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राजस्थान

राजस्थान न्यूज़: चन्द्रेसल मठ महंत हत्याकांड: पुजारी समेत 7 आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में चालान पेश, 10 सितंबर को सुनवाई

राजस्थान न्यूज़: कोटा। कोटा के बहुचर्चित चन्द्रेसल मठ के महंत देवानंद महाराज हत्याकांड में बोरखेड़ा थाना पुलिस ने अनुसंधान पूरा कर लिया है। पुलिस ने मामले में पुजारी सहित सात आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में चालान पेश किया है। इसके अलावा प्रकरण में निरुद्ध किए गए एक नाबालिग के खिलाफ भी चालान पेश किया गया है। न्यायालय ने मामले में अगली सुनवाई के लिए 10 सितंबर की तारीख तय की है। इस हत्याकांड ने जून महीने में कोटा सहित पूरे प्रदेश में सनसनी फैला दी थी। महंत देवानंद महाराज की मठ के भीतर उनके कमरे में धारदार हथियार से हमला कर हत्या कर दी गई थी। इसके बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू करते हुए कई संदिग्धों से पूछताछ की और बाद में सात आरोपियों को गिरफ्तार किया। 5 जून की रात हुई थी महंत देवानंद महाराज की हत्या बोरखेड़ा थानाधिकारी अजीत बागडोलिया के अनुसार घटना 5 जून की रात की है। महंत देवानंद महाराज मठ के अपने कक्ष में सो रहे थे। इसी दौरान हमलावरों ने उन पर चाकू से कई वार किए, जिससे उनकी मौत हो गई। घटना के अगले दिन 6 जून को चन्द्रेसल मठ के कोषाध्यक्ष ब्रजमोहन गुर्जर की रिपोर्ट पर बोरखेड़ा थाना पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज किया था। इसके बाद पुलिस ने अलग-अलग पहलुओं से जांच शुरू की। पुजारी सहित सात आरोपी किए गए गिरफ्तार पुलिस की जांच के बाद इस मामले में संतोष कुमार राय, पूर्व संत नन्दनवन उर्फ नन्हें कुमार, महावीर प्रसाद पारेता, आदित्य वर्मा, मीकल जॉर्ज, अंकित बैरवा और पुष्पेन्द्र सिंह उर्फ प्रिंस को आरोपी बनाया गया। पुलिस के अनुसार मीकल जॉर्ज आरोपी आदित्य वर्मा की पत्नी है। मामले में एक नाबालिग की भूमिका सामने आने के बाद उसे भी निरुद्ध किया गया था। अब अनुसंधान पूरा होने के बाद पुलिस ने सभी सात वयस्क आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र पेश कर दिया है। निरुद्ध नाबालिग के संबंध में भी नियमानुसार चालान प्रस्तुत किया गया है। केस ऑफिसर स्कीम में लिया गया मामला चन्द्रेसल मठ के महंत की हत्या के इस चर्चित मामले को पुलिस ने केस ऑफिसर स्कीम के तहत लिया है। इसका उद्देश्य गंभीर और संवेदनशील मामलों में प्रभावी पैरवी और न्यायिक प्रक्रिया के दौरान प्रकरण की नियमित मॉनिटरिंग करना है। पुलिस की ओर से अब तक की जांच में जुटाए गए दस्तावेज, परिस्थितिजन्य साक्ष्य और अन्य सामग्री चालान के साथ न्यायालय के समक्ष पेश की गई है। शुरुआत में नहीं मिला था स्पष्ट सुराग महंत देवानंद महाराज की हत्या के बाद शुरुआती दौर में पुलिस के सामने हमलावरों की पहचान को लेकर बड़ी चुनौती थी। घटना मठ के भीतर हुई थी और पुलिस ने घटनास्थल से मिले साक्ष्यों, आरोपियों की गतिविधियों तथा अन्य तकनीकी और परिस्थितिजन्य तथ्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ाई। हत्या के कुछ दिनों बाद पुलिस ने मामले में गिरफ्तारियां शुरू कर दी थीं। उस समय पुलिस जांच में मठ और उससे जुड़े विवादों सहित विभिन्न पहलुओं की पड़ताल किए जाने की बात सामने आई थी। अब न्यायालय में चलेगी आगे की कार्रवाई पुलिस की ओर से चालान पेश किए जाने के साथ ही मामले की जांच का प्रमुख चरण पूरा हो गया है। अब आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों और पुलिस की ओर से प्रस्तुत साक्ष्यों पर न्यायालय में आगे की कानूनी प्रक्रिया चलेगी। मामले में अदालत ने 10 सितंबर को अगली पेशी तय की है। इसके बाद न्यायालय आरोप पत्र और रिकॉर्ड के आधार पर आगे की कार्यवाही करेगा। चन्द्रेसल मठ की धार्मिक और ऐतिहासिक पहचान तथा महंत देवानंद महाराज की हत्या के बाद पैदा हुए आक्रोश के कारण इस मामले पर शुरुआत से ही लोगों की नजर बनी हुई है।

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राजस्थान न्यूज़: जयपुर में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के साथ हरीश द्विवेदी, और मदन राठौड़ का मेगा रोड शो: चारदीवारी के 20 वार्डों पर भाजपा की नजर, कांग्रेस पर हमला, बोले- लव जिहाद की समस्या खत्म की

राजस्थान न्यूज़: जयपुर। जयपुर नगर निगम चुनाव के प्रचार के अंतिम दिन मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने राजधानी के परकोटा क्षेत्र में भाजपा का बड़ा शक्ति प्रदर्शन किया। बुधवार दोपहर करीब 12 बजे मुख्यमंत्री ने सांगानेरी गेट स्थित हनुमान मंदिर में दर्शन करने के बाद रोड शो की शुरुआत की। खुली जीप में मुख्यमंत्री के साथ भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री एवं निकाय चुनाव प्रभारी हरीश द्विवेदी, प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़, जयपुर सांसद मंजू शर्मा और हवामहल विधायक बालमुकुंद आचार्य भी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री का रोड शो सांगानेरी गेट से जौहरी बाजार और बड़ी चौपड़ होते हुए त्रिपोलिया गेट तक रखा गया है। पहले इसे चांदपोल तक ले जाने की योजना थी, लेकिन चुनाव प्रचार के अंतिम दिन रूट छोटा कर दिया गया। जयपुर नगर निगम के लिए 11 सितंबर को मतदान होना है और बुधवार शाम 6 बजे चुनाव प्रचार समाप्त हो जाएगा। हनुमान मंदिर में दर्शन के बाद खुली जीप में निकले CM मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने सांगानेरी गेट स्थित हनुमान मंदिर में दर्शन कर रोड शो की शुरुआत की। इसके बाद वे खुली जीप में सवार होकर भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ परकोटे के बाजारों से गुजरे। रोड शो के रास्ते पर भाजपा कार्यकर्ता पार्टी के झंडों के साथ मौजूद रहे। अलग-अलग स्थानों पर मुख्यमंत्री के स्वागत की व्यवस्था की गई। चुनाव प्रचार के अंतिम दिन भाजपा की कोशिश इस रोड शो के जरिए अपने कार्यकर्ताओं में जोश भरने के साथ मतदाताओं तक अंतिम राजनीतिक संदेश पहुंचाने की है। सांगानेरी गेट से त्रिपोलिया तक रोड शो मुख्यमंत्री के रोड शो का अंतिम रूट सांगानेरी गेट से जौहरी बाजार, बड़ी चौपड़ होते हुए त्रिपोलिया गेट तक रखा गया है। इससे पहले रोड शो को छोटी चौपड़ होते हुए चांदपोल तक ले जाने की तैयारी थी, लेकिन बाद में इसकी दूरी कम कर दी गई। रिपोर्टों के अनुसार अंतिम दिन प्रत्याशियों को अपने-अपने वार्डों में प्रचार के लिए ज्यादा समय देने को भी रूट छोटा करने की वजहों में माना जा रहा है। चारदीवारी के कमजोर वार्डों पर BJP का फोकस मुख्यमंत्री के रोड शो को भाजपा की उन वार्डों में चुनावी पकड़ मजबूत करने की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है, जहां पार्टी को कड़ा मुकाबला मिल रहा है। रोड शो का प्रभाव चारदीवारी से जुड़े तीन विधानसभा क्षेत्रों के करीब 20 वार्डों पर माना जा रहा है। इन वार्डों में भाजपा अंतिम चरण में अपने पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश कर रही है।परकोटे का इलाका राजनीतिक और सामाजिक समीकरणों के लिहाज से जयपुर नगर निगम चुनाव में खास महत्व रखता है। कई वार्डों में भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला है, जबकि कुछ स्थानों पर बागी और निर्दलीय प्रत्याशी भी प्रमुख दलों का चुनावी गणित प्रभावित कर रहे हैं। CM बोले- ‘लव जिहाद की समस्या खत्म कर दी’ रोड शो के दौरान मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कांग्रेस पर तीखा राजनीतिक हमला किया। मुख्यमंत्री ने ‘लव जिहाद’ शब्द का इस्तेमाल करते हुए दावा किया कि उनकी सरकार ने जयपुर सहित प्रदेश में इससे जुड़ी समस्या को खत्म करने का काम किया है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार के ढाई साल के काम से कांग्रेस परेशान है। मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर “लूट और छूट की राजनीति” करने का आरोप लगाया और पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल को भ्रष्टाचार से जोड़ते हुए विपक्ष पर निशाना साधा। ये मुख्यमंत्री के चुनावी भाषण में किए गए राजनीतिक दावे और आरोप हैं। ‘ढाई साल के काम से कांग्रेस को दर्द’ मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार के ढाई साल के कार्यकाल को भी चुनाव प्रचार का प्रमुख आधार बनाया। उन्होंने दावा किया कि सरकार के विकास कार्यों और फैसलों से कांग्रेस असहज है। भाजपा पूरे निकाय चुनाव अभियान में राज्य और केंद्र सरकार की योजनाओं, विकास कार्यों और ‘डबल इंजन सरकार’ के मॉडल को मतदाताओं के सामने रख रही है। दूसरी तरफ कांग्रेस कानून व्यवस्था और शहरी सुविधाओं सहित विभिन्न मुद्दों पर सरकार को घेर रही है। एक दिन पहले पूर्व मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने भी मुख्यमंत्री के रोड शो पर सवाल उठाते हुए सरकार को कानून व्यवस्था और विकास पर जवाब देने को कहा था। रघुनाथ नरेड़ी संभाल रहे रोड शो के रथ की व्यवस्था मुख्यमंत्री के रोड शो में भाजपा नेता रघुनाथ नरेड़ी की सक्रियता भी राजनीतिक चर्चा का विषय बनी हुई है। नरेड़ी सुबह से रोड शो के रथ और उससे जुड़ी व्यवस्थाओं को संभालते दिखाई दिए। निकाय चुनाव से पहले रघुनाथ नरेड़ी भी जयपुर में भाजपा से पार्षद टिकट के दावेदारों में शामिल थे। चुनाव से पहले वरिष्ठ भाजपा नेताओं की टिकट दावेदारी में उनका नाम सार्वजनिक रूप से सामने आया था। पार्टी ने उन्हें इस बार पार्षद का टिकट नहीं दिया, लेकिन इसके बावजूद मुख्यमंत्री के सबसे महत्वपूर्ण जयपुर रोड शो की व्यवस्थाओं में उनकी सक्रिय भूमिका को लेकर सियासी हलकों में चर्चा है। टिकट नहीं मिला, फिर भी पूरी सक्रियता नरेड़ी लंबे समय से भाजपा संगठन में सक्रिय रहे हैं और अलग-अलग संगठनात्मक जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं। हाल के निकाय चुनाव में टिकट नहीं मिलने के बावजूद उनका पार्टी के बड़े चुनावी कार्यक्रम में सक्रिय रहना भाजपा के भीतर संगठनात्मक संदेश के रूप में भी देखा जा रहा है। विशेष रूप से ऐसे समय में जब टिकट वितरण के बाद भाजपा में कई जगह असंतोष और बागी प्रत्याशियों की चुनौती सामने आई, नरेड़ी की सक्रियता पार्टी नेतृत्व के साथ उनकी राजनीतिक निकटता और संगठन में भूमिका को लेकर चर्चाओं को बढ़ा रही है। परकोटे में ट्रैफिक व्यवस्था बदली मुख्यमंत्री के रोड शो के कारण परकोटा क्षेत्र के प्रमुख बाजारों में यातायात व्यवस्था में बदलाव किया गया है। रोड शो वाले मार्ग पर सामान्य वाहनों और सिटी बसों की आवाजाही को नियंत्रित किया गया, जिसके चलते यात्रियों को वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल करना पड़ रहा है।सांगानेरी गेट, जौहरी बाजार, बड़ी चौपड़ और त्रिपोलिया क्षेत्र जयपुर के सबसे व्यस्त बाजारों में शामिल हैं। ऐसे में पुलिस और यातायात विभाग ने रोड शो को देखते हुए विशेष ट्रैफिक व्यवस्था लागू की है। जयपुर में मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा का 10वां रोड शो निकाय चुनाव प्रचार के दौरान मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा पिछले कुछ दिनों में प्रदेश के अलग-अलग शहरों में लगातार रोड शो कर चुके हैं। 5 सितंबर को भीलवाड़ा और उदयपुर, 6 सितंबर को बीकानेर, अजमेर और जोधपुर, 7 सितंबर को भरतपुर और अलवर तथा 8 सितंबर को पाली और कोटा के बाद जयपुर का रोड शो मुख्यमंत्री का इस अभियान में 10वां रोड शो है।जयपुर में यह रोड शो इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि दूसरे चरण के मतदान से पहले बुधवार प्रचार का आखिरी दिन है। ऐसे में भाजपा इस शक्ति प्रदर्शन के जरिए चारदीवारी के चुनौतीपूर्ण वार्डों में अंतिम समय तक माहौल अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रही है। अब नजर 11 सितंबर के मतदान पर रहेगी कि मुख्यमंत्री के इस रोड शो का असर परकोटे के उन वार्डों पर कितना पड़ता है, जहां भाजपा और कांग्रेस के बीच मुकाबला कड़ा माना जा रहा है।

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राजस्थान न्यूज़: लक्ष्मणगढ़ में मतदान के बीच बवाल: भाजपा नेता मनोज शर्मा पर हमले का आरोप, बूथ के बाहर नारेबाजी, अतिरिक्त पुलिस बल तैनात

राजस्थान न्यूज़: सीकर। राजस्थान में नगरीय निकाय चुनाव के पहले चरण की वोटिंग के दौरान सीकर जिले के लक्ष्मणगढ़ नगरपालिका क्षेत्र में बुधवार सुबह तनाव की स्थिति बन गई। भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंडल अध्यक्ष मनोज शर्मा पर कुछ लोगों द्वारा हमला किए जाने का आरोप है। घटना के बाद भाजपा कार्यकर्ता बड़ी संख्या में मौके पर जुट गए और कथित हमलावरों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर नारेबाजी की। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार घटना उस समय हुई, जब मनोज शर्मा एक वार्ड के मतदान केंद्र के आसपास मौजूद थे। भाजपा पक्ष का दावा है कि वे पार्टी प्रत्याशी के समर्थन में मतदाताओं से संपर्क कर रहे थे। इसी दौरान निर्दलीय प्रत्याशी के समर्थकों से उनकी कहासुनी हो गई। विवाद बढ़ने के बाद दोनों पक्षों के बीच धक्का-मुक्की हुई और मनोज शर्मा के साथ मारपीट किए जाने का आरोप लगाया गया। मतदाताओं को लेकर शुरू हुआ विवाद लक्ष्मणगढ़ नगरपालिका क्षेत्र में सुबह 7 बजे से मतदान शुरू हुआ। शुरुआती घंटों में विभिन्न मतदान केंद्रों पर मतदाताओं की कतारें देखने को मिलीं। इसी बीच एक मतदान केंद्र के पास भाजपा और निर्दलीय प्रत्याशी के समर्थक आमने-सामने आ गए। भाजपा पक्ष का आरोप है कि मनोज शर्मा को रोकने के बाद विवाद शुरू हुआ और बाद में उनके साथ मारपीट की गई। घटना के दौरान मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। हालांकि, पूरे घटनाक्रम की वास्तविक परिस्थितियां और किस पक्ष की क्या भूमिका रही, यह पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट होगा। भाजपा कार्यकर्ताओं ने की गिरफ्तारी की मांग मनोज शर्मा पर कथित हमले की खबर फैलते ही भाजपा कार्यकर्ता और स्थानीय समर्थक मतदान केंद्र के आसपास जमा हो गए। कार्यकर्ताओं ने पुलिस-प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए घटना में शामिल लोगों को चिन्हित कर तत्काल गिरफ्तार करने की मांग की। भाजपा समर्थकों का आरोप है कि चुनाव के दौरान भय का माहौल बनाने की कोशिश की गई। वहीं, निर्दलीय पक्ष की ओर से लगाए गए आरोपों या घटनाक्रम के संबंध में विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने पर स्थिति और स्पष्ट होगी। अतिरिक्त पुलिस बल के साथ पहुंचे अधिकारी घटना की सूचना मिलते ही पुलिस अधिकारी अतिरिक्त जाब्ते के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने दोनों पक्षों को अलग कर भीड़ को नियंत्रित किया और मतदान केंद्र के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी। तनाव को देखते हुए संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस की गश्त बढ़ाई गई है। प्रशासन का जोर मतदान प्रक्रिया को शांतिपूर्ण और भयमुक्त तरीके से जारी रखने पर है। लक्ष्मणगढ़ में 51 हजार से ज्यादा मतदाता लक्ष्मणगढ़ नगरपालिका क्षेत्र में नगरीय निकाय चुनाव को लेकर कुल 51 हजार 554 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर रहे हैं। नगरपालिका क्षेत्र में मतदान के लिए 54 मतदान केंद्र बनाए गए हैं। चुनाव के दौरान पुलिस और प्रशासन की ओर से संवेदनशील मतदान केंद्रों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। भाजपा और निर्दलीयों के बीच कई वार्डों में मुकाबला लक्ष्मणगढ़ का चुनाव स्थानीय राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कई वार्डों में भाजपा प्रत्याशियों के सामने निर्दलीय और बागी उम्मीदवार चुनावी मुकाबले को रोचक बना रहे हैं। ऐसे में मतदान के दिन हुई यह घटना स्थानीय राजनीति में चर्चा का विषय बन गई है। भाजपा ने इसे अपने नेता पर हमला बताया है, जबकि पुलिस पूरे घटनाक्रम की जांच में जुटी है। मतदान के बीच सुरक्षा सबसे बड़ी चुनौती मतदान के दौरान किसी भी प्रकार की झड़प या तनाव चुनावी माहौल को प्रभावित कर सकता है। यही कारण है कि घटना के बाद प्रशासन ने इलाके में सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत कर दी है। फिलहाल लक्ष्मणगढ़ में मतदान जारी है और पुलिस की मौजूदगी बढ़ाई गई है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि पुलिस जांच में घटना को लेकर क्या तथ्य सामने आते हैं और कथित हमले के मामले में क्या कार्रवाई की जाती है।

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अजमेर

अजमेर न्यूज़: 1100 वर्ष पूर्व स्थापित मंदिर की बड़ी है मान्यता, दूर दराज से पहुंचते हैं हजारों श्रद्धालु

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अजमेर न्यूज़: 1968 से कस्बे की धार्मिक संस्था श्री ब्रह्म पुष्कर सेवा संघ कर रही है इस अनूठी परंपरा का निर्वहन

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अजमेर न्यूज़: 10 टीमें 8 - 8 वार्डो में जाकर घूम रही गायों का करेंगीं प्राथमिक उपचार

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राष्ट्रीय - अंतर्राष्ट्रीय

राष्ट्रीय न्यूज़: पंजाब की कमान मिलते ही राहुल-प्रियंका से मिले सचिन पायलट, 2027 चुनाव की रणनीति पर मंथन, गुटबाजी खत्म करना बड़ी चुनौती

राष्ट्रीय न्यूज़: नई दिल्ली। राजस्थान के पूर्व उपमुख्यमंत्री और कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव सचिन पायलट को पंजाब कांग्रेस का नया प्रभारी बनाए जाने के बाद दिल्ली से लेकर पंजाब तक राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। नई जिम्मेदारी मिलने के कुछ ही दिन बाद मंगलवार को पायलट ने दिल्ली स्थित 10 जनपथ पहुंचकर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा से मुलाकात की।मुलाकात के दौरान राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने पायलट को नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं दीं। बैठक में वर्ष 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव, पार्टी के आगामी कार्यक्रमों और चुनावी रणनीति को लेकर चर्चा हुई। सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस नेतृत्व का फोकस चुनाव से पहले संगठन को मजबूत करने और पार्टी के अलग-अलग गुटों को एक मंच पर लाने पर है।मुलाकात के बाद सचिन पायलट ने भी सोशल मीडिया के जरिए राहुल गांधी और प्रियंका गांधी का पंजाब की जिम्मेदारी सौंपने के लिए आभार जताया। उन्होंने भरोसा जताया कि सामूहिक प्रयास, मजबूत संगठन और कार्यकर्ताओं की ताकत के बल पर कांग्रेस पंजाब में सत्ता में वापसी के लिए पूरी मजबूती से चुनाव लड़ेगी। पंजाब में पायलट को मिला बड़ा राजनीतिक टास्क सचिन पायलट के लिए पंजाब की जिम्मेदारी केवल एक संगठनात्मक नियुक्ति नहीं, बल्कि उनके राजनीतिक करियर का एक महत्वपूर्ण पड़ाव मानी जा रही है। राजस्थान में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और उपमुख्यमंत्री रह चुके पायलट को अब ऐसे राज्य की जिम्मेदारी मिली है, जहां कांग्रेस के पास मजबूत राजनीतिक आधार तो है, लेकिन पार्टी लंबे समय से आंतरिक खींचतान से जूझ रही है। कांग्रेस ने 5 सितंबर को संगठनात्मक फेरबदल करते हुए भूपेश बघेल की जगह सचिन पायलट को पंजाब का महासचिव प्रभारी बनाया था। बघेल को असम की जिम्मेदारी दी गई है। यह फेरबदल पंजाब में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले किया गया है। गुटबाजी खत्म करना होगी सबसे बड़ी चुनौती पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार है और कांग्रेस मुख्य विपक्षी दल के रूप में दोबारा सत्ता में वापसी की कोशिश कर रही है। लेकिन चुनावी लड़ाई से पहले पायलट के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने ही संगठन के भीतर अलग-अलग नेताओं और गुटों को साथ लाने की होगी।पंजाब कांग्रेस में प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग, पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी सहित कई वरिष्ठ नेताओं के अपने-अपने राजनीतिक प्रभाव क्षेत्र हैं। हाल के समय में पार्टी के भीतर मतभेद खुलकर सामने आते रहे हैं। पायलट की नियुक्ति को इसी अंदरूनी खींचतान को नियंत्रित करने और चुनाव से पहले एकजुट संगठन खड़ा करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। पायलट के पक्ष में यह बात मानी जा रही है कि वे राजस्थान में लंबे समय तक संगठन की कमान संभाल चुके हैं। प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए उन्होंने कार्यकर्ताओं के बीच लगातार सक्रियता बनाए रखी थी। अब पंजाब में उनके सामने यही मॉडल स्थानीय परिस्थितियों के मुताबिक लागू करने की चुनौती होगी। पहले ही शुरू किया नेताओं से संवाद नई जिम्मेदारी मिलने के बाद पायलट ने पंजाब कांग्रेस के नेताओं से संपर्क और बैठकों का सिलसिला भी शुरू कर दिया है। पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष राजा वड़िंग उनसे दिल्ली में मुलाकात कर चुके हैं। बैठक में विधानसभा चुनाव की तैयारियों, संगठन और चुनावी रणनीति से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। पायलट के जल्द पंजाब दौरे पर जाने की भी संभावना जताई गई है। सफल हुए तो राष्ट्रीय राजनीति में और बढ़ सकता है कद पंजाब की जिम्मेदारी को सचिन पायलट के लिए कांग्रेस आलाकमान के भरोसे की बड़ी परीक्षा के तौर पर भी देखा जा रहा है। पंजाब उन राज्यों में है जहां कांग्रेस अभी भी सत्ता की प्रमुख दावेदार पार्टियों में शामिल है। ऐसे में यदि पायलट पार्टी की गुटबाजी पर काबू पाकर संगठन को एकजुट करने और चुनाव में बेहतर प्रदर्शन कराने में कामयाब रहते हैं, तो राष्ट्रीय राजनीति में उनकी भूमिका और महत्वपूर्ण हो सकती है।राजनीतिक जानकारों के लिहाज से यह जिम्मेदारी पायलट के लिए बड़ा अवसर भी है। पंजाब में सफलता उन्हें राजस्थान की राजनीति से आगे कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व और चुनावी रणनीति में अधिक महत्वपूर्ण भूमिका दिला सकती है।फिलहाल पायलट की पहली परीक्षा चुनाव प्रचार से पहले पंजाब कांग्रेस के नेताओं को एक मंच पर लाने की है। 2027 के चुनाव में कांग्रेस का प्रदर्शन काफी हद तक इस बात पर भी निर्भर करेगा कि नई जिम्मेदारी संभालने के बाद पायलट संगठन की अंदरूनी खींचतान को कितनी जल्दी चुनावी ताकत में बदल पाते हैं।

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राष्ट्रीय न्यूज़: कांग्रेस में बड़ा संगठनात्मक फेरबदल: सचिन पायलट को पंजाब की कमान, भूपेश बघेल असम भेजे गए, चुनाव से पहले गुटबाजी साधने की चुनौती

राष्ट्रीय न्यूज़: नई दिल्ली। कांग्रेस ने संगठन में बड़ा फेरबदल करते हुए राजस्थान के पूर्व उपमुख्यमंत्री और राष्ट्रीय महासचिव सचिन पायलट को पंजाब का AICC प्रभारी महासचिव नियुक्त किया है। पंजाब की जिम्मेदारी संभाल रहे पूर्व छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को अब असम का प्रभार दिया गया है। सचिन पायलट अब तक छत्तीसगढ़ के प्रभारी महासचिव थे। कांग्रेस संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल की ओर से बदलावों की घोषणा की गई। यह बदलाव ऐसे समय में हुआ है जब पंजाब कांग्रेस आंतरिक खींचतान से गुजर रही है और अगले विधानसभा चुनाव की तैयारियां भी तेज हो रही हैं। पार्टी नेतृत्व के सामने प्रदेश संगठन को एकजुट कर चुनावी रणनीति तैयार करने की बड़ी चुनौती है। पंजाब में पायलट के सामने सबसे बड़ी चुनौती- गुटबाजी खत्म करना पंजाब कांग्रेस में पिछले कुछ समय से प्रदेशाध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी से जुड़े खेमों के बीच मतभेद खुलकर सामने आते रहे हैं। टिकट वितरण और संगठनात्मक फैसलों को लेकर भी नेताओं के बीच बयानबाजी हुई है। ऐसे में सचिन पायलट की पहली बड़ी जिम्मेदारी अलग-अलग खेमों के बीच समन्वय स्थापित करना और विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी को एकजुट करना होगी। पंजाब में विधानसभा चुनाव 2027 में प्रस्तावित हैं, इसलिए कांग्रेस हाईकमान के इस फैसले को चुनावी तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है। छत्तीसगढ़ की जिम्मेदारी सुखदेव भगत को सचिन पायलट के पंजाब जाने के बाद सुखदेव भगत को छत्तीसगढ़ का प्रभारी बनाया गया है। वहीं भूपेश बघेल को पंजाब से हटाकर असम भेजा गया है। इसके साथ ही कांग्रेस ने अन्य राज्यों के संगठनात्मक प्रभार में भी बदलाव किए हैं। डॉ. सिरिवेल्ला प्रसाद को महाराष्ट्र और पी.वी. मोहन को आंध्र प्रदेश की जिम्मेदारी दी गई है। गुजरात में भी बदलाव कांग्रेस ने गुजरात के संगठनात्मक प्रभार में भी बदलाव किया है। मुकुल वासनिक से गुजरात की जिम्मेदारी वापस लिए जाने और रणदीप सिंह सुरजेवाला को नया प्रभार दिए जाने की जानकारी सामने आई है। सुरजेवाला कांग्रेस के प्रमुख राष्ट्रीय नेताओं में शामिल हैं और कर्नाटक संगठन से भी जुड़े रहे हैं। इस बदलाव को भी आने वाले चुनावी और संगठनात्मक समीकरणों के लिहाज से अहम माना जा रहा है। पंजाब में चुनाव से पहले नया प्रयोग सचिन पायलट का पंजाब प्रभारी बनना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पायलट राजस्थान में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और उपमुख्यमंत्री रहने के अलावा लंबे समय से राष्ट्रीय संगठन में सक्रिय हैं। अब तक उनके पास छत्तीसगढ़ की जिम्मेदारी थी। कांग्रेस की आधिकारिक वेबसाइट पर फेरबदल से पहले उन्हें छत्तीसगढ़ और भूपेश बघेल को पंजाब का प्रभारी दर्ज किया गया था।पंजाब में उनकी नियुक्ति को हाईकमान की ओर से चुनाव से पहले संगठन में संतुलन बनाने और अलग-अलग नेताओं को एक मंच पर लाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। भूपेश बघेल को असम की जिम्मेदारी पंजाब से हटाए गए भूपेश बघेल को असम कांग्रेस का प्रभारी बनाया गया है। असम में विधानसभा चुनाव में खराब प्रदर्शन के बाद संगठनात्मक बदलाव की जरूरत महसूस की जा रही थी असम के तत्कालीन प्रभारी जितेंद्र सिंह ने 4 मई 2026 को चुनावी हार की जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। इसलिए उन्हें इस ताजा फेरबदल में “हटाया गया” कहना सटीक नहीं होगा; उनका इस्तीफा कई महीने पहले ही आ चुका था।छह राज्यों की जिम्मेदारियों में बदलाव कांग्रेस के इस संगठनात्मक फेरबदल में मुख्य रूप से पंजाब, असम, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और गुजरात जैसे राज्यों के प्रभार में बदलाव सामने आए हैं। इनमें सबसे ज्यादा राजनीतिक चर्चा सचिन पायलट को पंजाब की जिम्मेदारी मिलने की हो रही है, क्योंकि पंजाब में अगले विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को संगठनात्मक खींचतान खत्म करने और भाजपा, आम आदमी पार्टी तथा शिरोमणि अकाली दल के मुकाबले मजबूत चुनावी रणनीति तैयार करनी होगी। पायलट की नियुक्ति के बाद अब नजर इस बात पर रहेगी कि वे पंजाब कांग्रेस के अलग-अलग गुटों के बीच किस तरह तालमेल स्थापित करते हैं और चुनाव से पहले संगठन को कितना एकजुट कर पाते हैं।

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#मधुकर कहिन

गुप्त ध्वनि किरणों के साथ ओशो पर किसने हमला किया?... 

गुप्त ध्वनि किरणों के साथ ओशो पर किसने हमला किया?...  * ओशो के निजी दंत चिकित्सक देवगेट ओशो की मृत्यु से 4 दिन पहले हुई घटनाओं के बारे में बात करते हैं (शरीर को छोड़कर)... * 15 aजनवरी, 1990 को, मेरे जन्मदिन पर, मुझे शुन्यो से एक संदेश मिला: ओशो चाहते थे कि मैं उनके पेट का एक्स-रे ले। हम दंaत कक्ष में मिले। ओशो का शरीर पतला और बेकार लग रहा था, फिर भी मैंने उसे शक्तिशाली रूप से उपस्थित महसूस किया। मुझे शुन्यो से पता था कि वह हर दिन बीस घंटे से अधिक सो रहा था, हर शाम बुद्ध हॉल में कुछ क़ीमती मिनटों के लिए अपनी शारीरिक ऊर्जा को बचा रहा था। ओशो नेa मुझे बताया कि उसके हमलावरों की आवाज़ से उसका शरीर बहुत कमजोर हो गया था। उन्होंने कहा कि उनमें से शायद तीन, दो पुरुष और एक महिला, ध्वनि तरंगों पर ध्यानaa केंद्रित करने और अपने शरीर को लक्षित करने के लिए एक विशेष गठन में बैठे थे। यहां भारत में प्राचीन योगिक प्रथाएं हैं जहां लोग कुछ ध्वनियों, कुछ मंत्रों को जानते हैं, जो लोगों को नुक़सान पहुंचाने के लिए ध्वनि को केंद्रित कर सकते हैं। लेकिन मुझ पर हमला करaaने वाले ये लोग भारतीय नहीं हैं। वे वही लोग हैं जिन्होंने अमेरिका में पहले मुझे मारने की कोशिश की थी। वे तब सफल नहीं हो सके, और अब वे जो शुरू किया उसे पूरा कर ने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने मुझे बोलने से रोकने के लिए ज़हर की कोशिश की लेकिन मैं जारी रखने में कामयाब रहा। अब, पांच साल बाद वे वापस आ गए हैं। उन्होंने पहले बुद्ध हॉल में अपनी ध्वनि किरणों का उपयोग मेरे दिमाग़ पर हमला करने के लिए किया लेकिन मैं अपने दिमाग़ में नहीं हूं। मैं एक नो-मन हूं और उनकी आवाज़ का बहुत कम प्रभाव था। इसलिए उन्होंने अपनी रणनीति बदल दी, अब वे मेरे शरीर पर हमला कर रहे हैं। मेरे गरीब शरीर को उनकी किरणों से कोई सुरक्षा नहीं है। हर दिन यह कमजोर होता जाता है। वे मुझे मार नहीं सकते लेकिन वे मेरे शरीर को नुक़सान पहुंचा सकते हैं। अभी मेरे जिगर के क्षेत्र में बहुत दर्द हो रहा है। क्या आप इसे एक्स-रे कर सकते हैं? दुख की बात है, मैंने समझाया कि मेरी दंत एक्स-रे मशीन शायद अपर्याप्त थी क्योंकि यह केवल दांतों और जबड़े की छोटी फिल्में ले सकती थी, लेकिन हम कोशिश कर सकते थे। अमृतो को हमारे पास सबसे बड़ी एक्स-रे फ़िल्म मिली, जबकि मैंने इसकी बीम को चौड़ा करने के लिए डेंटल एक्स-रे मशीन के साथ जिग्गल किया। मैंने वह करने की कोशिश की जो ओशो पूछ रहा था। मैंने उसके जिगर के क्षेत्र की एक तस्वीर ली और फिर दंत विकास में बड़ी फ़िल्म विकसित करने में कामयाब रहा टैंक जिसे छोटी इंट्रा-ओरल डेंटल फ़िल्मों के लिए डिज़ाइन किया गया था, लेकिन परिणामी छवि धुंधली और अस्पष्ट थी। यह आख़िरी बार था जब मैंने ओशो को उसके भौतिक शरीर में देखा था। 19 जनवरी को शाम 4:30 बजे थे: मैं अपनी प्रेमिका के साथ अपने कमरे में था जब दरवाजे पर एक ज़रूरी दस्तक हुई। मनीषा, पीला और तनावग्रस्त दिख रही थी, ने पूछा कि क्या वह मेरे कमरे के फ़ोन का उपयोग कर सकती है। मुझे पता था कि वह केवल पूछेगी कि क्या कुछ असामान्य हो रहा है। अस्थायी सचिव के रूप में कार्य करते हुए वह इनर सर्कल के सदस्यों को फ़ोन कर रही थी और उन्हें कृष्णा हाउस में एक असाधारण बैठक में तुरंत आने के लिए कह रही थी। ओशो ने पंद्रह महीने पहले इक्कीस लोगों की एक कम्यून प्रबंधन टीम की स्थापना की थी, इसे इनर सर्कल का नाम दिया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका काम कम्यून के दिन-प्रतिदिन चलने का प्रबंधन करना था। मैं मूल चयन में नहीं था, लेकिन कुछ महीने बाद मुझे शामिल होने के लिए कहा गया था। फ़ोन करने के बाद, मनीषा ने कहा, “गीट, तुमने सुना कि मैं दूसरों को क्या बता रहा था। बैठक कृष्णा हाउस की छत पर ब्लू रूम में है। क्या आप वहां तुरंत जा सकते हैं?” इससे पहले कि मैं कोई सवाल पूछ पाता, वह जल्दी से गलियारे में चली गई, स्पष्ट रूप से एक और महत्वपूर्ण कार्य में शामिल थी। मैंने दोपहर के अधिकांश समय अजीब तरह से विपुल महसूस किया था। बाहरी मामलों की उथल-पुथल के बावजूद मैं कई दिनों से उत्साहित महसूस कर रहा था। मेरे दिल में ख़ुशी का एक अकथनीय नृत्य था। अंदर से मुझे उत्साह, आनंद महसूस हुआ। ब्लू रूम में पहुंचने पर, मैंने देखा कि अधिकांश इनर सर्कल पहले से ही वहां इकट्ठा हो चुके थे। माहौल तनावपूर्ण और तनावपूर्ण था। मेरा अपना उत्साह जगह से बाहर लग रहा था। मैं बैठ गया और इंतज़ार किया। कुछ मिनटों के बाद जयेश ने अमृतो के साथ प्रवेश किया। यह देखने के लिए संक्षेप में चारों ओर देखते हुए कि हम सभी मौजूद हैं, उन्होंने एक दृढ़, हालांकि शांत आवाज़ में कहा, “मुझे लगता है कि इसे लपेटने का कोई तरीक़ा नहीं है। मैं आपको सीधे बताऊंगा। ओशो ने कुछ समय पहले लगभग 4:45 बजे अपना शरीर छोड़ दिया था दोपहर।” स्तब्ध, मैंने अपनी घड़ी को देखा। शाम के 5:15 बजे थे। उपस्थित दो या तीन लोग रोने लगे। जयेश ने जल्दी से बीच में टोका, “देखो, मुझे तुम्हारी सारी मदद की ज़रूरत है। कृपया अभी तक अलग न हों। मुझे आप सभी की ज़रूरत है कि ओशो के भेजने को उतना ही सुंदर बनाने में मदद करें जितना वह हकदार है। यह आख़िरी चीज है जो हम उसके लिए कर सकते हैं भौतिक शरीर, चलो इसे अद्भुत बनाते हैं। उसने मुझे ठीक से बताया कि वह कैसे चाहता है कि ऐसा हो। उसने मुझे हर चीज के लिए विस्तृत निर्देश दिए, लेकिन मुझे यहां हर किसी की मदद की ज़रूरत है।” जयेश के शब्दों को सुनकर मेरा पहले का उत्साह सदमे में बदल गया था, लेकिन मैंने ओशो को अपने लोगों के साथ अपने अंतिम उत्सव का आनंद लेने में सक्षम बनाने के लिए हमारी मदद के लिए जयेश की अपील को स्पष्ट रूप से सुना। जैसे ही मैंने ब्लू रूम छोड़ा, जयेश ने मुझे बताया कि ओशो ने अनुरोध किया था कि मैं उनके शरीर को जलते हुए घाटों तक ले जाने के लिए एक वाहक बनूं। गतिविधि और भ्रमित भावनाओं के एक धुंध में मुझे याद है कि ओशो के इस अंतिम उपहार के लिए बेहद आभारी महसूस कर रहा था। - स्वामी देवगीत पुस्तक : ओशो - द फर्स्ट बुद्ध इन द डेंटल चेयर अध्याय: 17 अध्याय का नाम: ओशो का अंतिम दंत नाटक: अधिनियम V अंतिम सुनहरी झलक

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