राजस्थान न्यूज़: बीकानेर। नगर निकाय चुनाव के बीच बीकानेर कांग्रेस में टिकट विवाद के दौरान शहर कांग्रेस जिलाध्यक्ष मदन गोपाल मेघवाल के साथ हुई कथित मारपीट के मामले में प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने बड़ी संगठनात्मक कार्रवाई की है। कांग्रेस ने पूर्व पार्षद दीपक अरोड़ा और मोहित अरोड़ा को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से 6 वर्ष के लिए निलंबित कर दिया है।राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के संगठन महासचिव ललित तुनवाल की ओर से 2 सितंबर को जारी कार्यालय आदेश में कहा गया है कि बीकानेर शहर जिलाध्यक्ष से प्राप्त शिकायत के आधार पर यह कार्रवाई की गई है। वार्ड 50 के चुनाव कार्यालय उद्घाटन के दौरान हुआ था विवाद मामला बीकानेर नगर निगम के वार्ड नंबर 50 से जुड़ा है। यहां कांग्रेस प्रत्याशी नवरतन डागा के चुनाव कार्यालय के उद्घाटन के दौरान जिलाध्यक्ष मदन गोपाल मेघवाल के साथ कथित मारपीट और अभद्र व्यवहार की घटना सामने आई थी। मेघवाल ने आरोप लगाया था कि टिकट नहीं मिलने से नाराज मोहित अरोड़ा और उसके साथियों ने उन्हें कार्यक्रम स्थल से बाहर बुलाया और टिकट नहीं देने की बात को लेकर विवाद किया। इसके बाद कथित तौर पर उनके साथ मारपीट की गई। PCC आदेश में दीपक और मोहित अरोड़ा का नाम प्रदेश कांग्रेस के आदेश में कहा गया है कि जिलाध्यक्ष मदन गोपाल मेघवाल की शिकायत के अनुसार कार्यालय उद्घाटन के दौरान पूर्व पार्षद दीपक अरोड़ा, मोहित अरोड़ा तथा अन्य लोगों द्वारा कथित मारपीट एवं अभद्र व्यवहार किया गया।पीसीसी ने इस आचरण को गंभीर अनुशासनहीनता की श्रेणी में मानते हुए दोनों नेताओं के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की। तत्काल प्रभाव से 6 साल का निलंबन संगठन महासचिव ललित तुनवाल की ओर से जारी आदेश में कहा गया कि शिकायत की गंभीरता को देखते हुए दीपक अरोड़ा और मोहित अरोड़ा को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से छह वर्ष के लिए तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाता है। आदेश की प्रति बीकानेर शहर कांग्रेस जिलाध्यक्ष और प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय की संबंधित शाखा को भेजी गई है। टिकट नहीं मिलने को लेकर शुरू हुआ था विवाद मदन गोपाल मेघवाल ने घटना के बाद बताया था कि मोहित अरोड़ा वार्ड 50 से टिकट की मांग कर रहे थे। पार्टी ने यहां नवरतन डागा को प्रत्याशी बनाया।मेघवाल के अनुसार उद्घाटन कार्यक्रम में पहले उनका स्वागत किया गया और बाद में टिकट नहीं मिलने का सवाल उठाया गया। इसी दौरान विवाद बढ़ गया और कथित मारपीट हुई।हालांकि घटना में लगाए गए आरोपों की आपराधिक जिम्मेदारी पुलिस जांच और कानूनी प्रक्रिया से तय होगी। चार युवकों को पुलिस ने किया था डिटेन घटना के बाद बीकानेर पुलिस ने भी कार्रवाई की थी। बीकानेर एसपी मृदुल कच्छावा की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार चार युवकों को पूछताछ के लिए डिटेन किया गया था।घटना के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने थाने के बाहर प्रदर्शन कर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की थी।
Read more 3rd Sep 2026
राजस्थान न्यूज़: जयपुर। बढ़ते साइबर और ऑनलाइन फ्रॉड को लेकर लोगों में जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से साईनाथ चैरिटेबल ट्रस्ट और सद्भावना के सिपाही संगठन ने “थिंक बिफोर यू क्लिक” अभियान की शुरुआत की है। अभियान के जरिए लोगों से किसी भी अनजान मैसेज, फाइल या लिंक पर क्लिक करने से पहले उसकी सत्यता जांचने की अपील की गई है। दोनों संस्थाओं के प्रमुख, समाजसेवी एवं उद्योगपति राजीव अरोड़ा ने कहा कि आज ऑनलाइन फ्रॉड तेजी से बढ़ रहा है और हर दिन हमारे आसपास के लोग आर्थिक ठगी का शिकार हो रहे हैं। ऐसे में डिजिटल सावधानी अब केवल जागरूकता का विषय नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जरूरत बन गई है। ‘हमारी जिज्ञासा का फायदा उठा रहे साइबर ठग’ राजीव अरोड़ा ने कहा कि ऑनलाइन ठगी के पीछे सबसे बड़ा कारण मानवीय जिज्ञासा और किसी नई जानकारी या ऑफर को तुरंत जानने की प्रवृत्ति है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर आने वाले आकर्षक संदेश, फाइलें और लिंक लोगों को तुरंत क्लिक करने के लिए प्रेरित करते हैं। साइबर ठग इसी आदत का फायदा उठाकर लोगों को धोखाधड़ी के जाल में फंसा रहे हैं। हर लिंक पर क्लिक करने से पहले करें जांच ‘थिंक बिफोर यू क्लिक’ अभियान का मुख्य संदेश है कि किसी भी मैसेज, लिंक या फाइल को बिना सत्यापन के न खोलें। राजीव अरोड़ा ने लोगों से अपील की कि यदि किसी परिचित व्यक्ति के नाम से भी कोई संदिग्ध लिंक या फाइल आए तो पहले उससे संपर्क कर पुष्टि करें। भेजने वाले की पहचान और संदेश की सत्यता सुनिश्चित होने के बाद ही आगे की कार्रवाई करें। एक छोटी आदत बचा सकती है जीवनभर की कमाई अरोड़ा ने कहा कि डिजिटल माध्यमों पर थोड़ी सी सावधानी बड़े आर्थिक नुकसान से बचा सकती है। उन्होंने कहा कि किसी संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से पहले कुछ सेकंड रुककर सोचना और उसकी जांच करना जीवनभर की कमाई को सुरक्षित रखने में मदद कर सकता है। उन्होंने कहा कि साइबर ठगी से बचाव केवल पुलिस या प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि आम नागरिक की जागरूकता भी इसमें सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। पुलिस-प्रशासन पर भी कम होगा दबाव राजीव अरोड़ा ने कहा कि यदि लोग ऑनलाइन गतिविधियों में सतर्कता बरतें और संदिग्ध लिंक, फाइल या मैसेज से दूरी बनाए रखें तो साइबर अपराध के मामलों में कमी लाई जा सकती है। इससे जहां आम लोगों को वित्तीय नुकसान से बचाया जा सकेगा, वहीं साइबर फ्रॉड की शिकायतों को लेकर पुलिस और प्रशासन पर पड़ने वाला अनावश्यक दबाव भी कम होगा। डिजिटल जागरूकता को जनअभियान बनाने का प्रयास साईनाथ चैरिटेबल ट्रस्ट और सद्भावना के सिपाही संगठन की ओर से शुरू किए गए अभियान का उद्देश्य डिजिटल सुरक्षा को जन-जागरूकता से जोड़ना है। अभियान के माध्यम से लोगों को यही संदेश दिया जा रहा है कि “क्लिक करने से पहले सोचें, जांचें और सत्यापित करें।” डिजिटल युग में यही सावधानी साइबर ठगी के खिलाफ सबसे प्रभावी सुरक्षा कवच बन सकती है।
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राजस्थान न्यूज़: सीकर। रामगढ़ सेठान थाना क्षेत्र में सोमवार रात हुए सड़क हादसे में झालावाड़ एसपी आईपीएस अमित बुडानिया के पिता महावीर जाट (62) की मौत हो गई। हादसा उस समय हुआ जब उनकी कार का टायर अचानक फट गया और वाहन अनियंत्रित होकर सामने से आ रहे ट्रॉले से टकरा गया। घटना की सूचना मिलते ही रामगढ़ पुलिस और 108 एम्बुलेंस मौके पर पहुंची। गंभीर रूप से घायल महावीर जाट को फतेहपुर के धानुका अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। सोमवार रात करीब 8:30 बजे हुआ हादसा जानकारी के अनुसार महावीर जाट, निवासी सीतसर, जिला झुंझुनूं, सोमवार रात फतेहपुर से अपने गांव की ओर लौट रहे थे। वे सेना से सेवानिवृत्त अधिकारी थे। रात करीब 8:30 बजे दिल्ली-बीकानेर हाईवे पर सदीनसर में सरस्वती स्कूल के सामने उनकी डैटसन गो कार का टायर फट गया। इसके बाद कार अनियंत्रित होकर सामने से आ रहे ट्रॉले से जा टकराई। एंबुलेंस से अस्पताल पहुंचाया गया हादसे के बाद आसपास के लोगों ने पुलिस और एम्बुलेंस को सूचना दी। मौके पर पहुंची 108 एम्बुलेंस की मदद से महावीर जाट को फतेहपुर के धानुका अस्पताल ले जाया गया, लेकिन तब तक उनकी हालत बेहद गंभीर हो चुकी थी। अस्पताल में जांच के बाद डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। रिटायर्ड आर्मी अफसर थे महावीर जाट महावीर जाट सेना से सेवानिवृत्त अधिकारी थे। वे झालावाड़ एसपी अमित बुडानिया के पिता थे। हादसे की सूचना के बाद परिवार और परिचितों में शोक की लहर दौड़ गई।पुलिस ने दुर्घटना से जुड़े तथ्यों की जांच शुरू कर दी है।
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अजमेर न्यूज़: 1100 वर्ष पूर्व स्थापित मंदिर की बड़ी है मान्यता, दूर दराज से पहुंचते हैं हजारों श्रद्धालु
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राष्ट्रीय न्यूज़: नई दिल्ली। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने सभी राज्य सरकारों से बाइक टैक्सी को मंजूरी देने की अपील की है। उन्होंने कहा कि निजी बाइक और स्कूटर के जरिए यात्रियों को परिवहन सुविधा देने से खासकर ग्रामीण और छोटे शहरों में रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं। गडकरी ने दावा किया कि बाइक टैक्सी को व्यापक स्तर पर अनुमति मिलने से करीब 8 करोड़ लोगों के लिए रोजगार या आय के अवसर तैयार हो सकते हैं। ‘केंद्र ने अनुमति दी, अब राज्यों की मंजूरी जरूरी’ गडकरी ने कहा कि केंद्र सरकार बाइक टैक्सी को अनुमति देने की दिशा में कदम उठा चुकी है, लेकिन परिवहन का विषय राज्य सरकारों से भी जुड़ा होने के कारण कई राज्यों में अभी तक इसकी मंजूरी नहीं दी गई है। उन्होंने राज्य सरकारों से अपील की कि वे बाइक टैक्सी को अनुमति दें, ताकि युवाओं और आम लोगों को कम लागत में नया रोजगार और कमाई का जरिया मिल सके। बार-बार ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों पर सख्ती की तैयारी गडकरी ने सड़क सुरक्षा को लेकर भी सख्त रुख अपनाने के संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे वाहन चालकों पर कड़ी कार्रवाई की जरूरत है जो बार-बार ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करते हैं। इसके लिए मोटर व्हीकल एक्ट में बदलाव कर ‘नेगेटिव पॉइंट सिस्टम’ लागू करने का प्रस्ताव बताया गया है। इसके तहत बार-बार नियम तोड़ने वाले ड्राइवरों के रिकॉर्ड पर नकारात्मक अंक जुड़ सकते हैं और आगे सख्त कार्रवाई की व्यवस्था बनाई जा सकती है। भारी वाहन चालकों की ट्रेनिंग पर जोर नितिन गडकरी ने भारी वाहन और निर्माण उपकरण चलाने वाले ड्राइवरों के लिए अनिवार्य प्रशिक्षण की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि बड़े निर्माण उपकरण और भारी मशीनें चलाने वालों के लिए व्यवस्थित प्रशिक्षण जरूरी होना चाहिए। उन्होंने JCB India जैसी कंपनियों से भी अपील की कि मशीन या उपकरण देने से पहले ड्राइवरों को उचित ट्रेनिंग दी जाए। 10 लाख ड्राइवरों की होगी मुफ्त स्वास्थ्य जांच गडकरी ने सड़क और औद्योगिक सुरक्षा से जुड़ा ‘सुरक्षा’ पायलट प्रोग्राम भी शुरू किया है। इस कार्यक्रम के तहत हाईवे, खनन और निर्माण जैसे जोखिम वाले क्षेत्रों में काम करने वाले करीब 10 लाख ड्राइवरों और कर्मचारियों की मुफ्त मेडिकल जांच और काउंसलिंग कराने का लक्ष्य रखा गया है। पहले चरण में नागपुर-कामठी के NH-44 और चंद्रपुर के खनन क्षेत्र में करीब 10 हजार लोगों की जांच करने की योजना है। दोपहिया हादसों में 81,780 मौतों का दावा गडकरी ने सड़क हादसों के आंकड़ों का जिक्र करते हुए कहा कि भारत में दोपहिया वाहन दुर्घटनाओं में 81,780 लोगों की मौत हुई है और यह संख्या बेहद चिंताजनक है। उन्होंने सड़क हादसों के प्रमुख कारणों में सीट बेल्ट नहीं लगाना, हिट एंड रन, गलत दिशा में वाहन चलाना, शराब पीकर ड्राइविंग और मोबाइल फोन के इस्तेमाल को गिनाया। सीट बेल्ट नहीं लगाने से 14,466 मौतों का आंकड़ा गडकरी ने बताया कि सीट बेल्ट नहीं लगाने से 14,466 मौतें हुईं, जबकि हिट एंड रन की घटनाओं में 34,030 लोगों की जान गई।इन आंकड़ों के आधार पर उन्होंने ड्राइवर ट्रेनिंग, स्वास्थ्य जांच और ट्रैफिक नियमों के सख्त पालन की जरूरत पर जोर दिया। रोजगार और सड़क सुरक्षा दोनों पर फोकस गडकरी का बयान ऐसे समय आया है जब कई राज्यों में बाइक टैक्सी को लेकर अलग-अलग नीतियां और विवाद सामने आते रहे हैं। केंद्र की कोशिश इसे रोजगार के अवसर के तौर पर बढ़ावा देने की है, वहीं राज्य सरकारों को स्थानीय परिवहन नियमों और सुरक्षा मानकों के आधार पर निर्णय लेना होगा।
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राष्ट्रीय न्यूज़: डीग। साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान “ऑपरेशन काउंटडाउन” के तहत डीग पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दिल्ली के उत्तम नगर इलाके में चल रहे कथित फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने तीन मंजिला इमारत में दबिश देकर 31 युवकों और 33 युवतियों सहित कुल 64 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि 2 नाबालिगों को रेस्क्यू कराया गया। डीग पुलिस अधीक्षक शरण गोपीनाथ के. के निर्देशन में की गई इस कार्रवाई में पुलिस ने मौके से 88 एंड्रॉयड स्मार्टफोन, एक्सिस बैंक, यस बैंक और एचडीएफसी बैंक के कथित फर्जी आईडी कार्ड तथा बड़ी मात्रा में बैंकिंग डेटा जब्त किया है। बैंक अधिकारी बनकर लोगों को करते थे कॉल पुलिस के अनुसार गिरोह के सदस्य खुद को एक्सिस बैंक और एचडीएफसी बैंक का वरिष्ठ अधिकारी बताकर लोगों को फोन करते थे। कॉल के दौरान ग्राहकों को क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाने, कार्ड रिन्यू करने या अन्य बैंकिंग सुविधा देने का झांसा दिया जाता था। इसके बाद उनसे कथित रूप से OTP, CVV, PAN कार्ड की जानकारी, जन्मतिथि और Gmail ID जैसी संवेदनशील जानकारियां हासिल की जाती थीं। पुलिस का आरोप है कि इन जानकारियों का इस्तेमाल कर खातों और कार्ड से रकम निकाली जाती थी। डीग के बैंक मैनेजर की शिकायत से खुला मामला इस साइबर नेटवर्क की जांच उस समय शुरू हुई जब एक्सिस बैंक, डीग के शाखा प्रबंधक फूल सिंह ने साइबर क्राइम थाना डीग में शिकायत दर्ज कराई।शिकायत में आरोप लगाया गया कि कुछ अज्ञात लोग बैंक के नाम, लोगो और साख का दुरुपयोग कर कथित फर्जी वेबसाइटों और कॉलिंग के जरिए ग्राहकों को ठगी का शिकार बना रहे हैं। इसके बाद पुलिस ने तकनीकी जांच शुरू की और डिजिटल फुटप्रिंट्स तथा सर्विलांस के आधार पर संदिग्धों तक पहुंचने का प्रयास किया। जांच आजमगढ़ के आकाश तक पहुंची पुलिस जांच में तकनीकी सुरागों के आधार पर टीम उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ निवासी आकाश तक पहुंची। इसके बाद जांच आगे बढ़ी तो दिल्ली के उत्तम नगर में किराए पर ली गई तीन मंजिला इमारत से कॉल सेंटर संचालित होने की जानकारी सामने आई।पुलिस के अनुसार यहां से खास तौर पर राजस्थान के मोबाइल नंबरों पर टारगेटेड कॉलिंग की जा रही थी। फर्जी बैंक आईडी और बैंकिंग डेटा जब्त रेड के दौरान पुलिस को मौके से 88 स्मार्टफोन के साथ बैंक कर्मचारियों के नाम पर तैयार किए गए कथित फर्जी आईडी कार्ड और आम लोगों का बैंकिंग डेटा मिला।पुलिस अब जब्त मोबाइल फोन और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच कर यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क से कितने लोग ठगी का शिकार हुए और कुल कितनी राशि का लेन-देन हुआ। अंतरराज्यीय नेटवर्क की जांच जारी पुलिस इस मामले को एक बड़े अंतरराज्यीय साइबर नेटवर्क से जोड़कर देख रही है। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर गिरोह के अन्य सदस्यों, डेटा उपलब्ध कराने वालों और रकम के ट्रांजेक्शन से जुड़े लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। पुलिस के अनुसार आगे की जांच में इस नेटवर्क से जुड़े और नाम सामने आ सकते हैं।
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गुप्त ध्वनि किरणों के साथ ओशो पर किसने हमला किया?...
गुप्त ध्वनि किरणों के साथ ओशो पर किसने हमला किया?... * ओशो के निजी दंत चिकित्सक देवगेट ओशो की मृत्यु से 4 दिन पहले हुई घटनाओं के बारे में बात करते हैं (शरीर को छोड़कर)... * 15 aजनवरी, 1990 को, मेरे जन्मदिन पर, मुझे शुन्यो से एक संदेश मिला: ओशो चाहते थे कि मैं उनके पेट का एक्स-रे ले। हम दंaत कक्ष में मिले। ओशो का शरीर पतला और बेकार लग रहा था, फिर भी मैंने उसे शक्तिशाली रूप से उपस्थित महसूस किया। मुझे शुन्यो से पता था कि वह हर दिन बीस घंटे से अधिक सो रहा था, हर शाम बुद्ध हॉल में कुछ क़ीमती मिनटों के लिए अपनी शारीरिक ऊर्जा को बचा रहा था। ओशो नेa मुझे बताया कि उसके हमलावरों की आवाज़ से उसका शरीर बहुत कमजोर हो गया था। उन्होंने कहा कि उनमें से शायद तीन, दो पुरुष और एक महिला, ध्वनि तरंगों पर ध्यानaa केंद्रित करने और अपने शरीर को लक्षित करने के लिए एक विशेष गठन में बैठे थे। यहां भारत में प्राचीन योगिक प्रथाएं हैं जहां लोग कुछ ध्वनियों, कुछ मंत्रों को जानते हैं, जो लोगों को नुक़सान पहुंचाने के लिए ध्वनि को केंद्रित कर सकते हैं। लेकिन मुझ पर हमला करaaने वाले ये लोग भारतीय नहीं हैं। वे वही लोग हैं जिन्होंने अमेरिका में पहले मुझे मारने की कोशिश की थी। वे तब सफल नहीं हो सके, और अब वे जो शुरू किया उसे पूरा कर ने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने मुझे बोलने से रोकने के लिए ज़हर की कोशिश की लेकिन मैं जारी रखने में कामयाब रहा। अब, पांच साल बाद वे वापस आ गए हैं। उन्होंने पहले बुद्ध हॉल में अपनी ध्वनि किरणों का उपयोग मेरे दिमाग़ पर हमला करने के लिए किया लेकिन मैं अपने दिमाग़ में नहीं हूं। मैं एक नो-मन हूं और उनकी आवाज़ का बहुत कम प्रभाव था। इसलिए उन्होंने अपनी रणनीति बदल दी, अब वे मेरे शरीर पर हमला कर रहे हैं। मेरे गरीब शरीर को उनकी किरणों से कोई सुरक्षा नहीं है। हर दिन यह कमजोर होता जाता है। वे मुझे मार नहीं सकते लेकिन वे मेरे शरीर को नुक़सान पहुंचा सकते हैं। अभी मेरे जिगर के क्षेत्र में बहुत दर्द हो रहा है। क्या आप इसे एक्स-रे कर सकते हैं? दुख की बात है, मैंने समझाया कि मेरी दंत एक्स-रे मशीन शायद अपर्याप्त थी क्योंकि यह केवल दांतों और जबड़े की छोटी फिल्में ले सकती थी, लेकिन हम कोशिश कर सकते थे। अमृतो को हमारे पास सबसे बड़ी एक्स-रे फ़िल्म मिली, जबकि मैंने इसकी बीम को चौड़ा करने के लिए डेंटल एक्स-रे मशीन के साथ जिग्गल किया। मैंने वह करने की कोशिश की जो ओशो पूछ रहा था। मैंने उसके जिगर के क्षेत्र की एक तस्वीर ली और फिर दंत विकास में बड़ी फ़िल्म विकसित करने में कामयाब रहा टैंक जिसे छोटी इंट्रा-ओरल डेंटल फ़िल्मों के लिए डिज़ाइन किया गया था, लेकिन परिणामी छवि धुंधली और अस्पष्ट थी। यह आख़िरी बार था जब मैंने ओशो को उसके भौतिक शरीर में देखा था। 19 जनवरी को शाम 4:30 बजे थे: मैं अपनी प्रेमिका के साथ अपने कमरे में था जब दरवाजे पर एक ज़रूरी दस्तक हुई। मनीषा, पीला और तनावग्रस्त दिख रही थी, ने पूछा कि क्या वह मेरे कमरे के फ़ोन का उपयोग कर सकती है। मुझे पता था कि वह केवल पूछेगी कि क्या कुछ असामान्य हो रहा है। अस्थायी सचिव के रूप में कार्य करते हुए वह इनर सर्कल के सदस्यों को फ़ोन कर रही थी और उन्हें कृष्णा हाउस में एक असाधारण बैठक में तुरंत आने के लिए कह रही थी। ओशो ने पंद्रह महीने पहले इक्कीस लोगों की एक कम्यून प्रबंधन टीम की स्थापना की थी, इसे इनर सर्कल का नाम दिया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका काम कम्यून के दिन-प्रतिदिन चलने का प्रबंधन करना था। मैं मूल चयन में नहीं था, लेकिन कुछ महीने बाद मुझे शामिल होने के लिए कहा गया था। फ़ोन करने के बाद, मनीषा ने कहा, “गीट, तुमने सुना कि मैं दूसरों को क्या बता रहा था। बैठक कृष्णा हाउस की छत पर ब्लू रूम में है। क्या आप वहां तुरंत जा सकते हैं?” इससे पहले कि मैं कोई सवाल पूछ पाता, वह जल्दी से गलियारे में चली गई, स्पष्ट रूप से एक और महत्वपूर्ण कार्य में शामिल थी। मैंने दोपहर के अधिकांश समय अजीब तरह से विपुल महसूस किया था। बाहरी मामलों की उथल-पुथल के बावजूद मैं कई दिनों से उत्साहित महसूस कर रहा था। मेरे दिल में ख़ुशी का एक अकथनीय नृत्य था। अंदर से मुझे उत्साह, आनंद महसूस हुआ। ब्लू रूम में पहुंचने पर, मैंने देखा कि अधिकांश इनर सर्कल पहले से ही वहां इकट्ठा हो चुके थे। माहौल तनावपूर्ण और तनावपूर्ण था। मेरा अपना उत्साह जगह से बाहर लग रहा था। मैं बैठ गया और इंतज़ार किया। कुछ मिनटों के बाद जयेश ने अमृतो के साथ प्रवेश किया। यह देखने के लिए संक्षेप में चारों ओर देखते हुए कि हम सभी मौजूद हैं, उन्होंने एक दृढ़, हालांकि शांत आवाज़ में कहा, “मुझे लगता है कि इसे लपेटने का कोई तरीक़ा नहीं है। मैं आपको सीधे बताऊंगा। ओशो ने कुछ समय पहले लगभग 4:45 बजे अपना शरीर छोड़ दिया था दोपहर।” स्तब्ध, मैंने अपनी घड़ी को देखा। शाम के 5:15 बजे थे। उपस्थित दो या तीन लोग रोने लगे। जयेश ने जल्दी से बीच में टोका, “देखो, मुझे तुम्हारी सारी मदद की ज़रूरत है। कृपया अभी तक अलग न हों। मुझे आप सभी की ज़रूरत है कि ओशो के भेजने को उतना ही सुंदर बनाने में मदद करें जितना वह हकदार है। यह आख़िरी चीज है जो हम उसके लिए कर सकते हैं भौतिक शरीर, चलो इसे अद्भुत बनाते हैं। उसने मुझे ठीक से बताया कि वह कैसे चाहता है कि ऐसा हो। उसने मुझे हर चीज के लिए विस्तृत निर्देश दिए, लेकिन मुझे यहां हर किसी की मदद की ज़रूरत है।” जयेश के शब्दों को सुनकर मेरा पहले का उत्साह सदमे में बदल गया था, लेकिन मैंने ओशो को अपने लोगों के साथ अपने अंतिम उत्सव का आनंद लेने में सक्षम बनाने के लिए हमारी मदद के लिए जयेश की अपील को स्पष्ट रूप से सुना। जैसे ही मैंने ब्लू रूम छोड़ा, जयेश ने मुझे बताया कि ओशो ने अनुरोध किया था कि मैं उनके शरीर को जलते हुए घाटों तक ले जाने के लिए एक वाहक बनूं। गतिविधि और भ्रमित भावनाओं के एक धुंध में मुझे याद है कि ओशो के इस अंतिम उपहार के लिए बेहद आभारी महसूस कर रहा था। - स्वामी देवगीत पुस्तक : ओशो - द फर्स्ट बुद्ध इन द डेंटल चेयर अध्याय: 17 अध्याय का नाम: ओशो का अंतिम दंत नाटक: अधिनियम V अंतिम सुनहरी झलक
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