कि वे किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न दें और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करें। स्थानीय निवासियों को इंटरनेट बंद होने के साथ-साथ नेटवर्क संबंधी समस्याओं का भी सामना करना पड़ रहा है। कई लोगों ने कॉल ड्रॉप और नो नेटवर्क जैसी परेशानियों की शिकायत की है। बिजली आपूर्ति बंद होने से भी दैनिक जीवन प्रभावित हुआ है। हालांकि प्रशासन का कहना है कि यह कदम केवल सुरक्षा और शांति व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से उठाए गए हैं। यह प्रतिबंध जयपुर पुलिस कमिश्नरेट और जयपुर जिले के अनेक थाना क्षेत्रों में लागू किया गया है। इनमें जयपुर उत्तर के रामगंज, गलता गेट, माणक चौक, सुभाष चौक, आमेर, ब्रह्मपुरी, नाहरगढ़, कोतवाली, जालूपुरा, शास्त्रीनगर, भट्टाबस्ती, विद्याधर नगर और जयसिंहपुरा खोर सहित कई क्षेत्र शामिल हैं। वहीं जयपुर पूर्व के बस्सी, कानोता, तूंगा, आदर्श नगर, जवाहर नगर, गांधी नगर, लालकोठी, मालवीय नगर, सांगानेर, प्रताप नगर और अन्य क्षेत्रों में भी इंटरनेट सेवाएं प्रभावित रहेंगी। प्रशासन का कहना है कि सड़क चौड़ीकरण और यातायात सुधार के उद्देश्य से यह कार्रवाई की जा रही है। अभियान के दौरान किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए पुलिस और प्रशासन पूरी तरह सतर्क है।
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राजस्थान न्यूज़: जयपुर। राजस्थान से राज्यसभा की तीन रिक्त हो रही सीटों के लिए होने वाले द्विवार्षिक चुनाव के तहत सोमवार को नामांकन के अंतिम दिन विधानसभा परिसर में राजनीतिक गतिविधियां तेज रहीं। भारतीय जनता पार्टी के अधिकृत उम्मीदवार सतीश पूनियाऔर अलका गुर्जर ने विधानसभा सचिवालय पहुंचकर निर्वाचन अधिकारी के समक्ष अपने नामांकन पत्र दाखिल किए। वर्तमान विधानसभा गणित को देखते हुए दोनों उम्मीदवारों का राज्यसभा पहुंचना लगभग तय माना जा रहा है। नामांकन प्रक्रिया के दौरान भाजपा ने संगठनात्मक एकजुटता का प्रदर्शन भी किया। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा दोनों प्रत्याशियों के नामांकन के दौरान विधानसभा में मौजूद रहे और उन्हें शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर सरकार और संगठन के कई वरिष्ठ नेता, मंत्री तथा विधायक भी उपस्थित रहे। पार्टी की ओर से यह संदेश देने का प्रयास किया गया कि राज्यसभा उम्मीदवारों के चयन को लेकर संगठन पूरी तरह एकमत है। पूर्व प्रदेशाध्यक्ष और वरिष्ठ भाजपा नेता डॉ. सतीश पूनिया के नामांकन के दौरान भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़, उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी तथा उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बेरवा विशेष रूप से उपस्थित रहे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि डॉ. पूनिया को राज्यसभा भेजने का निर्णय संगठन में उनके लंबे योगदान और राज्य की सामाजिक-राजनीतिक समीकरणों को ध्यान में रखकर लिया गया है। नामांकन के बाद डॉ. सतीश पूनिया ने पार्टी नेतृत्व का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वह स्वयं को हमेशा एक सामान्य कार्यकर्ता मानते हैं और राज्यसभा में राजस्थान के हितों, किसानों तथा आम जनता से जुड़े मुद्दों को मजबूती से उठाने का प्रयास करेंगे। वहीं डॉ. अलका गुर्जर के नामांकन के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की मौजूदगी ने विशेष राजनीतिक महत्व प्राप्त किया। उनके साथ डॉ. अलका गुर्जर के पति और पूर्व कैबिनेट मंत्री नाथू सिंह भी उपस्थित रहे। राजनीतिक जानकारों के अनुसार, अलका गुर्जर की उम्मीदवारी के माध्यम से भाजपा ने महिला नेतृत्व और गुर्जर समुदाय दोनों को महत्वपूर्ण प्रतिनिधित्व देने का संदेश दिया है। डॉ. अलका गुर्जर पूर्व में बांदीकुई से विधायक रह चुकी हैं और लंबे समय से भाजपा के राष्ट्रीय संगठन में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। उनकी राज्यसभा उम्मीदवारी को संगठनात्मक अनुभव और सामाजिक प्रतिनिधित्व के संतुलन के रूप में देखा जा रहा है। राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन प्रक्रिया के दौरान भाजपा नेतृत्व की सामूहिक उपस्थिति ने यह संकेत भी दिया कि पार्टी आगामी राजनीतिक चुनौतियों और चुनावी रणनीतियों को लेकर एकजुट होकर आगे बढ़ना चाहती है। अब नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद राज्यसभा चुनाव की औपचारिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
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राजस्थान न्यूज़: राजस्थान की राजनीति में एक बार फिर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच पुराने राजनीतिक विवादों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। गहलोत द्वारा 25 सितंबर 2022 के घटनाक्रम और सचिन पायलट को लेकर दिए गए बयान के बाद अब भाजपा नेता आचार्य प्रमोद कृष्णम ने उन पर तीखा हमला बोला है। आचार्य प्रमोद कृष्णम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रतिक्रिया देते हुए महाभारत के पात्र धृतराष्ट्र का उदाहरण दिया। उन्होंने लिखा कि पुत्र मोह में धृतराष्ट्र मानसिक रूप से अंधा हो गया था और सत्ता के सिंहासन के स्वार्थ में किसी व्यक्ति का इतना नीचे गिर जाना कल्पना से परे है। उनके इस बयान को अशोक गहलोत पर सीधा राजनीतिक हमला माना जा रहा है। रविवार को अशोक गहलोत ने एक साक्षात्कार और मीडिया बातचीत के दौरान वर्ष 2022 के कांग्रेस नेतृत्व संकट का उल्लेख करते हुए कहा था कि 25 सितंबर की बगावत पार्टी हाईकमान के खिलाफ नहीं, बल्कि सचिन पायलट के मुख्यमंत्री बनने की संभावना के खिलाफ थी। उन्होंने दावा किया था कि उस समय बड़ी संख्या में विधायक सचिन पायलट को मुख्यमंत्री के रूप में स्वीकार करने के पक्ष में नहीं थे। गहलोत ने यह भी कहा था कि यदि वह स्वयं पार्टी नेतृत्व के खिलाफ होते तो कांग्रेस आलाकमान उन्हें मुख्यमंत्री पद पर बनाए नहीं रखता। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें गलत तरीके से यह कहकर बदनाम किया गया कि वह मुख्यमंत्री पद छोड़कर कांग्रेस अध्यक्ष नहीं बनना चाहते थे, जबकि वास्तविकता यह थी कि वह राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के लिए तैयार थे। उनके अनुसार उस समय की परिस्थितियों और राजनीतिक घटनाक्रम के कारण उनकी छवि को नुकसान पहुंचा। पूर्व मुख्यमंत्री ने सचिन पायलट पर निशाना साधते हुए कहा था कि यदि पायलट उनकी ‘फॉरगेट एंड फॉरगिव’ की भावना को समझ लेते तो मानेसर प्रकरण जैसे मुद्दे लंबे समय तक चर्चा में नहीं रहते। उन्होंने यह भी कहा कि पायलट को कुछ राजनीतिक वास्तविकताओं को स्वीकार करना चाहिए, जिससे पुराने विवाद समाप्त हो सकें। गहलोत के इन बयानों के बाद कांग्रेस के भीतर एक बार फिर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। फिलहाल सचिन पायलट की ओर से इस पूरे घटनाक्रम पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। उनके समर्थक नेताओं और विधायकों ने भी अब तक सार्वजनिक रूप से कोई बयान नहीं दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पायलट खेमे की प्रतिक्रिया के बाद ही इस विवाद की अगली दिशा स्पष्ट होगी। उल्लेखनीय है कि आचार्य प्रमोद कृष्णम कांग्रेस में रहते हुए भी सचिन पायलट के समर्थक माने जाते थे और कई अवसरों पर गहलोत की आलोचना कर चुके हैं। भाजपा में शामिल होने के बाद भी उनका यह बयान राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है और इसे राजस्थान कांग्रेस की आंतरिक राजनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
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अजमेर न्यूज़: 1100 वर्ष पूर्व स्थापित मंदिर की बड़ी है मान्यता, दूर दराज से पहुंचते हैं हजारों श्रद्धालु
Read more 31st Aug 2022
अजमेर न्यूज़: 1968 से कस्बे की धार्मिक संस्था श्री ब्रह्म पुष्कर सेवा संघ कर रही है इस अनूठी परंपरा का निर्वहन
Read more 31st Aug 2022
अजमेर न्यूज़: 10 टीमें 8 - 8 वार्डो में जाकर घूम रही गायों का करेंगीं प्राथमिक उपचार
Read more 31st Aug 2022
राष्ट्रीय न्यूज़: नई दिल्ली। करीब दो वर्षों के अंतराल के बाद सोमवार को इंडिया गठबंधन की सातवीं बैठक आयोजित की गई, जिसमें 25 राजनीतिक दलों के नेताओं ने हिस्सा लिया। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में हुई इस बैठक में कई प्रमुख विपक्षी नेताओं ने भाग लिया, जबकि कुछ नेता ऑनलाइन माध्यम से जुड़े। बैठक में महाराष्ट्र के नेता उद्धव ठाकरे और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन वर्चुअल माध्यम से शामिल हुए, वहीं कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) की नेता सुप्रिया सुले और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने बैठक में भाग लिया। बैठक के बाद आयोजित प्रेस वार्ता में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने बताया कि दो घंटे से अधिक चली चर्चा के दौरान पांच प्रमुख मुद्दों पर सहमति बनी है। उन्होंने आरोप लगाया कि नीट परीक्षा से जुड़े विवादों और कथित अनियमितताओं के कारण देश के लाखों युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ हुआ है। खड़गे ने कहा कि नीट और सीबीएसई से जुड़े विवादों की नैतिक जिम्मेदारी केंद्रीय शिक्षा मंत्री की है और उन्हें तत्काल अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए। मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि इंडिया गठबंधन महंगाई, बेरोजगारी और देश की आर्थिक स्थिति जैसे मुद्दों को लगातार उठाएगा। इसके लिए गठबंधन ने हर दो महीने में नियमित बैठक आयोजित करने का निर्णय लिया है, ताकि इन विषयों पर साझा रणनीति बनाकर सरकार को घेरा जा सके। उन्होंने कहा कि आम जनता से जुड़े मुद्दों को लेकर विपक्षी दल संयुक्त रूप से अभियान चलाएंगे। बैठक में चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और मतदाता सूची पुनरीक्षण (एसआईआर) से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई। गठबंधन ने चुनावों की निष्पक्षता को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए भारत के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखने का निर्णय लिया है। विपक्षी नेताओं का मानना है कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता और चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता सुनिश्चित करना आवश्यक है। खड़गे ने बताया कि इंडिया गठबंधन की अगली बैठक 8 अगस्त को हैदराबाद में आयोजित की जाएगी। इसके अलावा संसद के आगामी मानसून सत्र के दौरान भी विपक्षी दल लगातार बैठकें कर साझा रणनीति तैयार करेंगे। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, लोकसभा चुनाव के बाद विपक्षी दलों की यह महत्वपूर्ण बैठक मानी जा रही है, जिसमें आगामी राजनीतिक और संसदीय रणनीति की रूपरेखा तैयार की गई है।
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राष्ट्रीय न्यूज़: शिक्षा व्यवस्था और हालिया शैक्षणिक विवादों को लेकर चर्चा में आई कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने बुधवार को दिल्ली में अपनी पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की। पार्टी के तीन प्रवक्ताओं ने मीडिया के सामने आकर अपनी मांगों और आगामी रणनीति को साझा किया। इस दौरान उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराते हुए कहा कि शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय किए बिना सुधार संभव नहीं है। पार्टी के प्रवक्ता सौरव दास ने हाल ही में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के चेयरमैन राहुल सिंह और सचिव हिमांशु गुप्ता के तबादले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि केवल अधिकारियों का स्थानांतरण समस्या का स्थायी समाधान नहीं है। उन्होंने कहा कि शिक्षा प्रणाली में जवाबदेही तय करने और संस्थागत सुधारों की आवश्यकता है। कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके 6 जून को अमेरिका से दिल्ली पहुंचेंगे। पार्टी के अनुसार उनके आगमन के बाद जंतर-मंतर पर प्रदर्शन आयोजित करने की अनुमति लेने के लिए संसद मार्ग थाना क्षेत्र में आवश्यक प्रक्रिया पूरी की जाएगी। संगठन ने देशभर के युवाओं से आंदोलन में भाग लेने की अपील भी की है। पार्टी नेताओं ने दावा किया कि प्रसिद्ध सामाजिक एवं पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी प्रस्तावित प्रदर्शन में शामिल हो सकते हैं। हालांकि इस संबंध में अभी कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। CJP नेताओं का कहना है कि यह आंदोलन केवल किसी एक मुद्दे तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था, प्रशासनिक जवाबदेही और राजनीतिक तंत्र को लेकर युवाओं में बढ़ती असंतुष्टि का प्रतीक है। उनका दावा है कि बड़ी संख्या में छात्र और युवा इस अभियान से जुड़ रहे हैं। कॉकरोच जनता पार्टी हाल ही में सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में आई है। संगठन का नाम भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की एक चर्चित टिप्पणी के बाद सामने आया था। संगठन के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और इंस्टाग्राम अकाउंट पर करोड़ों फॉलोअर्स होने का दावा किया जाता है। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके महाराष्ट्र के संभाजीनगर के निवासी हैं और डिजिटल मीडिया रणनीतिकार के रूप में कार्य कर चुके हैं। रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने पुणे से पत्रकारिता की पढ़ाई की है और वर्तमान में अमेरिका की Boston University में पब्लिक रिलेशंस विषय में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। अभिजीत दिपके पूर्व में आम आदमी पार्टी के सोशल मीडिया अभियानों से भी जुड़े रहे हैं। बताया जाता है कि वर्ष 2020 से 2022 के बीच उन्होंने पार्टी के डिजिटल प्रचार अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। बाद में उन्होंने उच्च शिक्षा और निजी करियर के कारण अमेरिका का रुख किया। राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर सक्रिय रहने वाले अभिजीत दिपके विभिन्न डिजिटल मंचों पर किसान आंदोलन, महंगाई और अन्य सार्वजनिक मुद्दों पर अपने विचार रखते रहे हैं। अब उनकी अगुवाई में CJP शिक्षा और युवाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर अभियान चलाने की तैयारी कर रही है।
Read more 4th Jun 2026
गुप्त ध्वनि किरणों के साथ ओशो पर किसने हमला किया?...
गुप्त ध्वनि किरणों के साथ ओशो पर किसने हमला किया?... * ओशो के निजी दंत चिकित्सक देवगेट ओशो की मृत्यु से 4 दिन पहले हुई घटनाओं के बारे में बात करते हैं (शरीर को छोड़कर)... * 15 aजनवरी, 1990 को, मेरे जन्मदिन पर, मुझे शुन्यो से एक संदेश मिला: ओशो चाहते थे कि मैं उनके पेट का एक्स-रे ले। हम दंaत कक्ष में मिले। ओशो का शरीर पतला और बेकार लग रहा था, फिर भी मैंने उसे शक्तिशाली रूप से उपस्थित महसूस किया। मुझे शुन्यो से पता था कि वह हर दिन बीस घंटे से अधिक सो रहा था, हर शाम बुद्ध हॉल में कुछ क़ीमती मिनटों के लिए अपनी शारीरिक ऊर्जा को बचा रहा था। ओशो नेa मुझे बताया कि उसके हमलावरों की आवाज़ से उसका शरीर बहुत कमजोर हो गया था। उन्होंने कहा कि उनमें से शायद तीन, दो पुरुष और एक महिला, ध्वनि तरंगों पर ध्यानaa केंद्रित करने और अपने शरीर को लक्षित करने के लिए एक विशेष गठन में बैठे थे। यहां भारत में प्राचीन योगिक प्रथाएं हैं जहां लोग कुछ ध्वनियों, कुछ मंत्रों को जानते हैं, जो लोगों को नुक़सान पहुंचाने के लिए ध्वनि को केंद्रित कर सकते हैं। लेकिन मुझ पर हमला करaaने वाले ये लोग भारतीय नहीं हैं। वे वही लोग हैं जिन्होंने अमेरिका में पहले मुझे मारने की कोशिश की थी। वे तब सफल नहीं हो सके, और अब वे जो शुरू किया उसे पूरा कर ने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने मुझे बोलने से रोकने के लिए ज़हर की कोशिश की लेकिन मैं जारी रखने में कामयाब रहा। अब, पांच साल बाद वे वापस आ गए हैं। उन्होंने पहले बुद्ध हॉल में अपनी ध्वनि किरणों का उपयोग मेरे दिमाग़ पर हमला करने के लिए किया लेकिन मैं अपने दिमाग़ में नहीं हूं। मैं एक नो-मन हूं और उनकी आवाज़ का बहुत कम प्रभाव था। इसलिए उन्होंने अपनी रणनीति बदल दी, अब वे मेरे शरीर पर हमला कर रहे हैं। मेरे गरीब शरीर को उनकी किरणों से कोई सुरक्षा नहीं है। हर दिन यह कमजोर होता जाता है। वे मुझे मार नहीं सकते लेकिन वे मेरे शरीर को नुक़सान पहुंचा सकते हैं। अभी मेरे जिगर के क्षेत्र में बहुत दर्द हो रहा है। क्या आप इसे एक्स-रे कर सकते हैं? दुख की बात है, मैंने समझाया कि मेरी दंत एक्स-रे मशीन शायद अपर्याप्त थी क्योंकि यह केवल दांतों और जबड़े की छोटी फिल्में ले सकती थी, लेकिन हम कोशिश कर सकते थे। अमृतो को हमारे पास सबसे बड़ी एक्स-रे फ़िल्म मिली, जबकि मैंने इसकी बीम को चौड़ा करने के लिए डेंटल एक्स-रे मशीन के साथ जिग्गल किया। मैंने वह करने की कोशिश की जो ओशो पूछ रहा था। मैंने उसके जिगर के क्षेत्र की एक तस्वीर ली और फिर दंत विकास में बड़ी फ़िल्म विकसित करने में कामयाब रहा टैंक जिसे छोटी इंट्रा-ओरल डेंटल फ़िल्मों के लिए डिज़ाइन किया गया था, लेकिन परिणामी छवि धुंधली और अस्पष्ट थी। यह आख़िरी बार था जब मैंने ओशो को उसके भौतिक शरीर में देखा था। 19 जनवरी को शाम 4:30 बजे थे: मैं अपनी प्रेमिका के साथ अपने कमरे में था जब दरवाजे पर एक ज़रूरी दस्तक हुई। मनीषा, पीला और तनावग्रस्त दिख रही थी, ने पूछा कि क्या वह मेरे कमरे के फ़ोन का उपयोग कर सकती है। मुझे पता था कि वह केवल पूछेगी कि क्या कुछ असामान्य हो रहा है। अस्थायी सचिव के रूप में कार्य करते हुए वह इनर सर्कल के सदस्यों को फ़ोन कर रही थी और उन्हें कृष्णा हाउस में एक असाधारण बैठक में तुरंत आने के लिए कह रही थी। ओशो ने पंद्रह महीने पहले इक्कीस लोगों की एक कम्यून प्रबंधन टीम की स्थापना की थी, इसे इनर सर्कल का नाम दिया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका काम कम्यून के दिन-प्रतिदिन चलने का प्रबंधन करना था। मैं मूल चयन में नहीं था, लेकिन कुछ महीने बाद मुझे शामिल होने के लिए कहा गया था। फ़ोन करने के बाद, मनीषा ने कहा, “गीट, तुमने सुना कि मैं दूसरों को क्या बता रहा था। बैठक कृष्णा हाउस की छत पर ब्लू रूम में है। क्या आप वहां तुरंत जा सकते हैं?” इससे पहले कि मैं कोई सवाल पूछ पाता, वह जल्दी से गलियारे में चली गई, स्पष्ट रूप से एक और महत्वपूर्ण कार्य में शामिल थी। मैंने दोपहर के अधिकांश समय अजीब तरह से विपुल महसूस किया था। बाहरी मामलों की उथल-पुथल के बावजूद मैं कई दिनों से उत्साहित महसूस कर रहा था। मेरे दिल में ख़ुशी का एक अकथनीय नृत्य था। अंदर से मुझे उत्साह, आनंद महसूस हुआ। ब्लू रूम में पहुंचने पर, मैंने देखा कि अधिकांश इनर सर्कल पहले से ही वहां इकट्ठा हो चुके थे। माहौल तनावपूर्ण और तनावपूर्ण था। मेरा अपना उत्साह जगह से बाहर लग रहा था। मैं बैठ गया और इंतज़ार किया। कुछ मिनटों के बाद जयेश ने अमृतो के साथ प्रवेश किया। यह देखने के लिए संक्षेप में चारों ओर देखते हुए कि हम सभी मौजूद हैं, उन्होंने एक दृढ़, हालांकि शांत आवाज़ में कहा, “मुझे लगता है कि इसे लपेटने का कोई तरीक़ा नहीं है। मैं आपको सीधे बताऊंगा। ओशो ने कुछ समय पहले लगभग 4:45 बजे अपना शरीर छोड़ दिया था दोपहर।” स्तब्ध, मैंने अपनी घड़ी को देखा। शाम के 5:15 बजे थे। उपस्थित दो या तीन लोग रोने लगे। जयेश ने जल्दी से बीच में टोका, “देखो, मुझे तुम्हारी सारी मदद की ज़रूरत है। कृपया अभी तक अलग न हों। मुझे आप सभी की ज़रूरत है कि ओशो के भेजने को उतना ही सुंदर बनाने में मदद करें जितना वह हकदार है। यह आख़िरी चीज है जो हम उसके लिए कर सकते हैं भौतिक शरीर, चलो इसे अद्भुत बनाते हैं। उसने मुझे ठीक से बताया कि वह कैसे चाहता है कि ऐसा हो। उसने मुझे हर चीज के लिए विस्तृत निर्देश दिए, लेकिन मुझे यहां हर किसी की मदद की ज़रूरत है।” जयेश के शब्दों को सुनकर मेरा पहले का उत्साह सदमे में बदल गया था, लेकिन मैंने ओशो को अपने लोगों के साथ अपने अंतिम उत्सव का आनंद लेने में सक्षम बनाने के लिए हमारी मदद के लिए जयेश की अपील को स्पष्ट रूप से सुना। जैसे ही मैंने ब्लू रूम छोड़ा, जयेश ने मुझे बताया कि ओशो ने अनुरोध किया था कि मैं उनके शरीर को जलते हुए घाटों तक ले जाने के लिए एक वाहक बनूं। गतिविधि और भ्रमित भावनाओं के एक धुंध में मुझे याद है कि ओशो के इस अंतिम उपहार के लिए बेहद आभारी महसूस कर रहा था। - स्वामी देवगीत पुस्तक : ओशो - द फर्स्ट बुद्ध इन द डेंटल चेयर अध्याय: 17 अध्याय का नाम: ओशो का अंतिम दंत नाटक: अधिनियम V अंतिम सुनहरी झलक
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