राजस्थान न्यूज़: नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी ने अपने केंद्रीय संगठन के संचार और मीडिया विभाग में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने राष्ट्रीय महासचिव एवं सांसद अनिल बलूनी को पार्टी के संवहन (संचार) विभाग का समन्वयक नियुक्त किया है। वहीं आशीष उषा अग्रवाल को भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया विभाग का संयोजक बनाया गया है। पार्टी की ओर से जारी नियुक्ति आदेश के अनुसार दोनों नियुक्तियां तत्काल प्रभाव से लागू हो गई हैं।नई व्यवस्था में अनिल बलूनी के पास पार्टी के व्यापक संचार तंत्र के समन्वय की जिम्मेदारी रहेगी। समाचार एजेंसी पीटीआई पर आधारित रिपोर्टों के मुताबिक भाजपा के संचार विभाग के अंतर्गत राष्ट्रीय मीडिया और सोशल मीडिया इकाइयां भी आती हैं। ऐसे में नई जिम्मेदारी के तहत बलूनी पार्टी के मीडिया, सोशल मीडिया और अन्य संचार माध्यमों के बीच समन्वय से जुड़े कार्य देखेंगे। अनिल बलूनी अब पूरे संचार तंत्र का करेंगे समन्वय अनिल बलूनी इससे पहले भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया विभाग के संयोजक की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। नई नियुक्ति में उनका दायरा बढ़ाकर उन्हें संवहन यानी संचार विभाग का समन्वयक बनाया गया है। इसके बाद मीडिया विभाग की जिम्मेदारी आशीष उषा अग्रवाल को सौंपी गई है।बलूनी भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव हैं और वर्तमान में उत्तराखंड की गढ़वाल लोकसभा सीट से सांसद हैं। पार्टी के मीडिया प्रबंधन से वे लंबे समय से जुड़े रहे हैं। नई जिम्मेदारी में पार्टी की विभिन्न संचार इकाइयों के बीच तालमेल उनकी भूमिका का प्रमुख हिस्सा होगा। आशीष उषा अग्रवाल बने राष्ट्रीय मीडिया संयोजक मध्य प्रदेश से आने वाले आशीष उषा अग्रवाल को भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया विभाग का नया संयोजक नियुक्त किया गया है। वे हाल ही में इसी विभाग में सह-संयोजक बनाए गए थे। अगस्त 2026 में भाजपा की राष्ट्रीय टीम के पुनर्गठन के दौरान उन्हें राष्ट्रीय मीडिया सह-संयोजक की जिम्मेदारी मिली थी और अब लगभग एक महीने बाद उन्हें विभाग का संयोजक बनाया गया है।इस पद पर अब तक अनिल बलूनी जिम्मेदारी संभाल रहे थे। बलूनी को व्यापक संचार विभाग का समन्वयक बनाए जाने के बाद मीडिया विभाग की कमान अग्रवाल को दी गई है। राष्ट्रीय मीडिया संयोजक के रूप में पार्टी के आधिकारिक मीडिया संवाद, प्रेस कॉन्फ्रेंस, प्रवक्ताओं और मीडिया आउटरीच से जुड़े संगठनात्मक काम उनके दायरे में आएंगे। भाजपा की अपनी संगठनात्मक सामग्री में मीडिया विभाग को पार्टी और समाचार माध्यमों के बीच संवाद तथा पार्टी की आधिकारिक सूचनाओं के प्रसार से जुड़ी इकाई बताया गया है। नितिन नबीन के नेतृत्व में संगठन में लगातार बदलाव ये नियुक्तियां ऐसे समय हुई हैं जब भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन ने केंद्रीय और राज्य स्तर के संगठन में कई बदलाव किए हैं। इसी संगठनात्मक फेरबदल के तहत 23 सितंबर को पार्टी ने देश के 28 राज्यों और आठ केंद्रशासित प्रदेशों के प्रभारी एवं सह-प्रभारियों की नई सूची भी जारी की।इसी सूची में राजस्थान के लिए संजय भाटिया को प्रभारी तथा कविता पाटीदार और कुलजीत चहल को सह-प्रभारी बनाया गया है। सतीश पूनिया को पंजाब और जम्मू-कश्मीर तथा सुनील बंसल को तेलंगाना और पश्चिम बंगाल की जिम्मेदारी दी गई है। मीडिया और सोशल मीडिया इकाइयों के बीच नई व्यवस्था नई संगठनात्मक संरचना में अनिल बलूनी के संवहन विभाग का समन्वयक बनने से उनके पास मीडिया और सोशल मीडिया इकाइयों के बीच समन्वय की भूमिका होगी, जबकि राष्ट्रीय मीडिया विभाग का प्रत्यक्ष संचालन आशीष उषा अग्रवाल करेंगे। इससे पहले अगस्त में भाजपा ने सोशल मीडिया इकाई में भी बदलाव करते हुए दीपक म्हास्के को नया सोशल मीडिया संयोजक नियुक्त किया था।इस तरह भाजपा ने राष्ट्रीय स्तर पर मीडिया, सोशल मीडिया और व्यापक संचार व्यवस्था में अलग-अलग जिम्मेदारियां निर्धारित की हैं। पार्टी के आदेश के मुताबिक अनिल बलूनी और आशीष उषा अग्रवाल की नई जिम्मेदारियां 23 सितंबर 2026 से तत्काल प्रभाव से लागू हो गई हैं।
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राजस्थान न्यूज़: जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में आदेश दिया है कि पति की मृत्यु के बाद उसके स्थान पर नौकरी पाने वाली बहू के वेतन से हर महीने 25 प्रतिशत राशि उसकी सास के बैंक खाते में जमा कराई जाए। अदालत ने मृत कर्मचारी के टर्मिनल बेनिफिट्स की आधी राशि भी सास को दिए जाने के निर्देश दिए हैं। जस्टिस आनंद शर्मा की एकलपीठ ने कमली देवी व अन्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। अदालत ने कहा कि अनुकंपा नियुक्ति पाने वाले व्यक्ति की जिम्मेदारी केवल स्वयं तक सीमित नहीं होती। मृत कर्मचारी के परिवार के अन्य आश्रित सदस्यों के हित और आर्थिक सुरक्षा भी ऐसी नियुक्ति के मूल उद्देश्य का हिस्सा हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अनुकंपा नियुक्ति को केवल व्यक्तिगत रोजगार लाभ के रूप में नहीं देखा जा सकता, क्योंकि इसका उद्देश्य कर्मचारी की मृत्यु के बाद उसके आश्रित परिवार को आर्थिक संकट से उबारना है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता रमित पारीक ने अदालत को बताया कि कमली देवी का बेटा सुभाष चन्द्र अजमेर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (AVVNL) में टेक्निकल हेल्पर के पद पर कार्यरत था। मार्च 2017 में उसकी मृत्यु हो गई थी। इसके बाद माता-पिता की ओर से एनओसी दिए जाने पर मृतक की पत्नी ममता को अनुकंपा नियुक्ति दी गई। याचिका में कहा गया कि नियुक्ति के समय ममता ने परिवार के अन्य सदस्यों की देखभाल और भरण-पोषण करने का शपथ पत्र भी दिया था। आरोप है कि कुछ समय बाद वह ससुराल छोड़कर चली गई और उसने दूसरी शादी कर ली। इसके बाद उसने सास-ससुर को आर्थिक सहायता देना भी बंद कर दिया। याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि बहू को अनुकंपा नियुक्ति दिलाने के पीछे परिवार की आर्थिक सुरक्षा का उद्देश्य था और इसी भरोसे पर सास-ससुर ने एनओसी दी थी। इसलिए उन्हें बहू के वेतन का एक निश्चित हिस्सा नियमित रूप से दिलाया जाना चाहिए। इसके अलावा मृत बेटे के टर्मिनल बेनिफिट्स में भी उनका हिस्सा तय किया जाए। वहीं बहू की ओर से याचिका का विरोध करते हुए कहा गया कि ससुराल पक्ष का व्यवहार उसके साथ उचित नहीं था और याचिकाकर्ता की देखभाल उनके अन्य बेटे कर रहे हैं। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने बहू के वेतन से हर महीने 25 प्रतिशत राशि सास के बैंक खाते में जमा कराने और टर्मिनल बेनिफिट्स की आधी राशि सास को देने के निर्देश दिए।
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राजस्थान न्यूज़: बीकानेर। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार को ‘सेवा संकल्प यात्रा’ के प्रतिभागियों से वर्चुअल माध्यम से संवाद किया और उनके यात्रा अनुभवों को जाना। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत में यात्रा और सेवा दोनों की परंपरा सामाजिक संस्कारों से जुड़ी रही है और ऐसी यात्राएं लोगों को करुणा, विनम्रता और अनुशासन का अनुभव कराती हैं। उन्होंने प्रतिभागियों से यात्रा के दौरान मिले ‘विविधता में एकता’ के अनुभवों को देश के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचाने का आह्वान किया। राजस्थान में ‘सेवा संकल्प अभियान’ 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक विभिन्न कार्यक्रमों के साथ संचालित किया जा रहा है। बीकानेर में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रधानमंत्री के संवाद से जुड़े। स्थानीय कार्यक्रम में सेवा संकल्प बाइक रैली के प्रतिभागियों के साथ बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। एक दिन पहले जारी कार्यक्रम संबंधी जानकारी में भी प्रधानमंत्री के वर्चुअल संवाद और मुख्यमंत्री के बीकानेर प्रवास का उल्लेख किया गया था। ‘एक गांव का प्रयोग दूसरे गांव के काम आए’ प्रधानमंत्री ने सेवा यात्रा में शामिल युवाओं से कहा कि गांव और कस्बे केवल भौगोलिक इकाइयां नहीं, बल्कि अनुभव, ज्ञान और स्थानीय समाधानों का बड़ा भंडार हैं। उन्होंने कहा कि यात्रा के दौरान युवाओं को अलग-अलग स्थानों पर जो नवाचार या उपयोगी प्रयोग देखने को मिलते हैं, उन्हें दूसरे क्षेत्रों तक पहुंचाया जाना चाहिए। प्रधानमंत्री ने कहा कि एक गांव का प्रयोग दूसरे गांव के काम आ सकता है और एक युवा का समाधान दूसरे युवा की ताकत बन सकता है। उन्होंने युवाओं को अलग-अलग सामाजिक वर्गों के लोगों से संवाद करने, उनकी जरूरतों और आकांक्षाओं को समझने तथा अपने अनुभव साझा करने पर जोर दिया। ‘2047 के विकसित भारत में युवाओं की बड़ी भूमिका’ प्रधानमंत्री ने कहा कि देश वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है और इसमें युवा पीढ़ी की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। उनके मुताबिक युवाओं के लिए केवल अपने आसपास के परिवेश को समझना ही नहीं, बल्कि देश के अलग-अलग क्षेत्रों, संस्कृतियों और सामाजिक परिस्थितियों से परिचित होना भी जरूरी है। उन्होंने सेवा संकल्प यात्रा को युवाओं के बीच संवाद और जनभागीदारी का माध्यम बताते हुए कहा कि प्रतिभागी जहां भी जा रहे हैं, वहां लोगों के साथ संपर्क स्थापित कर रहे हैं। ‘विकसित भारत’ को लेकर युवा भागीदारी पर जोर प्रधानमंत्री के अन्य युवा संवाद कार्यक्रमों में भी लगातार दिखाई देता रहा है। ‘जनसेवा से देशसेवा ही मेरा मंत्र’ प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में सेवा को शासन और सामाजिक जीवन से जोड़ते हुए कहा कि भारतीय परंपरा में ‘नर सेवा, नारायण सेवा’ का भाव रहा है। उन्होंने कहा कि जब शासन व्यवस्था के केंद्र में सेवा का भाव होता है तो नीतियों का लक्ष्य नागरिकों की आवश्यकताओं को पूरा करना होता है। प्रधानमंत्री ने मुफ्त खाद्यान्न और आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं का उल्लेख करते हुए इन्हें सेवा-भाव से जुड़ी नीतियों के उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि उनके लिए “जनसेवा से देशसेवा” कार्य का मंत्र है और लोगों से मिलने वाला आशीर्वाद उनकी ऊर्जा का स्रोत है। यह प्रधानमंत्री द्वारा कार्यक्रम में व्यक्त दृष्टिकोण था। ब्यावर की डॉ. देवांगी और डेगाना के युवाओं से संवाद कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने राजस्थान के सेवा संकल्प यात्रा प्रतिभागियों से भी सीधे बातचीत की। उन्होंने ब्यावर की डॉ. देवांगी तथा डेगाना के हर्षवर्धन सिंह और कुलदीप से यात्रा के अनुभवों के बारे में जाना। संवाद के दौरान राजस्थान में पौधारोपण को लेकर भी चर्चा हुई। प्रधानमंत्री ने सुझाव दिया कि पौधा लगाते समय उसके पास मिट्टी का घड़ा गाड़कर धीरे-धीरे पानी उपलब्ध कराने की तकनीक अपनाई जा सकती है। इस तरह पानी की खपत कम करते हुए पौधे को लंबे समय तक नमी उपलब्ध कराई जा सकती है। 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक सेवा संकल्प अभियान मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि वडनगर से वाराणसी तक निकाली जा रही सेवा संकल्प यात्रा अभियान की व्यापक गतिविधियों का हिस्सा है। राजस्थान सरकार की ओर से भी 17 सितंबर से सेवा एवं जनभागीदारी से जुड़े कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। राज्य सरकार के अनुसार अभियान में ‘आशीर्वाद का दीया’, रक्तदान, सेवा सेतु, युवा संवाद, सामाजिक गतिविधियों और अन्य कार्यक्रमों को शामिल किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अभियान का उद्देश्य सेवा, सामाजिक जिम्मेदारी और जनभागीदारी के संदेश को व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाना है। उन्होंने प्रधानमंत्री के ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’, स्वच्छता और ‘एक पेड़ मां के नाम’ जैसे अभियानों का उल्लेख किया और कहा कि राजस्थान भी पौधारोपण तथा पर्यावरण संरक्षण की दिशा में ‘हरियालो राजस्थान’ अभियान चला रहा है। राजस्थान सरकार के आधिकारिक हरियालो राजस्थान पोर्टल पर वर्ष 2026-27 में 10 करोड़ पौधे लगाने और उनके संरक्षण का लक्ष्य दर्ज है। जल परियोजनाओं का भी किया उल्लेख मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में राजस्थान की जल आवश्यकताओं से जुड़ी परियोजनाओं का जिक्र करते हुए राम जल सेतु लिंक परियोजना, यमुना जल परियोजना, नर्मदा से जुड़े समझौते और किशाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना का उल्लेख किया। उन्होंने इन परियोजनाओं को केंद्र और राज्य के बीच समन्वय से आगे बढ़ाए गए कार्यों के रूप में प्रस्तुत किया। एक दिन पहले जैतारण के सेवा संवाद कार्यक्रम में भी मुख्यमंत्री ने इन्हीं चार जल परियोजनाओं का उल्लेख किया था। यमुना जल परियोजना को लेकर प्रधानमंत्री ने जुलाई 2026 के बालोतरा कार्यक्रम में करीब 34 हजार करोड़ रुपए की लागत का उल्लेख किया था। वहीं राम जल सेतु परियोजना को राजस्थान के पूर्वी हिस्सों की दीर्घकालीन पेयजल और सिंचाई जरूरतों से जोड़कर आगे बढ़ाया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने युवाओं से संवेदनशीलता और सेवा-भाव पर जोर दिया मुख्यमंत्री ने कहा कि निस्वार्थ सेवा, अनुशासन, करुणा और सामाजिक जिम्मेदारी लोगों को समाज से जोड़ती है। उन्होंने युवाओं से जनता से जुड़े मुद्दों को समझने और सेवा गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार युवा, महिला, किसान और श्रमिक वर्ग से जुड़े कार्यक्रमों पर काम कर रही है। अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने राजस्थान में बिजली उत्पादन और विकास परियोजनाओं का भी उल्लेख किया। ये राज्य सरकार के कार्यों को लेकर मुख्यमंत्री द्वारा प्रस्तुत दावे और आकलन थे।बीकानेर में बाइक रैली और कलश यात्रा को किया रवाना प्रधानमंत्री के वर्चुअल संवाद से पहले मुख्यमंत्री ने बीकानेर में सेवा संकल्प कार्यक्रम के तहत पहुंचे बाइक राइडर्स से बातचीत की और उनके अनुभव जाने। कार्यक्रम में उन्होंने कलश यात्रा तथा वडनगर से वाराणसी की ओर जा रही बाइक रैली को भी रवाना किया। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम स्थल पर पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। सेवा संकल्प अभियान में यात्रा, सामाजिक संपर्क, पौधारोपण, स्वच्छता और जनभागीदारी को प्रमुख गतिविधियों के रूप में शामिल किया गया है। दूसरे राज्यों में भी अभियान के तहत यात्रा और बाइक रैली जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। कार्यक्रम में खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री सुमित गोदारा, विधायक सिद्धि कुमारी, अन्य जनप्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
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अजमेर न्यूज़: 1100 वर्ष पूर्व स्थापित मंदिर की बड़ी है मान्यता, दूर दराज से पहुंचते हैं हजारों श्रद्धालु
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अजमेर न्यूज़: 1968 से कस्बे की धार्मिक संस्था श्री ब्रह्म पुष्कर सेवा संघ कर रही है इस अनूठी परंपरा का निर्वहन
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राष्ट्रीय न्यूज़: मुंबई। बॉलीवुड के स्टार कपल दीपिका पादुकोण और रणवीर सिंह के घर एक बार फिर खुशियों ने दस्तक दी है। दोनों शनिवार, 19 सितंबर 2026 को दूसरी बार माता-पिता बने हैं। दीपिका ने दूसरी बेटी को जन्म दिया है। कपल ने सोशल मीडिया पर एक बेहद प्यारा पोस्ट साझा कर अपने फैंस के साथ यह खुशखबरी शेयर की। दीपिका और रणवीर ने अपने संयुक्त इंस्टाग्राम पोस्ट में नवजात बच्ची के छोटे-छोटे फुटप्रिंट की तस्वीर शेयर की। इसके साथ उन्होंने लिखा—“Welcome baby girl! 19/9/2026. Dua, Deepika and Ranveer.” पोस्ट में नजर से बचाने वाला इमोजी भी लगाया गया है। हालांकि कपल ने फिलहाल अपनी दूसरी बेटी का नाम सार्वजनिक नहीं किया है। दुआ बनी बड़ी बहन दीपिका और रणवीर की पहली बेटी दुआ पादुकोण सिंह का जन्म 8 सितंबर 2024 को हुआ था। अब करीब दो साल बाद परिवार में दूसरी बेटी के आने से दुआ बड़ी बहन बन गई हैं। खास बात यह है कि दोनों बेटियों का जन्म सितंबर महीने में हुआ है। कपल की ओर से दूसरी बेटी के जन्म की घोषणा होते ही सोशल मीडिया पर बधाइयों का सिलसिला शुरू हो गया। फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोगों और फैंस ने दोनों को शुभकामनाएं दीं और नए मेहमान का स्वागत किया। अप्रैल में की थी दूसरी प्रेग्नेंसी की घोषणा दीपिका और रणवीर ने इसी साल अप्रैल में अपनी दूसरी प्रेग्नेंसी की जानकारी सोशल मीडिया पर साझा की थी। उस समय उन्होंने एक खास पोस्ट के जरिए फैंस को बताया था कि उनका परिवार एक बार फिर बढ़ने वाला है। अब सितंबर में दूसरी बेटी के जन्म के साथ कपल के घर एक और नन्ही सदस्य आ गई है। शादी के छह साल बाद चार लोगों का हुआ परिवार दीपिका पादुकोण और रणवीर सिंह ने नवंबर 2018 में इटली में शादी की थी। शादी के करीब छह साल बाद सितंबर 2024 में दोनों पहली बार माता-पिता बने और बेटी दुआ का स्वागत किया। अब दूसरी बेटी के जन्म के बाद उनका परिवार चार सदस्यों का हो गया है। दीपिका और रणवीर अपने पारिवारिक जीवन को काफी निजी रखते हैं और दुआ की तस्वीरें भी सीमित मौकों पर ही साझा की हैं। दूसरी बेटी के जन्म की जानकारी भी उन्होंने बेहद सादगी से फुटप्रिंट वाली पोस्ट के जरिए दी है। राधाष्टमी के दिन आई नन्ही परी इस बार 19 सितंबर को राधाष्टमी का पर्व भी मनाया जा रहा है। ऐसे में दीपिका और रणवीर की दूसरी बेटी का जन्म इसी शुभ अवसर पर हुआ है। इसे लेकर सोशल मीडिया पर फैंस लगातार कपल को बधाई दे रहे हैं। फिलहाल कपल ने नवजात बच्ची की तस्वीर या नाम साझा नहीं किया है। फैंस अब यह जानने के लिए उत्सुक हैं कि दीपिका और रणवीर अपनी दूसरी बेटी का क्या नाम रखते हैं।
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राष्ट्रीय न्यूज़: तिरुपति/नई दिल्ली। तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (TTD) के प्रसिद्ध श्रीवारी लड्डू प्रसाद में इस्तेमाल होने वाले घी की कथित मिलावट के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने सुकृति फूड्स प्राइवेट लिमिटेड के प्रमोटर कैलाश चंद मंगला को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत गिरफ्तार किया है। ED के मुताबिक मंगला को हैदराबाद जोनल कार्यालय ने 17 सितंबर को हिरासत में लिया था और शुक्रवार को जारी बयान में कार्रवाई की जानकारी दी गई। बाद में उन्हें विशाखापत्तनम की विशेष PMLA अदालत में पेश किया गया, जहां से न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। ED का आरोप है कि TTD को जिस सामग्री की आपूर्ति ‘एगमार्क स्पेशल ग्रेड काउ घी’ बताकर की गई, उसमें वास्तविक गाय के घी के स्थान पर रिफाइंड पाम ऑयल, पाम कर्नेल ऑयल, पामोलिन और कई रासायनिक पदार्थों का इस्तेमाल किया गया। एजेंसी ने MG-90, मोनोग्लिसराइड्स, Myvacet Soft 400 और acetic acid ester जैसे पदार्थों का भी उल्लेख किया है। जांच एजेंसी का कहना है कि इन सामग्रियों को मिलाकर ऐसा उत्पाद तैयार किया गया जिसे रिकॉर्ड में शुद्ध गाय के घी के रूप में दिखाया गया। ₹230 करोड़ की कथित सप्लाई, ₹96 करोड़ का घी मंगला से जुड़ा ED की जांच के अनुसार वर्ष 2019 से 2024 के बीच TTD को कथित रूप से करीब ₹230 करोड़ मूल्य का मिलावटी घी सप्लाई किया गया। एजेंसी का आरोप है कि इसमें लगभग ₹96 करोड़ मूल्य का मिलावटी घी कैलाश चंद मंगला की इकाई में तैयार किया गया था। इसलिए ₹230 करोड़ की पूरी राशि को अकेले सुकृति फूड्स द्वारा तैयार घी की रकम मानना सही नहीं होगा; ED ने व्यापक कथित सप्लाई नेटवर्क के लिए ₹230 करोड़ और मंगला से जुड़े निर्माण के लिए करीब ₹96 करोड़ का आंकड़ा बताया है। जांच एजेंसी ने मंगला को इस कथित नेटवर्क का सह-साजिशकर्ता बताया है। ED का दावा है कि उन्होंने मिलावट में इस्तेमाल होने वाली सामग्री जुटाने, अपने परिसर में कथित मिलावटी घी तैयार करने और इसे अलग-अलग कारोबारी इकाइयों के माध्यम से सप्लाई कराने में भूमिका निभाई। एजेंसी ने Sri Vyshnavi Dairy Specialities, Malganga Milk & Agro Products और A.R. Dairy Foods जैसी इकाइयों के जरिए सप्लाई समन्वय किए जाने का आरोप भी लगाया है।खरीद-बिक्री के फर्जी रिकॉर्ड बनाने का भी आरोप ED के मुताबिक कथित मिलावट को छिपाने के लिए घी और रिफाइंड पाम ऑयल की खरीद-बिक्री से जुड़े रिकॉर्ड में भी हेरफेर किया गया। एजेंसी का आरोप है कि ऐसे दस्तावेज तैयार किए गए जिनसे यह दिखाया जा सके कि उत्पादन और सप्लाई वास्तविक गाय के घी की थी, जबकि जांच में दूसरी सामग्री के उपयोग का दावा सामने आया। इन आरोपों की अंतिम कानूनी पुष्टि अदालत में साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही होगी। मनी लॉन्ड्रिंग की यह जांच तिरुपति ईस्ट पुलिस की उस FIR से जुड़ी है जिसमें कथित आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, जालसाजी और भ्रष्टाचार के जरिए TTD को मिलावटी घी सप्लाई करने के आरोप लगाए गए थे। उसी कथित अपराध से पैदा हुई रकम और वित्तीय लेन-देन की जांच ED PMLA के तहत कर रही है।इससे पहले भोले बाबा ऑर्गेनिक डेयरी के प्रमोटर की भी गिरफ्तारी कैलाश चंद मंगला इस मामले में गिरफ्तार होने वाले पहले कारोबारी नहीं हैं। ED इससे पहले भोले बाबा ऑर्गेनिक डेयरी मिल्क से जुड़े प्रमोटर एवं निदेशक विपिन जैन को भी इसी जांच में गिरफ्तार कर चुकी है। एजेंसी अब कथित सप्लाई चेन, भुगतान, विभिन्न कारोबारी संस्थाओं और घी के निर्माण एवं बिक्री रिकॉर्ड की जांच आगे बढ़ा रही है।‘पशु चर्बी’ के पुराने विवाद से अलग है ED का मौजूदा दावा तिरुपति लड्डू विवाद में एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। ED के मौजूदा बयान में कथित मिलावट के रूप में पाम आधारित तेल और रासायनिक पदार्थों का उल्लेख किया गया है; एजेंसी ने इस कार्रवाई में पशु चर्बी मिलने का दावा नहीं किया है। इससे पहले CBI द्वारा गठित SIT की जांच में जांचे गए नमूनों में पशु चर्बी की मौजूदगी स्थापित नहीं होने की रिपोर्ट सामने आई थी, हालांकि घी में अन्य प्रकार की मिलावट और खरीद प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की जांच अलग विषय रही है।इसलिए मौजूदा ED कार्रवाई को सीधे पुराने “animal fat” आरोप की पुष्टि के रूप में प्रस्तुत करना सही नहीं होगा। ताजा कार्रवाई का केंद्र कथित रूप से पाम ऑयल, पामोलिन, पाम कर्नेल ऑयल तथा अन्य पदार्थों का इस्तेमाल कर गाय के घी के नाम पर उत्पाद तैयार करने और उसके वित्तीय लेन-देन पर है। रोज तैयार होते हैं 4 लाख से ज्यादा श्रीवारी लड्डू तिरुपति का श्रीवारी लड्डू दुनिया के सबसे प्रसिद्ध धार्मिक प्रसादों में शामिल है। TTD की जून 2026 की आधिकारिक जानकारी के अनुसार मंदिर प्रशासन प्रतिदिन 4 लाख से अधिक लड्डू तैयार करता है। मई में औसतन करीब 4.08 लाख लड्डू प्रतिदिन बनाए गए थे। अकेले जून 2026 में रिकॉर्ड 1.26 करोड़ से अधिक लड्डुओं की बिक्री हुई।TTD के मुताबिक लड्डू निर्माण में रोजाना लगभग 16 टन घी सहित करीब 68 टन कच्ची सामग्री इस्तेमाल होती है। इतनी बड़ी मात्रा में प्रसाद तैयार होने के कारण घी की गुणवत्ता और सप्लाई चेन की निगरानी सीधे करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और खाद्य गुणवत्ता से जुड़ा विषय है।अब मनी ट्रेल और सप्लाई नेटवर्क की जांच कैलाश चंद मंगला को न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के बाद ED की जांच अब कथित मिलावट से पैदा हुई आय, कारोबारी संस्थाओं के बीच हुए भुगतान और सप्लाई नेटवर्क पर केंद्रित है। एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कथित मिलावटी उत्पाद किन-किन संस्थाओं के जरिए TTD तक पहुंचा और इससे जुड़े वित्तीय लाभ का प्रवाह किस तरह हुआ। फिलहाल कैलाश चंद मंगला के खिलाफ लगाए गए ये सभी आरोप ED की जांच का हिस्सा हैं। गिरफ्तारी या एजेंसी का आरोप अपने आप में दोषसिद्धि नहीं है और मामले की अंतिम आपराधिक जिम्मेदारी अदालत में उपलब्ध साक्ष्यों तथा न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर तय होगी।
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गुप्त ध्वनि किरणों के साथ ओशो पर किसने हमला किया?...
गुप्त ध्वनि किरणों के साथ ओशो पर किसने हमला किया?... * ओशो के निजी दंत चिकित्सक देवगेट ओशो की मृत्यु से 4 दिन पहले हुई घटनाओं के बारे में बात करते हैं (शरीर को छोड़कर)... * 15 aजनवरी, 1990 को, मेरे जन्मदिन पर, मुझे शुन्यो से एक संदेश मिला: ओशो चाहते थे कि मैं उनके पेट का एक्स-रे ले। हम दंaत कक्ष में मिले। ओशो का शरीर पतला और बेकार लग रहा था, फिर भी मैंने उसे शक्तिशाली रूप से उपस्थित महसूस किया। मुझे शुन्यो से पता था कि वह हर दिन बीस घंटे से अधिक सो रहा था, हर शाम बुद्ध हॉल में कुछ क़ीमती मिनटों के लिए अपनी शारीरिक ऊर्जा को बचा रहा था। ओशो नेa मुझे बताया कि उसके हमलावरों की आवाज़ से उसका शरीर बहुत कमजोर हो गया था। उन्होंने कहा कि उनमें से शायद तीन, दो पुरुष और एक महिला, ध्वनि तरंगों पर ध्यानaa केंद्रित करने और अपने शरीर को लक्षित करने के लिए एक विशेष गठन में बैठे थे। यहां भारत में प्राचीन योगिक प्रथाएं हैं जहां लोग कुछ ध्वनियों, कुछ मंत्रों को जानते हैं, जो लोगों को नुक़सान पहुंचाने के लिए ध्वनि को केंद्रित कर सकते हैं। लेकिन मुझ पर हमला करaaने वाले ये लोग भारतीय नहीं हैं। वे वही लोग हैं जिन्होंने अमेरिका में पहले मुझे मारने की कोशिश की थी। वे तब सफल नहीं हो सके, और अब वे जो शुरू किया उसे पूरा कर ने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने मुझे बोलने से रोकने के लिए ज़हर की कोशिश की लेकिन मैं जारी रखने में कामयाब रहा। अब, पांच साल बाद वे वापस आ गए हैं। उन्होंने पहले बुद्ध हॉल में अपनी ध्वनि किरणों का उपयोग मेरे दिमाग़ पर हमला करने के लिए किया लेकिन मैं अपने दिमाग़ में नहीं हूं। मैं एक नो-मन हूं और उनकी आवाज़ का बहुत कम प्रभाव था। इसलिए उन्होंने अपनी रणनीति बदल दी, अब वे मेरे शरीर पर हमला कर रहे हैं। मेरे गरीब शरीर को उनकी किरणों से कोई सुरक्षा नहीं है। हर दिन यह कमजोर होता जाता है। वे मुझे मार नहीं सकते लेकिन वे मेरे शरीर को नुक़सान पहुंचा सकते हैं। अभी मेरे जिगर के क्षेत्र में बहुत दर्द हो रहा है। क्या आप इसे एक्स-रे कर सकते हैं? दुख की बात है, मैंने समझाया कि मेरी दंत एक्स-रे मशीन शायद अपर्याप्त थी क्योंकि यह केवल दांतों और जबड़े की छोटी फिल्में ले सकती थी, लेकिन हम कोशिश कर सकते थे। अमृतो को हमारे पास सबसे बड़ी एक्स-रे फ़िल्म मिली, जबकि मैंने इसकी बीम को चौड़ा करने के लिए डेंटल एक्स-रे मशीन के साथ जिग्गल किया। मैंने वह करने की कोशिश की जो ओशो पूछ रहा था। मैंने उसके जिगर के क्षेत्र की एक तस्वीर ली और फिर दंत विकास में बड़ी फ़िल्म विकसित करने में कामयाब रहा टैंक जिसे छोटी इंट्रा-ओरल डेंटल फ़िल्मों के लिए डिज़ाइन किया गया था, लेकिन परिणामी छवि धुंधली और अस्पष्ट थी। यह आख़िरी बार था जब मैंने ओशो को उसके भौतिक शरीर में देखा था। 19 जनवरी को शाम 4:30 बजे थे: मैं अपनी प्रेमिका के साथ अपने कमरे में था जब दरवाजे पर एक ज़रूरी दस्तक हुई। मनीषा, पीला और तनावग्रस्त दिख रही थी, ने पूछा कि क्या वह मेरे कमरे के फ़ोन का उपयोग कर सकती है। मुझे पता था कि वह केवल पूछेगी कि क्या कुछ असामान्य हो रहा है। अस्थायी सचिव के रूप में कार्य करते हुए वह इनर सर्कल के सदस्यों को फ़ोन कर रही थी और उन्हें कृष्णा हाउस में एक असाधारण बैठक में तुरंत आने के लिए कह रही थी। ओशो ने पंद्रह महीने पहले इक्कीस लोगों की एक कम्यून प्रबंधन टीम की स्थापना की थी, इसे इनर सर्कल का नाम दिया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका काम कम्यून के दिन-प्रतिदिन चलने का प्रबंधन करना था। मैं मूल चयन में नहीं था, लेकिन कुछ महीने बाद मुझे शामिल होने के लिए कहा गया था। फ़ोन करने के बाद, मनीषा ने कहा, “गीट, तुमने सुना कि मैं दूसरों को क्या बता रहा था। बैठक कृष्णा हाउस की छत पर ब्लू रूम में है। क्या आप वहां तुरंत जा सकते हैं?” इससे पहले कि मैं कोई सवाल पूछ पाता, वह जल्दी से गलियारे में चली गई, स्पष्ट रूप से एक और महत्वपूर्ण कार्य में शामिल थी। मैंने दोपहर के अधिकांश समय अजीब तरह से विपुल महसूस किया था। बाहरी मामलों की उथल-पुथल के बावजूद मैं कई दिनों से उत्साहित महसूस कर रहा था। मेरे दिल में ख़ुशी का एक अकथनीय नृत्य था। अंदर से मुझे उत्साह, आनंद महसूस हुआ। ब्लू रूम में पहुंचने पर, मैंने देखा कि अधिकांश इनर सर्कल पहले से ही वहां इकट्ठा हो चुके थे। माहौल तनावपूर्ण और तनावपूर्ण था। मेरा अपना उत्साह जगह से बाहर लग रहा था। मैं बैठ गया और इंतज़ार किया। कुछ मिनटों के बाद जयेश ने अमृतो के साथ प्रवेश किया। यह देखने के लिए संक्षेप में चारों ओर देखते हुए कि हम सभी मौजूद हैं, उन्होंने एक दृढ़, हालांकि शांत आवाज़ में कहा, “मुझे लगता है कि इसे लपेटने का कोई तरीक़ा नहीं है। मैं आपको सीधे बताऊंगा। ओशो ने कुछ समय पहले लगभग 4:45 बजे अपना शरीर छोड़ दिया था दोपहर।” स्तब्ध, मैंने अपनी घड़ी को देखा। शाम के 5:15 बजे थे। उपस्थित दो या तीन लोग रोने लगे। जयेश ने जल्दी से बीच में टोका, “देखो, मुझे तुम्हारी सारी मदद की ज़रूरत है। कृपया अभी तक अलग न हों। मुझे आप सभी की ज़रूरत है कि ओशो के भेजने को उतना ही सुंदर बनाने में मदद करें जितना वह हकदार है। यह आख़िरी चीज है जो हम उसके लिए कर सकते हैं भौतिक शरीर, चलो इसे अद्भुत बनाते हैं। उसने मुझे ठीक से बताया कि वह कैसे चाहता है कि ऐसा हो। उसने मुझे हर चीज के लिए विस्तृत निर्देश दिए, लेकिन मुझे यहां हर किसी की मदद की ज़रूरत है।” जयेश के शब्दों को सुनकर मेरा पहले का उत्साह सदमे में बदल गया था, लेकिन मैंने ओशो को अपने लोगों के साथ अपने अंतिम उत्सव का आनंद लेने में सक्षम बनाने के लिए हमारी मदद के लिए जयेश की अपील को स्पष्ट रूप से सुना। जैसे ही मैंने ब्लू रूम छोड़ा, जयेश ने मुझे बताया कि ओशो ने अनुरोध किया था कि मैं उनके शरीर को जलते हुए घाटों तक ले जाने के लिए एक वाहक बनूं। गतिविधि और भ्रमित भावनाओं के एक धुंध में मुझे याद है कि ओशो के इस अंतिम उपहार के लिए बेहद आभारी महसूस कर रहा था। - स्वामी देवगीत पुस्तक : ओशो - द फर्स्ट बुद्ध इन द डेंटल चेयर अध्याय: 17 अध्याय का नाम: ओशो का अंतिम दंत नाटक: अधिनियम V अंतिम सुनहरी झलक
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