राजस्थान न्यूज़: जयपुर। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद नितिन नबीन ने शुक्रवार शाम जयपुर के बिड़ला ऑडिटोरियम में आयोजित युवा संवाद कार्यक्रम में प्रदेशभर से आए युवाओं और Gen-Z प्रतिभागियों से बातचीत की। दिनभर के संगठनात्मक और सार्वजनिक कार्यक्रमों के बाद हुए इस संवाद में उन्होंने युवाओं से उनके अनुभव, भविष्य की योजनाओं, राजनीति में भागीदारी और विकसित भारत के लक्ष्य को लेकर चर्चा की। भाजपा की ओर से उनके जयपुर दौरे में इस युवा संवाद को विशेष रूप से युवाओं से सीधा संपर्क बढ़ाने वाले कार्यक्रम के रूप में रखा गया था। कार्यक्रम के दौरान नितिन नबीन ने राजस्थान की पहचान से जुड़े लोकप्रिय नारे के जरिए युवाओं से संवाद शुरू करने की कोशिश की। उन्होंने मंच से कहा— ‘दाल-बाटी-चूरमा’, लेकिन शुरुआत में सभागार से अपेक्षित जवाब नहीं आया। इस पर उन्होंने मुस्कराते हुए पूछा कि इसके आगे क्या है। दोबारा नारा लगाने पर कुछ युवाओं ने जवाब दिया— ‘हम राजस्थान के सूरमा।’ आवाज कम होने पर नबीन ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि यह राजस्थान की आवाज नहीं लग रही, युवाओं को कहीं और से तो नहीं बुलाया गया। इसके बाद सभागार में मौजूद युवाओं ने एक साथ ‘हम राजस्थान के सूरमा’ का नारा लगाया। ‘दाल-बाटी-चूरमा’ से जुड़ा यह नारा राजस्थान में पहले भी राजनीतिक मंचों और सार्वजनिक सभाओं में इस्तेमाल होता रहा है। युवाओं से पूछा- राजनीति में कितने लोग आना चाहते हैं संवाद के दौरान नितिन नबीन ने सभागार में मौजूद युवाओं से सीधा सवाल किया— “आप में से कितने लोग राजनीति में आना चाहते हैं?” इस पर कुछ युवाओं ने ही हाथ खड़े किए। नबीन ने इस प्रतिक्रिया का जिक्र करते हुए कहा कि राजनीति में आने की इच्छा रखने वाले युवाओं की संख्या कम दिखाई दे रही है। इसके बाद उन्होंने राजनीति में युवाओं की भागीदारी की जरूरत पर अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बार-बार नए लोगों और युवाओं के राजनीति में आने की बात करते हैं, क्योंकि राजनीति वह माध्यम है जहां से देश को दिशा और नई नेतृत्व क्षमता मिलती है। यह नबीन का राजनीतिक संदेश था, जिसे उन्होंने युवा भागीदारी और नेतृत्व निर्माण से जोड़ा। भाजपा ने भी पहले से जारी कार्यक्रम में बिड़ला ऑडिटोरियम के युवा संवाद का फोकस युवाओं से जुड़े विषयों, राष्ट्र निर्माण और संगठन में उनकी भागीदारी पर बताया था। ‘राजनीति से ही देश को मिलती है नई लीडरशिप’ नितिन नबीन ने कहा कि युवाओं को राजनीति को केवल चुनाव लड़ने या किसी पद तक पहुंचने के नजरिए से नहीं देखना चाहिए। उनके अनुसार राजनीतिक प्रक्रिया में भागीदारी से देश के भविष्य, नीतियों और नेतृत्व निर्माण में योगदान का अवसर मिलता है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व का उदाहरण देते हुए कहा कि देश की राजनीति में नेतृत्व परिवर्तन के साथ युवाओं में आत्मविश्वास बढ़ा है। नबीन ने 2012-13 के दौर का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय, उनके आकलन में, देश के युवाओं में निराशा का वातावरण था और भविष्य को लेकर भरोसा कम था। उन्होंने दावा किया कि नरेंद्र मोदी के राष्ट्रीय नेतृत्व में आने के बाद युवाओं में यह विश्वास बढ़ा कि वे स्वयं भी आगे बढ़ सकते हैं और देश भी प्रगति कर सकता है। यह भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष का राजनीतिक आकलन है, न कि स्वतंत्र रूप से मापा गया तथ्य। विकसित भारत 2047 को युवाओं से जोड़ा युवा संवाद में नितिन नबीन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत 2047’ लक्ष्य का भी विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि बड़े राष्ट्रीय लक्ष्य तभी हासिल होते हैं जब पूरे समाज, विशेषकर युवाओं, के सामने एक साझा उद्देश्य हो। उन्होंने अमेरिका और चीन के विकास का उदाहरण देते हुए कहा कि देशों की प्रगति में सामूहिक राष्ट्रीय आकांक्षा महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। नबीन ने अमेरिका के संदर्भ में ‘ग्रेट अमेरिकन ड्रीम’ और चीन के संदर्भ में सामूहिक विकास लक्ष्य का उदाहरण देकर कहा कि भारत को भी 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के लिए एक साझा संकल्प के साथ आगे बढ़ना होगा। ये ऐतिहासिक उदाहरण उनके भाषण का हिस्सा थे; इनके विशिष्ट कालखंड और व्याख्या को स्वतंत्र ऐतिहासिक निष्कर्ष के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए। ‘140 करोड़ लोग एक लक्ष्य से जुड़ेंगे तो विकसित भारत संभव’ नितिन नबीन ने कहा कि प्रधानमंत्री ने देश के सामने वर्ष 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य रखा है और इसे पूरा करने के लिए केवल सरकार नहीं, बल्कि नागरिकों की भागीदारी भी जरूरी होगी। उन्होंने कहा कि यदि देश के करीब 140 करोड़ नागरिक इस लक्ष्य को साझा उद्देश्य के रूप में स्वीकार कर आगे बढ़ें तो विकास की गति को व्यापक सामाजिक समर्थन मिल सकता है। उन्होंने युवाओं से अपने करियर और व्यक्तिगत भविष्य के साथ देश के विकास से जुड़े विषयों पर भी सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की। नबीन ने कहा कि Gen-Z नई तकनीक, नए विचार और नई कार्यशैली के साथ देश को दिशा देने की क्षमता रखती है। दिनभर के जयपुर दौरे का अंतिम प्रमुख कार्यक्रम बिड़ला ऑडिटोरियम का युवा संवाद नितिन नबीन के दिनभर के जयपुर प्रवास के प्रमुख कार्यक्रमों में शामिल था। शुक्रवार सुबह उन्होंने अल्बर्ट हॉल पर ‘स्वच्छता ही सेवा’ कार्यक्रम में भाग लिया, इसके बाद मुख्यमंत्री निवास पर सांसदों-विधायकों और संगठन पदाधिकारियों के साथ बैठक की। दादिया में निकाय जनप्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं को संबोधित करने के बाद उनका दिन युवा संवाद के साथ आगे बढ़ा। भाजपा ने नबीन के इस दौरे को एक ओर आगामी पंचायतीराज चुनाव की संगठनात्मक तैयारियों से जोड़ा, वहीं दूसरी ओर बिड़ला ऑडिटोरियम के कार्यक्रम को युवाओं से जुड़ाव बढ़ाने की व्यापक रणनीति का हिस्सा बताया। संवाद में युवाओं के भविष्य और नेतृत्व पर रहा जोर युवा संवाद का मुख्य स्वर राजनीति, नेतृत्व, राष्ट्र निर्माण और भविष्य की आकांक्षाओं के इर्द-गिर्द रहा। नितिन नबीन ने कार्यक्रम को औपचारिक भाषण तक सीमित न रखते हुए सवाल-जवाब और नारों के जरिए युवाओं को शामिल करने की कोशिश की। राजनीति में आने की इच्छा को लेकर कम हाथ उठने पर उनकी प्रतिक्रिया ने कार्यक्रम में युवा नेतृत्व की कमी और राजनीतिक भागीदारी जैसे मुद्दे को भी सामने रखा। वहीं विकसित भारत 2047 के संदर्भ में उन्होंने युवाओं को लंबी अवधि की राष्ट्रीय विकास प्रक्रिया से जोड़ने का प्रयास किया।
Read more 26th Sep 2026
राजस्थान न्यूज़: जयपुर। जयपुर नगर निगम के डिप्टी मेयर चुनाव से पहले भाजपा और कांग्रेस के बीच दावों और प्रतिदावों का दौर तेज हो गया है। भाजपा ने सरोज कंवर को उम्मीदवार बनाया है, जबकि कांग्रेस की ओर से सलमान मंसूरी मैदान में हैं। राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से जारी कार्यक्रम के अनुसार जयपुर में डिप्टी मेयर पद का चुनाव 26 सितंबर को होना है। इससे एक दिन पहले मेयर पद के मतदान के दौरान भी भाजपा और कांग्रेस के बीच नगर निगम मुख्यालय पर तनातनी देखने को मिली थी। डिप्टी मेयर चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस विधायक अमीन कागजी ने भाजपा उम्मीदवार सरोज कंवर को लेकर बड़ा दावा किया है। कागजी ने कहा कि भाजपा के 40 से अधिक पार्षद अपनी ही पार्टी की उम्मीदवार का विरोध कर रहे हैं और कांग्रेस को इसका फायदा मिलने की उम्मीद है। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस का उम्मीदवार चुनाव जीतेगा। हालांकि भाजपा के कितने पार्षद वास्तव में उम्मीदवार से असंतुष्ट हैं, इसकी स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल सामने नहीं आई है। अमीन कागजी बोले- युवा चेहरे को दिया मौका कांग्रेस विधायक अमीन कागजी ने कहा कि उनकी पार्टी ने डिप्टी मेयर पद के लिए युवा चेहरे सलमान मंसूरी पर भरोसा जताया है। उन्होंने इसे कांग्रेस की नई पीढ़ी को आगे लाने की रणनीति से जोड़ते हुए दावा किया कि यदि पार्टी के पक्ष में मतदान हुआ तो सलमान मंसूरी इतिहास रच सकते हैं।सलमान मंसूरी वार्ड नंबर 137 से पार्षद हैं और दूसरी बार नगर निगम पहुंचे हैं। इसके उलट भाजपा की उम्मीदवार सरोज कंवर पहली बार पार्षद बनी हैं। ऐसे में मुकाबला एक अनुभवी पार्षद और पहली बार निर्वाचित महिला पार्षद के बीच है। बगड़ी का पलटवार- पार्षदों की राय के बाद ही उम्मीदवार तय कांग्रेस के दावे पर भाजपा के प्रदेश महामंत्री श्रवण सिंह बगड़ी ने पलटवार किया है। बगड़ी का कहना है कि पार्टी ने पार्षदों से राय लेने के बाद ही अपना उम्मीदवार तय किया है और भाजपा में किसी बड़े विरोध की स्थिति नहीं है। इससे पहले भी बगड़ी कह चुके हैं कि निकायों में उम्मीदवार चयन संगठनात्मक प्रक्रिया और स्थानीय स्तर की राय के आधार पर किया जा रहा है।बगड़ी ने दावा किया कि कांग्रेस के कई पार्षद भाजपा के संपर्क में हैं और वे भाजपा उम्मीदवार के पक्ष में मतदान करना चाहते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें उम्मीद है कि भाजपा को मेयर चुनाव की तुलना में डिप्टी मेयर के चुनाव में अधिक वोट मिल सकते हैं। यह भाजपा का राजनीतिक दावा है और मतदान के वास्तविक आंकड़ों से ही इसकी स्थिति स्पष्ट होगी। अब नजर क्रॉस वोटिंग पर दोनों दलों के नेताओं के दावों के बाद अब सबसे ज्यादा नजर संभावित क्रॉस वोटिंग पर है। हाल के राजस्थान निकाय चुनावों में कई जगह पार्टी संख्या बल से अलग परिणाम देखने को मिले हैं और कुछ निकायों में क्रॉस वोटिंग चर्चा का विषय रही है। इसी वजह से जयपुर के डिप्टी मेयर चुनाव में भी प्रत्येक पार्षद के वोट को लेकर दोनों खेमों में सतर्कता है। भाजपा सरोज कंवर के माध्यम से महिला और ओबीसी प्रतिनिधित्व का संदेश दे रही है, जबकि कांग्रेस ने दूसरी बार के पार्षद सलमान मंसूरी को उम्मीदवार बनाया है। दोनों पार्टियों के नेता अपने-अपने पक्ष में अतिरिक्त समर्थन का दावा कर रहे हैं, लेकिन इन दावों की असली परीक्षा मतदान में होगी। मेयर चुनाव के एक दिन बाद फिर आमने-सामने भाजपा-कांग्रेस जयपुर नगर निगम में एक दिन पहले हुए मेयर चुनाव के दौरान भी भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने आ गए थे। कांग्रेस नेताओं ने मतदान स्थल की व्यवस्थाओं को लेकर विरोध जताया था और नगर निगम मुख्यालय के बाहर धरना भी दिया था। कांग्रेस विधायक अमीन कागजी भी उस विरोध में शामिल थे। अब डिप्टी मेयर चुनाव ने राजनीतिक माहौल को फिर गर्म कर दिया है। कांग्रेस भाजपा में अंदरूनी विरोध का दावा कर रही है, जबकि भाजपा उलटे कांग्रेस पार्षदों से समर्थन मिलने की बात कह रही है। ऐसे में मतदान के बाद आने वाला वोटों का आंकड़ा ही बताएगा कि दोनों दलों के दावों में कितना दम था।
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राजस्थान न्यूज़: कोटा/श्रीगंगानगर। राजस्थान के निकाय प्रमुख चुनावों में शुक्रवार को तीन और परिणाम सामने आए। कोटा नगर निगम में भाजपा प्रत्याशी अनुसुइया गोस्वामी मेयर निर्वाचित हुईं। उन्हें कुल 65 वोट मिले, जबकि कांग्रेस प्रत्याशी सुनीता सुमन को 35 वोट मिले। इस तरह मेयर पद का फैसला 30 मतों के अंतर से हुआ। इसके अलावा श्रीगंगानगर जिले की श्रीविजयनगर नगरपालिका में कांग्रेस के सुशील कुमार मीढ़ा अध्यक्ष निर्वाचित हुए, जबकि कोटा जिले की सुकेत नगरपालिका में भाजपा के जितेंद्र चोपड़ा अध्यक्ष बने। कोटा में शुक्रवार सुबह से मेयर पद के लिए मतदान हुआ था। यहां भाजपा ने वार्ड नंबर 98 की पार्षद अनुसुइया गोस्वामी और कांग्रेस ने वार्ड नंबर 17 की पार्षद सुनीता सुमन को प्रत्याशी बनाया था। चुनाव से पहले 100 सदस्यीय कोटा नगर निगम में भाजपा के 57, कांग्रेस के 39 और चार निर्दलीय पार्षद निर्वाचित हुए थे। कोटा में 65-35 रहा अंतिम स्कोर मतगणना पूरी होने के बाद अनुसुइया गोस्वामी को 65 और सुनीता सुमन को 35 मत मिले। चुनाव से पहले भाजपा के अपने 57 पार्षद थे। परिणाम के आंकड़ों के हिसाब से भाजपा प्रत्याशी को पार्टी की निर्वाचित संख्या से आठ वोट अधिक मिले। दूसरी ओर कांग्रेस के 39 पार्षद निर्वाचित हुए थे, जबकि उसकी प्रत्याशी को 35 मत मिले। हालांकि मतदान गुप्त होने के कारण यह निश्चित तौर पर नहीं कहा जा सकता कि अतिरिक्त अथवा कम हुए मत किन पार्षदों के थे। परिणाम से केवल इतना स्पष्ट है कि अंतिम मतदान का आंकड़ा शुरुआती दलगत संख्या से अलग रहा। वार्ड 98 से पार्षद हैं अनुसुइया गोस्वामी भाजपा ने मेयर चुनाव के लिए नामांकन के अंतिम चरण में अनुसुइया गोस्वामी को प्रत्याशी घोषित किया था। वहीं कांग्रेस ने सुनीता सुमन को मैदान में उतारा था। दोनों के बीच सीधा मुकाबला था। कोटा के तीन वार्डों—11, 44 और 87—में ईवीएम से जुड़ी तकनीकी समस्या के कारण पहले चुनाव प्रक्रिया प्रभावित हुई थी। पुनर्मतदान और परिणाम के बाद नगर निगम की पूरी 100 सदस्यीय तस्वीर स्पष्ट हुई और महापौर चुनाव 25 सितंबर को कराया गया। श्रीविजयनगर में कांग्रेस के सुशील मीढ़ा बने अध्यक्ष उधर श्रीगंगानगर जिले की श्रीविजयनगर नगरपालिका में कांग्रेस प्रत्याशी सुशील कुमार मीढ़ा अध्यक्ष निर्वाचित हुए। श्रीविजयनगर का चुनाव पहले से ही राजनीतिक और कानूनी विवादों के कारण चर्चा में रहा था।चुनाव से पहले तीन पार्षदों के कथित अपहरण को लेकर विवाद हुआ था। पुलिस ने बाद में पार्षदों को बरामद किया था, जबकि घटना से जुड़े कुछ आरोपों की पुलिस स्तर पर स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई थी। सुशील मीढ़ा ने इस चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मामले में राजस्थान हाईकोर्ट का भी रुख किया था। हाईकोर्ट ने 21 सितंबर को आदेश देते हुए अध्यक्ष पद के चुनाव परिणाम को याचिका के अंतिम निर्णय के अधीन रखने को कहा था। सुकेत में भाजपा के जितेंद्र चोपड़ा बने पहले अध्यक्ष कोटा जिले की नवगठित सुकेत नगरपालिका में भाजपा के जितेंद्र चोपड़ा अध्यक्ष निर्वाचित हुए। यह सुकेत नगरपालिका का पहला अध्यक्ष चुनाव था।चुनाव से पहले सार्वजनिक आंकड़ों के अनुसार सुकेत में 25 वार्ड थे। कांग्रेस के 11, भाजपा के 10 और चार निर्दलीय पार्षद बताए गए थे। अध्यक्ष पद के लिए भाजपा ने जितेंद्र चोपड़ा और कांग्रेस ने उमरदीन खान को प्रत्याशी बनाया था। बहुमत के लिए 13 मत जरूरी थे, इसलिए मतदान से पहले निर्दलीय पार्षदों की भूमिका पर खास नजर थी। तीन अलग-अलग निकाय, अलग राजनीतिक नतीजे शुक्रवार के इन परिणामों में कोटा नगर निगम और सुकेत नगरपालिका में भाजपा प्रत्याशी निर्वाचित हुए, जबकि श्रीविजयनगर नगरपालिका अध्यक्ष पद कांग्रेस के खाते में गया। कोटा में मेयर चुनाव के बाद अब 26 सितंबर को डिप्टी मेयर पद का चुनाव निर्धारित है। राज्य निर्वाचन आयोग के संशोधित कार्यक्रम के अनुसार जयपुर, जोधपुर और कोटा में महापौर चुनाव 25 सितंबर और उपमहापौर चुनाव अगले दिन होना है।
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अजमेर न्यूज़: 1100 वर्ष पूर्व स्थापित मंदिर की बड़ी है मान्यता, दूर दराज से पहुंचते हैं हजारों श्रद्धालु
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अजमेर न्यूज़: 1968 से कस्बे की धार्मिक संस्था श्री ब्रह्म पुष्कर सेवा संघ कर रही है इस अनूठी परंपरा का निर्वहन
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अजमेर न्यूज़: 10 टीमें 8 - 8 वार्डो में जाकर घूम रही गायों का करेंगीं प्राथमिक उपचार
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राष्ट्रीय न्यूज़: मुंबई। बॉलीवुड के स्टार कपल दीपिका पादुकोण और रणवीर सिंह के घर एक बार फिर खुशियों ने दस्तक दी है। दोनों शनिवार, 19 सितंबर 2026 को दूसरी बार माता-पिता बने हैं। दीपिका ने दूसरी बेटी को जन्म दिया है। कपल ने सोशल मीडिया पर एक बेहद प्यारा पोस्ट साझा कर अपने फैंस के साथ यह खुशखबरी शेयर की। दीपिका और रणवीर ने अपने संयुक्त इंस्टाग्राम पोस्ट में नवजात बच्ची के छोटे-छोटे फुटप्रिंट की तस्वीर शेयर की। इसके साथ उन्होंने लिखा—“Welcome baby girl! 19/9/2026. Dua, Deepika and Ranveer.” पोस्ट में नजर से बचाने वाला इमोजी भी लगाया गया है। हालांकि कपल ने फिलहाल अपनी दूसरी बेटी का नाम सार्वजनिक नहीं किया है। दुआ बनी बड़ी बहन दीपिका और रणवीर की पहली बेटी दुआ पादुकोण सिंह का जन्म 8 सितंबर 2024 को हुआ था। अब करीब दो साल बाद परिवार में दूसरी बेटी के आने से दुआ बड़ी बहन बन गई हैं। खास बात यह है कि दोनों बेटियों का जन्म सितंबर महीने में हुआ है। कपल की ओर से दूसरी बेटी के जन्म की घोषणा होते ही सोशल मीडिया पर बधाइयों का सिलसिला शुरू हो गया। फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोगों और फैंस ने दोनों को शुभकामनाएं दीं और नए मेहमान का स्वागत किया। अप्रैल में की थी दूसरी प्रेग्नेंसी की घोषणा दीपिका और रणवीर ने इसी साल अप्रैल में अपनी दूसरी प्रेग्नेंसी की जानकारी सोशल मीडिया पर साझा की थी। उस समय उन्होंने एक खास पोस्ट के जरिए फैंस को बताया था कि उनका परिवार एक बार फिर बढ़ने वाला है। अब सितंबर में दूसरी बेटी के जन्म के साथ कपल के घर एक और नन्ही सदस्य आ गई है। शादी के छह साल बाद चार लोगों का हुआ परिवार दीपिका पादुकोण और रणवीर सिंह ने नवंबर 2018 में इटली में शादी की थी। शादी के करीब छह साल बाद सितंबर 2024 में दोनों पहली बार माता-पिता बने और बेटी दुआ का स्वागत किया। अब दूसरी बेटी के जन्म के बाद उनका परिवार चार सदस्यों का हो गया है। दीपिका और रणवीर अपने पारिवारिक जीवन को काफी निजी रखते हैं और दुआ की तस्वीरें भी सीमित मौकों पर ही साझा की हैं। दूसरी बेटी के जन्म की जानकारी भी उन्होंने बेहद सादगी से फुटप्रिंट वाली पोस्ट के जरिए दी है। राधाष्टमी के दिन आई नन्ही परी इस बार 19 सितंबर को राधाष्टमी का पर्व भी मनाया जा रहा है। ऐसे में दीपिका और रणवीर की दूसरी बेटी का जन्म इसी शुभ अवसर पर हुआ है। इसे लेकर सोशल मीडिया पर फैंस लगातार कपल को बधाई दे रहे हैं। फिलहाल कपल ने नवजात बच्ची की तस्वीर या नाम साझा नहीं किया है। फैंस अब यह जानने के लिए उत्सुक हैं कि दीपिका और रणवीर अपनी दूसरी बेटी का क्या नाम रखते हैं।
Read more 20th Sep 2026
राष्ट्रीय न्यूज़: तिरुपति/नई दिल्ली। तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (TTD) के प्रसिद्ध श्रीवारी लड्डू प्रसाद में इस्तेमाल होने वाले घी की कथित मिलावट के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने सुकृति फूड्स प्राइवेट लिमिटेड के प्रमोटर कैलाश चंद मंगला को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत गिरफ्तार किया है। ED के मुताबिक मंगला को हैदराबाद जोनल कार्यालय ने 17 सितंबर को हिरासत में लिया था और शुक्रवार को जारी बयान में कार्रवाई की जानकारी दी गई। बाद में उन्हें विशाखापत्तनम की विशेष PMLA अदालत में पेश किया गया, जहां से न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। ED का आरोप है कि TTD को जिस सामग्री की आपूर्ति ‘एगमार्क स्पेशल ग्रेड काउ घी’ बताकर की गई, उसमें वास्तविक गाय के घी के स्थान पर रिफाइंड पाम ऑयल, पाम कर्नेल ऑयल, पामोलिन और कई रासायनिक पदार्थों का इस्तेमाल किया गया। एजेंसी ने MG-90, मोनोग्लिसराइड्स, Myvacet Soft 400 और acetic acid ester जैसे पदार्थों का भी उल्लेख किया है। जांच एजेंसी का कहना है कि इन सामग्रियों को मिलाकर ऐसा उत्पाद तैयार किया गया जिसे रिकॉर्ड में शुद्ध गाय के घी के रूप में दिखाया गया। ₹230 करोड़ की कथित सप्लाई, ₹96 करोड़ का घी मंगला से जुड़ा ED की जांच के अनुसार वर्ष 2019 से 2024 के बीच TTD को कथित रूप से करीब ₹230 करोड़ मूल्य का मिलावटी घी सप्लाई किया गया। एजेंसी का आरोप है कि इसमें लगभग ₹96 करोड़ मूल्य का मिलावटी घी कैलाश चंद मंगला की इकाई में तैयार किया गया था। इसलिए ₹230 करोड़ की पूरी राशि को अकेले सुकृति फूड्स द्वारा तैयार घी की रकम मानना सही नहीं होगा; ED ने व्यापक कथित सप्लाई नेटवर्क के लिए ₹230 करोड़ और मंगला से जुड़े निर्माण के लिए करीब ₹96 करोड़ का आंकड़ा बताया है। जांच एजेंसी ने मंगला को इस कथित नेटवर्क का सह-साजिशकर्ता बताया है। ED का दावा है कि उन्होंने मिलावट में इस्तेमाल होने वाली सामग्री जुटाने, अपने परिसर में कथित मिलावटी घी तैयार करने और इसे अलग-अलग कारोबारी इकाइयों के माध्यम से सप्लाई कराने में भूमिका निभाई। एजेंसी ने Sri Vyshnavi Dairy Specialities, Malganga Milk & Agro Products और A.R. Dairy Foods जैसी इकाइयों के जरिए सप्लाई समन्वय किए जाने का आरोप भी लगाया है।खरीद-बिक्री के फर्जी रिकॉर्ड बनाने का भी आरोप ED के मुताबिक कथित मिलावट को छिपाने के लिए घी और रिफाइंड पाम ऑयल की खरीद-बिक्री से जुड़े रिकॉर्ड में भी हेरफेर किया गया। एजेंसी का आरोप है कि ऐसे दस्तावेज तैयार किए गए जिनसे यह दिखाया जा सके कि उत्पादन और सप्लाई वास्तविक गाय के घी की थी, जबकि जांच में दूसरी सामग्री के उपयोग का दावा सामने आया। इन आरोपों की अंतिम कानूनी पुष्टि अदालत में साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही होगी। मनी लॉन्ड्रिंग की यह जांच तिरुपति ईस्ट पुलिस की उस FIR से जुड़ी है जिसमें कथित आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, जालसाजी और भ्रष्टाचार के जरिए TTD को मिलावटी घी सप्लाई करने के आरोप लगाए गए थे। उसी कथित अपराध से पैदा हुई रकम और वित्तीय लेन-देन की जांच ED PMLA के तहत कर रही है।इससे पहले भोले बाबा ऑर्गेनिक डेयरी के प्रमोटर की भी गिरफ्तारी कैलाश चंद मंगला इस मामले में गिरफ्तार होने वाले पहले कारोबारी नहीं हैं। ED इससे पहले भोले बाबा ऑर्गेनिक डेयरी मिल्क से जुड़े प्रमोटर एवं निदेशक विपिन जैन को भी इसी जांच में गिरफ्तार कर चुकी है। एजेंसी अब कथित सप्लाई चेन, भुगतान, विभिन्न कारोबारी संस्थाओं और घी के निर्माण एवं बिक्री रिकॉर्ड की जांच आगे बढ़ा रही है।‘पशु चर्बी’ के पुराने विवाद से अलग है ED का मौजूदा दावा तिरुपति लड्डू विवाद में एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। ED के मौजूदा बयान में कथित मिलावट के रूप में पाम आधारित तेल और रासायनिक पदार्थों का उल्लेख किया गया है; एजेंसी ने इस कार्रवाई में पशु चर्बी मिलने का दावा नहीं किया है। इससे पहले CBI द्वारा गठित SIT की जांच में जांचे गए नमूनों में पशु चर्बी की मौजूदगी स्थापित नहीं होने की रिपोर्ट सामने आई थी, हालांकि घी में अन्य प्रकार की मिलावट और खरीद प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की जांच अलग विषय रही है।इसलिए मौजूदा ED कार्रवाई को सीधे पुराने “animal fat” आरोप की पुष्टि के रूप में प्रस्तुत करना सही नहीं होगा। ताजा कार्रवाई का केंद्र कथित रूप से पाम ऑयल, पामोलिन, पाम कर्नेल ऑयल तथा अन्य पदार्थों का इस्तेमाल कर गाय के घी के नाम पर उत्पाद तैयार करने और उसके वित्तीय लेन-देन पर है। रोज तैयार होते हैं 4 लाख से ज्यादा श्रीवारी लड्डू तिरुपति का श्रीवारी लड्डू दुनिया के सबसे प्रसिद्ध धार्मिक प्रसादों में शामिल है। TTD की जून 2026 की आधिकारिक जानकारी के अनुसार मंदिर प्रशासन प्रतिदिन 4 लाख से अधिक लड्डू तैयार करता है। मई में औसतन करीब 4.08 लाख लड्डू प्रतिदिन बनाए गए थे। अकेले जून 2026 में रिकॉर्ड 1.26 करोड़ से अधिक लड्डुओं की बिक्री हुई।TTD के मुताबिक लड्डू निर्माण में रोजाना लगभग 16 टन घी सहित करीब 68 टन कच्ची सामग्री इस्तेमाल होती है। इतनी बड़ी मात्रा में प्रसाद तैयार होने के कारण घी की गुणवत्ता और सप्लाई चेन की निगरानी सीधे करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और खाद्य गुणवत्ता से जुड़ा विषय है।अब मनी ट्रेल और सप्लाई नेटवर्क की जांच कैलाश चंद मंगला को न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के बाद ED की जांच अब कथित मिलावट से पैदा हुई आय, कारोबारी संस्थाओं के बीच हुए भुगतान और सप्लाई नेटवर्क पर केंद्रित है। एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कथित मिलावटी उत्पाद किन-किन संस्थाओं के जरिए TTD तक पहुंचा और इससे जुड़े वित्तीय लाभ का प्रवाह किस तरह हुआ। फिलहाल कैलाश चंद मंगला के खिलाफ लगाए गए ये सभी आरोप ED की जांच का हिस्सा हैं। गिरफ्तारी या एजेंसी का आरोप अपने आप में दोषसिद्धि नहीं है और मामले की अंतिम आपराधिक जिम्मेदारी अदालत में उपलब्ध साक्ष्यों तथा न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर तय होगी।
Read more 20th Sep 2026
गुप्त ध्वनि किरणों के साथ ओशो पर किसने हमला किया?...
गुप्त ध्वनि किरणों के साथ ओशो पर किसने हमला किया?... * ओशो के निजी दंत चिकित्सक देवगेट ओशो की मृत्यु से 4 दिन पहले हुई घटनाओं के बारे में बात करते हैं (शरीर को छोड़कर)... * 15 aजनवरी, 1990 को, मेरे जन्मदिन पर, मुझे शुन्यो से एक संदेश मिला: ओशो चाहते थे कि मैं उनके पेट का एक्स-रे ले। हम दंaत कक्ष में मिले। ओशो का शरीर पतला और बेकार लग रहा था, फिर भी मैंने उसे शक्तिशाली रूप से उपस्थित महसूस किया। मुझे शुन्यो से पता था कि वह हर दिन बीस घंटे से अधिक सो रहा था, हर शाम बुद्ध हॉल में कुछ क़ीमती मिनटों के लिए अपनी शारीरिक ऊर्जा को बचा रहा था। ओशो नेa मुझे बताया कि उसके हमलावरों की आवाज़ से उसका शरीर बहुत कमजोर हो गया था। उन्होंने कहा कि उनमें से शायद तीन, दो पुरुष और एक महिला, ध्वनि तरंगों पर ध्यानaa केंद्रित करने और अपने शरीर को लक्षित करने के लिए एक विशेष गठन में बैठे थे। यहां भारत में प्राचीन योगिक प्रथाएं हैं जहां लोग कुछ ध्वनियों, कुछ मंत्रों को जानते हैं, जो लोगों को नुक़सान पहुंचाने के लिए ध्वनि को केंद्रित कर सकते हैं। लेकिन मुझ पर हमला करaaने वाले ये लोग भारतीय नहीं हैं। वे वही लोग हैं जिन्होंने अमेरिका में पहले मुझे मारने की कोशिश की थी। वे तब सफल नहीं हो सके, और अब वे जो शुरू किया उसे पूरा कर ने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने मुझे बोलने से रोकने के लिए ज़हर की कोशिश की लेकिन मैं जारी रखने में कामयाब रहा। अब, पांच साल बाद वे वापस आ गए हैं। उन्होंने पहले बुद्ध हॉल में अपनी ध्वनि किरणों का उपयोग मेरे दिमाग़ पर हमला करने के लिए किया लेकिन मैं अपने दिमाग़ में नहीं हूं। मैं एक नो-मन हूं और उनकी आवाज़ का बहुत कम प्रभाव था। इसलिए उन्होंने अपनी रणनीति बदल दी, अब वे मेरे शरीर पर हमला कर रहे हैं। मेरे गरीब शरीर को उनकी किरणों से कोई सुरक्षा नहीं है। हर दिन यह कमजोर होता जाता है। वे मुझे मार नहीं सकते लेकिन वे मेरे शरीर को नुक़सान पहुंचा सकते हैं। अभी मेरे जिगर के क्षेत्र में बहुत दर्द हो रहा है। क्या आप इसे एक्स-रे कर सकते हैं? दुख की बात है, मैंने समझाया कि मेरी दंत एक्स-रे मशीन शायद अपर्याप्त थी क्योंकि यह केवल दांतों और जबड़े की छोटी फिल्में ले सकती थी, लेकिन हम कोशिश कर सकते थे। अमृतो को हमारे पास सबसे बड़ी एक्स-रे फ़िल्म मिली, जबकि मैंने इसकी बीम को चौड़ा करने के लिए डेंटल एक्स-रे मशीन के साथ जिग्गल किया। मैंने वह करने की कोशिश की जो ओशो पूछ रहा था। मैंने उसके जिगर के क्षेत्र की एक तस्वीर ली और फिर दंत विकास में बड़ी फ़िल्म विकसित करने में कामयाब रहा टैंक जिसे छोटी इंट्रा-ओरल डेंटल फ़िल्मों के लिए डिज़ाइन किया गया था, लेकिन परिणामी छवि धुंधली और अस्पष्ट थी। यह आख़िरी बार था जब मैंने ओशो को उसके भौतिक शरीर में देखा था। 19 जनवरी को शाम 4:30 बजे थे: मैं अपनी प्रेमिका के साथ अपने कमरे में था जब दरवाजे पर एक ज़रूरी दस्तक हुई। मनीषा, पीला और तनावग्रस्त दिख रही थी, ने पूछा कि क्या वह मेरे कमरे के फ़ोन का उपयोग कर सकती है। मुझे पता था कि वह केवल पूछेगी कि क्या कुछ असामान्य हो रहा है। अस्थायी सचिव के रूप में कार्य करते हुए वह इनर सर्कल के सदस्यों को फ़ोन कर रही थी और उन्हें कृष्णा हाउस में एक असाधारण बैठक में तुरंत आने के लिए कह रही थी। ओशो ने पंद्रह महीने पहले इक्कीस लोगों की एक कम्यून प्रबंधन टीम की स्थापना की थी, इसे इनर सर्कल का नाम दिया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका काम कम्यून के दिन-प्रतिदिन चलने का प्रबंधन करना था। मैं मूल चयन में नहीं था, लेकिन कुछ महीने बाद मुझे शामिल होने के लिए कहा गया था। फ़ोन करने के बाद, मनीषा ने कहा, “गीट, तुमने सुना कि मैं दूसरों को क्या बता रहा था। बैठक कृष्णा हाउस की छत पर ब्लू रूम में है। क्या आप वहां तुरंत जा सकते हैं?” इससे पहले कि मैं कोई सवाल पूछ पाता, वह जल्दी से गलियारे में चली गई, स्पष्ट रूप से एक और महत्वपूर्ण कार्य में शामिल थी। मैंने दोपहर के अधिकांश समय अजीब तरह से विपुल महसूस किया था। बाहरी मामलों की उथल-पुथल के बावजूद मैं कई दिनों से उत्साहित महसूस कर रहा था। मेरे दिल में ख़ुशी का एक अकथनीय नृत्य था। अंदर से मुझे उत्साह, आनंद महसूस हुआ। ब्लू रूम में पहुंचने पर, मैंने देखा कि अधिकांश इनर सर्कल पहले से ही वहां इकट्ठा हो चुके थे। माहौल तनावपूर्ण और तनावपूर्ण था। मेरा अपना उत्साह जगह से बाहर लग रहा था। मैं बैठ गया और इंतज़ार किया। कुछ मिनटों के बाद जयेश ने अमृतो के साथ प्रवेश किया। यह देखने के लिए संक्षेप में चारों ओर देखते हुए कि हम सभी मौजूद हैं, उन्होंने एक दृढ़, हालांकि शांत आवाज़ में कहा, “मुझे लगता है कि इसे लपेटने का कोई तरीक़ा नहीं है। मैं आपको सीधे बताऊंगा। ओशो ने कुछ समय पहले लगभग 4:45 बजे अपना शरीर छोड़ दिया था दोपहर।” स्तब्ध, मैंने अपनी घड़ी को देखा। शाम के 5:15 बजे थे। उपस्थित दो या तीन लोग रोने लगे। जयेश ने जल्दी से बीच में टोका, “देखो, मुझे तुम्हारी सारी मदद की ज़रूरत है। कृपया अभी तक अलग न हों। मुझे आप सभी की ज़रूरत है कि ओशो के भेजने को उतना ही सुंदर बनाने में मदद करें जितना वह हकदार है। यह आख़िरी चीज है जो हम उसके लिए कर सकते हैं भौतिक शरीर, चलो इसे अद्भुत बनाते हैं। उसने मुझे ठीक से बताया कि वह कैसे चाहता है कि ऐसा हो। उसने मुझे हर चीज के लिए विस्तृत निर्देश दिए, लेकिन मुझे यहां हर किसी की मदद की ज़रूरत है।” जयेश के शब्दों को सुनकर मेरा पहले का उत्साह सदमे में बदल गया था, लेकिन मैंने ओशो को अपने लोगों के साथ अपने अंतिम उत्सव का आनंद लेने में सक्षम बनाने के लिए हमारी मदद के लिए जयेश की अपील को स्पष्ट रूप से सुना। जैसे ही मैंने ब्लू रूम छोड़ा, जयेश ने मुझे बताया कि ओशो ने अनुरोध किया था कि मैं उनके शरीर को जलते हुए घाटों तक ले जाने के लिए एक वाहक बनूं। गतिविधि और भ्रमित भावनाओं के एक धुंध में मुझे याद है कि ओशो के इस अंतिम उपहार के लिए बेहद आभारी महसूस कर रहा था। - स्वामी देवगीत पुस्तक : ओशो - द फर्स्ट बुद्ध इन द डेंटल चेयर अध्याय: 17 अध्याय का नाम: ओशो का अंतिम दंत नाटक: अधिनियम V अंतिम सुनहरी झलक
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