Post Views 21
June 15, 2026
अधिक मास की सोमवती अमावस्या पर पुष्कर में उमड़ा आस्था का सैलाब,2 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी,
52 घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़—व्यवस्थाओं की खुली पोल
तीर्थ नगरी पुष्कर में अधिक मास की सोमवती अमावस्या पर आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिला। सोमवार को करीब दो लाख से अधिक श्रद्धालु पवित्र पुष्कर सरोवर में आस्था की डुबकी लगाने पहुंचे। सरोवर के 52 घाटों पर सुबह से ही श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। श्रद्धालुओं ने पवित्र स्नान के बाद पूजा-अर्चना, पिंडदान, तर्पण और दान-पुण्य कर धर्मलाभ लिया। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अधिक मास की सोमवती अमावस्या का विशेष महत्व पुराणों में वर्णित है। तीर्थ पुरोहित दिलीप शास्त्री और पंडित नवनीत शरण ने बताया कि इस दिन तीर्थराज पुष्कर में स्नान, तर्पण और दान करने से श्रद्धालुओं को मानसिक और शारीरिक पीड़ाओं से मुक्ति मिलती है। साथ ही पितरों की शांति के लिए भी यह दिन अत्यंत फलदायी माना जाता है। मान्यता है कि महाभारत काल में जिस सोमवती अमावस्या की प्रतीक्षा करते-करते पांडव परमधाम को प्राप्त हो गए, उसी सोमवती अमावस्या का कलयुग में विशेष महत्व माना गया है।इन्हीं धार्मिक मान्यताओं के चलते देशभर से श्रद्धालु पुष्कर पहुंचे। ब्रह्म मुहूर्त से शुरू हुआ स्नान-दान का दौर दिनभर जारी रहा। श्रद्धालुओं ने सरोवर के घाटों पर दीपदान, अन्नदान, वस्त्रदान और पितृ तर्पण किया। ब्रह्मा मंदिर सहित पुष्कर के प्रमुख मंदिरों में भी श्रद्धालुओं की लंबी कतारें नजर आईं।
हालांकि आस्था के इस महासंगम के बीच व्यवस्थाओं की हकीकत भी खुलकर सामने आई। सरोवर के कई घाटों पर सफाई व्यवस्था नाकाफी नजर आई। जगह-जगह कचरे के ढेर दिखाई दिए। खाद्य सामग्री और अन्य पूजन सामग्री सरोवर में डाले जाने से जल प्रदूषित नजर आया। प्रशासनिक पाबंदी के बावजूद घाटों पर अनाज और खाद्य सामग्री की बिक्री होती रही, जिससे सरोवर की पवित्रता और स्वच्छता पर सवाल खड़े हुए। महिला और बुजुर्ग श्रद्धालुओं को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ा। घाटों पर महिलाओं के लिए पर्याप्त चेंजिंग रूम की व्यवस्था नहीं दिखी। शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाओं को लेकर भी श्रद्धालुओं ने नाराजगी जताई। भीड़ इतनी अधिक थी कि कई घाटों पर श्रद्धालुओं को आगे बढ़ने तक में परेशानी हुई। पुष्कर सरोवर से लेकर मंदिरों और मुख्य बाजार तक भारी भीड़ के चलते यातायात व्यवस्था भी चरमराई नजर आई। जगह-जगह जाम लगने से श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को घंटों परेशानी झेलनी पड़ी। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन की ओर से भीड़ को लेकर किए गए पूर्व अनुमान और तैयारियां जमीन पर कमजोर साबित हुईं। कई स्थानों पर हालात संभालने के लिए स्थानीय लोगों को स्वयं आगे आना पड़ा। श्रद्धालुओं की भीड़ को नियंत्रित करने, यातायात सुचारू रखने और घाटों पर सफाई बनाए रखने में प्रशासनिक व्यवस्थाएं नाकाफी दिखाई दीं।
इसी बीच पुष्कर सरोवर के कई घाटों पर श्रद्धालुओं के पानी में डूबने की सूचनाएं भी सामने आईं। राहत की बात यह रही कि रेस्क्यू टीमों ने मुस्तैदी दिखाते हुए कई श्रद्धालुओं की जान बचाई। ऐसा ही एक मामला कुर्मांचल घाट पर सामने आया, जहां एक श्रद्धालु पानी में डूबने लगा। मौके पर मौजूद सिविल डिफेंस टीम के डॉ. कृष्ण गोपाल जाट और सुनील शर्मा ने तत्परता दिखाते हुए करीब 10 मिनट की मशक्कत के बाद श्रद्धालु को सरोवर से बाहर निकाला और उसकी जान बचाई।
अधिक मास की सोमवती अमावस्या पर पुष्कर में आस्था का यह जनसैलाब जहां धार्मिक नगरी की महिमा को दर्शाता है, वहीं व्यवस्थाओं की खामियां प्रशासन के लिए बड़ा सवाल भी छोड़ गया। श्रद्धालुओं की सुरक्षा, सरोवर की स्वच्छता, यातायात नियंत्रण और मूलभूत सुविधाओं को लेकर अब जिम्मेदारों को गंभीरता से सोचने की जरूरत है, ताकि अगली बार तीर्थराज पुष्कर में आस्था के साथ व्यवस्था का भी सम्मान दिखाई दे।
© Copyright Horizonhind 2026. All rights reserved