राजस्थान न्यूज़: जयपुर। जयपुर की सेंट्रल जेल में हनुमान चालीसा पढ़ने को लेकर विचाराधीन बंदियों के बीच विवाद हो गया। विवाद इतना बढ़ा कि दोनों पक्षों में मारपीट हो गई और एक बंदी घायल हो गया। आरोप है कि हनुमान चालीसा का पाठ कर रहे बंदी पर दूसरे बंदी ने नुकीली वस्तु से हमला कर दिया। घटना के बाद जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया। घायल बंदी का तत्काल उपचार कराया गया। मामले की सूचना मिलने पर लालकोठी थाना पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पाठ करने पर टोका, फिर बढ़ा विवाद शुरुआती जांच के अनुसार, जेल में एक विचाराधीन बंदी हनुमान चालीसा का पाठ कर रहा था। इसी दौरान दूसरे बंदी ने उसे टोका, जिसके बाद दोनों के बीच कहासुनी शुरू हो गई। कुछ ही देर में विवाद बढ़ गया और दोनों पक्षों में मारपीट हो गई। आरोप है कि विवाद के दौरान एक बंदी ने नुकीली वस्तु से हमला कर दिया, जिससे दूसरा बंदी घायल हो गया। जेल स्टाफ ने तत्काल हस्तक्षेप कर स्थिति को नियंत्रण में किया। लालकोठी थाने में मामला दर्ज लालकोठी थानाधिकारी श्याम सुंदर शर्मा ने बताया कि मामले में एफआईआर दर्ज कर ली गई है। पुलिस पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है। जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। पुलिस घायल बंदी के बयान, जेल प्रशासन की रिपोर्ट और मौके पर मौजूद अन्य बंदियों की जानकारी के आधार पर घटना की वास्तविक स्थिति पता लगाने का प्रयास कर रही है। नुकीली वस्तु जेल में कैसे पहुंची, जांच का विषय पुलिस यह भी जांच कर रही है कि कथित हमले में इस्तेमाल की गई नुकीली वस्तु जेल परिसर में कैसे पहुंची। जेल जैसे संवेदनशील और सुरक्षित परिसर में इस तरह की वस्तु मिलना सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। घटना के समय मौजूद बंदियों और जेल स्टाफ से भी पूछताछ की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि विवाद की वास्तविक वजह केवल पाठ को लेकर थी या इसके पीछे कोई पुराना विवाद भी था। जेल प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल सेंट्रल जेल में हुई इस घटना के बाद जेल प्रशासन की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं। विचाराधीन बंदियों के बीच विवाद का अचानक हिंसक रूप लेना और नुकीली वस्तु से हमला होना गंभीर मामला माना जा रहा है।फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
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राजस्थान न्यूज़: जयपुर। यमुना जल समझौते के बाद मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा मंगलवार को जयपुर लौटे। जयपुर एयरपोर्ट पहुंचने पर भाजपा पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने उनका भव्य स्वागत किया। मुख्यमंत्री ई-बस में सवार होकर रोड शो करते हुए भाजपा मुख्यालय पहुंचे, जहां पार्टी कार्यकर्ताओं ने उत्साह के साथ उनका अभिनंदन किया। रोड शो के दौरान जवाहर सर्किल, गांधी सर्किल, रामबाग सर्किल और भाजपा कार्यालय सहित कई स्थानों पर स्वागत मंच बनाए गए। जवाहर सर्किल पर कार्यकर्ताओं ने मटकों के साथ मुख्यमंत्री का स्वागत किया। मुख्यमंत्री के काफिले में चार ई-बसें शामिल रहीं। पहली बस में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ सहित अन्य नेता मौजूद रहे। राहुल गांधी पर सीएम का तंज भाजपा मुख्यालय में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तंज कसते हुए कहा कि राहुल गांधी कहते हैं कि वे आलू से सोना बनाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने शेखावाटी के लोगों से कहा था कि हम यह तो नहीं कर सकते, लेकिन हम यमुना का पानी जरूर लेकर आएंगे। उसके बाद हमारा किसान जरूर सोना पैदा करेगा। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि यमुना जल समझौता केवल एक परियोजना नहीं, बल्कि शेखावाटी और राजस्थान के जल भविष्य से जुड़ा ऐतिहासिक निर्णय है। राजस्थान को पानी मिलेगा तो प्रदेश आगे बढ़ेगा: मुख्यमंत्री जयपुर एयरपोर्ट पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि आज का दिन राजस्थान के लिए ऐतिहासिक है। उन्होंने कहा कि जब प्रदेश में भाजपा सरकार बनी, तब सबसे पहले राजस्थान के विकास का रोडमैप तैयार किया गया। इसमें सबसे बड़ी जरूरत पानी की सामने आई। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि राजस्थान को पानी मिलेगा तो प्रदेश आगे बढ़ेगा। किसानों को पानी चाहिए, उद्योगों को पानी चाहिए और आमजन को पीने के लिए शुद्ध पानी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश की कई जल परियोजनाएं 40 से 50 वर्षों से लंबित थीं, जिन पर सरकार ने पिछले ढाई वर्षों में काम किया है। ईआरसीपी, यमुना जल समझौता और देवास परियोजना पर काम मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि ईआरसीपी, यमुना जल समझौता और देवास परियोजना सहित कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं को आगे बढ़ाया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य राजस्थान को जल-सुरक्षित बनाना है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि यमुना जल समझौते से शेखावाटी के सीकर, चूरू और झुंझुनूं जिलों को बड़ी राहत मिलेगी। लंबे समय से पानी की कमी झेल रहे क्षेत्रों में पेयजल उपलब्धता मजबूत होगी और किसानों को भी इसका लाभ मिलेगा।
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राजस्थान न्यूज़: सवाई माधोपुर। पुलिस की वर्दी केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखने का प्रतीक नहीं है, बल्कि इसके पीछे उन हजारों परिवारों का विश्वास और त्याग भी जुड़ा होता है, जो अपने प्रियजन को समाज की सुरक्षा के लिए समर्पित करते हैं। इसी मानवीय संवेदना को ध्यान में रखते हुए सवाई माधोपुर पुलिस अधीक्षक ज्येष्ठा मैत्रेयी ने पुलिस कल्याण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है। एसपी ज्येष्ठा मैत्रेयी की पहल पर सवाई माधोपुर जिला पुलिस में ‘अक्षय फंड’ की शुरुआत की जा रही है। इस फंड के माध्यम से किसी पुलिसकर्मी के आकस्मिक निधन पर उसके परिजनों को तत्काल ₹3 लाख की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। कांस्टेबल कुंजीलाल की स्मृति से जन्मी पहल एसपी ज्येष्ठा मैत्रेयी ने बताया कि हाल ही में सवाई माधोपुर पुलिस लाइन में कार्यरत कांस्टेबल कुंजीलाल के आकस्मिक निधन ने पूरे पुलिस परिवार को भावुक कर दिया। इस घटना ने यह महसूस कराया कि ऐसी परिस्थितियों में पीड़ित परिवार को तत्काल आर्थिक संबल देने के लिए एक स्थायी और व्यवस्थित व्यवस्था होनी चाहिए। इसी संवेदनशील सोच से ‘अक्षय फंड’ की परिकल्पना की गई। यह पहल इस विश्वास को मजबूत करेगी कि किसी पुलिसकर्मी के साथ अप्रत्याशित घटना होने पर उसका परिवार अकेला नहीं रहेगा। एक दिन के वेतन से बनेगा सुरक्षा कवच ‘अक्षय फंड’ का गठन सवाई माधोपुर जिला पुलिस के अधिकारियों और कर्मचारियों के एक दिन के वेतन के स्वैच्छिक अंशदान से किया जाएगा। जिले में वर्तमान में करीब 1400 पुलिसकर्मी कार्यरत हैं और अनुमान है कि इस फंड में लगभग ₹16 लाख की राशि एकत्र हो सकती है। यह अंशदान केवल आर्थिक सहयोग नहीं, बल्कि अपने साथी और उसके परिवार के प्रति अपनत्व, उत्तरदायित्व और एकजुटता का प्रतीक होगा। संकट की घड़ी में तत्काल सहायता इस फंड से किसी पुलिसकर्मी के आकस्मिक निधन पर उसके परिजनों को ₹3 लाख की सहायता तुरंत उपलब्ध कराई जाएगी। यह राशि शोकाकुल परिवार को कठिन समय में प्रारंभिक आर्थिक राहत देगी। एसपी ज्येष्ठा मैत्रेयी की यह पहल पुलिसकर्मियों में यह भरोसा भी जगाएगी कि कठिन परिस्थितियों में उनका पुलिस परिवार उनके परिजनों के साथ खड़ा रहेगा।\ आत्मनिर्भर और व्यावहारिक व्यवस्था इस योजना की विशेषता इसकी आत्मनिर्भर कार्यप्रणाली है। फंड बनने के बाद जब तक राशि सहायता के रूप में उपयोग नहीं होती, तब तक कर्मचारियों के वेतन से दोबारा कटौती नहीं की जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर ही फिर से एक दिन के वेतन का स्वैच्छिक अंशदान लिया जाएगा। इस व्यवस्था से योजना निरंतर चलती रहेगी और पुलिसकर्मियों पर अनावश्यक आर्थिक भार भी नहीं पड़ेगा। पुलिस परिवारों का बढ़ेगा मनोबल ‘अक्षय फंड’ केवल आर्थिक सहायता की योजना नहीं है, बल्कि यह पुलिस संगठन में विश्वास, आत्मीयता और पारिवारिक भावना को मजबूत करने वाली पहल है। इससे पुलिसकर्मी अपने कर्तव्य का निर्वहन और अधिक निश्चिंत होकर कर सकेंगे। इस पहल से यह संदेश जाएगा कि पुलिस विभाग अपने कर्मियों को केवल कर्मचारी नहीं, बल्कि परिवार का सदस्य मानता है। प्रदेशभर के लिए बन सकता है मॉडल एसपी ज्येष्ठा मैत्रेयी की यह पहल पुलिस महकमे में सराहनीय कदम मानी जा रही है। यह सवाई माधोपुर जिला पुलिस का कल्याणकारी प्रयास होने के साथ-साथ ऐसा मॉडल भी है, जिसे भविष्य में राजस्थान के अन्य जिलों में भी अपनाया जा सकता है। ‘अक्षय फंड’ संवेदना, सहयोग और सामाजिक सुरक्षा का ऐसा संगम है, जो खाकी की मानवीय छवि को और मजबूत करता है। यह पहल बताती है कि पुलिस केवल कानून की संरक्षक नहीं, बल्कि अपने परिवार की संवेदनाओं की भी सच्ची प्रहरी है।
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अजमेर न्यूज़: 1100 वर्ष पूर्व स्थापित मंदिर की बड़ी है मान्यता, दूर दराज से पहुंचते हैं हजारों श्रद्धालु
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अजमेर न्यूज़: 1968 से कस्बे की धार्मिक संस्था श्री ब्रह्म पुष्कर सेवा संघ कर रही है इस अनूठी परंपरा का निर्वहन
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अजमेर न्यूज़: 10 टीमें 8 - 8 वार्डो में जाकर घूम रही गायों का करेंगीं प्राथमिक उपचार
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राष्ट्रीय न्यूज़: जयपुर/नई दिल्ली। यमुना जल बंटवारे को लेकर राजस्थान और हरियाणा के बीच 1994 के समझौते को लागू करने से जुड़े लंबे विवाद के समाधान की दिशा में बड़ी प्रगति हुई है। करीब 32 साल बाद दोनों राज्यों के बीच इस मुद्दे पर सहमति बन गई है। सूत्रों के अनुसार, सोमवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी समझौते को लागू करने के लिए मेमोरंडम ऑफ एग्रीमेंट यानी एमओए पर हस्ताक्षर कर सकते हैं। इस दौरान केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल भी मौजूद रहेंगे। समझौते के प्रमुख बिंदुओं पर रविवार को दोनों राज्यों के अधिकारियों के बीच दिल्ली स्थित बीकानेर हाउस में मैराथन बैठक हुई। करीब दो घंटे चली इस बैठक में राजस्थान और हरियाणा के बीच कई अहम विषयों पर सहमति बनी। इस समझौते को शेखावाटी सहित राजस्थान के जल संकटग्रस्त क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बीकानेर हाउस में दो घंटे चली बैठक रविवार को हुई बैठक में राजस्थान की ओर से मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास, एसीएस अभय कुमार और जल संसाधन विभाग के चीफ इंजीनियर भुवन भास्कर मौजूद रहे। वहीं हरियाणा की ओर से एसीएस अनुराग अग्रवाल और चीफ इंजीनियर वीरेन्द्र सिंह बैठक में शामिल हुए। हरियाणा के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक से जुड़े। बैठक में यमुना जल समझौते के क्रियान्वयन, पाइपलाइन मार्ग, जल प्रवाह, वित्तीय व्यय, परियोजना संचालन और भविष्य में अन्य जल स्रोतों से मिलने वाले पानी के उपयोग पर चर्चा हुई। अधिकारियों ने तकनीकी और प्रशासनिक बिंदुओं पर सहमति बनाते हुए एमओए के लिए आधार तैयार किया। हरियाणा ने इन स्थानों से मांगा पानी समझौते के तहत हरियाणा ने कई स्थानों से पानी लेने की मांग रखी है। इसमें दानोदा कलां से 10 क्यूसेक, नयागांव के पास सारसौद डिस्ट्रीब्यूटी से 80 क्यूसेक, चौधरी माइनर पर हिंदवान से 70 क्यूसेक, सरसना माइनर पर पाट्टन से 20 क्यूसेक, सेगा नरार से 2 क्यूसेक, कैथल टाउन के पास पेओदा से 43 क्यूसेक और कैथल टाउन के पास चांदना मानस रोड से 41.83 क्यूसेक पानी की मांग शामिल है। इसके अतिरिक्त एक अन्य स्थान से भी पानी लिया जाएगा। हरियाणा हाश्यावास के तीन रिजर्वायर में से एक से आवश्यकता के अनुसार पानी ले सकेगा। इन बिंदुओं को लेकर दोनों राज्यों के बीच तकनीकी सहमति बनने की जानकारी सामने आई है। हाईब्रिड मोड पर राजस्थान पहुंचेगा पानी हथिनी कुंड बैराज से राजगढ़, चूरू के जलाशय तक पानी पहुंचाने के लिए पाइपलाइन बनाई जाएगी। हथिनी कुंड और राजगढ़ के बीच भूतल स्तर में करीब 110 मीटर का अंतर है और राजगढ़ अपेक्षाकृत नीचा है। ऐसे में सामान्य स्थिति में पानी हथिनी कुंड से गुरुत्वाकर्षण के प्रवाह से राजगढ़ तक पहुंच सकेगा। हालांकि, इस पाइपलाइन को हाईब्रिड मोड पर विकसित किया जाएगा। इसके तहत पम्पिंग स्टेशन भी बनाए जाएंगे, ताकि पानी की उपलब्धता कम होने या प्रवाह में कमी आने पर पंपिंग सिस्टम के माध्यम से पानी राजगढ़ तक पहुंचाया जा सके। एसपीवी कंपनी करेगी परियोजना का संचालन इस परियोजना के संचालन के लिए पहले संयुक्त बोर्ड का प्रस्ताव था, लेकिन अब दोनों राज्य स्पेशल पर्पज व्हीकल यानी एसपीवी कंपनी बनाने पर सहमत हो गए हैं। एसपीवी के गठन और संचालन से जुड़े अन्य बिंदु आगे तय किए जाएंगे। यही कंपनी परियोजना के क्रियान्वयन और संचालन की जिम्मेदारी संभालेगी। परियोजना का पूरा आर्थिक व्यय राजस्थान सरकार वहन करेगी। हालांकि, इस व्यय में केंद्र सरकार से भी सहयोग लेने का प्रयास किया जाएगा। भविष्य में किशाऊ, लखवार और रेणुकाजी से राजस्थान के हिस्से का पानी भी इन्हीं पाइपलाइनों के जरिए प्रदेश तक पहुंचाया जा सकेगा। राजस्थान को मिलेगा 1917 क्यूसेक पानी राजस्थान को 1994 के समझौते के आधार पर ही पानी मिलेगा। बताया जा रहा है कि हरियाणा ने समझौते के बाद बदली परिस्थितियों और वर्तमान मांग के अनुसार बंटवारे का प्रस्ताव रखा था, लेकिन राजस्थान की ओर से मूल समझौते को ही फिलहाल लागू करने का प्रस्ताव रखा गया। इस पर दोनों राज्यों के बीच सहमति बनी। राजस्थान को 1917 क्यूसेक पानी मिलने की बात सामने आई है। हथिनी कुंड से चूरू के हाश्यावास तक तीन पाइपलाइन डाली जाएंगी। प्रत्येक पाइपलाइन का व्यास 3.6 मीटर होगा। यह पानी पश्चिमी यमुना कैनाल से उपलब्ध कराया जाएगा। हरियाणा के पांच जिलों से गुजरेगी पाइपलाइन प्रस्तावित पाइपलाइन हरियाणा के यमुनानगर, कुरुक्षेत्र, कैथल, जींद और हिसार जिलों से होकर गुजरेगी। पाइपलाइन मार्ग में आवश्यक भूमि अवाप्ति की जाएगी। मंजूरी के बाद वित्तीय संसाधन जुटाए जाएंगे और निर्माण कार्य के लिए टेंडर तथा वर्क ऑर्डर जारी किए जाएंगे। परियोजना को मंजूरी मिलने के बाद इसका निर्माण कार्य शुरू होगा। जल संकट से जूझ रहे राजस्थान के इलाकों के लिए यह परियोजना दीर्घकालिक राहत देने वाली मानी जा रही है। विशेष रूप से चूरू, झुंझुनूं, सीकर और शेखावाटी क्षेत्र में पेयजल और जल उपलब्धता को लेकर यह समझौता महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। 32 साल पुराने विवाद के समाधान की उम्मीद यमुना जल बंटवारे को लेकर राजस्थान और हरियाणा के बीच 1994 से विवाद चला आ रहा था। लंबे समय से राजस्थान अपने हिस्से के पानी को लेकर समझौते के क्रियान्वयन की मांग कर रहा था। अब दोनों राज्यों के बीच एमओए की तैयारी को इस विवाद के समाधान की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। यदि सोमवार को एमओए पर हस्ताक्षर होते हैं, तो राजस्थान के लिए यमुना जल समझौते के क्रियान्वयन का रास्ता साफ हो जाएगा। इसके बाद परियोजना की वित्तीय, तकनीकी और निर्माण संबंधी प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाया जाएगा।
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राष्ट्रीय न्यूज़: नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ के 135वें एपिसोड में भारत की रक्षा क्षमता, स्वदेशी विमान निर्माण, योग, समाजसेवा, खेल और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कई प्रेरक उदाहरणों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि समुद्र से लेकर आसमान तक भारत सुरक्षित है। प्रधानमंत्री ने हाल में सफलतापूर्वक परीक्षण की गई जमीन से हवा में मार करने वाली मिसाइलों का जिक्र करते हुए देश की बढ़ती रक्षा शक्ति को आत्मनिर्भर भारत की उपलब्धि बताया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जून महीने में देश ने विमानन क्षेत्र में भी एक बड़ी सफलता हासिल की है। मेड इन इंडिया अभियान के तहत तैयार C-295 विमान ने अपनी पहली सफल उड़ान पूरी कर ली है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में ऐसे 40 विमान भारत में ही बनाए जा रहे हैं। यह उपलब्धि भारत की स्वदेशी निर्माण क्षमता और रक्षा उत्पादन में बढ़ती आत्मनिर्भरता को दर्शाती है। नौसेना में शामिल स्वदेशी जहाजों का किया उल्लेख प्रधानमंत्री ने कहा कि हाल ही में उन्हें कोलकाता में नौसेना से जुड़े एक कार्यक्रम में शामिल होने का अवसर मिला। वहां INS दूनागिरी, INS संशोधक और INS अग्रय को भारतीय नौसेना के बेड़े में शामिल किया गया। उन्होंने कहा कि इन जहाजों की डिजाइन से लेकर मैन्युफैक्चरिंग तक सब कुछ स्वदेशी है। पीएम मोदी ने कहा कि भारत आज रक्षा क्षेत्र में तेजी से आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहा है। स्वदेशी तकनीक, भारतीय इंजीनियरिंग और देश के युवाओं की प्रतिभा के दम पर भारत समुद्र, जमीन और आसमान में अपनी सुरक्षा क्षमता को लगातार मजबूत कर रहा है। योगासन चैम्पियनशिप में भारत ने जीते 114 पदक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस से जुड़े कार्यक्रमों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस बार दुनिया के 2500 से अधिक स्थानों पर योग के कार्यक्रम आयोजित हुए। अहमदाबाद में आयोजित ‘विश्व योगासन चैम्पियनशिप’ की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि भारत ने इसमें शानदार प्रदर्शन किया। प्रधानमंत्री ने बताया कि भारत ने इस चैम्पियनशिप में कुल 114 पदक जीते, जिनमें 102 गोल्ड मेडल शामिल हैं। इस प्रदर्शन के साथ भारत पदक तालिका में पहले स्थान पर रहा। उन्होंने कहा कि योग अब केवल स्वास्थ्य का माध्यम नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक पहचान और वैश्विक योगदान का प्रतीक बन चुका है। महाराष्ट्र के पेठकर परिवार की सराहना ‘मन की बात’ में प्रधानमंत्री मोदी ने महाराष्ट्र के नांदेड़ जिले के बहादुरपुरा गांव के पेठकर परिवार का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि इस परिवार ने घर में विवाह के अवसर पर अपने गांव के लगभग साढ़े तीन हजार लोगों के लिए दुर्घटना बीमा की व्यवस्था की। हर व्यक्ति को एक लाख रुपए का बीमा कवर दिया गया। प्रधानमंत्री ने कहा कि सामाजिक अवसरों को समाजहित से जोड़ने की यह पहल प्रेरणादायक है। ऐसे उदाहरण दिखाते हैं कि समाज में सकारात्मक सोच और सामूहिक जिम्मेदारी की भावना कैसे बड़े बदलाव ला सकती है। नगालैंड की बेबी लीग और विमेन फुटसल लीग को बताया प्रेरक प्रधानमंत्री मोदी ने नगालैंड में चल रही दो खेल लीगों का उल्लेख करते हुए कहा कि ये सभी को प्रेरित कर सकती हैं। उन्होंने नगालैंड बेबी लीग का जिक्र किया, जिसमें 5 से 12 वर्ष तक के बच्चे भाग लेते हैं। यह लीग बच्चों की रफ्तार, प्रतिभा और खेल भावना को प्रोत्साहित करती है और तीन वर्ष पूरे कर चुकी है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने नगालैंड विमेन फुटसल लीग की भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि फुटसल को आम भाषा में इंडोर फुटबॉल कहा जाता है। इसमें पांच खिलाड़ी होते हैं और खेल छोटे मैदान पर तेज गति से खेला जाता है। इस खेल में खिलाड़ियों को तेजी से निर्णय लेने होते हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐसी लीगों से युवाओं और महिलाओं में खेल संस्कृति को बढ़ावा मिलता है।असम के हरगिला पक्षी और ‘हरगिला आर्मी’ की कहानी प्रधानमंत्री मोदी ने असम के दुर्लभ पक्षी ‘हरगिला’ का जिक्र करते हुए पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि हरगिला प्रकृति को स्वच्छ रखने में अहम भूमिका निभाता है, लेकिन असम के कुछ इलाकों में लंबे समय तक इसे अशुभ माना जाता था। लोग इसे अपने आसपास देखना पसंद नहीं करते थे और कई बार उन पेड़ों को भी काट दिया जाता था, जिन पर हरगिला के घोंसले होते थे। प्रधानमंत्री ने जीव-विज्ञानी पूर्णिमा देवी बर्मन के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि पूर्णिमा देवी ने लोगों के मन में बैठी गलत धारणा को बदलने का संकल्प लिया। उन्होंने महिलाओं और ग्रामीणों को विज्ञान के आधार पर समझाया। धीरे-धीरे महिलाएं इस अभियान से जुड़ती गईं और एक बड़ा बदलाव शुरू हुआ। पीएम मोदी ने कहा कि जिस पक्षी को कभी अशुभ मानकर भगाया जाता था, वही गांवों की पहचान बनने लगा। हजारों ग्रामीण महिलाएं हरगिला को बचाने के लिए आगे आईं और आज वे ‘हरगिला आर्मी’ के नाम से जानी जाती हैं। उन्होंने कहा कि यह उदाहरण दिखाता है कि सही जानकारी और जागरूकता से वर्षों पुरानी सोच भी बदली जा सकती है। नालंदा विश्वविद्यालय ने शास्त्रार्थ परंपरा को किया जीवंत प्रधानमंत्री मोदी ने नालंदा विश्वविद्यालय का उल्लेख करते हुए कहा कि इसने शास्त्रार्थ की प्राचीन भारतीय परंपरा को फिर से जीवंत किया है। उन्होंने कहा कि शास्त्रार्थ केवल अपनी बात रखने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह वाद-संवाद और मंथन की अनुशासित प्रक्रिया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि शास्त्रार्थ में तर्क और तथ्य के साथ अपनी बात रखना जरूरी होता है। साथ ही दूसरों के विचारों को धैर्य से सुनने और समझने की सीख भी इसी प्रक्रिया से मिलती है। उन्होंने प्रसन्नता जताई कि नालंदा विश्वविद्यालय ने शास्त्रार्थ को अपने दीक्षांत समारोह का हिस्सा बनाया। प्रधानमंत्री मोदी ने ‘मन की बात’ में कहा कि भारत की शक्ति केवल रक्षा, विज्ञान और तकनीक तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज की सकारात्मक पहल, खेल, योग, पर्यावरण संरक्षण और ज्ञान परंपरा भी देश की बड़ी ताकत हैं।
Read more 28th Jun 2026
गुप्त ध्वनि किरणों के साथ ओशो पर किसने हमला किया?...
गुप्त ध्वनि किरणों के साथ ओशो पर किसने हमला किया?... * ओशो के निजी दंत चिकित्सक देवगेट ओशो की मृत्यु से 4 दिन पहले हुई घटनाओं के बारे में बात करते हैं (शरीर को छोड़कर)... * 15 aजनवरी, 1990 को, मेरे जन्मदिन पर, मुझे शुन्यो से एक संदेश मिला: ओशो चाहते थे कि मैं उनके पेट का एक्स-रे ले। हम दंaत कक्ष में मिले। ओशो का शरीर पतला और बेकार लग रहा था, फिर भी मैंने उसे शक्तिशाली रूप से उपस्थित महसूस किया। मुझे शुन्यो से पता था कि वह हर दिन बीस घंटे से अधिक सो रहा था, हर शाम बुद्ध हॉल में कुछ क़ीमती मिनटों के लिए अपनी शारीरिक ऊर्जा को बचा रहा था। ओशो नेa मुझे बताया कि उसके हमलावरों की आवाज़ से उसका शरीर बहुत कमजोर हो गया था। उन्होंने कहा कि उनमें से शायद तीन, दो पुरुष और एक महिला, ध्वनि तरंगों पर ध्यानaa केंद्रित करने और अपने शरीर को लक्षित करने के लिए एक विशेष गठन में बैठे थे। यहां भारत में प्राचीन योगिक प्रथाएं हैं जहां लोग कुछ ध्वनियों, कुछ मंत्रों को जानते हैं, जो लोगों को नुक़सान पहुंचाने के लिए ध्वनि को केंद्रित कर सकते हैं। लेकिन मुझ पर हमला करaaने वाले ये लोग भारतीय नहीं हैं। वे वही लोग हैं जिन्होंने अमेरिका में पहले मुझे मारने की कोशिश की थी। वे तब सफल नहीं हो सके, और अब वे जो शुरू किया उसे पूरा कर ने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने मुझे बोलने से रोकने के लिए ज़हर की कोशिश की लेकिन मैं जारी रखने में कामयाब रहा। अब, पांच साल बाद वे वापस आ गए हैं। उन्होंने पहले बुद्ध हॉल में अपनी ध्वनि किरणों का उपयोग मेरे दिमाग़ पर हमला करने के लिए किया लेकिन मैं अपने दिमाग़ में नहीं हूं। मैं एक नो-मन हूं और उनकी आवाज़ का बहुत कम प्रभाव था। इसलिए उन्होंने अपनी रणनीति बदल दी, अब वे मेरे शरीर पर हमला कर रहे हैं। मेरे गरीब शरीर को उनकी किरणों से कोई सुरक्षा नहीं है। हर दिन यह कमजोर होता जाता है। वे मुझे मार नहीं सकते लेकिन वे मेरे शरीर को नुक़सान पहुंचा सकते हैं। अभी मेरे जिगर के क्षेत्र में बहुत दर्द हो रहा है। क्या आप इसे एक्स-रे कर सकते हैं? दुख की बात है, मैंने समझाया कि मेरी दंत एक्स-रे मशीन शायद अपर्याप्त थी क्योंकि यह केवल दांतों और जबड़े की छोटी फिल्में ले सकती थी, लेकिन हम कोशिश कर सकते थे। अमृतो को हमारे पास सबसे बड़ी एक्स-रे फ़िल्म मिली, जबकि मैंने इसकी बीम को चौड़ा करने के लिए डेंटल एक्स-रे मशीन के साथ जिग्गल किया। मैंने वह करने की कोशिश की जो ओशो पूछ रहा था। मैंने उसके जिगर के क्षेत्र की एक तस्वीर ली और फिर दंत विकास में बड़ी फ़िल्म विकसित करने में कामयाब रहा टैंक जिसे छोटी इंट्रा-ओरल डेंटल फ़िल्मों के लिए डिज़ाइन किया गया था, लेकिन परिणामी छवि धुंधली और अस्पष्ट थी। यह आख़िरी बार था जब मैंने ओशो को उसके भौतिक शरीर में देखा था। 19 जनवरी को शाम 4:30 बजे थे: मैं अपनी प्रेमिका के साथ अपने कमरे में था जब दरवाजे पर एक ज़रूरी दस्तक हुई। मनीषा, पीला और तनावग्रस्त दिख रही थी, ने पूछा कि क्या वह मेरे कमरे के फ़ोन का उपयोग कर सकती है। मुझे पता था कि वह केवल पूछेगी कि क्या कुछ असामान्य हो रहा है। अस्थायी सचिव के रूप में कार्य करते हुए वह इनर सर्कल के सदस्यों को फ़ोन कर रही थी और उन्हें कृष्णा हाउस में एक असाधारण बैठक में तुरंत आने के लिए कह रही थी। ओशो ने पंद्रह महीने पहले इक्कीस लोगों की एक कम्यून प्रबंधन टीम की स्थापना की थी, इसे इनर सर्कल का नाम दिया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका काम कम्यून के दिन-प्रतिदिन चलने का प्रबंधन करना था। मैं मूल चयन में नहीं था, लेकिन कुछ महीने बाद मुझे शामिल होने के लिए कहा गया था। फ़ोन करने के बाद, मनीषा ने कहा, “गीट, तुमने सुना कि मैं दूसरों को क्या बता रहा था। बैठक कृष्णा हाउस की छत पर ब्लू रूम में है। क्या आप वहां तुरंत जा सकते हैं?” इससे पहले कि मैं कोई सवाल पूछ पाता, वह जल्दी से गलियारे में चली गई, स्पष्ट रूप से एक और महत्वपूर्ण कार्य में शामिल थी। मैंने दोपहर के अधिकांश समय अजीब तरह से विपुल महसूस किया था। बाहरी मामलों की उथल-पुथल के बावजूद मैं कई दिनों से उत्साहित महसूस कर रहा था। मेरे दिल में ख़ुशी का एक अकथनीय नृत्य था। अंदर से मुझे उत्साह, आनंद महसूस हुआ। ब्लू रूम में पहुंचने पर, मैंने देखा कि अधिकांश इनर सर्कल पहले से ही वहां इकट्ठा हो चुके थे। माहौल तनावपूर्ण और तनावपूर्ण था। मेरा अपना उत्साह जगह से बाहर लग रहा था। मैं बैठ गया और इंतज़ार किया। कुछ मिनटों के बाद जयेश ने अमृतो के साथ प्रवेश किया। यह देखने के लिए संक्षेप में चारों ओर देखते हुए कि हम सभी मौजूद हैं, उन्होंने एक दृढ़, हालांकि शांत आवाज़ में कहा, “मुझे लगता है कि इसे लपेटने का कोई तरीक़ा नहीं है। मैं आपको सीधे बताऊंगा। ओशो ने कुछ समय पहले लगभग 4:45 बजे अपना शरीर छोड़ दिया था दोपहर।” स्तब्ध, मैंने अपनी घड़ी को देखा। शाम के 5:15 बजे थे। उपस्थित दो या तीन लोग रोने लगे। जयेश ने जल्दी से बीच में टोका, “देखो, मुझे तुम्हारी सारी मदद की ज़रूरत है। कृपया अभी तक अलग न हों। मुझे आप सभी की ज़रूरत है कि ओशो के भेजने को उतना ही सुंदर बनाने में मदद करें जितना वह हकदार है। यह आख़िरी चीज है जो हम उसके लिए कर सकते हैं भौतिक शरीर, चलो इसे अद्भुत बनाते हैं। उसने मुझे ठीक से बताया कि वह कैसे चाहता है कि ऐसा हो। उसने मुझे हर चीज के लिए विस्तृत निर्देश दिए, लेकिन मुझे यहां हर किसी की मदद की ज़रूरत है।” जयेश के शब्दों को सुनकर मेरा पहले का उत्साह सदमे में बदल गया था, लेकिन मैंने ओशो को अपने लोगों के साथ अपने अंतिम उत्सव का आनंद लेने में सक्षम बनाने के लिए हमारी मदद के लिए जयेश की अपील को स्पष्ट रूप से सुना। जैसे ही मैंने ब्लू रूम छोड़ा, जयेश ने मुझे बताया कि ओशो ने अनुरोध किया था कि मैं उनके शरीर को जलते हुए घाटों तक ले जाने के लिए एक वाहक बनूं। गतिविधि और भ्रमित भावनाओं के एक धुंध में मुझे याद है कि ओशो के इस अंतिम उपहार के लिए बेहद आभारी महसूस कर रहा था। - स्वामी देवगीत पुस्तक : ओशो - द फर्स्ट बुद्ध इन द डेंटल चेयर अध्याय: 17 अध्याय का नाम: ओशो का अंतिम दंत नाटक: अधिनियम V अंतिम सुनहरी झलक
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