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January 28, 2026
यूजीसी कानून के विरोध में कड़ेल पंचायत में उबाल, भाजपा बूथ अध्यक्षों के इस्तीफों से बढ़ा आंदोलन
पुष्कर के के निकटवर्ती गांव कड़ेल पंचायत में प्रस्तावित विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) कानून को लेकर कड़ेल पंचायत क्षेत्र में विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। ग्रामीणों ने एकजुट होकर इस कानून के खिलाफ खुला आक्रोश जताया और इसे ग्रामीण तथा सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों के हितों के प्रतिकूल बताया। पंचायत क्षेत्र में आयोजित बैठकों और चर्चाओं में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने हिस्सा लेकर कानून को वापस लेने की मांग की। ग्रामीणों का कहना है कि शिक्षा सुधार के नाम पर लाया जा रहा यह कानून शिक्षा व्यवस्था को अत्यधिक केंद्रीकृत करने की दिशा में कदम है। उनका आरोप है कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा के अवसर सीमित हो जाएंगे। साथ ही छोटे कॉलेजों और स्थानीय शिक्षण संस्थानों के अस्तित्व पर भी संकट खड़ा हो सकता है, जो अब तक ग्रामीण विद्यार्थियों के लिए शिक्षा का प्रमुख माध्यम रहे हैं। इस विरोध को उस समय और मजबूती मिली जब भाजपा से जुड़े मझेवला ग्राम, डुंगरिया खुर्द ग्राम और रेवत ग्राम के बूथ अध्यक्षों ने यूजीसी कानून के विरोध में अपने-अपने पदों से इस्तीफा सौंप दिया। इस्तीफा देने वाले भाजपा बूथ अध्यक्ष नरेंद्र सिंह राठौड़ ओर शिवनारायण सिंह राठौड़ ने स्पष्ट कहा कि वे ऐसी किसी नीति का समर्थन नहीं कर सकते, जो गांव के बच्चों के भविष्य को प्रभावित करे। ग्रामीणों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि इस कानून से शिक्षा का व्यावसायीकरण बढ़ेगा और उच्च शिक्षा आम ग्रामीण परिवारों की पहुंच से बाहर हो जाएगी। उनका कहना है कि इससे मध्यम और निम्न आय वर्ग के विद्यार्थियों पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा, जिससे शिक्षा में समान अवसर का सिद्धांत कमजोर होगा। इस्तीफों के बाद क्षेत्र में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने समय रहते इस कानून पर पुनर्विचार नहीं किया, तो आंदोलन को पंचायत स्तर से आगे बढ़ाकर जिला और राज्य स्तर तक ले जाया जाएगा। ग्रामीणों की मांग है कि शिक्षा नीति ऐसी हो, जो गांव, गरीब और सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों को आगे बढ़ाने वाली हो, न कि उनके शैक्षणिक अवसरों को सीमित करने वाली।
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