राजस्थान न्यूज़: जयपुर। राइजिंग राजस्थान ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट-2024 के तहत राज्य सरकार द्वारा देश-विदेश के निवेशकों के साथ किए गए 45.22 लाख करोड़ रुपए के 22,299 एमओयू में से अब तक 3,895 परियोजनाओं पर ग्राउंड ब्रेकिंग शुरू हो सकी है। इन परियोजनाओं में 8.01 लाख करोड़ रुपए का निवेश प्रस्तावित है और इनके माध्यम से 2,88,302 लोगों को रोजगार मिलने की संभावना जताई गई है। यह जानकारी उद्योग मंत्री ने विधानसभा में किशनपोल से कांग्रेस विधायक अमीन कागजी के प्रश्न के लिखित जवाब में दी। सरकार ने इसे निवेश प्रस्तावों को धरातल पर उतारने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है। हालांकि, बड़ी संख्या में निवेश प्रस्ताव अभी भी विभिन्न स्तरों पर लंबित हैं। विधानसभा में दिए गए जवाब में सरकार ने स्वीकार किया कि कई निवेश प्रस्ताव भूमि आवंटन, आवश्यक स्वीकृतियों, बाजार परिस्थितियों में बदलाव और निवेशकों के स्तर पर लिए गए निर्णयों के कारण आगे नहीं बढ़ पाए हैं। भूमि आवंटन और स्वीकृतियों में अटके कई प्रस्ताव सरकार के अनुसार, निवेश प्रस्तावों को गति देने के लिए डायरेक्ट अलॉटमेंट पॉलिसी-2025 और राजस्थान लैंड अलॉटमेंट पॉलिसी-2025 लागू की गई है। इन नीतियों का उद्देश्य निवेशकों को भूमि आवंटन और परियोजनाओं की स्थापना से जुड़ी प्रक्रियाओं को सरल और तेज बनाना है। सरकार का दावा है कि निवेश प्रस्तावों की नियमित निगरानी की जा रही है, ताकि अधिक से अधिक एमओयू को धरातल पर उतारा जा सके। विधानसभा में दी गई जानकारी के अनुसार, कई प्रस्ताव स्वीकृतियों और विभागीय प्रक्रियाओं में लंबित हैं। वहीं, कुछ निवेशकों ने बाजार की बदली परिस्थितियों या व्यावसायिक कारणों से परियोजनाओं को आगे नहीं बढ़ाने का निर्णय लिया है। ऐसे मामलों में संबंधित एमओयू की समीक्षा की जा रही है। उद्योग विभाग में सबसे ज्यादा एमओयू राइजिंग राजस्थान के तहत सबसे अधिक एमओयू उद्योग विभाग में हुए हैं। सरकार के अनुसार, उद्योग विभाग में 13,341 एमओयू किए गए, जिनमें 4 लाख करोड़ रुपए से अधिक का निवेश प्रस्तावित है। वहीं ऊर्जा क्षेत्र में 35.26 लाख करोड़ रुपए के निवेश से जुड़े 1,390 एमओयू हुए हैं। इससे स्पष्ट है कि राज्य सरकार ने औद्योगिक निवेश और ऊर्जा क्षेत्र को निवेश आकर्षण का प्रमुख आधार बनाया है। हालांकि, ग्राउंड ब्रेकिंग के स्तर पर अब तक सबसे अधिक 1,396 परियोजनाएं उद्योग विभाग से संबंधित हैं। इन परियोजनाओं में 76,080 करोड़ रुपए का निवेश और 85,148 रोजगार संभावित बताए गए हैं। ऊर्जा विभाग की 472 परियोजनाओं पर ग्राउंड ब्रेकिंग हुई है, जिनमें 6,15,995 करोड़ रुपए का निवेश और 39,256 रोजगार संभावित हैं। कई एमओयू रद्द करने के अनुरोध विधानसभा में यह भी बताया गया कि कुछ निवेश प्रस्तावों पर आगे बढ़ने की संभावना कम है। एमओयू के दोहराव, बदली हुई बाजार परिस्थितियों और निवेशकों की ओर से परियोजना नहीं लगाने के निर्णय के चलते कई समझौतों को निरस्त करने का अनुरोध किया गया है। कुछ प्रस्ताव स्वीकृति की कसौटी पर खरे नहीं उतरने के कारण भी रद्द किए जाने की प्रक्रिया में हैं। हालांकि, सरकार ने ऐसे एमओयू की संख्या का खुलासा नहीं किया है। निवेश प्रस्तावों की स्थिति को देखते हुए सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती एमओयू को वास्तविक निवेश और रोजगार में बदलने की है। राइजिंग राजस्थान के तहत किए गए बड़े निवेश दावों को लेकर अब विपक्ष भी सरकार से यह पूछ रहा है कि कितने प्रस्ताव धरातल पर उतरे और कितने अभी कागजों में ही लंबित हैं।
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राजस्थान न्यूज़: जयपुर। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने दिल्ली में 10 जनपथ पर हुई सोनिया गांधी के साथ बैठक को लेकर कहा कि मीडिया को इसमें कोई बड़ा राजनीतिक गुणा-भाग या नया राजनीतिक परिदृश्य खोजने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह बैठक राजीव गांधी नेशनल रिलीफ एंड वेलफेयर सोसाइटी के ट्रस्ट से जुड़ी नियमित बैठक थी। गहलोत ने कहा कि बैठक में सभी ट्रस्टियों को आमंत्रित किया गया था और यह पूरी तरह गैर-राजनीतिक तथा संस्थागत बैठक थी। उन्होंने कहा कि इस बैठक को राजस्थान कांग्रेस संगठन या किसी राजनीतिक कयासबाजी से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष के रूप में राहुल गांधी के दो वर्ष पूरे होने पर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि इन दो सालों में राहुल गांधी ने देश की राजनीति पर अपनी अमिट छाप छोड़ी है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने संसद के भीतर और बाहर जनता के मुद्दों को मजबूती से उठाया है और विपक्ष की जिम्मेदारी को प्रभावी ढंग से निभाया है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि राहुल गांधी ने जिस प्रकार सदन में अपनी शुरुआत की, वह ऐतिहासिक रही। उनके अनुसार, पहली बार ऐसा देखने को मिला कि प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और कई वरिष्ठ मंत्रियों को उनकी स्पीच के दौरान खड़े होकर अपनी बात रखनी पड़ी। गहलोत ने कहा कि राहुल गांधी लगातार किसानों, मजदूरों, गरीबों और देश के समग्र विकास से जुड़े विषयों को उठा रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि सरकार की नीतियों और कमियों को राहुल गांधी लगातार पुरजोर तरीके से सामने रखते हैं। वे देश की आवाज को सदन के अंदर भी और बाहर भी मजबूती से बुलंद कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष का असली दायित्व आम जनता की भावनाओं, समस्याओं और अपेक्षाओं को सत्ता पक्ष के सामने रखना होता है और राहुल गांधी इस जिम्मेदारी को सफलतापूर्वक निभा रहे हैं। NEET मुद्दे पर बड़ा आंदोलन खड़ा किया: गहलोत पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि संसद के बाहर भी INDIA गठबंधन के नेता जनता से जुड़े मुद्दों पर लगातार धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। हाल ही में NEET परीक्षा से जुड़े मुद्दे को लेकर राहुल गांधी ने पूरे देश में बड़ा आंदोलन खड़ा किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी का नेता प्रतिपक्ष के रूप में दो साल का कार्यकाल बेहद शानदार और ऐतिहासिक रहा है।
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राजस्थान न्यूज़: जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने गुरुवार को दुर्गापुरा में ‘संविधान हत्या दिवस’ के अवसर पर आयोजित लोकतंत्र सेनानी सम्मान समारोह में बड़ी घोषणा की। मुख्यमंत्री ने लोकतंत्र सेनानियों की मासिक पेंशन में 5 हजार रुपए की वृद्धि करते हुए इसे 25 हजार रुपए करने तथा मासिक चिकित्सा सहायता में 1 हजार रुपए की वृद्धि करते हुए इसे 5 हजार रुपए करने की घोषणा की। समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि 25 जून 1975 को तत्कालीन सरकार द्वारा लगाए गए आपातकाल ने संविधान और लोकतंत्र की आत्मा को कुचलने का काम किया था। उन्होंने कहा कि आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का ऐसा दौर था, जिसमें नागरिक अधिकारों, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों पर गंभीर प्रहार किया गया। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि लोकतंत्र सेनानियों ने कठिन परिस्थितियों में भी लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए संघर्ष किया। ऐसे सेनानियों का सम्मान करना राज्य सरकार का दायित्व है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र सेनानियों के त्याग और संघर्ष को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना आवश्यक है, ताकि लोकतंत्र और संविधान के महत्व को समाज बेहतर ढंग से समझ सके। पेंशन और चिकित्सा सहायता में बढ़ोतरी मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने समारोह में घोषणा की कि लोकतंत्र सेनानियों की मासिक पेंशन अब 25 हजार रुपए की जाएगी। इसके साथ ही मासिक चिकित्सा सहायता भी बढ़ाकर 5 हजार रुपए की जाएगी। सरकार के इस निर्णय से लोकतंत्र सेनानियों को आर्थिक और स्वास्थ्य संबंधी सहायता में राहत मिलेगी। मुख्यमंत्री भजनलालशर्मा ने कहा कि राज्य सरकार लोकतंत्र सेनानियों के सम्मान और कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि जिन्होंने लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष किया, उनका योगदान हमेशा स्मरणीय रहेगा। सरकार ऐसे सेनानियों के सम्मान को केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक कृतज्ञता का प्रतीक मानती है।
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अजमेर न्यूज़: 1100 वर्ष पूर्व स्थापित मंदिर की बड़ी है मान्यता, दूर दराज से पहुंचते हैं हजारों श्रद्धालु
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अजमेर न्यूज़: 1968 से कस्बे की धार्मिक संस्था श्री ब्रह्म पुष्कर सेवा संघ कर रही है इस अनूठी परंपरा का निर्वहन
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अजमेर न्यूज़: 10 टीमें 8 - 8 वार्डो में जाकर घूम रही गायों का करेंगीं प्राथमिक उपचार
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राष्ट्रीय न्यूज़: नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने इंटेलिजेंस ब्यूरो यानी आईबी के स्पेशल डायरेक्टर महेश दीक्षित को देश की आंतरिक खुफिया एजेंसी का नया प्रमुख नियुक्त किया है। वे मौजूदा आईबी डायरेक्टर तपन कुमार डेका का स्थान लेंगे, जिनका कार्यकाल 30 जून 2026 को समाप्त हो रहा है। केंद्र सरकार ने महेश दीक्षित को दो वर्ष के लिए आईबी डायरेक्टर नियुक्त किया है। महेश दीक्षित 1993 बैच के आंध्र प्रदेश कैडर के आईपीएस अधिकारी हैं। वे फिलहाल इंटेलिजेंस ब्यूरो में स्पेशल डायरेक्टर के पद पर कार्यरत थे और एजेंसी के दूसरे सबसे वरिष्ठ अधिकारी माने जाते थे। खुफिया तंत्र, आंतरिक सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी अभियानों में उनके लंबे अनुभव को देखते हुए उन्हें यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है। जम्मू-कश्मीर में भी संभाल चुके हैं अहम जिम्मेदारी महेश दीक्षित इससे पहले जम्मू-कश्मीर में सब्सिडियरी इंटेलिजेंस ब्यूरो यानी एसआईबी के प्रमुख रह चुके हैं। जम्मू-कश्मीर जैसे संवेदनशील क्षेत्र में काम करने के दौरान उन्होंने सुरक्षा, खुफिया समन्वय और आतंकवाद विरोधी अभियानों से जुड़ी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। उन्हें आंतरिक सुरक्षा और खुफिया ऑपरेशन का अनुभवी अधिकारी माना जाता है। आईबी प्रमुख के रूप में महेश दीक्षित के सामने देश की आंतरिक सुरक्षा, आतंकवाद, साइबर चुनौतियों, कट्टरपंथी गतिविधियों, सीमा पार नेटवर्क और संगठित अपराध से जुड़े खुफिया तंत्र को और मजबूत करने की जिम्मेदारी होगी। बदलते सुरक्षा परिदृश्य में आईबी की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती तपन कुमार डेका का कार्यकाल 30 जून को होगा समाप्त मौजूदा आईबी डायरेक्टर तपन कुमार डेका का कार्यकाल 30 जून 2026 को पूरा हो रहा है। डेका 1988 बैच के हिमाचल प्रदेश कैडर के आईपीएस अधिकारी हैं। वे जुलाई 2022 से इंटेलिजेंस ब्यूरो के प्रमुख पद पर कार्यरत थे। केंद्र सरकार ने उनके कार्यकाल को दो बार विस्तार दिया था। तपन कुमार डेका को भी आतंकवाद विरोधी मामलों और आंतरिक सुरक्षा से जुड़े विषयों का अनुभवी अधिकारी माना जाता है। उनके कार्यकाल के दौरान आईबी ने कई संवेदनशील सुरक्षा मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अब उनके स्थान पर महेश दीक्षित देश की आंतरिक खुफिया एजेंसी की कमान संभालेंगे। आंतरिक सुरक्षा के लिहाज से अहम नियुक्ति इंटेलिजेंस ब्यूरो देश की प्रमुख आंतरिक खुफिया एजेंसी है। इसकी जिम्मेदारी देश के भीतर सुरक्षा से जुड़ी गतिविधियों पर नजर रखना, आतंकवाद और आंतरिक खतरे से संबंधित इनपुट जुटाना तथा केंद्र और राज्यों की सुरक्षा एजेंसियों के साथ समन्वय करना है। महेश दीक्षित की नियुक्ति को आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था में निरंतरता और अनुभव के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आईबी में लंबे समय तक कार्य करने और संवेदनशील क्षेत्रों में जिम्मेदारी संभालने के कारण वे एजेंसी की कार्यप्रणाली और सुरक्षा चुनौतियों से भली-भांति परिचित हैं। आने वाले समय में महेश दीक्षित के नेतृत्व में इंटेलिजेंस ब्यूरो की प्राथमिकता आतंरिक सुरक्षा तंत्र को और मजबूत करने, आधुनिक तकनीकी निगरानी क्षमता बढ़ाने और राज्यों के साथ खुफिया समन्वय को अधिक प्रभावी बनाने पर रह सकती है।
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राष्ट्रीय न्यूज़: नई दिल्ली। देश में 1 जुलाई से पासपोर्ट बनवाना और री-इश्यू कराना महंगा हो जाएगा। केंद्र सरकार ने पासपोर्ट सेवाओं की फीस में बढ़ोतरी करने का निर्णय लिया है। नई दरें लागू होने के बाद सामान्य और तत्काल दोनों श्रेणियों में आवेदन करने वाले लोगों को अधिक शुल्क देना होगा। नई फीस संरचना के अनुसार, 36 पेज वाले सामान्य पासपोर्ट की फीस 1500 रुपए से बढ़ाकर 2500 रुपए कर दी गई है। वहीं, तत्काल पासपोर्ट के लिए अब 5000 रुपए शुल्क देना होगा, जो पहले 3500 रुपए था। इसका सीधा असर उन आवेदकों पर पड़ेगा, जो नया पासपोर्ट बनवाना चाहते हैं या पुराने पासपोर्ट को री-इश्यू कराना चाहते हैं। 60 पेज वाले पासपोर्ट की फीस भी बढ़ी सरकार ने 60 पेज वाले पासपोर्ट की फीस में भी बढ़ोतरी की है। अब 60 पेज वाले सामान्य पासपोर्ट के लिए 2000 रुपए के स्थान पर 3500 रुपए शुल्क देना होगा। वहीं, तत्काल श्रेणी में 60 पेज वाले पासपोर्ट की फीस 4000 रुपए से बढ़ाकर 6000 रुपए कर दी गई है। यह बढ़ोतरी उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण है, जिन्हें अधिक यात्रा के कारण ज्यादा पेज वाले पासपोर्ट की जरूरत होती है। व्यापारियों, लगातार विदेश यात्रा करने वाले पेशेवरों और नियमित अंतरराष्ट्रीय यात्रियों पर इसका अधिक प्रभाव पड़ेगा। 14 साल बाद बदली फीस मंत्रालय ने पासपोर्ट नियम, 1980 में संशोधन के बाद नई दरों को लेकर गजट नोटिफिकेशन जारी किया है। पासपोर्ट फीस में यह बढ़ोतरी करीब 14 साल बाद की गई है। इससे पहले वर्ष 2012 में पासपोर्ट फीस में बदलाव किया गया था। फीस बढ़ोतरी के बाद 1 जुलाई से नए आवेदन, री-इश्यू और तत्काल सेवा के लिए आवेदन करने वाले लोगों को संशोधित शुल्क के अनुसार भुगतान करना होगा। जिन आवेदकों ने पहले से आवेदन प्रक्रिया शुरू कर रखी है, उन्हें लागू नियमों और भुगतान स्थिति के अनुसार संबंधित पासपोर्ट सेवा केंद्र से जानकारी लेनी होगी। आवेदकों पर बढ़ेगा आर्थिक भार पासपोर्ट फीस बढ़ने से आम आवेदकों पर आर्थिक भार बढ़ेगा। विशेष रूप से तत्काल पासपोर्ट बनवाने वाले लोगों को अब अधिक राशि खर्च करनी होगी। हालांकि, सरकार की ओर से पासपोर्ट सेवाओं को और अधिक सुगम, समयबद्ध और डिजिटल प्रक्रिया से जोड़ने पर भी लगातार काम किया जा रहा है। पासपोर्ट बनवाने वाले लोगों को सलाह दी जाती है कि वे आवेदन से पहले पासपोर्ट सेवा पोर्टल पर शुल्क, दस्तावेज और अपॉइंटमेंट से जुड़ी जानकारी अवश्य जांच लें। नई फीस लागू होने के बाद पुराने शुल्क के आधार पर आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे।
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गुप्त ध्वनि किरणों के साथ ओशो पर किसने हमला किया?...
गुप्त ध्वनि किरणों के साथ ओशो पर किसने हमला किया?... * ओशो के निजी दंत चिकित्सक देवगेट ओशो की मृत्यु से 4 दिन पहले हुई घटनाओं के बारे में बात करते हैं (शरीर को छोड़कर)... * 15 aजनवरी, 1990 को, मेरे जन्मदिन पर, मुझे शुन्यो से एक संदेश मिला: ओशो चाहते थे कि मैं उनके पेट का एक्स-रे ले। हम दंaत कक्ष में मिले। ओशो का शरीर पतला और बेकार लग रहा था, फिर भी मैंने उसे शक्तिशाली रूप से उपस्थित महसूस किया। मुझे शुन्यो से पता था कि वह हर दिन बीस घंटे से अधिक सो रहा था, हर शाम बुद्ध हॉल में कुछ क़ीमती मिनटों के लिए अपनी शारीरिक ऊर्जा को बचा रहा था। ओशो नेa मुझे बताया कि उसके हमलावरों की आवाज़ से उसका शरीर बहुत कमजोर हो गया था। उन्होंने कहा कि उनमें से शायद तीन, दो पुरुष और एक महिला, ध्वनि तरंगों पर ध्यानaa केंद्रित करने और अपने शरीर को लक्षित करने के लिए एक विशेष गठन में बैठे थे। यहां भारत में प्राचीन योगिक प्रथाएं हैं जहां लोग कुछ ध्वनियों, कुछ मंत्रों को जानते हैं, जो लोगों को नुक़सान पहुंचाने के लिए ध्वनि को केंद्रित कर सकते हैं। लेकिन मुझ पर हमला करaaने वाले ये लोग भारतीय नहीं हैं। वे वही लोग हैं जिन्होंने अमेरिका में पहले मुझे मारने की कोशिश की थी। वे तब सफल नहीं हो सके, और अब वे जो शुरू किया उसे पूरा कर ने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने मुझे बोलने से रोकने के लिए ज़हर की कोशिश की लेकिन मैं जारी रखने में कामयाब रहा। अब, पांच साल बाद वे वापस आ गए हैं। उन्होंने पहले बुद्ध हॉल में अपनी ध्वनि किरणों का उपयोग मेरे दिमाग़ पर हमला करने के लिए किया लेकिन मैं अपने दिमाग़ में नहीं हूं। मैं एक नो-मन हूं और उनकी आवाज़ का बहुत कम प्रभाव था। इसलिए उन्होंने अपनी रणनीति बदल दी, अब वे मेरे शरीर पर हमला कर रहे हैं। मेरे गरीब शरीर को उनकी किरणों से कोई सुरक्षा नहीं है। हर दिन यह कमजोर होता जाता है। वे मुझे मार नहीं सकते लेकिन वे मेरे शरीर को नुक़सान पहुंचा सकते हैं। अभी मेरे जिगर के क्षेत्र में बहुत दर्द हो रहा है। क्या आप इसे एक्स-रे कर सकते हैं? दुख की बात है, मैंने समझाया कि मेरी दंत एक्स-रे मशीन शायद अपर्याप्त थी क्योंकि यह केवल दांतों और जबड़े की छोटी फिल्में ले सकती थी, लेकिन हम कोशिश कर सकते थे। अमृतो को हमारे पास सबसे बड़ी एक्स-रे फ़िल्म मिली, जबकि मैंने इसकी बीम को चौड़ा करने के लिए डेंटल एक्स-रे मशीन के साथ जिग्गल किया। मैंने वह करने की कोशिश की जो ओशो पूछ रहा था। मैंने उसके जिगर के क्षेत्र की एक तस्वीर ली और फिर दंत विकास में बड़ी फ़िल्म विकसित करने में कामयाब रहा टैंक जिसे छोटी इंट्रा-ओरल डेंटल फ़िल्मों के लिए डिज़ाइन किया गया था, लेकिन परिणामी छवि धुंधली और अस्पष्ट थी। यह आख़िरी बार था जब मैंने ओशो को उसके भौतिक शरीर में देखा था। 19 जनवरी को शाम 4:30 बजे थे: मैं अपनी प्रेमिका के साथ अपने कमरे में था जब दरवाजे पर एक ज़रूरी दस्तक हुई। मनीषा, पीला और तनावग्रस्त दिख रही थी, ने पूछा कि क्या वह मेरे कमरे के फ़ोन का उपयोग कर सकती है। मुझे पता था कि वह केवल पूछेगी कि क्या कुछ असामान्य हो रहा है। अस्थायी सचिव के रूप में कार्य करते हुए वह इनर सर्कल के सदस्यों को फ़ोन कर रही थी और उन्हें कृष्णा हाउस में एक असाधारण बैठक में तुरंत आने के लिए कह रही थी। ओशो ने पंद्रह महीने पहले इक्कीस लोगों की एक कम्यून प्रबंधन टीम की स्थापना की थी, इसे इनर सर्कल का नाम दिया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका काम कम्यून के दिन-प्रतिदिन चलने का प्रबंधन करना था। मैं मूल चयन में नहीं था, लेकिन कुछ महीने बाद मुझे शामिल होने के लिए कहा गया था। फ़ोन करने के बाद, मनीषा ने कहा, “गीट, तुमने सुना कि मैं दूसरों को क्या बता रहा था। बैठक कृष्णा हाउस की छत पर ब्लू रूम में है। क्या आप वहां तुरंत जा सकते हैं?” इससे पहले कि मैं कोई सवाल पूछ पाता, वह जल्दी से गलियारे में चली गई, स्पष्ट रूप से एक और महत्वपूर्ण कार्य में शामिल थी। मैंने दोपहर के अधिकांश समय अजीब तरह से विपुल महसूस किया था। बाहरी मामलों की उथल-पुथल के बावजूद मैं कई दिनों से उत्साहित महसूस कर रहा था। मेरे दिल में ख़ुशी का एक अकथनीय नृत्य था। अंदर से मुझे उत्साह, आनंद महसूस हुआ। ब्लू रूम में पहुंचने पर, मैंने देखा कि अधिकांश इनर सर्कल पहले से ही वहां इकट्ठा हो चुके थे। माहौल तनावपूर्ण और तनावपूर्ण था। मेरा अपना उत्साह जगह से बाहर लग रहा था। मैं बैठ गया और इंतज़ार किया। कुछ मिनटों के बाद जयेश ने अमृतो के साथ प्रवेश किया। यह देखने के लिए संक्षेप में चारों ओर देखते हुए कि हम सभी मौजूद हैं, उन्होंने एक दृढ़, हालांकि शांत आवाज़ में कहा, “मुझे लगता है कि इसे लपेटने का कोई तरीक़ा नहीं है। मैं आपको सीधे बताऊंगा। ओशो ने कुछ समय पहले लगभग 4:45 बजे अपना शरीर छोड़ दिया था दोपहर।” स्तब्ध, मैंने अपनी घड़ी को देखा। शाम के 5:15 बजे थे। उपस्थित दो या तीन लोग रोने लगे। जयेश ने जल्दी से बीच में टोका, “देखो, मुझे तुम्हारी सारी मदद की ज़रूरत है। कृपया अभी तक अलग न हों। मुझे आप सभी की ज़रूरत है कि ओशो के भेजने को उतना ही सुंदर बनाने में मदद करें जितना वह हकदार है। यह आख़िरी चीज है जो हम उसके लिए कर सकते हैं भौतिक शरीर, चलो इसे अद्भुत बनाते हैं। उसने मुझे ठीक से बताया कि वह कैसे चाहता है कि ऐसा हो। उसने मुझे हर चीज के लिए विस्तृत निर्देश दिए, लेकिन मुझे यहां हर किसी की मदद की ज़रूरत है।” जयेश के शब्दों को सुनकर मेरा पहले का उत्साह सदमे में बदल गया था, लेकिन मैंने ओशो को अपने लोगों के साथ अपने अंतिम उत्सव का आनंद लेने में सक्षम बनाने के लिए हमारी मदद के लिए जयेश की अपील को स्पष्ट रूप से सुना। जैसे ही मैंने ब्लू रूम छोड़ा, जयेश ने मुझे बताया कि ओशो ने अनुरोध किया था कि मैं उनके शरीर को जलते हुए घाटों तक ले जाने के लिए एक वाहक बनूं। गतिविधि और भ्रमित भावनाओं के एक धुंध में मुझे याद है कि ओशो के इस अंतिम उपहार के लिए बेहद आभारी महसूस कर रहा था। - स्वामी देवगीत पुस्तक : ओशो - द फर्स्ट बुद्ध इन द डेंटल चेयर अध्याय: 17 अध्याय का नाम: ओशो का अंतिम दंत नाटक: अधिनियम V अंतिम सुनहरी झलक
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