राजस्थान न्यूज़: जयपुर, 15 जुलाई। लोक सभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला ने कहा कि विधानमंडल केवल कानून बनाने वाले संस्थान नहीं हैं, बल्कि वे लोकतंत्र की ऐसी 'पाठशालाएँ हैं जहाँ जनप्रतिनिधि संवाद, अनुशासन, सहमति और सेवा के मूल्यों का संस्कार प्राप्त करते हैं। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों को जनता के प्रति अपने दायित्वों का पूर्णतः बोध होना चाहिए, क्योंकि लोकतंत्र केवल संवैधानिक प्रावधानों से नहीं, बल्कि जनविश्वास, संवाद, गरिमा और सेवा-भावना से सुदृढ़ होता है। श्री बिरला राजस्थान विधान सभा के 75वें स्थापना वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित अमृत महोत्सव के अंतर्गत 'विधान गौरव यात्रा भूतपूर्व एवं वर्तमान सदस्यों का सम्मेलन' के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। श्री बिरला ने दीप प्रज्ज्वलित कर समारोह का शुभारंभ किया। राजस्थान विधान सभा को अपने सार्वजनिक जीवन की "प्रथम पाठशाला" बताते हुए श्री बिरला ने कहा कि इसी सदन में अर्जित लोकतांत्रिक मूल्य, संसदीय परंपराएँ और विधायी आचरण ने उन्हें छात्र नेता से विधायक, सांसद और अंततः लोक सभा अध्यक्ष बनने की यात्रा में मार्गदर्शन प्रदान किया। उन्होंने कहा कि विधान सभा में उन्होंने संसदीय लोकतंत्र का वास्तविक स्वरूप समझा कि सुनने की संस्कृति और स्वस्थ बहस लोकतंत्र को समृद्ध बनाती है तथा इतिहास का निर्माण करती है, जबकि व्यक्तिगत मतभेद लोकतंत्र को कमजोर करते हैं। उन्होंने कहा कि सदन में होने वाली प्रत्येक बहस और प्रत्येक शब्द लोकतांत्रिक इतिहास का स्थायी हिस्सा बन जाता है। लोकतंत्र में अटूट आस्था और जनकल्याण की आधारशिला है अमृत महोत्सव- मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि राजस्थान विधानसभा के 75 वर्ष पूर्ण होने पर मनाया जा रहा अमृत महोत्सव लोकतंत्र में हमारी अटूट आस्था, जन-जन की आकांक्षाओं तथा प्रदेश की गौरवशाली लोकतांत्रिक यात्रा का ऐतिहासिक उत्सव है। वर्ष 1952 में 160 सदस्यों के साथ प्रारंभ हुई राजस्थान विधानसभा की यात्रा आज लोकतंत्र, सुशासन और जनकल्याण की मजबूत आधारशिला बन चुकी है। उन्होंने कहा कि समय के साथ सरकारें और विचारधाराएं बदलीं, लेकिन जनहित सर्वोपरि रखने का संकल्प कभी नहीं बदला। मुख्यमंत्री ने कहा कि अमृत महोत्सव एक दिन का आयोजन नहीं है, बल्कि पूरे वर्ष चलने वाला लोकतांत्रिक महोत्सव है। इस दौरान संसदीय एवं संविधान विशेषज्ञों के विचार, लोकतंत्र की चुनौतियों पर विमर्श, विधानसभा के डिजिटल रूपांतरण पर चर्चा और नई पीढ़ी को संसदीय परंपराओं से जोड़ने जैसे अनेक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिससे अनुभव, ऊर्जा, परंपरा और नवाचार का अद्भुत समागम देखने को मिलेगा। उन्होंने कहा कि यह प्रदेशवासियों के विश्वास, जनप्रतिनिधियों के समर्पण और लोकतांत्रिक मूल्यों की सुदृढ़ परंपरा का उत्सव है। अनुभव और युवा ऊर्जा का यह अद्भुत समागम लोकतंत्र की असली पूंजी:- विधानसभा अध्यक्ष श्री वासुदेव देवनानी ने सभी अतिथियों और पूर्व व वर्तमान सदस्यों का आत्मीय स्वागत करते हुए कहा कि राजस्थान विधानसभा की 75 वर्षों की यह विधायी गौरव यात्रा देश के लोकतांत्रिक इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय है। उन्होंने अनुभव और युवा ऊर्जा के इस अभूतपूर्व समागम को लोकतंत्र की असली पूंजी बताते हुए कहा कि जब एक युवा विधायक का आधुनिक दृष्टिकोण बुजुर्ग विधायकों के दशकों लंबे विधायी और सामाजिक अनुभवों से मिलता है, तो संसदीय परंपराएं और अधिक परिपक्व व समृद्ध होती हैं। श्री देवनानी ने सदन के यशस्वी अतीत को नमन करते हुए पूर्व व वर्तमान सदस्यों की जन-प्रतिबद्धता को सराहा, जिनके सकारात्मक विचार-विमर्श से राज्य में सामाजिक और आर्थिक विकास के नए आयाम स्थापित हुए हैं। श्री देवनानी ने कहा कि विधानसभा द्वारा जनहित में उठाए गए क्रांतिकारी कदमों का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सदन ने हमेशा जन-आकांक्षाओं को सर्वोपरि मानते हुए भूमि सुधार, पंचायती राज के सुदृढ़ीकरण और शिक्षा से जुड़े ऐतिहासिक एवं दूरगामी कानूनों का निर्माण किया है। विधानसभा अध्यक्ष ने सदन की कार्यप्रणाली में आधुनिकता के समावेश पर बल देते हुए कहा कि विधाई कार्यों में पारदर्शिता, गतिशीलता और जवाबदेही लाने के लिए 'ई-विधान' और 'पेपरलेस संस्कृति' की दिशा में कदम बढ़ाए गए हैं। इसके साथ ही उन्होंने विधानसभा परिसर में स्थापित अत्याधुनिक डिजिटल म्यूजियम, संविधान दीर्घा और वंदे मातरम दीर्घा जैसे नवाचारों को नई पीढ़ी के लिए एक मार्गदर्शिका और लोकतंत्र का सशक्त स्तंभ बताया। संसदीय मर्यादाओं और स्वस्थ परंपराओं का केंद्र है यह सदन संसदीय कार्य मंत्री श्री जोगाराम पटेल ने अपने संबोधन में कहा कि राजस्थान विधानसभा ने सदैव पक्ष और प्रतिपक्ष के बीच रचनात्मक संवाद की स्वस्थ परंपरा को जीवंत रखा है। उन्होंने बताया कि लोकतंत्र का यह सफर आज तकनीकी रूप से सुदृढ़, पारदर्शी और अधिक उत्तरदायी विधायी व्यवस्था के रूप में सुस्थापित हो चुका है। इस ऐतिहासिक मील के पत्थर को अक्षुण्ण रखने में प्रत्येक कालखंड के सदस्यों का योगदान अतुलनीय रहा है। आम इंसान को सशक्त बनाने वाले कानूनों का उत्सव है यह महोत्सव:- नेता प्रतिपक्ष श्री टीकाराम जूली ने सदन के गौरवशाली इतिहास को रेखांकित करते हुए कहा कि यह महोत्सव केवल अतीत का स्मरण नहीं, बल्कि राजस्थान के आम इंसान को सशक्त बनाने वाले जनहितैषी कानूनों का उत्सव है। उन्होंने सूचना के अधिकार एवं पंचायती राज जैसे प्रगतिशील कानूनों का उदाहरण देते हुए कहा कि राजस्थान विधानसभा ने सदैव देश को नई दिशा दिखाई है। उन्होंने लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा हेतु सदन में बैठकों की संख्या बढ़ाने तथा प्रत्येक जनप्रतिनिधि को अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर दिए जाने की आवश्यकता जताई, ताकि सदन की गरिमा सदैव सर्वोच्च बनी रहे। इस अवसर पर वर्तमान एवं पूर्व विधायकगण सहित विधानसभा के वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित रहे। एयरपोर्ट और विधान सभा पहुँचने पर लोकसभा अध्यक्ष का स्वागत- लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला का जयपुर एयरपोर्ट पहुँचने पर राजस्थान विधान सभा अध्यक्ष श्री वासुदेव देवनानी ने पुष्प गुच्छ भेंट कर स्वागत किया। राजस्थान विधान सभा पहुँचने पर विधान सभा अध्यक्ष श्री वासुदेव देवनानी, मुख्यमंत्री श्री भजन लाल शर्मा, नेता प्रतिपक्ष श्री टीकाराम जूली एवं संसदीय कार्य मंत्री श्री जोगाराम पटेल ने लोकसभा अध्यक्ष का पुष्प गुच्छ भेंट कर स्वागत किया।
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राजस्थान न्यूज़: जयपुर। राजस्थान सरकार ने भारतीय पुलिस सेवा के 18 अधिकारियों के तबादले और पदस्थापन किए हैं। कार्मिक विभाग ने 14 जुलाई को आदेश जारी कर इन अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से नई जिम्मेदारियां सौंपी हैं। तबादला सूची में महानिदेशक, अतिरिक्त महानिदेशक, महानिरीक्षक, पुलिस अधीक्षक और पुलिस उपायुक्त स्तर के अधिकारी शामिल हैं। अनिल पालीवाल को होमगार्ड की जिम्मेदारी महानिदेशक पुलिस, अभियोजन एवं यातायात, राजस्थान के पद पर कार्यरत अनिल पालीवाल को महानिदेशक एवं कमांडेंट जनरल, गृह रक्षा, राजस्थान के पद पर लगाया गया है। अतिरिक्त महानिदेशक एवं कमांडेंट जनरल, गृह रक्षा मालिनी अग्रवाल को महानिदेशक पुलिस, यातायात, राजस्थान की जिम्मेदारी दी गई है। आदेश के अनुसार, एसएसबी जयपुर में महानिरीक्षक पुलिस पद पर कार्यरत अंशुमान भौमिया को जोधपुर का नया पुलिस आयुक्त बनाया गया है। वहीं, जोधपुर पुलिस आयुक्त शरद कविराज का तबादला कर उन्हें महानिरीक्षक पुलिस, अपराध शाखा, राजस्थान, जयपुर लगाया गया है। अजमेर और भरतपुर रेंज में भी बदलाव अजमेर रेंज के महानिरीक्षक पुलिस राजेंद्र सिंह को महानिरीक्षक पुलिस, सतर्कता, जयपुर के पद पर नियुक्त किया गया है। उनके स्थान पर महानिरीक्षक पुलिस, आयोजना, आधुनिकीकरण एवं कल्याण डॉ. रवि को अजमेर रेंज का नया आईजी बनाया गया है। भरतपुर रेंज के महानिरीक्षक पुलिस कैलाश चंद्र विश्नोई को महानिरीक्षक पुलिस, आयोजना, आधुनिकीकरण एवं कल्याण, राजस्थान की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं, कानून एवं व्यवस्था के महानिरीक्षक डॉ. प्रीति चंद्रा को भरतपुर रेंज का महानिरीक्षक पुलिस नियुक्त किया गया है। जयपुर पुलिस कमिश्नरेट में नई नियुक्तियां इंदिरा गांधी पुलिस अकादमी, जयपुर के निदेशक सुदीन मोहन शर्मा को जयपुर पुलिस कमिश्नरेट में अतिरिक्त पुलिस आयुक्त, यातायात एवं प्रशासन बनाया गया है। बीकानेर सदर की सहायक पुलिस अधीक्षक अनुजा कालिया को पुलिस उपायुक्त मुख्यालय, जयपुर पुलिस आयुक्तालय के पद पर लगाया गया है। वर्तमान डीसीपी मुख्यालय राजेश कुमार कांट को बालोतरा का पुलिस अधीक्षक नियुक्त किया गया है।\बालोतरा, हनुमानगढ़ और प्रतापगढ़ के एसपी बदले बालोतरा के पुलिस अधीक्षक रमेश को पुलिस मुख्यालय जयपुर में पुलिस अधीक्षक, सीआईडी मानवाधिकार एवं कमजोर वर्ग शाखा के पद पर लगाया गया है। प्रतापगढ़ के पुलिस अधीक्षक बी. आदित्य को हनुमानगढ़ का नया पुलिस अधीक्षक बनाया गया है। हनुमानगढ़ के एसपी नरेंद्र सिंह मीणा को कमांडेंट, 10वीं बटालियन आरएसी, बीकानेर नियुक्त किया गया है।दसवीं बटालियन आरएसी बीकानेर के कमांडेंट विशाल जांगिड़ को प्रतापगढ़ का पुलिस अधीक्षक बनाया गया है। जोधपुर ग्रामीण में पंकज यादव की नियुक्ति जोधपुर ग्रामीण की पुलिस अधीक्षक वी. रिं नित्या को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो, जोधपुर में पुलिस अधीक्षक लगाया गया है। उनकी जगह प्रथम बटालियन आरएसी, जोधपुर के कमांडेंट पंकज यादव को जोधपुर ग्रामीण का पुलिस अधीक्षक नियुक्त किया गया है। सहायक पुलिस अधीक्षक वृत्त किशनगढ़, अजमेर अजय सिंह राठौड़ को कमांडेंट, सातवीं बटालियन आरएसी, भरतपुर की जिम्मेदारी दी गई है।सरकार ने सभी अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से नए पदों पर कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए हैं। आदेश संयुक्त शासन सचिव डॉ. धीरज कुमार सिंह की ओर से जारी किया गया है।
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राजस्थान न्यूज़: जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने प्रशासनिक अनियमितताओं, ड्यूटी में लापरवाही और गंभीर शिकायतों से जुड़े विभिन्न मामलों में सख्त कार्रवाई को मंजूरी दी है। जयपुर स्थित महिला बंदी सुधार गृह की डिप्टी सुपरिटेंडेंट सरोज विश्नोई को निलंबित कर दिया गया है। इसके साथ ही दो राजस्थान पुलिस सेवा अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई, एक आईएएस अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई और रिश्वत के आरोपी एक डीएसपी के खिलाफ अभियोजन की स्वीकृति दी गई है। मुख्यमंत्री ने कानून-व्यवस्था को लेकर बैठक के अगले दिन मंगलवार को पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों से जुड़े मामलों में कार्रवाई के प्रस्तावों को मंजूरी दी। एक मेडिकल ऑफिसर को सेवा से बर्खास्त करने के साथ ही कुछ अन्य अधिकारियों के वेतनवृद्धि और पेंशन रोकने के निर्णय भी लिए गए हैं। महिला जेल डिप्टी सुपरिटेंडेंट सरोज विश्नोई निलंबित जयपुर के महिला बंदी सुधार गृह में डिप्टी सुपरिटेंडेंट के पद पर कार्यरत सरोज विश्नोई को निलंबित कर उनका मुख्यालय भरतपुर निर्धारित किया गया है। बताया गया है कि सरोज विश्नोई के खिलाफ एक महिला बंदी को अपने साथ रखने और उसे कार्यालय के कामकाज में कर्मचारियों की तरह हस्तक्षेप करने की अनुमति देने की शिकायतें मिली थीं। इसके अतिरिक्त, उन पर कथित रूप से पैसे लेकर बंदियों को नियमों के विरुद्ध सुविधाएं उपलब्ध कराने के आरोप भी लगाए गए थे। इन शिकायतों और प्रारंभिक तथ्यों के आधार पर राज्य सरकार ने उन्हें निलंबित करने का निर्णय लिया है। मामले में नियमानुसार आगे की जांच और विभागीय कार्रवाई की जाएगी। साइबर क्राइम एसीपी देरावर सिंह को चार्जशीट मुख्यमंत्री ने जोधपुर पुलिस कमिश्नरेट में साइबर क्राइम के सहायक पुलिस आयुक्त देरावर सिंह के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने की मंजूरी दी है। उन्हें राजस्थान सिविल सेवा नियमों के तहत नियम 16 की चार्जशीट जारी किए जाने की स्वीकृति दी गई है। आरोप है कि देरावर सिंह ने डीग जिले के कामां थाने में इंस्पेक्टर के पद पर रहते हुए हत्या के एक मामले की जांच में आठ आरोपियों में से केवल एक को दोषी माना और शेष सात आरोपियों को बचाने का प्रयास किया। इस संबंध में शिकायत मिलने के बाद उनकी भूमिका की जांच की गई। प्रारंभिक जांच में भूमिका सामने आने पर विभागीय कार्रवाई का निर्णय लिया गया है। RPS लाभुराम विश्नोई के खिलाफ जांच रिपोर्ट मंजूर मुख्यमंत्री ने आरपीएस अधिकारी लाभुराम विश्नोई के खिलाफ लगाए गए आरोपों को प्रमाणित मानते हुए विभागीय जांच रिपोर्ट को मंजूरी दी है।
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उदयपुर न्यूज़: शहर के सिविल लाइन थाना क्षेत्र में 75 वर्षीय बुजुर्ग महिला के हाथ से सोने की दो चूड़ियां पार होने का मामला सामने आया है। घटना कांता मारवाह मार्ग, पुलिस लाइन क्षेत्र की बताई जा रही है। पीड़िता के भतीजे ने सिविल लाइन थाने में रिपोर्ट देकर बाइक सवार बदमाशों पर वारदात को अंजाम देने का आरोप लगाया है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस के अनुसार कांता मारवाह मार्ग पुलिस लाइन अजमेर निवासी जितेन्द्र नारवानी पुत्र चिमनदास नारवानी ने रिपोर्ट दर्ज कराई है। रिपोर्ट में बताया गया कि उनकी चाची मीना नारवानी उम्र 75 वर्ष घर से पीछे वाली गली में गाय को रोटी खिलाने के लिए निकली थीं। गली में गाय नहीं मिलने पर वे मुख्य सड़क की ओर पुलिस लाइन चौराहे की तरफ जाने लगीं। इसी दौरान बाइक सवार 2 से 3 युवक उनके पीछे चलने लगे। आरोप है कि इनमें से एक युवक बाइक से उतरकर बुजुर्ग महिला के साथ-साथ चलने लगा और उनसे बातचीत करने की कोशिश करने लगा। कुछ देर बाद महिला को ऐसा महसूस हुआ कि उनकी आंखें बंद हो रही हैं और उन्हें ठीक से कुछ याद नहीं रहा। करीब पांच मिनट बाद जब महिला को होश आया तो उनके हाथों में पहनी सोने की दोनों चूड़ियां गायब थीं। इसी बीच बाइक सवार युवक मौके से फरार हो चुके थे। घटना से घबराई बुजुर्ग महिला घर लौटीं और परिजनों को पूरी बात बताई। इसके बाद परिजनों ने सिविल लाइन थाने पहुंचकर रिपोर्ट दर्ज कराई। रिपोर्ट में बाइक सवार युवकों पर सोने की चूड़ियां चोरी करने का आरोप लगाया गया है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच एएसआई कैलाश चंद को सौंपी है। फिलहाल पुलिस आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगालने और संदिग्ध युवकों की पहचान करने में जुटी है। बुजुर्ग महिला के साथ हुई इस घटना के बाद क्षेत्र में लोगों में चिंता का माहौल है। परिजनों ने पुलिस से जल्द आरोपियों की पहचान कर गिरफ्तारी और चोरी हुई ज्वेलरी बरामद करने की मांग की है।
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उदयपुर न्यूज़: अजमेर के बोर्ड ऑफिस की गली स्थित ओला शोरूम पर गुरुवार को ग्राहकों ने जमकर हंगामा किया और विरोध प्रदर्शन करते हुए जल्द समाधान की मांग की। बड़ी संख्या में पहुंचे ग्राहकों, विशेषकर महिलाओं ने आरोप लगाया कि उनकी इलेक्ट्रिक स्कूटी खराब होने के बाद सात महीने पहले सर्विस के लिए जमा कराई गई थी, लेकिन आज तक वाहन वापस नहीं मिला। उनका कहना है कि वे लगातार शोरूम के चक्कर लगा रही हैं, लेकिन हर बार केवल आश्वासन दिया जाता है। फोन करने पर भी संतोषजनक जवाब नहीं मिलता। प्रदर्शन के दौरान एक युवक ने आरोप लगाया कि उसके स्कूटर का स्टार्ट बटन बार-बार खराब हो जाता है। शिकायत करने पर केवल बटन बदल दिया जाता है, लेकिन मूल समस्या बनी रहती है। ग्राहकों का कहना है कि उन्होंने कंपनी के उच्च अधिकारियों से भी संपर्क किया, लेकिन वहां से भी कोई ठोस समाधान नहीं मिला। इससे नाराज ग्राहकों ने शोरूम के बाहर प्रदर्शन कर प्रबंधन के रवैये पर सवाल उठाए। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द समस्या का समाधान नहीं किया गया तो वे आंदोलन को और तेज करेंगे। मौके पर काफी देर तक अफरा-तफरी का माहौल बना रहा।
Read more 2nd Jul 2026
अजमेर न्यूज़: 1100 वर्ष पूर्व स्थापित मंदिर की बड़ी है मान्यता, दूर दराज से पहुंचते हैं हजारों श्रद्धालु
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अजमेर न्यूज़: 1968 से कस्बे की धार्मिक संस्था श्री ब्रह्म पुष्कर सेवा संघ कर रही है इस अनूठी परंपरा का निर्वहन
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अजमेर न्यूज़: 10 टीमें 8 - 8 वार्डो में जाकर घूम रही गायों का करेंगीं प्राथमिक उपचार
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अंतर्राष्ट्रीय न्यूज़: ढाका/नई दिल्ली। बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने कहा है कि वह दिसंबर में भारत से बांग्लादेश लौटेंगी और अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण करेंगी। Reuters को दिए इंटरव्यू में हसीना ने कहा कि उनके साथ अवामी लीग के कई वरिष्ठ नेता भी वापस लौटकर आत्मसमर्पण करेंगे। हसीना ने कहा कि अवामी लीग के लगभग सभी बड़े नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए गए हैं और कई लोग छिपकर रहने को मजबूर हैं। हालांकि, उन्होंने बांग्लादेश लौटने की कोई निश्चित तारीख नहीं बताई है। रिपोर्ट के अनुसार हसीना ने कहा कि वह स्वेच्छा से लौटेंगी और इसके लिए किसी पर्दे के पीछे की बातचीत की जरूरत नहीं है। शेख हसीना वर्ष 2024 में बांग्लादेश में सरकार विरोधी आंदोलन के बाद देश छोड़कर भारत आ गई थीं। इसके बाद उन्हें छात्र आंदोलन पर हुई कार्रवाई से जुड़े मामले में अनुपस्थिति में मौत की सजा सुनाई गई। हसीना इन आरोपों से लगातार इनकार करती रही हैं। हसीना ने कहा कि उन्होंने बांग्लादेश लौटने को लेकर मौजूदा सरकार से कोई बातचीत नहीं की है। उनका कहना है कि लोकतंत्र, चुनाव, अवामी लीग के राजनीतिक अधिकार और न्याय जैसे मुद्दों पर पर्दे के पीछे कोई समझौता नहीं हो सकता। उन्होंने दावा किया कि बांग्लादेश सरकार उन्हें वापस भेजने के लिए भारत को लगातार पत्र लिख रही है। हसीना ने कहा कि उन्हें वापस लाने की जरूरत नहीं पड़ेगी, क्योंकि वह स्वयं लौटेंगी। हालांकि, हसीना के इस दावे पर बांग्लादेश सरकार की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। भारत की ओर से भी फिलहाल इस नए बयान पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई है। इससे पहले भारत ने कहा था कि वह बांग्लादेश के प्रत्यर्पण अनुरोध पर विचार कर रहा है और नई सरकार के साथ संबंधों को आगे बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है। शेख हसीना की संभावित वापसी बांग्लादेश की राजनीति में बड़ा मोड़ साबित हो सकती है। अवामी लीग पर लगे प्रतिबंध, नेताओं पर दर्ज मामलों और आगामी चुनावी माहौल के बीच उनकी वापसी से देश में राजनीतिक हलचल और बढ़ने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हसीना और अवामी लीग के वरिष्ठ नेता एक साथ लौटकर आत्मसमर्पण करते हैं, तो इसका असर बांग्लादेश की अदालतों, चुनावी राजनीति, विपक्षी एकजुटता और भारत-बांग्लादेश संबंधों पर भी पड़ सकता है।
Read more 13th Jul 2026
राष्ट्रीय न्यूज़: चमोली/देहरादून। बद्रीनाथ धाम में चढ़ावा चोरी के मामले में चमोली पुलिस की SIT ने बद्री-केदार मंदिर समिति, BKTC, के निलंबित पर्सनल असिस्टेंट प्रमोद नौटियाल को गिरफ्तार कर लिया है। SIT ने उन्हें 12 जुलाई की रात करीब 10 बजे देहरादून के नेहरू कॉलोनी स्थित उनके आवास से गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के बाद प्रमोद नौटियाल को चमोली लाया गया, जहां बद्रीनाथ थाने में उनसे पूछताछ की जा रही है। इस मामले में मंदिर समिति के चार कर्मचारियों से भी पूछताछ की जा रही है। पुलिस सूत्रों के अनुसार SIT की टीम सादी वर्दी में देहरादून पहुंची थी और कार्रवाई को गोपनीय तरीके से अंजाम दिया गया। चमोली पुलिस के अनुसार 8 जुलाई को प्रभारी मंदिर अधिकारी युद्धवीर पुष्पवाण की शिकायत पर बद्रीनाथ कोतवाली में मुकदमा दर्ज किया गया था। इसके बाद SP सुरजीत सिंह पंवार के निर्देश पर SIT का गठन किया गया। SIT ने मामले में CCTV फुटेज, गवाहों के बयान और अन्य साक्ष्यों की जांच की। जांच में आरोप है कि प्रमोद नौटियाल कई बार मंदिर की धनराशि और भेंट सामग्री को मोबाइल के नीचे छिपाकर तथा जेब में रखकर ले जाते हुए दिखाई दिए। पुलिस के अनुसार जांच के दौरान ₹500 के नोट, सोना-चांदी के सिक्कों के पैकेट, शालिग्राम शिला और केसर का पैकेट अवैध रूप से अपने कब्जे में लेने के तथ्य सामने आए हैं। पूछताछ के दौरान जब प्रमोद नौटियाल से पूछा गया कि क्या चढ़ावा चोरी के मामले में मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी भी शामिल हैं, तो उन्होंने सिर हिलाकर इससे इनकार किया। फिलहाल पुलिस इस पूरे प्रकरण में अन्य कर्मचारियों की भूमिका, बरामद सामग्री, CCTV रिकॉर्ड और गवाहों के बयानों के आधार पर आगे की जांच कर रही है। बद्रीनाथ धाम जैसे प्रमुख धार्मिक स्थल से जुड़े इस मामले को अत्यंत संवेदनशील माना जा रहा है। श्रद्धालुओं की आस्था और मंदिर की पारदर्शी व्यवस्था को देखते हुए पुलिस पूरे मामले की गहन जांच कर रही है। आगे की जांच में यह स्पष्ट होगा कि कथित चोरी में आरोपी अकेले शामिल था या किसी अन्य व्यक्ति की भी भूमिका रही है।
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गुप्त ध्वनि किरणों के साथ ओशो पर किसने हमला किया?...
गुप्त ध्वनि किरणों के साथ ओशो पर किसने हमला किया?... * ओशो के निजी दंत चिकित्सक देवगेट ओशो की मृत्यु से 4 दिन पहले हुई घटनाओं के बारे में बात करते हैं (शरीर को छोड़कर)... * 15 aजनवरी, 1990 को, मेरे जन्मदिन पर, मुझे शुन्यो से एक संदेश मिला: ओशो चाहते थे कि मैं उनके पेट का एक्स-रे ले। हम दंaत कक्ष में मिले। ओशो का शरीर पतला और बेकार लग रहा था, फिर भी मैंने उसे शक्तिशाली रूप से उपस्थित महसूस किया। मुझे शुन्यो से पता था कि वह हर दिन बीस घंटे से अधिक सो रहा था, हर शाम बुद्ध हॉल में कुछ क़ीमती मिनटों के लिए अपनी शारीरिक ऊर्जा को बचा रहा था। ओशो नेa मुझे बताया कि उसके हमलावरों की आवाज़ से उसका शरीर बहुत कमजोर हो गया था। उन्होंने कहा कि उनमें से शायद तीन, दो पुरुष और एक महिला, ध्वनि तरंगों पर ध्यानaa केंद्रित करने और अपने शरीर को लक्षित करने के लिए एक विशेष गठन में बैठे थे। यहां भारत में प्राचीन योगिक प्रथाएं हैं जहां लोग कुछ ध्वनियों, कुछ मंत्रों को जानते हैं, जो लोगों को नुक़सान पहुंचाने के लिए ध्वनि को केंद्रित कर सकते हैं। लेकिन मुझ पर हमला करaaने वाले ये लोग भारतीय नहीं हैं। वे वही लोग हैं जिन्होंने अमेरिका में पहले मुझे मारने की कोशिश की थी। वे तब सफल नहीं हो सके, और अब वे जो शुरू किया उसे पूरा कर ने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने मुझे बोलने से रोकने के लिए ज़हर की कोशिश की लेकिन मैं जारी रखने में कामयाब रहा। अब, पांच साल बाद वे वापस आ गए हैं। उन्होंने पहले बुद्ध हॉल में अपनी ध्वनि किरणों का उपयोग मेरे दिमाग़ पर हमला करने के लिए किया लेकिन मैं अपने दिमाग़ में नहीं हूं। मैं एक नो-मन हूं और उनकी आवाज़ का बहुत कम प्रभाव था। इसलिए उन्होंने अपनी रणनीति बदल दी, अब वे मेरे शरीर पर हमला कर रहे हैं। मेरे गरीब शरीर को उनकी किरणों से कोई सुरक्षा नहीं है। हर दिन यह कमजोर होता जाता है। वे मुझे मार नहीं सकते लेकिन वे मेरे शरीर को नुक़सान पहुंचा सकते हैं। अभी मेरे जिगर के क्षेत्र में बहुत दर्द हो रहा है। क्या आप इसे एक्स-रे कर सकते हैं? दुख की बात है, मैंने समझाया कि मेरी दंत एक्स-रे मशीन शायद अपर्याप्त थी क्योंकि यह केवल दांतों और जबड़े की छोटी फिल्में ले सकती थी, लेकिन हम कोशिश कर सकते थे। अमृतो को हमारे पास सबसे बड़ी एक्स-रे फ़िल्म मिली, जबकि मैंने इसकी बीम को चौड़ा करने के लिए डेंटल एक्स-रे मशीन के साथ जिग्गल किया। मैंने वह करने की कोशिश की जो ओशो पूछ रहा था। मैंने उसके जिगर के क्षेत्र की एक तस्वीर ली और फिर दंत विकास में बड़ी फ़िल्म विकसित करने में कामयाब रहा टैंक जिसे छोटी इंट्रा-ओरल डेंटल फ़िल्मों के लिए डिज़ाइन किया गया था, लेकिन परिणामी छवि धुंधली और अस्पष्ट थी। यह आख़िरी बार था जब मैंने ओशो को उसके भौतिक शरीर में देखा था। 19 जनवरी को शाम 4:30 बजे थे: मैं अपनी प्रेमिका के साथ अपने कमरे में था जब दरवाजे पर एक ज़रूरी दस्तक हुई। मनीषा, पीला और तनावग्रस्त दिख रही थी, ने पूछा कि क्या वह मेरे कमरे के फ़ोन का उपयोग कर सकती है। मुझे पता था कि वह केवल पूछेगी कि क्या कुछ असामान्य हो रहा है। अस्थायी सचिव के रूप में कार्य करते हुए वह इनर सर्कल के सदस्यों को फ़ोन कर रही थी और उन्हें कृष्णा हाउस में एक असाधारण बैठक में तुरंत आने के लिए कह रही थी। ओशो ने पंद्रह महीने पहले इक्कीस लोगों की एक कम्यून प्रबंधन टीम की स्थापना की थी, इसे इनर सर्कल का नाम दिया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका काम कम्यून के दिन-प्रतिदिन चलने का प्रबंधन करना था। मैं मूल चयन में नहीं था, लेकिन कुछ महीने बाद मुझे शामिल होने के लिए कहा गया था। फ़ोन करने के बाद, मनीषा ने कहा, “गीट, तुमने सुना कि मैं दूसरों को क्या बता रहा था। बैठक कृष्णा हाउस की छत पर ब्लू रूम में है। क्या आप वहां तुरंत जा सकते हैं?” इससे पहले कि मैं कोई सवाल पूछ पाता, वह जल्दी से गलियारे में चली गई, स्पष्ट रूप से एक और महत्वपूर्ण कार्य में शामिल थी। मैंने दोपहर के अधिकांश समय अजीब तरह से विपुल महसूस किया था। बाहरी मामलों की उथल-पुथल के बावजूद मैं कई दिनों से उत्साहित महसूस कर रहा था। मेरे दिल में ख़ुशी का एक अकथनीय नृत्य था। अंदर से मुझे उत्साह, आनंद महसूस हुआ। ब्लू रूम में पहुंचने पर, मैंने देखा कि अधिकांश इनर सर्कल पहले से ही वहां इकट्ठा हो चुके थे। माहौल तनावपूर्ण और तनावपूर्ण था। मेरा अपना उत्साह जगह से बाहर लग रहा था। मैं बैठ गया और इंतज़ार किया। कुछ मिनटों के बाद जयेश ने अमृतो के साथ प्रवेश किया। यह देखने के लिए संक्षेप में चारों ओर देखते हुए कि हम सभी मौजूद हैं, उन्होंने एक दृढ़, हालांकि शांत आवाज़ में कहा, “मुझे लगता है कि इसे लपेटने का कोई तरीक़ा नहीं है। मैं आपको सीधे बताऊंगा। ओशो ने कुछ समय पहले लगभग 4:45 बजे अपना शरीर छोड़ दिया था दोपहर।” स्तब्ध, मैंने अपनी घड़ी को देखा। शाम के 5:15 बजे थे। उपस्थित दो या तीन लोग रोने लगे। जयेश ने जल्दी से बीच में टोका, “देखो, मुझे तुम्हारी सारी मदद की ज़रूरत है। कृपया अभी तक अलग न हों। मुझे आप सभी की ज़रूरत है कि ओशो के भेजने को उतना ही सुंदर बनाने में मदद करें जितना वह हकदार है। यह आख़िरी चीज है जो हम उसके लिए कर सकते हैं भौतिक शरीर, चलो इसे अद्भुत बनाते हैं। उसने मुझे ठीक से बताया कि वह कैसे चाहता है कि ऐसा हो। उसने मुझे हर चीज के लिए विस्तृत निर्देश दिए, लेकिन मुझे यहां हर किसी की मदद की ज़रूरत है।” जयेश के शब्दों को सुनकर मेरा पहले का उत्साह सदमे में बदल गया था, लेकिन मैंने ओशो को अपने लोगों के साथ अपने अंतिम उत्सव का आनंद लेने में सक्षम बनाने के लिए हमारी मदद के लिए जयेश की अपील को स्पष्ट रूप से सुना। जैसे ही मैंने ब्लू रूम छोड़ा, जयेश ने मुझे बताया कि ओशो ने अनुरोध किया था कि मैं उनके शरीर को जलते हुए घाटों तक ले जाने के लिए एक वाहक बनूं। गतिविधि और भ्रमित भावनाओं के एक धुंध में मुझे याद है कि ओशो के इस अंतिम उपहार के लिए बेहद आभारी महसूस कर रहा था। - स्वामी देवगीत पुस्तक : ओशो - द फर्स्ट बुद्ध इन द डेंटल चेयर अध्याय: 17 अध्याय का नाम: ओशो का अंतिम दंत नाटक: अधिनियम V अंतिम सुनहरी झलक
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