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राजस्थान

राजस्थान न्यूज़: 2 साल की कानूनी लड़ाई रंग लाई: पत्रकार कॉलोनी का सामुदायिक भवन फिर आमजन के लिए तैयार, हाईकोर्ट के आदेश के बाद जेडीए ने बहाल की सुविधाएं

राजस्थान न्यूज़: जयपुर। मानसरोवर स्थित पत्रकार कॉलोनी का सामुदायिक भवन करीब दो साल तक चली कानूनी लड़ाई के बाद एक बार फिर अपने मूल उद्देश्य—आमजन के उपयोग—के लिए उपलब्ध हो गया है। जिस भवन में जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) ने पृथ्वीराज नगर के जोन 18 और 19 के कार्यालय संचालित कर दिए थे, उसे राजस्थान हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद खाली कराकर दोबारा सामुदायिक उपयोग के योग्य बनाया गया है। इस पूरे मामले की शुरुआत उस समय हुई थी, जब पत्रकार कॉलोनी के निवासियों के लिए बने सामुदायिक भवन में JDA ने पृथ्वीराज नगर के जोन कार्यालय शुरू कर दिए। मामला राजस्थान हाईकोर्ट पहुंचा और अदालत ने भी इस सवाल को गंभीरता से लिया कि आवासीय कॉलोनी में सार्वजनिक सुविधा के लिए आरक्षित सामुदायिक भवन को सरकारी कार्यालय में कैसे बदला जा सकता है। फरवरी 2026 में हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया था कि सामुदायिक केंद्र का उपयोग सार्वजनिक हित के लिए होना चाहिए, न कि सरकारी कार्यालय के रूप में। वरिष्ठ पत्रकार श्याम सुंदर शर्मा ने दायर की जनहित याचिका पत्रकार कॉलोनी के सामुदायिक भवन को उसके मूल स्वरूप में वापस लाने के लिए वरिष्ठ पत्रकार श्याम सुंदर शर्मा ने राजस्थान हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की। मामले में याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता तपिश सारस्वत, निधि बिस्सा और अनीश बदाला ने अदालत में पैरवी की। फरवरी 2026 की सुनवाई से जुड़ी रिपोर्ट के अनुसार मामला D.B. Civil Writ Petition No. 11590/2024 के रूप में हाईकोर्ट की खंडपीठ के समक्ष था।शुरुआती दौर में इस कानूनी लड़ाई को लेकर कई तरह की आशंकाएं भी जताई गईं। स्थानीय स्तर पर यह सवाल था कि क्या JDA जैसे प्राधिकरण से सामुदायिक भवन वापस लिया जा सकेगा। लेकिन मामला लगातार अदालत के समक्ष उठाया गया और आखिरकार भवन को सार्वजनिक उपयोग के लिए वापस उपलब्ध कराने की दिशा में आदेश हुए। JDA ने कहा था- अस्थायी रूप से खोला गया कार्यालय मामले की सुनवाई के दौरान JDA का पक्ष था कि पत्रकार कॉलोनी के सामुदायिक भवन में पृथ्वीराज नगर का कार्यालय स्थायी रूप से नहीं, बल्कि अस्थायी व्यवस्था के तहत संचालित किया जा रहा है।अगस्त 2024 में भी JDA ने हाईकोर्ट को बताया था कि सामुदायिक भवन में कार्यालय चलाना अस्थायी व्यवस्था है और इसे बाद में दूसरी जगह शिफ्ट किया जाएगा। JDA की ओर से अधिवक्ता अमित कुड़ी ने अदालत में प्राधिकरण का पक्ष रखा था। बाद की सुनवाई में अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि आवासीय कॉलोनी में सार्वजनिक सुविधा के तौर पर उपलब्ध सामुदायिक भवन की मूल उपयोगिता कायम रहनी चाहिए। हाईकोर्ट ने कहा- सामुदायिक केंद्र आमजन के उपयोग के लिए फरवरी 2026 में हाईकोर्ट की खंडपीठ ने JDA को सामुदायिक केंद्र खाली करने की दिशा में स्पष्ट कदम उठाने को कहा। अदालत ने सार्वजनिक उपयोग की इस तरह की जगह को कार्यालय में बदलने पर सवाल उठाया और भवन को उसके निर्धारित उद्देश्य के अनुसार इस्तेमाल करने पर जोर दिया।इसके बाद JDA ने सामुदायिक भवन से अपने कार्यालय और सामान हटाना शुरू कर दिया। मार्च 2026 में यह भी सामने आया कि प्राधिकरण ने अदालत की आगामी सुनवाई से पहले भवन खाली करने की कार्रवाई शुरू कर दी थी। केवल भवन खाली करना काफी नहीं था कानूनी लड़ाई का अगला चरण तब आया जब JDA ने भवन खाली तो कर दिया, लेकिन सवाल उठा कि वर्षों तक कार्यालय के रूप में इस्तेमाल किए जाने के बाद क्या वह तत्काल सामुदायिक कार्यक्रमों के लिए उपयोग योग्य स्थिति में है।याचिकाकर्ता पक्ष ने हाईकोर्ट के सामने कहा कि भवन के सभागार में किए गए पार्टिशन और दूसरे बदलावों के कारण उसकी मूल उपयोगिता प्रभावित हुई है। इसके बाद अप्रैल 2026 में खंडपीठ ने JDA को एक माह के भीतर भवन को पुनः सुविधायुक्त बनाकर आमजन के लिए उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। इसी सुनवाई में JDA की ओर से भी भवन को पूर्व की तरह सुविधायुक्त बनाने का आश्वासन दिया गया था। फिर हाईकोर्ट ने दी 15 दिन की समय-सीमा जब भवन की स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हुई तो मामला दोबारा अदालत के सामने आया। जुलाई 2026 में हाईकोर्ट ने और सख्ती दिखाते हुए JDA को सामुदायिक भवन में आवश्यक सुविधाएं बहाल करने, रंग-रोगन और दूसरे कार्य पूरे कर इसे 15 दिन के भीतर पूर्ववत उपयोग योग्य स्थिति में देने के निर्देश दिए।याचिकाकर्ता पक्ष ने अदालत को बताया था कि केवल कार्यालय खाली कर देना पर्याप्त नहीं है और भवन को इस स्थिति में लौटाना भी जरूरी है कि कॉलोनीवासी वहां सामाजिक और सामुदायिक कार्यक्रम आयोजित कर सकें। ₹10.33 लाख के कार्य के बाद लौटा मूल स्वरूप मामले में भवन की सुविधाएं बहाल करने के लिए करीब ₹10.33 लाख के कार्य कराए जाने की जानकारी सामने आई। मरम्मत, रंग-रोगन और सामुदायिक उपयोग के लिए आवश्यक व्यवस्थाओं के बाद अब भवन फिर से स्थानीय नागरिकों के उपयोग की स्थिति में आ गया है। इस तरह मामला केवल JDA कार्यालय हटाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अदालत की निगरानी में सामुदायिक भवन की वास्तविक उपयोगिता वापस बहाल कराने तक पहुंचा। ‘जागरूक नागरिक अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाएं’ वरिष्ठ पत्रकार श्याम सुंदर शर्मा ने इसे नागरिक अधिकारों और सार्वजनिक सुविधाओं की रक्षा से जुड़ी महत्वपूर्ण लड़ाई बताया। उनका कहना है कि किसी कॉलोनी के नागरिकों के लिए बनाई गई सार्वजनिक सुविधा यदि अपने निर्धारित उद्देश्य से हटाकर दूसरे इस्तेमाल में ली जाती है तो नागरिकों को संवैधानिक और कानूनी उपायों का सहारा लेने से पीछे नहीं हटना चाहिए। इस मामले का महत्वपूर्ण पहलू यह भी रहा कि JDA ने याचिकाकर्ता की याचिका करने की पात्रता पर सवाल उठाया था, लेकिन हाईकोर्ट ने यह आपत्ति स्वीकार नहीं की और माना कि राज्य प्राधिकरण के कथित गैरकानूनी कृत्य को कोई नागरिक चुनौती दे सकता है। एक सामुदायिक भवन से आगे का संदेश पत्रकार कॉलोनी का यह मामला केवल एक भवन खाली कराने की कानूनी लड़ाई नहीं रहा। इसने यह सवाल भी खड़ा किया कि शहरों में पार्क, सामुदायिक भवन, खेल मैदान और दूसरी सार्वजनिक सुविधाओं के लिए आरक्षित स्थानों का उपयोग क्या प्रशासन अपनी सुविधा के मुताबिक बदल सकता है।हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद JDA के जोन कार्यालय हटे, भवन की सुविधाएं बहाल हुईं और अब यह फिर से उस उद्देश्य की ओर लौट आया है, जिसके लिए इसे बनाया गया था—स्थानीय नागरिकों के सामाजिक और सामुदायिक उपयोग के लिए।करीब दो साल तक अदालत में चली इस लड़ाई का परिणाम अब जमीन पर दिखाई दे रहा है। पत्रकार कॉलोनी के लोगों के लिए सामुदायिक भवन फिर खुलने की स्थिति में है और यह मामला नागरिक जागरूकता तथा सार्वजनिक सुविधाओं की कानूनी सुरक्षा का उदाहरण बनकर सामने आया है।

Read more 10th Sep 2026

राजस्थान न्यूज़: PHED ठेकेदारों का सरकार के खिलाफ मोर्चा: 9 सितंबर से जलापूर्ति चरणबद्ध बंद करने की चेतावनी, 12 सितंबर से पूर्ण कार्य बहिष्कार का ऐलान

राजस्थान न्यूज़: जयपुर। राजस्थान में जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) से जुड़े ठेकेदारों ने लंबित भुगतान और आठ सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलन तेज करने का ऐलान किया है। ऑल राजस्थान PHED कॉन्ट्रैक्टर एसोसिएशन की संघर्ष समिति ने 8 सितंबर 2026 को पत्र जारी कर चरणबद्ध तरीके से जलापूर्ति व्यवस्था सहित विभाग से जुड़े सभी कार्य बंद करने की चेतावनी दी है। संघर्ष समिति का कहना है कि पिछले करीब तीन वर्षों से लंबित भुगतान और अन्य मांगों को लेकर सरकार एवं विभाग के अधिकारियों से लगातार संपर्क किया गया, लेकिन समाधान नहीं निकला। ठेकेदार संगठन ने दावा किया है कि दो बार लिखित समझौते होने के बावजूद अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। 9 सितंबर से शुरू होगा चरणबद्ध कार्य बहिष्कार संघर्ष समिति ने आंदोलन का चार दिन का कार्यक्रम घोषित किया है। 9 सितंबर: सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक 3 घंटे काम बंद रहेगा। 10 सितंबर: सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक 6 घंटे कार्य बहिष्कार होगा। 11 सितंबर: सुबह 11 बजे से रात 11 बजे तक 12 घंटे काम बंद रखने का ऐलान किया गया है। 12 सितंबर: जलापूर्ति व्यवस्था सहित सभी कार्य पूरी तरह बंद करने की चेतावनी दी गई है। एसोसिएशन ने प्रदेशभर के PHED ठेकेदारों से इस कार्यक्रम में एकजुट होकर भाग लेने की अपील की है। ठेकेदारों का दावा- करीब 2,500 करोड़ रुपए का भुगतान अटका ठेकेदार संगठन से जुड़े लोगों का दावा है कि जुलाई तक भुगतान किए जाने के आश्वासन के बावजूद करीब 2,500 करोड़ रुपए का भुगतान अब भी लंबित है। उनका कहना है कि भुगतान नहीं होने के कारण ठेकेदार आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं और इसका असर कर्मचारियों व श्रमिकों तक पहुंच रहा है। संगठन ने दावा किया है कि इस स्थिति से प्रदेश के करीब 5 हजार ठेकेदार और लगभग 10 लाख श्रमिक प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित हो सकते हैं। इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है और ये ठेकेदार संगठन के दावे हैं। जलापूर्ति पर पड़ सकता है असर संघर्ष समिति के पत्र में स्पष्ट रूप से जलापूर्ति व्यवस्था सहित समस्त कार्य बंद करने का उल्लेख किया गया है। यदि आंदोलन घोषित कार्यक्रम के अनुसार आगे बढ़ता है तो कई क्षेत्रों में PHED से जुड़े संचालन और रखरखाव कार्य प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि आम उपभोक्ताओं को पानी की सप्लाई कितनी और किन क्षेत्रों में प्रभावित होगी, यह स्थानीय व्यवस्था, विभागीय वैकल्पिक इंतजाम और आंदोलन में भागीदारी पर निर्भर करेगा। दो बार समझौते के बाद भी समाधान नहीं होने का आरोप संघर्ष समिति ने आरोप लगाया है कि भुगतान और आठ सूत्रीय मांगों को लेकर शासन और विभाग के साथ बातचीत हुई तथा दो बार लिखित समझौते भी किए गए, लेकिन उन पर अपेक्षित अमल नहीं हुआ।समिति का कहना है कि लंबे समय से लंबित भुगतान के कारण ठेकेदारों के लिए कार्य जारी रखना आर्थिक रूप से मुश्किल होता जा रहा है। अधिकारियों को पूर्व सूचना देने के निर्देश संघर्ष समिति ने सभी ठेकेदारों से कहा है कि वे अपने-अपने क्षेत्र में संबंधित विभागीय अधिकारियों को लिखित रूप से कार्य बंद रखने की सूचना दें और उसकी प्रति समिति को भी भेजें।संगठन ने यह भी कहा कि आंदोलन अनुशासित और शांतिपूर्ण तरीके से किया जाएगा। सरकार से जल्द समाधान की मांग संघर्ष समिति ने कहा है कि आंदोलन का उद्देश्य आम लोगों को परेशानी देना नहीं है, बल्कि वर्षों से लंबित भुगतान और मांगों का समाधान करवाना है।अब नजर इस बात पर रहेगी कि PHED और राज्य सरकार आंदोलन शुरू होने से पहले ठेकेदारों से बातचीत कर कोई समाधान निकालते हैं या 9 सितंबर से घोषित चरणबद्ध कार्य बहिष्कार शुरू होता है।

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राजस्थान न्यूज़: चन्द्रेसल मठ महंत हत्याकांड: पुजारी समेत 7 आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में चालान पेश, 10 सितंबर को सुनवाई

राजस्थान न्यूज़: कोटा। कोटा के बहुचर्चित चन्द्रेसल मठ के महंत देवानंद महाराज हत्याकांड में बोरखेड़ा थाना पुलिस ने अनुसंधान पूरा कर लिया है। पुलिस ने मामले में पुजारी सहित सात आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में चालान पेश किया है। इसके अलावा प्रकरण में निरुद्ध किए गए एक नाबालिग के खिलाफ भी चालान पेश किया गया है। न्यायालय ने मामले में अगली सुनवाई के लिए 10 सितंबर की तारीख तय की है। इस हत्याकांड ने जून महीने में कोटा सहित पूरे प्रदेश में सनसनी फैला दी थी। महंत देवानंद महाराज की मठ के भीतर उनके कमरे में धारदार हथियार से हमला कर हत्या कर दी गई थी। इसके बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू करते हुए कई संदिग्धों से पूछताछ की और बाद में सात आरोपियों को गिरफ्तार किया। 5 जून की रात हुई थी महंत देवानंद महाराज की हत्या बोरखेड़ा थानाधिकारी अजीत बागडोलिया के अनुसार घटना 5 जून की रात की है। महंत देवानंद महाराज मठ के अपने कक्ष में सो रहे थे। इसी दौरान हमलावरों ने उन पर चाकू से कई वार किए, जिससे उनकी मौत हो गई। घटना के अगले दिन 6 जून को चन्द्रेसल मठ के कोषाध्यक्ष ब्रजमोहन गुर्जर की रिपोर्ट पर बोरखेड़ा थाना पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज किया था। इसके बाद पुलिस ने अलग-अलग पहलुओं से जांच शुरू की। पुजारी सहित सात आरोपी किए गए गिरफ्तार पुलिस की जांच के बाद इस मामले में संतोष कुमार राय, पूर्व संत नन्दनवन उर्फ नन्हें कुमार, महावीर प्रसाद पारेता, आदित्य वर्मा, मीकल जॉर्ज, अंकित बैरवा और पुष्पेन्द्र सिंह उर्फ प्रिंस को आरोपी बनाया गया। पुलिस के अनुसार मीकल जॉर्ज आरोपी आदित्य वर्मा की पत्नी है। मामले में एक नाबालिग की भूमिका सामने आने के बाद उसे भी निरुद्ध किया गया था। अब अनुसंधान पूरा होने के बाद पुलिस ने सभी सात वयस्क आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र पेश कर दिया है। निरुद्ध नाबालिग के संबंध में भी नियमानुसार चालान प्रस्तुत किया गया है। केस ऑफिसर स्कीम में लिया गया मामला चन्द्रेसल मठ के महंत की हत्या के इस चर्चित मामले को पुलिस ने केस ऑफिसर स्कीम के तहत लिया है। इसका उद्देश्य गंभीर और संवेदनशील मामलों में प्रभावी पैरवी और न्यायिक प्रक्रिया के दौरान प्रकरण की नियमित मॉनिटरिंग करना है। पुलिस की ओर से अब तक की जांच में जुटाए गए दस्तावेज, परिस्थितिजन्य साक्ष्य और अन्य सामग्री चालान के साथ न्यायालय के समक्ष पेश की गई है। शुरुआत में नहीं मिला था स्पष्ट सुराग महंत देवानंद महाराज की हत्या के बाद शुरुआती दौर में पुलिस के सामने हमलावरों की पहचान को लेकर बड़ी चुनौती थी। घटना मठ के भीतर हुई थी और पुलिस ने घटनास्थल से मिले साक्ष्यों, आरोपियों की गतिविधियों तथा अन्य तकनीकी और परिस्थितिजन्य तथ्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ाई। हत्या के कुछ दिनों बाद पुलिस ने मामले में गिरफ्तारियां शुरू कर दी थीं। उस समय पुलिस जांच में मठ और उससे जुड़े विवादों सहित विभिन्न पहलुओं की पड़ताल किए जाने की बात सामने आई थी। अब न्यायालय में चलेगी आगे की कार्रवाई पुलिस की ओर से चालान पेश किए जाने के साथ ही मामले की जांच का प्रमुख चरण पूरा हो गया है। अब आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों और पुलिस की ओर से प्रस्तुत साक्ष्यों पर न्यायालय में आगे की कानूनी प्रक्रिया चलेगी। मामले में अदालत ने 10 सितंबर को अगली पेशी तय की है। इसके बाद न्यायालय आरोप पत्र और रिकॉर्ड के आधार पर आगे की कार्यवाही करेगा। चन्द्रेसल मठ की धार्मिक और ऐतिहासिक पहचान तथा महंत देवानंद महाराज की हत्या के बाद पैदा हुए आक्रोश के कारण इस मामले पर शुरुआत से ही लोगों की नजर बनी हुई है।

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अजमेर

अजमेर न्यूज़: 1100 वर्ष पूर्व स्थापित मंदिर की बड़ी है मान्यता, दूर दराज से पहुंचते हैं हजारों श्रद्धालु

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अजमेर न्यूज़: 1968 से कस्बे की धार्मिक संस्था श्री ब्रह्म पुष्कर सेवा संघ कर रही है इस अनूठी परंपरा का निर्वहन

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अजमेर न्यूज़: 10 टीमें 8 - 8 वार्डो में जाकर घूम रही गायों का करेंगीं प्राथमिक उपचार

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राष्ट्रीय - अंतर्राष्ट्रीय

राष्ट्रीय न्यूज़: पंजाब की कमान मिलते ही राहुल-प्रियंका से मिले सचिन पायलट, 2027 चुनाव की रणनीति पर मंथन, गुटबाजी खत्म करना बड़ी चुनौती

राष्ट्रीय न्यूज़: नई दिल्ली। राजस्थान के पूर्व उपमुख्यमंत्री और कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव सचिन पायलट को पंजाब कांग्रेस का नया प्रभारी बनाए जाने के बाद दिल्ली से लेकर पंजाब तक राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। नई जिम्मेदारी मिलने के कुछ ही दिन बाद मंगलवार को पायलट ने दिल्ली स्थित 10 जनपथ पहुंचकर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा से मुलाकात की।मुलाकात के दौरान राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने पायलट को नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं दीं। बैठक में वर्ष 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव, पार्टी के आगामी कार्यक्रमों और चुनावी रणनीति को लेकर चर्चा हुई। सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस नेतृत्व का फोकस चुनाव से पहले संगठन को मजबूत करने और पार्टी के अलग-अलग गुटों को एक मंच पर लाने पर है।मुलाकात के बाद सचिन पायलट ने भी सोशल मीडिया के जरिए राहुल गांधी और प्रियंका गांधी का पंजाब की जिम्मेदारी सौंपने के लिए आभार जताया। उन्होंने भरोसा जताया कि सामूहिक प्रयास, मजबूत संगठन और कार्यकर्ताओं की ताकत के बल पर कांग्रेस पंजाब में सत्ता में वापसी के लिए पूरी मजबूती से चुनाव लड़ेगी। पंजाब में पायलट को मिला बड़ा राजनीतिक टास्क सचिन पायलट के लिए पंजाब की जिम्मेदारी केवल एक संगठनात्मक नियुक्ति नहीं, बल्कि उनके राजनीतिक करियर का एक महत्वपूर्ण पड़ाव मानी जा रही है। राजस्थान में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और उपमुख्यमंत्री रह चुके पायलट को अब ऐसे राज्य की जिम्मेदारी मिली है, जहां कांग्रेस के पास मजबूत राजनीतिक आधार तो है, लेकिन पार्टी लंबे समय से आंतरिक खींचतान से जूझ रही है। कांग्रेस ने 5 सितंबर को संगठनात्मक फेरबदल करते हुए भूपेश बघेल की जगह सचिन पायलट को पंजाब का महासचिव प्रभारी बनाया था। बघेल को असम की जिम्मेदारी दी गई है। यह फेरबदल पंजाब में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले किया गया है। गुटबाजी खत्म करना होगी सबसे बड़ी चुनौती पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार है और कांग्रेस मुख्य विपक्षी दल के रूप में दोबारा सत्ता में वापसी की कोशिश कर रही है। लेकिन चुनावी लड़ाई से पहले पायलट के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने ही संगठन के भीतर अलग-अलग नेताओं और गुटों को साथ लाने की होगी।पंजाब कांग्रेस में प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग, पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी सहित कई वरिष्ठ नेताओं के अपने-अपने राजनीतिक प्रभाव क्षेत्र हैं। हाल के समय में पार्टी के भीतर मतभेद खुलकर सामने आते रहे हैं। पायलट की नियुक्ति को इसी अंदरूनी खींचतान को नियंत्रित करने और चुनाव से पहले एकजुट संगठन खड़ा करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। पायलट के पक्ष में यह बात मानी जा रही है कि वे राजस्थान में लंबे समय तक संगठन की कमान संभाल चुके हैं। प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए उन्होंने कार्यकर्ताओं के बीच लगातार सक्रियता बनाए रखी थी। अब पंजाब में उनके सामने यही मॉडल स्थानीय परिस्थितियों के मुताबिक लागू करने की चुनौती होगी। पहले ही शुरू किया नेताओं से संवाद नई जिम्मेदारी मिलने के बाद पायलट ने पंजाब कांग्रेस के नेताओं से संपर्क और बैठकों का सिलसिला भी शुरू कर दिया है। पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष राजा वड़िंग उनसे दिल्ली में मुलाकात कर चुके हैं। बैठक में विधानसभा चुनाव की तैयारियों, संगठन और चुनावी रणनीति से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। पायलट के जल्द पंजाब दौरे पर जाने की भी संभावना जताई गई है। सफल हुए तो राष्ट्रीय राजनीति में और बढ़ सकता है कद पंजाब की जिम्मेदारी को सचिन पायलट के लिए कांग्रेस आलाकमान के भरोसे की बड़ी परीक्षा के तौर पर भी देखा जा रहा है। पंजाब उन राज्यों में है जहां कांग्रेस अभी भी सत्ता की प्रमुख दावेदार पार्टियों में शामिल है। ऐसे में यदि पायलट पार्टी की गुटबाजी पर काबू पाकर संगठन को एकजुट करने और चुनाव में बेहतर प्रदर्शन कराने में कामयाब रहते हैं, तो राष्ट्रीय राजनीति में उनकी भूमिका और महत्वपूर्ण हो सकती है।राजनीतिक जानकारों के लिहाज से यह जिम्मेदारी पायलट के लिए बड़ा अवसर भी है। पंजाब में सफलता उन्हें राजस्थान की राजनीति से आगे कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व और चुनावी रणनीति में अधिक महत्वपूर्ण भूमिका दिला सकती है।फिलहाल पायलट की पहली परीक्षा चुनाव प्रचार से पहले पंजाब कांग्रेस के नेताओं को एक मंच पर लाने की है। 2027 के चुनाव में कांग्रेस का प्रदर्शन काफी हद तक इस बात पर भी निर्भर करेगा कि नई जिम्मेदारी संभालने के बाद पायलट संगठन की अंदरूनी खींचतान को कितनी जल्दी चुनावी ताकत में बदल पाते हैं।

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राष्ट्रीय न्यूज़: कांग्रेस में बड़ा संगठनात्मक फेरबदल: सचिन पायलट को पंजाब की कमान, भूपेश बघेल असम भेजे गए, चुनाव से पहले गुटबाजी साधने की चुनौती

राष्ट्रीय न्यूज़: नई दिल्ली। कांग्रेस ने संगठन में बड़ा फेरबदल करते हुए राजस्थान के पूर्व उपमुख्यमंत्री और राष्ट्रीय महासचिव सचिन पायलट को पंजाब का AICC प्रभारी महासचिव नियुक्त किया है। पंजाब की जिम्मेदारी संभाल रहे पूर्व छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को अब असम का प्रभार दिया गया है। सचिन पायलट अब तक छत्तीसगढ़ के प्रभारी महासचिव थे। कांग्रेस संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल की ओर से बदलावों की घोषणा की गई। यह बदलाव ऐसे समय में हुआ है जब पंजाब कांग्रेस आंतरिक खींचतान से गुजर रही है और अगले विधानसभा चुनाव की तैयारियां भी तेज हो रही हैं। पार्टी नेतृत्व के सामने प्रदेश संगठन को एकजुट कर चुनावी रणनीति तैयार करने की बड़ी चुनौती है। पंजाब में पायलट के सामने सबसे बड़ी चुनौती- गुटबाजी खत्म करना पंजाब कांग्रेस में पिछले कुछ समय से प्रदेशाध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी से जुड़े खेमों के बीच मतभेद खुलकर सामने आते रहे हैं। टिकट वितरण और संगठनात्मक फैसलों को लेकर भी नेताओं के बीच बयानबाजी हुई है। ऐसे में सचिन पायलट की पहली बड़ी जिम्मेदारी अलग-अलग खेमों के बीच समन्वय स्थापित करना और विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी को एकजुट करना होगी। पंजाब में विधानसभा चुनाव 2027 में प्रस्तावित हैं, इसलिए कांग्रेस हाईकमान के इस फैसले को चुनावी तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है। छत्तीसगढ़ की जिम्मेदारी सुखदेव भगत को सचिन पायलट के पंजाब जाने के बाद सुखदेव भगत को छत्तीसगढ़ का प्रभारी बनाया गया है। वहीं भूपेश बघेल को पंजाब से हटाकर असम भेजा गया है। इसके साथ ही कांग्रेस ने अन्य राज्यों के संगठनात्मक प्रभार में भी बदलाव किए हैं। डॉ. सिरिवेल्ला प्रसाद को महाराष्ट्र और पी.वी. मोहन को आंध्र प्रदेश की जिम्मेदारी दी गई है। गुजरात में भी बदलाव कांग्रेस ने गुजरात के संगठनात्मक प्रभार में भी बदलाव किया है। मुकुल वासनिक से गुजरात की जिम्मेदारी वापस लिए जाने और रणदीप सिंह सुरजेवाला को नया प्रभार दिए जाने की जानकारी सामने आई है। सुरजेवाला कांग्रेस के प्रमुख राष्ट्रीय नेताओं में शामिल हैं और कर्नाटक संगठन से भी जुड़े रहे हैं। इस बदलाव को भी आने वाले चुनावी और संगठनात्मक समीकरणों के लिहाज से अहम माना जा रहा है। पंजाब में चुनाव से पहले नया प्रयोग सचिन पायलट का पंजाब प्रभारी बनना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पायलट राजस्थान में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और उपमुख्यमंत्री रहने के अलावा लंबे समय से राष्ट्रीय संगठन में सक्रिय हैं। अब तक उनके पास छत्तीसगढ़ की जिम्मेदारी थी। कांग्रेस की आधिकारिक वेबसाइट पर फेरबदल से पहले उन्हें छत्तीसगढ़ और भूपेश बघेल को पंजाब का प्रभारी दर्ज किया गया था।पंजाब में उनकी नियुक्ति को हाईकमान की ओर से चुनाव से पहले संगठन में संतुलन बनाने और अलग-अलग नेताओं को एक मंच पर लाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। भूपेश बघेल को असम की जिम्मेदारी पंजाब से हटाए गए भूपेश बघेल को असम कांग्रेस का प्रभारी बनाया गया है। असम में विधानसभा चुनाव में खराब प्रदर्शन के बाद संगठनात्मक बदलाव की जरूरत महसूस की जा रही थी असम के तत्कालीन प्रभारी जितेंद्र सिंह ने 4 मई 2026 को चुनावी हार की जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। इसलिए उन्हें इस ताजा फेरबदल में “हटाया गया” कहना सटीक नहीं होगा; उनका इस्तीफा कई महीने पहले ही आ चुका था।छह राज्यों की जिम्मेदारियों में बदलाव कांग्रेस के इस संगठनात्मक फेरबदल में मुख्य रूप से पंजाब, असम, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और गुजरात जैसे राज्यों के प्रभार में बदलाव सामने आए हैं। इनमें सबसे ज्यादा राजनीतिक चर्चा सचिन पायलट को पंजाब की जिम्मेदारी मिलने की हो रही है, क्योंकि पंजाब में अगले विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को संगठनात्मक खींचतान खत्म करने और भाजपा, आम आदमी पार्टी तथा शिरोमणि अकाली दल के मुकाबले मजबूत चुनावी रणनीति तैयार करनी होगी। पायलट की नियुक्ति के बाद अब नजर इस बात पर रहेगी कि वे पंजाब कांग्रेस के अलग-अलग गुटों के बीच किस तरह तालमेल स्थापित करते हैं और चुनाव से पहले संगठन को कितना एकजुट कर पाते हैं।

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#मधुकर कहिन

गुप्त ध्वनि किरणों के साथ ओशो पर किसने हमला किया?... 

गुप्त ध्वनि किरणों के साथ ओशो पर किसने हमला किया?...  * ओशो के निजी दंत चिकित्सक देवगेट ओशो की मृत्यु से 4 दिन पहले हुई घटनाओं के बारे में बात करते हैं (शरीर को छोड़कर)... * 15 aजनवरी, 1990 को, मेरे जन्मदिन पर, मुझे शुन्यो से एक संदेश मिला: ओशो चाहते थे कि मैं उनके पेट का एक्स-रे ले। हम दंaत कक्ष में मिले। ओशो का शरीर पतला और बेकार लग रहा था, फिर भी मैंने उसे शक्तिशाली रूप से उपस्थित महसूस किया। मुझे शुन्यो से पता था कि वह हर दिन बीस घंटे से अधिक सो रहा था, हर शाम बुद्ध हॉल में कुछ क़ीमती मिनटों के लिए अपनी शारीरिक ऊर्जा को बचा रहा था। ओशो नेa मुझे बताया कि उसके हमलावरों की आवाज़ से उसका शरीर बहुत कमजोर हो गया था। उन्होंने कहा कि उनमें से शायद तीन, दो पुरुष और एक महिला, ध्वनि तरंगों पर ध्यानaa केंद्रित करने और अपने शरीर को लक्षित करने के लिए एक विशेष गठन में बैठे थे। यहां भारत में प्राचीन योगिक प्रथाएं हैं जहां लोग कुछ ध्वनियों, कुछ मंत्रों को जानते हैं, जो लोगों को नुक़सान पहुंचाने के लिए ध्वनि को केंद्रित कर सकते हैं। लेकिन मुझ पर हमला करaaने वाले ये लोग भारतीय नहीं हैं। वे वही लोग हैं जिन्होंने अमेरिका में पहले मुझे मारने की कोशिश की थी। वे तब सफल नहीं हो सके, और अब वे जो शुरू किया उसे पूरा कर ने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने मुझे बोलने से रोकने के लिए ज़हर की कोशिश की लेकिन मैं जारी रखने में कामयाब रहा। अब, पांच साल बाद वे वापस आ गए हैं। उन्होंने पहले बुद्ध हॉल में अपनी ध्वनि किरणों का उपयोग मेरे दिमाग़ पर हमला करने के लिए किया लेकिन मैं अपने दिमाग़ में नहीं हूं। मैं एक नो-मन हूं और उनकी आवाज़ का बहुत कम प्रभाव था। इसलिए उन्होंने अपनी रणनीति बदल दी, अब वे मेरे शरीर पर हमला कर रहे हैं। मेरे गरीब शरीर को उनकी किरणों से कोई सुरक्षा नहीं है। हर दिन यह कमजोर होता जाता है। वे मुझे मार नहीं सकते लेकिन वे मेरे शरीर को नुक़सान पहुंचा सकते हैं। अभी मेरे जिगर के क्षेत्र में बहुत दर्द हो रहा है। क्या आप इसे एक्स-रे कर सकते हैं? दुख की बात है, मैंने समझाया कि मेरी दंत एक्स-रे मशीन शायद अपर्याप्त थी क्योंकि यह केवल दांतों और जबड़े की छोटी फिल्में ले सकती थी, लेकिन हम कोशिश कर सकते थे। अमृतो को हमारे पास सबसे बड़ी एक्स-रे फ़िल्म मिली, जबकि मैंने इसकी बीम को चौड़ा करने के लिए डेंटल एक्स-रे मशीन के साथ जिग्गल किया। मैंने वह करने की कोशिश की जो ओशो पूछ रहा था। मैंने उसके जिगर के क्षेत्र की एक तस्वीर ली और फिर दंत विकास में बड़ी फ़िल्म विकसित करने में कामयाब रहा टैंक जिसे छोटी इंट्रा-ओरल डेंटल फ़िल्मों के लिए डिज़ाइन किया गया था, लेकिन परिणामी छवि धुंधली और अस्पष्ट थी। यह आख़िरी बार था जब मैंने ओशो को उसके भौतिक शरीर में देखा था। 19 जनवरी को शाम 4:30 बजे थे: मैं अपनी प्रेमिका के साथ अपने कमरे में था जब दरवाजे पर एक ज़रूरी दस्तक हुई। मनीषा, पीला और तनावग्रस्त दिख रही थी, ने पूछा कि क्या वह मेरे कमरे के फ़ोन का उपयोग कर सकती है। मुझे पता था कि वह केवल पूछेगी कि क्या कुछ असामान्य हो रहा है। अस्थायी सचिव के रूप में कार्य करते हुए वह इनर सर्कल के सदस्यों को फ़ोन कर रही थी और उन्हें कृष्णा हाउस में एक असाधारण बैठक में तुरंत आने के लिए कह रही थी। ओशो ने पंद्रह महीने पहले इक्कीस लोगों की एक कम्यून प्रबंधन टीम की स्थापना की थी, इसे इनर सर्कल का नाम दिया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका काम कम्यून के दिन-प्रतिदिन चलने का प्रबंधन करना था। मैं मूल चयन में नहीं था, लेकिन कुछ महीने बाद मुझे शामिल होने के लिए कहा गया था। फ़ोन करने के बाद, मनीषा ने कहा, “गीट, तुमने सुना कि मैं दूसरों को क्या बता रहा था। बैठक कृष्णा हाउस की छत पर ब्लू रूम में है। क्या आप वहां तुरंत जा सकते हैं?” इससे पहले कि मैं कोई सवाल पूछ पाता, वह जल्दी से गलियारे में चली गई, स्पष्ट रूप से एक और महत्वपूर्ण कार्य में शामिल थी। मैंने दोपहर के अधिकांश समय अजीब तरह से विपुल महसूस किया था। बाहरी मामलों की उथल-पुथल के बावजूद मैं कई दिनों से उत्साहित महसूस कर रहा था। मेरे दिल में ख़ुशी का एक अकथनीय नृत्य था। अंदर से मुझे उत्साह, आनंद महसूस हुआ। ब्लू रूम में पहुंचने पर, मैंने देखा कि अधिकांश इनर सर्कल पहले से ही वहां इकट्ठा हो चुके थे। माहौल तनावपूर्ण और तनावपूर्ण था। मेरा अपना उत्साह जगह से बाहर लग रहा था। मैं बैठ गया और इंतज़ार किया। कुछ मिनटों के बाद जयेश ने अमृतो के साथ प्रवेश किया। यह देखने के लिए संक्षेप में चारों ओर देखते हुए कि हम सभी मौजूद हैं, उन्होंने एक दृढ़, हालांकि शांत आवाज़ में कहा, “मुझे लगता है कि इसे लपेटने का कोई तरीक़ा नहीं है। मैं आपको सीधे बताऊंगा। ओशो ने कुछ समय पहले लगभग 4:45 बजे अपना शरीर छोड़ दिया था दोपहर।” स्तब्ध, मैंने अपनी घड़ी को देखा। शाम के 5:15 बजे थे। उपस्थित दो या तीन लोग रोने लगे। जयेश ने जल्दी से बीच में टोका, “देखो, मुझे तुम्हारी सारी मदद की ज़रूरत है। कृपया अभी तक अलग न हों। मुझे आप सभी की ज़रूरत है कि ओशो के भेजने को उतना ही सुंदर बनाने में मदद करें जितना वह हकदार है। यह आख़िरी चीज है जो हम उसके लिए कर सकते हैं भौतिक शरीर, चलो इसे अद्भुत बनाते हैं। उसने मुझे ठीक से बताया कि वह कैसे चाहता है कि ऐसा हो। उसने मुझे हर चीज के लिए विस्तृत निर्देश दिए, लेकिन मुझे यहां हर किसी की मदद की ज़रूरत है।” जयेश के शब्दों को सुनकर मेरा पहले का उत्साह सदमे में बदल गया था, लेकिन मैंने ओशो को अपने लोगों के साथ अपने अंतिम उत्सव का आनंद लेने में सक्षम बनाने के लिए हमारी मदद के लिए जयेश की अपील को स्पष्ट रूप से सुना। जैसे ही मैंने ब्लू रूम छोड़ा, जयेश ने मुझे बताया कि ओशो ने अनुरोध किया था कि मैं उनके शरीर को जलते हुए घाटों तक ले जाने के लिए एक वाहक बनूं। गतिविधि और भ्रमित भावनाओं के एक धुंध में मुझे याद है कि ओशो के इस अंतिम उपहार के लिए बेहद आभारी महसूस कर रहा था। - स्वामी देवगीत पुस्तक : ओशो - द फर्स्ट बुद्ध इन द डेंटल चेयर अध्याय: 17 अध्याय का नाम: ओशो का अंतिम दंत नाटक: अधिनियम V अंतिम सुनहरी झलक

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