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राजस्थान

राजस्थान न्यूज़: गणेश चतुर्थी पर मोती डूंगरी पहुंचे मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, सपत्नीक की पूजा-अर्चना

राजस्थान न्यूज़: जयपुर। गणेश चतुर्थी के पावन अवसर पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा सोमवार को जयपुर के प्रसिद्ध मोती डूंगरी गणेश मंदिर पहुंचे। मुख्यमंत्री ने यहां भगवान श्री गणेश के दर्शन कर सपत्नीक विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और राजस्थान की खुशहाली, समृद्धि एवं प्रदेशवासियों के सुखद भविष्य की कामना की। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने मंदिर में भगवान गणेश के समक्ष शीश नवाया और प्रदेश के विकास, शांति तथा जनकल्याण के लिए प्रार्थना की। गणेश चतुर्थी के अवसर पर मंदिर में श्रद्धा और उत्साह का वातावरण रहा। मुख्यमंत्री ने भगवान श्री गणेश से प्रदेश में सुख-शांति बनाए रखने और प्रत्येक नागरिक के जीवन में उन्नति एवं समृद्धि आने की कामना की। पूजा-अर्चना के बाद मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को गणेश चतुर्थी की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि विघ्नहर्ता और मंगलकर्ता भगवान श्री गणेश सभी के जीवन से बाधाओं को दूर करें तथा प्रत्येक परिवार में सुख, समृद्धि और खुशहाली लेकर आएं। मुख्यमंत्री ने कामना की कि भगवान गणेश की कृपा से राजस्थान निरंतर प्रगति के पथ पर आगे बढ़े और समाज में आपसी सद्भाव, भाईचारा तथा सकारात्मकता बनी रहे। उन्होंने प्रदेशवासियों के स्वस्थ, सुखी और समृद्ध जीवन के लिए भी प्रार्थना की। गणेश चतुर्थी के अवसर पर जयपुर के मोती डूंगरी गणेश मंदिर में सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान गणेश के दर्शन के लिए पहुंचते रहे। मुख्यमंत्री के मंदिर पहुंचने के दौरान भी श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। मोती डूंगरी गणेश मंदिर जयपुर के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है और गणेश चतुर्थी के अवसर पर यहां विशेष धार्मिक आयोजन एवं पूजा-अर्चना की जाती है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने इस अवसर पर भगवान गणेश का आशीर्वाद लेकर प्रदेश की प्रगति एवं जनकल्याण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।

Read more 14th Sep 2026

राजस्थान न्यूज़: राजस्थान निकाय चुनाव: झालावाड़ में कांग्रेस का बड़ा उलटफेर, बाड़मेर में 15 साल बाद भाजपा को बहुमत

राजस्थान न्यूज़: जयपुर। राजस्थान के नगरीय निकाय चुनाव के नतीजों में सोमवार को कई जगह चौंकाने वाले राजनीतिक समीकरण सामने आए। झालावाड़ नगर परिषद में कांग्रेस ने शानदार प्रदर्शन करते हुए स्पष्ट बहुमत हासिल कर लिया, वहीं बाड़मेर नगर परिषद में भाजपा ने करीब 15 साल बाद बहुमत का आंकड़ा हासिल कर स्थानीय सत्ता में बड़ी वापसी की है। दोनों नगर परिषदों के नतीजे प्रदेश की स्थानीय राजनीति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। झालावाड़ में कांग्रेस की बड़ी जीत, 45 में से 29 वार्ड पर कब्जा झालावाड़ नगर परिषद के कुल 45 वार्डों में कांग्रेस ने 29 वार्डों में जीत दर्ज करते हुए स्पष्ट बहुमत हासिल किया है। भाजपा को यहां 13 वार्डों में सफलता मिली, जबकि दो वार्ड निर्दलीय प्रत्याशियों के खाते में गए। एक वार्ड में आम आदमी पार्टी ने जीत दर्ज कर नगर परिषद में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है। झालावाड़ का चुनाव परिणाम राजनीतिक रूप से इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह क्षेत्र लंबे समय से भाजपा का मजबूत प्रभाव क्षेत्र रहा है। नगर परिषद में इससे पहले भाजपा का बोर्ड था। ऐसे में कांग्रेस का 29 सीटों तक पहुंचना पार्टी के लिए बड़ी उपलब्धि और भाजपा के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक झटका माना जा रहा है। 45 सदस्यीय नगर परिषद में बहुमत के लिए 23 पार्षदों का समर्थन जरूरी है। कांग्रेस ने अपने दम पर 29 सीटें जीतकर बहुमत के आंकड़े को छह सीटों से पार कर लिया है। इसके साथ ही झालावाड़ नगर परिषद में कांग्रेस का बोर्ड बनने का रास्ता लगभग साफ हो गया है। चुनाव परिणाम में भाजपा को 13 सीटों पर संतोष करना पड़ा। वहीं दो निर्दलीय और आम आदमी पार्टी के एक पार्षद की जीत ने भी चुनावी मुकाबले में स्थानीय और तीसरे विकल्प की मौजूदगी दिखाई है। हालांकि कांग्रेस के पास स्पष्ट बहुमत होने के कारण बोर्ड गठन के लिए उसे अन्य पार्षदों के समर्थन की आवश्यकता नहीं होगी। बाड़मेर में 15 साल बाद भाजपा की वापसी, 29 वार्ड जीतकर हासिल किया बहुमत दूसरी ओर पश्चिमी राजस्थान की महत्वपूर्ण बाड़मेर नगर परिषद में भाजपा ने बड़ा राजनीतिक उलटफेर किया है। नगर परिषद के कुल 55 वार्डों में भाजपा ने 29 सीटों पर जीत दर्ज करते हुए स्पष्ट बहुमत हासिल कर लिया है। इसके साथ ही करीब 15 साल बाद बाड़मेर नगर परिषद में भाजपा के बहुमत का रास्ता साफ हुआ है। 55 सदस्यीय बाड़मेर नगर परिषद में बोर्ड बनाने के लिए 28 पार्षदों का समर्थन जरूरी है। भाजपा ने 29 वार्डों में जीत दर्ज कर बहुमत के आंकड़े को पार कर लिया है। परिणाम सामने आने के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों में उत्साह का माहौल है। बाड़मेर में पिछले लंबे समय से स्थानीय राजनीति में कांग्रेस का प्रभाव मजबूत रहा है। ऐसे में भाजपा की यह जीत केवल नगर परिषद बोर्ड गठन तक सीमित नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे जिले की राजनीतिक तस्वीर में महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में भी देखा जा रहा है। पार्टी ने चुनाव से पहले प्रत्येक वार्ड में स्थानीय समीकरणों और मजबूत प्रत्याशियों पर विशेष जोर दिया था, जिसका असर चुनाव परिणाम में दिखाई दिया। झालावाड़ में कांग्रेस, बाड़मेर में भाजपा—दो नतीजों ने खींचा ध्यान राजस्थान के निकाय चुनाव परिणामों के बीच झालावाड़ और बाड़मेर के नतीजे खास चर्चा में हैं। झालावाड़ में जहां कांग्रेस ने भाजपा के प्रभाव वाले क्षेत्र में स्पष्ट बहुमत हासिल कर बड़ा संदेश दिया है, वहीं बाड़मेर में भाजपा ने लंबे अंतराल के बाद बहुमत हासिल कर कांग्रेस के स्थानीय दबदबे को चुनौती दी है। दोनों ही नतीजे यह संकेत देते हैं कि नगरीय निकाय चुनावों में मतदाताओं ने स्थानीय मुद्दों, प्रत्याशियों और क्षेत्रीय राजनीतिक समीकरणों के आधार पर अलग-अलग जनादेश दिया है। अब नजर नगर परिषदों में सभापति के चुनाव और नए बोर्ड के गठन पर रहेगी।

Read more 14th Sep 2026

राजस्थान न्यूज़: राज्य निर्वाचन आयोग की चुनावी सूचना व्यवस्था पर सवाल, मीडिया सेल नहीं बनने से मतगणना अपडेट के लिए भटकते रहे पत्रकार

राजस्थान न्यूज़: जयपुर। राजस्थान में नगरीय निकाय चुनावों की मतगणना के दौरान चुनाव परिणाम और अन्य आधिकारिक सूचनाएं समय पर उपलब्ध नहीं होने को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग की सूचना व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। मीडिया कर्मियों का कहना है कि आयोग मुख्यालय स्तर पर प्रभावी मीडिया सेल स्थापित नहीं किए जाने के कारण चुनाव परिणामों, मतगणना की स्थिति और अन्य महत्वपूर्ण जानकारियों के लिए उन्हें अलग-अलग जिलों से सूचनाएं जुटानी पड़ीं। आयोग की वेबसाइट से भी अपेक्षित रूप से समयबद्ध चुनाव परिणाम उपलब्ध नहीं होने की शिकायतें सामने आईं। चुनाव जैसे बड़े प्रशासनिक अभियान के दौरान सामान्यतः राज्य निर्वाचन आयोग से अपेक्षा रहती है कि वह जिला निर्वाचन अधिकारियों से प्राप्त सूचनाओं को एकत्रित कर मुख्यालय स्तर पर प्रमाणित और समेकित जानकारी मीडिया तथा आम जनता तक पहुंचाए। इस बार ऐसी केंद्रीकृत व्यवस्था प्रभावी रूप से दिखाई नहीं देने के कारण मतगणना के दौरान विभिन्न नगर निकायों के परिणामों की आधिकारिक जानकारी जुटाना चुनौतीपूर्ण रहा। इस पूरे मामले में राज्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। आयोग से चुनाव संबंधी आंकड़ों और सूचनाओं के बारे में पूछे जाने पर कथित रूप से यह कहा गया कि कई जानकारियां जिला निर्वाचन अधिकारी के स्तर पर उपलब्ध होती हैं। हालांकि सवाल यह उठ रहा है कि जब चुनाव कार्यक्रम की घोषणा और संपूर्ण निर्वाचन प्रक्रिया राज्य निर्वाचन आयोग की देखरेख में होती है, तो जिलों से सूचनाएं लेकर उन्हें एक स्थान से मीडिया और जनता के लिए उपलब्ध कराने की व्यवस्था क्यों नहीं बनाई गई। यह भी कहा जा रहा है कि राज्य निर्वाचन आयोग को चुनाव से काफी पहले मुख्यालय स्तर पर एक समर्पित मीडिया सेल स्थापित करना चाहिए था। जनसंपर्क विभाग के अधिकारियों की पर्याप्त तैनाती कर जिला स्तर से आने वाले आंकड़ों के संकलन, सत्यापन और प्रकाशन के लिए अलग व्यवस्था की जा सकती थी। ऐसा होने पर मीडिया कर्मियों को प्रत्येक जिले से अलग-अलग संपर्क कर परिणाम जुटाने की आवश्यकता नहीं पड़ती और आम जनता को भी एक आधिकारिक स्रोत से सही एवं समयबद्ध जानकारी मिल सकती थी। पत्रकारों के पास और कवरेज व्यवस्था को लेकर भी सवाल मीडिया कर्मियों की ओर से चुनाव और मतगणना की कवरेज के लिए जारी किए जाने वाले पास की व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। पहले राज्य निर्वाचन आयोग मुख्यालय स्तर पर चुनावी कवरेज को व्यवस्थित करने में भूमिका निभाता रहा है, जबकि इस बार कई व्यवस्थाएं जिला निर्वाचन अधिकारी के स्तर पर छोड़ दिए जाने की बात सामने आई। इसके चलते चुनाव कवरेज और मतगणना केंद्रों तक मीडिया की पहुंच को लेकर अलग-अलग जिलों में अलग व्यवस्था देखने को मिली। पत्रकारों का कहना है कि राज्य स्तर पर चुनाव होने की स्थिति में आयोग को एक समान मीडिया नीति और स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने चाहिए। मतगणना जैसे महत्वपूर्ण दिन पर अधिकृत सूचना के अभाव में गैर-आधिकारिक आंकड़ों के प्रसार की आशंका भी बढ़ती है। ऐसे में पारदर्शिता और विश्वसनीयता के लिए आयोग की ओर से नियमित अंतराल पर आधिकारिक बुलेटिन जारी किया जाना जरूरी माना जा रहा है। वेबसाइट पर समयबद्ध परिणाम नहीं मिलने से बढ़ी परेशानी राज्य निर्वाचन आयोग की वेबसाइट की कार्यप्रणाली को लेकर भी शिकायत सामने आई है। मतगणना के दौरान यदि वेबसाइट पर वार्डवार परिणाम, दलवार स्थिति और निकायवार अपडेट नियमित रूप से उपलब्ध हों तो मीडिया के साथ-साथ आम मतदाता भी आसानी से आधिकारिक नतीजे देख सकता है। लेकिन परिणामों की जानकारी के लिए अन्य स्रोतों पर निर्भरता ने आयोग की डिजिटल तैयारियों को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। चुनाव प्रक्रिया केवल मतदान कराने और मतगणना सम्पन्न कराने तक सीमित नहीं होती। मतदाताओं तक आधिकारिक सूचना पहुंचाना, मीडिया को प्रमाणित तथ्य उपलब्ध कराना और परिणामों को पारदर्शी तरीके से सार्वजनिक करना भी चुनाव प्रबंधन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में आयोग को अपनी सूचना प्रणाली को आधुनिक और केंद्रीकृत करने की जरूरत महसूस की जा रही है। पंचायत चुनाव से पहले व्यवस्था सुधारने की मांग अब आगामी पंचायत चुनावों को देखते हुए राज्य निर्वाचन आयोग से सूचना व्यवस्था में व्यापक सुधार की अपेक्षा की जा रही है। आयोग में स्थायी मीडिया सेल स्थापित करने, पूर्णकालिक जनसंपर्क अधिकारी नियुक्त करने और चुनाव अवधि में अलग-अलग जिलों से आने वाली सूचनाओं के लिए केंद्रीकृत नियंत्रण कक्ष बनाने की मांग उठ रही है। वर्तमान में जनसंपर्क संबंधी कार्य अतिरिक्त प्रभार के आधार पर संचालित होने की बात कही जा रही है। ऐसे में चुनाव जैसे महत्वपूर्ण अवसरों पर पूर्णकालिक अधिकारी और समर्पित टीम की जरूरत और अधिक महसूस होती है। पंचायत चुनाव कार्यक्रम घोषित होने से पहले ही आयोग यदि मतदाता, मतदान केंद्र, उम्मीदवार, मतदान प्रतिशत और मतगणना से संबंधित सूचनाओं के प्रकाशन की स्पष्ट व्यवस्था तैयार करता है तो भविष्य में इस तरह की परेशानी से बचा जा सकता है। सवाल यह भी है कि जब चुनाव कार्यक्रम की घोषणा राज्य निर्वाचन आयोग मुख्यालय से की जाती है तो उसके बाद चुनाव से जुड़ी महत्वपूर्ण और समेकित जानकारियां भी मुख्यालय से नियमित रूप से क्यों उपलब्ध नहीं कराई जा सकतीं। आयोग को इन सवालों पर गंभीरता से विचार करते हुए आगामी चुनावों से पहले अपनी मीडिया और जनसूचना व्यवस्था को मजबूत करने की आवश्यकता है।

Read more 14th Sep 2026

अजमेर

अजमेर न्यूज़: 1100 वर्ष पूर्व स्थापित मंदिर की बड़ी है मान्यता, दूर दराज से पहुंचते हैं हजारों श्रद्धालु

Read more 31st Aug 2022

अजमेर न्यूज़: 1968 से कस्बे की धार्मिक संस्था श्री ब्रह्म पुष्कर सेवा संघ कर रही है इस अनूठी परंपरा का निर्वहन

Read more 31st Aug 2022

अजमेर न्यूज़: 10 टीमें 8 - 8 वार्डो में जाकर घूम रही गायों का करेंगीं प्राथमिक उपचार

Read more 31st Aug 2022

राष्ट्रीय - अंतर्राष्ट्रीय

अंतर्राष्ट्रीय न्यूज़: दिल्ली में चल रहे BRICS सम्मेलन से एक तस्वीर सामने आई है जिसने पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया है.

अंतर्राष्ट्रीय न्यूज़: BRICS Summit 2026: दिल्ली में चल रहे BRICS सम्मेलन से एक तस्वीर सामने आई है जिसने पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया है. इस तस्वीर में भारत, चीन और रूस के शीर्ष नेता एक साथ नजर आए. बीच में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं, उनके एक ओर व्लादिमीर पुतिन और दूसरी ओर शी जिनपिंग. तीनों नेताओं के हाथ एक-दूसरे से जुड़े हैं और चेहरे पर मुस्कान है. भारत‑चीन रिश्तों में सुधार का संकेत यह तस्वीर खास इसलिए है क्योंकि भारत और चीन को लंबे समय से प्रतिद्वंद्वी माना जाता रहा है. हाल के दिनों में दोनों देशों के रिश्तों में सुधार दिखा है. ऐसे में पीएम मोदी और जिनपिंग का साथ खड़ा होना एक अहम संदेश माना जा रहा है. रूस के साथ ऐतिहासिक संबंध भारत और रूस के रिश्ते दशकों पुराने हैं. हालांकि अमेरिका अक्सर यह सवाल उठाता रहा है कि भारत रूस को क्यों ज्यादा महत्व देता है. अब यह तस्वीर अमेरिका तक भी एक राजनीतिक संदेश पहुंचा रही है. जब एक फ्रेम में आईं तीन महाशक्तियां इस तस्वीर की अहमियत इसलिए भी है क्योंकि रूस दुनिया का बड़ा ऊर्जा सप्लायर है, जबकि भारत और चीन ऊर्जा के सबसे बड़े आयातक देशों में शामिल हैं. पीएम मोदी कई बार कह चुके हैं कि 21वीं सदी एशिया की है. ऐसे में एशिया की तीन महाशक्तियों का एक साथ आना इस विचार को और मजबूत करता है. पीएम मोदी की डिप्लोमेसी पीएम मोदी की यह तस्वीर उनकी डिप्लोमेसी का हिस्सा भी मानी जा रही है. वह अक्सर अपने गर्मजोशी भरे अंदाज से दुनिया को संदेश देने की कोशिश करते हैं. शुक्रवार को उन्होंने कहा था कि BRICS दुनिया की 50% आबादी और 40% जीडीपी का प्रतिनिधित्व करता है. नई दिल्ली घोषणापत्र को मंजूरी इस बीच BRICS सम्मेलन में नई दिल्ली घोषणापत्र 2026 को सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया गया है. पीएम मोदी ने खुद इसका ऐलान किया और बताया कि किसी भी देश ने इस पर आपत्ति नहीं जताई.

Read more 13th Sep 2026

राष्ट्रीय न्यूज़: पंजाब की कमान मिलते ही राहुल-प्रियंका से मिले सचिन पायलट, 2027 चुनाव की रणनीति पर मंथन, गुटबाजी खत्म करना बड़ी चुनौती

राष्ट्रीय न्यूज़: नई दिल्ली। राजस्थान के पूर्व उपमुख्यमंत्री और कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव सचिन पायलट को पंजाब कांग्रेस का नया प्रभारी बनाए जाने के बाद दिल्ली से लेकर पंजाब तक राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। नई जिम्मेदारी मिलने के कुछ ही दिन बाद मंगलवार को पायलट ने दिल्ली स्थित 10 जनपथ पहुंचकर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा से मुलाकात की।मुलाकात के दौरान राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने पायलट को नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं दीं। बैठक में वर्ष 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव, पार्टी के आगामी कार्यक्रमों और चुनावी रणनीति को लेकर चर्चा हुई। सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस नेतृत्व का फोकस चुनाव से पहले संगठन को मजबूत करने और पार्टी के अलग-अलग गुटों को एक मंच पर लाने पर है।मुलाकात के बाद सचिन पायलट ने भी सोशल मीडिया के जरिए राहुल गांधी और प्रियंका गांधी का पंजाब की जिम्मेदारी सौंपने के लिए आभार जताया। उन्होंने भरोसा जताया कि सामूहिक प्रयास, मजबूत संगठन और कार्यकर्ताओं की ताकत के बल पर कांग्रेस पंजाब में सत्ता में वापसी के लिए पूरी मजबूती से चुनाव लड़ेगी। पंजाब में पायलट को मिला बड़ा राजनीतिक टास्क सचिन पायलट के लिए पंजाब की जिम्मेदारी केवल एक संगठनात्मक नियुक्ति नहीं, बल्कि उनके राजनीतिक करियर का एक महत्वपूर्ण पड़ाव मानी जा रही है। राजस्थान में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और उपमुख्यमंत्री रह चुके पायलट को अब ऐसे राज्य की जिम्मेदारी मिली है, जहां कांग्रेस के पास मजबूत राजनीतिक आधार तो है, लेकिन पार्टी लंबे समय से आंतरिक खींचतान से जूझ रही है। कांग्रेस ने 5 सितंबर को संगठनात्मक फेरबदल करते हुए भूपेश बघेल की जगह सचिन पायलट को पंजाब का महासचिव प्रभारी बनाया था। बघेल को असम की जिम्मेदारी दी गई है। यह फेरबदल पंजाब में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले किया गया है। गुटबाजी खत्म करना होगी सबसे बड़ी चुनौती पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार है और कांग्रेस मुख्य विपक्षी दल के रूप में दोबारा सत्ता में वापसी की कोशिश कर रही है। लेकिन चुनावी लड़ाई से पहले पायलट के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने ही संगठन के भीतर अलग-अलग नेताओं और गुटों को साथ लाने की होगी।पंजाब कांग्रेस में प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग, पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी सहित कई वरिष्ठ नेताओं के अपने-अपने राजनीतिक प्रभाव क्षेत्र हैं। हाल के समय में पार्टी के भीतर मतभेद खुलकर सामने आते रहे हैं। पायलट की नियुक्ति को इसी अंदरूनी खींचतान को नियंत्रित करने और चुनाव से पहले एकजुट संगठन खड़ा करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। पायलट के पक्ष में यह बात मानी जा रही है कि वे राजस्थान में लंबे समय तक संगठन की कमान संभाल चुके हैं। प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए उन्होंने कार्यकर्ताओं के बीच लगातार सक्रियता बनाए रखी थी। अब पंजाब में उनके सामने यही मॉडल स्थानीय परिस्थितियों के मुताबिक लागू करने की चुनौती होगी। पहले ही शुरू किया नेताओं से संवाद नई जिम्मेदारी मिलने के बाद पायलट ने पंजाब कांग्रेस के नेताओं से संपर्क और बैठकों का सिलसिला भी शुरू कर दिया है। पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष राजा वड़िंग उनसे दिल्ली में मुलाकात कर चुके हैं। बैठक में विधानसभा चुनाव की तैयारियों, संगठन और चुनावी रणनीति से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। पायलट के जल्द पंजाब दौरे पर जाने की भी संभावना जताई गई है। सफल हुए तो राष्ट्रीय राजनीति में और बढ़ सकता है कद पंजाब की जिम्मेदारी को सचिन पायलट के लिए कांग्रेस आलाकमान के भरोसे की बड़ी परीक्षा के तौर पर भी देखा जा रहा है। पंजाब उन राज्यों में है जहां कांग्रेस अभी भी सत्ता की प्रमुख दावेदार पार्टियों में शामिल है। ऐसे में यदि पायलट पार्टी की गुटबाजी पर काबू पाकर संगठन को एकजुट करने और चुनाव में बेहतर प्रदर्शन कराने में कामयाब रहते हैं, तो राष्ट्रीय राजनीति में उनकी भूमिका और महत्वपूर्ण हो सकती है।राजनीतिक जानकारों के लिहाज से यह जिम्मेदारी पायलट के लिए बड़ा अवसर भी है। पंजाब में सफलता उन्हें राजस्थान की राजनीति से आगे कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व और चुनावी रणनीति में अधिक महत्वपूर्ण भूमिका दिला सकती है।फिलहाल पायलट की पहली परीक्षा चुनाव प्रचार से पहले पंजाब कांग्रेस के नेताओं को एक मंच पर लाने की है। 2027 के चुनाव में कांग्रेस का प्रदर्शन काफी हद तक इस बात पर भी निर्भर करेगा कि नई जिम्मेदारी संभालने के बाद पायलट संगठन की अंदरूनी खींचतान को कितनी जल्दी चुनावी ताकत में बदल पाते हैं।

Read more 8th Sep 2026

क़लमकार

क़लमकार न्यूज़: ये जीवन और कुछ नहीं  बस खेल है छुपन – छुपाई का

क़लमकार: खोजते खोजते अचानक से खुद को पा लेना 

Read more 5th Mar 2022

क़लमकार न्यूज़: तानाशाह एक डरपोक आदमी

क़लमकार: तानाशाह को डर पैदा होता है कि गधे भी मेरे खिलाफ़ साजिश कर रहे हैं

Read more 4th Mar 2022

#Being Positive

#Being Positive: Horizon Hind Live| #Ajmer| वार्ड 58 वार्ड परेड - चंद्रशेखर शर्मा ( मोनी) भाजपा

#Being Positive: Horizon Hind Live| #Ajmer| वार्ड 58 वार्ड परेड - चंद्रशेखर शर्मा ( मोनी) भाजपा

Read more 26th Jan 2021

#Being Positive: Horizon Hind Live| #Ajmerदावेदार मैदान में  (बृजेश माथुर वार्ड 76)

#Being Positive: Horizon Hind Live| #Ajmerदावेदार मैदान में (बृजेश माथुर वार्ड 76)

Read more 23rd Jan 2021

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Ajmer Headlines

#मधुकर कहिन

गुप्त ध्वनि किरणों के साथ ओशो पर किसने हमला किया?... 

गुप्त ध्वनि किरणों के साथ ओशो पर किसने हमला किया?...  * ओशो के निजी दंत चिकित्सक देवगेट ओशो की मृत्यु से 4 दिन पहले हुई घटनाओं के बारे में बात करते हैं (शरीर को छोड़कर)... * 15 aजनवरी, 1990 को, मेरे जन्मदिन पर, मुझे शुन्यो से एक संदेश मिला: ओशो चाहते थे कि मैं उनके पेट का एक्स-रे ले। हम दंaत कक्ष में मिले। ओशो का शरीर पतला और बेकार लग रहा था, फिर भी मैंने उसे शक्तिशाली रूप से उपस्थित महसूस किया। मुझे शुन्यो से पता था कि वह हर दिन बीस घंटे से अधिक सो रहा था, हर शाम बुद्ध हॉल में कुछ क़ीमती मिनटों के लिए अपनी शारीरिक ऊर्जा को बचा रहा था। ओशो नेa मुझे बताया कि उसके हमलावरों की आवाज़ से उसका शरीर बहुत कमजोर हो गया था। उन्होंने कहा कि उनमें से शायद तीन, दो पुरुष और एक महिला, ध्वनि तरंगों पर ध्यानaa केंद्रित करने और अपने शरीर को लक्षित करने के लिए एक विशेष गठन में बैठे थे। यहां भारत में प्राचीन योगिक प्रथाएं हैं जहां लोग कुछ ध्वनियों, कुछ मंत्रों को जानते हैं, जो लोगों को नुक़सान पहुंचाने के लिए ध्वनि को केंद्रित कर सकते हैं। लेकिन मुझ पर हमला करaaने वाले ये लोग भारतीय नहीं हैं। वे वही लोग हैं जिन्होंने अमेरिका में पहले मुझे मारने की कोशिश की थी। वे तब सफल नहीं हो सके, और अब वे जो शुरू किया उसे पूरा कर ने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने मुझे बोलने से रोकने के लिए ज़हर की कोशिश की लेकिन मैं जारी रखने में कामयाब रहा। अब, पांच साल बाद वे वापस आ गए हैं। उन्होंने पहले बुद्ध हॉल में अपनी ध्वनि किरणों का उपयोग मेरे दिमाग़ पर हमला करने के लिए किया लेकिन मैं अपने दिमाग़ में नहीं हूं। मैं एक नो-मन हूं और उनकी आवाज़ का बहुत कम प्रभाव था। इसलिए उन्होंने अपनी रणनीति बदल दी, अब वे मेरे शरीर पर हमला कर रहे हैं। मेरे गरीब शरीर को उनकी किरणों से कोई सुरक्षा नहीं है। हर दिन यह कमजोर होता जाता है। वे मुझे मार नहीं सकते लेकिन वे मेरे शरीर को नुक़सान पहुंचा सकते हैं। अभी मेरे जिगर के क्षेत्र में बहुत दर्द हो रहा है। क्या आप इसे एक्स-रे कर सकते हैं? दुख की बात है, मैंने समझाया कि मेरी दंत एक्स-रे मशीन शायद अपर्याप्त थी क्योंकि यह केवल दांतों और जबड़े की छोटी फिल्में ले सकती थी, लेकिन हम कोशिश कर सकते थे। अमृतो को हमारे पास सबसे बड़ी एक्स-रे फ़िल्म मिली, जबकि मैंने इसकी बीम को चौड़ा करने के लिए डेंटल एक्स-रे मशीन के साथ जिग्गल किया। मैंने वह करने की कोशिश की जो ओशो पूछ रहा था। मैंने उसके जिगर के क्षेत्र की एक तस्वीर ली और फिर दंत विकास में बड़ी फ़िल्म विकसित करने में कामयाब रहा टैंक जिसे छोटी इंट्रा-ओरल डेंटल फ़िल्मों के लिए डिज़ाइन किया गया था, लेकिन परिणामी छवि धुंधली और अस्पष्ट थी। यह आख़िरी बार था जब मैंने ओशो को उसके भौतिक शरीर में देखा था। 19 जनवरी को शाम 4:30 बजे थे: मैं अपनी प्रेमिका के साथ अपने कमरे में था जब दरवाजे पर एक ज़रूरी दस्तक हुई। मनीषा, पीला और तनावग्रस्त दिख रही थी, ने पूछा कि क्या वह मेरे कमरे के फ़ोन का उपयोग कर सकती है। मुझे पता था कि वह केवल पूछेगी कि क्या कुछ असामान्य हो रहा है। अस्थायी सचिव के रूप में कार्य करते हुए वह इनर सर्कल के सदस्यों को फ़ोन कर रही थी और उन्हें कृष्णा हाउस में एक असाधारण बैठक में तुरंत आने के लिए कह रही थी। ओशो ने पंद्रह महीने पहले इक्कीस लोगों की एक कम्यून प्रबंधन टीम की स्थापना की थी, इसे इनर सर्कल का नाम दिया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका काम कम्यून के दिन-प्रतिदिन चलने का प्रबंधन करना था। मैं मूल चयन में नहीं था, लेकिन कुछ महीने बाद मुझे शामिल होने के लिए कहा गया था। फ़ोन करने के बाद, मनीषा ने कहा, “गीट, तुमने सुना कि मैं दूसरों को क्या बता रहा था। बैठक कृष्णा हाउस की छत पर ब्लू रूम में है। क्या आप वहां तुरंत जा सकते हैं?” इससे पहले कि मैं कोई सवाल पूछ पाता, वह जल्दी से गलियारे में चली गई, स्पष्ट रूप से एक और महत्वपूर्ण कार्य में शामिल थी। मैंने दोपहर के अधिकांश समय अजीब तरह से विपुल महसूस किया था। बाहरी मामलों की उथल-पुथल के बावजूद मैं कई दिनों से उत्साहित महसूस कर रहा था। मेरे दिल में ख़ुशी का एक अकथनीय नृत्य था। अंदर से मुझे उत्साह, आनंद महसूस हुआ। ब्लू रूम में पहुंचने पर, मैंने देखा कि अधिकांश इनर सर्कल पहले से ही वहां इकट्ठा हो चुके थे। माहौल तनावपूर्ण और तनावपूर्ण था। मेरा अपना उत्साह जगह से बाहर लग रहा था। मैं बैठ गया और इंतज़ार किया। कुछ मिनटों के बाद जयेश ने अमृतो के साथ प्रवेश किया। यह देखने के लिए संक्षेप में चारों ओर देखते हुए कि हम सभी मौजूद हैं, उन्होंने एक दृढ़, हालांकि शांत आवाज़ में कहा, “मुझे लगता है कि इसे लपेटने का कोई तरीक़ा नहीं है। मैं आपको सीधे बताऊंगा। ओशो ने कुछ समय पहले लगभग 4:45 बजे अपना शरीर छोड़ दिया था दोपहर।” स्तब्ध, मैंने अपनी घड़ी को देखा। शाम के 5:15 बजे थे। उपस्थित दो या तीन लोग रोने लगे। जयेश ने जल्दी से बीच में टोका, “देखो, मुझे तुम्हारी सारी मदद की ज़रूरत है। कृपया अभी तक अलग न हों। मुझे आप सभी की ज़रूरत है कि ओशो के भेजने को उतना ही सुंदर बनाने में मदद करें जितना वह हकदार है। यह आख़िरी चीज है जो हम उसके लिए कर सकते हैं भौतिक शरीर, चलो इसे अद्भुत बनाते हैं। उसने मुझे ठीक से बताया कि वह कैसे चाहता है कि ऐसा हो। उसने मुझे हर चीज के लिए विस्तृत निर्देश दिए, लेकिन मुझे यहां हर किसी की मदद की ज़रूरत है।” जयेश के शब्दों को सुनकर मेरा पहले का उत्साह सदमे में बदल गया था, लेकिन मैंने ओशो को अपने लोगों के साथ अपने अंतिम उत्सव का आनंद लेने में सक्षम बनाने के लिए हमारी मदद के लिए जयेश की अपील को स्पष्ट रूप से सुना। जैसे ही मैंने ब्लू रूम छोड़ा, जयेश ने मुझे बताया कि ओशो ने अनुरोध किया था कि मैं उनके शरीर को जलते हुए घाटों तक ले जाने के लिए एक वाहक बनूं। गतिविधि और भ्रमित भावनाओं के एक धुंध में मुझे याद है कि ओशो के इस अंतिम उपहार के लिए बेहद आभारी महसूस कर रहा था। - स्वामी देवगीत पुस्तक : ओशो - द फर्स्ट बुद्ध इन द डेंटल चेयर अध्याय: 17 अध्याय का नाम: ओशो का अंतिम दंत नाटक: अधिनियम V अंतिम सुनहरी झलक

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