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राजस्थान न्यूज़: जयपुर-जोधपुर-कोटा में मेयर चुनाव 25 सितंबर को, अगले दिन डिप्टी मेयर, सुकेत में भी इसी शेड्यूल से होगा अध्यक्ष-उपाध्यक्ष चुनाव

राजस्थान न्यूज़: जयपुर। राजस्थान नगरीय निकाय चुनाव 2026 में पुनर्मतदान के कारण टले जयपुर, जोधपुर और कोटा नगर निगम तथा कोटा जिले की सुकेत नगरपालिका के निकाय प्रमुखों के चुनाव के लिए नया कार्यक्रम सामने आया है। ताजा कार्यक्रम के अनुसार तीनों नगर निगमों में मेयर का चुनाव 25 सितंबर और डिप्टी मेयर का चुनाव 26 सितंबर को कराया जाएगा। इसी प्रकार सुकेत नगरपालिका में 25 सितंबर को अध्यक्ष और 26 सितंबर को उपाध्यक्ष पद का निर्वाचन होगा। इन चार निकायों में नामांकन की प्रक्रिया 19 सितंबर से शुरू होने और 22 सितंबर तक नाम वापस लिए जाने का कार्यक्रम बताया गया है। इन चारों निकायों में पहले मेयर-अध्यक्ष पद का चुनाव 21 सितंबर और उप मेयर-उपाध्यक्ष पद का चुनाव 22 सितंबर को प्रस्तावित था। हालांकि 14 सितंबर की मतगणना के दौरान नौ वार्डों के 10 मतदान केंद्रों की ईवीएम में तकनीकी समस्या आने से सभी पार्षदों के परिणाम घोषित नहीं हो सके थे। इसके बाद राज्य निर्वाचन आयोग ने जयपुर, जोधपुर, कोटा और सुकेत में निकाय प्रमुख और उपप्रमुख पदों के चुनाव को स्थगित कर दिया था। आयोग ने कहा था कि सभी निर्वाचित पार्षदों के परिणाम घोषित होने के बाद ही इन पदों की प्रक्रिया पूरी की जा सकती है। 16 सितंबर को हुआ पुनर्मतदान, 17 को मतगणना ईवीएम संबंधी तकनीकी समस्या के कारण जयपुर, जोधपुर, कोटा और सुकेत के कुल 10 मतदान केंद्रों पर 16 सितंबर को दोबारा वोटिंग कराई गई। इन केंद्रों के मतों की गणना 17 सितंबर को रखी गई थी। पुनर्मतदान पूरा होने के बाद ही चारों निकायों की पूरी पार्षद संख्या स्पष्ट होने और मेयर-अध्यक्ष चुनाव की नई प्रक्रिया शुरू होने का रास्ता खुला। इससे पहले राज्य निर्वाचन आयुक्त डॉ. राजेश्वर सिंह ने भी कहा था कि पुनर्मतदान की मतगणना के तुरंत बाद 21 और 22 सितंबर को चुनाव करा पाना संभव नहीं होगा, क्योंकि उम्मीदवारों को नामांकन, संवीक्षा और नाम वापसी के लिए निर्धारित समय देना आवश्यक है। उस समय आयोग से जुड़े अधिकारियों ने 25 सितंबर या उसके बाद चुनाव कराए जाने की संभावना जताई थी। 19 सितंबर से चार निकायों में नई चुनाव प्रक्रिया नए कार्यक्रम के अनुसार जयपुर, जोधपुर और कोटा नगर निगम के महापौर तथा सुकेत नगर पालिका के अध्यक्ष पद के लिए 19 सितंबर से नामांकन प्रक्रिया शुरू होगी। इसके बाद उम्मीदवारों को 22 सितंबर तक नाम वापस लेने का अवसर मिलेगा। शेष वैध उम्मीदवारों के बीच 25 सितंबर को मतदान कराया जाएगा। नगर निगमों में निर्वाचित पार्षद मेयर का चुनाव करेंगे, जबकि सुकेत नगरपालिका के निर्वाचित पार्षद अध्यक्ष का निर्वाचन करेंगे। मतदान के बाद मतगणना कर परिणाम घोषित किया जाएगा। इसके अगले दिन 26 सितंबर को तीनों नगर निगमों में डिप्टी मेयर और सुकेत में उपाध्यक्ष पद की प्रक्रिया पूरी होगी। अभी वेब पर उपलब्ध रिपोर्टों में 25 और 26 सितंबर की तारीखों को पहले संभावित कार्यक्रम के तौर पर रिपोर्ट किया गया था; राज्य निर्वाचन आयोग की नई संशोधित अधिसूचना का ऑनलाइन इंडेक्स्ड संस्करण अभी खोज परिणामों में उपलब्ध नहीं है। बाकी 305 निकायों में आज नामांकन पत्रों की जांच दूसरी ओर, जयपुर, जोधपुर, कोटा और सुकेत को छोड़कर प्रदेश के 305 नगरीय निकायों में मेयर, सभापति और नगरपालिका अध्यक्ष पद के चुनाव की प्रक्रिया पहले से निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार चल रही है। इनमें सात नगर निगमों के साथ नगर परिषद और नगरपालिकाएं शामिल हैं। राज्य निर्वाचन आयोग ने इन 305 निकायों में अध्यक्षीय पदों की सार्वजनिक सूचना 15 सितंबर को जारी की थी और 16 सितंबर को नामांकन दाखिल किए गए। गुरुवार, 17 सितंबर को इन नामांकन पत्रों की संवीक्षा यानी स्क्रूटनी की जा रही है। जांच में यह देखा जाएगा कि उम्मीदवार निर्धारित योग्यता, आरक्षण और नामांकन संबंधी कानूनी शर्तों को पूरा करते हैं या नहीं। संवीक्षा में वैध पाए गए उम्मीदवार 18 सितंबर दोपहर 3 बजे तक नाम वापस ले सकेंगे। इसके बाद उसी दिन अंतिम उम्मीदवारों की सूची और चुनाव चिह्नों की स्थिति स्पष्ट होगी। पहले से घोषित कार्यक्रम में इन 305 निकायों में प्रमुख पद का मतदान 21 सितंबर और उपप्रमुख का निर्वाचन 22 सितंबर को निर्धारित है। 305 निकायों में 989 नामांकन दाखिल राज्यभर में मेयर, सभापति और नगरपालिका अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर बड़ी संख्या में उम्मीदवारों ने पर्चे दाखिल किए हैं। पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार 305 नगरीय निकायों के लिए उपलब्ध सूची में कुल 989 नामांकन शामिल थे। कई स्थानों पर एक ही उम्मीदवार की ओर से एक से अधिक नामांकन भी जमा किए गए हैं। इसलिए स्क्रूटनी और नाम वापसी के बाद ही प्रत्येक निकाय में अंतिम मुकाबले की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी। कई निकायों में भाजपा और कांग्रेस के साथ निर्दलीय उम्मीदवार भी मैदान में हैं। 21 सितंबर को सात नगर निगमों सहित 305 निकायों में प्रमुख का फैसला अलवर, भरतपुर, बीकानेर, उदयपुर, अजमेर, पाली और भीलवाड़ा समेत सात नगर निगमों में मेयर का चुनाव 21 सितंबर के मूल कार्यक्रम के अनुसार होना है। इसी दिन नगर परिषदों में सभापति और नगरपालिकाओं में अध्यक्ष चुने जाएंगे। इसके अगले दिन 22 सितंबर को डिप्टी मेयर, उपसभापति और नगरपालिका उपाध्यक्ष के चुनाव होंगे। वहीं जयपुर, जोधपुर और कोटा के मेयर चुनाव तथा सुकेत के अध्यक्ष चुनाव को पुनर्मतदान की वजह से अलग शेड्यूल में रखा गया है। इससे राजस्थान में निकाय प्रमुखों के निर्वाचन की प्रक्रिया अब दो चरणों में पूरी होगी—पहले 21-22 सितंबर को 305 निकाय और उसके बाद चार प्रभावित निकायों की प्रक्रिया। चार निकायों पर अब फिर बढ़ेगी राजनीतिक गतिविधि पुनर्मतदान के नतीजे सामने आने और नया चुनाव कार्यक्रम तय होने के बाद जयपुर, जोधपुर, कोटा और सुकेत में राजनीतिक गतिविधियां एक बार फिर तेज होंगी। इन निकायों में उम्मीदवार चयन, पार्षदों से रायशुमारी और दलों की संगठनात्मक रणनीतियां अब 25 सितंबर के मतदान को ध्यान में रखकर आगे बढ़ेंगी। हालांकि किस दल या उम्मीदवार को पर्याप्त समर्थन मिलेगा, इसका फैसला निर्वाचित पार्षदों के मतदान से ही होगा। खासकर उन निकायों में जहां किसी एक दल के पास स्पष्ट बहुमत नहीं है, वहां निर्दलीय और अन्य पार्षदों का रुख महत्वपूर्ण रहेगा।

Read more 17th Sep 2026

राजस्थान न्यूज़: बीकानेर मेयर चुनाव में कांग्रेस में बगावत, अनिल कल्ला के खिलाफ नवरतन डागा मैदान में, भाजपा से सुरेंद्र सिंह शेखावत ने भरा पर्चा

राजस्थान न्यूज़: बीकानेर। नगर निगम में मेयर पद के चुनाव से पहले कांग्रेस के भीतर बगावत खुलकर सामने आ गई है। पार्टी ने वार्ड नंबर 73 से निर्वाचित अनिल कल्ला को अपना अधिकृत प्रत्याशी बनाया है, जबकि टिकट की दावेदारी कर रहे वार्ड नंबर 50 के कांग्रेस पार्षद नवरतन डागा ने भी चुनाव मैदान में उतरते हुए नामांकन दाखिल कर दिया। दूसरी ओर भाजपा ने वार्ड नंबर 13 से निर्वाचित सुरेंद्र सिंह शेखावत को मेयर प्रत्याशी बनाया है। इस तरह नामांकन के बाद बीकानेर में तीन चेहरे मेयर पद की दौड़ में सामने आए हैं। स्थानीय रिपोर्टों में भी अनिल कल्ला को कांग्रेस और सुरेंद्र सिंह शेखावत को भाजपा का अधिकृत प्रत्याशी बताया गया है, जबकि डागा के बागी होकर मैदान में उतरने की पुष्टि हुई है। बीकानेर नगर निगम में इस बार कांग्रेस ने स्पष्ट बहुमत हासिल किया है। 80 वार्डों में कांग्रेस के 42 पार्षद, भाजपा के 27, निर्दलीय 10 और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी का एक पार्षद निर्वाचित हुआ है। यानी बहुमत के लिए आवश्यक 41 मतों से कांग्रेस एक सीट आगे है। इसके बावजूद पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी के खिलाफ अपने ही पार्षद के मैदान में उतरने से कांग्रेस के सामने अपने पार्षदों को एकजुट रखने की राजनीतिक चुनौती खड़ी हुई है। अनिल कल्ला कांग्रेस के अधिकृत उम्मीदवार कांग्रेस ने लंबे मंथन और पार्षदों से रायशुमारी के बाद अनिल कल्ला के नाम पर मुहर लगाई है। अनिल कल्ला वार्ड नंबर 73 से कांग्रेस के टिकट पर पार्षद चुने गए हैं। चुनाव परिणाम में उन्होंने भाजपा प्रत्याशी को हराकर यह सीट जीती थी। मेयर प्रत्याशी को लेकर कांग्रेस में अनिल कल्ला के अलावा नवरतन डागा, जावेद पड़िहार, दिलीप बांठिया, मकसूद अहमद और अन्य नेताओं के नाम भी चर्चा में रहे थे। बुधवार को अधिकृत पार्टी सिंबल अनिल कल्ला को मिलने के बाद पार्टी का फैसला साफ हो गया। टिकट नहीं मिला तो नवरतन डागा ने खोला मोर्चा वार्ड नंबर 50 से निर्वाचित नवरतन डागा भी कांग्रेस की ओर से मेयर पद के प्रमुख दावेदारों में शामिल थे। पार्टी की ओर से अनिल कल्ला को अधिकृत प्रत्याशी बनाए जाने के बाद डागा ने अलग रास्ता अपनाते हुए अपना नामांकन दाखिल कर दिया। डागा वार्ड 50 से कांग्रेस के टिकट पर 312 मतों के अंतर से चुनाव जीतकर पार्षद बने हैं। डागा ने टिकट वितरण पर सवाल उठाते हुए कल्ला परिवार को बार-बार राजनीतिक अवसर मिलने का मुद्दा उठाया है। स्थानीय राजनीतिक रिपोर्टों में उनकी नाराजगी को मेयर टिकट से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि उनके मैदान में बने रहने या नाम वापसी की अंतिम स्थिति 18 सितंबर की प्रक्रिया पूरी होने के बाद साफ होगी। नवरतन डागा ने भरे दो नामांकन नामांकन प्रक्रिया में नवरतन डागा की ओर से दो पर्चे जमा किए गए हैं। एक नामांकन में उन्होंने स्वयं को कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में और दूसरे में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में प्रस्तुत किया है। चूंकि कांग्रेस का अधिकृत चुनाव चिह्न अनिल कल्ला को दिया गया है, इसलिए डागा के कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में दाखिल पर्चे की स्थिति नामांकन पत्रों की जांच के दौरान निर्वाचन अधिकारी द्वारा तय की जाएगी। नामांकन संबंधी सामने आए विवरण के अनुसार डागा के दोनों पर्चों में निर्दलीय पार्षद प्रस्तावक बने हैं। एक नामांकन में वार्ड 72 की निर्दलीय पार्षद निशा पारीक और दूसरे में वार्ड 63 के निर्दलीय पार्षद दीपक तंवर प्रस्तावक बताए गए हैं। दोनों का निर्दलीय पार्षद के रूप में निर्वाचन हुआ है। वहीं कांग्रेस के अधिकृत प्रत्याशी अनिल कल्ला के प्रस्तावक कांग्रेस पार्षद नवल किशोर पुरोहित बताए गए हैं। भाजपा प्रत्याशी सुरेंद्र सिंह शेखावत के प्रस्तावक के रूप में दीपक व्यास का नाम सामने आया है। भाजपा ने सुरेंद्र सिंह शेखावत को बनाया प्रत्याशी भाजपा ने वार्ड नंबर 13 से निर्वाचित सुरेंद्र सिंह शेखावत को बीकानेर मेयर चुनाव के लिए उम्मीदवार बनाया है। वार्ड 13 में शेखावत भाजपा के टिकट पर 1,628 मत प्राप्त कर विजयी हुए थे। भाजपा के पास निगम में 27 पार्षद हैं, इसलिए मेयर चुनाव में उसे अपने पार्षदों के अतिरिक्त दूसरे निर्वाचित सदस्यों के समर्थन की आवश्यकता होगी।भाजपा की ओर से इससे पहले भगवान सिंह मेड़तिया सहित कुछ अन्य नाम भी चर्चा में थे, लेकिन आखिरकार पार्टी ने सुरेंद्र सिंह शेखावत को अधिकृत प्रत्याशी बनाया। सिंबल को लेकर नामांकन के समय बनी असहज स्थिति भाजपा प्रत्याशी सुरेंद्र सिंह शेखावत के नामांकन के दौरान पार्टी सिंबल से जुड़ी एक स्थिति भी चर्चा में रही। स्थानीय स्तर पर सामने आई जानकारी के अनुसार शेखावत नामांकन दाखिल करने पहुंचे तो अधिकृत पार्टी सिंबल तत्काल उनके साथ नहीं था। इसके चलते उन्हें प्रक्रिया पूरी करने के लिए कुछ समय इंतजार करना पड़ा। बाद में भाजपा के वरिष्ठ नेता सत्यप्रकाश आचार्य अधिकृत दस्तावेज लेकर पहुंचे, जिसके बाद नामांकन प्रक्रिया पूरी हुई। कांग्रेस के पास बहुमत, लेकिन बगावत ने बढ़ाई चुनौती संख्या के लिहाज से बीकानेर नगर निगम में कांग्रेस की स्थिति स्पष्ट है। उसके 42 निर्वाचित पार्षद हैं और बहुमत का आंकड़ा 41 है। लेकिन नवरतन डागा का अधिकृत प्रत्याशी के खिलाफ मैदान में उतरना पार्टी के लिए अब संगठनात्मक अनुशासन और पार्षदों की एकजुटता का सवाल बन गया है। दूसरी ओर भाजपा के पास 27 पार्षद हैं। ऐसे में उसे मेयर पद के लिए आवश्यक संख्या तक पहुंचने के लिए काफी अतिरिक्त समर्थन जुटाना होगा। निर्दलीय पार्षदों और कांग्रेस के भीतर पैदा हुई असहमति के कारण दोनों दलों की राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं, लेकिन वास्तविक समर्थन का पता मतदान में ही चलेगा। वार्ड 50 पहले भी रहा था चर्चा में नवरतन डागा जिस वार्ड नंबर 50 से निर्वाचित हुए हैं, वहां कांग्रेस टिकट वितरण के समय भी विवाद सामने आया था। डागा अंततः कांग्रेस उम्मीदवार बने और चुनाव जीतकर निगम पहुंचे। चुनाव परिणामों में उन्हें 1,288 वोट मिले और उन्होंने 312 वोट से जीत हासिल की। अब मेयर टिकट नहीं मिलने के बाद उनका निर्दलीय पर्चा दाखिल करना कांग्रेस के भीतर असंतोष को औपचारिक चुनावी मुकाबले तक ले आया है। 17 को नामांकन की जांच, 18 तक नाम वापसी मेयर चुनाव के कार्यक्रम के अनुसार 17 सितंबर को नामांकन पत्रों की जांच की जाएगी। इसके बाद 18 सितंबर दोपहर 3 बजे तक उम्मीदवार अपना नाम वापस ले सकेंगे। इसलिए अभी यह तय नहीं है कि 21 सितंबर के मतदान तक तीनों प्रत्याशी मैदान में बने रहेंगे या किसी स्तर पर राजनीतिक समझौता होगा। बीकानेर में महापौर पद के लिए मतदान 21 सितंबर को निर्धारित है। फिलहाल कांग्रेस के अनिल कल्ला, भाजपा के सुरेंद्र सिंह शेखावत और बागी नवरतन डागा के नामांकन ने बीकानेर मेयर चुनाव को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बना दिया है। अंतिम मुकाबले की तस्वीर नामांकन जांच और नाम वापसी की प्रक्रिया के बाद स्पष्ट होगी।

Read more 16th Sep 2026

राजस्थान न्यूज़: खैरथल में बोर्ड गठन से पहले कांग्रेस में टूट, विक्रम चौधरी ने थामा भाजपा का दामन, पार्षदों के पाला बदलने से बदला संख्या गणित

राजस्थान न्यूज़: खैरथल। नगर परिषद चुनाव के नतीजे आने के बाद खैरथल की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। कांग्रेस से सभापति पद के संभावित दावेदारों में शामिल रहे पूर्व नेता प्रतिपक्ष विक्रम चौधरी ‘विक्की’ ने भाजपा का दामन थाम लिया है। दिल्ली में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव के आवास पर चौधरी की भाजपा में एंट्री हुई। उनके साथ कई निर्वाचित पार्षदों के भी भाजपा खेमे में आने की खबर है, जिससे नगर परिषद में बोर्ड गठन का संख्या गणित बदल गया है।खैरथल नगर परिषद में कुल 45 वार्ड हैं। चुनाव परिणाम में कांग्रेस ने 20, भाजपा ने 8 और निर्दलीय उम्मीदवारों ने 17 वार्डों में जीत दर्ज की थी। बोर्ड के लिए 23 पार्षदों का समर्थन आवश्यक है। चुनाव परिणाम के तुरंत बाद कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी के रूप में सामने आई थी, लेकिन किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था। दिल्ली पहुंचकर भाजपा में शामिल हुए विक्रम चौधरी विक्रम चौधरी की भाजपा में एंट्री दिल्ली में हुई। सामने आई रिपोर्टों के अनुसार केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने उनका पार्टी में स्वागत किया। चौधरी इससे पहले खैरथल की स्थानीय कांग्रेस राजनीति में सक्रिय रहे हैं और नगर निकाय में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका भी निभा चुके हैं। इस बार उन्हें कांग्रेस की ओर से सभापति पद के संभावित चेहरों में गिना जा रहा था। पार्टी बदलना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि चुनाव में कांग्रेस 20 पार्षदों के साथ सबसे बड़ा दल बनी थी और उसे बोर्ड बनाने के लिए केवल तीन अतिरिक्त पार्षदों का समर्थन चाहिए था। अब चौधरी के भाजपा में शामिल होने तथा उनके साथ अन्य पार्षदों के जाने की खबर ने राजनीतिक समीकरण को नए सिरे से खड़ा कर दिया है। 11 पार्षदों को लेकर रिपोर्टों में अलग-अलग विवरण चौधरी के साथ कितने पार्षद भाजपा में आए हैं, इसे लेकर अलग-अलग रिपोर्टों में थोड़ा अंतर है। एक रिपोर्ट में विक्रम चौधरी के अलावा 11 अन्य पार्षदों के भाजपा में जाने का दावा किया गया है और इनमें पांच से छह कांग्रेस पार्षद बताए गए हैं, हालांकि उनके नाम सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। दूसरी रिपोर्टों में चौधरी सहित 11 पार्षदों के भाजपा खेमे में आने की बात कही गई है। इसलिए बोर्ड के चुनाव से पहले वास्तविक दलीय संख्या संबंधित पार्षदों की औपचारिक स्थिति से ही स्पष्ट होगी।यदि कांग्रेस के कुछ निर्वाचित पार्षद वास्तव में भाजपा के साथ चले गए हैं और कुछ निर्दलीयों ने भी भाजपा का समर्थन किया है, तो मूल चुनाव परिणाम में बने 20-8-17 के समीकरण में महत्वपूर्ण बदलाव आएगा। लेकिन सभापति का अंतिम फैसला निर्वाचित पार्षदों की मतदान प्रक्रिया से ही होगा। चुनाव में कांग्रेस 20 सीटों के साथ बनी थी सबसे बड़ी पार्टी खैरथल नगर परिषद में मतगणना पूरी होने के बाद कांग्रेस ने 20 वार्ड जीते थे। भाजपा को आठ सीटें मिलीं, जबकि 17 निर्दलीय जीतकर आए। यानी निर्दलीयों की संख्या भी किसी एक बड़े दल की तुलना में काफी महत्वपूर्ण थी।कारण था कि चुनाव परिणाम आने के साथ ही निर्दलीय पार्षदों की भूमिका बोर्ड गठन में महत्वपूर्ण हो गई थी। कांग्रेस को बहुमत तक पहुंचने के लिए तीन अतिरिक्त मत चाहिए थे, जबकि भाजपा को अपने मूल आठ निर्वाचित पार्षदों के अतिरिक्त काफी समर्थन जुटाना था। अब विक्रम चौधरी के भाजपा में जाने के बाद दोनों राजनीतिक दलों की रणनीति बदलना तय है। निर्दलीयों के साथ-साथ दलों के टिकट पर जीते पार्षदों का रुख भी सभापति चुनाव तक महत्वपूर्ण रहेगा। कांग्रेस जिलाध्यक्ष बोले— पार्षदों से संपर्क की कोशिश खैरथल-तिजारा कांग्रेस जिलाध्यक्ष बलराम यादव ने विक्रम चौधरी के भाजपा में शामिल होने की जानकारी मिलने की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि चौधरी से तत्काल संपर्क नहीं हो पाया और कांग्रेस अपने निर्वाचित पार्षदों की स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी के कई पार्षद एक साथ रखे गए हैं। कांग्रेस के सामने अब चुनौती अपने निर्वाचित पार्षदों को एकजुट रखने की है। वहीं भाजपा उन पार्षदों के समर्थन को औपचारिक रूप देने की कोशिश करेगी, जिनके उसके साथ आने का दावा किया जा रहा है। सभापति चुनाव तक जारी रहेगा संख्या का खेल खैरथल में वर्तमान राजनीतिक गतिविधि का केंद्र अब सभापति पद है। 45 सदस्यीय परिषद में 23 मतों का आंकड़ा निर्णायक होगा। चुनाव नतीजे और उसके बाद हुए दल परिवर्तन अलग-अलग चरण हैं, इसलिए किसी दल का बोर्ड बनना अभी औपचारिक मतदान से पहले तय नहीं माना जा सकता।राजस्थान के कई नगरीय निकायों की तरह खैरथल में भी निर्दलीय पार्षद बड़ी संख्या में निर्वाचित हुए हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में राजनीतिक संपर्क और पार्षदों की खेमाबंदी जारी रहने की संभावना है। अंतिम तस्वीर सभापति चुनाव के समय पार्षदों के वास्तविक समर्थन और मतदान से स्पष्ट होगी।

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अजमेर

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राष्ट्रीय - अंतर्राष्ट्रीय

राष्ट्रीय न्यूज़: PM मोदी का 76वां जन्मदिन आज, सेवा-संकल्प अभियान के तहत देशभर में कार्यक्रम

राष्ट्रीय न्यूज़: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 76वां जन्मदिन गुरुवार, 17 सितंबर को देशभर में विभिन्न कार्यक्रमों के साथ मनाया जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी की ओर से इस मौके पर ‘सेवा संकल्प अभियान’ की शुरुआत की गई है। यह अभियान प्रधानमंत्री मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर से भी जोड़ा गया है। अभियान के तहत सेवा, जनसंपर्क और कल्याणकारी योजनाओं से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। जन्मदिन के मौके पर प्रधानमंत्री मोदी ने पश्चिम बंगाल में ‘अन्नपूर्णा योजना’ की किस्त वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जारी की। इस दौरान उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल के लोगों को लंबे समय तक केंद्र की योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाया, जिससे उन्हें नुकसान हुआ। योजना की चौथी किस्त के तहत बड़ी संख्या में महिला लाभार्थियों को राशि सीधे बैंक खातों में भेजे जाने की जानकारी सामने आई है। वडनगर से वाराणसी तक बाइक यात्रा गृह मंत्री अमित शाह ने प्रधानमंत्री मोदी के जन्मस्थान वडनगर से ‘सेवा संकल्प बाइक यात्रा’ को रवाना किया। यह यात्रा 10 राज्यों और 193 जिलों से होकर गुजरेगी। रिपोर्टों के मुताबिक यात्रा में करीब 600 बाइकर्स शामिल हैं और इसका समापन 7 अक्टूबर को प्रस्तावित है। इसी अभियान के तहत वाराणसी से वडनगर के लिए भी बाइक यात्रा शुरू की गई है। दोनों यात्राओं को प्रधानमंत्री मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने से जोड़ा गया है। वडनगर और वाराणसी उनके जीवन से जुड़े दो प्रमुख स्थान हैं—वडनगर उनका जन्मस्थान है, जबकि वाराणसी उनका लोकसभा क्षेत्र है। दोनों दिशाओं से निकलने वाली यात्राओं का समापन 7 अक्टूबर को होना है। अमित शाह ने गिनाईं मोदी सरकार की उपलब्धियां वडनगर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान अमित शाह ने प्रधानमंत्री मोदी के 25 वर्ष के सार्वजनिक जीवन का उल्लेख किया। शाह ने कहा कि मोदी ने लगातार सेवा करते हुए काम किया और लंबे समय तक रोजाना 16 से 18 घंटे काम किया। उन्होंने मोदी के कार्यकाल को ‘इंडिया फर्स्ट’ के मंत्र से जोड़ते हुए कहा कि राष्ट्रीय हित को प्राथमिकता देकर देश को विकास की दिशा में आगे बढ़ाने का काम किया गया। शाह ने केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं का भी उल्लेख किया। शाह के मुताबिक मोदी सरकार के कार्यकाल में 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आए। उन्होंने गरीबों को पक्के मकान, बिजली, नल से पानी, शौचालय, गैस कनेक्शन और मुफ्त राशन जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने का दावा किया। गरीबी से बाहर आने वाले लोगों का आंकड़ा प्रधानमंत्री मोदी के पूर्व सार्वजनिक बयानों में भी सामने आया है। करोड़ लोगों को मुफ्त राशन का जिक्र अमित शाह ने करीब 80 करोड़ लोगों को हर महीने 5 किलो मुफ्त अनाज दिए जाने और स्वास्थ्य कवर का भी उल्लेख किया। केंद्र सरकार के आधिकारिक आंकड़ों में भी 80 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन तथा बड़ी संख्या में लोगों को स्वास्थ्य बीमा कवर दिए जाने की जानकारी दी गई है। शाह ने प्रधानमंत्री मोदी की राष्ट्रीय सुरक्षा नीति और सुशासन का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि मोदी ने राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर स्पष्ट नीति अपनाई और भ्रष्टाचार तथा घोटालों से निपटने की दिशा में काम किया। उन्होंने मोदी के खुद को ‘प्रधान सेवक’ कहने का भी उल्लेख किया। शाम को जलाए जाएंगे ‘आशीर्वाद के दीये’ जन्मदिन समारोह के तहत शाम को ‘आशीर्वाद के दीये’ कार्यक्रम भी आयोजित किया जा रहा है। इसके तहत शाम करीब 6 से 7 बजे के बीच घरों और विभिन्न स्थानों पर दीये जलाने की अपील की गई है। भाजपा की ओर से इसे प्रधानमंत्री के जन्मदिन और सेवा-संकल्प अभियान से जोड़ा गया है। पश्चिम बंगाल में भी ‘आशीर्वाद के दीये’ कार्यक्रम के तहत लोगों से दीप जलाने की अपील की गई है।अलग-अलग राज्यों में बड़ी संख्या में दीये जलाने की तैयारियां की गई हैं। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, हरियाणा और पश्चिम बंगाल में भी स्थानीय स्तर पर विशेष आयोजन प्रस्तावित हैं। इस तरह प्रधानमंत्री मोदी के 76वें जन्मदिन पर देशभर में सेवा गतिविधियों, सरकारी योजनाओं के प्रचार-प्रसार, जनसंपर्क कार्यक्रमों और बाइक यात्राओं का आयोजन किया जा रहा है। ‘सेवा संकल्प अभियान’ को प्रधानमंत्री के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर से भी जोड़ा गया है।

Read more 17th Sep 2026

अंतर्राष्ट्रीय न्यूज़: झांग यिमिंग बने एशिया के सबसे अमीर शख्स, 1 माह में पाया 12 अरब डॉलर का उछाल; जानिए अदाणी की पोजीशन

अंतर्राष्ट्रीय न्यूज़: टिकटॉक की पैरेंट कंपनी बाइटडांस (ByteDance) के संस्थापक झांग यिमिंग एशिया के सबसे अमीर व्यक्ति बन गए हैं. ब्लूमबर्ग बिलियनेयर्स इंडेक्स के अनुसार, इस महीने उनकी संपत्ति में 12 अरब डॉलर का जोरदार इजाफा हुआ है. झांग यिमिंग बने एशिया के सबसे अमीर शख्स वैश्विक अरबपतियों की सूची में बड़ा फेरबदल देखने को मिला है. शॉर्ट वीडियो प्लेटफॉर्म टिकटॉक (TikTok) की मूल कंपनी बाइटडांस (ByteDance) के संस्थापक झांग यिमिंग (Zhang Yiming) एशिया के सबसे अमीर व्यक्ति बन गए हैं. भारतीय उद्योगपति गौतम अदाणी इनके बाद दूसरे नंबर पर हैं ब्लूमबर्ग बिलियनेयर्स इंडेक्स (Bloomberg Billionaires Index) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, झांग यिमिंग और गौतम अडानी दोनों की कुल संपत्ति लगभग 105 अरब डॉलर के आसपास दर्ज की गई है, लेकिन उच्च मूल्यांकन के चलते झांग सूची में शीर्ष स्थान पर पहुंच गए हैं. इस महीने झांग की व्यक्तिगत संपत्ति में करीब 12 अरब डॉलर का भारी उछाल देखने को मिला. असेसमेंट और AI टूल्स से मिला बड़ा बूस्ट झांग की संपत्ति में आई इस तेजी के पीछे बाइटडांस के सेल्फ असेसमेंट में हुआ सुधार मुख्य वजह है. ब्लूमबर्ग ने ब्लैकरॉक (BlackRock) और फिडेलिटी (Fidelity) की हालिया फाइलिंग के आधार पर कंपनी की वैल्यूएशन को अपडेट किया है. इसके साथ ही, अमेरिका में टिकटॉक से जुड़े विवाद के समाधान (ओरेकल और सिल्वर लेक संयुक्त उद्यम) के बाद कंपनी के रिस्क डिस्काउंट को 25 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत कर दिया गया. इसके अलावा, बाइटडांस के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) उत्पादों — विशेष रूप से ‘डौबाओ’ (Doubao) चैटबॉट और ‘सीडांस’ (Seedance) वीडियो मॉडल — ने निवेशकों का भरोसा और उत्साह बढ़ाया है. उल्लेखनीय है कि वर्ष 2019 के बाद से झांग यिमिंग की संपत्ति में आठ गुना से अधिक की वृद्धि दर्ज की जा चुकी है.

Read more 16th Sep 2026

क़लमकार

क़लमकार न्यूज़: ये जीवन और कुछ नहीं  बस खेल है छुपन – छुपाई का

क़लमकार: खोजते खोजते अचानक से खुद को पा लेना 

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क़लमकार न्यूज़: तानाशाह एक डरपोक आदमी

क़लमकार: तानाशाह को डर पैदा होता है कि गधे भी मेरे खिलाफ़ साजिश कर रहे हैं

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#Being Positive

#Being Positive: Horizon Hind Live| #Ajmer| वार्ड 58 वार्ड परेड - चंद्रशेखर शर्मा ( मोनी) भाजपा

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Read more 26th Jan 2021

#Being Positive: Horizon Hind Live| #Ajmerदावेदार मैदान में  (बृजेश माथुर वार्ड 76)

#Being Positive: Horizon Hind Live| #Ajmerदावेदार मैदान में (बृजेश माथुर वार्ड 76)

Read more 23rd Jan 2021

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Ajmer Headlines

#मधुकर कहिन

गुप्त ध्वनि किरणों के साथ ओशो पर किसने हमला किया?... 

गुप्त ध्वनि किरणों के साथ ओशो पर किसने हमला किया?...  * ओशो के निजी दंत चिकित्सक देवगेट ओशो की मृत्यु से 4 दिन पहले हुई घटनाओं के बारे में बात करते हैं (शरीर को छोड़कर)... * 15 aजनवरी, 1990 को, मेरे जन्मदिन पर, मुझे शुन्यो से एक संदेश मिला: ओशो चाहते थे कि मैं उनके पेट का एक्स-रे ले। हम दंaत कक्ष में मिले। ओशो का शरीर पतला और बेकार लग रहा था, फिर भी मैंने उसे शक्तिशाली रूप से उपस्थित महसूस किया। मुझे शुन्यो से पता था कि वह हर दिन बीस घंटे से अधिक सो रहा था, हर शाम बुद्ध हॉल में कुछ क़ीमती मिनटों के लिए अपनी शारीरिक ऊर्जा को बचा रहा था। ओशो नेa मुझे बताया कि उसके हमलावरों की आवाज़ से उसका शरीर बहुत कमजोर हो गया था। उन्होंने कहा कि उनमें से शायद तीन, दो पुरुष और एक महिला, ध्वनि तरंगों पर ध्यानaa केंद्रित करने और अपने शरीर को लक्षित करने के लिए एक विशेष गठन में बैठे थे। यहां भारत में प्राचीन योगिक प्रथाएं हैं जहां लोग कुछ ध्वनियों, कुछ मंत्रों को जानते हैं, जो लोगों को नुक़सान पहुंचाने के लिए ध्वनि को केंद्रित कर सकते हैं। लेकिन मुझ पर हमला करaaने वाले ये लोग भारतीय नहीं हैं। वे वही लोग हैं जिन्होंने अमेरिका में पहले मुझे मारने की कोशिश की थी। वे तब सफल नहीं हो सके, और अब वे जो शुरू किया उसे पूरा कर ने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने मुझे बोलने से रोकने के लिए ज़हर की कोशिश की लेकिन मैं जारी रखने में कामयाब रहा। अब, पांच साल बाद वे वापस आ गए हैं। उन्होंने पहले बुद्ध हॉल में अपनी ध्वनि किरणों का उपयोग मेरे दिमाग़ पर हमला करने के लिए किया लेकिन मैं अपने दिमाग़ में नहीं हूं। मैं एक नो-मन हूं और उनकी आवाज़ का बहुत कम प्रभाव था। इसलिए उन्होंने अपनी रणनीति बदल दी, अब वे मेरे शरीर पर हमला कर रहे हैं। मेरे गरीब शरीर को उनकी किरणों से कोई सुरक्षा नहीं है। हर दिन यह कमजोर होता जाता है। वे मुझे मार नहीं सकते लेकिन वे मेरे शरीर को नुक़सान पहुंचा सकते हैं। अभी मेरे जिगर के क्षेत्र में बहुत दर्द हो रहा है। क्या आप इसे एक्स-रे कर सकते हैं? दुख की बात है, मैंने समझाया कि मेरी दंत एक्स-रे मशीन शायद अपर्याप्त थी क्योंकि यह केवल दांतों और जबड़े की छोटी फिल्में ले सकती थी, लेकिन हम कोशिश कर सकते थे। अमृतो को हमारे पास सबसे बड़ी एक्स-रे फ़िल्म मिली, जबकि मैंने इसकी बीम को चौड़ा करने के लिए डेंटल एक्स-रे मशीन के साथ जिग्गल किया। मैंने वह करने की कोशिश की जो ओशो पूछ रहा था। मैंने उसके जिगर के क्षेत्र की एक तस्वीर ली और फिर दंत विकास में बड़ी फ़िल्म विकसित करने में कामयाब रहा टैंक जिसे छोटी इंट्रा-ओरल डेंटल फ़िल्मों के लिए डिज़ाइन किया गया था, लेकिन परिणामी छवि धुंधली और अस्पष्ट थी। यह आख़िरी बार था जब मैंने ओशो को उसके भौतिक शरीर में देखा था। 19 जनवरी को शाम 4:30 बजे थे: मैं अपनी प्रेमिका के साथ अपने कमरे में था जब दरवाजे पर एक ज़रूरी दस्तक हुई। मनीषा, पीला और तनावग्रस्त दिख रही थी, ने पूछा कि क्या वह मेरे कमरे के फ़ोन का उपयोग कर सकती है। मुझे पता था कि वह केवल पूछेगी कि क्या कुछ असामान्य हो रहा है। अस्थायी सचिव के रूप में कार्य करते हुए वह इनर सर्कल के सदस्यों को फ़ोन कर रही थी और उन्हें कृष्णा हाउस में एक असाधारण बैठक में तुरंत आने के लिए कह रही थी। ओशो ने पंद्रह महीने पहले इक्कीस लोगों की एक कम्यून प्रबंधन टीम की स्थापना की थी, इसे इनर सर्कल का नाम दिया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका काम कम्यून के दिन-प्रतिदिन चलने का प्रबंधन करना था। मैं मूल चयन में नहीं था, लेकिन कुछ महीने बाद मुझे शामिल होने के लिए कहा गया था। फ़ोन करने के बाद, मनीषा ने कहा, “गीट, तुमने सुना कि मैं दूसरों को क्या बता रहा था। बैठक कृष्णा हाउस की छत पर ब्लू रूम में है। क्या आप वहां तुरंत जा सकते हैं?” इससे पहले कि मैं कोई सवाल पूछ पाता, वह जल्दी से गलियारे में चली गई, स्पष्ट रूप से एक और महत्वपूर्ण कार्य में शामिल थी। मैंने दोपहर के अधिकांश समय अजीब तरह से विपुल महसूस किया था। बाहरी मामलों की उथल-पुथल के बावजूद मैं कई दिनों से उत्साहित महसूस कर रहा था। मेरे दिल में ख़ुशी का एक अकथनीय नृत्य था। अंदर से मुझे उत्साह, आनंद महसूस हुआ। ब्लू रूम में पहुंचने पर, मैंने देखा कि अधिकांश इनर सर्कल पहले से ही वहां इकट्ठा हो चुके थे। माहौल तनावपूर्ण और तनावपूर्ण था। मेरा अपना उत्साह जगह से बाहर लग रहा था। मैं बैठ गया और इंतज़ार किया। कुछ मिनटों के बाद जयेश ने अमृतो के साथ प्रवेश किया। यह देखने के लिए संक्षेप में चारों ओर देखते हुए कि हम सभी मौजूद हैं, उन्होंने एक दृढ़, हालांकि शांत आवाज़ में कहा, “मुझे लगता है कि इसे लपेटने का कोई तरीक़ा नहीं है। मैं आपको सीधे बताऊंगा। ओशो ने कुछ समय पहले लगभग 4:45 बजे अपना शरीर छोड़ दिया था दोपहर।” स्तब्ध, मैंने अपनी घड़ी को देखा। शाम के 5:15 बजे थे। उपस्थित दो या तीन लोग रोने लगे। जयेश ने जल्दी से बीच में टोका, “देखो, मुझे तुम्हारी सारी मदद की ज़रूरत है। कृपया अभी तक अलग न हों। मुझे आप सभी की ज़रूरत है कि ओशो के भेजने को उतना ही सुंदर बनाने में मदद करें जितना वह हकदार है। यह आख़िरी चीज है जो हम उसके लिए कर सकते हैं भौतिक शरीर, चलो इसे अद्भुत बनाते हैं। उसने मुझे ठीक से बताया कि वह कैसे चाहता है कि ऐसा हो। उसने मुझे हर चीज के लिए विस्तृत निर्देश दिए, लेकिन मुझे यहां हर किसी की मदद की ज़रूरत है।” जयेश के शब्दों को सुनकर मेरा पहले का उत्साह सदमे में बदल गया था, लेकिन मैंने ओशो को अपने लोगों के साथ अपने अंतिम उत्सव का आनंद लेने में सक्षम बनाने के लिए हमारी मदद के लिए जयेश की अपील को स्पष्ट रूप से सुना। जैसे ही मैंने ब्लू रूम छोड़ा, जयेश ने मुझे बताया कि ओशो ने अनुरोध किया था कि मैं उनके शरीर को जलते हुए घाटों तक ले जाने के लिए एक वाहक बनूं। गतिविधि और भ्रमित भावनाओं के एक धुंध में मुझे याद है कि ओशो के इस अंतिम उपहार के लिए बेहद आभारी महसूस कर रहा था। - स्वामी देवगीत पुस्तक : ओशो - द फर्स्ट बुद्ध इन द डेंटल चेयर अध्याय: 17 अध्याय का नाम: ओशो का अंतिम दंत नाटक: अधिनियम V अंतिम सुनहरी झलक

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