राजस्थान न्यूज़: जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने नागौर जिले में पुलिस अधीक्षक का पद लंबे समय से खाली रहने और आगामी निकाय चुनावों के मद्देनजर नियमित आईपीएस अधिकारी की नियुक्ति की मांग वाली जनहित याचिका का निस्तारण कर दिया। अदालत ने इसे प्रशासनिक प्रकृति का मामला मानते हुए सीधे हस्तक्षेप से इनकार किया, लेकिन याचिकाकर्ता को राज्य निर्वाचन आयोग के समक्ष नया अभ्यावेदन पेश करने की छूट दी है। हाईकोर्ट ने निर्वाचन आयोग को निर्देश दिया कि यदि ऐसा अभ्यावेदन प्रस्तुत किया जाता है तो उस पर कानून के अनुसार विचार कर उचित निर्णय लिया जाए। RLP की जनहित याचिका पर हुई सुनवाई न्यायाधीश पुष्पेन्द्र सिंह भाटी और न्यायाधीश बिपिन गुप्ता की खंडपीठ ने राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की। पार्टी के अधिकृत प्रतिनिधि अनिल बारूपाल स्वयं अदालत में उपस्थित हुए। याचिका में नागौर के रिक्त पुलिस अधीक्षक पद पर भारतीय पुलिस सेवा संवर्ग के नियमित अधिकारी की नियुक्ति की मांग की गई थी। 19 मई से रिक्त बताया गया SP का पद याचिका के अनुसार नागौर के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक का 19 मई 2026 को तबादला होने के बाद से पद रिक्त है। याचिकाकर्ता का कहना था कि 19 अगस्त को कार्मिक विभाग ने पुलिस अधीक्षक का अतिरिक्त प्रभार अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक को सौंप दिया, जबकि निकाय चुनाव की प्रक्रिया के दौरान जिला कलक्टर और पुलिस अधीक्षक की भूमिका निष्पक्ष एवं स्वतंत्र चुनाव सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसी आधार पर नियमित आईपीएस अधिकारी की नियुक्ति की मांग उठाई गई थी। हाईकोर्ट बोला- निर्वाचन आयोग के सामने रखें मांग हाईकोर्ट ने फिलहाल नागौर में एसपी नियुक्त करने का कोई प्रत्यक्ष आदेश जारी नहीं किया। अदालत ने RLP को अपनी मांग और आपत्तियां राज्य निर्वाचन आयोग के सामने रखने की अनुमति देते हुए कहा कि आयोग अभ्यावेदन पर कानून के अनुसार विचार करे। अब पार्टी की ओर से आयोग के समक्ष विस्तृत अभ्यावेदन प्रस्तुत किए जाने की संभावना है। हनुमान बेनीवाल ने भी उठाया था मुद्दा RLP सुप्रीमो और नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने भी इस मुद्दे को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर उठाया था। उन्होंने सवाल किया था कि नागौर जैसे संवेदनशील जिले में निकाय चुनाव की प्रक्रिया के दौरान पुलिस अधीक्षक जैसे महत्वपूर्ण पद को अतिरिक्त कार्यभार के भरोसे क्यों चलाया जा रहा है। बेनीवाल ने यह भी दावा किया कि जिले में आईपीएस अधिकारी उपलब्ध होने के बावजूद आरपीएस रैंक के अधिकारी को एसपी का अतिरिक्त कार्यभार दिया गया है। राज्य निर्वाचन आयोग और गृह विभाग को भेजा पत्र हनुमान बेनीवाल ने कहा था कि उन्होंने राज्य निर्वाचन आयोग के आयुक्त और राजस्थान सरकार के गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को पत्र भेजकर मामले में हस्तक्षेप की मांग की है। उनका तर्क था कि चुनाव केवल करवाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि जनता में निष्पक्षता और सुरक्षा को लेकर भरोसा कायम रहना भी जरूरी है। अब चुनाव आयोग के फैसले पर नजर हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब नागौर एसपी की नियमित नियुक्ति का मुद्दा राज्य निर्वाचन आयोग के सामने जा सकता है। आयोग के समक्ष अभ्यावेदन प्रस्तुत होने के बाद यह देखा जाएगा कि वह चुनावी परिस्थितियों, प्रशासनिक व्यवस्था और याचिकाकर्ता की आपत्तियों को देखते हुए क्या निर्णय करता है।
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राजस्थान न्यूज़: जयपुर। जयपुर नगर निगम चुनाव-2026 में नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब चुनावी मुकाबले की तस्वीर साफ हो गई है। नगर निगम के 150 वार्डों में कुल 723 प्रत्याशी चुनाव मैदान में रह गए हैं। इन प्रत्याशियों के लिए जयपुर की जनता 11 सितंबर को मतदान करेगी। इस बार चुनावी तस्वीर कई मायनों में दिलचस्प है। नगर निगम के 17 वार्ड ऐसे हैं, जहां केवल दो-दो प्रत्याशी चुनाव मैदान में बचे हैं। ऐसे में इन वार्डों में सीधा मुकाबला देखने को मिलेगा। वहीं 35 वार्डों में तीन-तीन प्रत्याशी होने के कारण त्रिकोणीय मुकाबले की स्थिति बनी हुई है। इन 17 वार्डों में होगी सीधी टक्कर जिला निर्वाचन शाखा के आंकड़ों के अनुसार वार्ड संख्या 41, 42, 45, 49, 52, 53, 60, 83, 90, 91, 94, 122, 123, 129, 131, 142 और 150 में केवल दो-दो प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं।नामांकन पत्रों की जांच और नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद इन वार्डों में तीसरा कोई प्रत्याशी नहीं बचा है। ऐसे में यहां मुकाबला सीधे दो उम्मीदवारों के बीच होगा। इन सीटों पर वोटों के अधिक बिखराव की संभावना कम होने के कारण प्रत्येक वोट की अहमियत बढ़ गई है। प्रत्याशियों और राजनीतिक दलों के लिए अपने समर्थक मतदाताओं को मतदान केंद्र तक पहुंचाना निर्णायक साबित हो सकता है। 35 वार्डों में त्रिकोणीय मुकाबला जयपुर नगर निगम के 35 वार्डों में तीन-तीन उम्मीदवार मैदान में हैं। इन वार्डों में तीसरे प्रत्याशी की मौजूदगी भाजपा और कांग्रेस सहित प्रमुख दलों का चुनावी गणित प्रभावित कर सकती है।त्रिकोणीय मुकाबले में निर्दलीय या बागी प्रत्याशी किस दल के वोटों में सेंध लगाता है, यह चुनाव परिणाम तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। ऐसे वार्डों में थोड़े वोटों का अंतर भी जीत-हार का फैसला कर सकता है। वार्ड 62 में सबसे ज्यादा 13 प्रत्याशी जयपुर नगर निगम के वार्ड संख्या 62 में सबसे ज्यादा 13 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। यहां बहुकोणीय मुकाबला होने के कारण चुनाव बेहद रोचक रहने की संभावना है। इसके अलावा वार्ड संख्या 16 और 130 में 11-11 प्रत्याशी मैदान में हैं, जबकि वार्ड संख्या 132 में 10 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं। इन वार्डों में प्रत्याशियों की संख्या अधिक होने के कारण वोटों के कई हिस्सों में बंटने की संभावना है। ऐसे में जीत का अंतर भी अपेक्षाकृत कम रह सकता है। बागी और निर्दलीय बिगाड़ सकते हैं समीकरण टिकट वितरण के बाद भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों को कई वार्डों में नाराज दावेदारों और बागियों का सामना करना पड़ा। नाम वापसी तक दोनों पार्टियों ने अपने-अपने असंतुष्ट नेताओं को मनाने की कोशिश की, लेकिन कई जगह निर्दलीय और बागी उम्मीदवार चुनाव मैदान में डटे हुए हैं। ऐसे वार्डों में चुनाव केवल भाजपा और कांग्रेस के परंपरागत वोट बैंक तक सीमित नहीं रहेगा। स्थानीय प्रभाव, व्यक्तिगत जनसंपर्क और बागी प्रत्याशियों की ताकत भी नतीजों पर असर डाल सकती है। आज प्रत्याशियों को मिलेंगे चुनाव चिह्न चुनाव मैदान में मौजूद सभी 723 प्रत्याशियों को 4 सितंबर को चुनाव चिह्न आवंटित किए जाएंगे। भाजपा, कांग्रेस और अन्य मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय दलों के अधिकृत उम्मीदवार अपने निर्धारित पार्टी चुनाव चिह्न पर चुनाव लड़ेंगे। वहीं निर्दलीय और अन्य प्रत्याशियों को राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से निर्धारित मुक्त चुनाव चिह्नों में से प्रतीक आवंटित किए जाएंगे। चुनाव चिह्न मिलने के बाद प्रत्याशियों का प्रचार अभियान और तेज होगा। इसके बाद घर-घर जनसंपर्क, नुक्कड़ सभाएं, सोशल मीडिया प्रचार और बूथ स्तर की बैठकों पर राजनीतिक दलों का फोकस रहेगा। 11 सितंबर को जयपुर में मतदान जयपुर नगर निगम के वार्ड पार्षदों के चुनाव के लिए 11 सितंबर 2026 को मतदान होगा। नाम वापसी और चुनाव चिह्न आवंटन के बाद अब प्रत्याशियों के पास मतदाताओं तक पहुंचने के लिए सीमित समय रह गया है। ऐसे में आने वाले दिनों में राजधानी के सभी वार्डों में चुनाव प्रचार तेजी पकड़ने वाला है। 150 वार्डों में 723 उम्मीदवारों की मौजूदगी के बीच जहां 17 वार्डों में सीधी लड़ाई होगी, वहीं कई वार्डों में त्रिकोणीय और बहुकोणीय मुकाबले जयपुर नगर निगम चुनाव को रोचक बना रहे हैं।
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राजस्थान न्यूज़: जयपुर। राजस्थान विश्वविद्यालय में PhD प्रवेश प्रक्रिया को लेकर चल रहा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। प्रवेश प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और खाली सीटों को भरने की मांग को लेकर शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने गुरुवार को एक बार फिर RUPA कन्वीनर प्रो. एस.के. गुप्ता के कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया।प्रदर्शन के दौरान नाराज छात्रों ने प्रो. गुप्ता के कार्यालय का घेराव किया और उन्हें कमरे से बाहर नहीं निकलने दिया। इसके बाद छात्र नीचे धरने पर बैठ गए और PhD एडमिशन प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने तथा कथित गड़बड़ियों को सुधारने की मांग की।छात्रों का कहना है कि पिछले कई दिनों से विश्वविद्यालय प्रशासन को PhD प्रवेश से जुड़ी समस्याओं के बारे में बताया जा रहा है, लेकिन उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इकोनॉमिक्स विभाग में 13 सीटों पर 15 एडमिशन का आरोप विरोध प्रदर्शन के दौरान सबसे गंभीर सवाल इकोनॉमिक्स विभाग में PhD प्रवेश को लेकर उठाया गया।प्रदर्शनकारी शोधार्थियों का आरोप है कि इकोनॉमिक्स विभाग में अनारक्षित वर्ग के लिए निर्धारित 13 सीटों के मुकाबले 15 विद्यार्थियों को प्रवेश दिया गया।छात्रों ने मांग की कि स्वीकृत सीटों से अधिक किए गए प्रवेश की जांच की जाए और यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो ऐसे प्रवेश निरस्त किए जाएं।प्रदर्शनकारी विद्यार्थियों ने दावा किया कि बातचीत के दौरान RUPA समिति के समक्ष इस विसंगति को स्वीकार किया गया। हालांकि विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से इस दावे की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। साइकोलॉजी और पॉलिटिकल साइंस में भी गड़बड़ी का आरोप छात्रों ने केवल इकोनॉमिक्स विभाग ही नहीं, बल्कि साइकोलॉजी और पॉलिटिकल साइंस विभागों की प्रवेश प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं। शोधार्थियों की मांग है कि सभी विषयों की सीट मैट्रिक्स, श्रेणीवार सीटें, अभ्यर्थियों के प्रतिशताइल और इंटरव्यू में मिले अंक सार्वजनिक किए जाएं, जिससे पूरी प्रक्रिया पारदर्शी हो सके। 174 खाली PhD सीटें भरने की मांग प्रदर्शनकारी विद्यार्थियों की प्रमुख मांगों में विश्वविद्यालय में खाली पड़ी 174 PhD सीटों को भरना भी शामिल है। छात्रों ने JRF योग्य अभ्यर्थियों को प्राथमिकता देने, रिक्त सीटों के संबंध में स्पष्ट नीति बनाने और जब तक विवाद का समाधान नहीं हो जाता तब तक नए प्रवेशित विद्यार्थियों का कोर्सवर्क स्थगित रखने की मांग भी रखी। 9 बिंदुओं पर बनी सहमति लंबे विरोध और बातचीत के बाद छात्रों और विश्वविद्यालय की RUPA समिति के बीच 9 बिंदुओं पर सहमति बनी है। इन मांगों और कथित अनियमितताओं पर आगे चर्चा के लिए RUPA समिति की 5 सितंबर को कुलपति के साथ बैठक प्रस्तावित है। छात्रों को उम्मीद है कि बैठक में खाली सीटों, सीट मैट्रिक्स, JRF अभ्यर्थियों और कथित अतिरिक्त प्रवेश के मुद्दों पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। पहले भी कन्वीनर का किया था घेराव PhD एडमिशन को लेकर विश्वविद्यालय में पिछले कई सप्ताह से विरोध जारी है। छात्रों ने इससे पहले भी RUPA कन्वीनर प्रो. एस.के. गुप्ता का घेराव कर विरोध दर्ज कराया था। शोधार्थियों का आरोप है कि विश्वविद्यालय में बड़ी संख्या में PhD सीटें रिक्त रहने के बावजूद प्रशासन उन्हें भरने की प्रक्रिया स्पष्ट नहीं कर रहा है। कुलपति बोलीं- नियमों के अनुसार हो रहे फैसले दूसरी ओर राजस्थान विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. अल्पना कटेजा ने प्रवेश प्रक्रिया में अनियमितता के आरोपों के बीच कहा है कि विश्वविद्यालय के सभी निर्णय नियमों के अनुसार लिए जा रहे हैं। अब 5 सितंबर की बैठक को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसमें RUPA समिति और विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों की 9 मांगों पर चर्चा करेंगे।
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अजमेर न्यूज़: 1100 वर्ष पूर्व स्थापित मंदिर की बड़ी है मान्यता, दूर दराज से पहुंचते हैं हजारों श्रद्धालु
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अजमेर न्यूज़: 1968 से कस्बे की धार्मिक संस्था श्री ब्रह्म पुष्कर सेवा संघ कर रही है इस अनूठी परंपरा का निर्वहन
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अजमेर न्यूज़: 10 टीमें 8 - 8 वार्डो में जाकर घूम रही गायों का करेंगीं प्राथमिक उपचार
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राष्ट्रीय न्यूज़: नई दिल्ली। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने सभी राज्य सरकारों से बाइक टैक्सी को मंजूरी देने की अपील की है। उन्होंने कहा कि निजी बाइक और स्कूटर के जरिए यात्रियों को परिवहन सुविधा देने से खासकर ग्रामीण और छोटे शहरों में रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं। गडकरी ने दावा किया कि बाइक टैक्सी को व्यापक स्तर पर अनुमति मिलने से करीब 8 करोड़ लोगों के लिए रोजगार या आय के अवसर तैयार हो सकते हैं। ‘केंद्र ने अनुमति दी, अब राज्यों की मंजूरी जरूरी’ गडकरी ने कहा कि केंद्र सरकार बाइक टैक्सी को अनुमति देने की दिशा में कदम उठा चुकी है, लेकिन परिवहन का विषय राज्य सरकारों से भी जुड़ा होने के कारण कई राज्यों में अभी तक इसकी मंजूरी नहीं दी गई है। उन्होंने राज्य सरकारों से अपील की कि वे बाइक टैक्सी को अनुमति दें, ताकि युवाओं और आम लोगों को कम लागत में नया रोजगार और कमाई का जरिया मिल सके। बार-बार ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों पर सख्ती की तैयारी गडकरी ने सड़क सुरक्षा को लेकर भी सख्त रुख अपनाने के संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे वाहन चालकों पर कड़ी कार्रवाई की जरूरत है जो बार-बार ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करते हैं। इसके लिए मोटर व्हीकल एक्ट में बदलाव कर ‘नेगेटिव पॉइंट सिस्टम’ लागू करने का प्रस्ताव बताया गया है। इसके तहत बार-बार नियम तोड़ने वाले ड्राइवरों के रिकॉर्ड पर नकारात्मक अंक जुड़ सकते हैं और आगे सख्त कार्रवाई की व्यवस्था बनाई जा सकती है। भारी वाहन चालकों की ट्रेनिंग पर जोर नितिन गडकरी ने भारी वाहन और निर्माण उपकरण चलाने वाले ड्राइवरों के लिए अनिवार्य प्रशिक्षण की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि बड़े निर्माण उपकरण और भारी मशीनें चलाने वालों के लिए व्यवस्थित प्रशिक्षण जरूरी होना चाहिए। उन्होंने JCB India जैसी कंपनियों से भी अपील की कि मशीन या उपकरण देने से पहले ड्राइवरों को उचित ट्रेनिंग दी जाए। 10 लाख ड्राइवरों की होगी मुफ्त स्वास्थ्य जांच गडकरी ने सड़क और औद्योगिक सुरक्षा से जुड़ा ‘सुरक्षा’ पायलट प्रोग्राम भी शुरू किया है। इस कार्यक्रम के तहत हाईवे, खनन और निर्माण जैसे जोखिम वाले क्षेत्रों में काम करने वाले करीब 10 लाख ड्राइवरों और कर्मचारियों की मुफ्त मेडिकल जांच और काउंसलिंग कराने का लक्ष्य रखा गया है। पहले चरण में नागपुर-कामठी के NH-44 और चंद्रपुर के खनन क्षेत्र में करीब 10 हजार लोगों की जांच करने की योजना है। दोपहिया हादसों में 81,780 मौतों का दावा गडकरी ने सड़क हादसों के आंकड़ों का जिक्र करते हुए कहा कि भारत में दोपहिया वाहन दुर्घटनाओं में 81,780 लोगों की मौत हुई है और यह संख्या बेहद चिंताजनक है। उन्होंने सड़क हादसों के प्रमुख कारणों में सीट बेल्ट नहीं लगाना, हिट एंड रन, गलत दिशा में वाहन चलाना, शराब पीकर ड्राइविंग और मोबाइल फोन के इस्तेमाल को गिनाया। सीट बेल्ट नहीं लगाने से 14,466 मौतों का आंकड़ा गडकरी ने बताया कि सीट बेल्ट नहीं लगाने से 14,466 मौतें हुईं, जबकि हिट एंड रन की घटनाओं में 34,030 लोगों की जान गई।इन आंकड़ों के आधार पर उन्होंने ड्राइवर ट्रेनिंग, स्वास्थ्य जांच और ट्रैफिक नियमों के सख्त पालन की जरूरत पर जोर दिया। रोजगार और सड़क सुरक्षा दोनों पर फोकस गडकरी का बयान ऐसे समय आया है जब कई राज्यों में बाइक टैक्सी को लेकर अलग-अलग नीतियां और विवाद सामने आते रहे हैं। केंद्र की कोशिश इसे रोजगार के अवसर के तौर पर बढ़ावा देने की है, वहीं राज्य सरकारों को स्थानीय परिवहन नियमों और सुरक्षा मानकों के आधार पर निर्णय लेना होगा।
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राष्ट्रीय न्यूज़: डीग। साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान “ऑपरेशन काउंटडाउन” के तहत डीग पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दिल्ली के उत्तम नगर इलाके में चल रहे कथित फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने तीन मंजिला इमारत में दबिश देकर 31 युवकों और 33 युवतियों सहित कुल 64 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि 2 नाबालिगों को रेस्क्यू कराया गया। डीग पुलिस अधीक्षक शरण गोपीनाथ के. के निर्देशन में की गई इस कार्रवाई में पुलिस ने मौके से 88 एंड्रॉयड स्मार्टफोन, एक्सिस बैंक, यस बैंक और एचडीएफसी बैंक के कथित फर्जी आईडी कार्ड तथा बड़ी मात्रा में बैंकिंग डेटा जब्त किया है। बैंक अधिकारी बनकर लोगों को करते थे कॉल पुलिस के अनुसार गिरोह के सदस्य खुद को एक्सिस बैंक और एचडीएफसी बैंक का वरिष्ठ अधिकारी बताकर लोगों को फोन करते थे। कॉल के दौरान ग्राहकों को क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाने, कार्ड रिन्यू करने या अन्य बैंकिंग सुविधा देने का झांसा दिया जाता था। इसके बाद उनसे कथित रूप से OTP, CVV, PAN कार्ड की जानकारी, जन्मतिथि और Gmail ID जैसी संवेदनशील जानकारियां हासिल की जाती थीं। पुलिस का आरोप है कि इन जानकारियों का इस्तेमाल कर खातों और कार्ड से रकम निकाली जाती थी। डीग के बैंक मैनेजर की शिकायत से खुला मामला इस साइबर नेटवर्क की जांच उस समय शुरू हुई जब एक्सिस बैंक, डीग के शाखा प्रबंधक फूल सिंह ने साइबर क्राइम थाना डीग में शिकायत दर्ज कराई।शिकायत में आरोप लगाया गया कि कुछ अज्ञात लोग बैंक के नाम, लोगो और साख का दुरुपयोग कर कथित फर्जी वेबसाइटों और कॉलिंग के जरिए ग्राहकों को ठगी का शिकार बना रहे हैं। इसके बाद पुलिस ने तकनीकी जांच शुरू की और डिजिटल फुटप्रिंट्स तथा सर्विलांस के आधार पर संदिग्धों तक पहुंचने का प्रयास किया। जांच आजमगढ़ के आकाश तक पहुंची पुलिस जांच में तकनीकी सुरागों के आधार पर टीम उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ निवासी आकाश तक पहुंची। इसके बाद जांच आगे बढ़ी तो दिल्ली के उत्तम नगर में किराए पर ली गई तीन मंजिला इमारत से कॉल सेंटर संचालित होने की जानकारी सामने आई।पुलिस के अनुसार यहां से खास तौर पर राजस्थान के मोबाइल नंबरों पर टारगेटेड कॉलिंग की जा रही थी। फर्जी बैंक आईडी और बैंकिंग डेटा जब्त रेड के दौरान पुलिस को मौके से 88 स्मार्टफोन के साथ बैंक कर्मचारियों के नाम पर तैयार किए गए कथित फर्जी आईडी कार्ड और आम लोगों का बैंकिंग डेटा मिला।पुलिस अब जब्त मोबाइल फोन और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच कर यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क से कितने लोग ठगी का शिकार हुए और कुल कितनी राशि का लेन-देन हुआ। अंतरराज्यीय नेटवर्क की जांच जारी पुलिस इस मामले को एक बड़े अंतरराज्यीय साइबर नेटवर्क से जोड़कर देख रही है। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर गिरोह के अन्य सदस्यों, डेटा उपलब्ध कराने वालों और रकम के ट्रांजेक्शन से जुड़े लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। पुलिस के अनुसार आगे की जांच में इस नेटवर्क से जुड़े और नाम सामने आ सकते हैं।
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गुप्त ध्वनि किरणों के साथ ओशो पर किसने हमला किया?...
गुप्त ध्वनि किरणों के साथ ओशो पर किसने हमला किया?... * ओशो के निजी दंत चिकित्सक देवगेट ओशो की मृत्यु से 4 दिन पहले हुई घटनाओं के बारे में बात करते हैं (शरीर को छोड़कर)... * 15 aजनवरी, 1990 को, मेरे जन्मदिन पर, मुझे शुन्यो से एक संदेश मिला: ओशो चाहते थे कि मैं उनके पेट का एक्स-रे ले। हम दंaत कक्ष में मिले। ओशो का शरीर पतला और बेकार लग रहा था, फिर भी मैंने उसे शक्तिशाली रूप से उपस्थित महसूस किया। मुझे शुन्यो से पता था कि वह हर दिन बीस घंटे से अधिक सो रहा था, हर शाम बुद्ध हॉल में कुछ क़ीमती मिनटों के लिए अपनी शारीरिक ऊर्जा को बचा रहा था। ओशो नेa मुझे बताया कि उसके हमलावरों की आवाज़ से उसका शरीर बहुत कमजोर हो गया था। उन्होंने कहा कि उनमें से शायद तीन, दो पुरुष और एक महिला, ध्वनि तरंगों पर ध्यानaa केंद्रित करने और अपने शरीर को लक्षित करने के लिए एक विशेष गठन में बैठे थे। यहां भारत में प्राचीन योगिक प्रथाएं हैं जहां लोग कुछ ध्वनियों, कुछ मंत्रों को जानते हैं, जो लोगों को नुक़सान पहुंचाने के लिए ध्वनि को केंद्रित कर सकते हैं। लेकिन मुझ पर हमला करaaने वाले ये लोग भारतीय नहीं हैं। वे वही लोग हैं जिन्होंने अमेरिका में पहले मुझे मारने की कोशिश की थी। वे तब सफल नहीं हो सके, और अब वे जो शुरू किया उसे पूरा कर ने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने मुझे बोलने से रोकने के लिए ज़हर की कोशिश की लेकिन मैं जारी रखने में कामयाब रहा। अब, पांच साल बाद वे वापस आ गए हैं। उन्होंने पहले बुद्ध हॉल में अपनी ध्वनि किरणों का उपयोग मेरे दिमाग़ पर हमला करने के लिए किया लेकिन मैं अपने दिमाग़ में नहीं हूं। मैं एक नो-मन हूं और उनकी आवाज़ का बहुत कम प्रभाव था। इसलिए उन्होंने अपनी रणनीति बदल दी, अब वे मेरे शरीर पर हमला कर रहे हैं। मेरे गरीब शरीर को उनकी किरणों से कोई सुरक्षा नहीं है। हर दिन यह कमजोर होता जाता है। वे मुझे मार नहीं सकते लेकिन वे मेरे शरीर को नुक़सान पहुंचा सकते हैं। अभी मेरे जिगर के क्षेत्र में बहुत दर्द हो रहा है। क्या आप इसे एक्स-रे कर सकते हैं? दुख की बात है, मैंने समझाया कि मेरी दंत एक्स-रे मशीन शायद अपर्याप्त थी क्योंकि यह केवल दांतों और जबड़े की छोटी फिल्में ले सकती थी, लेकिन हम कोशिश कर सकते थे। अमृतो को हमारे पास सबसे बड़ी एक्स-रे फ़िल्म मिली, जबकि मैंने इसकी बीम को चौड़ा करने के लिए डेंटल एक्स-रे मशीन के साथ जिग्गल किया। मैंने वह करने की कोशिश की जो ओशो पूछ रहा था। मैंने उसके जिगर के क्षेत्र की एक तस्वीर ली और फिर दंत विकास में बड़ी फ़िल्म विकसित करने में कामयाब रहा टैंक जिसे छोटी इंट्रा-ओरल डेंटल फ़िल्मों के लिए डिज़ाइन किया गया था, लेकिन परिणामी छवि धुंधली और अस्पष्ट थी। यह आख़िरी बार था जब मैंने ओशो को उसके भौतिक शरीर में देखा था। 19 जनवरी को शाम 4:30 बजे थे: मैं अपनी प्रेमिका के साथ अपने कमरे में था जब दरवाजे पर एक ज़रूरी दस्तक हुई। मनीषा, पीला और तनावग्रस्त दिख रही थी, ने पूछा कि क्या वह मेरे कमरे के फ़ोन का उपयोग कर सकती है। मुझे पता था कि वह केवल पूछेगी कि क्या कुछ असामान्य हो रहा है। अस्थायी सचिव के रूप में कार्य करते हुए वह इनर सर्कल के सदस्यों को फ़ोन कर रही थी और उन्हें कृष्णा हाउस में एक असाधारण बैठक में तुरंत आने के लिए कह रही थी। ओशो ने पंद्रह महीने पहले इक्कीस लोगों की एक कम्यून प्रबंधन टीम की स्थापना की थी, इसे इनर सर्कल का नाम दिया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका काम कम्यून के दिन-प्रतिदिन चलने का प्रबंधन करना था। मैं मूल चयन में नहीं था, लेकिन कुछ महीने बाद मुझे शामिल होने के लिए कहा गया था। फ़ोन करने के बाद, मनीषा ने कहा, “गीट, तुमने सुना कि मैं दूसरों को क्या बता रहा था। बैठक कृष्णा हाउस की छत पर ब्लू रूम में है। क्या आप वहां तुरंत जा सकते हैं?” इससे पहले कि मैं कोई सवाल पूछ पाता, वह जल्दी से गलियारे में चली गई, स्पष्ट रूप से एक और महत्वपूर्ण कार्य में शामिल थी। मैंने दोपहर के अधिकांश समय अजीब तरह से विपुल महसूस किया था। बाहरी मामलों की उथल-पुथल के बावजूद मैं कई दिनों से उत्साहित महसूस कर रहा था। मेरे दिल में ख़ुशी का एक अकथनीय नृत्य था। अंदर से मुझे उत्साह, आनंद महसूस हुआ। ब्लू रूम में पहुंचने पर, मैंने देखा कि अधिकांश इनर सर्कल पहले से ही वहां इकट्ठा हो चुके थे। माहौल तनावपूर्ण और तनावपूर्ण था। मेरा अपना उत्साह जगह से बाहर लग रहा था। मैं बैठ गया और इंतज़ार किया। कुछ मिनटों के बाद जयेश ने अमृतो के साथ प्रवेश किया। यह देखने के लिए संक्षेप में चारों ओर देखते हुए कि हम सभी मौजूद हैं, उन्होंने एक दृढ़, हालांकि शांत आवाज़ में कहा, “मुझे लगता है कि इसे लपेटने का कोई तरीक़ा नहीं है। मैं आपको सीधे बताऊंगा। ओशो ने कुछ समय पहले लगभग 4:45 बजे अपना शरीर छोड़ दिया था दोपहर।” स्तब्ध, मैंने अपनी घड़ी को देखा। शाम के 5:15 बजे थे। उपस्थित दो या तीन लोग रोने लगे। जयेश ने जल्दी से बीच में टोका, “देखो, मुझे तुम्हारी सारी मदद की ज़रूरत है। कृपया अभी तक अलग न हों। मुझे आप सभी की ज़रूरत है कि ओशो के भेजने को उतना ही सुंदर बनाने में मदद करें जितना वह हकदार है। यह आख़िरी चीज है जो हम उसके लिए कर सकते हैं भौतिक शरीर, चलो इसे अद्भुत बनाते हैं। उसने मुझे ठीक से बताया कि वह कैसे चाहता है कि ऐसा हो। उसने मुझे हर चीज के लिए विस्तृत निर्देश दिए, लेकिन मुझे यहां हर किसी की मदद की ज़रूरत है।” जयेश के शब्दों को सुनकर मेरा पहले का उत्साह सदमे में बदल गया था, लेकिन मैंने ओशो को अपने लोगों के साथ अपने अंतिम उत्सव का आनंद लेने में सक्षम बनाने के लिए हमारी मदद के लिए जयेश की अपील को स्पष्ट रूप से सुना। जैसे ही मैंने ब्लू रूम छोड़ा, जयेश ने मुझे बताया कि ओशो ने अनुरोध किया था कि मैं उनके शरीर को जलते हुए घाटों तक ले जाने के लिए एक वाहक बनूं। गतिविधि और भ्रमित भावनाओं के एक धुंध में मुझे याद है कि ओशो के इस अंतिम उपहार के लिए बेहद आभारी महसूस कर रहा था। - स्वामी देवगीत पुस्तक : ओशो - द फर्स्ट बुद्ध इन द डेंटल चेयर अध्याय: 17 अध्याय का नाम: ओशो का अंतिम दंत नाटक: अधिनियम V अंतिम सुनहरी झलक
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