राजस्थान न्यूज़: जोधपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 4 जुलाई को प्रस्तावित जोधपुर और पचपदरा दौरे को लेकर राजस्थान सरकार ने तैयारियां तेज कर दी हैं। सुरक्षा, प्रोटोकॉल और व्यवस्थाओं को लेकर उच्चस्तरीय समीक्षा का दौर जारी है। प्रधानमंत्री के दौरे से पहले प्रदेश के मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास और पुलिस महानिदेशक राजीव शर्मा गुरुवार को स्वयं वंदे भारत ट्रेन से जयपुर से जोधपुर पहुंचे। जोधपुर रेलवे स्टेशन पर कलेक्टर आलोक रंजन, पुलिस कमिश्नर शरद कविराज सहित वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों ने मुख्य सचिव और डीजीपी की अगवानी की। उच्चस्तरीय अधिकारियों के जोधपुर पहुंचने के साथ ही प्रधानमंत्री के दौरे से जुड़ी सुरक्षा और व्यवस्थाओं की अंतिम समीक्षा शुरू हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 4 जुलाई को जोधपुर एयरपोर्ट के नए टर्मिनल के लोकार्पण और पचपदरा स्थित एचपीसीएल राजस्थान रिफाइनरी से जुड़े कार्यक्रम में शामिल होंगे। इसे देखते हुए जोधपुर एयरपोर्ट, एयरफोर्स स्टेशन, कार्यक्रम स्थल, हेलीपैड और पचपदरा रिफाइनरी क्षेत्र में सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास और डीजीपी राजीव शर्मा आज जोधपुर एयरपोर्ट और पचपदरा रिफाइनरी का ग्राउंड जीरो पर जाकर फाइनल निरीक्षण करेंगे। इस दौरान वे सुरक्षा व्यवस्था, यातायात प्रबंधन, वीआईपी मूवमेंट, आपातकालीन सेवाओं, प्रवेश व्यवस्था और प्रोटोकॉल से जुड़े सभी बिंदुओं की समीक्षा करेंगे। अधिकारियों की उच्चस्तरीय टीम के पहुंचने के बाद जोधपुर और पचपदरा दोनों जगह प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। जिला प्रशासन, पुलिस, एयरपोर्ट अथॉरिटी, सुरक्षा एजेंसियों और संबंधित विभागों के अधिकारी तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। प्रधानमंत्री के दौरे को लेकर सुरक्षा एजेंसियां पहले से ही अलर्ट मोड पर हैं। एयरपोर्ट और कार्यक्रम स्थलों के आसपास निगरानी बढ़ा दी गई है। सुरक्षा व्यवस्था में किसी भी तरह की कमी न रहे, इसके लिए वरिष्ठ अधिकारी स्वयं मौके पर पहुंचकर व्यवस्थाओं का परीक्षण कर रहे हैं। जोधपुर और पचपदरा में प्रधानमंत्री के कार्यक्रमों को लेकर प्रशासनिक स्तर पर सभी तैयारियों को समय से पहले पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्य सचिव और डीजीपी की मौजूदगी में होने वाला अंतिम निरीक्षण इस दौरे की सुरक्षा और व्यवस्थाओं की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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राजस्थान न्यूज़: जयपुर। पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ हृदय संबंधी समस्या के चलते जयपुर के जवाहर सर्किल स्थित इटरनल हॉस्पिटल में भर्ती हुए हैं। वे अपनी पत्नी डॉ. सुदेश धनखड़ के साथ जयपुर पहुंचे। अस्पताल में उनकी कार्डिएक जांच की जा रही है और आवश्यक मेडिकल प्रक्रिया के तहत एंजियोप्लास्टी की तैयारी बताई जा रही है। पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ शुक्रवार सुबह करीब 8:15 बजे एयर इंडिया की नियमित फ्लाइट से जयपुर एयरपोर्ट पहुंचे। एयरपोर्ट से वे सीधे इटरनल हॉस्पिटल गए, जहां प्रारंभिक जांच के लिए उन्हें इमरजेंसी वार्ड में ले जाया गया। डॉक्टरों की टीम ने उनके जरूरी रूटीन मेडिकल टेस्ट किए। चिकित्सकों के अनुसार, धनखड़ की यह विजिट पहले से तय कार्डिएक फॉलो-अप का हिस्सा है। उनके कुछ प्रारंभिक चेकअप पहले ही पूरे किए जा चुके थे। अस्पताल में उनकी मेडिकल हिस्ट्री को देखते हुए डॉक्टरों की टीम पूरी सतर्कता के साथ स्वास्थ्य परीक्षण और आगे की प्रक्रिया कर रही है। जानकारी के अनुसार, जगदीप धनखड़ के हृदय संबंधी उपचार और एंजियोप्लास्टी की प्रक्रिया वरिष्ठ इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. समीन के. शर्मा की देखरेख में की जा रही है। उनकी टीम पूर्व उपराष्ट्रपति की स्वास्थ्य स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए है। इससे पहले मार्च 2025 में भी हृदय संबंधी समस्या के चलते जगदीप धनखड़ को नई दिल्ली स्थित एम्स अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उनका कार्डिएक प्रोसीजर हुआ था। इसके अलावा इसी वर्ष 12 जनवरी को अचानक बेहोश होने की शिकायत के बाद उन्हें दिल्ली एम्स में भर्ती कर एमआरआई जांच कराई गई थी। कार्डिएक जांच और आवश्यक मेडिकल प्रक्रिया के बाद धनखड़ के जयपुर स्थित सरकारी गेस्ट हाउस लोकभवन जाने की संभावना है, जहां उनके ठहरने की व्यवस्था की गई है। इसके बाद उनका शारदा नर्सिंग होम जाने का कार्यक्रम बताया जा रहा है, जहां डॉ. राहुल शारदा द्वारा उनके नेत्रों की विस्तृत जांच की जाएगी। डॉक्टरों के अनुसार, यह नेत्र जांच भी उनके नियमित स्वास्थ्य परीक्षण कार्यक्रम का हिस्सा है। पूर्व उपराष्ट्रपति के अस्पताल में भर्ती होने की जानकारी मिलने के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल रही। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सहित कई नेताओं ने अस्पताल पहुंचकर जगदीप धनखड़ की कुशलक्षेम पूछी और उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की।
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राजस्थान न्यूज़: जयपुर। राजस्थान में एंटी टेररिज्म स्क्वॉड ने शुक्रवार सुबह बड़ी कार्रवाई करते हुए 20 से ज्यादा शहरों में एक साथ छापेमारी की। यह कार्रवाई कथित पाकिस्तानी आतंकी शहजाद भट्टी से जुड़े लोगों और उसके संपर्क में आए संदिग्धों की तलाश में की गई। छापेमारी के दौरान 28 संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है, जबकि बाड़मेर से एक युवक को गिरफ्तार किया गया है। एटीएस के अनुसार, शहजाद भट्टी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए युवाओं को अपने संपर्क में लाता है। आरोप है कि वह ऑनलाइन गेम, पैसों और गैंगस्टर ग्लैमर का लालच देकर युवाओं से दोस्ती करता है। इसके बाद उनसे संवेदनशील स्थानों की तस्वीरें और अन्य जानकारी मंगवाने का प्रयास करता है। जांच एजेंसियों के अनुसार, उसके संपर्क में आने वाले अधिकांश युवा भारत-पाकिस्तान सीमा से सटे जिलों से जुड़े पाए गए हैं। जयपुर में भी एटीएस ने अलग-अलग इलाकों में छापेमारी की। जानकारी के अनुसार, जयपुर से भी कई लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। इनके मोबाइल फोन, सोशल मीडिया अकाउंट, ऑनलाइन गतिविधियों और संदिग्ध संपर्कों की जांच की जा रही है। बाड़मेर जिले के गागरिया गांव से एटीएस ने बशीर उम्र 20 वर्ष, पुत्र आमद खान को हिरासत में लिया था। रामसर थाने में पूछताछ के बाद एटीएस की सूचना पर पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। दावा है कि बशीर शहजाद भट्टी के लगातार संपर्क में था। पुलिस और एटीएस अब उसके मोबाइल, सोशल मीडिया चैट और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड की जांच कर रही हैं। सूत्रों के अनुसार, एटीएस लंबे समय से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर शहजाद भट्टी को फॉलो करने वाले और उससे संपर्क में रहने वाले लोगों पर नजर रख रही थी। शुक्रवार की छापेमारी में ऐसे ही संदिग्धों को हिरासत में लेने की जानकारी है। जांच एजेंसियों का मानना है कि भट्टी का नेटवर्क राजस्थान के साथ हरियाणा, पंजाब, दिल्ली और उत्तर प्रदेश तक फैला हो सकता है। राजस्थान में भट्टी के स्लीपर सेल सक्रिय होने की आशंका भी जताई जा रही है। बीते करीब छह महीने से सुरक्षा एजेंसियां जैसलमेर, श्रीगंगानगर, बाड़मेर, बीकानेर सहित सीमावर्ती जिलों में उसके नेटवर्क को खंगाल रही हैं। आशंका है कि राजस्थान के अलग-अलग हिस्सों में उसके संपर्क सक्रिय हैं और हवाला के जरिए उन्हें पैसा पहुंचाया जा रहा है। इस धन का उपयोग भारत विरोधी गतिविधियों में किए जाने की आशंका की जांच की जा रही है। श्रीगंगानगर में करीब दो महीने पहले पुलिस ने 10 लोगों को हिरासत में लिया था। कार्रवाई के बाद श्रीगंगानगर एसपी हरीशंकर ने बताया था कि शहजाद भट्टी पाकिस्तान से ड्रोन के जरिए हेरोइन, विदेशी पिस्टल और आरडीएक्स भारत भेज रहा है। जांच एजेंसियों के अनुसार, वह ऐसे युवाओं को निशाना बनाता है, जो शॉर्टकट से पैसा कमाना चाहते हैं। सोशल मीडिया पर संपर्क बनाकर वह उन्हें धीरे-धीरे अपने गिरोह से जोड़ने का प्रयास करता है। सुरक्षा एजेंसियों की जांच में यह भी सामने आया है कि शहजाद भट्टी राजस्थान में आतंकी वारदातों की साजिश रच रहा था। मार्च 2026 में हरियाणा के अंबाला से सुरक्षा एजेंसियों ने तीन आतंकियों को पकड़ा था। पूछताछ में उन्होंने बताया था कि भट्टी राजस्थान में धमाकों की तैयारी कर रहा था। इसके लिए हनुमानगढ़ में इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस पहुंचाए जाने की जानकारी भी सामने आई थी। आरडीएक्स पहुंचने में देरी होने के कारण यह साजिश नाकाम हो गई। पिछले कुछ महीनों में भट्टी से जुड़े या उसके संपर्क में पाए गए कई संदिग्धों पर कार्रवाई हो चुकी है। 25 मार्च को हनुमानगढ़ के गांव किशनपुरा दिखनादा निवासी जसवंत कुमार उर्फ सोनू को पाकिस्तानी गैंगस्टर से संपर्क और हथियारों की फोटो साझा करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। 26 मार्च को श्रीगंगानगर के लालगढ़ जाटान थाना क्षेत्र के केरा चक निवासी आकाशदीप को गिरफ्तार किया गया था। जांच में सामने आया कि वह इंस्टाग्राम और वॉट्सऐप पर शहजाद भट्टी के संपर्क में था और गांव में लोगों को धमकियां दे रहा था।
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उदयपुर न्यूज़: अजमेर के बोर्ड ऑफिस की गली स्थित ओला शोरूम पर गुरुवार को ग्राहकों ने जमकर हंगामा किया और विरोध प्रदर्शन करते हुए जल्द समाधान की मांग की। बड़ी संख्या में पहुंचे ग्राहकों, विशेषकर महिलाओं ने आरोप लगाया कि उनकी इलेक्ट्रिक स्कूटी खराब होने के बाद सात महीने पहले सर्विस के लिए जमा कराई गई थी, लेकिन आज तक वाहन वापस नहीं मिला। उनका कहना है कि वे लगातार शोरूम के चक्कर लगा रही हैं, लेकिन हर बार केवल आश्वासन दिया जाता है। फोन करने पर भी संतोषजनक जवाब नहीं मिलता। प्रदर्शन के दौरान एक युवक ने आरोप लगाया कि उसके स्कूटर का स्टार्ट बटन बार-बार खराब हो जाता है। शिकायत करने पर केवल बटन बदल दिया जाता है, लेकिन मूल समस्या बनी रहती है। ग्राहकों का कहना है कि उन्होंने कंपनी के उच्च अधिकारियों से भी संपर्क किया, लेकिन वहां से भी कोई ठोस समाधान नहीं मिला। इससे नाराज ग्राहकों ने शोरूम के बाहर प्रदर्शन कर प्रबंधन के रवैये पर सवाल उठाए। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द समस्या का समाधान नहीं किया गया तो वे आंदोलन को और तेज करेंगे। मौके पर काफी देर तक अफरा-तफरी का माहौल बना रहा।
Read more 2nd Jul 2026
अजमेर न्यूज़: 1100 वर्ष पूर्व स्थापित मंदिर की बड़ी है मान्यता, दूर दराज से पहुंचते हैं हजारों श्रद्धालु
Read more 31st Aug 2022
अजमेर न्यूज़: 1968 से कस्बे की धार्मिक संस्था श्री ब्रह्म पुष्कर सेवा संघ कर रही है इस अनूठी परंपरा का निर्वहन
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अजमेर न्यूज़: 10 टीमें 8 - 8 वार्डो में जाकर घूम रही गायों का करेंगीं प्राथमिक उपचार
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राष्ट्रीय न्यूज़: अजमेर, 3 जुलाई। राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष श्री वासुदेव देवनानी ने लोकसभा सचिवालय के पार्लियामेंटरी रिसर्च एंड ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट फॉर डेमोक्रेसीज़ (PRIDE) तथा पश्चिम बंगाल विधानसभा के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित नवनिर्वाचित विधायकों के राष्ट्रीय प्रबोधन कार्यक्रम में संसदीय व्यवस्था में वित्तीय कार्य और बजटीय प्रक्रिया विषय पर अध्यक्षीय उदबोधन देते हुए कहा कि लोकधन पर विधायिका का प्रभावी नियंत्रण ही लोकतंत्र की सबसे बड़ी शक्ति है। उन्होंने कहा कि बजट केवल आय-व्यय का दस्तावेज नहीं, बल्कि जनता के विश्वास, पारदर्शिता, जवाबदेही और लोककल्याण का संवैधानिक संकल्प है। उन्होंने कहा कि संविधान निर्माताओं ने कार्यपालिका पर विधायिका का वित्तीय नियंत्रण सुनिश्चित करते हुए ऎसी व्यवस्था विकसित की है कि जनता की गाढ़ी कमाई का एक-एक रुपया सदन की अनुमति के बिना न तो व्यय किया जा सकता है और न ही जनता पर कोई नया कर लगाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक जनप्रतिनिधि का दायित्व है कि वह बजटीय प्रक्रिया, अनुदान मांगों, विनियोग विधेयक, वित्त विधेयक तथा संचित निधि, आकस्मिकता निधि और लोक लेखा जैसी संवैधानिक व्यवस्थाओं की गहन समझ विकसित करे। श्री देवनानी ने कहा कि बजट पर होने वाली चर्चा राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का मंच नहीं, बल्कि राज्य के आर्थिक विकास और जनकल्याण की दिशा तय करने वाला गंभीर लोकतांत्रिक विमर्श होना चाहिए। उन्होंने कहा कि विभाग सम्बद्ध स्थायी समितियां कार्यपालिका की वित्तीय जवाबदेही सुनिश्चित करने का सबसे प्रभावी माध्यम हैं। उन्होंने उन राज्यों में भी ऎसी समितियों के गठन की आवश्यकता पर बल दिया, जहां अभी तक यह व्यवस्था लागू नहीं है। उन्होंने कहा कि इन समितियों के माध्यम से बजटीय प्रावधानों की गहन समीक्षा होगी, लोकधन के उपयोग पर प्रभावी निगरानी बढ़ेगी तथा बिना पर्याप्त चर्चा के बजट पारित होने जैसी प्रवृत्तियों पर रोक लगेगी। राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष श्री वासुदेव देवनानी ने राजस्थान विधानसभा की परंपराओं और नवाचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि राजस्थान में बजट पर सामान्य चर्चा और अनुदान मांगों पर पर्याप्त समय दिया जाता है तथा पहली बार निर्वाचित होकर आए सदस्यों को भी व्यापक भागीदारी का अवसर उपलब्ध कराया जाता है। उन्होंने बताया कि जनलेखा समिति, प्राक्कलन समिति तथा राजकीय उपक्रम समिति जैसी समितियां सार्वजनिक धन के उपयोग की गहन समीक्षा करती हैं। साथ ही विधानसभा सचिवालय की शोध एवं संदर्भ शाखा सदस्यों को बजटीय विषयों पर तथ्यात्मक अध्ययन सामग्री, सांख्यिकीय विश्लेषण और संदर्भ सामग्री उपलब्ध कराकर गुणवत्तापूर्ण बहस में सहयोग प्रदान करती है। उन्होंने विधान मंडलों की वित्तीय स्वायत्तता का विषय प्रमुखता से उठाते हुए कहा कि जब कार्यपालिका विधायिका के प्रति जवाबदेह है, तब विधानसभाओं की वित्तीय आवश्यकताओं के लिए कार्यपालिका पर निर्भर रहना शक्ति पृथक्करण की संवैधानिक भावना के अनुरूप नहीं है। उन्होंने कहा कि राजस्थान विधानसभा इस दिशा में लगातार प्रयास कर रही है तथा वर्तमान में विधानसभा अध्यक्ष को वर्षभर में 50 लाख रुपये तक के विकास एवं प्रशासनिक कार्य पूर्व स्वीकृति के बिना कराने का अधिकार प्राप्त है। उन्होंने कहा कि देश के सभी विधान मंडलों को स्वतंत्र वित्तीय अधिकार और अपना स्वायत्त बजट मिलना चाहिए, जिससे वे पूर्ण स्वतंत्रता के साथ अपनी संवैधानिक जिम्मेदारियों का निर्वहन कर सकें। श्री देवनानी ने संसद और राज्य विधान मंडलों की व्यवस्थाओं की तुलना करते हुए कहा कि संसद के बजटीय प्रस्तावों को सम्मानपूर्वक मुख्य बजट का हिस्सा बनाया जाता है, जबकि अनेक राज्यों में विधानसभाओं के बजटीय प्रस्तावों में कार्यपालिका द्वारा कटौती कर दी जाती है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता की दृष्टि से गंभीर विषय बताते हुए इस दिशा में राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक विमर्श और आवश्यक सुधारों की आवश्यकता जताई। उन्होंने इस अवसर पर उपस्थित लोकसभा सचिवालय के पूर्व संयुक्त सचिव श्री विनय मोहन के संसदीय अनुभव का उल्लेख करते हुए नवनिर्वाचित विधायकों से संवाद सत्र का अधिकतम लाभ उठाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि संसदीय प्रक्रियाओं, वित्तीय नियमों और कार्यपालिका की जवाबदेही सुनिश्चित करने के व्यावहारिक उपायों की समझ प्रभावी जनप्रतिनिधित्व की आधारशिला है। श्री देवनानी ने नवनिर्वाचित विधायकों का आह्वान किया कि वे बजट के आंकड़ों के पीछे निहित जनकल्याण के उद्देश्यों को समझें, अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों की समस्याओं को प्रभावी ढंग से सदन में उठाएं तथा वित्तीय अनुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही के माध्यम से लोकतांत्रिक संस्थाओं को और अधिक सशक्त बनाने में सक्रिय भूमिका निभाएं।
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राष्ट्रीय न्यूज़: जोधपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 4 जुलाई को जोधपुर पहुंचकर शहर के बहुप्रतीक्षित नए एयरपोर्ट टर्मिनल का लोकार्पण करेंगे। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार प्रधानमंत्री सुबह विशेष विमान से एयरफोर्स स्टेशन पहुंचेंगे और वहां से नए टर्मिनल भवन तक जाएंगे। एयरपोर्ट परिसर में आयोजित कार्यक्रम में वे एलईडी स्क्रीन के माध्यम से रिमोट से बटन दबाकर नए एयरपोर्ट टर्मिनल का लोकार्पण करेंगे। इसी दौरान क्षेत्रीय हवाई संपर्क योजना ‘उड़ान-2’ का भी शुभारंभ किया जाएगा। लोकार्पण समारोह के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हेलिकॉप्टर से बालोतरा जिले के पचपदरा स्थित एचपीसीएल राजस्थान रिफाइनरी के कार्यक्रम के लिए रवाना होंगे। प्रधानमंत्री की यात्रा को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह अलर्ट मोड पर हैं। गुरुवार को सुरक्षा एजेंसियों ने एयरपोर्ट परिसर और आसपास के क्षेत्र को अपने नियंत्रण में लेकर सुरक्षा व्यवस्थाओं की जांच की। विशेष दस्तों ने डॉग स्क्वायड की सहायता से एयरपोर्ट परिसर, नए टर्मिनल भवन और आसपास के क्षेत्रों में सघन जांच की। प्रधानमंत्री विशेष विमान से एयरफोर्स स्टेशन पहुंचेंगे। इसके बाद वे एयरफोर्स एरिया के अंदर से ही सड़क मार्ग द्वारा नए टर्मिनल भवन के डिपार्चर गेट तक आएंगे। लाउंज एरिया में लोकार्पण समारोह आयोजित होगा। कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री भाजपा नेताओं और जनप्रतिनिधियों से संक्षिप्त मुलाकात भी कर सकते हैं। पूरा कार्यक्रम करीब 22 मिनट का बताया जा रहा है। इसके बाद प्रधानमंत्री नए टर्मिनल के अराइवल गेट से बाहर निकलकर हेलिकॉप्टर से पचपदरा के लिए प्रस्थान करेंगे। जोधपुर एयरपोर्ट का नया टर्मिनल भवन करीब तीन वर्ष में तैयार हुआ है। इसके निर्माण पर लगभग 400 करोड़ रुपए की लागत आई है। यह भवन पुराने टर्मिनल की तुलना में लगभग छह गुना बड़ा है और इसमें यात्रियों के लिए आधुनिक सुविधाएं विकसित की गई हैं। नए टर्मिनल की सबसे बड़ी विशेषता छह एयरोब्रिज हैं। पश्चिमी राजस्थान के किसी भी एयरपोर्ट पर पहली बार इस प्रकार की सुविधा विकसित की गई है। इसके अलावा आधुनिक चेक-इन काउंटर, उन्नत सुरक्षा जांच व्यवस्था, स्वचालित बैगेज सिस्टम, विस्तृत प्रतीक्षालय और यात्रियों के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। नए टर्मिनल के एप्रन पर एक साथ 12 से अधिक विमानों की पार्किंग की व्यवस्था होगी। वर्तमान टर्मिनल पर केवल तीन से चार विमानों को ही खड़ा किया जा सकता है। ऐसे में नए टर्मिनल से भविष्य में उड़ानों की संख्या बढ़ाने और पश्चिमी राजस्थान की हवाई कनेक्टिविटी मजबूत करने में मदद मिलेगी। लोकार्पण के बाद तकनीकी प्रक्रियाएं पूरी होने पर एयरलाइंस और एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के कार्यालयों को चरणबद्ध तरीके से नए टर्मिनल में स्थानांतरित किया जाएगा। इसके बाद वाणिज्यिक उड़ानों का संचालन भी नए टर्मिनल से शुरू किया जाएगा। माना जा रहा है कि नया टर्मिनल एक महीने के भीतर ऑपरेशनल हो सकता है। प्रधानमंत्री के दौरे से पहले मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा भी दो दिवसीय यात्रा पर शुक्रवार कोजोधपुर पहुंचेंगे प्रधानमंत्री के दौरे से पहले मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा भी दो दिवसीय यात्रा पर जोधपुर पहुंचेंगे। प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार मुख्यमंत्री शुक्रवार दोपहर 12.45 बजे जोधपुर हवाई अड्डे पहुंचेंगे। वे नए एयरपोर्ट पर प्रस्तावित कार्यक्रम स्थल का निरीक्षण करेंगे और इसके बाद हेलिकॉप्टर से पचपदरा जाएंगे। पचपदरा में मुख्यमंत्री एचपीसीएल के नए फ्लैगशिप रिटेल आउटलेट का उद्घाटन करेंगे और पौधरोपण कार्यक्रम में भाग लेंगे। इसके बाद वे रिफाइनरी का निरीक्षण कर बैठक लेंगे। शाम को वे जोधपुर लौटेंगे और रात्रि विश्राम सर्किट हाउस में करेंगे। चार जुलाई को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा जोधपुर एयरपोर्ट पहुंचकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुख्य आतिथ्य में नए टर्मिनल के उद्घाटन समारोह में शामिल होंगे। इसके बाद वे हेलिकॉप्टर से पचपदरा जाएंगे और वहां से लौटकर जोधपुर से जयपुर के लिए रवाना होंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे को देखते हुए जोधपुर और पचपदरा दोनों स्थानों पर प्रशासनिक तैयारियां तेज कर दी गई हैं। सुरक्षा, यातायात, कार्यक्रम स्थल, जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति और तकनीकी व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है।
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गुप्त ध्वनि किरणों के साथ ओशो पर किसने हमला किया?...
गुप्त ध्वनि किरणों के साथ ओशो पर किसने हमला किया?... * ओशो के निजी दंत चिकित्सक देवगेट ओशो की मृत्यु से 4 दिन पहले हुई घटनाओं के बारे में बात करते हैं (शरीर को छोड़कर)... * 15 aजनवरी, 1990 को, मेरे जन्मदिन पर, मुझे शुन्यो से एक संदेश मिला: ओशो चाहते थे कि मैं उनके पेट का एक्स-रे ले। हम दंaत कक्ष में मिले। ओशो का शरीर पतला और बेकार लग रहा था, फिर भी मैंने उसे शक्तिशाली रूप से उपस्थित महसूस किया। मुझे शुन्यो से पता था कि वह हर दिन बीस घंटे से अधिक सो रहा था, हर शाम बुद्ध हॉल में कुछ क़ीमती मिनटों के लिए अपनी शारीरिक ऊर्जा को बचा रहा था। ओशो नेa मुझे बताया कि उसके हमलावरों की आवाज़ से उसका शरीर बहुत कमजोर हो गया था। उन्होंने कहा कि उनमें से शायद तीन, दो पुरुष और एक महिला, ध्वनि तरंगों पर ध्यानaa केंद्रित करने और अपने शरीर को लक्षित करने के लिए एक विशेष गठन में बैठे थे। यहां भारत में प्राचीन योगिक प्रथाएं हैं जहां लोग कुछ ध्वनियों, कुछ मंत्रों को जानते हैं, जो लोगों को नुक़सान पहुंचाने के लिए ध्वनि को केंद्रित कर सकते हैं। लेकिन मुझ पर हमला करaaने वाले ये लोग भारतीय नहीं हैं। वे वही लोग हैं जिन्होंने अमेरिका में पहले मुझे मारने की कोशिश की थी। वे तब सफल नहीं हो सके, और अब वे जो शुरू किया उसे पूरा कर ने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने मुझे बोलने से रोकने के लिए ज़हर की कोशिश की लेकिन मैं जारी रखने में कामयाब रहा। अब, पांच साल बाद वे वापस आ गए हैं। उन्होंने पहले बुद्ध हॉल में अपनी ध्वनि किरणों का उपयोग मेरे दिमाग़ पर हमला करने के लिए किया लेकिन मैं अपने दिमाग़ में नहीं हूं। मैं एक नो-मन हूं और उनकी आवाज़ का बहुत कम प्रभाव था। इसलिए उन्होंने अपनी रणनीति बदल दी, अब वे मेरे शरीर पर हमला कर रहे हैं। मेरे गरीब शरीर को उनकी किरणों से कोई सुरक्षा नहीं है। हर दिन यह कमजोर होता जाता है। वे मुझे मार नहीं सकते लेकिन वे मेरे शरीर को नुक़सान पहुंचा सकते हैं। अभी मेरे जिगर के क्षेत्र में बहुत दर्द हो रहा है। क्या आप इसे एक्स-रे कर सकते हैं? दुख की बात है, मैंने समझाया कि मेरी दंत एक्स-रे मशीन शायद अपर्याप्त थी क्योंकि यह केवल दांतों और जबड़े की छोटी फिल्में ले सकती थी, लेकिन हम कोशिश कर सकते थे। अमृतो को हमारे पास सबसे बड़ी एक्स-रे फ़िल्म मिली, जबकि मैंने इसकी बीम को चौड़ा करने के लिए डेंटल एक्स-रे मशीन के साथ जिग्गल किया। मैंने वह करने की कोशिश की जो ओशो पूछ रहा था। मैंने उसके जिगर के क्षेत्र की एक तस्वीर ली और फिर दंत विकास में बड़ी फ़िल्म विकसित करने में कामयाब रहा टैंक जिसे छोटी इंट्रा-ओरल डेंटल फ़िल्मों के लिए डिज़ाइन किया गया था, लेकिन परिणामी छवि धुंधली और अस्पष्ट थी। यह आख़िरी बार था जब मैंने ओशो को उसके भौतिक शरीर में देखा था। 19 जनवरी को शाम 4:30 बजे थे: मैं अपनी प्रेमिका के साथ अपने कमरे में था जब दरवाजे पर एक ज़रूरी दस्तक हुई। मनीषा, पीला और तनावग्रस्त दिख रही थी, ने पूछा कि क्या वह मेरे कमरे के फ़ोन का उपयोग कर सकती है। मुझे पता था कि वह केवल पूछेगी कि क्या कुछ असामान्य हो रहा है। अस्थायी सचिव के रूप में कार्य करते हुए वह इनर सर्कल के सदस्यों को फ़ोन कर रही थी और उन्हें कृष्णा हाउस में एक असाधारण बैठक में तुरंत आने के लिए कह रही थी। ओशो ने पंद्रह महीने पहले इक्कीस लोगों की एक कम्यून प्रबंधन टीम की स्थापना की थी, इसे इनर सर्कल का नाम दिया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका काम कम्यून के दिन-प्रतिदिन चलने का प्रबंधन करना था। मैं मूल चयन में नहीं था, लेकिन कुछ महीने बाद मुझे शामिल होने के लिए कहा गया था। फ़ोन करने के बाद, मनीषा ने कहा, “गीट, तुमने सुना कि मैं दूसरों को क्या बता रहा था। बैठक कृष्णा हाउस की छत पर ब्लू रूम में है। क्या आप वहां तुरंत जा सकते हैं?” इससे पहले कि मैं कोई सवाल पूछ पाता, वह जल्दी से गलियारे में चली गई, स्पष्ट रूप से एक और महत्वपूर्ण कार्य में शामिल थी। मैंने दोपहर के अधिकांश समय अजीब तरह से विपुल महसूस किया था। बाहरी मामलों की उथल-पुथल के बावजूद मैं कई दिनों से उत्साहित महसूस कर रहा था। मेरे दिल में ख़ुशी का एक अकथनीय नृत्य था। अंदर से मुझे उत्साह, आनंद महसूस हुआ। ब्लू रूम में पहुंचने पर, मैंने देखा कि अधिकांश इनर सर्कल पहले से ही वहां इकट्ठा हो चुके थे। माहौल तनावपूर्ण और तनावपूर्ण था। मेरा अपना उत्साह जगह से बाहर लग रहा था। मैं बैठ गया और इंतज़ार किया। कुछ मिनटों के बाद जयेश ने अमृतो के साथ प्रवेश किया। यह देखने के लिए संक्षेप में चारों ओर देखते हुए कि हम सभी मौजूद हैं, उन्होंने एक दृढ़, हालांकि शांत आवाज़ में कहा, “मुझे लगता है कि इसे लपेटने का कोई तरीक़ा नहीं है। मैं आपको सीधे बताऊंगा। ओशो ने कुछ समय पहले लगभग 4:45 बजे अपना शरीर छोड़ दिया था दोपहर।” स्तब्ध, मैंने अपनी घड़ी को देखा। शाम के 5:15 बजे थे। उपस्थित दो या तीन लोग रोने लगे। जयेश ने जल्दी से बीच में टोका, “देखो, मुझे तुम्हारी सारी मदद की ज़रूरत है। कृपया अभी तक अलग न हों। मुझे आप सभी की ज़रूरत है कि ओशो के भेजने को उतना ही सुंदर बनाने में मदद करें जितना वह हकदार है। यह आख़िरी चीज है जो हम उसके लिए कर सकते हैं भौतिक शरीर, चलो इसे अद्भुत बनाते हैं। उसने मुझे ठीक से बताया कि वह कैसे चाहता है कि ऐसा हो। उसने मुझे हर चीज के लिए विस्तृत निर्देश दिए, लेकिन मुझे यहां हर किसी की मदद की ज़रूरत है।” जयेश के शब्दों को सुनकर मेरा पहले का उत्साह सदमे में बदल गया था, लेकिन मैंने ओशो को अपने लोगों के साथ अपने अंतिम उत्सव का आनंद लेने में सक्षम बनाने के लिए हमारी मदद के लिए जयेश की अपील को स्पष्ट रूप से सुना। जैसे ही मैंने ब्लू रूम छोड़ा, जयेश ने मुझे बताया कि ओशो ने अनुरोध किया था कि मैं उनके शरीर को जलते हुए घाटों तक ले जाने के लिए एक वाहक बनूं। गतिविधि और भ्रमित भावनाओं के एक धुंध में मुझे याद है कि ओशो के इस अंतिम उपहार के लिए बेहद आभारी महसूस कर रहा था। - स्वामी देवगीत पुस्तक : ओशो - द फर्स्ट बुद्ध इन द डेंटल चेयर अध्याय: 17 अध्याय का नाम: ओशो का अंतिम दंत नाटक: अधिनियम V अंतिम सुनहरी झलक
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