राजस्थान न्यूज़: दौसा। जिला कांग्रेस कमेटी की नवनियुक्त कार्यकारिणी के शपथ ग्रहण समारोह में सोमवार को कांग्रेस नेताओं ने संगठनात्मक मजबूती और आगामी चुनावी रणनीति पर चर्चा की। हालांकि कार्यक्रम के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के विधायक खरीद-फरोख्त संबंधी बयान को लेकर पूछे गए सवालों ने राजनीतिक माहौल गर्मा दिया। दौसा सांसद मुरारीलाल मीणा और कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने इस मुद्दे पर अपनी-अपनी प्रतिक्रिया देते हुए पार्टी के भीतर चल रही चर्चाओं पर भी टिप्पणी की। दौसा सांसद मुरारीलाल मीणा ने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के उस बयान पर प्रतिक्रिया दी, जिसमें उन्होंने विधायकों को खरीदने के लिए करोड़ों रुपये के प्रस्ताव दिए जाने की बात कही थी। सांसद ने कहा कि यदि वास्तव में ऐसे सौदे होते तो वह आज यहां खड़े होकर भाषण नहीं दे रहे होते। उन्होंने कहा कि दौसा की जनता उन्हें अच्छी तरह जानती है और उनके राजनीतिक जीवन की पारदर्शिता से परिचित है। मुरारीलाल मीणा ने कांग्रेस के भीतर चल रही बयानबाजी को परिवार के भीतर होने वाली सामान्य चर्चाओं जैसा बताते हुए कहा कि बड़े राजनीतिक दलों में विचारों का आदान-प्रदान होता रहता है। उन्होंने कहा कि अशोक गहलोत पार्टी के वरिष्ठ और अनुभवी नेता हैं, जबकि सचिन पायलट ऊर्जावान युवा नेतृत्व का प्रतिनिधित्व करते हैं। दोनों नेताओं का कांग्रेस में महत्वपूर्ण योगदान है और पार्टी भविष्य में मजबूती के साथ आगे बढ़ेगी। कार्यक्रम में मौजूद दौसा जिला प्रभारी एवं पूर्व विधायक राकेश पारीक ने भी अशोक गहलोत के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उम्र के एक पड़ाव पर व्यक्ति कई बार भावनात्मक रूप से बातें कह देता है। उनका यह बयान राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया। सचिन पायलट को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाए जाने की संभावनाओं से जुड़े सवाल पर पूर्व मंत्री परसादी लाल मीणा ने कहा कि पार्टी संगठन को मजबूत करना ही वर्तमान प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी का स्पष्ट संदेश है कि प्रत्येक कार्यकर्ता अपने बूथ को मजबूत करे और संगठन को जमीनी स्तर पर सशक्त बनाए। उन्होंने कहा कि प्रदेश नेतृत्व को लेकर निर्णय पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व करेगा। परसादी लाल मीणा ने यह भी कहा कि राहुल गांधी ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली की कार्यशैली की सराहना की है और अन्य राज्यों को भी उनसे प्रेरणा लेने की बात कही है। मानेसर प्रकरण और सरकार गिराने के प्रयासों को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि यह पुरानी बात हो चुकी है और अंततः सरकार बच गई थी।
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राजस्थान न्यूज़: डीग। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने सोमवार को ब्रज क्षेत्र पहुंचकर धार्मिक आस्था और श्रद्धा के साथ गोवर्धन गिरिराज जी महाराज की सप्तकोसीय परिक्रमा प्रारंभ की। इससे पूर्व उन्होंने अपनी धर्मपत्नी के साथ डीग स्थित श्रीनाथजी मंदिर में विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर प्रदेश की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की। मुख्यमंत्री ने श्रीनाथजी मंदिर में दर्शन-पूजन के बाद सामान्य श्रद्धालु की तरह ‘सात दंडवती’ लगाकर ब्रज की पावन धरा पर गिरिराज जी महाराज की सप्तकोसीय परिक्रमा का शुभारंभ किया। धार्मिक परंपराओं का पालन करते हुए उन्होंने परिक्रमा मार्ग पर श्रद्धालुओं के साथ सहभागिता की और प्रदेशवासियों के कल्याण की प्रार्थना की। मुख्यमंत्री की परिक्रमा यात्रा के दौरान मार्ग में बड़ी संख्या में श्रद्धालु, साधु-संत और स्थानीय नागरिक मौजूद रहे। जगह-जगह पुष्पवर्षा, स्वागत और अभिनंदन के कार्यक्रम आयोजित किए गए। मुख्यमंत्री ने भी हाथ जोड़कर लोगों का अभिवादन स्वीकार किया तथा आत्मीयता के साथ उनका अभिवादन किया। परिक्रमा मार्ग पर ‘बोलो गिरिराज महाराज की जय’ और धार्मिक जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। ब्रज क्षेत्र में मुख्यमंत्री की धार्मिक यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। अनेक स्थानों पर लोगों ने मुख्यमंत्री का स्वागत कर उनके साथ धार्मिक संवाद भी किया। साधु-संतों ने भी इस अवसर पर प्रदेश की समृद्धि और जनकल्याण के लिए आशीर्वाद प्रदान किया। इससे पहले मुख्यमंत्री के डीग पहुंचने पर पूंछरी का लौठा स्थित हेलीपैड पर गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम, डीग-कुम्हेर विधायक डॉ. शैलेश सिंह, राजस्थान धरोहर संरक्षण एवं प्रोन्नति प्राधिकरण के अध्यक्ष ओंकार सिंह लखावत सहित जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने उनका स्वागत किया। मुख्यमंत्री की यह धार्मिक यात्रा पुरुषोत्तम मास के दौरान विशेष महत्व रखती है। गोवर्धन गिरिराज जी की सप्तकोसीय परिक्रमा को ब्रज क्षेत्र की प्रमुख धार्मिक परंपराओं में माना जाता है और इसमें शामिल होने के लिए देशभर से श्रद्धालु पहुंचते हैं।
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राजस्थान न्यूज़: जयपुर। राजस्थान में लंबे समय से प्रतीक्षित प्रशासनिक और विभागीय तबादलों को लेकर बड़ी हलचल शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने रविवार शाम मुख्यमंत्री निवास (सीएमआर) में आयोजित भाजपा विधायकों की बैठक में सरकारी विभागों में तबादलों को लेकर महत्वपूर्ण संकेत दिए हैं। सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री ने 10 जून से 20 जून के बीच विभिन्न सरकारी विभागों में स्थानांतरण प्रक्रिया शुरू होने की संभावना जताई है। बैठक में मुख्यमंत्री ने विधायकों से तबादलों को लेकर संयमित और आवश्यकता आधारित प्रस्ताव भेजने पर जोर दिया। जानकारी के अनुसार उन्होंने स्पष्ट संकेत दिए कि जनप्रतिनिधि बड़ी संख्या में अधिकारियों और कर्मचारियों की सूची भेजने के बजाय केवल वास्तव में आवश्यक मामलों को प्राथमिकता दें। सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री ने विधायकों को प्रत्येक विभाग में जरूरत के अनुसार सीमित संख्या में नाम संबंधित विभागीय मंत्री को भेजने की सलाह दी। बताया जा रहा है कि एक विभाग में अधिकतम तीन अधिकारियों या कर्मचारियों के नाम ही अनुशंसा के लिए भेजने का सुझाव दिया गया है, ताकि स्थानांतरण प्रक्रिया पारदर्शी, संतुलित और प्रशासनिक आवश्यकताओं के अनुरूप रह सके। बैठक के दौरान सरकार के कार्यों, संगठनात्मक गतिविधियों और प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने विधायकों से कहा कि तबादलों को लेकर अनावश्यक दबाव या व्यापक सिफारिशों से बचा जाए तथा केवल जनहित और प्रशासनिक आवश्यकता वाले मामलों को ही आगे बढ़ाया जाए। राज्य के विभिन्न विभागों में कार्यरत अधिकारी और कर्मचारी लंबे समय से तबादला नीति लागू होने का इंतजार कर रहे हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री की ओर से मिले संकेतों के बाद सरकारी महकमों में तबादलों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। माना जा रहा है कि सरकार जल्द ही स्थानांतरण प्रक्रिया को लेकर औपचारिक दिशा-निर्देश जारी कर सकती है।
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अजमेर न्यूज़: 1100 वर्ष पूर्व स्थापित मंदिर की बड़ी है मान्यता, दूर दराज से पहुंचते हैं हजारों श्रद्धालु
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अजमेर न्यूज़: 1968 से कस्बे की धार्मिक संस्था श्री ब्रह्म पुष्कर सेवा संघ कर रही है इस अनूठी परंपरा का निर्वहन
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अजमेर न्यूज़: 10 टीमें 8 - 8 वार्डो में जाकर घूम रही गायों का करेंगीं प्राथमिक उपचार
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राष्ट्रीय न्यूज़: भोपाल। मध्य प्रदेश की तीसरी राज्यसभा सीट के चुनाव में मंगलवार को बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया, जब कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा खारिज कर दिया गया। भारतीय जनता पार्टी द्वारा उठाई गई आपत्ति के बाद यह निर्णय लिया गया। भाजपा का आरोप था कि मीनाक्षी नटराजन ने हैदराबाद की एक अदालत में लंबित मामले की जानकारी अपने नामांकन पत्र में उल्लेखित नहीं की, जिसके आधार पर उनके नामांकन की वैधता पर सवाल उठाए गए थे। नामांकन पत्रों की जांच के दौरान पर्यवेक्षक द्वारा मीनाक्षी नटराजन को कारण बताओ नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया था। जवाब पर विचार करने के बाद रिटर्निंग ऑफिसर ने उनका नामांकन निरस्त करने का फैसला सुनाया। इस निर्णय के बाद राज्यसभा चुनाव की राजनीतिक तस्वीर में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। कांग्रेस ने इस कार्रवाई को राजनीतिक प्रेरित बताते हुए फैसले का विरोध किया है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है और उन्हें केवल अदालत से नोटिस प्राप्त हुआ था। उन्होंने दावा किया कि नामांकन रद्द करने का निर्णय तथ्यात्मक और कानूनी रूप से गलत है तथा कांग्रेस इस फैसले को अदालत में चुनौती देगी। नामांकन जांच प्रक्रिया के दौरान विधानसभा परिसर में राजनीतिक तनाव भी देखने को मिला। कांग्रेस और भाजपा नेताओं के बीच तीखी बहस, नारेबाजी और हंगामे की स्थिति बन गई। कांग्रेस विधायक हेमंत कटारे और विक्रांत भूरिया ने रिटर्निंग ऑफिसर के कक्ष में प्रवेश करने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस और विधानसभा सुरक्षा कर्मियों ने उन्हें रोक दिया। इसी बीच कांग्रेस अपने विधायकों को बाड़ाबंदी के तहत बेंगलुरु भेजने की तैयारी कर रही थी। पार्टी के लिए विशेष चार्टर्ड विमान भोपाल पहुंचा था, लेकिन एयरपोर्ट अथॉरिटी द्वारा प्रारंभिक स्तर पर उड़ान की अनुमति नहीं दिए जाने से विवाद खड़ा हो गया। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सज्जन सिंह वर्मा ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार के दबाव में विमान को रोका जा रहा है। हालांकि करीब दो घंटे की मशक्कत के बाद चार्टर्ड फ्लाइट को अनुमति मिल गई और शाम करीब साढ़े छह बजे विमान ने बेंगलुरु के लिए उड़ान भरी। बताया गया कि विमान में 38 विधायक सहित कुल 75 लोग सवार थे। लेकिन उड़ान भरने के तुरंत बाद मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज होने की सूचना मिलने पर विमान को वापस लौटना पड़ा। इसके बाद कांग्रेस की आगे की रणनीति को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव में इस घटनाक्रम को कांग्रेस के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि कांग्रेस अदालत में क्या कानूनी कदम उठाती है और राज्यसभा चुनाव की आगामी प्रक्रिया पर इसका क्या प्रभाव पड़ता है।
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राष्ट्रीय न्यूज़: अजमेर , 09 जून। राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष श्री वासुदेव देवनानी ने चंडीगढ प्रवास के दौरान आज मंगलवार को लोक भवन पंजाब में राज्यपाल श्री गुलाबचंद कटारिया से शिष्टाचार भेंट की। इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष श्री देवनानी ने राज्यपाल श्री कटारिया का पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया तथा राजस्थान विधानसभा का स्मृति चिह्न भेंट कर अभिवादन किया। श्री देवनानी ने राज्यपाल श्री कटारिया को विधानसभा भवन के विभिन्न द्वारों के नामकरण की अवधारणा के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि विधानसभा के प्रमुख द्वारों को कर्तव्य द्वार, शक्ति द्वार, सुशासन द्वार, संकल्प द्वार एवं शौर्य द्वार नाम देकर लोकतंत्र के मूल आदर्शों और जनप्रतिनिधियों के दायित्वों को प्रतीकात्मक रूप से अभिव्यक्त किया गया है। उन्होंने श्री कटारिया को बताया कि विधानसभा भवन के बाहरी द्वारों को राजस्थान के विभिन्न अंचलों बृज, शेखावाटी, वागड, हाड़ौती, मारवाड़, मेवाड़, मेरवाड़ा एवं ढूंढाड़ के नाम समर्पित कर राज्य की सांस्कृतिक विविधता, लोक परंपराओं और क्षेत्रीय गौरव को लोकतांत्रिक व्यवस्था से जोड़ने का प्रयास किया गया है। राज्यपाल श्री कटारिया ने स्पीकर श्री देवनानी की इस पहल को लोकतांत्रिक संस्थाओं को जनभावनाओं और सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण कदम बताया तथा कहा कि ऐसे नवाचार लोकतंत्र के प्रति नागरिकों में आत्मीयता और गौरव का भाव विकसित करते हैं। भेटवार्ता के दौरान दोनों जनप्रतिनिधियों के मध्य समसामयिक विषयों, लोकतांत्रिक मूल्यों तथा जनसेवा से जुड़े विभिन्न विषयों पर आत्मीय चर्चा हुई। श्री देवनानी ने राज्यपाल श्री कटारिया के दीर्घ सार्वजनिक जीवन, प्रशासनिक अनुभव एवं समाज के प्रति उनके योगदान की सराहना की ।
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गुप्त ध्वनि किरणों के साथ ओशो पर किसने हमला किया?...
गुप्त ध्वनि किरणों के साथ ओशो पर किसने हमला किया?... * ओशो के निजी दंत चिकित्सक देवगेट ओशो की मृत्यु से 4 दिन पहले हुई घटनाओं के बारे में बात करते हैं (शरीर को छोड़कर)... * 15 aजनवरी, 1990 को, मेरे जन्मदिन पर, मुझे शुन्यो से एक संदेश मिला: ओशो चाहते थे कि मैं उनके पेट का एक्स-रे ले। हम दंaत कक्ष में मिले। ओशो का शरीर पतला और बेकार लग रहा था, फिर भी मैंने उसे शक्तिशाली रूप से उपस्थित महसूस किया। मुझे शुन्यो से पता था कि वह हर दिन बीस घंटे से अधिक सो रहा था, हर शाम बुद्ध हॉल में कुछ क़ीमती मिनटों के लिए अपनी शारीरिक ऊर्जा को बचा रहा था। ओशो नेa मुझे बताया कि उसके हमलावरों की आवाज़ से उसका शरीर बहुत कमजोर हो गया था। उन्होंने कहा कि उनमें से शायद तीन, दो पुरुष और एक महिला, ध्वनि तरंगों पर ध्यानaa केंद्रित करने और अपने शरीर को लक्षित करने के लिए एक विशेष गठन में बैठे थे। यहां भारत में प्राचीन योगिक प्रथाएं हैं जहां लोग कुछ ध्वनियों, कुछ मंत्रों को जानते हैं, जो लोगों को नुक़सान पहुंचाने के लिए ध्वनि को केंद्रित कर सकते हैं। लेकिन मुझ पर हमला करaaने वाले ये लोग भारतीय नहीं हैं। वे वही लोग हैं जिन्होंने अमेरिका में पहले मुझे मारने की कोशिश की थी। वे तब सफल नहीं हो सके, और अब वे जो शुरू किया उसे पूरा कर ने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने मुझे बोलने से रोकने के लिए ज़हर की कोशिश की लेकिन मैं जारी रखने में कामयाब रहा। अब, पांच साल बाद वे वापस आ गए हैं। उन्होंने पहले बुद्ध हॉल में अपनी ध्वनि किरणों का उपयोग मेरे दिमाग़ पर हमला करने के लिए किया लेकिन मैं अपने दिमाग़ में नहीं हूं। मैं एक नो-मन हूं और उनकी आवाज़ का बहुत कम प्रभाव था। इसलिए उन्होंने अपनी रणनीति बदल दी, अब वे मेरे शरीर पर हमला कर रहे हैं। मेरे गरीब शरीर को उनकी किरणों से कोई सुरक्षा नहीं है। हर दिन यह कमजोर होता जाता है। वे मुझे मार नहीं सकते लेकिन वे मेरे शरीर को नुक़सान पहुंचा सकते हैं। अभी मेरे जिगर के क्षेत्र में बहुत दर्द हो रहा है। क्या आप इसे एक्स-रे कर सकते हैं? दुख की बात है, मैंने समझाया कि मेरी दंत एक्स-रे मशीन शायद अपर्याप्त थी क्योंकि यह केवल दांतों और जबड़े की छोटी फिल्में ले सकती थी, लेकिन हम कोशिश कर सकते थे। अमृतो को हमारे पास सबसे बड़ी एक्स-रे फ़िल्म मिली, जबकि मैंने इसकी बीम को चौड़ा करने के लिए डेंटल एक्स-रे मशीन के साथ जिग्गल किया। मैंने वह करने की कोशिश की जो ओशो पूछ रहा था। मैंने उसके जिगर के क्षेत्र की एक तस्वीर ली और फिर दंत विकास में बड़ी फ़िल्म विकसित करने में कामयाब रहा टैंक जिसे छोटी इंट्रा-ओरल डेंटल फ़िल्मों के लिए डिज़ाइन किया गया था, लेकिन परिणामी छवि धुंधली और अस्पष्ट थी। यह आख़िरी बार था जब मैंने ओशो को उसके भौतिक शरीर में देखा था। 19 जनवरी को शाम 4:30 बजे थे: मैं अपनी प्रेमिका के साथ अपने कमरे में था जब दरवाजे पर एक ज़रूरी दस्तक हुई। मनीषा, पीला और तनावग्रस्त दिख रही थी, ने पूछा कि क्या वह मेरे कमरे के फ़ोन का उपयोग कर सकती है। मुझे पता था कि वह केवल पूछेगी कि क्या कुछ असामान्य हो रहा है। अस्थायी सचिव के रूप में कार्य करते हुए वह इनर सर्कल के सदस्यों को फ़ोन कर रही थी और उन्हें कृष्णा हाउस में एक असाधारण बैठक में तुरंत आने के लिए कह रही थी। ओशो ने पंद्रह महीने पहले इक्कीस लोगों की एक कम्यून प्रबंधन टीम की स्थापना की थी, इसे इनर सर्कल का नाम दिया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका काम कम्यून के दिन-प्रतिदिन चलने का प्रबंधन करना था। मैं मूल चयन में नहीं था, लेकिन कुछ महीने बाद मुझे शामिल होने के लिए कहा गया था। फ़ोन करने के बाद, मनीषा ने कहा, “गीट, तुमने सुना कि मैं दूसरों को क्या बता रहा था। बैठक कृष्णा हाउस की छत पर ब्लू रूम में है। क्या आप वहां तुरंत जा सकते हैं?” इससे पहले कि मैं कोई सवाल पूछ पाता, वह जल्दी से गलियारे में चली गई, स्पष्ट रूप से एक और महत्वपूर्ण कार्य में शामिल थी। मैंने दोपहर के अधिकांश समय अजीब तरह से विपुल महसूस किया था। बाहरी मामलों की उथल-पुथल के बावजूद मैं कई दिनों से उत्साहित महसूस कर रहा था। मेरे दिल में ख़ुशी का एक अकथनीय नृत्य था। अंदर से मुझे उत्साह, आनंद महसूस हुआ। ब्लू रूम में पहुंचने पर, मैंने देखा कि अधिकांश इनर सर्कल पहले से ही वहां इकट्ठा हो चुके थे। माहौल तनावपूर्ण और तनावपूर्ण था। मेरा अपना उत्साह जगह से बाहर लग रहा था। मैं बैठ गया और इंतज़ार किया। कुछ मिनटों के बाद जयेश ने अमृतो के साथ प्रवेश किया। यह देखने के लिए संक्षेप में चारों ओर देखते हुए कि हम सभी मौजूद हैं, उन्होंने एक दृढ़, हालांकि शांत आवाज़ में कहा, “मुझे लगता है कि इसे लपेटने का कोई तरीक़ा नहीं है। मैं आपको सीधे बताऊंगा। ओशो ने कुछ समय पहले लगभग 4:45 बजे अपना शरीर छोड़ दिया था दोपहर।” स्तब्ध, मैंने अपनी घड़ी को देखा। शाम के 5:15 बजे थे। उपस्थित दो या तीन लोग रोने लगे। जयेश ने जल्दी से बीच में टोका, “देखो, मुझे तुम्हारी सारी मदद की ज़रूरत है। कृपया अभी तक अलग न हों। मुझे आप सभी की ज़रूरत है कि ओशो के भेजने को उतना ही सुंदर बनाने में मदद करें जितना वह हकदार है। यह आख़िरी चीज है जो हम उसके लिए कर सकते हैं भौतिक शरीर, चलो इसे अद्भुत बनाते हैं। उसने मुझे ठीक से बताया कि वह कैसे चाहता है कि ऐसा हो। उसने मुझे हर चीज के लिए विस्तृत निर्देश दिए, लेकिन मुझे यहां हर किसी की मदद की ज़रूरत है।” जयेश के शब्दों को सुनकर मेरा पहले का उत्साह सदमे में बदल गया था, लेकिन मैंने ओशो को अपने लोगों के साथ अपने अंतिम उत्सव का आनंद लेने में सक्षम बनाने के लिए हमारी मदद के लिए जयेश की अपील को स्पष्ट रूप से सुना। जैसे ही मैंने ब्लू रूम छोड़ा, जयेश ने मुझे बताया कि ओशो ने अनुरोध किया था कि मैं उनके शरीर को जलते हुए घाटों तक ले जाने के लिए एक वाहक बनूं। गतिविधि और भ्रमित भावनाओं के एक धुंध में मुझे याद है कि ओशो के इस अंतिम उपहार के लिए बेहद आभारी महसूस कर रहा था। - स्वामी देवगीत पुस्तक : ओशो - द फर्स्ट बुद्ध इन द डेंटल चेयर अध्याय: 17 अध्याय का नाम: ओशो का अंतिम दंत नाटक: अधिनियम V अंतिम सुनहरी झलक
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