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September 4, 2026
जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने नागौर जिले में पुलिस अधीक्षक का पद लंबे समय से खाली रहने और आगामी निकाय चुनावों के मद्देनजर नियमित आईपीएस अधिकारी की नियुक्ति की मांग वाली जनहित याचिका का निस्तारण कर दिया। अदालत ने इसे प्रशासनिक प्रकृति का मामला मानते हुए सीधे हस्तक्षेप से इनकार किया, लेकिन याचिकाकर्ता को राज्य निर्वाचन आयोग के समक्ष नया अभ्यावेदन पेश करने की छूट दी है। हाईकोर्ट ने निर्वाचन आयोग को निर्देश दिया कि यदि ऐसा अभ्यावेदन प्रस्तुत किया जाता है तो उस पर कानून के अनुसार विचार कर उचित निर्णय लिया जाए।
RLP की जनहित याचिका पर हुई सुनवाई
न्यायाधीश पुष्पेन्द्र सिंह भाटी और न्यायाधीश बिपिन गुप्ता की खंडपीठ ने राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की। पार्टी के अधिकृत प्रतिनिधि अनिल बारूपाल स्वयं अदालत में उपस्थित हुए। याचिका में नागौर के रिक्त पुलिस अधीक्षक पद पर भारतीय पुलिस सेवा संवर्ग के नियमित अधिकारी की नियुक्ति की मांग की गई थी।
19 मई से रिक्त बताया गया SP का पद
याचिका के अनुसार नागौर के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक का 19 मई 2026 को तबादला होने के बाद से पद रिक्त है। याचिकाकर्ता का कहना था कि 19 अगस्त को कार्मिक विभाग ने पुलिस अधीक्षक का अतिरिक्त प्रभार अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक को सौंप दिया, जबकि निकाय चुनाव की प्रक्रिया के दौरान जिला कलक्टर और पुलिस अधीक्षक की भूमिका निष्पक्ष एवं स्वतंत्र चुनाव सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसी आधार पर नियमित आईपीएस अधिकारी की नियुक्ति की मांग उठाई गई थी।
हाईकोर्ट बोला- निर्वाचन आयोग के सामने रखें मांग
हाईकोर्ट ने फिलहाल नागौर में एसपी नियुक्त करने का कोई प्रत्यक्ष आदेश जारी नहीं किया। अदालत ने RLP को अपनी मांग और आपत्तियां राज्य निर्वाचन आयोग के सामने रखने की अनुमति देते हुए कहा कि आयोग अभ्यावेदन पर कानून के अनुसार विचार करे। अब पार्टी की ओर से आयोग के समक्ष विस्तृत अभ्यावेदन प्रस्तुत किए जाने की संभावना है।
हनुमान बेनीवाल ने भी उठाया था मुद्दा
RLP सुप्रीमो और नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने भी इस मुद्दे को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर उठाया था। उन्होंने सवाल किया था कि नागौर जैसे संवेदनशील जिले में निकाय चुनाव की प्रक्रिया के दौरान पुलिस अधीक्षक जैसे महत्वपूर्ण पद को अतिरिक्त कार्यभार के भरोसे क्यों चलाया जा रहा है। बेनीवाल ने यह भी दावा किया कि जिले में आईपीएस अधिकारी उपलब्ध होने के बावजूद आरपीएस रैंक के अधिकारी को एसपी का अतिरिक्त कार्यभार दिया गया है।
राज्य निर्वाचन आयोग और गृह विभाग को भेजा पत्र
हनुमान बेनीवाल ने कहा था कि उन्होंने राज्य निर्वाचन आयोग के आयुक्त और राजस्थान सरकार के गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को पत्र भेजकर मामले में हस्तक्षेप की मांग की है। उनका तर्क था कि चुनाव केवल करवाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि जनता में निष्पक्षता और सुरक्षा को लेकर भरोसा कायम रहना भी जरूरी है।
अब चुनाव आयोग के फैसले पर नजर
हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब नागौर एसपी की नियमित नियुक्ति का मुद्दा राज्य निर्वाचन आयोग के सामने जा सकता है। आयोग के समक्ष अभ्यावेदन प्रस्तुत होने के बाद यह देखा जाएगा कि वह चुनावी परिस्थितियों, प्रशासनिक व्यवस्था और याचिकाकर्ता की आपत्तियों को देखते हुए क्या निर्णय करता है।
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