September 20, 2026
राष्ट्रीय न्यूज़: मुंबई। बॉलीवुड के स्टार कपल दीपिका पादुकोण और रणवीर सिंह के घर एक बार फिर खुशियों ने दस्तक दी है। दोनों शनिवार, 19 सितंबर 2026 को दूसरी बार माता-पिता बने हैं। दीपिका ने दूसरी बेटी को जन्म दिया है। कपल ने सोशल मीडिया पर एक बेहद प्यारा पोस्ट साझा कर अपने फैंस के साथ यह खुशखबरी शेयर की। दीपिका और रणवीर ने अपने संयुक्त इंस्टाग्राम पोस्ट में नवजात बच्ची के छोटे-छोटे फुटप्रिंट की तस्वीर शेयर की। इसके साथ उन्होंने लिखा—“Welcome baby girl! 19/9/2026. Dua, Deepika and Ranveer.” पोस्ट में नजर से बचाने वाला इमोजी भी लगाया गया है। हालांकि कपल ने फिलहाल अपनी दूसरी बेटी का नाम सार्वजनिक नहीं किया है। दुआ बनी बड़ी बहन दीपिका और रणवीर की पहली बेटी दुआ पादुकोण सिंह का जन्म 8 सितंबर 2024 को हुआ था। अब करीब दो साल बाद परिवार में दूसरी बेटी के आने से दुआ बड़ी बहन बन गई हैं। खास बात यह है कि दोनों बेटियों का जन्म सितंबर महीने में हुआ है। कपल की ओर से दूसरी बेटी के जन्म की घोषणा होते ही सोशल मीडिया पर बधाइयों का सिलसिला शुरू हो गया। फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोगों और फैंस ने दोनों को शुभकामनाएं दीं और नए मेहमान का स्वागत किया। अप्रैल में की थी दूसरी प्रेग्नेंसी की घोषणा दीपिका और रणवीर ने इसी साल अप्रैल में अपनी दूसरी प्रेग्नेंसी की जानकारी सोशल मीडिया पर साझा की थी। उस समय उन्होंने एक खास पोस्ट के जरिए फैंस को बताया था कि उनका परिवार एक बार फिर बढ़ने वाला है। अब सितंबर में दूसरी बेटी के जन्म के साथ कपल के घर एक और नन्ही सदस्य आ गई है। शादी के छह साल बाद चार लोगों का हुआ परिवार दीपिका पादुकोण और रणवीर सिंह ने नवंबर 2018 में इटली में शादी की थी। शादी के करीब छह साल बाद सितंबर 2024 में दोनों पहली बार माता-पिता बने और बेटी दुआ का स्वागत किया। अब दूसरी बेटी के जन्म के बाद उनका परिवार चार सदस्यों का हो गया है। दीपिका और रणवीर अपने पारिवारिक जीवन को काफी निजी रखते हैं और दुआ की तस्वीरें भी सीमित मौकों पर ही साझा की हैं। दूसरी बेटी के जन्म की जानकारी भी उन्होंने बेहद सादगी से फुटप्रिंट वाली पोस्ट के जरिए दी है। राधाष्टमी के दिन आई नन्ही परी इस बार 19 सितंबर को राधाष्टमी का पर्व भी मनाया जा रहा है। ऐसे में दीपिका और रणवीर की दूसरी बेटी का जन्म इसी शुभ अवसर पर हुआ है। इसे लेकर सोशल मीडिया पर फैंस लगातार कपल को बधाई दे रहे हैं। फिलहाल कपल ने नवजात बच्ची की तस्वीर या नाम साझा नहीं किया है। फैंस अब यह जानने के लिए उत्सुक हैं कि दीपिका और रणवीर अपनी दूसरी बेटी का क्या नाम रखते हैं।
September 20, 2026
राष्ट्रीय न्यूज़: तिरुपति/नई दिल्ली। तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (TTD) के प्रसिद्ध श्रीवारी लड्डू प्रसाद में इस्तेमाल होने वाले घी की कथित मिलावट के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने सुकृति फूड्स प्राइवेट लिमिटेड के प्रमोटर कैलाश चंद मंगला को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत गिरफ्तार किया है। ED के मुताबिक मंगला को हैदराबाद जोनल कार्यालय ने 17 सितंबर को हिरासत में लिया था और शुक्रवार को जारी बयान में कार्रवाई की जानकारी दी गई। बाद में उन्हें विशाखापत्तनम की विशेष PMLA अदालत में पेश किया गया, जहां से न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। ED का आरोप है कि TTD को जिस सामग्री की आपूर्ति ‘एगमार्क स्पेशल ग्रेड काउ घी’ बताकर की गई, उसमें वास्तविक गाय के घी के स्थान पर रिफाइंड पाम ऑयल, पाम कर्नेल ऑयल, पामोलिन और कई रासायनिक पदार्थों का इस्तेमाल किया गया। एजेंसी ने MG-90, मोनोग्लिसराइड्स, Myvacet Soft 400 और acetic acid ester जैसे पदार्थों का भी उल्लेख किया है। जांच एजेंसी का कहना है कि इन सामग्रियों को मिलाकर ऐसा उत्पाद तैयार किया गया जिसे रिकॉर्ड में शुद्ध गाय के घी के रूप में दिखाया गया। ₹230 करोड़ की कथित सप्लाई, ₹96 करोड़ का घी मंगला से जुड़ा ED की जांच के अनुसार वर्ष 2019 से 2024 के बीच TTD को कथित रूप से करीब ₹230 करोड़ मूल्य का मिलावटी घी सप्लाई किया गया। एजेंसी का आरोप है कि इसमें लगभग ₹96 करोड़ मूल्य का मिलावटी घी कैलाश चंद मंगला की इकाई में तैयार किया गया था। इसलिए ₹230 करोड़ की पूरी राशि को अकेले सुकृति फूड्स द्वारा तैयार घी की रकम मानना सही नहीं होगा; ED ने व्यापक कथित सप्लाई नेटवर्क के लिए ₹230 करोड़ और मंगला से जुड़े निर्माण के लिए करीब ₹96 करोड़ का आंकड़ा बताया है। जांच एजेंसी ने मंगला को इस कथित नेटवर्क का सह-साजिशकर्ता बताया है। ED का दावा है कि उन्होंने मिलावट में इस्तेमाल होने वाली सामग्री जुटाने, अपने परिसर में कथित मिलावटी घी तैयार करने और इसे अलग-अलग कारोबारी इकाइयों के माध्यम से सप्लाई कराने में भूमिका निभाई। एजेंसी ने Sri Vyshnavi Dairy Specialities, Malganga Milk & Agro Products और A.R. Dairy Foods जैसी इकाइयों के जरिए सप्लाई समन्वय किए जाने का आरोप भी लगाया है।खरीद-बिक्री के फर्जी रिकॉर्ड बनाने का भी आरोप ED के मुताबिक कथित मिलावट को छिपाने के लिए घी और रिफाइंड पाम ऑयल की खरीद-बिक्री से जुड़े रिकॉर्ड में भी हेरफेर किया गया। एजेंसी का आरोप है कि ऐसे दस्तावेज तैयार किए गए जिनसे यह दिखाया जा सके कि उत्पादन और सप्लाई वास्तविक गाय के घी की थी, जबकि जांच में दूसरी सामग्री के उपयोग का दावा सामने आया। इन आरोपों की अंतिम कानूनी पुष्टि अदालत में साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही होगी। मनी लॉन्ड्रिंग की यह जांच तिरुपति ईस्ट पुलिस की उस FIR से जुड़ी है जिसमें कथित आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, जालसाजी और भ्रष्टाचार के जरिए TTD को मिलावटी घी सप्लाई करने के आरोप लगाए गए थे। उसी कथित अपराध से पैदा हुई रकम और वित्तीय लेन-देन की जांच ED PMLA के तहत कर रही है।इससे पहले भोले बाबा ऑर्गेनिक डेयरी के प्रमोटर की भी गिरफ्तारी कैलाश चंद मंगला इस मामले में गिरफ्तार होने वाले पहले कारोबारी नहीं हैं। ED इससे पहले भोले बाबा ऑर्गेनिक डेयरी मिल्क से जुड़े प्रमोटर एवं निदेशक विपिन जैन को भी इसी जांच में गिरफ्तार कर चुकी है। एजेंसी अब कथित सप्लाई चेन, भुगतान, विभिन्न कारोबारी संस्थाओं और घी के निर्माण एवं बिक्री रिकॉर्ड की जांच आगे बढ़ा रही है।‘पशु चर्बी’ के पुराने विवाद से अलग है ED का मौजूदा दावा तिरुपति लड्डू विवाद में एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। ED के मौजूदा बयान में कथित मिलावट के रूप में पाम आधारित तेल और रासायनिक पदार्थों का उल्लेख किया गया है; एजेंसी ने इस कार्रवाई में पशु चर्बी मिलने का दावा नहीं किया है। इससे पहले CBI द्वारा गठित SIT की जांच में जांचे गए नमूनों में पशु चर्बी की मौजूदगी स्थापित नहीं होने की रिपोर्ट सामने आई थी, हालांकि घी में अन्य प्रकार की मिलावट और खरीद प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की जांच अलग विषय रही है।इसलिए मौजूदा ED कार्रवाई को सीधे पुराने “animal fat” आरोप की पुष्टि के रूप में प्रस्तुत करना सही नहीं होगा। ताजा कार्रवाई का केंद्र कथित रूप से पाम ऑयल, पामोलिन, पाम कर्नेल ऑयल तथा अन्य पदार्थों का इस्तेमाल कर गाय के घी के नाम पर उत्पाद तैयार करने और उसके वित्तीय लेन-देन पर है। रोज तैयार होते हैं 4 लाख से ज्यादा श्रीवारी लड्डू तिरुपति का श्रीवारी लड्डू दुनिया के सबसे प्रसिद्ध धार्मिक प्रसादों में शामिल है। TTD की जून 2026 की आधिकारिक जानकारी के अनुसार मंदिर प्रशासन प्रतिदिन 4 लाख से अधिक लड्डू तैयार करता है। मई में औसतन करीब 4.08 लाख लड्डू प्रतिदिन बनाए गए थे। अकेले जून 2026 में रिकॉर्ड 1.26 करोड़ से अधिक लड्डुओं की बिक्री हुई।TTD के मुताबिक लड्डू निर्माण में रोजाना लगभग 16 टन घी सहित करीब 68 टन कच्ची सामग्री इस्तेमाल होती है। इतनी बड़ी मात्रा में प्रसाद तैयार होने के कारण घी की गुणवत्ता और सप्लाई चेन की निगरानी सीधे करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और खाद्य गुणवत्ता से जुड़ा विषय है।अब मनी ट्रेल और सप्लाई नेटवर्क की जांच कैलाश चंद मंगला को न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के बाद ED की जांच अब कथित मिलावट से पैदा हुई आय, कारोबारी संस्थाओं के बीच हुए भुगतान और सप्लाई नेटवर्क पर केंद्रित है। एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कथित मिलावटी उत्पाद किन-किन संस्थाओं के जरिए TTD तक पहुंचा और इससे जुड़े वित्तीय लाभ का प्रवाह किस तरह हुआ। फिलहाल कैलाश चंद मंगला के खिलाफ लगाए गए ये सभी आरोप ED की जांच का हिस्सा हैं। गिरफ्तारी या एजेंसी का आरोप अपने आप में दोषसिद्धि नहीं है और मामले की अंतिम आपराधिक जिम्मेदारी अदालत में उपलब्ध साक्ष्यों तथा न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर तय होगी।
September 20, 2026
राष्ट्रीय न्यूज़: अलवर। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए किसी बड़े राजनीतिक चेहरे की हूबहू शक्ल और आवाज तैयार कर लोगों से साइबर ठगी करने का गंभीर मामला सामने आया है। तमिलनाडु क्राइम ब्रांच-CID की साइबर क्राइम विंग ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय का कथित AI डीपफेक वीडियो बनाकर लोगों को आर्थिक सहायता का झांसा देने के मामले में राजस्थान के अलवर जिले से 28 वर्षीय युवक को गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान शयाबू/सायबू खान के रूप में हुई है, जो अलवर जिले के लक्ष्मणगढ़ क्षेत्र के बुटोली गांव का रहने वाला बताया गया है। पुलिस ने उसे 12 सितंबर को राजस्थान पुलिस की सहायता से गिरफ्तार किया।पुलिस के अनुसार सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो प्रसारित किए जा रहे थे जिनमें मुख्यमंत्री विजय की तस्वीर और हाव-भाव का इस्तेमाल किया गया, लेकिन आवाज AI की मदद से बदलकर हिंदी में तैयार की गई थी। वीडियो देखने पर ऐसा प्रतीत होता था जैसे मुख्यमंत्री स्वयं आर्थिक रूप से जरूरतमंद लोगों को शिक्षा, इलाज, व्यवसाय या अन्य आवश्यकताओं के लिए आर्थिक मदद देने की बात कर रहे हों। इसके बाद वीडियो में लोगों को एक WhatsApp नंबर पर संपर्क करने के लिए कहा जाता था। ऐसे बिछाया जाता था ठगी का जाल जांच एजेंसियों के अनुसार डीपफेक वीडियो का उद्देश्य लोगों को यह विश्वास दिलाना था कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री या उनके नाम से जुड़ी कोई संस्था आर्थिक सहायता उपलब्ध करा रही है। सहायता पाने के इच्छुक लोगों को WhatsApp नंबर पर संपर्क करने के लिए कहा जाता था। इसके बाद कथित तौर पर रजिस्ट्रेशन, सत्यापन, प्रोसेसिंग फीस या दूसरी औपचारिकताओं के नाम पर रुपये मांगे जाते थे। इंदौर में सामने आई इसी तरह की शिकायतों में पीड़ितों से 10 हजार से 60 हजार रुपए तक मांगे जाने की जानकारी पुलिस को मिली थी। तमिलनाडु CB-CID का कहना है कि इस तरह के वीडियो के जरिए मध्यप्रदेश सहित कई राज्यों के लोगों को निशाना बनाया गया। एक पीड़ित तक डिजिटल ट्रेल के जरिए पहुंचकर उसका बयान भी दर्ज किया गया, जिसे पुलिस ने जांच में महत्वपूर्ण माना। हालांकि कितने लोगों से कुल कितनी रकम ठगी गई, इसकी अंतिम आधिकारिक संख्या अभी सार्वजनिक नहीं की गई है। साइबर पेट्रोलिंग में पकड़ा गया फर्जी वीडियो यह मामला 1 सितंबर को तमिलनाडु CB-CID की नियमित साइबर पेट्रोलिंग के दौरान सामने आया। सोशल मीडिया, खासतौर पर Facebook पर मुख्यमंत्री विजय के नाम और चेहरे वाले संदिग्ध वीडियो देखे गए। जांच करने पर पुलिस को संदेह हुआ कि ये असली वीडियो नहीं बल्कि AI की मदद से तैयार किए गए डीपफेक हैं। इसके बाद मामला दर्ज कर वीडियो, सोशल मीडिया अकाउंट, WhatsApp नंबर और अन्य डिजिटल फुटप्रिंट की तकनीकी जांच शुरू की गई। जांच के दौरान डिजिटल कड़ियां राजस्थान तक पहुंचीं। तमिलनाडु पुलिस की टीम अलवर आई और स्थानीय पुलिस की मदद से लक्ष्मणगढ़ क्षेत्र में आरोपी का पता लगाया। 12 सितंबर को कार्रवाई करते हुए शयाबू खान को गिरफ्तार कर लिया गया। उसके पास से मोबाइल फोन, SIM कार्ड और एक CPU सहित इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए गए हैं। पुलिस का दावा है कि इनमें मामले से जुड़े डिजिटल साक्ष्य मिले हैं। अलवर से चेन्नई ले जाया गया आरोपी गिरफ्तारी के बाद आरोपी को ट्रांजिट प्रक्रिया के जरिए तमिलनाडु ले जाया गया और अदालत में पेश किया गया। वहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। CB-CID अब यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपी ने कथित रूप से पूरा नेटवर्क अकेले संचालित किया या उसके साथ दूसरे लोग भी जुड़े हुए थे। पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के प्रावधानों के तहत केस दर्ज किया है। जांच अभी जारी है, इसलिए आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया में होगा। पाकिस्तान से संचालित बताए जा रहे अकाउंट भी जांच में इस जांच में एक और पहलू सामने आया है। तमिलनाडु CB-CID के अनुसार इसी तरह के मुख्यमंत्री विजय के डीपफेक वीडियो कुछ ऐसे Facebook अकाउंट से भी प्रसारित किए गए जिन्हें पाकिस्तान से संचालित किए जाने का संदेह है। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इन खातों और राजस्थान से गिरफ्तार आरोपी के बीच कोई संबंध था या ये अलग-अलग गिरोह थे। इस बिंदु पर किसी विदेशी नेटवर्क से आरोपी का सीधा संबंध स्थापित होने की सार्वजनिक पुष्टि नहीं हुई है। जांच एजेंसी ने केवल संदिग्ध विदेशी अकाउंट और संभावित नेटवर्क की जांच जारी होने की बात कही है। गरीबों और जरूरतमंदों को बनाया निशाना कथित ठगी के लिए ऐसे लोगों को लक्षित किया गया जो इलाज, पढ़ाई, रोजगार या व्यवसाय शुरू करने के लिए आर्थिक सहायता चाहते थे। मुख्यमंत्री जैसे सार्वजनिक व्यक्ति का चेहरा सामने होने के कारण वीडियो को असली मानने की संभावना बढ़ जाती थी। इसी भरोसे का फायदा उठाकर लोगों को WhatsApp पर बातचीत के लिए ले जाने और फिर भुगतान मांगने का आरोप है। साइबर अपराध में AI डीपफेक के इस्तेमाल का यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें केवल किसी व्यक्ति की तस्वीर का गलत इस्तेमाल नहीं हुआ, बल्कि ऐसा वीडियो बनाया गया जिसमें सार्वजनिक पद पर बैठे व्यक्ति को ऐसी बातें कहते हुए दिखाया गया जो उन्होंने वास्तव में नहीं कहीं थीं। पुलिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से वीडियो हटाने को भी कहा जांच के दौरान तमिलनाडु पुलिस ने Facebook से संबंधित डीपफेक वीडियो हटाने के लिए भी संपर्क किया। साथ ही उन खातों और नंबरों की पहचान की जा रही है जिनके जरिए वीडियो प्रसारित किए गए और लोगों से संपर्क किया गया। पुलिस यह भी जांच रही है कि ठगी से हासिल रकम किन बैंक खातों या डिजिटल माध्यमों में पहुंची। AI डीपफेक से बढ़ा साइबर फ्रॉड का नया खतरा यह मामला लोगों के लिए भी चेतावनी है कि किसी मुख्यमंत्री, मंत्री, फिल्म स्टार या दूसरे चर्चित व्यक्ति का वीडियो सोशल मीडिया पर दिखाई देने मात्र से उसे वास्तविक न मानें। AI तकनीक से अब चेहरे के हाव-भाव, होंठों की गतिविधि और आवाज तक को इस तरह बदला जा सकता है कि सामान्य तौर पर फर्जी और असली वीडियो में अंतर करना कठिन हो जाए। विशेष रूप से ऐसे वीडियो जिनमें सरकारी सहायता, अनुदान, लोन, नौकरी या आर्थिक मदद दिलाने के बदले पहले रजिस्ट्रेशन अथवा प्रोसेसिंग फीस मांगी जाए, उनकी आधिकारिक सरकारी वेबसाइट या सत्यापित हेल्पलाइन से पुष्टि करना जरूरी है। मौजूदा मामले में भी पुलिस का आरोप है कि मुख्यमंत्री के नाम और चेहरे पर भरोसा पैदा कर लोगों को आर्थिक लेन-देन के लिए प्रेरित किया गया।
September 17, 2026
राष्ट्रीय न्यूज़: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 76वां जन्मदिन गुरुवार, 17 सितंबर को देशभर में विभिन्न कार्यक्रमों के साथ मनाया जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी की ओर से इस मौके पर ‘सेवा संकल्प अभियान’ की शुरुआत की गई है। यह अभियान प्रधानमंत्री मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर से भी जोड़ा गया है। अभियान के तहत सेवा, जनसंपर्क और कल्याणकारी योजनाओं से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। जन्मदिन के मौके पर प्रधानमंत्री मोदी ने पश्चिम बंगाल में ‘अन्नपूर्णा योजना’ की किस्त वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जारी की। इस दौरान उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल के लोगों को लंबे समय तक केंद्र की योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाया, जिससे उन्हें नुकसान हुआ। योजना की चौथी किस्त के तहत बड़ी संख्या में महिला लाभार्थियों को राशि सीधे बैंक खातों में भेजे जाने की जानकारी सामने आई है। वडनगर से वाराणसी तक बाइक यात्रा गृह मंत्री अमित शाह ने प्रधानमंत्री मोदी के जन्मस्थान वडनगर से ‘सेवा संकल्प बाइक यात्रा’ को रवाना किया। यह यात्रा 10 राज्यों और 193 जिलों से होकर गुजरेगी। रिपोर्टों के मुताबिक यात्रा में करीब 600 बाइकर्स शामिल हैं और इसका समापन 7 अक्टूबर को प्रस्तावित है। इसी अभियान के तहत वाराणसी से वडनगर के लिए भी बाइक यात्रा शुरू की गई है। दोनों यात्राओं को प्रधानमंत्री मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने से जोड़ा गया है। वडनगर और वाराणसी उनके जीवन से जुड़े दो प्रमुख स्थान हैं—वडनगर उनका जन्मस्थान है, जबकि वाराणसी उनका लोकसभा क्षेत्र है। दोनों दिशाओं से निकलने वाली यात्राओं का समापन 7 अक्टूबर को होना है। अमित शाह ने गिनाईं मोदी सरकार की उपलब्धियां वडनगर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान अमित शाह ने प्रधानमंत्री मोदी के 25 वर्ष के सार्वजनिक जीवन का उल्लेख किया। शाह ने कहा कि मोदी ने लगातार सेवा करते हुए काम किया और लंबे समय तक रोजाना 16 से 18 घंटे काम किया। उन्होंने मोदी के कार्यकाल को ‘इंडिया फर्स्ट’ के मंत्र से जोड़ते हुए कहा कि राष्ट्रीय हित को प्राथमिकता देकर देश को विकास की दिशा में आगे बढ़ाने का काम किया गया। शाह ने केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं का भी उल्लेख किया। शाह के मुताबिक मोदी सरकार के कार्यकाल में 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आए। उन्होंने गरीबों को पक्के मकान, बिजली, नल से पानी, शौचालय, गैस कनेक्शन और मुफ्त राशन जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने का दावा किया। गरीबी से बाहर आने वाले लोगों का आंकड़ा प्रधानमंत्री मोदी के पूर्व सार्वजनिक बयानों में भी सामने आया है। करोड़ लोगों को मुफ्त राशन का जिक्र अमित शाह ने करीब 80 करोड़ लोगों को हर महीने 5 किलो मुफ्त अनाज दिए जाने और स्वास्थ्य कवर का भी उल्लेख किया। केंद्र सरकार के आधिकारिक आंकड़ों में भी 80 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन तथा बड़ी संख्या में लोगों को स्वास्थ्य बीमा कवर दिए जाने की जानकारी दी गई है। शाह ने प्रधानमंत्री मोदी की राष्ट्रीय सुरक्षा नीति और सुशासन का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि मोदी ने राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर स्पष्ट नीति अपनाई और भ्रष्टाचार तथा घोटालों से निपटने की दिशा में काम किया। उन्होंने मोदी के खुद को ‘प्रधान सेवक’ कहने का भी उल्लेख किया। शाम को जलाए जाएंगे ‘आशीर्वाद के दीये’ जन्मदिन समारोह के तहत शाम को ‘आशीर्वाद के दीये’ कार्यक्रम भी आयोजित किया जा रहा है। इसके तहत शाम करीब 6 से 7 बजे के बीच घरों और विभिन्न स्थानों पर दीये जलाने की अपील की गई है। भाजपा की ओर से इसे प्रधानमंत्री के जन्मदिन और सेवा-संकल्प अभियान से जोड़ा गया है। पश्चिम बंगाल में भी ‘आशीर्वाद के दीये’ कार्यक्रम के तहत लोगों से दीप जलाने की अपील की गई है।अलग-अलग राज्यों में बड़ी संख्या में दीये जलाने की तैयारियां की गई हैं। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, हरियाणा और पश्चिम बंगाल में भी स्थानीय स्तर पर विशेष आयोजन प्रस्तावित हैं। इस तरह प्रधानमंत्री मोदी के 76वें जन्मदिन पर देशभर में सेवा गतिविधियों, सरकारी योजनाओं के प्रचार-प्रसार, जनसंपर्क कार्यक्रमों और बाइक यात्राओं का आयोजन किया जा रहा है। ‘सेवा संकल्प अभियान’ को प्रधानमंत्री के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर से भी जोड़ा गया है।
September 16, 2026
राष्ट्रीय न्यूज़: गुरुग्राम के गोल्फ कोर्स रोड पर महिला बाइकर सिया को कार से टक्कर मारने के मामले में पुलिस ने आरोपी कल्याण बैंसला को राजस्थान के दौसा से गिरफ्तार किया है। सीसीटीवी फुटेज की जांच के बाद एफआईआर में हत्या के प्रयास की धारा भी जोड़ी गई है। महिला ने जानबूझकर टक्कर मारने का आरोप लगाया है, जबकि आरोपी ने इसे दुर्घटना बताया है। गुरुग्राम के चर्चित महिला बाइकर मामले में पुलिस ने मंगलवार, 15 सितंबर को आरोपी कल्याण बैंसला को दौसा से गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने उसे गुरुग्राम लाए जाने की जानकारी दी। गोल्फ कोर्स रोड पर हुई घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस ने स्वतः संज्ञान लेकर सेक्टर-56 थाने में मामला दर्ज किया था। सीसीटीवी की जांच के बाद बढ़ाई धारा पुलिस के मुताबिक, जांच के दौरान सीसीटीवी फुटेज का विश्लेषण करने के बाद मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 109, यानी हत्या के प्रयास का आरोप जोड़ा गया। शुरुआत में लापरवाही से वाहन चलाने और दूसरों की जान को खतरे में डालने से संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज हुआ था। महिला का आरोप—पीछा किया, फिर बाइक को टक्कर मारी सिया के अनुसार, वह रविवार तड़के अपने साथियों के साथ बाइक चला रही थीं। आरोप है कि सफेद कार का चालक उनके करीब गाड़ी चलाने लगा और बार-बार रुकने के इशारे किए। उन्होंने चालक से दूरी बनाए रखने को कहा, लेकिन इसके बाद कार ने बाइक को टक्कर मार दी। सिया ने कार सवारों के नशे में होने का भी आरोप लगाया है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि टक्कर अनजाने में लगी थी तो चालक उनकी मदद करने के लिए क्यों नहीं रुका। आरोपी का दावा—जानबूझकर नहीं मारी टक्कर दिए गए बयान में बैंसला ने टक्कर होने की बात स्वीकार की, लेकिन जानबूझकर ऐसा करने से इनकार किया। उसका दावा है कि वाहन पर नियंत्रण खोने से दुर्घटना हुई और मौके पर मौजूद लोगों से मारपीट के डर से वह वहाँ से चला गया। आरोपी के वकील ने भी घटना को दुर्घटना बताते हुए महिला बाइकर की ड्राइविंग पर सवाल उठाए हैं। ये बचाव पक्ष के दावे हैं; घटना की परिस्थितियों और जिम्मेदारी की जांच पुलिस कर रही है। पुलिस पूछताछ के लिए मांगेगी रिमांड गुरुग्राम के डीसीपी ईस्ट संदीप कुमार के मुताबिक, आरोपी को अदालत में पेश कर आगे की पूछताछ के लिए रिमांड मांगी जाएगी। पुलिस घटना के समय उसके साथ मौजूद अन्य व्यक्ति की भूमिका की भी जांच कर रही है।
September 15, 2026
राष्ट्रीय न्यूज़: नई दिल्ली। यूपीआई से भुगतान करने वाले करोड़ों लोगों के लिए केंद्र सरकार ने डिजिटल पेमेंट पर शुल्क को लेकर स्थिति स्पष्ट कर दी है। वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग ने 14 सितंबर 2026 को अधिसूचना जारी कर कहा है कि ₹2,000 तक के UPI ट्रांजैक्शन पर बैंक या पेमेंट सिस्टम प्रोवाइडर भुगतान करने वाले या भुगतान प्राप्त करने वाले व्यक्ति से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कोई शुल्क नहीं ले सकेंगे। यह व्यवस्था Payment and Settlement Systems Act, 2007 की धारा 10A के तहत अधिसूचित की गई है। नई अधिसूचना ऐसे समय आई है जब अगस्त में संसद द्वारा Taxation and Other Laws (Amendment) Act, 2026 पारित किए जाने के बाद यह चर्चा तेज हो गई थी कि क्या सरकार UPI पर शुल्क लगाने की तैयारी कर रही है। कानून में किए गए बदलाव ने सरकार को यह तय करने का अधिकार दिया कि किन इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट माध्यमों को अनिवार्य रूप से शुल्क-मुक्त रखा जाएगा। अब सरकार ने ₹2,000 तक के UPI लेनदेन को स्पष्ट रूप से इस सुरक्षा के दायरे में शामिल कर दिया है। ₹2,000 से ज्यादा के UPI पेमेंट पर क्या अब चार्ज लगेगा? इस पूरे बदलाव में आम उपभोक्ता के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ₹2,000 से अधिक का UPI भुगतान करते ही अपने आप कोई शुल्क लागू नहीं हो गया है। 14 सितंबर की अधिसूचना सिर्फ इतनी बात कानूनी रूप से सुनिश्चित करती है कि ₹2,000 तक के UPI लेनदेन पर किसी तरह की फीस नहीं लगाई जा सकती। ₹2,000 से अधिक के भुगतान के लिए अधिसूचना में कोई नया चार्ज या दर घोषित नहीं की गई है। सरकार इससे पहले 8 अगस्त को भी स्पष्ट कर चुकी है कि UPI का इस्तेमाल करने वाले सामान्य उपभोक्ताओं से ट्रांजैक्शन फीस लेने का प्रस्ताव नहीं है और सभी Person-to-Person यानी P2P भुगतान मुफ्त बने रहेंगे। भविष्य में यदि Merchant Discount Rate यानी MDR लागू किया भी जाता है, तो वह केवल कुछ चुनिंदा और निर्धारित सीमा से ऊपर के मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर हो सकता है। इसका अंतिम ढांचा अभी तय नहीं हुआ है। इसका सरल अर्थ यह है कि यदि कोई व्यक्ति अपने दोस्त, रिश्तेदार या किसी अन्य व्यक्ति को UPI से ₹5,000, ₹10,000 या उससे अधिक भेजता है, तो सरकार की घोषित नीति के अनुसार P2P ट्रांजैक्शन मुफ्त बने रहने हैं। चर्चा मुख्य रूप से बड़े merchant payments यानी दुकानदार या व्यवसाय को किए जाने वाले भुगतान पर संभावित MDR की है, न कि हर ₹2,000 से अधिक UPI ट्रांजैक्शन पर ग्राहक से शुल्क वसूलने ग्राहक से नहीं, बड़े व्यापारियों पर हो सकता है MDR सरकार का संकेत है कि भविष्य में UPI नेटवर्क को आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाने के लिए सीमित श्रेणी के बड़े मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर नाममात्र MDR लगाया जा सकता है। MDR वह शुल्क होता है जो आमतौर पर व्यापारी द्वारा डिजिटल भुगतान स्वीकार करने के बदले भुगतान व्यवस्था से जुड़े संस्थानों को दिया जाता है। वित्त मंत्रालय ने पहले ही स्पष्ट किया है कि यदि ऐसा MDR लाया जाता है तो यह सभी UPI लेनदेन पर एक समान नहीं होगा। केवल एक निश्चित सीमा से ऊपर और कुछ खास मर्चेंट श्रेणियों पर इसे लागू करने पर विचार किया जा सकता है। इसकी दर और किन व्यापारियों पर इसे लागू किया जाएगा, इस संबंध में अभी अंतिम फैसला घोषित नहीं हुआ है। इसलिए यदि भविष्य में बड़े मर्चेंट UPI भुगतान पर MDR लागू होता भी है, तो इसका अर्थ यह जरूरी नहीं कि ग्राहक के खाते से अतिरिक्त पैसा कटे। MDR की प्रकृति सामान्यतः व्यापारी और भुगतान प्रणाली के बीच शुल्क की होती है। हालांकि अंतिम व्यवस्था सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि उसका व्यावहारिक असर व्यापारियों और ग्राहकों पर किस तरह पड़ेगा। RuPay डेबिट कार्ड को लेकर अधिसूचना में महत्वपूर्ण अंतर 14 सितंबर की सरकारी अधिसूचना में एक महत्वपूर्ण तकनीकी बात भी है। इसमें दो इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट मोड सूचीबद्ध हैं—पहला RuPay-powered Debit Card और दूसरा UPI transactions up to ₹2,000। अधिसूचना के मूल शब्दों में ₹2,000 की सीमा केवल UPI के साथ लिखी गई है; RuPay डेबिट कार्ड के लिए ऐसी सीमा अलग से दर्ज नहीं है। इसलिए अधिसूचना के शाब्दिक पाठ के मुताबिक RuPay डेबिट कार्ड को भी नो-चार्ज श्रेणी में रखा गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि इन अधिसूचित भुगतान माध्यमों के जरिए भुगतान करने वाले या भुगतान प्राप्त करने वाले व्यक्ति से बैंक अथवा सिस्टम प्रोवाइडर कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष शुल्क नहीं वसूल सकता। आखिर सरकार ने कानून क्यों बदला? भारत में UPI का इस्तेमाल पिछले कुछ वर्षों में बेहद तेजी से बढ़ा है। अकेले जुलाई 2026 में UPI के जरिए करीब 2,366 करोड़ ट्रांजैक्शन हुए, जिनकी कुल कीमत लगभग ₹29.9 लाख करोड़ रही। सरकार का कहना है कि इतने बड़े डिजिटल भुगतान नेटवर्क को लगातार साइबर सुरक्षा, फ्रॉड प्रिवेंशन और तकनीकी इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश की जरूरत पड़ती है। इसी वजह से कानून में किया गया बदलाव सरकार को भविष्य में ऐसा मॉडल तैयार करने की गुंजाइश देता है जिससे छोटे और रोजमर्रा के डिजिटल भुगतान मुफ्त रहें, लेकिन बड़े व्यावसायिक लेनदेन के जरिए पेमेंट इकोसिस्टम को कुछ आय भी मिल सके।सरकार का कहना है कि किसी भी संभावित MDR का मकसद आम UPI यूजर पर शुल्क लगाना नहीं, बल्कि डिजिटल भुगतान नेटवर्क की दीर्घकालीन वित्तीय और तकनीकी मजबूती सुनिश्चित करना है। आम UPI यूजर पर अभी क्या असर पड़ेगा? फिलहाल सामान्य UPI उपयोगकर्ता के लिए रोजमर्रा के भुगतान में कोई बदलाव नहीं है। ₹50 की चाय, ₹500 की खरीदारी या ₹2,000 तक का कोई भी UPI भुगतान बिना शुल्क के जारी रहेगा। व्यक्ति से व्यक्ति UPI ट्रांसफर भी सरकार की घोषित नीति के मुताबिक मुफ्त रहेंगे। ₹2,000 से अधिक के UPI मर्चेंट भुगतान पर भविष्य में कोई MDR लागू होगा या नहीं, उसकी दर क्या होगी और किन व्यापारियों पर लागू होगा—यह अलग निर्णय से तय होगा। इसलिए अभी यह कहना गलत होगा कि ₹2,001 का UPI पेमेंट करते ही ग्राहक को चार्ज देना पड़ेगा। नए नियम का वास्तविक संदेश यह है कि सरकार ने कम मूल्य वाले UPI भुगतान को अनिवार्य रूप से मुफ्त रखने की कानूनी गारंटी दे दी है, जबकि बड़े मर्चेंट ट्रांजैक्शन के लिए भविष्य की फीस व्यवस्था का विकल्प खुला रखा है। एक नजर में नया नियम ₹2,000 तक UPI: बैंक या सिस्टम प्रोवाइडर कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष चार्ज नहीं लगा सकते। ₹2,000 से ज्यादा UPI: अभी अपने आप कोई नया शुल्क लागू नहीं हुआ है। P2P UPI: सरकार ने इसे मुफ्त बनाए रखने की बात कही है। बड़े मर्चेंट पेमेंट: भविष्य में सीमित MDR संभव है, लेकिन अभी अंतिम दर या नियम घोषित नहीं। RuPay डेबिट कार्ड: 14 सितंबर की अधिसूचना में इसे भी नो-चार्ज इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट मोड के रूप में अधिसूचित किया गया है।
September 15, 2026
राष्ट्रीय न्यूज़: मुंबई। दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर दिशा सालियान की मौत के मामले में करीब छह साल बाद बड़ा कानूनी घटनाक्रम सामने आया है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के बाद FIR दर्ज कर मामले की नए सिरे से जांच शुरू कर दी है। एजेंसी ने इसके लिए एक विशेष जांच टीम भी बनाई है। CBI की FIR में हत्या, गैंगरेप और सबूत नष्ट करने जैसे गंभीर आरोपों से संबंधित धाराओं के तहत जांच की जा रही है। हालांकि अभी किसी व्यक्ति को औपचारिक रूप से आरोपी नहीं बनाया गया है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने 2 सितंबर को दिशा के पिता सतीश सालियान की याचिका पर सुनवाई करते हुए CBI को वरिष्ठ और अनुभवी अधिकारी से मामले के सभी पहलुओं की जांच कराने का निर्देश दिया था। अदालत ने यह भी साफ किया कि जांच में पर्याप्त सामग्री सामने आए बिना किसी व्यक्ति को आरोपी नहीं माना जाए। यदि जांच में कोई संज्ञेय अपराध सामने आता है तो CBI को सक्षम अदालत में उचित रिपोर्ट दाखिल करनी होगी और यदि अपराध साबित करने लायक सामग्री नहीं मिलती है तो क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की जा सकती है, जिस पर दिशा के पिता को प्रोटेस्ट पिटीशन दायर करने का अधिकार रहेगा। 8 जून 2020 को हुई थी दिशा की मौत दिशा सालियान की 8 जून 2020 को मुंबई के मलाड इलाके की एक बहुमंजिला इमारत से गिरने के बाद मौत हुई थी। उस समय उनकी उम्र 28 वर्ष थी। मुंबई पुलिस ने मामले में Accidental Death Report यानी ADR दर्ज कर जांच शुरू की थी। दिशा की मौत के सिर्फ छह दिन बाद, 14 जून 2020 को अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत बांद्रा स्थित अपने फ्लैट में मृत मिले थे। दोनों घटनाओं के बीच कम समय होने के कारण शुरुआत से ही कई तरह की अटकलें सामने आती रही हैं, हालांकि दोनों मौतों के बीच किसी आपराधिक संबंध की पुष्टि अब तक नहीं हुई है।मुंबई पुलिस का शुरुआती निष्कर्ष था कि दिशा की मौत में किसी आपराधिक साजिश या बाहरी व्यक्ति की भूमिका का प्रमाण नहीं मिला। पुलिस ने बाद में मामले की जांच बंद कर दी थी। वर्ष 2023 में महाराष्ट्र सरकार ने मामले की दोबारा जांच के लिए SIT गठित की। जुलाई 2025 में मुंबई पुलिस ने हाईकोर्ट में कहा था कि SIT की जांच के निष्कर्ष भी शुरुआती जांच से मेल खाते हैं और उपलब्ध सामग्री से हत्या या यौन हमले की पुष्टि नहीं होती। हाईकोर्ट ने पुलिस जांच पर उठाए गंभीर सवाल मामले की सुनवाई के दौरान बॉम्बे हाईकोर्ट ने इस बात पर सवाल उठाया था कि दिशा के पिता द्वारा गंभीर संदेह और आपराधिक आरोप लगाए जाने के बावजूद नियमित FIR दर्ज क्यों नहीं की गई। अदालत ने यह भी पूछा था कि केवल CrPC की धारा 174 के तहत ADR की जांच को संज्ञेय अपराध की नियमित जांच का विकल्प कैसे माना जा सकता है।हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि उसने यह निष्कर्ष नहीं निकाला है कि दिशा के साथ बलात्कार या हत्या हुई थी। कोर्ट का आदेश इन आरोपों की निष्पक्ष आपराधिक जांच कराने को लेकर था। यही वजह है कि CBI की जांच का परिणाम ही यह तय करेगा कि पिता द्वारा लगाए गए आरोपों में कितना तथ्य है। पिता बोले- छह साल से न्याय का इंतजार कर रहा था दिशा के पिता सतीश सालियान लंबे समय से यह आरोप लगा रहे हैं कि उनकी बेटी की मौत आत्महत्या नहीं थी और उसके पीछे आपराधिक साजिश थी। उन्होंने हाईकोर्ट में दाखिल याचिका में गैंगरेप और हत्या की आशंका जताते हुए CBI जांच की मांग की थी।CBI द्वारा FIR दर्ज किए जाने के बाद उन्होंने कहा कि वे करीब छह साल से इस दिन का इंतजार कर रहे थे। उन्होंने कहा कि बेटी को खोने के कारण इसमें खुशी की कोई बात नहीं है, लेकिन अदालत के आदेश और जांच शुरू होने से उन्हें राहत मिली है। कई बड़े नामों की ‘भूमिका की जांच’ का जिक्र, लेकिन कोई औपचारिक आरोपी नहीं इस मामले में सबसे अधिक चर्चा FIR में आए विभिन्न राजनीतिक, फिल्म और पुलिस से जुड़े नामों को लेकर हो रही है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार दिशा के पिता की शिकायत और बयान में आदित्य ठाकरे, सूरज पंचोली, डीनो मोरिया, रिया चक्रवर्ती, रोहन रॉय, सचिन वाजे, परमबीर सिंह सहित कई लोगों की कथित भूमिका की जांच की मांग की गई है। कुछ अधिकारियों के नाम भी कथित कवर-अप संबंधी आरोपों के संदर्भ में सामने आए हैं। लेकिन यहां महत्वपूर्ण अंतर यह है कि CBI ने फिलहाल किसी को आरोपी के रूप में नामित नहीं किया है। FIR की सामग्री में किसी व्यक्ति की भूमिका की जांच का उल्लेख और उस व्यक्ति का आरोपी होना दो अलग-अलग कानूनी स्थितियां हैं। बॉम्बे हाईकोर्ट ने भी अपने आदेश में विशेष रूप से कहा था कि जांच अधिकारी को पर्याप्त सामग्री मिलने के बाद ही किसी व्यक्ति को आरोपी माना जाए। दिशा के पिता के वकील निलेश ओझा ने दावा किया है कि कई प्रमुख लोगों की भूमिका की जांच होगी और जांच में जिनके खिलाफ सबूत मिलेगा, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि यदि CBI अंततः क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करती है तो परिवार उसके खिलाफ अदालत में प्रोटेस्ट पिटीशन दाखिल कर सकता है। यही अधिकार हाईकोर्ट के आदेश में भी सुरक्षित रखा गया है। पोस्टमॉर्टम में ‘हेड इंजरी और मल्टीपल इंजरी’ का उल्लेख दिशा की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट भी इस नई जांच में महत्वपूर्ण दस्तावेज होगी। उपलब्ध पोस्टमॉर्टम रिकॉर्ड में मौत का कारण सिर की चोट और कई अन्य चोटें बताया गया था। मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार ये चोटें ऊंचाई से गिरने से संबंधित थीं। पुराने रिकॉर्ड में यौन हमले की स्पष्ट पुष्टि नहीं की गई थी।मुंबई पुलिस ने वर्ष 2025 में हाईकोर्ट में दाखिल हलफनामे में भी कहा था कि पोस्टमॉर्टम, फॉरेंसिक रिकॉर्ड, CCTV, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और गवाहों के बयानों में गैंगरेप या हत्या के आरोपों की पुष्टि करने वाला साक्ष्य नहीं मिला।अब CBI इन्हीं दस्तावेजों को नए सिरे से देखेगी और यह भी जांच सकती है कि पोस्टमॉर्टम, घटनास्थल की जांच, डिजिटल सबूतों और पुलिस रिकॉर्ड के संरक्षण एवं विश्लेषण में कोई कमी या अनियमितता तो नहीं हुई थी। पहले परिवार ने नहीं जताया था संदेह, बाद में बदला रुख मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि शुरुआती दौर में दिशा के माता-पिता ने पुलिस के सामने किसी व्यक्ति पर संदेह नहीं जताया था। पुराने रिकॉर्ड में सतीश सालियान ने जांच से संतुष्टि व्यक्त की थी। बाद के वर्षों में उनका रुख बदला और वर्ष 2025 में उन्होंने हाईकोर्ट का रुख कर कथित कवर-अप, यौन हिंसा और हत्या के आरोप लगाए।इसी विरोधाभास को मुंबई पुलिस और आदित्य ठाकरे की ओर से कोर्ट में उठाया गया था। आदित्य ठाकरे की तरफ से आरोपों को राजनीतिक रूप से प्रेरित और निराधार बताया गया है। अब CBI को पुराने और नए दोनों बयानों के बीच अंतर सहित पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र जांच करनी होगी। छह साल बाद FIR से जांच व्यवस्था पर भी सवाल मामले में छह साल बाद पहली नियमित FIR दर्ज होना अपने आप में महत्वपूर्ण है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने भी पुलिस की जांच प्रक्रिया और केवल ADR के आधार पर लंबे समय तक मामला चलाए जाने पर सवाल उठाए थे। अदालत का मत था कि गंभीर आरोप सामने आने पर विधिवत आपराधिक जांच जरूरी थी।अब CBI के सामने सबसे बड़ी चुनौती छह साल पुराने साक्ष्यों की विश्वसनीयता और उपलब्धता होगी। डिजिटल रिकॉर्ड, घटनास्थल से जुड़े दस्तावेज, CCTV, मोबाइल डेटा, मेडिकल और फॉरेंसिक रिकॉर्ड तथा उस समय मौजूद लोगों के बयान एक बार फिर जांच के केंद्र में होंगे।CBI की FIR को किसी आरोप की अंतिम पुष्टि के रूप में नहीं देखा जा सकता। जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि दिशा सालियान की मौत आत्महत्या थी, दुर्घटना थी या इसमें कोई आपराधिक साजिश शामिल थी। लेकिन हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद शुरू हुई यह नई जांच छह साल पुराने मामले को एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा के केंद्र में ले आई है।
September 8, 2026
राष्ट्रीय न्यूज़: नई दिल्ली। राजस्थान के पूर्व उपमुख्यमंत्री और कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव सचिन पायलट को पंजाब कांग्रेस का नया प्रभारी बनाए जाने के बाद दिल्ली से लेकर पंजाब तक राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। नई जिम्मेदारी मिलने के कुछ ही दिन बाद मंगलवार को पायलट ने दिल्ली स्थित 10 जनपथ पहुंचकर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा से मुलाकात की।मुलाकात के दौरान राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने पायलट को नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं दीं। बैठक में वर्ष 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव, पार्टी के आगामी कार्यक्रमों और चुनावी रणनीति को लेकर चर्चा हुई। सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस नेतृत्व का फोकस चुनाव से पहले संगठन को मजबूत करने और पार्टी के अलग-अलग गुटों को एक मंच पर लाने पर है।मुलाकात के बाद सचिन पायलट ने भी सोशल मीडिया के जरिए राहुल गांधी और प्रियंका गांधी का पंजाब की जिम्मेदारी सौंपने के लिए आभार जताया। उन्होंने भरोसा जताया कि सामूहिक प्रयास, मजबूत संगठन और कार्यकर्ताओं की ताकत के बल पर कांग्रेस पंजाब में सत्ता में वापसी के लिए पूरी मजबूती से चुनाव लड़ेगी। पंजाब में पायलट को मिला बड़ा राजनीतिक टास्क सचिन पायलट के लिए पंजाब की जिम्मेदारी केवल एक संगठनात्मक नियुक्ति नहीं, बल्कि उनके राजनीतिक करियर का एक महत्वपूर्ण पड़ाव मानी जा रही है। राजस्थान में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और उपमुख्यमंत्री रह चुके पायलट को अब ऐसे राज्य की जिम्मेदारी मिली है, जहां कांग्रेस के पास मजबूत राजनीतिक आधार तो है, लेकिन पार्टी लंबे समय से आंतरिक खींचतान से जूझ रही है। कांग्रेस ने 5 सितंबर को संगठनात्मक फेरबदल करते हुए भूपेश बघेल की जगह सचिन पायलट को पंजाब का महासचिव प्रभारी बनाया था। बघेल को असम की जिम्मेदारी दी गई है। यह फेरबदल पंजाब में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले किया गया है। गुटबाजी खत्म करना होगी सबसे बड़ी चुनौती पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार है और कांग्रेस मुख्य विपक्षी दल के रूप में दोबारा सत्ता में वापसी की कोशिश कर रही है। लेकिन चुनावी लड़ाई से पहले पायलट के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने ही संगठन के भीतर अलग-अलग नेताओं और गुटों को साथ लाने की होगी।पंजाब कांग्रेस में प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग, पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी सहित कई वरिष्ठ नेताओं के अपने-अपने राजनीतिक प्रभाव क्षेत्र हैं। हाल के समय में पार्टी के भीतर मतभेद खुलकर सामने आते रहे हैं। पायलट की नियुक्ति को इसी अंदरूनी खींचतान को नियंत्रित करने और चुनाव से पहले एकजुट संगठन खड़ा करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। पायलट के पक्ष में यह बात मानी जा रही है कि वे राजस्थान में लंबे समय तक संगठन की कमान संभाल चुके हैं। प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए उन्होंने कार्यकर्ताओं के बीच लगातार सक्रियता बनाए रखी थी। अब पंजाब में उनके सामने यही मॉडल स्थानीय परिस्थितियों के मुताबिक लागू करने की चुनौती होगी। पहले ही शुरू किया नेताओं से संवाद नई जिम्मेदारी मिलने के बाद पायलट ने पंजाब कांग्रेस के नेताओं से संपर्क और बैठकों का सिलसिला भी शुरू कर दिया है। पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष राजा वड़िंग उनसे दिल्ली में मुलाकात कर चुके हैं। बैठक में विधानसभा चुनाव की तैयारियों, संगठन और चुनावी रणनीति से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। पायलट के जल्द पंजाब दौरे पर जाने की भी संभावना जताई गई है। सफल हुए तो राष्ट्रीय राजनीति में और बढ़ सकता है कद पंजाब की जिम्मेदारी को सचिन पायलट के लिए कांग्रेस आलाकमान के भरोसे की बड़ी परीक्षा के तौर पर भी देखा जा रहा है। पंजाब उन राज्यों में है जहां कांग्रेस अभी भी सत्ता की प्रमुख दावेदार पार्टियों में शामिल है। ऐसे में यदि पायलट पार्टी की गुटबाजी पर काबू पाकर संगठन को एकजुट करने और चुनाव में बेहतर प्रदर्शन कराने में कामयाब रहते हैं, तो राष्ट्रीय राजनीति में उनकी भूमिका और महत्वपूर्ण हो सकती है।राजनीतिक जानकारों के लिहाज से यह जिम्मेदारी पायलट के लिए बड़ा अवसर भी है। पंजाब में सफलता उन्हें राजस्थान की राजनीति से आगे कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व और चुनावी रणनीति में अधिक महत्वपूर्ण भूमिका दिला सकती है।फिलहाल पायलट की पहली परीक्षा चुनाव प्रचार से पहले पंजाब कांग्रेस के नेताओं को एक मंच पर लाने की है। 2027 के चुनाव में कांग्रेस का प्रदर्शन काफी हद तक इस बात पर भी निर्भर करेगा कि नई जिम्मेदारी संभालने के बाद पायलट संगठन की अंदरूनी खींचतान को कितनी जल्दी चुनावी ताकत में बदल पाते हैं।
September 6, 2026
राष्ट्रीय न्यूज़: नई दिल्ली। कांग्रेस ने संगठन में बड़ा फेरबदल करते हुए राजस्थान के पूर्व उपमुख्यमंत्री और राष्ट्रीय महासचिव सचिन पायलट को पंजाब का AICC प्रभारी महासचिव नियुक्त किया है। पंजाब की जिम्मेदारी संभाल रहे पूर्व छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को अब असम का प्रभार दिया गया है। सचिन पायलट अब तक छत्तीसगढ़ के प्रभारी महासचिव थे। कांग्रेस संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल की ओर से बदलावों की घोषणा की गई। यह बदलाव ऐसे समय में हुआ है जब पंजाब कांग्रेस आंतरिक खींचतान से गुजर रही है और अगले विधानसभा चुनाव की तैयारियां भी तेज हो रही हैं। पार्टी नेतृत्व के सामने प्रदेश संगठन को एकजुट कर चुनावी रणनीति तैयार करने की बड़ी चुनौती है। पंजाब में पायलट के सामने सबसे बड़ी चुनौती- गुटबाजी खत्म करना पंजाब कांग्रेस में पिछले कुछ समय से प्रदेशाध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी से जुड़े खेमों के बीच मतभेद खुलकर सामने आते रहे हैं। टिकट वितरण और संगठनात्मक फैसलों को लेकर भी नेताओं के बीच बयानबाजी हुई है। ऐसे में सचिन पायलट की पहली बड़ी जिम्मेदारी अलग-अलग खेमों के बीच समन्वय स्थापित करना और विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी को एकजुट करना होगी। पंजाब में विधानसभा चुनाव 2027 में प्रस्तावित हैं, इसलिए कांग्रेस हाईकमान के इस फैसले को चुनावी तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है। छत्तीसगढ़ की जिम्मेदारी सुखदेव भगत को सचिन पायलट के पंजाब जाने के बाद सुखदेव भगत को छत्तीसगढ़ का प्रभारी बनाया गया है। वहीं भूपेश बघेल को पंजाब से हटाकर असम भेजा गया है। इसके साथ ही कांग्रेस ने अन्य राज्यों के संगठनात्मक प्रभार में भी बदलाव किए हैं। डॉ. सिरिवेल्ला प्रसाद को महाराष्ट्र और पी.वी. मोहन को आंध्र प्रदेश की जिम्मेदारी दी गई है। गुजरात में भी बदलाव कांग्रेस ने गुजरात के संगठनात्मक प्रभार में भी बदलाव किया है। मुकुल वासनिक से गुजरात की जिम्मेदारी वापस लिए जाने और रणदीप सिंह सुरजेवाला को नया प्रभार दिए जाने की जानकारी सामने आई है। सुरजेवाला कांग्रेस के प्रमुख राष्ट्रीय नेताओं में शामिल हैं और कर्नाटक संगठन से भी जुड़े रहे हैं। इस बदलाव को भी आने वाले चुनावी और संगठनात्मक समीकरणों के लिहाज से अहम माना जा रहा है। पंजाब में चुनाव से पहले नया प्रयोग सचिन पायलट का पंजाब प्रभारी बनना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पायलट राजस्थान में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और उपमुख्यमंत्री रहने के अलावा लंबे समय से राष्ट्रीय संगठन में सक्रिय हैं। अब तक उनके पास छत्तीसगढ़ की जिम्मेदारी थी। कांग्रेस की आधिकारिक वेबसाइट पर फेरबदल से पहले उन्हें छत्तीसगढ़ और भूपेश बघेल को पंजाब का प्रभारी दर्ज किया गया था।पंजाब में उनकी नियुक्ति को हाईकमान की ओर से चुनाव से पहले संगठन में संतुलन बनाने और अलग-अलग नेताओं को एक मंच पर लाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। भूपेश बघेल को असम की जिम्मेदारी पंजाब से हटाए गए भूपेश बघेल को असम कांग्रेस का प्रभारी बनाया गया है। असम में विधानसभा चुनाव में खराब प्रदर्शन के बाद संगठनात्मक बदलाव की जरूरत महसूस की जा रही थी असम के तत्कालीन प्रभारी जितेंद्र सिंह ने 4 मई 2026 को चुनावी हार की जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। इसलिए उन्हें इस ताजा फेरबदल में “हटाया गया” कहना सटीक नहीं होगा; उनका इस्तीफा कई महीने पहले ही आ चुका था।छह राज्यों की जिम्मेदारियों में बदलाव कांग्रेस के इस संगठनात्मक फेरबदल में मुख्य रूप से पंजाब, असम, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और गुजरात जैसे राज्यों के प्रभार में बदलाव सामने आए हैं। इनमें सबसे ज्यादा राजनीतिक चर्चा सचिन पायलट को पंजाब की जिम्मेदारी मिलने की हो रही है, क्योंकि पंजाब में अगले विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को संगठनात्मक खींचतान खत्म करने और भाजपा, आम आदमी पार्टी तथा शिरोमणि अकाली दल के मुकाबले मजबूत चुनावी रणनीति तैयार करनी होगी। पायलट की नियुक्ति के बाद अब नजर इस बात पर रहेगी कि वे पंजाब कांग्रेस के अलग-अलग गुटों के बीच किस तरह तालमेल स्थापित करते हैं और चुनाव से पहले संगठन को कितना एकजुट कर पाते हैं।
September 3, 2026
राष्ट्रीय न्यूज़: नई दिल्ली। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने सभी राज्य सरकारों से बाइक टैक्सी को मंजूरी देने की अपील की है। उन्होंने कहा कि निजी बाइक और स्कूटर के जरिए यात्रियों को परिवहन सुविधा देने से खासकर ग्रामीण और छोटे शहरों में रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं। गडकरी ने दावा किया कि बाइक टैक्सी को व्यापक स्तर पर अनुमति मिलने से करीब 8 करोड़ लोगों के लिए रोजगार या आय के अवसर तैयार हो सकते हैं। ‘केंद्र ने अनुमति दी, अब राज्यों की मंजूरी जरूरी’ गडकरी ने कहा कि केंद्र सरकार बाइक टैक्सी को अनुमति देने की दिशा में कदम उठा चुकी है, लेकिन परिवहन का विषय राज्य सरकारों से भी जुड़ा होने के कारण कई राज्यों में अभी तक इसकी मंजूरी नहीं दी गई है। उन्होंने राज्य सरकारों से अपील की कि वे बाइक टैक्सी को अनुमति दें, ताकि युवाओं और आम लोगों को कम लागत में नया रोजगार और कमाई का जरिया मिल सके। बार-बार ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों पर सख्ती की तैयारी गडकरी ने सड़क सुरक्षा को लेकर भी सख्त रुख अपनाने के संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे वाहन चालकों पर कड़ी कार्रवाई की जरूरत है जो बार-बार ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करते हैं। इसके लिए मोटर व्हीकल एक्ट में बदलाव कर ‘नेगेटिव पॉइंट सिस्टम’ लागू करने का प्रस्ताव बताया गया है। इसके तहत बार-बार नियम तोड़ने वाले ड्राइवरों के रिकॉर्ड पर नकारात्मक अंक जुड़ सकते हैं और आगे सख्त कार्रवाई की व्यवस्था बनाई जा सकती है। भारी वाहन चालकों की ट्रेनिंग पर जोर नितिन गडकरी ने भारी वाहन और निर्माण उपकरण चलाने वाले ड्राइवरों के लिए अनिवार्य प्रशिक्षण की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि बड़े निर्माण उपकरण और भारी मशीनें चलाने वालों के लिए व्यवस्थित प्रशिक्षण जरूरी होना चाहिए। उन्होंने JCB India जैसी कंपनियों से भी अपील की कि मशीन या उपकरण देने से पहले ड्राइवरों को उचित ट्रेनिंग दी जाए। 10 लाख ड्राइवरों की होगी मुफ्त स्वास्थ्य जांच गडकरी ने सड़क और औद्योगिक सुरक्षा से जुड़ा ‘सुरक्षा’ पायलट प्रोग्राम भी शुरू किया है। इस कार्यक्रम के तहत हाईवे, खनन और निर्माण जैसे जोखिम वाले क्षेत्रों में काम करने वाले करीब 10 लाख ड्राइवरों और कर्मचारियों की मुफ्त मेडिकल जांच और काउंसलिंग कराने का लक्ष्य रखा गया है। पहले चरण में नागपुर-कामठी के NH-44 और चंद्रपुर के खनन क्षेत्र में करीब 10 हजार लोगों की जांच करने की योजना है। दोपहिया हादसों में 81,780 मौतों का दावा गडकरी ने सड़क हादसों के आंकड़ों का जिक्र करते हुए कहा कि भारत में दोपहिया वाहन दुर्घटनाओं में 81,780 लोगों की मौत हुई है और यह संख्या बेहद चिंताजनक है। उन्होंने सड़क हादसों के प्रमुख कारणों में सीट बेल्ट नहीं लगाना, हिट एंड रन, गलत दिशा में वाहन चलाना, शराब पीकर ड्राइविंग और मोबाइल फोन के इस्तेमाल को गिनाया। सीट बेल्ट नहीं लगाने से 14,466 मौतों का आंकड़ा गडकरी ने बताया कि सीट बेल्ट नहीं लगाने से 14,466 मौतें हुईं, जबकि हिट एंड रन की घटनाओं में 34,030 लोगों की जान गई।इन आंकड़ों के आधार पर उन्होंने ड्राइवर ट्रेनिंग, स्वास्थ्य जांच और ट्रैफिक नियमों के सख्त पालन की जरूरत पर जोर दिया। रोजगार और सड़क सुरक्षा दोनों पर फोकस गडकरी का बयान ऐसे समय आया है जब कई राज्यों में बाइक टैक्सी को लेकर अलग-अलग नीतियां और विवाद सामने आते रहे हैं। केंद्र की कोशिश इसे रोजगार के अवसर के तौर पर बढ़ावा देने की है, वहीं राज्य सरकारों को स्थानीय परिवहन नियमों और सुरक्षा मानकों के आधार पर निर्णय लेना होगा।
September 1, 2026
राष्ट्रीय न्यूज़: डीग। साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान “ऑपरेशन काउंटडाउन” के तहत डीग पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दिल्ली के उत्तम नगर इलाके में चल रहे कथित फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने तीन मंजिला इमारत में दबिश देकर 31 युवकों और 33 युवतियों सहित कुल 64 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि 2 नाबालिगों को रेस्क्यू कराया गया। डीग पुलिस अधीक्षक शरण गोपीनाथ के. के निर्देशन में की गई इस कार्रवाई में पुलिस ने मौके से 88 एंड्रॉयड स्मार्टफोन, एक्सिस बैंक, यस बैंक और एचडीएफसी बैंक के कथित फर्जी आईडी कार्ड तथा बड़ी मात्रा में बैंकिंग डेटा जब्त किया है। बैंक अधिकारी बनकर लोगों को करते थे कॉल पुलिस के अनुसार गिरोह के सदस्य खुद को एक्सिस बैंक और एचडीएफसी बैंक का वरिष्ठ अधिकारी बताकर लोगों को फोन करते थे। कॉल के दौरान ग्राहकों को क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाने, कार्ड रिन्यू करने या अन्य बैंकिंग सुविधा देने का झांसा दिया जाता था। इसके बाद उनसे कथित रूप से OTP, CVV, PAN कार्ड की जानकारी, जन्मतिथि और Gmail ID जैसी संवेदनशील जानकारियां हासिल की जाती थीं। पुलिस का आरोप है कि इन जानकारियों का इस्तेमाल कर खातों और कार्ड से रकम निकाली जाती थी। डीग के बैंक मैनेजर की शिकायत से खुला मामला इस साइबर नेटवर्क की जांच उस समय शुरू हुई जब एक्सिस बैंक, डीग के शाखा प्रबंधक फूल सिंह ने साइबर क्राइम थाना डीग में शिकायत दर्ज कराई।शिकायत में आरोप लगाया गया कि कुछ अज्ञात लोग बैंक के नाम, लोगो और साख का दुरुपयोग कर कथित फर्जी वेबसाइटों और कॉलिंग के जरिए ग्राहकों को ठगी का शिकार बना रहे हैं। इसके बाद पुलिस ने तकनीकी जांच शुरू की और डिजिटल फुटप्रिंट्स तथा सर्विलांस के आधार पर संदिग्धों तक पहुंचने का प्रयास किया। जांच आजमगढ़ के आकाश तक पहुंची पुलिस जांच में तकनीकी सुरागों के आधार पर टीम उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ निवासी आकाश तक पहुंची। इसके बाद जांच आगे बढ़ी तो दिल्ली के उत्तम नगर में किराए पर ली गई तीन मंजिला इमारत से कॉल सेंटर संचालित होने की जानकारी सामने आई।पुलिस के अनुसार यहां से खास तौर पर राजस्थान के मोबाइल नंबरों पर टारगेटेड कॉलिंग की जा रही थी। फर्जी बैंक आईडी और बैंकिंग डेटा जब्त रेड के दौरान पुलिस को मौके से 88 स्मार्टफोन के साथ बैंक कर्मचारियों के नाम पर तैयार किए गए कथित फर्जी आईडी कार्ड और आम लोगों का बैंकिंग डेटा मिला।पुलिस अब जब्त मोबाइल फोन और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच कर यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क से कितने लोग ठगी का शिकार हुए और कुल कितनी राशि का लेन-देन हुआ। अंतरराज्यीय नेटवर्क की जांच जारी पुलिस इस मामले को एक बड़े अंतरराज्यीय साइबर नेटवर्क से जोड़कर देख रही है। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर गिरोह के अन्य सदस्यों, डेटा उपलब्ध कराने वालों और रकम के ट्रांजेक्शन से जुड़े लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। पुलिस के अनुसार आगे की जांच में इस नेटवर्क से जुड़े और नाम सामने आ सकते हैं।
September 1, 2026
राष्ट्रीय न्यूज़: नई दिल्ली। 20 जुलाई को 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के विरोध प्रदर्शन के बाद जिन छात्र प्रदर्शनकारियों पर FIR दर्ज की गई थीं, उन्हें बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को नीट प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी FIR को रद कर दिया, सिवाय उन लोगों के जिनका आपराधिक रिकॉर्ड रहा है। कोर्ट ने निर्देश दिया कि सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में छात्रों के खिलाफ दर्ज सभी मामले रद माने जाएंगे।सुप्रीम कोर्ट के इस बड़े कदम के बाद, CJP ने दिल्ली में 5 सितंबर को होने वाले अपने प्रस्तावित मार्च को रद कर दिया। कोर्ट का यह आदेश केंद्र सरकार के उस आश्वासन के बाद आया है जिसमें कहा गया था कि 20 जुलाई के CJP विरोध प्रदर्शन को लेकर प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मामले वापस ले लिए जाएंगे और भविष्य में इस विरोध प्रदर्शन को लेकर कोई नया मामला दर्ज नहीं किया जाएगा।हालांकि, कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन में शामिल 2,873 लोगों में से कुछ के खिलाफ एक FIR पर आगे बढ़ने की अनुमति दी है, क्योंकि उनका आपराधिक रिकॉर्ड गंभीर रहा है CJP ने क्या कहा?सुनवाई के बाद दास ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का स्वागत किया, लेकिन साथ ही यह सवाल भी उठाया कि आखिर इन ‘खूंखार अपराधियों’ को समाज में खुलेआम घूमने की इजाजत क्यों दी गई।