राजस्थान न्यूज़: बारां। बारां जिले के प्रशासनिक महकमे से बड़ा मामला सामने आया है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने अंता के उपखंड अधिकारी (SDM) हवाई सिंह यादव के खिलाफ रिश्वत मांगने के आरोप में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आपराधिक प्रकरण दर्ज किया है। मामला जमीन से जुड़ी दो अलग-अलग कार्यवाहियों से संबंधित है। परिवादी का आरोप है कि एक प्लानिंग की जमीन पर पूर्व उपखंड अधिकारी द्वारा लगाई गई आपत्ति हटाने और दूसरी जमीन के एग्रीमेंट पर लगे स्थगन आदेश को हटाने के बदले उससे लाखों रुपए की रिश्वत मांगी जा रही थी। एसीबी की ओर से कराए गए गोपनीय सत्यापन में एक मामले में रिश्वत मांगने की पुष्टि होने के बाद मुकदमा दर्ज किया गया है। दो जमीनों का मामला, परिवादी ने लगाया 5.50 लाख मांगने का आरोप मामले की शुरुआत तब हुई जब एक परिवादी ने कोटा एसीबी इकाई के समक्ष शिकायत पेश की। शिकायत में उसने बताया कि उसकी एक प्लानिंग वाली भूमि पर पूर्व उपखंड अधिकारी की ओर से आपत्ति लगाई गई थी। परिवादी ने आरोप लगाया कि इस आपत्ति को हटाने के लिए वर्तमान एसडीएम हवाई सिंह यादव द्वारा उससे 5 लाख रुपए रिश्वत के रूप में मांगे जा रहे थे। शिकायत में एक दूसरी प्लानिंग वाली जमीन का भी उल्लेख किया गया। इस जमीन से संबंधित एग्रीमेंट पर स्थगन आदेश लगा हुआ था। परिवादी का आरोप था कि इस स्टे को हटाने के बदले उससे अलग से 50 हजार रुपए मांगे गए। इस प्रकार शिकायत में दोनों मामलों को मिलाकर कुल 5 लाख 50 हजार रुपए की रिश्वत मांगने का आरोप लगाया गया। एसीबी ने कराया गोपनीय सत्यापन शिकायत मिलने के बाद एसीबी की कोटा इकाई ने आरोपों की गोपनीय रूप से जांच शुरू की। प्रकाशित जानकारी के अनुसार अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विजय स्वर्णकार के निर्देशन में रिश्वत की मांग का सत्यापन कराया गया। सत्यापन के दौरान एग्रीमेंट पर लगे स्टे को हटाने के बदले 50 हजार रुपए की मांग सामने आने की बात एसीबी ने कही है। एसीबी के सत्यापन में सामने आया कि परिवादी ने रिश्वत की रकम कम करने की बात कही, जिसके बाद कथित तौर पर 50 हजार रुपए की मांग 45 हजार रुपए पर तय हुई। अधिकारी की ओर से यह राशि एक कथित बिचौलिए को देने की बात कहे जाने का भी उल्लेख रिपोर्टों में किया गया है। इसी सत्यापन को आगे की कानूनी कार्रवाई का महत्वपूर्ण आधार बनाया गया। ट्रैप की तैयारी हुई, लेकिन नहीं हो सका रुपयों का लेन-देन रिश्वत की मांग का सत्यापन होने के बाद एसीबी ने कथित रूप से अधिकारी को रंगे हाथ पकड़ने के लिए ट्रैप कार्रवाई की तैयारी की। हालांकि कार्रवाई पूरी होने से पहले ही ट्रैप की जानकारी संबंधित अधिकारी तक पहुंच जाने की बात सामने आई। इसके चलते कथित रिश्वत राशि का वास्तविक लेन-देन नहीं हो सका और एसीबी अधिकारी को रकम लेते हुए पकड़ नहीं पाई।इसके बावजूद एसीबी ने यह माना कि सत्यापन के दौरान रिश्वत की मांग से संबंधित पर्याप्त तथ्य सामने आए हैं। इसके बाद आवश्यक प्रक्रिया पूरी करते हुए हवाई सिंह यादव के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7 के तहत मामला दर्ज किया गया। अब मामले में आगे की जांच एसीबी स्तर पर की जाएगी। 5 लाख की मांग और 45 हजार के सत्यापन में अंतर समझना जरूरी इस मामले में दो अलग-अलग तथ्यों को स्पष्ट रूप से समझना महत्वपूर्ण है। परिवादी ने अपनी शिकायत में पहली जमीन से आपत्ति हटाने के बदले 5 लाख रुपए मांगे जाने का आरोप लगाया था। वहीं दूसरी जमीन के एग्रीमेंट पर लगे स्टे को हटाने के लिए 50 हजार रुपए मांगने की शिकायत की गई थी।एसीबी के गोपनीय सत्यापन में जिस मांग की पुष्टि होने की बात सामने आई है, वह दूसरी जमीन के मामले से संबंधित 50 हजार रुपए की रकम है, जो कथित बातचीत के बाद 45 हजार रुपए पर तय हुई। इसलिए कुल 5.50 लाख रुपए की राशि परिवादी द्वारा लगाए गए आरोप का हिस्सा है, जबकि 45 हजार रुपए की मांग के संबंध में एसीबी सत्यापन की बात प्रकाशित रिपोर्टों में स्पष्ट रूप से दर्ज है। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 में मामला एसीबी ने एसडीएम हवाई सिंह यादव के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7 के तहत प्रकरण दर्ज किया है। यह धारा लोक सेवक द्वारा अपने सार्वजनिक कर्तव्य से जुड़े कार्य के संबंध में अनुचित लाभ अथवा रिश्वत स्वीकार करने, प्राप्त करने का प्रयास करने या उसकी मांग से संबंधित प्रावधानों को कवर करती है।इस मामले में किसी अधिकारी को ट्रैप के दौरान रिश्वत की रकम के साथ गिरफ्तार किए जाने की सूचना नहीं है। प्रकरण रिश्वत मांगने के कथित सत्यापन के आधार पर दर्ज किया गया है और आरोपों की अंतिम कानूनी स्थिति जांच तथा आगे की न्यायिक प्रक्रिया से तय होगी। अब आगे की जांच पर नजर मामला दर्ज होने के बाद अब एसीबी रिश्वत की कथित मांग, परिवादी की शिकायत, सत्यापन के दौरान सामने आए तथ्यों और किसी कथित बिचौलिए की भूमिका सहित विभिन्न पहलुओं की जांच करेगी। जांच में यह भी महत्वपूर्ण होगा कि जमीन से संबंधित दोनों मामलों की प्रशासनिक फाइलों पर क्या कार्रवाई लंबित थी और शिकायत में लगाए गए आरोपों से उनका क्या संबंध है। अंता जैसे महत्वपूर्ण उपखंड के एसडीएम के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण कानून के तहत प्रकरण दर्ज होने के बाद यह मामला प्रशासनिक स्तर पर भी चर्चा में आ गया है। हालांकि आरोपों का अंतिम निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगा।
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राजस्थान न्यूज़: जयपुर। राजस्थान में अनुसूचित जनजाति आरक्षण के भीतर अलग-अलग समुदायों के लिए उप-वर्गीकरण की मांग अब हाईकोर्ट पहुंच गई है। राजस्थान हाईकोर्ट ने उस याचिका पर राज्य और केंद्र सरकार सहित संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा है, जिसमें प्रदेश में अनुसूचित जनजाति को मिल रहे 12 प्रतिशत आरक्षण में से 9 प्रतिशत आरक्षण भील समुदाय के लिए निर्धारित करने की मांग की गई है। जस्टिस इंद्रजीत सिंह और जस्टिस संदीप तनेजा की खंडपीठ ने शंकर लाल दहिया एवं अन्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए नोटिस जारी किए हैं। अदालत ने मुख्य सचिव, प्रमुख शासन सचिव कार्मिक, राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग और केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। हालांकि इस स्तर पर हाईकोर्ट ने भील समुदाय को 9 प्रतिशत उप-कोटा देने का कोई अंतिम आदेश नहीं दिया है। अदालत ने फिलहाल याचिका में उठाए गए मुद्दों पर संबंधित पक्षों का जवाब मांगा है, जिसके बाद मामले की आगे सुनवाई होगी। क्या है 9% भील आरक्षण की मांग? याचिकाकर्ता आदिवासी भील आरक्षण संघर्ष समिति से जुड़े बताए गए हैं। उनकी मांग है कि राजस्थान में ST वर्ग को दिए जा रहे कुल 12 प्रतिशत आरक्षण का उप-वर्गीकरण किया जाए और इसमें से 9 प्रतिशत हिस्सा भील समुदाय के लिए निर्धारित किया जाए। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि अनुसूचित जनजाति श्रेणी में शामिल विभिन्न समुदायों की सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक स्थिति तथा सरकारी सेवाओं में उनके वास्तविक प्रतिनिधित्व का पर्याप्त आकलन किए बिना आरक्षण का लाभ समान रूप से उपलब्ध मान लिया गया है। याचिका में दावा किया गया है कि भील समुदाय को सरकारी सेवाओं और अन्य क्षेत्रों में उनकी आबादी तथा पिछड़ेपन की तुलना में पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिला है। इसके विपरीत याचिकाकर्ताओं ने मीणा समुदाय को ST आरक्षण के लाभ का बड़ा हिस्सा मिलने का दावा किया है। ये बातें फिलहाल याचिकाकर्ताओं के दावे हैं और राज्य सरकार का विस्तृत जवाब अदालत के सामने आना बाकी है। याचिका में सुप्रीम कोर्ट के 2024 के फैसले का आधार मामले में याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट के सात जजों की संविधान पीठ के ऐतिहासिक State of Punjab v. Davinder Singh फैसले का सहारा लिया है। सुप्रीम कोर्ट ने 1 अगस्त 2024 को 6:1 के बहुमत से आरक्षित वर्ग के भीतर उप-वर्गीकरण को संवैधानिक रूप से स्वीकार किया था और पूर्व के E.V. Chinnaiah फैसले को पलट दिया था। केंद्र सरकार ने बाद में संसद में दिए जवाब में भी इस फैसले को अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के उप-वर्गीकरण को अनुमेय मानने वाले फैसले के रूप में दर्ज किया। इस निर्णय का महत्वपूर्ण पहलू यह है कि कोई राज्य केवल राजनीतिक या सामान्य धारणा के आधार पर आरक्षित वर्ग के भीतर एक समुदाय को अलग लाभ नहीं दे सकता। इस तरह के उप-वर्गीकरण के पीछे सामाजिक पिछड़ेपन और सरकारी सेवाओं में अपर्याप्त प्रतिनिधित्व जैसे कारकों से संबंधित ठोस और अनुभवजन्य आंकड़ों का आधार होना जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले में भी उप-वर्गीकरण की कार्रवाई को डेटा से समर्थित किए जाने पर जोर दिया गया था। भील समुदाय के डेटा का मुद्दा भी उठाया राजस्थान हाईकोर्ट में दायर याचिका में यह भी कहा गया है कि भील समुदाय की सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक स्थिति तथा सरकारी सेवाओं में प्रतिनिधित्व को लेकर पर्याप्त और अद्यतन सरकारी डेटा उपलब्ध नहीं है। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि समुदाय की स्थिति जानने के लिए लंबे समय से व्यापक सर्वे नहीं किया गया है। यही मुद्दा इस मामले में आगे महत्वपूर्ण हो सकता है, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट के उप-वर्गीकरण संबंधी फैसले में राज्य द्वारा किसी विशेष उप-समूह को अतिरिक्त प्राथमिकता देने के लिए वस्तुनिष्ठ सामग्री और अनुभवजन्य आंकड़ों की आवश्यकता पर बल दिया गया है। राष्ट्रीय ST आयोग के पत्र का भी जिक्र याचिका में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के एक पत्र का भी उल्लेख किया गया है। याचिकाकर्ताओं के अनुसार आयोग ने 25 फरवरी को राजस्थान के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर संविधान के अनुच्छेद 338A के तहत ST वर्ग में उप-वर्गीकरण और सुप्रीम कोर्ट के Davinder Singh फैसले के संदर्भ में कार्रवाई की बात कही थी। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इसके बावजूद राजस्थान में अब तक ST आरक्षण का उप-वर्गीकरण नहीं किया गया। हालांकि आयोग के उस पत्र की व्याख्या और उस पर राज्य सरकार की ओर से क्या कार्रवाई की गई, यह भी अब अदालत में जवाब आने के बाद अधिक स्पष्ट होगा। ST की नियुक्तियों पर रोक लगाने की भी मांग याचिका केवल 9 प्रतिशत उप-कोटा की मांग तक सीमित नहीं है। याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट से यह अंतरिम राहत भी मांगी है कि जब तक इस मामले का फैसला नहीं हो जाता, तब तक ST श्रेणी के तहत होने वाली नियुक्तियों को रोक दिया जाए।फिलहाल उपलब्ध आदेश और रिपोर्टों के अनुसार अदालत ने ऐसी नियुक्तियों पर कोई रोक नहीं लगाई है। इस मांग पर भी संबंधित सरकारों और प्राधिकरणों का पक्ष सुनने के बाद ही आगे का फैसला हो सकता है। मीणा समुदाय को लेकर याचिका में क्या दावा? याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट में दावा किया है कि राजस्थान में मीणा समुदाय ने सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक स्तर पर अपेक्षाकृत प्रगति की है और ST आरक्षण से मिलने वाली सरकारी नौकरियों तथा अन्य अवसरों में उसे बड़ा हिस्सा प्राप्त हो रहा है। दूसरी तरफ भील समुदाय पर्याप्त प्रतिनिधित्व हासिल नहीं कर पाया है। यह अदालत द्वारा तय तथ्य नहीं है, बल्कि याचिका में रखा गया पक्ष है। आगे सरकार और अन्य प्रतिवादी इन दावों, आंकड़ों और आरक्षण के वर्तमान वितरण को लेकर अपना जवाब देंगे। इस कारण अभी किसी समुदाय के वास्तविक प्रतिनिधित्व को लेकर अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। सुप्रीम कोर्ट के फैसले से क्या बदला? Davinder Singh फैसला आरक्षण कानून की दृष्टि से इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे पहले E.V. Chinnaiah निर्णय को आरक्षित सूची के भीतर राज्य द्वारा उप-वर्गीकरण पर बड़ी बाधा माना जाता था। सात जजों की पीठ ने उस दृष्टिकोण को पलटते हुए माना कि आरक्षित वर्ग कोई ऐसी पूरी तरह एकसमान इकाई नहीं है जिसमें सभी समूह समान स्तर पर लाभ प्राप्त कर रहे हों। उचित परिस्थितियों में उन समूहों तक आरक्षण का लाभ पहुंचाने के लिए उप-वर्गीकरण किया जा सकता है जो अपेक्षाकृत अधिक वंचित या कम प्रतिनिधित्व वाले हैं। साथ ही यह अधिकार असीमित नहीं है। राज्य को यह दिखाना होगा कि जिस समुदाय को विशेष लाभ दिया जा रहा है उसके पक्ष में ऐसा वर्गीकरण करने का तथ्यात्मक और संवैधानिक आधार मौजूद है। क्या हाईकोर्ट सीधे 9% आरक्षण दे सकता है? मौजूदा स्थिति में यह कहना जल्दबाजी होगी कि राजस्थान में अब 9 प्रतिशत भील उप-कोटा लागू होने वाला है। हाईकोर्ट ने अभी केवल नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। आगे अदालत यह जांच सकती है कि सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले, उपलब्ध आंकड़ों और संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप इस मुद्दे पर उचित विचार किया है या नहीं। अंतिम सुनवाई के दौरान अदालत परिस्थितियों और कानून के अनुसार सरकार को किसी मुद्दे पर निर्णय लेने, डेटा एकत्र करने या अन्य उचित प्रक्रिया अपनाने के लिए निर्देश दे सकती है। लेकिन वास्तविक उप-वर्गीकरण किस अनुपात में होना चाहिए—और याचिका में मांगा गया 9 प्रतिशत आंकड़ा कानूनी व तथ्यात्मक कसौटी पर टिकता है या नहीं—यह अभी न्यायिक परीक्षण और सरकारी जवाब का विषय है।
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राजस्थान न्यूज़: जयपुर। राजस्थान में नगर निकायों के अध्यक्ष, सभापति और अन्य प्रमुख पदों के चुनाव से ठीक पहले सियासी तनाव चरम पर पहुंच गया है। प्रदेश के कई नगर निकायों में पार्षदों की बाड़ेबंदी, पुलिस की आवाजाही, गुमशुदगी और अपहरण की शिकायतों तथा निर्दलीय पार्षदों के समर्थन को लेकर भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने हैं। इसी बीच कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, मुख्यमंत्री कार्यालय और भाजपा नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाए हैं। डोटासरा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के लिए कांग्रेस द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे राजनीतिक विशेषण “पर्ची मुख्यमंत्री” का प्रयोग किया और आरोप लगाया कि निकाय चुनाव में भाजपा की पूरी रणनीति केंद्रीय नेतृत्व से जुड़े नेताओं और मुख्यमंत्री कार्यालय के अधिकारियों के माध्यम से संचालित की जा रही है। यह कांग्रेस नेता का राजनीतिक आरोप है; ऐसा कोई स्वतंत्र रूप से सत्यापित प्रमाण सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है जिससे यह स्थापित हो कि केंद्रीय नेता CMO के जरिए स्थानीय बोर्ड गठन की कार्रवाई संचालित कर रहे हैं। डोटासरा का आरोप—पार्षदों पर दबाव बनाने के लिए प्रशासन का इस्तेमाल डोटासरा ने आरोप लगाया कि अधिकारियों को कांग्रेस और निर्दलीय पार्षदों पर दबाव बनाने, उनके खिलाफ मुकदमे दर्ज करने और उन्हें भाजपा के पक्ष में लाने के लिए कहा जा रहा है। उन्होंने कहा कि जिन निकायों में कांग्रेस या निर्दलीय मजबूत स्थिति में हैं, वहां भाजपा जनादेश स्वीकार करने के बजाय प्रशासन और पुलिस के जरिए राजनीतिक समीकरण बदलने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष इससे पहले भी कई मौकों पर पुलिस की कार्रवाई को लेकर सवाल उठा चुके हैं। उन्होंने मंडावा, बीकानेर, बानसूर, फतहनगर, कुचेरा और देवली-उनियारा जैसे स्थानों का उल्लेख करते हुए दावा किया कि पार्षदों के ठहरने वाले होटलों और रिसॉर्ट्स तक पुलिस पहुंच रही है और उनके बारे में पूछताछ कर रही है। डोटासरा ने गिनाए कई निकाय डोटासरा ने अपने आरोपों में भरतपुर, बीकानेर, जोधपुर, उदयपुर, श्रीगंगानगर, संगरिया, कुचेरा, बहरोड़, बानसूर, दूनी, देवली-उनियारा, मंडावा, मांढण, नीमराना, सीकर, लोसल, धोद, कानोड़ और भींडर समेत कई निकायों का जिक्र किया। उनका आरोप है कि अलग-अलग स्थानों पर एक जैसी रणनीति अपनाई जा रही है—पहले पार्षदों पर दबाव, उसके बाद पुलिस या प्रशासनिक कार्रवाई और फिर बोर्ड गठन का प्रयास। इन दावों की हर निकाय में स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और कई मामलों में पुलिस ने कार्रवाई के पीछे शिकायत, गुमशुदगी रिपोर्ट या कानूनी प्रक्रिया को वजह बताया है। संगरिया का मामला बना बड़ा उदाहरण हनुमानगढ़ जिले की संगरिया नगरपालिका का मामला भी इस राजनीतिक विवाद के केंद्र में आया है। वहां एक पार्षद और उनके पिता के कथित अपहरण की शिकायत दर्ज होने के बाद संगरिया पुलिस पंजाब पहुंची थी। मौके पर कांग्रेस विधायक अभिमन्यु पूनिया और पुलिस अधिकारियों के बीच तीखी बहस हुई। बाद में संबंधित लोगों ने पुलिस के सामने अपहरण से इनकार करते हुए अपनी इच्छा से वहां रहने की बात कही। कांग्रेस ने इस कार्रवाई को राजनीतिक दबाव बताया, जबकि पुलिस की कार्रवाई दर्ज शिकायत की जांच के सिलसिले में हुई थी। यह घटनाक्रम दोनों पक्षों के दावों के बीच चल रही खींचतान का उदाहरण बन गया है। मंडावा में पुलिस ने होटल की तलाशी ली झुंझुनूं जिले के मंडावा में भी कांग्रेस पार्षदों के ठहरने वाले होटल पर पुलिस पहुंची थी। यहां पुलिस का कहना था कि एक पार्षद को कथित तौर पर बंधक बनाए जाने की शिकायत मिली थी और सर्च वारंट के आधार पर कार्रवाई की गई। जिस पार्षद की तलाश की जा रही थी, वह मौके पर नहीं मिला। दूसरी ओर कांग्रेस ने कार्रवाई को भाजपा के दबाव से जोड़ते हुए इसका विरोध किया। ऐसे मामलों के कारण प्रदेश में पुलिस कार्रवाई और राजनीतिक बाड़ेबंदी के बीच की सीमा को लेकर बहस तेज हो गई है। भरतपुर के घटनाक्रम पर भी कांग्रेस हमलावर भरतपुर नगर निगम में निर्दलीय उम्मीदवार विचित्रा सिंह के नामांकन वापस लेने के बाद भाजपा प्रत्याशी अनुराधा सिंह के निर्विरोध महापौर बनने का रास्ता साफ हुआ था। कांग्रेस ने इस पूरे घटनाक्रम को दबाव की राजनीति से जोड़ा और दावा किया कि नामांकन वापसी से पहले संबंधित पक्ष पर प्रशासनिक दबाव बनाया गया था। भाजपा और सरकार ने इन आरोपों को स्वीकार नहीं किया है। भरतपुर का उदाहरण देते हुए डोटासरा ने कहा कि जिन निकायों में भाजपा संख्या के स्तर पर पीछे है, वहां दूसरे रास्तों से बोर्ड बनाने की कोशिश की जा रही है। 21 सितंबर क्यों है इतना महत्वपूर्ण? राजस्थान में अनेक नगर परिषद और नगर पालिकाओं के अध्यक्ष व सभापति पद के लिए 21 सितंबर को मतदान होना है। कई निकायों में भाजपा या कांग्रेस में से किसी एक दल के पास पूर्ण बहुमत नहीं है और निर्दलीय पार्षद निर्णायक भूमिका में हैं। राज्य के स्थानीय निकाय परिणामों में बड़ी संख्या में निर्दलीय प्रत्याशी जीतकर आए हैं। कई नगर परिषद और नगर पालिकाओं में बोर्ड गठन का गणित इन्हीं पार्षदों के समर्थन पर टिका है। इसी कारण चुनाव परिणाम आने के बाद भी दोनों प्रमुख दलों ने पार्षदों को होटल और रिसॉर्ट में एक साथ रखने की रणनीति अपनाई है। कांग्रेस का दावा—‘जनादेश बदलने की कोशिश’ डोटासरा का आरोप है कि भाजपा उन स्थानों पर भी बोर्ड बनाने की कोशिश कर रही है जहां उसे मतदाताओं से स्पष्ट जनादेश नहीं मिला। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ बताया और प्रशासन को निष्पक्ष रहने की चेतावनी दी। इससे पहले भी डोटासरा ने कहा था कि यदि पार्षदों को लेकर जारी तनाव के बीच कोई गंभीर हिंसा या अप्रिय घटना होती है तो इसकी जिम्मेदारी राज्य सरकार और पुलिस की होगी। सरकार का जवाब—कांग्रेस के आरोप निराधार कांग्रेस के आरोपों पर राजस्थान सरकार ने अलग पक्ष रखा है। गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम ने कहा कि कांग्रेस हताशा में पुलिस पर आरोप लगा रही है। उनका कहना है कि यदि किसी व्यक्ति के परिवार की ओर से गुमशुदगी, अपहरण या इच्छा के विरुद्ध रोककर रखने की शिकायत दी जाती है तो पुलिस का कानूनी दायित्व है कि वह संबंधित व्यक्ति को खोजे और उसका बयान ले। बेढम ने कांग्रेस नेताओं की ओर से लगाए जा रहे खरीद-फरोख्त के आरोपों को भी गलत और बेबुनियाद बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस अपनी ही बाड़ेबंदी और राजनीतिक रणनीति को भाजपा पर आरोप के रूप में पेश कर रही है। निकाय चुनाव से आगे बढ़ी लड़ाई, अब बोर्ड गठन पर नजर नगर निकायों के वार्ड चुनाव खत्म हो चुके हैं, लेकिन वास्तविक राजनीतिक मुकाबला अब महापौर, सभापति और अध्यक्ष पदों को लेकर दिखाई दे रहा है। जहां स्पष्ट बहुमत है, वहां भी पार्टियां अपने पार्षदों को एकजुट रख रही हैं; जबकि त्रिशंकु निकायों में निर्दलीय पार्षदों का समर्थन निर्णायक बन गया है। इस माहौल में कांग्रेस सरकार पर पुलिस और प्रशासन के राजनीतिक इस्तेमाल का आरोप लगा रही है, जबकि भाजपा और सरकार इन आरोपों को खारिज कर पुलिस कार्रवाई को कानूनसम्मत बता रहे हैं। अब 21 सितंबर के मतदान के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि प्रदेश के अलग-अलग नगर निकायों में संख्या का मौजूदा गणित किस रूप में बोर्ड में बदलता है।
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अजमेर न्यूज़: 1100 वर्ष पूर्व स्थापित मंदिर की बड़ी है मान्यता, दूर दराज से पहुंचते हैं हजारों श्रद्धालु
Read more 31st Aug 2022
अजमेर न्यूज़: 1968 से कस्बे की धार्मिक संस्था श्री ब्रह्म पुष्कर सेवा संघ कर रही है इस अनूठी परंपरा का निर्वहन
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अजमेर न्यूज़: 10 टीमें 8 - 8 वार्डो में जाकर घूम रही गायों का करेंगीं प्राथमिक उपचार
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राष्ट्रीय न्यूज़: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 76वां जन्मदिन गुरुवार, 17 सितंबर को देशभर में विभिन्न कार्यक्रमों के साथ मनाया जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी की ओर से इस मौके पर ‘सेवा संकल्प अभियान’ की शुरुआत की गई है। यह अभियान प्रधानमंत्री मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर से भी जोड़ा गया है। अभियान के तहत सेवा, जनसंपर्क और कल्याणकारी योजनाओं से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। जन्मदिन के मौके पर प्रधानमंत्री मोदी ने पश्चिम बंगाल में ‘अन्नपूर्णा योजना’ की किस्त वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जारी की। इस दौरान उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल के लोगों को लंबे समय तक केंद्र की योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाया, जिससे उन्हें नुकसान हुआ। योजना की चौथी किस्त के तहत बड़ी संख्या में महिला लाभार्थियों को राशि सीधे बैंक खातों में भेजे जाने की जानकारी सामने आई है। वडनगर से वाराणसी तक बाइक यात्रा गृह मंत्री अमित शाह ने प्रधानमंत्री मोदी के जन्मस्थान वडनगर से ‘सेवा संकल्प बाइक यात्रा’ को रवाना किया। यह यात्रा 10 राज्यों और 193 जिलों से होकर गुजरेगी। रिपोर्टों के मुताबिक यात्रा में करीब 600 बाइकर्स शामिल हैं और इसका समापन 7 अक्टूबर को प्रस्तावित है। इसी अभियान के तहत वाराणसी से वडनगर के लिए भी बाइक यात्रा शुरू की गई है। दोनों यात्राओं को प्रधानमंत्री मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने से जोड़ा गया है। वडनगर और वाराणसी उनके जीवन से जुड़े दो प्रमुख स्थान हैं—वडनगर उनका जन्मस्थान है, जबकि वाराणसी उनका लोकसभा क्षेत्र है। दोनों दिशाओं से निकलने वाली यात्राओं का समापन 7 अक्टूबर को होना है। अमित शाह ने गिनाईं मोदी सरकार की उपलब्धियां वडनगर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान अमित शाह ने प्रधानमंत्री मोदी के 25 वर्ष के सार्वजनिक जीवन का उल्लेख किया। शाह ने कहा कि मोदी ने लगातार सेवा करते हुए काम किया और लंबे समय तक रोजाना 16 से 18 घंटे काम किया। उन्होंने मोदी के कार्यकाल को ‘इंडिया फर्स्ट’ के मंत्र से जोड़ते हुए कहा कि राष्ट्रीय हित को प्राथमिकता देकर देश को विकास की दिशा में आगे बढ़ाने का काम किया गया। शाह ने केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं का भी उल्लेख किया। शाह के मुताबिक मोदी सरकार के कार्यकाल में 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आए। उन्होंने गरीबों को पक्के मकान, बिजली, नल से पानी, शौचालय, गैस कनेक्शन और मुफ्त राशन जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने का दावा किया। गरीबी से बाहर आने वाले लोगों का आंकड़ा प्रधानमंत्री मोदी के पूर्व सार्वजनिक बयानों में भी सामने आया है। करोड़ लोगों को मुफ्त राशन का जिक्र अमित शाह ने करीब 80 करोड़ लोगों को हर महीने 5 किलो मुफ्त अनाज दिए जाने और स्वास्थ्य कवर का भी उल्लेख किया। केंद्र सरकार के आधिकारिक आंकड़ों में भी 80 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन तथा बड़ी संख्या में लोगों को स्वास्थ्य बीमा कवर दिए जाने की जानकारी दी गई है। शाह ने प्रधानमंत्री मोदी की राष्ट्रीय सुरक्षा नीति और सुशासन का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि मोदी ने राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर स्पष्ट नीति अपनाई और भ्रष्टाचार तथा घोटालों से निपटने की दिशा में काम किया। उन्होंने मोदी के खुद को ‘प्रधान सेवक’ कहने का भी उल्लेख किया। शाम को जलाए जाएंगे ‘आशीर्वाद के दीये’ जन्मदिन समारोह के तहत शाम को ‘आशीर्वाद के दीये’ कार्यक्रम भी आयोजित किया जा रहा है। इसके तहत शाम करीब 6 से 7 बजे के बीच घरों और विभिन्न स्थानों पर दीये जलाने की अपील की गई है। भाजपा की ओर से इसे प्रधानमंत्री के जन्मदिन और सेवा-संकल्प अभियान से जोड़ा गया है। पश्चिम बंगाल में भी ‘आशीर्वाद के दीये’ कार्यक्रम के तहत लोगों से दीप जलाने की अपील की गई है।अलग-अलग राज्यों में बड़ी संख्या में दीये जलाने की तैयारियां की गई हैं। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, हरियाणा और पश्चिम बंगाल में भी स्थानीय स्तर पर विशेष आयोजन प्रस्तावित हैं। इस तरह प्रधानमंत्री मोदी के 76वें जन्मदिन पर देशभर में सेवा गतिविधियों, सरकारी योजनाओं के प्रचार-प्रसार, जनसंपर्क कार्यक्रमों और बाइक यात्राओं का आयोजन किया जा रहा है। ‘सेवा संकल्प अभियान’ को प्रधानमंत्री के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर से भी जोड़ा गया है।
Read more 17th Sep 2026
अंतर्राष्ट्रीय न्यूज़: टिकटॉक की पैरेंट कंपनी बाइटडांस (ByteDance) के संस्थापक झांग यिमिंग एशिया के सबसे अमीर व्यक्ति बन गए हैं. ब्लूमबर्ग बिलियनेयर्स इंडेक्स के अनुसार, इस महीने उनकी संपत्ति में 12 अरब डॉलर का जोरदार इजाफा हुआ है. झांग यिमिंग बने एशिया के सबसे अमीर शख्स वैश्विक अरबपतियों की सूची में बड़ा फेरबदल देखने को मिला है. शॉर्ट वीडियो प्लेटफॉर्म टिकटॉक (TikTok) की मूल कंपनी बाइटडांस (ByteDance) के संस्थापक झांग यिमिंग (Zhang Yiming) एशिया के सबसे अमीर व्यक्ति बन गए हैं. भारतीय उद्योगपति गौतम अदाणी इनके बाद दूसरे नंबर पर हैं ब्लूमबर्ग बिलियनेयर्स इंडेक्स (Bloomberg Billionaires Index) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, झांग यिमिंग और गौतम अडानी दोनों की कुल संपत्ति लगभग 105 अरब डॉलर के आसपास दर्ज की गई है, लेकिन उच्च मूल्यांकन के चलते झांग सूची में शीर्ष स्थान पर पहुंच गए हैं. इस महीने झांग की व्यक्तिगत संपत्ति में करीब 12 अरब डॉलर का भारी उछाल देखने को मिला. असेसमेंट और AI टूल्स से मिला बड़ा बूस्ट झांग की संपत्ति में आई इस तेजी के पीछे बाइटडांस के सेल्फ असेसमेंट में हुआ सुधार मुख्य वजह है. ब्लूमबर्ग ने ब्लैकरॉक (BlackRock) और फिडेलिटी (Fidelity) की हालिया फाइलिंग के आधार पर कंपनी की वैल्यूएशन को अपडेट किया है. इसके साथ ही, अमेरिका में टिकटॉक से जुड़े विवाद के समाधान (ओरेकल और सिल्वर लेक संयुक्त उद्यम) के बाद कंपनी के रिस्क डिस्काउंट को 25 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत कर दिया गया. इसके अलावा, बाइटडांस के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) उत्पादों — विशेष रूप से ‘डौबाओ’ (Doubao) चैटबॉट और ‘सीडांस’ (Seedance) वीडियो मॉडल — ने निवेशकों का भरोसा और उत्साह बढ़ाया है. उल्लेखनीय है कि वर्ष 2019 के बाद से झांग यिमिंग की संपत्ति में आठ गुना से अधिक की वृद्धि दर्ज की जा चुकी है.
Read more 16th Sep 2026
गुप्त ध्वनि किरणों के साथ ओशो पर किसने हमला किया?...
गुप्त ध्वनि किरणों के साथ ओशो पर किसने हमला किया?... * ओशो के निजी दंत चिकित्सक देवगेट ओशो की मृत्यु से 4 दिन पहले हुई घटनाओं के बारे में बात करते हैं (शरीर को छोड़कर)... * 15 aजनवरी, 1990 को, मेरे जन्मदिन पर, मुझे शुन्यो से एक संदेश मिला: ओशो चाहते थे कि मैं उनके पेट का एक्स-रे ले। हम दंaत कक्ष में मिले। ओशो का शरीर पतला और बेकार लग रहा था, फिर भी मैंने उसे शक्तिशाली रूप से उपस्थित महसूस किया। मुझे शुन्यो से पता था कि वह हर दिन बीस घंटे से अधिक सो रहा था, हर शाम बुद्ध हॉल में कुछ क़ीमती मिनटों के लिए अपनी शारीरिक ऊर्जा को बचा रहा था। ओशो नेa मुझे बताया कि उसके हमलावरों की आवाज़ से उसका शरीर बहुत कमजोर हो गया था। उन्होंने कहा कि उनमें से शायद तीन, दो पुरुष और एक महिला, ध्वनि तरंगों पर ध्यानaa केंद्रित करने और अपने शरीर को लक्षित करने के लिए एक विशेष गठन में बैठे थे। यहां भारत में प्राचीन योगिक प्रथाएं हैं जहां लोग कुछ ध्वनियों, कुछ मंत्रों को जानते हैं, जो लोगों को नुक़सान पहुंचाने के लिए ध्वनि को केंद्रित कर सकते हैं। लेकिन मुझ पर हमला करaaने वाले ये लोग भारतीय नहीं हैं। वे वही लोग हैं जिन्होंने अमेरिका में पहले मुझे मारने की कोशिश की थी। वे तब सफल नहीं हो सके, और अब वे जो शुरू किया उसे पूरा कर ने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने मुझे बोलने से रोकने के लिए ज़हर की कोशिश की लेकिन मैं जारी रखने में कामयाब रहा। अब, पांच साल बाद वे वापस आ गए हैं। उन्होंने पहले बुद्ध हॉल में अपनी ध्वनि किरणों का उपयोग मेरे दिमाग़ पर हमला करने के लिए किया लेकिन मैं अपने दिमाग़ में नहीं हूं। मैं एक नो-मन हूं और उनकी आवाज़ का बहुत कम प्रभाव था। इसलिए उन्होंने अपनी रणनीति बदल दी, अब वे मेरे शरीर पर हमला कर रहे हैं। मेरे गरीब शरीर को उनकी किरणों से कोई सुरक्षा नहीं है। हर दिन यह कमजोर होता जाता है। वे मुझे मार नहीं सकते लेकिन वे मेरे शरीर को नुक़सान पहुंचा सकते हैं। अभी मेरे जिगर के क्षेत्र में बहुत दर्द हो रहा है। क्या आप इसे एक्स-रे कर सकते हैं? दुख की बात है, मैंने समझाया कि मेरी दंत एक्स-रे मशीन शायद अपर्याप्त थी क्योंकि यह केवल दांतों और जबड़े की छोटी फिल्में ले सकती थी, लेकिन हम कोशिश कर सकते थे। अमृतो को हमारे पास सबसे बड़ी एक्स-रे फ़िल्म मिली, जबकि मैंने इसकी बीम को चौड़ा करने के लिए डेंटल एक्स-रे मशीन के साथ जिग्गल किया। मैंने वह करने की कोशिश की जो ओशो पूछ रहा था। मैंने उसके जिगर के क्षेत्र की एक तस्वीर ली और फिर दंत विकास में बड़ी फ़िल्म विकसित करने में कामयाब रहा टैंक जिसे छोटी इंट्रा-ओरल डेंटल फ़िल्मों के लिए डिज़ाइन किया गया था, लेकिन परिणामी छवि धुंधली और अस्पष्ट थी। यह आख़िरी बार था जब मैंने ओशो को उसके भौतिक शरीर में देखा था। 19 जनवरी को शाम 4:30 बजे थे: मैं अपनी प्रेमिका के साथ अपने कमरे में था जब दरवाजे पर एक ज़रूरी दस्तक हुई। मनीषा, पीला और तनावग्रस्त दिख रही थी, ने पूछा कि क्या वह मेरे कमरे के फ़ोन का उपयोग कर सकती है। मुझे पता था कि वह केवल पूछेगी कि क्या कुछ असामान्य हो रहा है। अस्थायी सचिव के रूप में कार्य करते हुए वह इनर सर्कल के सदस्यों को फ़ोन कर रही थी और उन्हें कृष्णा हाउस में एक असाधारण बैठक में तुरंत आने के लिए कह रही थी। ओशो ने पंद्रह महीने पहले इक्कीस लोगों की एक कम्यून प्रबंधन टीम की स्थापना की थी, इसे इनर सर्कल का नाम दिया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका काम कम्यून के दिन-प्रतिदिन चलने का प्रबंधन करना था। मैं मूल चयन में नहीं था, लेकिन कुछ महीने बाद मुझे शामिल होने के लिए कहा गया था। फ़ोन करने के बाद, मनीषा ने कहा, “गीट, तुमने सुना कि मैं दूसरों को क्या बता रहा था। बैठक कृष्णा हाउस की छत पर ब्लू रूम में है। क्या आप वहां तुरंत जा सकते हैं?” इससे पहले कि मैं कोई सवाल पूछ पाता, वह जल्दी से गलियारे में चली गई, स्पष्ट रूप से एक और महत्वपूर्ण कार्य में शामिल थी। मैंने दोपहर के अधिकांश समय अजीब तरह से विपुल महसूस किया था। बाहरी मामलों की उथल-पुथल के बावजूद मैं कई दिनों से उत्साहित महसूस कर रहा था। मेरे दिल में ख़ुशी का एक अकथनीय नृत्य था। अंदर से मुझे उत्साह, आनंद महसूस हुआ। ब्लू रूम में पहुंचने पर, मैंने देखा कि अधिकांश इनर सर्कल पहले से ही वहां इकट्ठा हो चुके थे। माहौल तनावपूर्ण और तनावपूर्ण था। मेरा अपना उत्साह जगह से बाहर लग रहा था। मैं बैठ गया और इंतज़ार किया। कुछ मिनटों के बाद जयेश ने अमृतो के साथ प्रवेश किया। यह देखने के लिए संक्षेप में चारों ओर देखते हुए कि हम सभी मौजूद हैं, उन्होंने एक दृढ़, हालांकि शांत आवाज़ में कहा, “मुझे लगता है कि इसे लपेटने का कोई तरीक़ा नहीं है। मैं आपको सीधे बताऊंगा। ओशो ने कुछ समय पहले लगभग 4:45 बजे अपना शरीर छोड़ दिया था दोपहर।” स्तब्ध, मैंने अपनी घड़ी को देखा। शाम के 5:15 बजे थे। उपस्थित दो या तीन लोग रोने लगे। जयेश ने जल्दी से बीच में टोका, “देखो, मुझे तुम्हारी सारी मदद की ज़रूरत है। कृपया अभी तक अलग न हों। मुझे आप सभी की ज़रूरत है कि ओशो के भेजने को उतना ही सुंदर बनाने में मदद करें जितना वह हकदार है। यह आख़िरी चीज है जो हम उसके लिए कर सकते हैं भौतिक शरीर, चलो इसे अद्भुत बनाते हैं। उसने मुझे ठीक से बताया कि वह कैसे चाहता है कि ऐसा हो। उसने मुझे हर चीज के लिए विस्तृत निर्देश दिए, लेकिन मुझे यहां हर किसी की मदद की ज़रूरत है।” जयेश के शब्दों को सुनकर मेरा पहले का उत्साह सदमे में बदल गया था, लेकिन मैंने ओशो को अपने लोगों के साथ अपने अंतिम उत्सव का आनंद लेने में सक्षम बनाने के लिए हमारी मदद के लिए जयेश की अपील को स्पष्ट रूप से सुना। जैसे ही मैंने ब्लू रूम छोड़ा, जयेश ने मुझे बताया कि ओशो ने अनुरोध किया था कि मैं उनके शरीर को जलते हुए घाटों तक ले जाने के लिए एक वाहक बनूं। गतिविधि और भ्रमित भावनाओं के एक धुंध में मुझे याद है कि ओशो के इस अंतिम उपहार के लिए बेहद आभारी महसूस कर रहा था। - स्वामी देवगीत पुस्तक : ओशो - द फर्स्ट बुद्ध इन द डेंटल चेयर अध्याय: 17 अध्याय का नाम: ओशो का अंतिम दंत नाटक: अधिनियम V अंतिम सुनहरी झलक
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