राजस्थान न्यूज़: उदयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा रविवार सुबह उदयपुर की प्रसिद्ध फतेहसागर झील पर मॉर्निंग वॉक के लिए पहुंचे। झील किनारे चहल-कदमी के दौरान मुख्यमंत्री ने आमजन से मुलाकात की और उनसे बातचीत कर हाल-चाल जाने।मुख्यमंत्री को अचानक अपने बीच पाकर फतेहसागर पर सुबह की सैर के लिए पहुंचे लोगों में खासा उत्साह दिखाई दिया। मुख्यमंत्री ने भी सहज अंदाज में लोगों से मुलाकात की और उनकी बात सुनी। बच्चों को दी टॉफियां, लोगों से मिलाया हाथ मॉर्निंग वॉक के दौरान मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने बच्चों से बातचीत की और उन्हें टॉफियां वितरित कीं। वहीं बड़े-बुजुर्गों और अन्य लोगों से हाथ मिलाकर उनका अभिवादन किया।इस दौरान कई लोगों ने मुख्यमंत्री के साथ बातचीत की। मुख्यमंत्री ने भी आमजन से उनके हाल-चाल पूछे और स्थानीय लोगों से आत्मीयता के साथ संवाद किया। झील किनारे बैठकर पी चाय फतेहसागर झील की सैर के दौरान मुख्यमंत्री कुछ समय के लिए झील किनारे भी बैठे। यहां उन्होंने चाय की चुस्कियों के साथ आमजन से चर्चा की। मुख्यमंत्री के इस सहज अंदाज और सादगी को देखकर वहां मौजूद लोग उत्साहित नजर आए। लोगों ने मुख्यमंत्री के साथ मुलाकात और बातचीत को लेकर खुशी जाहिर की। ये जनप्रतिनिधि भी रहे साथ मुख्यमंत्री के साथ इस दौरान कैबिनेट मंत्री बाबूलाल खराड़ी, सांसद डॉ. मन्ना लाल रावत, विधायक फूलसिंह मीणा और उदयलाल डांगी सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य लोग भी मौजूद रहे। फतेहसागर झील पर मुख्यमंत्री की मॉर्निंग वॉक के दौरान राजनीतिक कार्यक्रम से अलग एक सहज और अनौपचारिक माहौल देखने को मिला, जहां मुख्यमंत्री सीधे आम लोगों के बीच पहुंचे और उनसे संवाद किया।
Read more 16th Aug 2026
राजस्थान न्यूज़: जयपुर। भारतीय जनता पार्टी, राजस्थान ने संगठनात्मक विस्तार करते हुए विभिन्न प्रकोष्ठों के प्रदेश पदाधिकारियों की घोषणा की है। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ के निर्देशानुसार 15 अगस्त 2026 को जारी सूची में कुल 8 प्रकोष्ठों के संयोजक और सह-संयोजक नियुक्त किए गए हैं। जारी सूची में विधि, व्यावसायिक, आर्थिक, चिकित्सा, पूर्व सैनिक, खेल, विशेष संपर्क और प्रवासी प्रकोष्ठ शामिल हैं। प्रत्येक प्रकोष्ठ में एक संयोजक और चार सह-संयोजक नियुक्त किए गए हैं। इस प्रकार कुल 40 पदाधिकारियों को नई जिम्मेदारी दी गई है। विधि प्रकोष्ठ में सौरभ सारस्वत बने संयोजक भाजपा के विधि प्रकोष्ठ का प्रदेश संयोजक जयपुर के सौरभ सारस्वत को बनाया गया है। उनके साथ शिवलाल मीणा, भवानी सिंह राजावत, महेंद्र नागदा और सुमन कंवर को सह-संयोजक की जिम्मेदारी दी गई है। सुनील झंवर को व्यावसायिक प्रकोष्ठ की कमान व्यावसायिक प्रकोष्ठ का संयोजक बीकानेर के सुनील झंवर को नियुक्त किया गया है। रमेश भंसाली, सायर सिंह, शरद बंसल और नीता बुदरा को सह-संयोजक बनाया गया है।आर्थिक प्रकोष्ठ के संयोजक बने उत्तम प्रकाश अग्रवाल भाजपा ने आर्थिक प्रकोष्ठ की जिम्मेदारी सिरोही के उत्तम प्रकाश अग्रवाल को दी है। डॉ. राजा भोज शर्मा, अनिल अग्रवाल, राजेश देवड़ा और श्रुति गुप्ता को सह-संयोजक नियुक्त किया गया है। चिकित्सा प्रकोष्ठ में भी नई टीम चिकित्सा प्रकोष्ठ की नई प्रदेश टीम भी घोषित की गई है। इसमें संयोजक के साथ डॉ. सिद्धार्थ अग्रवाल, डॉ. सचिन जैन, कमलेश राठौड़ और डॉ. अनिता राजपुरोहित को सह-संयोजक की जिम्मेदारी दी गई है। पूर्व सैनिक प्रकोष्ठ की नई कार्यकारिणी पूर्व सैनिक प्रकोष्ठ में जोधपुर के मेजर घनश्याम सिंह को संयोजक बनाया गया है। रिटायर्ड कर्नल देवानंद लोमरोड़, कमांडर बनवारी लाल चौधरी सहित अन्य पदाधिकारियों को सह-संयोजक के रूप में जिम्मेदारी दी गई है। खेल प्रकोष्ठ में सत्यप्रकाश यादव संयोजक खेल प्रकोष्ठ का प्रदेश संयोजक जयपुर के सत्यप्रकाश यादव को बनाया गया है। ममता अरोड़ा, यतिन्द्र सिंह, शिवांगी कानावत और अभयवीर सिंह चौधरी को सह-संयोजक की जिम्मेदारी सौंपी गई है। विशेष संपर्क प्रकोष्ठ की कमान मनोहर पालीवाल को भाजपा के विशेष संपर्क प्रकोष्ठ का संयोजक फलोदी के मनोहर पालीवाल को नियुक्त किया गया है। डॉ. अशोक चौधरी, तेज सिंह, पवन अग्रवाल और सिद्धार्थ गोपनका को सह-संयोजक बनाया गया है। प्रवासी प्रकोष्ठ में अनिल जोशी बने संयोजक प्रवासी प्रकोष्ठ की जिम्मेदारी बीकानेर के अनिल जोशी को दी गई है। बाबूसिंह राजगुरु (पारदिया), नरेश ओझा, प्रकाश चौधरी और भगवती बल्दा को सह-संयोजक नियुक्त किया गया है। भाजपा की ओर से जारी इस नई संगठनात्मक सूची को आगामी राजनीतिक और संगठनात्मक गतिविधियों से पहले महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पार्टी ने अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े अनुभवी और सक्रिय कार्यकर्ताओं को प्रकोष्ठों में जिम्मेदारी देकर संगठन की पहुंच बढ़ाने का प्रयास किया है।
Read more 16th Aug 2026
राजस्थान न्यूज़: जयपुर। तीज के लोकगीतों, जयकारों और शाही लवाजमे के बीच शनिवार शाम जयपुर में तीज माता की भव्य शाही सवारी निकाली गई। सिटी पैलेस की जनानी ड्योढ़ी में पूर्व राजपरिवार की महिला सदस्यों ने तीज माता की पूजा-अर्चना की। इसके बाद तीज माता की पालकी शाही लवाजमे के साथ त्रिपोलिया गेट पहुंची, जहां जयपुर के पूर्व राजपरिवार के सदस्य पद्मनाभ सिंह ने तीज माता की आरती की। आरती के बाद सवारी नगर भ्रमण के लिए रवाना हुई। त्रिपोलिया गेट से छोटी चौपड़ और गणगौरी बाजार तक जयपुर की ऐतिहासिक गलियां लोकगीतों, पारंपरिक वाद्ययंत्रों और तीज माता के जयकारों से गूंज उठीं। छोटी चौपड़ पर हुई महाआरती तीज माता की सवारी छोटी चौपड़ पहुंची तो यहां उपमुख्यमंत्री एवं पर्यटन मंत्री दिया कुमारी और जयपुर शहर सांसद मंजू शर्मा ने तीज माता की महाआरती की। इस दौरान जेल बैंड और आरएसी बैंड की प्रस्तुतियों ने माहौल को और भव्य बना दिया। जयपुर व्यापार महासंघ की ओर से तीज माता की सवारी पर पुष्पवर्षा की गई। 175 लोक कलाकारों ने दिखाई राजस्थान की संस्कृति शाही सवारी में प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से आए करीब 175 लोक कलाकारों ने प्रस्तुतियां दीं। कच्ची घोड़ी, कालबेलिया, चरी, घूमर, चंग-ढप, मांगणियार गायन, भपंग, रावणहत्था, कठपुतली और बहुरूपिया जैसी लोक विधाओं ने राजस्थान के अलग-अलग अंचलों की सांस्कृतिक पहचान को जीवंत कर दिया। घोड़ों और ऊंटों से सजे शाही लवाजमे ने सवारी की राजसी छटा को और आकर्षक बनाया। तलवारबाजी से बेटियों ने दिखाया शौर्य शौर्य सेवा संगठन की बालिकाओं ने तलवारबाजी का प्रदर्शन कर दर्शकों का ध्यान खींचा। पारंपरिक तीज उत्सव के बीच यह प्रस्तुति राजस्थान की वीर परंपरा और महिला शक्ति का प्रतीक बनी। गणगौरी बाजार से पौंड्रिक पार्क पहुंची सवारी छोटी चौपड़ के बाद शाही सवारी गणगौरी बाजार होते हुए तालकटोरा स्थित पौंड्रिक पार्क पहुंची। यहां कला मेले और लोक कलाकारों की प्रस्तुतियों ने उत्सव को आगे बढ़ाया। सवारी मार्ग पर महलों, अटारियों, झरोखों और हवेलियों से बड़ी संख्या में लोगों ने तीज माता की पालकी के दर्शन किए। देशी-विदेशी पर्यटकों के लिए भी विशेष व्यवस्थाएं की गई थीं। 13 जगहों पर एलईडी स्क्रीन से लाइव दर्शन इस बार तीज माता की शाही सवारी को परकोटे से बाहर भी व्यापक रूप से दिखाया गया। जयपुर में 13 प्रमुख स्थानों पर एलईडी स्क्रीन लगाकर लाइव प्रसारण किया गया। इनमें अजमेरी गेट, न्यू गेट, सरावगी मेंशन, मोती डूंगरी, त्रिमूर्ति सर्किल, रामबाग सर्किल, एसएमएस स्टेडियम, महाराजा कॉलेज, बिरला मंदिर, राजस्थान विश्वविद्यालय, राजस्थान कॉलेज, ओटीएस चौराहा और जवाहर सर्किल स्थित पत्रिका गेट शामिल रहे। अमेरिका तक पहुंचा जयपुर की तीज का रंग इस बार जयपुर की तीज का रंग केवल परकोटे तक सीमित नहीं रहा। राजस्थान एसोसिएशन ऑफ नॉर्थ अमेरिका (RANA) के डिजिटल माध्यम से उत्तर अमेरिका में बसे प्रवासी राजस्थानियों तक भी शाही सवारी का लाइव प्रसारण पहुंचा। पर्यटन विभाग के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी सवारी की लाइव स्ट्रीमिंग की गई। दिल्ली से आए सोशल मीडिया क्रिएटर्स ने भी तीज उत्सव की झलकियां अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर साझा कीं। ड्रोन से हुई पुष्पवर्षा शाही सवारी के दौरान ड्रोन से पुष्पवर्षा भी की गई। इससे सवारी की भव्यता और बढ़ गई। पूरे मार्ग पर पारंपरिक वेशभूषा, लोकगीत, वाद्ययंत्र और जयकारों के बीच जयपुर की सांस्कृतिक विरासत जीवंत नजर आई। पर्यटन विभाग के उपनिदेशक उपेंद्र सिंह शेखावत के अनुसार, तीज माता की शाही सवारी जयपुर की जीवंत सांस्कृतिक परंपरा है, जिसमें आस्था, लोककला, संगीत, शौर्य और राजसी विरासत एक साथ दिखाई देती है। इस बार डिजिटल माध्यम से इस परंपरा को देश-विदेश में बसे दर्शकों से जोड़ने का प्रयास किया गया।
Read more 16th Aug 2026
अजमेर न्यूज़: 1100 वर्ष पूर्व स्थापित मंदिर की बड़ी है मान्यता, दूर दराज से पहुंचते हैं हजारों श्रद्धालु
Read more 31st Aug 2022
अजमेर न्यूज़: 1968 से कस्बे की धार्मिक संस्था श्री ब्रह्म पुष्कर सेवा संघ कर रही है इस अनूठी परंपरा का निर्वहन
Read more 31st Aug 2022
अजमेर न्यूज़: 10 टीमें 8 - 8 वार्डो में जाकर घूम रही गायों का करेंगीं प्राथमिक उपचार
Read more 31st Aug 2022
राष्ट्रीय न्यूज़: नई दिल्ली। 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर शुक्रवार को लाल किले पर ऐतिहासिक आयोजन हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से 13वीं बार राष्ट्रीय ध्वज फहराया। इस अवसर पर पहली बार लाल किले की प्राचीर से ‘वंदे मातरम्’ का गायन किया गया।ध्वजारोहण के बाद राष्ट्रगान हुआ और 21 तोपों की सलामी दी गई। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को संबोधित करना शुरू किया। इससे पहले प्रधानमंत्री ने राजघाट पहुंचकर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की। ‘हर घर तिरंगा, हर मन तिरंगा’ लाल किले से अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज हर घर तिरंगा है, हर मन तिरंगा है। उन्होंने कहा कि देश उत्साह, उमंग और नए संकल्पों के साथ आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री ने स्वतंत्रता दिवस को राष्ट्रीय एकता, संकल्प और विकसित भारत की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर बताया। ज्ञानपथ पर बनी ‘वंदे मातरम्’ की आकृति स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान 2,500 एनसीसी कैडेट और माय भारत वॉलंटियर्स ने ज्ञानपथ पर ‘वंदे मातरम्’ की विशाल आकृति बनाई। इस दृश्य ने समारोह को खास बना दिया। सुरक्षा के कड़े इंतजाम लाल किले और आसपास के क्षेत्र में सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए। कार्यक्रम की सुरक्षा में करीब 15 से 20 हजार जवान तैनात किए गए हैं। निगरानी के लिए 1,000 से अधिक सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। समारोह में करीब 5,000 विशेष अतिथि शामिल हो रहे हैं। स्वतंत्रता दिवस समारोह में दिखा राष्ट्रभक्ति का उत्साह लाल किले पर आयोजित समारोह में सैन्य अनुशासन, राष्ट्रध्वज, वंदे मातरम् और देशभक्ति से जुड़े कार्यक्रमों ने माहौल को उत्साहपूर्ण बना दिया। देशभर में भी ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के तहत लोग स्वतंत्रता दिवस मना रहे हैं।
Read more 15th Aug 2026
राष्ट्रीय न्यूज़: नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की चुनावी रणनीति और संगठनात्मक ढांचे में इस बार भी राजस्थान के नेताओं की भूमिका अहम रहने वाली है। कांग्रेस ने यूपी में प्रभारी महासचिव के साथ जुड़े 6 पुराने AICC सचिवों को हटाकर नई टीम का गठन किया है। इनमें राजस्थान से पायलट समर्थक माने जाने वाले धीरज गुर्जर को सहप्रभारी-सचिव की जिम्मेदारी से हटाया गया है, जबकि उनकी जगह सादुलशहर के पूर्व विधायक जगदीश जांगिड़ को AICC सचिव बनाकर यूपी की जिम्मेदारी दी गई है। धीरज गुर्जर करीब सात साल से उत्तर प्रदेश संगठन में काम कर रहे थे। अब राजस्थान के ही एक नेता को हटाकर दूसरे नेता को यह भूमिका सौंपे जाने को कांग्रेस की नई संगठनात्मक रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। सात साल बाद बदली यूपी की टीम कांग्रेस ने यूपी प्रभारी महासचिव के साथ जुड़े छह पुराने AICC सचिवों में बदलाव किया है। धीरज गुर्जर भी लंबे समय से इसी टीम का हिस्सा थे। उनके हटाए जाने के पीछे लंबे कार्यकाल के साथ यूपी के बदलते राजनीतिक और सामाजिक समीकरणों को भी एक कारण माना जा रहा है। हालांकि पार्टी की ओर से व्यक्तिगत रूप से किसी नेता को हटाने का विस्तृत आधिकारिक कारण नहीं बताया गया है। जगदीश जांगिड़ को मिली यूपी की जिम्मेदारी सादुलशहर से पूर्व विधायक जगदीश चंद्र जांगिड़ को AICC सचिव बनाया गया है और उन्हें उत्तर प्रदेश के प्रभारी महासचिव के साथ अटैच किया गया है। जांगिड़ राजस्थान कांग्रेस के प्रमुख OBC चेहरों में गिने जाते हैं। वे दिल्ली के सेंट स्टीफंस कॉलेज से स्नातक हैं और पेशे से वकील भी रहे हैं। OBC चेहरे के रूप में प्रमोशन की चर्चा राजनीतिक हलकों में जगदीश जांगिड़ की नियुक्ति को OBC नेतृत्व को आगे बढ़ाने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। वे पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के समर्थक माने जाते हैं। यूपी की राजनीति में OBC मतदाताओं की बड़ी भूमिका को देखते हुए कांग्रेस की यह नियुक्ति सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश के रूप में भी देखी जा रही है। हालांकि यह राजनीतिक आकलन है; पार्टी ने नियुक्ति को किसी विशेष जातीय रणनीति से आधिकारिक रूप से नहीं जोड़ा है। प्रियंका गांधी से मिले राजस्थान के सीमावर्ती जिलों के नेता इधर दिल्ली में कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी से राजस्थान के सीमावर्ती क्षेत्रों के कई नेताओं ने भी मुलाकात की। इस मुलाकात में पूर्व कैबिनेट मंत्री सालेह मोहम्मद, बाड़मेर कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष गफूर अहमद, पूर्व जिलाध्यक्ष फतेह खान और शेर मोहम्मद शामिल रहे। उम्मेदाराम के आवास पर डिनर डिप्लोमेसी बाड़मेर-जैसलमेर सांसद उम्मेदाराम के दिल्ली स्थित आवास पर भी कांग्रेस नेताओं की बैठक और डिनर हुआ। इसमें प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा सहित अन्य नेता शामिल हुए। इन मुलाकातों को राजस्थान कांग्रेस के संगठनात्मक समीकरणों और आगामी राजनीतिक रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है, हालांकि बैठकों में हुई विस्तृत चर्चा को लेकर आधिकारिक विवरण सामने नहीं आया है।
Read more 8th Aug 2026
गुप्त ध्वनि किरणों के साथ ओशो पर किसने हमला किया?...
गुप्त ध्वनि किरणों के साथ ओशो पर किसने हमला किया?... * ओशो के निजी दंत चिकित्सक देवगेट ओशो की मृत्यु से 4 दिन पहले हुई घटनाओं के बारे में बात करते हैं (शरीर को छोड़कर)... * 15 aजनवरी, 1990 को, मेरे जन्मदिन पर, मुझे शुन्यो से एक संदेश मिला: ओशो चाहते थे कि मैं उनके पेट का एक्स-रे ले। हम दंaत कक्ष में मिले। ओशो का शरीर पतला और बेकार लग रहा था, फिर भी मैंने उसे शक्तिशाली रूप से उपस्थित महसूस किया। मुझे शुन्यो से पता था कि वह हर दिन बीस घंटे से अधिक सो रहा था, हर शाम बुद्ध हॉल में कुछ क़ीमती मिनटों के लिए अपनी शारीरिक ऊर्जा को बचा रहा था। ओशो नेa मुझे बताया कि उसके हमलावरों की आवाज़ से उसका शरीर बहुत कमजोर हो गया था। उन्होंने कहा कि उनमें से शायद तीन, दो पुरुष और एक महिला, ध्वनि तरंगों पर ध्यानaa केंद्रित करने और अपने शरीर को लक्षित करने के लिए एक विशेष गठन में बैठे थे। यहां भारत में प्राचीन योगिक प्रथाएं हैं जहां लोग कुछ ध्वनियों, कुछ मंत्रों को जानते हैं, जो लोगों को नुक़सान पहुंचाने के लिए ध्वनि को केंद्रित कर सकते हैं। लेकिन मुझ पर हमला करaaने वाले ये लोग भारतीय नहीं हैं। वे वही लोग हैं जिन्होंने अमेरिका में पहले मुझे मारने की कोशिश की थी। वे तब सफल नहीं हो सके, और अब वे जो शुरू किया उसे पूरा कर ने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने मुझे बोलने से रोकने के लिए ज़हर की कोशिश की लेकिन मैं जारी रखने में कामयाब रहा। अब, पांच साल बाद वे वापस आ गए हैं। उन्होंने पहले बुद्ध हॉल में अपनी ध्वनि किरणों का उपयोग मेरे दिमाग़ पर हमला करने के लिए किया लेकिन मैं अपने दिमाग़ में नहीं हूं। मैं एक नो-मन हूं और उनकी आवाज़ का बहुत कम प्रभाव था। इसलिए उन्होंने अपनी रणनीति बदल दी, अब वे मेरे शरीर पर हमला कर रहे हैं। मेरे गरीब शरीर को उनकी किरणों से कोई सुरक्षा नहीं है। हर दिन यह कमजोर होता जाता है। वे मुझे मार नहीं सकते लेकिन वे मेरे शरीर को नुक़सान पहुंचा सकते हैं। अभी मेरे जिगर के क्षेत्र में बहुत दर्द हो रहा है। क्या आप इसे एक्स-रे कर सकते हैं? दुख की बात है, मैंने समझाया कि मेरी दंत एक्स-रे मशीन शायद अपर्याप्त थी क्योंकि यह केवल दांतों और जबड़े की छोटी फिल्में ले सकती थी, लेकिन हम कोशिश कर सकते थे। अमृतो को हमारे पास सबसे बड़ी एक्स-रे फ़िल्म मिली, जबकि मैंने इसकी बीम को चौड़ा करने के लिए डेंटल एक्स-रे मशीन के साथ जिग्गल किया। मैंने वह करने की कोशिश की जो ओशो पूछ रहा था। मैंने उसके जिगर के क्षेत्र की एक तस्वीर ली और फिर दंत विकास में बड़ी फ़िल्म विकसित करने में कामयाब रहा टैंक जिसे छोटी इंट्रा-ओरल डेंटल फ़िल्मों के लिए डिज़ाइन किया गया था, लेकिन परिणामी छवि धुंधली और अस्पष्ट थी। यह आख़िरी बार था जब मैंने ओशो को उसके भौतिक शरीर में देखा था। 19 जनवरी को शाम 4:30 बजे थे: मैं अपनी प्रेमिका के साथ अपने कमरे में था जब दरवाजे पर एक ज़रूरी दस्तक हुई। मनीषा, पीला और तनावग्रस्त दिख रही थी, ने पूछा कि क्या वह मेरे कमरे के फ़ोन का उपयोग कर सकती है। मुझे पता था कि वह केवल पूछेगी कि क्या कुछ असामान्य हो रहा है। अस्थायी सचिव के रूप में कार्य करते हुए वह इनर सर्कल के सदस्यों को फ़ोन कर रही थी और उन्हें कृष्णा हाउस में एक असाधारण बैठक में तुरंत आने के लिए कह रही थी। ओशो ने पंद्रह महीने पहले इक्कीस लोगों की एक कम्यून प्रबंधन टीम की स्थापना की थी, इसे इनर सर्कल का नाम दिया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका काम कम्यून के दिन-प्रतिदिन चलने का प्रबंधन करना था। मैं मूल चयन में नहीं था, लेकिन कुछ महीने बाद मुझे शामिल होने के लिए कहा गया था। फ़ोन करने के बाद, मनीषा ने कहा, “गीट, तुमने सुना कि मैं दूसरों को क्या बता रहा था। बैठक कृष्णा हाउस की छत पर ब्लू रूम में है। क्या आप वहां तुरंत जा सकते हैं?” इससे पहले कि मैं कोई सवाल पूछ पाता, वह जल्दी से गलियारे में चली गई, स्पष्ट रूप से एक और महत्वपूर्ण कार्य में शामिल थी। मैंने दोपहर के अधिकांश समय अजीब तरह से विपुल महसूस किया था। बाहरी मामलों की उथल-पुथल के बावजूद मैं कई दिनों से उत्साहित महसूस कर रहा था। मेरे दिल में ख़ुशी का एक अकथनीय नृत्य था। अंदर से मुझे उत्साह, आनंद महसूस हुआ। ब्लू रूम में पहुंचने पर, मैंने देखा कि अधिकांश इनर सर्कल पहले से ही वहां इकट्ठा हो चुके थे। माहौल तनावपूर्ण और तनावपूर्ण था। मेरा अपना उत्साह जगह से बाहर लग रहा था। मैं बैठ गया और इंतज़ार किया। कुछ मिनटों के बाद जयेश ने अमृतो के साथ प्रवेश किया। यह देखने के लिए संक्षेप में चारों ओर देखते हुए कि हम सभी मौजूद हैं, उन्होंने एक दृढ़, हालांकि शांत आवाज़ में कहा, “मुझे लगता है कि इसे लपेटने का कोई तरीक़ा नहीं है। मैं आपको सीधे बताऊंगा। ओशो ने कुछ समय पहले लगभग 4:45 बजे अपना शरीर छोड़ दिया था दोपहर।” स्तब्ध, मैंने अपनी घड़ी को देखा। शाम के 5:15 बजे थे। उपस्थित दो या तीन लोग रोने लगे। जयेश ने जल्दी से बीच में टोका, “देखो, मुझे तुम्हारी सारी मदद की ज़रूरत है। कृपया अभी तक अलग न हों। मुझे आप सभी की ज़रूरत है कि ओशो के भेजने को उतना ही सुंदर बनाने में मदद करें जितना वह हकदार है। यह आख़िरी चीज है जो हम उसके लिए कर सकते हैं भौतिक शरीर, चलो इसे अद्भुत बनाते हैं। उसने मुझे ठीक से बताया कि वह कैसे चाहता है कि ऐसा हो। उसने मुझे हर चीज के लिए विस्तृत निर्देश दिए, लेकिन मुझे यहां हर किसी की मदद की ज़रूरत है।” जयेश के शब्दों को सुनकर मेरा पहले का उत्साह सदमे में बदल गया था, लेकिन मैंने ओशो को अपने लोगों के साथ अपने अंतिम उत्सव का आनंद लेने में सक्षम बनाने के लिए हमारी मदद के लिए जयेश की अपील को स्पष्ट रूप से सुना। जैसे ही मैंने ब्लू रूम छोड़ा, जयेश ने मुझे बताया कि ओशो ने अनुरोध किया था कि मैं उनके शरीर को जलते हुए घाटों तक ले जाने के लिए एक वाहक बनूं। गतिविधि और भ्रमित भावनाओं के एक धुंध में मुझे याद है कि ओशो के इस अंतिम उपहार के लिए बेहद आभारी महसूस कर रहा था। - स्वामी देवगीत पुस्तक : ओशो - द फर्स्ट बुद्ध इन द डेंटल चेयर अध्याय: 17 अध्याय का नाम: ओशो का अंतिम दंत नाटक: अधिनियम V अंतिम सुनहरी झलक
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