राजस्थान न्यूज़: जयपुर। विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने गुरुवार को राजस्थान विधानसभा परिसर में अंडर व्हीकल सर्विलांस सिस्टम (यूवीएसएस) का रिमोट से बटन दबाकर उद्घाटन किया। यह प्रणाली परिसर में आने वाले वाहनों के निचले हिस्से की जांच के लिए लगाई गई है, जिसे सामान्य तौर पर देख पाना मुश्किल होता है।देवनानी ने बताया कि लोकसभा सचिवालय की तर्ज पर यह व्यवस्था विधानसभा में स्थापित की गई है। इस पर 1 करोड़ 6 लाख रुपए खर्च हुए हैं और इसे बूम बैरियर के साथ विधानसभा के द्वार संख्या 6, 7 और 8 पर संचालित किया गया है। विधानसभा जैसे महत्वपूर्ण संवैधानिक संस्थान में जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, कर्मचारियों और आगंतुकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। — वासुदेव देवनानी, विधानसभा अध्यक्ष कैसे काम करती है यह प्रणाली यह एक वाहन निरीक्षण प्रणाली है, जिसके जरिए किसी वाहन के निचले हिस्से की तस्वीरें ली जा सकती हैं। देवनानी के अनुसार इसमें विशेष कैमरे, इमेज कैप्चर करने वाले उपकरण, प्रकाश व्यवस्था, इमेज डिस्प्ले स्क्रीन और तस्वीरों के विश्लेषण के लिए सॉफ्टवेयर का उपयोग होता है। इससे वाहन के उन हिस्सों को भी देखा जा सकता है, जिनकी सामान्य जांच में अनदेखी हो सकती है, और सुरक्षाकर्मियों को जांच अधिक व्यवस्थित तरीके से करने में सुविधा मिलती है।देवनानी ने बताया कि सिस्टम में वाहनों की तस्वीरें, जांच का विवरण और प्रवेश से जुड़े रिकॉर्ड सुरक्षित रखे जा सकते हैं, जिससे जरूरत पड़ने पर संबंधित जानकारी का दोबारा अवलोकन किया जा सकता है। यूवीएसएस को प्रवेश द्वार पर लगे अन्य सुरक्षा उपकरणों और निगरानी प्रणालियों के साथ भी जोड़कर इस्तेमाल किया जा सकता है। संदिग्ध गतिविधियों की पहचान में भी इसे उपयोगी बताया गया है। विधानसभा के द्वार पर लगाया गया अंडर व्हीकल सर्विलांस सिस्टम का स्कैनर। एक नजर में क्या — अंडर व्हीकल सर्विलांस सिस्टम (यूवीएसएस), वाहनों के निचले हिस्से की जांच के लिए कहां — राजस्थान विधानसभा के द्वार संख्या 6, 7 और 8, बूम बैरियर के साथ लागत — 1 करोड़ 6 लाख रुपए किसकी तर्ज पर — लोकसभा सचिवालय और क्या — अपग्रेड की गई वायरलैस सेट व्यवस्था का भी अवलोकन वायरलैस सेट व्यवस्था का भी अवलोकन उद्घाटन के मौके पर देवनानी ने विधानसभा में अपग्रेड की गई वायरलैस सेट व्यवस्था का भी अवलोकन किया। उन्होंने कहा कि विधानसभा की कार्यवाही के दौरान जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, कर्मचारियों और आगंतुकों का लगातार आवागमन रहता है, ऐसे में परिसर में आने वाले वाहनों की समुचित जांच सुरक्षा व्यवस्था का अहम हिस्सा है। इस अवसर पर विधानसभा के प्रमुख सचिव भारत भूषण शर्मा और विशिष्ट सहायक के.के. शर्मा समेत अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे।देवनानी विधानसभा में तकनीक और व्यवस्था से जुड़े बदलावों को लेकर सक्रिय रहे हैं। इसी महीने उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने जयपुर में उनसे मुलाकात कर विधायी परंपराओं और सदन संचालन पर चर्चा की थी। इससे पहले जुलाई में राजस्थान विधानसभा के 75 वर्ष पूरे होने पर अमृत महोत्सव की शुरुआत हुई थी।
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राजस्थान न्यूज़: जयपुर। जल जीवन मिशन (जेजेएम) से जुड़े भ्रष्टाचार मामले में पूर्व जलदाय मंत्री महेश जोशी को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई है। शुक्रवार को शीर्ष अदालत ने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) के दर्ज मुकदमे में उनकी नियमित जमानत मंजूर कर ली। एसीबी ने उन्हें 7 मई 2026 को जयपुर स्थित आवास से गिरफ्तार किया था, यानी वे करीब पांच महीने से हिरासत में हैं। रिहाई अदालती शर्तों और कानूनी औपचारिकताओं के पूरा होने पर होगी।जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ ने 12 अक्टूबर को दोनों पक्षों की दलीलें सुनकर फैसला सुरक्षित रख लिया था। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इसी मामले में एक अन्य आरोपी मुकेश पाठक को भी राहत मिली है। हाईकोर्ट ने अगस्त में खारिज की थी जमानत इससे पहले राजस्थान हाईकोर्ट ने 13 अगस्त को जोशी समेत आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी थीं। जस्टिस चंद्रप्रकाश श्रीमाली की एकलपीठ ने 5 अगस्त को सभी पक्षों को सुनने के बाद आदेश सुरक्षित रखा था। उस सुनवाई में पूर्व अतिरिक्त मुख्य सचिव सुबोध अग्रवाल सहित अन्य आरोपियों को भी राहत नहीं मिली थी। हाईकोर्ट से राहत न मिलने के बाद जोशी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। ईडी के मामले में भी हो चुकी है गिरफ्तारी जेजेएम से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने जोशी को 24 अप्रैल 2025 को गिरफ्तार किया था। करीब सात महीने न्यायिक हिरासत में रहने के बाद 3 दिसंबर 2025 को उन्हें सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली थी। इसके बाद एसीबी के अलग मुकदमे में 7 मई 2026 को उनकी दोबारा गिरफ्तारी हुई। एसीबी ने 9 अप्रैल 2026 को जलदाय विभाग के पूर्व अतिरिक्त मुख्य सचिव सुबोध अग्रवाल को भी गिरफ्तार किया था, जिन पर मुकदमा चलाने के लिए अभियोजन स्वीकृति मांगी जा चुकी है। फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र से टेंडर लेने का आरोप जांच एजेंसियों के अनुसार मामला वर्ष 2021 का है, जब श्री श्याम ट्यूबवेल कंपनी और मैसर्स श्री गणपति ट्यूबवेल कंपनी के ठेकेदारों पदमचंद जैन और महेश मित्तल ने फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र दिखाकर जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (पीएचईडी) से करोड़ों रुपये के टेंडर हासिल किए। जल जीवन मिशन केंद्र सरकार की वह योजना है, जिसका मकसद ग्रामीण इलाकों के हर घर तक नल से पेयजल पहुंचाना है। राजस्थान में इसके तहत पाइपलाइन, पानी की टंकियों और जलापूर्ति परियोजनाओं के बड़े पैमाने पर टेंडर निकाले गए थे। टेंडर का गणित श्री गणपति ट्यूबवेल कंपनी— 68 निविदाओं में भाग लिया, 31 में एल-1 रहकर 859.2 करोड़ रुपये के टेंडर हासिल किए श्री श्याम ट्यूबवेल कंपनी— 169 निविदाओं में भाग लिया, 73 में एल-1 रहकर 120.25 करोड़ रुपये के टेंडर हासिल किए दोनों कंपनियों के टेंडर मिलाकर करीब 979.45 करोड़ रुपये के एसीबी ने 30 अक्टूबर 2024 को महेश जोशी समेत 22 के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी एफआईआर में कौन-कौन एसीबी की एफआईआर में जेजेएम के वित्तीय सलाहकार सुनील शर्मा, तत्कालीन मुख्य अभियंता रामकरण मीणा और दिनेश गोयल, अतिरिक्त मुख्य अभियंता अरुण श्रीवास्तव, रमेश चंद मीणा तथा परितोष गुप्ता के नाम हैं। अधीक्षण अभियंता निरिल कुमार, विकास गुप्ता, महेंद्र प्रकाश सोनी, भगवान सहाय जाजू और जितेंद्र शर्मा तथा अधिशासी अभियंता विशाल सक्सेना के नाम भी इसमें शामिल बताए गए हैं। एसीबी का कहना है कि जेजेएम के कामों और निविदाओं में अनियमितताएं हुईं, जिनसे राजकोष को नुकसान पहुंचा। एसीबी अदालत ने इस मामले में 13 आरोपियों की न्यायिक हिरासत बढ़ाई थी, जबकि जितेंद्र शर्मा, मुकेश गोयल और संजीव गुप्ता को भगोड़ा घोषित किया जा चुका है। जमानत से मुकदमा खत्म नहीं होता एसीबी महेश जोशी और संजय बड़ाया के खिलाफ करीब तीन हजार पन्नों का चालान विशेष अदालत में पेश कर चुकी है और उस समय अदालत को बताया गया था कि अनुसंधान अभी जारी है। जमानत मिलने का मतलब आरोपों पर अंतिम फैसला नहीं है। जोशी को अदालत की तय शर्तों का पालन करना होगा और आरोप तय करने से लेकर साक्ष्य तक की कार्यवाही संबंधित अदालत में आगे चलती रहेगी।
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राजस्थान न्यूज़: जयपुर। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कर्मचारियों और पेंशनर्स के बकाया भुगतान को लेकर राज्य सरकार को घेरा है। उन्होंने शुक्रवार को सोशल मीडिया पर लिखा कि प्रदेश में कर्मचारी और सेवानिवृत्त कर्मचारी 10 माह से पेंशन परिलाभ, ग्रेच्युटी और पीएफ के भुगतान का इंतजार कर रहे हैं। गहलोत ने सरकार से तुरंत श्वेत पत्र जारी कर प्रदेश की वित्तीय स्थिति सामने रखने और बकाया भुगतान जल्द करने की मांग की। गहलोत ने कहा कि यह कर्मचारियों की अपनी मेहनत की कमाई और जमा पूंजी है, जिसकी जरूरत घर में शादी-ब्याह और त्योहारों के मौके पर पड़ती है। उन्होंने लिखा कि इसी के विरोध में कर्मचारी महासंघ को सभी जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन करना पड़ रहा है और अब त्योहार पर ‘काली दिवाली’ मनाने का ऐलान करना पड़ा है। राजस्थान में कर्मचारी और सेवानिवृत्त कर्मचारी 10 माह से पेंशन परिलाभ, ग्रेच्युटी और पीएफ के भुगतान का इंतजार कर रहे हैं। यह उनकी अपनी मेहनत की कमाई और जमा पूंजी है, जिसे सरकार नहीं दे रही है। — Ashok Gehlot (@ashokgehlot51) ‘सरकार को शर्म आनी चाहिए’ जिस सरकार के कर्मचारी और बुजुर्ग पेंशनर्स अपने हक के पैसे के लिए दिवाली पर सड़क पर उतरें, उसे शर्म आनी चाहिए। — अशोक गहलोत, पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत ने कहा कि जनता की गाढ़ी कमाई रोज नए आयोजनों और प्रचार पर खर्च करने वाली सरकार के पास अपने ही कर्मचारियों को देने के लिए पैसा नहीं है और इसे लेकर लोगों में नाराजगी है। उन्होंने सवाल उठाया कि कहीं राजस्थान की भाजपा सरकार दिवालिया होने की कगार पर तो नहीं पहुंच गई। गहलोत ने क्या कहा 10 माह से पेंशन परिलाभ, ग्रेच्युटी और पीएफ का भुगतान अटका कर्मचारी महासंघ को सभी जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन करना पड़ रहा त्योहार पर ‘काली दिवाली’ मनाने का ऐलान करना पड़ा सरकार तुरंत श्वेत पत्र जारी कर वित्तीय स्थिति सामने रखे कर्मचारियों का बकाया भुगतान जल्द से जल्द किया जाए श्वेत पत्र की मांग पहले भी उठ चुकी प्रदेश की वित्तीय स्थिति पर श्वेत पत्र की मांग कांग्रेस पहले भी उठा चुकी है। मई में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भी बढ़ते कर्ज को लेकर सरकार से श्वेत पत्र जारी करने की मांग की थी। उसी दौरान सामने आए आंकड़ों के मुताबिक दो साल में प्रदेश का सार्वजनिक ऋण 1.19 लाख करोड़ रुपए बढ़ा था। कर्मचारियों के बकाया भुगतान और महासंघ के प्रदर्शन को लेकर सरकार की ओर से अभी कोई बयान सामने नहीं आया है।
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उदयपुर न्यूज़: उत्तर पश्चिम रेलवे महिला कल्याण संगठन, अजमेर मंडल के तत्वावधान में आयोजित 'ऑन द स्पॉट' ड्राइंग एवं निबंध प्रतियोगिता का परिणाम घोषित कर पुरस्कार वितरण समारोह आयोजित किया गया।कार्यक्रम संगठन की अध्यक्षा श्रीमती रिंकल भूतड़ा की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। इस अवसर पर संगठन की सचिव श्रीमती ज्योति ऊषाहरा, कोषाध्यक्ष श्रीमती सुषमा कुमारी सहित कार्यकारिणी के अन्य सदस्य विशेष रूप से उपस्थित रहे। प्रतियोगिता में बच्चों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और अपनी रचनात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन किया। निर्णायकों के मूल्यांकन के पश्चात निबंध प्रतियोगिता में 9 तथा ड्राइंग प्रतियोगिता में 9, यानी कुल 18 प्रतिभाशाली बच्चों को उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रमाण-पत्र एवं पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।समारोह को संबोधित करते हुए अध्यक्षा श्रीमती रिंकल भूतड़ा ने सभी विजेता बच्चों को बधाई दी और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि इस प्रकार की रचनात्मक प्रतियोगिताएं बच्चों में आत्मविश्वास और कलात्मक अभिव्यक्ति को बढ़ावा देती हैं। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी सदस्यों और बच्चों का आभार व्यक्त किया गया।
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अजमेर न्यूज़: 1100 वर्ष पूर्व स्थापित मंदिर की बड़ी है मान्यता, दूर दराज से पहुंचते हैं हजारों श्रद्धालु
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अजमेर न्यूज़: 1968 से कस्बे की धार्मिक संस्था श्री ब्रह्म पुष्कर सेवा संघ कर रही है इस अनूठी परंपरा का निर्वहन
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अजमेर न्यूज़: 10 टीमें 8 - 8 वार्डो में जाकर घूम रही गायों का करेंगीं प्राथमिक उपचार
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राष्ट्रीय न्यूज़: नई दिल्ली। 12 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट परिसर में विपक्षी नेताओं के जुटने के मामले में गुरुवार को सुनवाई हुई। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि कोई भी अदालत को डरा-धमकाकर दबाव में नहीं ला सकता और ऐसी कोशिशों पर कोई ध्यान नहीं देता। अदालत ने राहुल गांधी, अखिलेश यादव समेत 16 नेताओं को नोटिस जारी किया। साथ ही एसआईआर और चुनाव आयोग के फैसलों के खिलाफ इन्हीं नेताओं की याचिका पर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग से जवाब मांगा। एक नजर में कब — गुरुवार, सुप्रीम कोर्ट पीठ — मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत नोटिस — राहुल गांधी, अखिलेश यादव समेत 16 नेता एसआईआर याचिका — केंद्र और चुनाव आयोग से जवाब तलब सीसीटीवी — सभी कानूनी एजेंसियों को फुटेज सुरक्षित रखने के निर्देश ‘हम किसी काल्पनिक दुनिया में नहीं जी रहे’ “कोई भी कोर्ट को डरा-धमकाकर दबाव में नहीं ला सकता। ऐसी कोशिशें बेकार हैं, इन पर कोई ध्यान नहीं देता। हमें पता है कि कोर्ट के बाहर क्या कहा जा रहा है और कोर्ट के अंदर क्या। हम किसी काल्पनिक दुनिया में नहीं जी रहे हैं।” सूर्यकांत, मुख्य न्यायाधीश मुख्य न्यायाधीश ने किसी का नाम लिए बिना यह भी कहा कि याचिकाकर्ताओं में से एक के आचरण पर अदालत सवाल करेगी और उसे सफाई देनी होगी। चार वकीलों की याचिका पर नोटिस 12 अक्टूबर के घटनाक्रम के बाद चार वकीलों ने याचिका दाखिल की है। इसमें अदालत परिसर में राजनीतिक प्रदर्शन रोकने के नियम बनाने, सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने और नेताओं की मंशा की जांच की मांग की गई है। याचिका में यह भी कहा गया है कि प्रदर्शन बुलाने वाला व्यक्ति उसके दूसरों पर पड़ने वाले परिणामों की जिम्मेदारी भी ले। मुख्य न्यायाधीश ने इस याचिका पर नोटिस जारी किया।याचिकाकर्ताओं के वकील गौरव भाटिया ने अंतरिम आदेश की मांग करते हुए कहा कि राहुल गांधी के सुप्रीम कोर्ट पहुंचने के समय की सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित कराई जाए। याचिका में आरोप है कि उस दौरान एक गर्भवती महिला पत्रकार को धक्का दिया गया। अदालत ने अभी इस पर कोई निष्कर्ष नहीं दिया है। इस पर न्यायमूर्ति बागची ने सभी कानूनी एजेंसियों को सीसीटीवी और दूसरी डिजिटल फुटेज सुरक्षित रखने के निर्देश दिए, और कहा कि इन्हें कोई भी आकर जमा करा सकता है। केरल कांग्रेस की पोस्ट पर अवमानना की मांग सुनवाई के दौरान केरल कांग्रेस की एक सोशल मीडिया पोस्ट को अदालत की अवमानना बताते हुए कार्रवाई की मांग भी रखी गई। याचिका के मुताबिक यह पोस्ट मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ थी। यह पोस्ट अब हटाई जा चुकी है।मामला यहां तक कैसे पहुंचा तारीख क्या हुआ 10 अक्टूबर खड़गे और राहुल गांधी ने मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर 12 अक्टूबर को शाम 4 से 5 बजे के बीच ज्ञापन सौंपने का समय मांगा 11 अक्टूबर मुख्य न्यायाधीश ने पत्र लिखकर मिलने से इनकार किया — ज्ञापन के विषय पहले से अदालत में विचाराधीन हैं 12 अक्टूबर बाराखंभा रोड से सुप्रीम कोर्ट तक विपक्ष का मार्च; राहुल, प्रियंका और खड़गे समेत सांसद शाम को परिसर के भीतर पहुंचे; उसी दिन 10 दलों के 11 नेताओं की एसआईआर याचिका दाखिल 13 अक्टूबर रजिस्ट्री ने एसआईआर याचिका में करीब 14 प्रक्रियागत खामियां गिनाईं 15 अक्टूबर सुनवाई — 16 नेताओं को नोटिस, केंद्र और चुनाव आयोग से जवाब तलब ज्ञापन में मुख्य निर्वाचन आयुक्त और चुनाव आयोग के अलावा छात्रों की गिरफ्तारी, मेट्रो स्टेशन बंद किए जाने और ट्रेनें रद्द होने जैसे मुद्दे भी थे। रजिस्ट्री की 14 आपत्तियां प्रक्रियागत थीं — अदालत का आदेश या याचिका पर राय नहीं — और सुनवाई से पहले उन्हें दूर किया जाना था।
Read more 15th Oct 2026
राष्ट्रीय न्यूज़: नई दिल्ली। अंकिता भंडारी के माता-पिता को दिल्ली पुलिस ने गुरुवार तड़के इंडिया गेट से हिरासत में ले लिया। वे वहां रातभर धरने पर बैठे थे। हिरासत करीब पौने चार बजे की बताई जा रही है और समाचार एजेंसी के मुताबिक उन्हें करीब पांच बजे छोड़ दिया गया। सभी को तिलक मार्ग थाने ले जाया गया था। कार्रवाई दिल्ली पुलिस ने सीआरपीएफ के साथ मिलकर की। अंकिता के माता-पिता भाजपा नेता दुष्यंत कुमार गौतम की सिक्किम के राज्यपाल पद पर नियुक्ति के विरोध में धरने पर बैठे हैं और मांग कर रहे हैं कि सीबीआई जांच पूरी होने तक यह नियुक्ति रोकी जाए। कांग्रेस नेता भी हिरासत में लिए गए इसी दौरान कांग्रेस नेता पवन खेड़ा, सुप्रिया श्रीनेत और काजी निजामुद्दीन समेत कई कार्यकर्ताओं को भी हिरासत में लिया गया। खेड़ा ने थाने के भीतर भी विरोध जताया। उन्होंने कार्रवाई को ज्यादती बताते हुए कहा कि इंडिया गेट पर तड़के चार बजे लोकतंत्र का अंत हो रहा है। परिवार बोला — भूख हड़ताल करेंगे रिहाई के बाद माता-पिता ने कहा कि नियुक्ति वापस होने तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि अगर उन्हें इंडिया गेट पर प्रदर्शन नहीं करने दिया गया तो वे उत्तराखंड में अपने घर से भूख हड़ताल शुरू करेंगे। एक दिन पहले, बुधवार शाम लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा धरनास्थल पर पहुंचकर परिवार से मिले थे और करीब एक घंटा वहां रुके थे।अंकिता भंडारी ऋषिकेश के पास एक रिसॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट थीं। सितंबर 2022 में 19 साल की उम्र में उनकी हत्या कर दी गई थी। मई 2025 में अदालत ने रिसॉर्ट संचालक पुलकित आर्य समेत तीन लोगों को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी।मामले में कथित ‘वीआईपी’ की भूमिका को लेकर सवाल उठते रहे हैं और परिवार उसकी पहचान की मांग करता रहा है। उत्तराखंड सरकार ने 9 जनवरी 2026 को सीबीआई जांच की सिफारिश की थी और सीबीआई ने फरवरी में दिल्ली में मामला दर्ज किया, लेकिन वह एफआईआर अज्ञात के खिलाफ है। अब तक किसी जांच एजेंसी ने किसी को ‘वीआईपी’ के रूप में चिह्नित नहीं किया है।जनवरी 2026 में दिल्ली हाईकोर्ट ने दुष्यंत कुमार गौतम की मानहानि याचिका पर अंतरिम आदेश देते हुए कांग्रेस और आम आदमी पार्टी को इस मामले से उन्हें जोड़ने वाली सोशल मीडिया पोस्ट हटाने के निर्देश दिए थे।
Read more 15th Oct 2026
गुप्त ध्वनि किरणों के साथ ओशो पर किसने हमला किया?...
गुप्त ध्वनि किरणों के साथ ओशो पर किसने हमला किया?... * ओशो के निजी दंत चिकित्सक देवगेट ओशो की मृत्यु से 4 दिन पहले हुई घटनाओं के बारे में बात करते हैं (शरीर को छोड़कर)... * 15 aजनवरी, 1990 को, मेरे जन्मदिन पर, मुझे शुन्यो से एक संदेश मिला: ओशो चाहते थे कि मैं उनके पेट का एक्स-रे ले। हम दंaत कक्ष में मिले। ओशो का शरीर पतला और बेकार लग रहा था, फिर भी मैंने उसे शक्तिशाली रूप से उपस्थित महसूस किया। मुझे शुन्यो से पता था कि वह हर दिन बीस घंटे से अधिक सो रहा था, हर शाम बुद्ध हॉल में कुछ क़ीमती मिनटों के लिए अपनी शारीरिक ऊर्जा को बचा रहा था। ओशो नेa मुझे बताया कि उसके हमलावरों की आवाज़ से उसका शरीर बहुत कमजोर हो गया था। उन्होंने कहा कि उनमें से शायद तीन, दो पुरुष और एक महिला, ध्वनि तरंगों पर ध्यानaa केंद्रित करने और अपने शरीर को लक्षित करने के लिए एक विशेष गठन में बैठे थे। यहां भारत में प्राचीन योगिक प्रथाएं हैं जहां लोग कुछ ध्वनियों, कुछ मंत्रों को जानते हैं, जो लोगों को नुक़सान पहुंचाने के लिए ध्वनि को केंद्रित कर सकते हैं। लेकिन मुझ पर हमला करaaने वाले ये लोग भारतीय नहीं हैं। वे वही लोग हैं जिन्होंने अमेरिका में पहले मुझे मारने की कोशिश की थी। वे तब सफल नहीं हो सके, और अब वे जो शुरू किया उसे पूरा कर ने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने मुझे बोलने से रोकने के लिए ज़हर की कोशिश की लेकिन मैं जारी रखने में कामयाब रहा। अब, पांच साल बाद वे वापस आ गए हैं। उन्होंने पहले बुद्ध हॉल में अपनी ध्वनि किरणों का उपयोग मेरे दिमाग़ पर हमला करने के लिए किया लेकिन मैं अपने दिमाग़ में नहीं हूं। मैं एक नो-मन हूं और उनकी आवाज़ का बहुत कम प्रभाव था। इसलिए उन्होंने अपनी रणनीति बदल दी, अब वे मेरे शरीर पर हमला कर रहे हैं। मेरे गरीब शरीर को उनकी किरणों से कोई सुरक्षा नहीं है। हर दिन यह कमजोर होता जाता है। वे मुझे मार नहीं सकते लेकिन वे मेरे शरीर को नुक़सान पहुंचा सकते हैं। अभी मेरे जिगर के क्षेत्र में बहुत दर्द हो रहा है। क्या आप इसे एक्स-रे कर सकते हैं? दुख की बात है, मैंने समझाया कि मेरी दंत एक्स-रे मशीन शायद अपर्याप्त थी क्योंकि यह केवल दांतों और जबड़े की छोटी फिल्में ले सकती थी, लेकिन हम कोशिश कर सकते थे। अमृतो को हमारे पास सबसे बड़ी एक्स-रे फ़िल्म मिली, जबकि मैंने इसकी बीम को चौड़ा करने के लिए डेंटल एक्स-रे मशीन के साथ जिग्गल किया। मैंने वह करने की कोशिश की जो ओशो पूछ रहा था। मैंने उसके जिगर के क्षेत्र की एक तस्वीर ली और फिर दंत विकास में बड़ी फ़िल्म विकसित करने में कामयाब रहा टैंक जिसे छोटी इंट्रा-ओरल डेंटल फ़िल्मों के लिए डिज़ाइन किया गया था, लेकिन परिणामी छवि धुंधली और अस्पष्ट थी। यह आख़िरी बार था जब मैंने ओशो को उसके भौतिक शरीर में देखा था। 19 जनवरी को शाम 4:30 बजे थे: मैं अपनी प्रेमिका के साथ अपने कमरे में था जब दरवाजे पर एक ज़रूरी दस्तक हुई। मनीषा, पीला और तनावग्रस्त दिख रही थी, ने पूछा कि क्या वह मेरे कमरे के फ़ोन का उपयोग कर सकती है। मुझे पता था कि वह केवल पूछेगी कि क्या कुछ असामान्य हो रहा है। अस्थायी सचिव के रूप में कार्य करते हुए वह इनर सर्कल के सदस्यों को फ़ोन कर रही थी और उन्हें कृष्णा हाउस में एक असाधारण बैठक में तुरंत आने के लिए कह रही थी। ओशो ने पंद्रह महीने पहले इक्कीस लोगों की एक कम्यून प्रबंधन टीम की स्थापना की थी, इसे इनर सर्कल का नाम दिया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका काम कम्यून के दिन-प्रतिदिन चलने का प्रबंधन करना था। मैं मूल चयन में नहीं था, लेकिन कुछ महीने बाद मुझे शामिल होने के लिए कहा गया था। फ़ोन करने के बाद, मनीषा ने कहा, “गीट, तुमने सुना कि मैं दूसरों को क्या बता रहा था। बैठक कृष्णा हाउस की छत पर ब्लू रूम में है। क्या आप वहां तुरंत जा सकते हैं?” इससे पहले कि मैं कोई सवाल पूछ पाता, वह जल्दी से गलियारे में चली गई, स्पष्ट रूप से एक और महत्वपूर्ण कार्य में शामिल थी। मैंने दोपहर के अधिकांश समय अजीब तरह से विपुल महसूस किया था। बाहरी मामलों की उथल-पुथल के बावजूद मैं कई दिनों से उत्साहित महसूस कर रहा था। मेरे दिल में ख़ुशी का एक अकथनीय नृत्य था। अंदर से मुझे उत्साह, आनंद महसूस हुआ। ब्लू रूम में पहुंचने पर, मैंने देखा कि अधिकांश इनर सर्कल पहले से ही वहां इकट्ठा हो चुके थे। माहौल तनावपूर्ण और तनावपूर्ण था। मेरा अपना उत्साह जगह से बाहर लग रहा था। मैं बैठ गया और इंतज़ार किया। कुछ मिनटों के बाद जयेश ने अमृतो के साथ प्रवेश किया। यह देखने के लिए संक्षेप में चारों ओर देखते हुए कि हम सभी मौजूद हैं, उन्होंने एक दृढ़, हालांकि शांत आवाज़ में कहा, “मुझे लगता है कि इसे लपेटने का कोई तरीक़ा नहीं है। मैं आपको सीधे बताऊंगा। ओशो ने कुछ समय पहले लगभग 4:45 बजे अपना शरीर छोड़ दिया था दोपहर।” स्तब्ध, मैंने अपनी घड़ी को देखा। शाम के 5:15 बजे थे। उपस्थित दो या तीन लोग रोने लगे। जयेश ने जल्दी से बीच में टोका, “देखो, मुझे तुम्हारी सारी मदद की ज़रूरत है। कृपया अभी तक अलग न हों। मुझे आप सभी की ज़रूरत है कि ओशो के भेजने को उतना ही सुंदर बनाने में मदद करें जितना वह हकदार है। यह आख़िरी चीज है जो हम उसके लिए कर सकते हैं भौतिक शरीर, चलो इसे अद्भुत बनाते हैं। उसने मुझे ठीक से बताया कि वह कैसे चाहता है कि ऐसा हो। उसने मुझे हर चीज के लिए विस्तृत निर्देश दिए, लेकिन मुझे यहां हर किसी की मदद की ज़रूरत है।” जयेश के शब्दों को सुनकर मेरा पहले का उत्साह सदमे में बदल गया था, लेकिन मैंने ओशो को अपने लोगों के साथ अपने अंतिम उत्सव का आनंद लेने में सक्षम बनाने के लिए हमारी मदद के लिए जयेश की अपील को स्पष्ट रूप से सुना। जैसे ही मैंने ब्लू रूम छोड़ा, जयेश ने मुझे बताया कि ओशो ने अनुरोध किया था कि मैं उनके शरीर को जलते हुए घाटों तक ले जाने के लिए एक वाहक बनूं। गतिविधि और भ्रमित भावनाओं के एक धुंध में मुझे याद है कि ओशो के इस अंतिम उपहार के लिए बेहद आभारी महसूस कर रहा था। - स्वामी देवगीत पुस्तक : ओशो - द फर्स्ट बुद्ध इन द डेंटल चेयर अध्याय: 17 अध्याय का नाम: ओशो का अंतिम दंत नाटक: अधिनियम V अंतिम सुनहरी झलक
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