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राजस्थान

राजस्थान न्यूज़: सांगानेर: मुख्यमंत्री के क्षेत्र में भाजपा का दबदबा—21 में से 15 वार्ड जीते, वार्ड 49 में धर्मसिंह सिंघानिया ने सीएम के करीबी मुकेश काका को हराया

राजस्थान न्यूज़: जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के विधानसभा क्षेत्र सांगानेर में नगर निगम चुनाव के नतीजों में भाजपा का दबदबा रहा। क्षेत्र के 21 वार्डों में भाजपा ने 15 और कांग्रेस ने छह वार्डों में जीत दर्ज की। निर्दलीय तथा अन्य दलों के प्रत्याशी कोई सीट नहीं जीत सके। भाजपा को कुल 50.96 प्रतिशत मत मिले, जबकि कांग्रेस की मत हिस्सेदारी 39.57 प्रतिशत रही।भाजपा के मजबूत प्रदर्शन के बीच वार्ड 49 का परिणाम चर्चा में रहा। यहां कांग्रेस के धर्मसिंह सिंघानिया ने भाजपा प्रत्याशी मुकेश शर्मा ‘काका’ को 482 मतों से पराजित किया। सिंघानिया को 8,382 और मुकेश शर्मा को 7,900 वोट मिले। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार सांगानेर क्षेत्र के इन 21 वार्डों में सबसे अधिक 16,282 मत इसी वार्ड में पड़े। भाजपा को मिले एक लाख से अधिक वोट उपलब्ध परिणाम विवरण के अनुसार सांगानेर के 21 वार्डों में कुल 2,08,178 मत पड़े और 75 प्रत्याशी मैदान में थे। भाजपा को 1,06,097 तथा कांग्रेस को 82,369 वोट मिले। दोनों प्रमुख दलों के बीच 23,728 मतों का अंतर रहा।निर्दलीय प्रत्याशियों को संयुक्त रूप से 16,327 वोट मिले, लेकिन कोई निर्दलीय जीत हासिल नहीं कर सका। आरएलपी को 2,871 और आम आदमी पार्टी को 514 मत मिले। वार्ड 49 में सिंघानिया को 51.5 प्रतिशत मत वार्ड 49 में कांग्रेस और भाजपा के बीच सीधा मुकाबला हुआ। कांग्रेस के धर्मसिंह सिंघानिया ने लगभग 51.5 प्रतिशत मत हासिल किए, जबकि भाजपा के मुकेश शर्मा ‘काका’ को लगभग 48.5 प्रतिशत वोट मिले। क्षेत्र में भाजपा की 15 सीटों पर जीत के बीच कांग्रेस ने अधिक मतदान वाले इस वार्ड में सफलता हासिल की।सिंघानिया की जीत का अंतिम अंतर उपलब्ध विस्तृत आंकड़ों में 482 मत है। इससे पहले सामने आई 400 मतों की शुरुआती जानकारी के मुकाबले उम्मीदवारवार मतों का विवरण अब अंतर स्पष्ट करता है। कांग्रेस की छह में से चार जीतें 500 मतों से कम अंतर पर कांग्रेस ने वार्ड 39, 45, 49, 51, 52 और 56 में जीत दर्ज की। इनमें से चार वार्डों में जीत का अंतर 500 मतों से कम रहा। सबसे करीबी मुकाबला वार्ड 52 में हुआ, जहां कांग्रेस के हनुमान सैनी ने भाजपा के पूरण चन्द को केवल 63 मतों से हराया। सैनी को 5,899 और पूरण चन्द को 5,836 वोट मिले।वार्ड 45 में सुभाष नोनीवाल ने भाजपा के जसवंत बैरवा को 112 मतों से पराजित किया। वार्ड 56 में शारदा चौधरी ने भाजपा की रेखा सैनी को 348 मतों से हराया। वार्ड 39 में अजय सैनी ने भंवर लाल लील पर 547 मतों की बढ़त के साथ जीत दर्ज की।कांग्रेस की सबसे बड़ी जीत वार्ड 51 में रही। यहां मनमोहन गुर्जर ने 7,046 मत प्राप्त कर भाजपा के महेंद्र कुमार छीपा को 1,665 मतों से पराजित किया। भाजपा के सिद्धार्थ तोन्दवाल की सबसे बड़ी जीत सांगानेर के इन 21 वार्डों में सबसे बड़े अंतर की जीत वार्ड 48 से भाजपा के सिद्धार्थ तोन्दवाल ने दर्ज की। उन्हें 5,152 मत मिले और उन्होंने निकटतम प्रतिद्वंद्वी निर्दलीय हरीओम स्वर्णकार को 3,313 मतों से हराया।वार्ड 41 में भाजपा के दया सिंह धाकड़ ने 2,553, वार्ड 42 में अशोक रावतानी ने 2,531 और वार्ड 58 में सरोज वर्मा ने 2,520 मतों के अंतर से जीत हासिल की। वार्ड 38 में गणेश नारायण जाट 2,304 और वार्ड 44 में नवीन भण्डारी 2,046 मतों से विजयी रहे। वार्ड 46 में निर्दलीय दूसरे स्थान पर, वार्ड 47 में नौ प्रत्याशियों का मुकाबला वार्ड 46 में भाजपा की शिवकान्ता पाण्डे ने 3,250 मतों के साथ जीत दर्ज की। निर्दलीय सपना 1,489 मत लेकर दूसरे स्थान पर रहीं, जबकि कांग्रेस की हर्षिता जैन को 1,227 वोट मिले और वे तीसरे स्थान पर रहीं। वार्ड 47 में नौ प्रत्याशी मैदान में थे। भाजपा की दीपा नाथावत ने कुल 9,194 मतों में से 2,897 वोट हासिल कर जीत दर्ज की। कांग्रेस के दामोदर मीना को 2,691 मत मिले और वे 206 वोटों से पीछे रहे। इस वार्ड में तीन निर्दलीय प्रत्याशियों को संयुक्त रूप से 3,053 मत मिले। क्षेत्र के कुल पांच वार्डों में विजेता को आधे से कम मत प्राप्त हुए। मुख्यमंत्री के क्षेत्र में भाजपा मजबूत, कांग्रेस ने छह वार्डों में बनाई जगह सांगानेर मुख्यमंत्री का विधानसभा क्षेत्र होने के कारण यहां के निकाय परिणाम राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हैं। भाजपा ने 21 में से 15 सीटें जीतकर क्षेत्र में अपनी मजबूत स्थिति दिखाई है। कांग्रेस ने छह वार्डों में सफलता हासिल की, जिनमें वार्ड 49 की जीत विशेष रूप से उल्लेखनीय रही।प्राप्त जानकारी के अनुसार सांगानेर में कांग्रेस प्रत्याशियों के चयन में पुष्पेंद्र भारद्वाज की प्रमुख भूमिका रही। भारद्वाज विधानसभा चुनाव में भजनलाल शर्मा के सामने कांग्रेस प्रत्याशी थे। निकाय चुनाव में कांग्रेस की चार जीतें 500 मतों से कम अंतर पर रहीं, जबकि भाजपा ने कई वार्डों में दो हजार से अधिक मतों के अंतर से सफलता हासिल की।

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राजस्थान न्यूज़: निकाय चुनाव नतीजों पर कांग्रेस प्रदेशअध्यक्ष डोटासरा का भाजपा पर हमला, परिसीमन में ‘वोट मैनेजमेंट’ का लगाया आरोप

राजस्थान न्यूज़: जयपुर। राजस्थान में नगरीय निकाय चुनाव के नतीजों के बाद कांग्रेस ने भाजपा सरकार और चुनाव से पहले किए गए परिसीमन को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने आरोप लगाया कि सत्ता में होने और परिसीमन का फायदा लेने के बावजूद भाजपा कई निकायों में अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाई। उन्होंने दावा किया कि परिसीमन के दौरान वार्डों की आबादी और मतदाताओं की संख्या में बड़े अंतर रखे गए, जिससे चुनावी समीकरण प्रभावित हुए।डोटासरा ने कहा कि परिसीमन के नाम पर कहीं करीब 4 हजार की आबादी का वार्ड बनाया गया, तो कहीं लगभग 35 हजार की आबादी वाला वार्ड। इसी तरह कुछ वार्डों में करीब 600 मतदाता थे, जबकि उसी शहर के दूसरे वार्डों में लगभग 2,900 मतदाता तक थे। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि परिसीमन पूरी तरह निष्पक्ष था, तो एक ही शहर के वार्डों की आबादी और मतदाता संख्या में इतना बड़ा अंतर क्यों दिखाई दिया। जयपुर के वार्ड 31 और 135 का उदाहरण देकर उठाए सवाल कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने जयपुर नगर निगम के वार्डों का उदाहरण देते हुए कहा कि वार्ड नंबर 31 की आबादी 13,499 है, जबकि वार्ड नंबर 135 की आबादी 32,272 बताई गई है। उन्होंने कहा कि एक ही नगर निगम के दो वार्डों की आबादी में लगभग 2.4 गुना अंतर होना अपने आप में परिसीमन प्रक्रिया पर सवाल खड़ा करता है।डोटासरा ने कहा कि यदि वार्डों का गठन समान और निष्पक्ष आधार पर हुआ था, तो इतनी असमानता की वजह स्पष्ट होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के मजबूत क्षेत्रों को बड़े वार्डों में शामिल किया गया, जबकि भाजपा के प्रभाव वाले क्षेत्रों में अपेक्षाकृत छोटे वार्ड बनाए गए। ‘कांग्रेस के वोटों का प्रभाव कम करने की कोशिश’ गोविंद सिंह डोटासरा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस समर्थक इलाकों को बड़े वार्डों में बांटकर वहां मौजूद मतदाताओं के राजनीतिक प्रभाव को कम करने का प्रयास किया गया। दूसरी ओर भाजपा के पक्ष वाले इलाकों में छोटे वार्ड बनाकर वहां के वोटों को अधिक प्रभावी बनाने की रणनीति अपनाई गई।उन्होंने इसे कथित रूप से “सुनियोजित वोट मैनेजमेंट” बताते हुए कहा कि चुनाव से पहले परिसीमन के जरिए राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश की गई। डोटासरा ने कहा कि भाजपा ने मतदाताओं के नाम काटने और सत्ता पर कब्जा बनाए रखने के लिए हर संभव प्रयास किया, लेकिन इसके बावजूद कई जगह जनता ने भाजपा के खिलाफ मतदान किया। 1,316 वार्डों में जीत का अंतर 100 से कम होने का दावा डोटासरा ने निकाय चुनाव के परिणामों से जुड़े आंकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया कि कुल 4,097 वार्डों में से 1,316 वार्ड ऐसे रहे, जहां भाजपा की जीत का अंतर 100 वोट से भी कम था। इनमें 772 वार्ड ऐसे बताए गए, जहां जीत का अंतर 50 मतों से नीचे रहा।उन्होंने यह भी दावा किया कि 13 वार्डों में भाजपा उम्मीदवार केवल एक वोट के अंतर से विजयी हुए। डोटासरा ने इन नतीजों को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि इतने बड़े पैमाने पर बेहद कम अंतर से जीत दर्ज होना भी जांच और राजनीतिक चर्चा का विषय है। हालांकि ये सभी आंकड़े कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष द्वारा किए गए दावों का हिस्सा हैं और चुनाव आयोग के अंतिम वार्डवार आधिकारिक आंकड़ों से इनका स्वतंत्र मिलान अलग से किया जाना आवश्यक होगा। भाजपा के वोट शेयर में गिरावट का भी दावा कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने भाजपा के वोट शेयर को लेकर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने दावा किया कि नगरीय निकाय चुनाव में भाजपा का वोट शेयर पिछले लोकसभा चुनाव की तुलना में लगभग 15 प्रतिशत और विधानसभा चुनाव की तुलना में करीब 7 प्रतिशत कम रहा।डोटासरा ने सवाल किया कि अलग-अलग चुनावों के बीच वोट शेयर में इतना बड़ा बदलाव किस कारण आया। उन्होंने इसे भाजपा के प्रति शहरी मतदाताओं की नाराजगी से जोड़ते हुए कहा कि निकाय चुनाव के नतीजों ने यह संकेत दिया है कि शहरी क्षेत्रों में भी राजनीतिक माहौल बदल रहा है। ‘कांग्रेस के वोट ज्यादा, सीटें भाजपा की ज्यादा’ डोटासरा ने जयपुर, टोंक और करौली जैसे जिलों का उल्लेख करते हुए दावा किया कि इन क्षेत्रों में कांग्रेस का कुल वोट शेयर भाजपा से अधिक रहा, लेकिन सीटों की संख्या में भाजपा आगे निकल गई। उन्होंने सवाल किया कि जब कांग्रेस को कुल वोट ज्यादा मिले, तो सीटों के परिणाम भाजपा के पक्ष में अधिक कैसे गए।उन्होंने इसे परिसीमन से जोड़ते हुए कहा कि वोटों के भौगोलिक वितरण और वार्ड सीमाओं में बदलाव का असर सीटों के परिणाम पर पड़ा। कांग्रेस अब इस मुद्दे को राजनीतिक और संगठनात्मक स्तर पर उठाने की तैयारी में है। निकाय चुनाव के बाद परिसीमन पर बढ़ी सियासत राजस्थान के निकाय चुनाव परिणामों के बाद अब सिर्फ जीत-हार का गणित ही चर्चा में नहीं है, बल्कि वार्ड परिसीमन और वोट शेयर बनाम सीट शेयर का मुद्दा भी राजनीतिक बहस का केंद्र बनता जा रहा है। कांग्रेस ने जहां इसे भाजपा सरकार की कथित चुनावी रणनीति बताया है, वहीं भाजपा की ओर से इन आरोपों पर आने वाली प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी।डोटासरा के बयान से यह साफ है कि कांग्रेस आगामी राजनीतिक लड़ाई में निकाय चुनाव के परिणामों के साथ-साथ परिसीमन की प्रक्रिया को भी बड़ा मुद्दा बनाने जा रही है। यदि कांग्रेस अपने आरोपों को आधिकारिक आंकड़ों और दस्तावेजों के साथ आगे बढ़ाती है, तो यह मामला आने वाले दिनों में और राजनीतिक तूल पकड़ सकता है।

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राजस्थान न्यूज़: नगरीय निकाय चुनाव-2026: जयपुर, जोधपुर, कोटा और सुकेत के चुनिंदा बूथों पर 16 सितंबर को पुनर्मतदान

राजस्थान न्यूज़: जयपुर। राजस्थान में नगरीय निकाय आम चुनाव-2026 के तहत जयपुर, जोधपुर, कोटा और सुकेत के कुछ मतदान केंद्रों पर पुनर्मतदान कराया जाएगा। राज्य निर्वाचन आयोग ने मतगणना के दौरान इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों में तकनीकी खराबी सामने आने और उससे चुनाव परिणाम प्रभावित होने की संभावना को देखते हुए संबंधित मतदान केंद्रों पर दोबारा मतदान कराने के निर्देश जारी किए हैं। आयोग के अनुसार, संबंधित जिला निर्वाचन अधिकारियों और रिटर्निंग अधिकारियों से प्राप्त रिपोर्टों की जांच के बाद यह सामने आया कि कुछ मतदान केंद्रों पर EVM में आई तकनीकी खराबी से प्रभावित मतों की संख्या निकटतम प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवारों के बीच जीत-हार के अंतर से अधिक है। ऐसी स्थिति में अंतिम चुनाव परिणाम की निष्पक्षता और स्पष्टता सुनिश्चित करने के लिए पुनर्मतदान आवश्यक माना गया। जयपुर के पांच वार्डों के छह बूथों पर दोबारा मतदान नगर निगम जयपुर में सबसे अधिक मतदान केंद्र पुनर्मतदान के दायरे में आए हैं। आयोग के अनुसार वार्ड संख्या 09 के बूथ संख्या 111, वार्ड संख्या 18 के बूथ संख्या 235, वार्ड संख्या 25 के बूथ संख्या 343 और वार्ड संख्या 34 के बूथ संख्या 477 एवं 484 पर पुनर्मतदान कराया जाएगा। इन बूथों के परिणाम लंबित रहने के कारण संबंधित वार्डों का अंतिम चुनाव परिणाम भी स्पष्ट नहीं हो पाया था। इसी वजह से नगर निगम जयपुर में आगे की अध्यक्षीय या महापौर चुनाव प्रक्रिया भी प्रभावित हुई है। जोधपुर में वार्ड 50 के बूथ 338 पर पुनर्मतदान नगर निगम जोधपुर के वार्ड संख्या 50 के बूथ संख्या 338 पर भी पुनर्मतदान कराया जाएगा। मतगणना के दौरान EVM से जुड़ी तकनीकी समस्या के कारण इस मतदान केंद्र के मतों की गणना पूरी नहीं हो सकी थी। आयोग ने संबंधित अधिकारियों से रिपोर्ट प्राप्त करने के बाद पुनर्मतदान का निर्णय लिया है, ताकि संबंधित वार्ड का अंतिम परिणाम निर्विवाद रूप से घोषित किया जा सके। कोटा में तीन बूथों पर फिर पड़ेंगे वोट नगर निगम कोटा में भी तीन मतदान केंद्रों पर पुनर्मतदान कराया जाना तय किया गया है। इनमें वार्ड संख्या 87 का बूथ संख्या 99, वार्ड संख्या 44 का बूथ संख्या 448 और वार्ड संख्या 11 का बूथ संख्या 576 शामिल हैं। इन मतदान केंद्रों पर तकनीकी खराबी से प्रभावित मतों की संख्या जीत-हार के अंतर को प्रभावित करने की स्थिति में पाई गई। इसके बाद आयोग ने यहां दोबारा मतदान कराने को ही उचित माना। सुकेत के वार्ड 4 में बूथ संख्या 5 पर पुनर्मतदान नगरपालिका सुकेत के वार्ड संख्या 04 के बूथ संख्या 05 पर भी पुनर्मतदान कराया जाएगा। यहां भी मतगणना के दौरान EVM में तकनीकी खराबी की स्थिति सामने आई थी। चारों नगरीय निकायों में पुनर्मतदान के बाद ही संबंधित वार्डों के अंतिम परिणाम घोषित किए जा सकेंगे। 16 सितंबर को सुबह 7 से शाम 6 बजे तक वोटिंग राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देशों के अनुसार इन सभी मतदान केंद्रों पर 16 सितंबर 2026 को सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक पुनर्मतदान कराया जाएगा। मतदान पूरा होने के बाद EVM को निर्धारित सुरक्षा प्रक्रिया के तहत सील कर स्ट्रॉन्ग रूम में सुरक्षित रखा जाएगा। पुनर्मतदान में पड़े मतों की गणना 17 सितंबर 2026 को सुबह 8 बजे से निर्धारित मतगणना स्थल पर की जाएगी। मतगणना पूरी होने के बाद संबंधित वार्डों का अंतिम परिणाम घोषित किया जाएगा। उम्मीदवारों और मतदाताओं को दी जाएगी अलग से सूचना आयोग ने निर्देश दिए हैं कि पुनर्मतदान की तारीख, समय और मतदान केंद्र से संबंधित जानकारी सभी चुनाव लड़ रहे प्रत्याशियों और उनके निर्वाचन अभिकर्ताओं को लिखित रूप से उपलब्ध कराई जाए। इसके अलावा मतदाताओं को भी व्यापक प्रचार-प्रसार के माध्यम से पुनर्मतदान की सूचना दी जाएगी। संबंधित नगरपालिका कार्यालय, मतदान केंद्र और निर्वाचन क्षेत्र के प्रमुख सार्वजनिक स्थानों पर भी सूचना प्रदर्शित करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि कोई भी अधिकृत मतदाता जानकारी के अभाव में मतदान से वंचित न रहे।केवल संबंधित बूथ की मतदाता सूची में दर्ज मतदाता डाल सकेंगे वोट राज्य निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि पुनर्मतदान में केवल वही मतदाता वोट डाल सकेंगे, जिनका नाम संबंधित मतदान केंद्र की आधिकारिक मतदाता सूची में दर्ज है। किसी अन्य बूथ के मतदाता को वहां मतदान करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। मूल मतदान के दौरान मतदाताओं की बाईं हाथ की मध्यमा अंगुली पर लगाई गई अमिट स्याही को लेकर भी आयोग ने विशेष निर्देश जारी किए हैं। पुराना निशान आवश्यक प्रक्रिया के अनुसार हटाने के बाद पुनर्मतदान के समय दोबारा स्याही लगाई जाएगी। स्याही का निशान नाखून के शुरुआती हिस्से से अंगुली के प्रथम भाग तक दिखाई देने की व्यवस्था की जाएगी।  पर नए मतपत्र होंगे तैयार आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि आवश्यकता होने पर EVM में इस्तेमाल के लिए मतपत्र और निविदत्त मतपत्र नए सिरे से तैयार किए जाएंगे। पुनर्मतदान में इस्तेमाल होने वाली सभी चुनाव सामग्री की जांच और सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश संबंधित निर्वाचन अधिकारियों को दिए गए हैं। मूल मतदान में इस्तेमाल की गई EVM को पुनर्मतदान के बाद भी सील कर सुरक्षित अभिरक्षा में रखा जाएगा, ताकि जरूरत पड़ने पर रिकॉर्ड उपलब्ध रहे। चार निकायों के राजनीतिक समीकरण पर भी असर जयपुर, जोधपुर, कोटा और सुकेत में कुछ वार्डों के परिणाम लंबित रहने के कारण इन निकायों की अंतिम राजनीतिक तस्वीर भी पूरी तरह साफ नहीं हो पाई है। इन बूथों पर होने वाला पुनर्मतदान कुछ वार्डों के नतीजे बदल सकता है और उसका असर संबंधित निकाय के बोर्ड गठन और अध्यक्ष या महापौर पद के चुनावी गणित पर भी पड़ सकता है। इसी वजह से इन चार निकायों में अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष पदों के चुनाव भी आगामी आदेश तक स्थगित किए जा चुके हैं। अब 17 सितंबर की मतगणना के बाद संबंधित वार्डों के अंतिम नतीजे सामने आने पर आगे की चुनावी प्रक्रिया का रास्ता साफ होगा।

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अजमेर

अजमेर न्यूज़: 1100 वर्ष पूर्व स्थापित मंदिर की बड़ी है मान्यता, दूर दराज से पहुंचते हैं हजारों श्रद्धालु

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अजमेर न्यूज़: 1968 से कस्बे की धार्मिक संस्था श्री ब्रह्म पुष्कर सेवा संघ कर रही है इस अनूठी परंपरा का निर्वहन

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अजमेर न्यूज़: 10 टीमें 8 - 8 वार्डो में जाकर घूम रही गायों का करेंगीं प्राथमिक उपचार

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राष्ट्रीय - अंतर्राष्ट्रीय

राष्ट्रीय न्यूज़: UPI पर ₹2,000 तक कोई चार्ज नहीं, लेकिन इससे ऊपर अभी फीस लागू नहीं, सरकार ने साफ किया नया नियम

राष्ट्रीय न्यूज़: नई दिल्ली। यूपीआई से भुगतान करने वाले करोड़ों लोगों के लिए केंद्र सरकार ने डिजिटल पेमेंट पर शुल्क को लेकर स्थिति स्पष्ट कर दी है। वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग ने 14 सितंबर 2026 को अधिसूचना जारी कर कहा है कि ₹2,000 तक के UPI ट्रांजैक्शन पर बैंक या पेमेंट सिस्टम प्रोवाइडर भुगतान करने वाले या भुगतान प्राप्त करने वाले व्यक्ति से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कोई शुल्क नहीं ले सकेंगे। यह व्यवस्था Payment and Settlement Systems Act, 2007 की धारा 10A के तहत अधिसूचित की गई है। नई अधिसूचना ऐसे समय आई है जब अगस्त में संसद द्वारा Taxation and Other Laws (Amendment) Act, 2026 पारित किए जाने के बाद यह चर्चा तेज हो गई थी कि क्या सरकार UPI पर शुल्क लगाने की तैयारी कर रही है। कानून में किए गए बदलाव ने सरकार को यह तय करने का अधिकार दिया कि किन इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट माध्यमों को अनिवार्य रूप से शुल्क-मुक्त रखा जाएगा। अब सरकार ने ₹2,000 तक के UPI लेनदेन को स्पष्ट रूप से इस सुरक्षा के दायरे में शामिल कर दिया है। ₹2,000 से ज्यादा के UPI पेमेंट पर क्या अब चार्ज लगेगा? इस पूरे बदलाव में आम उपभोक्ता के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ₹2,000 से अधिक का UPI भुगतान करते ही अपने आप कोई शुल्क लागू नहीं हो गया है। 14 सितंबर की अधिसूचना सिर्फ इतनी बात कानूनी रूप से सुनिश्चित करती है कि ₹2,000 तक के UPI लेनदेन पर किसी तरह की फीस नहीं लगाई जा सकती। ₹2,000 से अधिक के भुगतान के लिए अधिसूचना में कोई नया चार्ज या दर घोषित नहीं की गई है। सरकार इससे पहले 8 अगस्त को भी स्पष्ट कर चुकी है कि UPI का इस्तेमाल करने वाले सामान्य उपभोक्ताओं से ट्रांजैक्शन फीस लेने का प्रस्ताव नहीं है और सभी Person-to-Person यानी P2P भुगतान मुफ्त बने रहेंगे। भविष्य में यदि Merchant Discount Rate यानी MDR लागू किया भी जाता है, तो वह केवल कुछ चुनिंदा और निर्धारित सीमा से ऊपर के मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर हो सकता है। इसका अंतिम ढांचा अभी तय नहीं हुआ है। इसका सरल अर्थ यह है कि यदि कोई व्यक्ति अपने दोस्त, रिश्तेदार या किसी अन्य व्यक्ति को UPI से ₹5,000, ₹10,000 या उससे अधिक भेजता है, तो सरकार की घोषित नीति के अनुसार P2P ट्रांजैक्शन मुफ्त बने रहने हैं। चर्चा मुख्य रूप से बड़े merchant payments यानी दुकानदार या व्यवसाय को किए जाने वाले भुगतान पर संभावित MDR की है, न कि हर ₹2,000 से अधिक UPI ट्रांजैक्शन पर ग्राहक से शुल्क वसूलने  ग्राहक से नहीं, बड़े व्यापारियों पर हो सकता है MDR सरकार का संकेत है कि भविष्य में UPI नेटवर्क को आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाने के लिए सीमित श्रेणी के बड़े मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर नाममात्र MDR लगाया जा सकता है। MDR वह शुल्क होता है जो आमतौर पर व्यापारी द्वारा डिजिटल भुगतान स्वीकार करने के बदले भुगतान व्यवस्था से जुड़े संस्थानों को दिया जाता है। वित्त मंत्रालय ने पहले ही स्पष्ट किया है कि यदि ऐसा MDR लाया जाता है तो यह सभी UPI लेनदेन पर एक समान नहीं होगा। केवल एक निश्चित सीमा से ऊपर और कुछ खास मर्चेंट श्रेणियों पर इसे लागू करने पर विचार किया जा सकता है। इसकी दर और किन व्यापारियों पर इसे लागू किया जाएगा, इस संबंध में अभी अंतिम फैसला घोषित नहीं हुआ है। इसलिए यदि भविष्य में बड़े मर्चेंट UPI भुगतान पर MDR लागू होता भी है, तो इसका अर्थ यह जरूरी नहीं कि ग्राहक के खाते से अतिरिक्त पैसा कटे। MDR की प्रकृति सामान्यतः व्यापारी और भुगतान प्रणाली के बीच शुल्क की होती है। हालांकि अंतिम व्यवस्था सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि उसका व्यावहारिक असर व्यापारियों और ग्राहकों पर किस तरह पड़ेगा। RuPay डेबिट कार्ड को लेकर अधिसूचना में महत्वपूर्ण अंतर 14 सितंबर की सरकारी अधिसूचना में एक महत्वपूर्ण तकनीकी बात भी है। इसमें दो इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट मोड सूचीबद्ध हैं—पहला RuPay-powered Debit Card और दूसरा UPI transactions up to ₹2,000। अधिसूचना के मूल शब्दों में ₹2,000 की सीमा केवल UPI के साथ लिखी गई है; RuPay डेबिट कार्ड के लिए ऐसी सीमा अलग से दर्ज नहीं है। इसलिए अधिसूचना के शाब्दिक पाठ के मुताबिक RuPay डेबिट कार्ड को भी नो-चार्ज श्रेणी में रखा गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि इन अधिसूचित भुगतान माध्यमों के जरिए भुगतान करने वाले या भुगतान प्राप्त करने वाले व्यक्ति से बैंक अथवा सिस्टम प्रोवाइडर कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष शुल्क नहीं वसूल सकता। आखिर सरकार ने कानून क्यों बदला? भारत में UPI का इस्तेमाल पिछले कुछ वर्षों में बेहद तेजी से बढ़ा है। अकेले जुलाई 2026 में UPI के जरिए करीब 2,366 करोड़ ट्रांजैक्शन हुए, जिनकी कुल कीमत लगभग ₹29.9 लाख करोड़ रही। सरकार का कहना है कि इतने बड़े डिजिटल भुगतान नेटवर्क को लगातार साइबर सुरक्षा, फ्रॉड प्रिवेंशन और तकनीकी इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश की जरूरत पड़ती है। इसी वजह से कानून में किया गया बदलाव सरकार को भविष्य में ऐसा मॉडल तैयार करने की गुंजाइश देता है जिससे छोटे और रोजमर्रा के डिजिटल भुगतान मुफ्त रहें, लेकिन बड़े व्यावसायिक लेनदेन के जरिए पेमेंट इकोसिस्टम को कुछ आय भी मिल सके।सरकार का कहना है कि किसी भी संभावित MDR का मकसद आम UPI यूजर पर शुल्क लगाना नहीं, बल्कि डिजिटल भुगतान नेटवर्क की दीर्घकालीन वित्तीय और तकनीकी मजबूती सुनिश्चित करना है। आम UPI यूजर पर अभी क्या असर पड़ेगा? फिलहाल सामान्य UPI उपयोगकर्ता के लिए रोजमर्रा के भुगतान में कोई बदलाव नहीं है। ₹50 की चाय, ₹500 की खरीदारी या ₹2,000 तक का कोई भी UPI भुगतान बिना शुल्क के जारी रहेगा। व्यक्ति से व्यक्ति UPI ट्रांसफर भी सरकार की घोषित नीति के मुताबिक मुफ्त रहेंगे। ₹2,000 से अधिक के UPI मर्चेंट भुगतान पर भविष्य में कोई MDR लागू होगा या नहीं, उसकी दर क्या होगी और किन व्यापारियों पर लागू होगा—यह अलग निर्णय से तय होगा। इसलिए अभी यह कहना गलत होगा कि ₹2,001 का UPI पेमेंट करते ही ग्राहक को चार्ज देना पड़ेगा। नए नियम का वास्तविक संदेश यह है कि सरकार ने कम मूल्य वाले UPI भुगतान को अनिवार्य रूप से मुफ्त रखने की कानूनी गारंटी दे दी है, जबकि बड़े मर्चेंट ट्रांजैक्शन के लिए भविष्य की फीस व्यवस्था का विकल्प खुला रखा है। एक नजर में नया नियम ₹2,000 तक UPI: बैंक या सिस्टम प्रोवाइडर कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष चार्ज नहीं लगा सकते। ₹2,000 से ज्यादा UPI: अभी अपने आप कोई नया शुल्क लागू नहीं हुआ है। P2P UPI: सरकार ने इसे मुफ्त बनाए रखने की बात कही है। बड़े मर्चेंट पेमेंट: भविष्य में सीमित MDR संभव है, लेकिन अभी अंतिम दर या नियम घोषित नहीं। RuPay डेबिट कार्ड: 14 सितंबर की अधिसूचना में इसे भी नो-चार्ज इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट मोड के रूप में अधिसूचित किया गया है।

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राष्ट्रीय न्यूज़: दिशा सालियान केस में 6 साल बाद CBI की FIR, गैंगरेप-मर्डर समेत गंभीर आरोपों की जांच, कई बड़े नामों की भूमिका भी जांच के दायरे में

राष्ट्रीय न्यूज़: मुंबई। दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर दिशा सालियान की मौत के मामले में करीब छह साल बाद बड़ा कानूनी घटनाक्रम सामने आया है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के बाद FIR दर्ज कर मामले की नए सिरे से जांच शुरू कर दी है। एजेंसी ने इसके लिए एक विशेष जांच टीम भी बनाई है। CBI की FIR में हत्या, गैंगरेप और सबूत नष्ट करने जैसे गंभीर आरोपों से संबंधित धाराओं के तहत जांच की जा रही है। हालांकि अभी किसी व्यक्ति को औपचारिक रूप से आरोपी नहीं बनाया गया है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने 2 सितंबर को दिशा के पिता सतीश सालियान की याचिका पर सुनवाई करते हुए CBI को वरिष्ठ और अनुभवी अधिकारी से मामले के सभी पहलुओं की जांच कराने का निर्देश दिया था। अदालत ने यह भी साफ किया कि जांच में पर्याप्त सामग्री सामने आए बिना किसी व्यक्ति को आरोपी नहीं माना जाए। यदि जांच में कोई संज्ञेय अपराध सामने आता है तो CBI को सक्षम अदालत में उचित रिपोर्ट दाखिल करनी होगी और यदि अपराध साबित करने लायक सामग्री नहीं मिलती है तो क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की जा सकती है, जिस पर दिशा के पिता को प्रोटेस्ट पिटीशन दायर करने का अधिकार रहेगा। 8 जून 2020 को हुई थी दिशा की मौत दिशा सालियान की 8 जून 2020 को मुंबई के मलाड इलाके की एक बहुमंजिला इमारत से गिरने के बाद मौत हुई थी। उस समय उनकी उम्र 28 वर्ष थी। मुंबई पुलिस ने मामले में Accidental Death Report यानी ADR दर्ज कर जांच शुरू की थी। दिशा की मौत के सिर्फ छह दिन बाद, 14 जून 2020 को अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत बांद्रा स्थित अपने फ्लैट में मृत मिले थे। दोनों घटनाओं के बीच कम समय होने के कारण शुरुआत से ही कई तरह की अटकलें सामने आती रही हैं, हालांकि दोनों मौतों के बीच किसी आपराधिक संबंध की पुष्टि अब तक नहीं हुई है।मुंबई पुलिस का शुरुआती निष्कर्ष था कि दिशा की मौत में किसी आपराधिक साजिश या बाहरी व्यक्ति की भूमिका का प्रमाण नहीं मिला। पुलिस ने बाद में मामले की जांच बंद कर दी थी। वर्ष 2023 में महाराष्ट्र सरकार ने मामले की दोबारा जांच के लिए SIT गठित की। जुलाई 2025 में मुंबई पुलिस ने हाईकोर्ट में कहा था कि SIT की जांच के निष्कर्ष भी शुरुआती जांच से मेल खाते हैं और उपलब्ध सामग्री से हत्या या यौन हमले की पुष्टि नहीं होती। हाईकोर्ट ने पुलिस जांच पर उठाए गंभीर सवाल मामले की सुनवाई के दौरान बॉम्बे हाईकोर्ट ने इस बात पर सवाल उठाया था कि दिशा के पिता द्वारा गंभीर संदेह और आपराधिक आरोप लगाए जाने के बावजूद नियमित FIR दर्ज क्यों नहीं की गई। अदालत ने यह भी पूछा था कि केवल CrPC की धारा 174 के तहत ADR की जांच को संज्ञेय अपराध की नियमित जांच का विकल्प कैसे माना जा सकता है।हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि उसने यह निष्कर्ष नहीं निकाला है कि दिशा के साथ बलात्कार या हत्या हुई थी। कोर्ट का आदेश इन आरोपों की निष्पक्ष आपराधिक जांच कराने को लेकर था। यही वजह है कि CBI की जांच का परिणाम ही यह तय करेगा कि पिता द्वारा लगाए गए आरोपों में कितना तथ्य है। पिता बोले- छह साल से न्याय का इंतजार कर रहा था दिशा के पिता सतीश सालियान लंबे समय से यह आरोप लगा रहे हैं कि उनकी बेटी की मौत आत्महत्या नहीं थी और उसके पीछे आपराधिक साजिश थी। उन्होंने हाईकोर्ट में दाखिल याचिका में गैंगरेप और हत्या की आशंका जताते हुए CBI जांच की मांग की थी।CBI द्वारा FIR दर्ज किए जाने के बाद उन्होंने कहा कि वे करीब छह साल से इस दिन का इंतजार कर रहे थे। उन्होंने कहा कि बेटी को खोने के कारण इसमें खुशी की कोई बात नहीं है, लेकिन अदालत के आदेश और जांच शुरू होने से उन्हें राहत मिली है। कई बड़े नामों की ‘भूमिका की जांच’ का जिक्र, लेकिन कोई औपचारिक आरोपी नहीं इस मामले में सबसे अधिक चर्चा FIR में आए विभिन्न राजनीतिक, फिल्म और पुलिस से जुड़े नामों को लेकर हो रही है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार दिशा के पिता की शिकायत और बयान में आदित्य ठाकरे, सूरज पंचोली, डीनो मोरिया, रिया चक्रवर्ती, रोहन रॉय, सचिन वाजे, परमबीर सिंह सहित कई लोगों की कथित भूमिका की जांच की मांग की गई है। कुछ अधिकारियों के नाम भी कथित कवर-अप संबंधी आरोपों के संदर्भ में सामने आए हैं। लेकिन यहां महत्वपूर्ण अंतर यह है कि CBI ने फिलहाल किसी को आरोपी के रूप में नामित नहीं किया है। FIR की सामग्री में किसी व्यक्ति की भूमिका की जांच का उल्लेख और उस व्यक्ति का आरोपी होना दो अलग-अलग कानूनी स्थितियां हैं। बॉम्बे हाईकोर्ट ने भी अपने आदेश में विशेष रूप से कहा था कि जांच अधिकारी को पर्याप्त सामग्री मिलने के बाद ही किसी व्यक्ति को आरोपी माना जाए। दिशा के पिता के वकील निलेश ओझा ने दावा किया है कि कई प्रमुख लोगों की भूमिका की जांच होगी और जांच में जिनके खिलाफ सबूत मिलेगा, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि यदि CBI अंततः क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करती है तो परिवार उसके खिलाफ अदालत में प्रोटेस्ट पिटीशन दाखिल कर सकता है। यही अधिकार हाईकोर्ट के आदेश में भी सुरक्षित रखा गया है। पोस्टमॉर्टम में ‘हेड इंजरी और मल्टीपल इंजरी’ का उल्लेख दिशा की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट भी इस नई जांच में महत्वपूर्ण दस्तावेज होगी। उपलब्ध पोस्टमॉर्टम रिकॉर्ड में मौत का कारण सिर की चोट और कई अन्य चोटें बताया गया था। मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार ये चोटें ऊंचाई से गिरने से संबंधित थीं। पुराने रिकॉर्ड में यौन हमले की स्पष्ट पुष्टि नहीं की गई थी।मुंबई पुलिस ने वर्ष 2025 में हाईकोर्ट में दाखिल हलफनामे में भी कहा था कि पोस्टमॉर्टम, फॉरेंसिक रिकॉर्ड, CCTV, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और गवाहों के बयानों में गैंगरेप या हत्या के आरोपों की पुष्टि करने वाला साक्ष्य नहीं मिला।अब CBI इन्हीं दस्तावेजों को नए सिरे से देखेगी और यह भी जांच सकती है कि पोस्टमॉर्टम, घटनास्थल की जांच, डिजिटल सबूतों और पुलिस रिकॉर्ड के संरक्षण एवं विश्लेषण में कोई कमी या अनियमितता तो नहीं हुई थी। पहले परिवार ने नहीं जताया था संदेह, बाद में बदला रुख मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि शुरुआती दौर में दिशा के माता-पिता ने पुलिस के सामने किसी व्यक्ति पर संदेह नहीं जताया था। पुराने रिकॉर्ड में सतीश सालियान ने जांच से संतुष्टि व्यक्त की थी। बाद के वर्षों में उनका रुख बदला और वर्ष 2025 में उन्होंने हाईकोर्ट का रुख कर कथित कवर-अप, यौन हिंसा और हत्या के आरोप लगाए।इसी विरोधाभास को मुंबई पुलिस और आदित्य ठाकरे की ओर से कोर्ट में उठाया गया था। आदित्य ठाकरे की तरफ से आरोपों को राजनीतिक रूप से प्रेरित और निराधार बताया गया है। अब CBI को पुराने और नए दोनों बयानों के बीच अंतर सहित पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र जांच करनी होगी। छह साल बाद FIR से जांच व्यवस्था पर भी सवाल मामले में छह साल बाद पहली नियमित FIR दर्ज होना अपने आप में महत्वपूर्ण है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने भी पुलिस की जांच प्रक्रिया और केवल ADR के आधार पर लंबे समय तक मामला चलाए जाने पर सवाल उठाए थे। अदालत का मत था कि गंभीर आरोप सामने आने पर विधिवत आपराधिक जांच जरूरी थी।अब CBI के सामने सबसे बड़ी चुनौती छह साल पुराने साक्ष्यों की विश्वसनीयता और उपलब्धता होगी। डिजिटल रिकॉर्ड, घटनास्थल से जुड़े दस्तावेज, CCTV, मोबाइल डेटा, मेडिकल और फॉरेंसिक रिकॉर्ड तथा उस समय मौजूद लोगों के बयान एक बार फिर जांच के केंद्र में होंगे।CBI की FIR को किसी आरोप की अंतिम पुष्टि के रूप में नहीं देखा जा सकता। जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि दिशा सालियान की मौत आत्महत्या थी, दुर्घटना थी या इसमें कोई आपराधिक साजिश शामिल थी। लेकिन हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद शुरू हुई यह नई जांच छह साल पुराने मामले को एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा के केंद्र में ले आई है।

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क़लमकार

क़लमकार न्यूज़: ये जीवन और कुछ नहीं  बस खेल है छुपन – छुपाई का

क़लमकार: खोजते खोजते अचानक से खुद को पा लेना 

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क़लमकार न्यूज़: तानाशाह एक डरपोक आदमी

क़लमकार: तानाशाह को डर पैदा होता है कि गधे भी मेरे खिलाफ़ साजिश कर रहे हैं

Read more 4th Mar 2022

#Being Positive

#Being Positive: Horizon Hind Live| #Ajmer| वार्ड 58 वार्ड परेड - चंद्रशेखर शर्मा ( मोनी) भाजपा

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#Being Positive: Horizon Hind Live| #Ajmerदावेदार मैदान में  (बृजेश माथुर वार्ड 76)

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Ajmer Headlines

#मधुकर कहिन

गुप्त ध्वनि किरणों के साथ ओशो पर किसने हमला किया?... 

गुप्त ध्वनि किरणों के साथ ओशो पर किसने हमला किया?...  * ओशो के निजी दंत चिकित्सक देवगेट ओशो की मृत्यु से 4 दिन पहले हुई घटनाओं के बारे में बात करते हैं (शरीर को छोड़कर)... * 15 aजनवरी, 1990 को, मेरे जन्मदिन पर, मुझे शुन्यो से एक संदेश मिला: ओशो चाहते थे कि मैं उनके पेट का एक्स-रे ले। हम दंaत कक्ष में मिले। ओशो का शरीर पतला और बेकार लग रहा था, फिर भी मैंने उसे शक्तिशाली रूप से उपस्थित महसूस किया। मुझे शुन्यो से पता था कि वह हर दिन बीस घंटे से अधिक सो रहा था, हर शाम बुद्ध हॉल में कुछ क़ीमती मिनटों के लिए अपनी शारीरिक ऊर्जा को बचा रहा था। ओशो नेa मुझे बताया कि उसके हमलावरों की आवाज़ से उसका शरीर बहुत कमजोर हो गया था। उन्होंने कहा कि उनमें से शायद तीन, दो पुरुष और एक महिला, ध्वनि तरंगों पर ध्यानaa केंद्रित करने और अपने शरीर को लक्षित करने के लिए एक विशेष गठन में बैठे थे। यहां भारत में प्राचीन योगिक प्रथाएं हैं जहां लोग कुछ ध्वनियों, कुछ मंत्रों को जानते हैं, जो लोगों को नुक़सान पहुंचाने के लिए ध्वनि को केंद्रित कर सकते हैं। लेकिन मुझ पर हमला करaaने वाले ये लोग भारतीय नहीं हैं। वे वही लोग हैं जिन्होंने अमेरिका में पहले मुझे मारने की कोशिश की थी। वे तब सफल नहीं हो सके, और अब वे जो शुरू किया उसे पूरा कर ने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने मुझे बोलने से रोकने के लिए ज़हर की कोशिश की लेकिन मैं जारी रखने में कामयाब रहा। अब, पांच साल बाद वे वापस आ गए हैं। उन्होंने पहले बुद्ध हॉल में अपनी ध्वनि किरणों का उपयोग मेरे दिमाग़ पर हमला करने के लिए किया लेकिन मैं अपने दिमाग़ में नहीं हूं। मैं एक नो-मन हूं और उनकी आवाज़ का बहुत कम प्रभाव था। इसलिए उन्होंने अपनी रणनीति बदल दी, अब वे मेरे शरीर पर हमला कर रहे हैं। मेरे गरीब शरीर को उनकी किरणों से कोई सुरक्षा नहीं है। हर दिन यह कमजोर होता जाता है। वे मुझे मार नहीं सकते लेकिन वे मेरे शरीर को नुक़सान पहुंचा सकते हैं। अभी मेरे जिगर के क्षेत्र में बहुत दर्द हो रहा है। क्या आप इसे एक्स-रे कर सकते हैं? दुख की बात है, मैंने समझाया कि मेरी दंत एक्स-रे मशीन शायद अपर्याप्त थी क्योंकि यह केवल दांतों और जबड़े की छोटी फिल्में ले सकती थी, लेकिन हम कोशिश कर सकते थे। अमृतो को हमारे पास सबसे बड़ी एक्स-रे फ़िल्म मिली, जबकि मैंने इसकी बीम को चौड़ा करने के लिए डेंटल एक्स-रे मशीन के साथ जिग्गल किया। मैंने वह करने की कोशिश की जो ओशो पूछ रहा था। मैंने उसके जिगर के क्षेत्र की एक तस्वीर ली और फिर दंत विकास में बड़ी फ़िल्म विकसित करने में कामयाब रहा टैंक जिसे छोटी इंट्रा-ओरल डेंटल फ़िल्मों के लिए डिज़ाइन किया गया था, लेकिन परिणामी छवि धुंधली और अस्पष्ट थी। यह आख़िरी बार था जब मैंने ओशो को उसके भौतिक शरीर में देखा था। 19 जनवरी को शाम 4:30 बजे थे: मैं अपनी प्रेमिका के साथ अपने कमरे में था जब दरवाजे पर एक ज़रूरी दस्तक हुई। मनीषा, पीला और तनावग्रस्त दिख रही थी, ने पूछा कि क्या वह मेरे कमरे के फ़ोन का उपयोग कर सकती है। मुझे पता था कि वह केवल पूछेगी कि क्या कुछ असामान्य हो रहा है। अस्थायी सचिव के रूप में कार्य करते हुए वह इनर सर्कल के सदस्यों को फ़ोन कर रही थी और उन्हें कृष्णा हाउस में एक असाधारण बैठक में तुरंत आने के लिए कह रही थी। ओशो ने पंद्रह महीने पहले इक्कीस लोगों की एक कम्यून प्रबंधन टीम की स्थापना की थी, इसे इनर सर्कल का नाम दिया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका काम कम्यून के दिन-प्रतिदिन चलने का प्रबंधन करना था। मैं मूल चयन में नहीं था, लेकिन कुछ महीने बाद मुझे शामिल होने के लिए कहा गया था। फ़ोन करने के बाद, मनीषा ने कहा, “गीट, तुमने सुना कि मैं दूसरों को क्या बता रहा था। बैठक कृष्णा हाउस की छत पर ब्लू रूम में है। क्या आप वहां तुरंत जा सकते हैं?” इससे पहले कि मैं कोई सवाल पूछ पाता, वह जल्दी से गलियारे में चली गई, स्पष्ट रूप से एक और महत्वपूर्ण कार्य में शामिल थी। मैंने दोपहर के अधिकांश समय अजीब तरह से विपुल महसूस किया था। बाहरी मामलों की उथल-पुथल के बावजूद मैं कई दिनों से उत्साहित महसूस कर रहा था। मेरे दिल में ख़ुशी का एक अकथनीय नृत्य था। अंदर से मुझे उत्साह, आनंद महसूस हुआ। ब्लू रूम में पहुंचने पर, मैंने देखा कि अधिकांश इनर सर्कल पहले से ही वहां इकट्ठा हो चुके थे। माहौल तनावपूर्ण और तनावपूर्ण था। मेरा अपना उत्साह जगह से बाहर लग रहा था। मैं बैठ गया और इंतज़ार किया। कुछ मिनटों के बाद जयेश ने अमृतो के साथ प्रवेश किया। यह देखने के लिए संक्षेप में चारों ओर देखते हुए कि हम सभी मौजूद हैं, उन्होंने एक दृढ़, हालांकि शांत आवाज़ में कहा, “मुझे लगता है कि इसे लपेटने का कोई तरीक़ा नहीं है। मैं आपको सीधे बताऊंगा। ओशो ने कुछ समय पहले लगभग 4:45 बजे अपना शरीर छोड़ दिया था दोपहर।” स्तब्ध, मैंने अपनी घड़ी को देखा। शाम के 5:15 बजे थे। उपस्थित दो या तीन लोग रोने लगे। जयेश ने जल्दी से बीच में टोका, “देखो, मुझे तुम्हारी सारी मदद की ज़रूरत है। कृपया अभी तक अलग न हों। मुझे आप सभी की ज़रूरत है कि ओशो के भेजने को उतना ही सुंदर बनाने में मदद करें जितना वह हकदार है। यह आख़िरी चीज है जो हम उसके लिए कर सकते हैं भौतिक शरीर, चलो इसे अद्भुत बनाते हैं। उसने मुझे ठीक से बताया कि वह कैसे चाहता है कि ऐसा हो। उसने मुझे हर चीज के लिए विस्तृत निर्देश दिए, लेकिन मुझे यहां हर किसी की मदद की ज़रूरत है।” जयेश के शब्दों को सुनकर मेरा पहले का उत्साह सदमे में बदल गया था, लेकिन मैंने ओशो को अपने लोगों के साथ अपने अंतिम उत्सव का आनंद लेने में सक्षम बनाने के लिए हमारी मदद के लिए जयेश की अपील को स्पष्ट रूप से सुना। जैसे ही मैंने ब्लू रूम छोड़ा, जयेश ने मुझे बताया कि ओशो ने अनुरोध किया था कि मैं उनके शरीर को जलते हुए घाटों तक ले जाने के लिए एक वाहक बनूं। गतिविधि और भ्रमित भावनाओं के एक धुंध में मुझे याद है कि ओशो के इस अंतिम उपहार के लिए बेहद आभारी महसूस कर रहा था। - स्वामी देवगीत पुस्तक : ओशो - द फर्स्ट बुद्ध इन द डेंटल चेयर अध्याय: 17 अध्याय का नाम: ओशो का अंतिम दंत नाटक: अधिनियम V अंतिम सुनहरी झलक

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