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March 9, 2026
जयपुर। भारतीय रेलवे में मानव तस्करी की घटनाओं को रोकने के उद्देश्य से सोमवार को राष्ट्रीय महिला आयोग और रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) के संयुक्त तत्वावधान में जयपुर मंडल में एक ऑनलाइन कार्यशाला आयोजित की गई। यह कार्यशाला मंडल रेल प्रबंधक (डीआरएम) कार्यालय से आयोजित हुई, जिसमें उत्तर पश्चिम रेलवे के आरपीएफ अधिकारी और बल सदस्य शामिल हुए। कार्यक्रम में चारों मंडलों के अधिकारी और स्टाफ वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से जुड़े।
कार्यशाला के दौरान बताया गया कि रेलवे नेटवर्क व्यापक होने के कारण कई बार मानव तस्कर ट्रेनों और रेलवे स्टेशनों का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में रेलवे सुरक्षा बल के जवानों को लगातार सतर्क रहने और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने की आवश्यकता है, ताकि समय रहते ऐसे मामलों को रोका जा सके।
राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया के. राहटकर ने कहा कि मानव तस्करी एक गंभीर अपराध है और इसे रोकने के लिए सभी संस्थाओं को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने बताया कि महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा और सशक्तिकरण के लिए राष्ट्रीय महिला आयोग विभिन्न स्तरों पर कार्य कर रहा है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि हाल ही में राष्ट्रीय महिला आयोग और रेलवे सुरक्षा बल के बीच एक एमओयू (समझौता ज्ञापन) किया है, जिसके तहत दोनों संस्थाएं मिलकर महिला तस्करी की घटनाओं को रोकने के लिए संयुक्त प्रयास करेंगी।
उत्तर पश्चिम रेलवे के प्रिंसिपल चीफ सिक्योरिटी कमिश्नर ज्योति कुमार सतीजा ने कहा कि बड़े शहरों के प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर निगरानी रहती है, लेकिन शहरों के आसपास स्थित छोटे स्टेशनों पर भी सतर्कता बढ़ाना बेहद जरूरी है। इन स्थानों पर निगरानी बढ़ाने से मानव तस्करों को पकड़ने और कई लोगों को बचाने में मदद मिल सकती है।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 में उत्तर पश्चिम रेलवे क्षेत्र में आरपीएफ ने कई बच्चों और महिलाओं को मानव तस्करी के प्रयासों से सुरक्षित बचाया है। भविष्य में भी राष्ट्रीय महिला आयोग के साथ मिलकर इस दिशा में कार्य जारी रहेगा।
कार्यशाला में शक्ति वाहिनी एनजीओ के निशिकांत ने भी मानव तस्करी से जुड़े मामलों और उससे बचाव के उपायों पर जानकारी दी। इस कार्यक्रम में उत्तर पश्चिम रेलवे के उपमहानिरीक्षक वी.सी. मल्लिकार्जुना, जयपुर मंडल के वरिष्ठ मंडल सुरक्षा आयुक्त ओंकार सिंह सहित रेलवे सुरक्षा बल के अधिकारी, बल सदस्य और एनजीओ प्रतिनिधि मौजूद रहे। कार्यशाला में आरपीएफ के 100 से अधिक सदस्य शामिल हुए।
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