राजस्थान न्यूज़: परिवहन विभाग के आरटीओ और डीटीओ दफ्तरों में कर्मचारियों की सीट हर साल और निरीक्षकों की हर छह महीने में बदली जाती है, ताकि उन्हें अलग-अलग सीटों का अनुभव मिले और एक ही जगह लंबे समय तक बने रहने से बनने वाली मोनोपॉली टूटे। जयपुर नगर निगम में इसके उलट 340 कर्मचारी पांच साल से एक ही शाखा में जमे हैं — यानी परिवहन विभाग की व्यवस्था से 5 गुना और निरीक्षकों के मुकाबले 10 गुना ज्यादा समय। निगम में 2,000 से ज्यादा फाइलें लंबित हैं।परिवहन विभाग (आरटीओ/डीटीओ) — कर्मचारियों की सीट हर साल, निरीक्षकों की हर छह महीने में बदली जाती है। कारण यह बताया जाता है कि एक ही सीट पर लंबे समय तक रहने से मोनोपॉली बनती है। जयपुर नगर निगम — 340 कर्मचारी 5 साल से एक ही शाखा में। यही फर्क इस पूरी खबर का आधार है। किस शाखा में कितने कर्मचारी निगम की जिन शाखाओं के आंकड़े सामने आए हैं, उनमें सबसे ज्यादा 34 कर्मचारी अतिक्रमण शाखा में हैं। यह वही शाखा है जिस पर फाइलें अटकने की शिकायतें सबसे सीधे असर डालती हैं। इनमें से ज्यादातर कर्मचारी जोन में तैनात हैं। शाखा कर्मचारी अतिक्रमण 34 फायर 23 पट्टे 23 गैराज 23 स्लॉटर हाउस 17 भवन निर्माण स्वीकृति 15 आयोजना 13 उद्यान 12 लाइसेंस 12 राजस्व 10 स्टोर 10 पशु 7 सूची में दर्ज शाखाओं का जोड़ 199 बताई गई कुल संख्या 340 जिन शाखाओं के आंकड़े नहीं दिए गए 141 यहां एक बात साफ कर देना जरूरी है। ऊपर दी गई 12 शाखाओं के आंकड़ों को जोड़ें तो यह 199 बैठता है, जबकि कुल संख्या 340 बताई गई है। यानी 141 कर्मचारी उन शाखाओं और दफ्तरों में हैं जिनके अलग-अलग आंकड़े नहीं दिए गए — यह कुल संख्या का करीब 41 प्रतिशत है। पंजीयन शाखा का नाम सूची में है, लेकिन उसके कर्मचारियों की संख्या नहीं दी गई। इसी तरह आयुक्त, अतिरिक्त आयुक्त और उपायुक्त कार्यालयों में भी यही स्थिति बताई गई है, पर वहां के आंकड़े नहीं हैं। ये 141 कर्मचारी कहां हैं, इसका ब्योरा उपलब्ध नहीं है। फाइलें अटकने की शिकायतें निगम में शिकायतें हैं कि कर्मचारी फाइलों पर अनावश्यक टिप्पणियां करते हैं और उन्हें आगे बढ़ाने के बजाय अटका देते हैं। ये शिकायतें हैं, कोई जांच का निष्कर्ष नहीं। इनका असर आम लोगों पर पड़ता है — खासकर पट्टे, भवन निर्माण स्वीकृति, राजस्व और लाइसेंस से जुड़ी फाइलों में, जिनके लिए लोगों को निगम के दफ्तरों के बार-बार चक्कर लगाने पड़ते हैं। छह महीने में एसीबी की 5 कार्रवाइयां पिछले 6 महीनों में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने 5 कार्रवाइयां की हैं और 10 लोगों को गिरफ्तार किया है। मई में वेतन बनाने के मामले में एक स्वास्थ्य निरीक्षक और एक निजी व्यक्ति, जून में दुकान का लाइसेंस जारी करने के मामले में एक पशुधन निरीक्षक, और जुलाई में मकान का पट्टा जारी करने के मामले में हवामहल-आमेर जोन के एक जमादार को पकड़ा गया। जुलाई में ही कोटा एसीबी ने एक विवाह पंजीयक और एक अन्य कर्मचारी को गिरफ्तार किया। जून और अक्टूबर में एक कनिष्ठ अभियंता तथा संविदाकर्मियों से जुड़े मामलों में भी कार्रवाई हुई।इन कार्रवाइयों को लेकर दो बातें ध्यान में रखने लायक हैं। पहली, ये गिरफ्तारियां रिश्वत के आरोपों में हुई हैं और मामले जांच या अदालत के स्तर पर हैं — किसी को दोषी नहीं ठहराया गया है। दूसरी, इनमें से एक कार्रवाई कोटा एसीबी की है और विवाह पंजीयक से जुड़ी है, इसलिए यह नहीं कहा जा सकता कि पांचों कार्रवाइयां जयपुर नगर निगम के कर्मचारियों के खिलाफ थीं।निगम आयुक्त ओम प्रकाश कसेरा ने कहा, “मेरे जॉइन करने के बाद मैंने अधिकतर की सीट बदली है। इसके बावजूद कोई कर्मचारी लंबे समय से एक ही सीट पर है और रह गया है, तो उसे भी बदल दिया जाएगा।”
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राजस्थान न्यूज़: अलवर। पंचायती राज चुनावों के लिए जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के नामांकन की आखिरी तारीख 13 अक्टूबर है, और उससे ठीक पहले अलवर में कांग्रेस ने चुनावी तैयारियों को लेकर संगठनात्मक बैठक की। बैठक में पार्टी के जिला पर्यवेक्षक वैभव गहलोत शामिल हुए। कांग्रेस ने उन्हें इसी महीने अलवर जिले का पर्यवेक्षक नियुक्त किया है (पढ़ें— 41 जिलों में पर्यवेक्षक)। बैठक में कांग्रेस राष्ट्रीय महासचिव भंवर जितेंद्र सिंह, राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली, एआईसीसी सचिव और राजस्थान के सह-प्रभारी चिरंजीव राव, भरतपुर सांसद संजना जाटव और पूर्व आरटीडीसी अध्यक्ष धर्मेंद्र राठौड़ के साथ जिले के पार्टी पदाधिकारी मौजूद रहे। नामांकन की खिड़की अब बंद होने को है राज्य निर्वाचन आयोग के घोषित कार्यक्रम के अनुसार जिला परिषद सदस्यों के लिए लोक सूचना 8 अक्टूबर को जारी हुई थी और नामांकन 13 अक्टूबर तक भरे जा सकते हैं। नाम वापसी 15 अक्टूबर तक है । पंच और सरपंच के नामांकन इससे अलग चलते हैं और मतदान से एक दिन पहले लिए जाते हैं। धनतेरस के चलते पहले तीन चरणों की तारीखें एक दिन पहले खिसकाई जा चुकी हैं। नतीजे दो हिस्सों में आएंगे। सरपंच पद के परिणाम 24 अक्टूबर से आने लगेंगे, जबकि जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों की गिनती सभी जिलों में एक साथ 20 नवंबर को होगी। यानी जिस नामांकन की खिड़की 13 अक्टूबर को बंद हो रही है, उसके उम्मीदवारों को नतीजे के लिए उसके बाद भी 38 दिन इंतजार करना होगा। तारीखें जो तय हैं जिला परिषद सदस्यों के लिए लोक सूचना — 8 अक्टूबर नामांकन की आखिरी तारीख — 13 अक्टूबर (मंगलवार) नाम वापसी — 15 अक्टूबर (गुरुवार) तक सरपंच के नतीजे — 24 अक्टूबर से जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों की गिनती — 20 नवंबर (शुक्रवार) दावेदार ध्यान दें — हर पद की खिड़की अलग है जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्य — नामांकन की खिड़की पहले ही खुल चुकी है और 13 अक्टूबर को बंद हो जाएगी। कुल 6 दिन की यह खिड़की 8 अक्टूबर की लोक सूचना से शुरू हुई थी। पंच और सरपंच — इन पदों के नामांकन मतदान से एक दिन पहले लिए जाते हैं, पहले चरण में 23 अक्टूबर को। इसलिए इन दावेदारों के पास समय अपेक्षाकृत ज्यादा है। नामांकन से पहले उम्र, मतदाता सूची में नाम और दूसरी पात्रता शर्तें जांच लें — इन्हीं पर सबसे ज्यादा नामांकन निरस्त होते हैं। बैठक में शामिल नेताओं के पद और इस चुनाव में उनकी जिम्मेदारी इस तरह है— नेता पद और जिम्मेदारी वैभव गहलोत अलवर जिले के लिए कांग्रेस के पंचायत चुनाव पर्यवेक्षक; पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बेटे भंवर जितेंद्र सिंह कांग्रेस राष्ट्रीय महासचिव और पूर्व केंद्रीय मंत्री टीकाराम जूली राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और अलवर ग्रामीण से विधायक चिरंजीव राव एआईसीसी सचिव और राजस्थान के सह-प्रभारी संजना जाटव भरतपुर से सांसद धर्मेंद्र राठौड़ पूर्व आरटीडीसी अध्यक्ष; खैरथल-तिजारा जिले के पर्यवेक्षक अलवर कांग्रेस के लिए यह बैठक क्यों मायने रखती है अलवर नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली का गृह जिला है और वे यहीं अलवर ग्रामीण सीट से विधायक हैं। भंवर जितेंद्र सिंह भी लंबे समय से अलवर की राजनीति में सक्रिय हैं। इसी जिले में पार्टी ने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बेटे वैभव गहलोत को पर्यवेक्षक लगाया है, और अलवर से अलग होकर बने खैरथल-तिजारा जिले की जिम्मेदारी बैठक में मौजूद धर्मेंद्र राठौड़ के पास है। इस लिहाज से एक ही बैठक में जिले और उससे निकले नए जिले, दोनों के पर्यवेक्षक मौजूद रहे। चुनाव का दायरा निकाय से 15 गुना बड़ा पंचायती राज संस्थाओं के इन चुनावों में करीब 1,55,000 पदों पर निर्वाचन होना है, जबकि इसी साल हुए नगरीय निकाय चुनावों में 10,245 पदों पर चुनाव हुए थे। यह 1,44,755 पद ज्यादा हैं, यानी दायरा करीब 15.1 गुना बड़ा । इसी पैमाने को देखते हुए कांग्रेस ने प्रदेश के सभी 41 जिलों में पर्यवेक्षक तैनात किए हैं। यह जिम्मेदारी 35 नेताओं को दी गई है, जिनमें से 6 के पास दो-दो जिले हैं। इनमें 5 सांसद और 7 विधायक, यानी 12 निर्वाचित जनप्रतिनिधि शामिल हैं।
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राजस्थान न्यूज़: नई दिल्ली। भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने इंडिया गठबंधन के नेताओं से व्यक्तिगत रूप से मिलने में असमर्थता जताई है। उन्होंने विपक्षी नेताओं को औपचारिक कानूनी प्रक्रिया अपनाने और याचिका दाखिल करने की सलाह दी है।अदालत के दरवाजे देश के हर नागरिक के लिए हमेशा खुले हैं। चाहे वह कोई आम नागरिक हो या किसी निर्वाचित निकाय, संसद या विधानसभा का सदस्य — कोई भी उचित प्रक्रिया के तहत याचिका दाखिल कर सकता है।” न्यायमूर्ति सूर्यकांत, मुख्य न्यायाधीश, भारत पत्र मिला, लिखित में भेजा जवाब मुख्य न्यायाधीश ने बताया कि उन्हें मुलाकात के अनुरोध का पत्र मिला था, जिसका उन्होंने लिखित में जवाब भेज दिया है और न मिल पाने के कारणों से भी अवगत करा दिया है। उन्होंने कहा कि पत्र पर एक दिन पहले की तारीख थी और वे उस दिन बाहर थे, इसलिए पत्र उन्हें समय पर नहीं मिल सका। उन्होंने रात में जवाब भेजा। ज्ञापन नहीं, याचिका — राहत सिर्फ न्यायिक मंच पर मुख्य न्यायाधीश ने न्यायिक निष्पक्षता पर जोर देते हुए कहा कि देश के प्रत्येक नागरिक को अदालत का रुख करने का पूरा अधिकार है और अदालत सभी की चिंताएं सुनकर कानून के दायरे में जो उचित अधिकार बनता है, वह देगी।विपक्ष चुनाव प्रक्रिया और चुनाव आयुक्तों से जुड़े कानून को लेकर सुप्रीम कोर्ट से दखल की मांग कर रहा था। मुख्य न्यायाधीश के रुख से स्पष्ट है कि ऐसे मामलों को सीधे चैंबर में मुलाकात के बजाय औपचारिक कानूनी तरीके से शीर्ष अदालत के सामने लाया जाना चाहिए और राहत याचिका के जरिए ही दी जा सकती हैवन नेशन वन इलेक्शन पर जेपीसी के दौरे पर क्या कहा वन नेशन वन इलेक्शन को लेकर संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) का सुप्रीम कोर्ट दौरा रद्द होने पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि उस मामले में तुलनात्मक रूप से ज्यादा कारण थे, क्योंकि उसमें अदालत में हितों के टकराव की संभावना थी। इसी वजह से प्रशासनिक पहलू पर चर्चा करनी पड़ी।“मेरे वरिष्ठ न्यायिक सहयोगियों और मेरी सामूहिक राय थी कि हमें हितों के टकराव की किसी भी स्थिति से बचना चाहिए।” न्यायमूर्ति सूर्यकांत, मुख्य न्यायाधीश, भारतकिस आंदोलन के बीच आया यह बयान यह बयान विपक्ष के उस आंदोलन के बीच आया है जो मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर चल रहा है। सोमवार को ही लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इंदिरा भवन में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मुख्य निर्वाचन आयुक्त पर हमला बोला था और विपक्ष सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकाल रहा है। इससे पहले 9 अक्टूबर को इंडिया गठबंधन ने राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपकर मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे की मांग की थी। दिल्ली में आवाजाही पर रोक के मुद्दे पर अदालत पहले ही दखल दे चुकी है — 9 अक्टूबर को उसने मेट्रो और ट्रेन सेवाएं पूरी तरह बंद न करने को कहा था और रविवार को एहतियातन हिरासत में लिए गए तीन नेताओं को रिहा करने का आदेश दिया था। सीजेआई ने क्या-क्या कहा विपक्षी नेताओं से व्यक्तिगत मुलाकात में असमर्थता, लिखित जवाब भेजा अदालत के दरवाजे हर नागरिक के लिए खुले — आम नागरिक हो या सांसद-विधायक राहत का रास्ता याचिका, न कि चैंबर में मुलाकात जेपीसी दौरा रद्द: हितों के टकराव से बचने की सामूहिक राय
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उदयपुर न्यूज़: उत्तर पश्चिम रेलवे महिला कल्याण संगठन, अजमेर मंडल के तत्वावधान में आयोजित 'ऑन द स्पॉट' ड्राइंग एवं निबंध प्रतियोगिता का परिणाम घोषित कर पुरस्कार वितरण समारोह आयोजित किया गया।कार्यक्रम संगठन की अध्यक्षा श्रीमती रिंकल भूतड़ा की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। इस अवसर पर संगठन की सचिव श्रीमती ज्योति ऊषाहरा, कोषाध्यक्ष श्रीमती सुषमा कुमारी सहित कार्यकारिणी के अन्य सदस्य विशेष रूप से उपस्थित रहे। प्रतियोगिता में बच्चों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और अपनी रचनात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन किया। निर्णायकों के मूल्यांकन के पश्चात निबंध प्रतियोगिता में 9 तथा ड्राइंग प्रतियोगिता में 9, यानी कुल 18 प्रतिभाशाली बच्चों को उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रमाण-पत्र एवं पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।समारोह को संबोधित करते हुए अध्यक्षा श्रीमती रिंकल भूतड़ा ने सभी विजेता बच्चों को बधाई दी और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि इस प्रकार की रचनात्मक प्रतियोगिताएं बच्चों में आत्मविश्वास और कलात्मक अभिव्यक्ति को बढ़ावा देती हैं। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी सदस्यों और बच्चों का आभार व्यक्त किया गया।
Read more 28th Sep 2026
अजमेर न्यूज़: 1100 वर्ष पूर्व स्थापित मंदिर की बड़ी है मान्यता, दूर दराज से पहुंचते हैं हजारों श्रद्धालु
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अजमेर न्यूज़: 1968 से कस्बे की धार्मिक संस्था श्री ब्रह्म पुष्कर सेवा संघ कर रही है इस अनूठी परंपरा का निर्वहन
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अजमेर न्यूज़: 10 टीमें 8 - 8 वार्डो में जाकर घूम रही गायों का करेंगीं प्राथमिक उपचार
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राष्ट्रीय न्यूज़: नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ता सौरव दास और आशुतोष रांका को मंगलवार को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया। दोनों समर्थकों के साथ जंतर-मंतर पहुंचे थे और नारेबाजी कर रहे थे। पुलिस ने मौके से सभी को हिरासत में लिया। यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब जंतर-मंतर अब दिल्ली के निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची में नहीं रह गया है। यह व्यवस्था इसी हफ्ते बदली है। एक नजर में क्या हुआ — जंतर-मंतर पहुंचे सीजेपी प्रवक्ताओं और समर्थकों को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया कौन — सौरव दास और आशुतोष रांका पृष्ठभूमि — जंतर-मंतर अब निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची में नहीं है आदेश किसका — दिल्ली पुलिस आयुक्त का, गृह मंत्रालय की समिति की सिफारिश के आधार पर नए स्थल — रामलीला मैदान, बुराड़ी ग्राउंड, सीबीडी ग्राउंड मांग — मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा और एसआईआर का विरोध जंतर-मंतर अब प्रदर्शन स्थल नहीं जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाने का आदेश दिल्ली पुलिस आयुक्त की ओर से 11 अक्टूबर को जारी हुआ और 12 अक्टूबर को सामने आया। पुलिस के अनुसार यह फैसला गृह मंत्रालय की ओर से बनाई गई उस समिति की सिफारिशों पर लिया गया, जिसे प्रदर्शन के लिए वैकल्पिक स्थल सुझाने का काम दिया गया था।आदेश में प्रदर्शन और धरने के लिए तीन जगहें तय की गई हैं — रामलीला मैदान, बुराड़ी ग्राउंड और सीबीडी ग्राउंड। यह आदेश 28 अप्रैल 2022 के पुराने आदेश को आंशिक रूप से संशोधित करता है। इन तीनों स्थलों पर प्रदर्शन की विस्तृत प्रक्रिया अलग से जारी की जाएगी। यहां एक बात साफ रहनी चाहिए — यह आदेश दिल्ली पुलिस का है, जो गृह मंत्रालय की समिति की सिफारिश पर आधारित बताया गया है।जंतर-मंतर पर तिरंगा लिए प्रदर्शनकारी और मौके पर मौजूद पुलिसकर्मी। तीन दिन में दूसरी बार हिरासत सौरव दास और आशुतोष रांका को इससे पहले भी हिरासत में लिया जा चुका है। 23 घंटे की उस हिरासत के बाद उन्हें छोड़ा गया था। उन्हें और अभिजीत दीपके को शनिवार को हवाई अड्डे पर उस समय रोका गया था, जब वे मुख्य निर्वाचन आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन के लिए दिल्ली पहुंचे थे। वह हिरासत एहतियाती थी। दिल्ली के दक्षिण-पश्चिम जिले के विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट ने तीनों को रिहा करने का आदेश दिया था। इसी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने रविवार को विशेष बैठक कर सुनवाई की थी। मांग क्या है कॉकरोच जनता पार्टी मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रही है और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर का विरोध कर रही है। संगठन ने 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन बुलाया था।
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राष्ट्रीय न्यूज़: सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक ने शनिवार शाम एक्स पर वीडियो संदेश जारी कर कहा कि देश ‘अघोषित आपातकाल’ से गुजर रहा है। उन्होंने कहा कि शुक्रवार को उन्होंने शनिवार के प्रदर्शन के लिए एकता और शांति की अपील की थी, लेकिन तब उन्होंने यह कल्पना नहीं की थी कि दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र ‘अघोषित आपातकाल’ में होगा।वांगचुक ने कहा कि उन्हें खुशी थी कि आंदोलन का नेतृत्व करने के लिए इतने नेता मौजूद हैं, लेकिन अब उन्हें पता चला है कि उन सबको गिरफ्तार कर लिया गया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि हिरासत में लिए गए लोगों को जल्द रिहा किया जाएगा “अगर कल तक उन्हें रिहा नहीं किया गया, तो मैं अनशन या पदयात्रा पर विचार करने के लिए मजबूर हो जाऊंगा।”सोनम वांगचुक, सामाजिक कार्यकर्ता यह संदेश उन्होंने अंग्रेज़ी में लिखा और इसके साथ लद्दाख से रिकॉर्ड किया गया वीडियो साझा किया। पोस्ट के साथ उन्होंने #JantarMantar, #CJP और #CEC हैशटैग लगाए। दिल्ली में शनिवार को क्या हुआ कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने मतदाता सूची में गड़बड़ियों और एसआईआर के विरोध में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर सुबह 10 बजे प्रदर्शन बुलाया था। दिल्ली पुलिस की सख्ती के चलते शाम 5 बजे तक प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर तक नहीं पहुंच पाए। पुलिस ने सीजेपी के नेतृत्व — अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका — को सुबह ही एयरपोर्ट पर हिरासत में ले लिया। समर्थकों ने जंतर-मंतर पहुंचने की कोशिश की, लेकिन कई जगह तीन से पांच परत की बैरिकेडिंग के चलते आगे नहीं बढ़ने दिया गया। शाम तक करीब 3,500 लोगों को हिरासत में लिया जा चुका था। इनमें तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल भी शामिल रहे। दिन में पुलिस से झड़प की एक-दो घटनाएं सामने आईं। प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेडिंग तोड़ी और आकाशवाणी भवन के पास पथराव हुआ, जिसमें 2 पुलिसकर्मी घायल हो गए। दिनभर का घटनाक्रम सुबह 5:00 — जंतर-मंतर और आसपास भारी पुलिस बल, प्रदर्शन स्थल की ओर जाने वाले रास्तों पर बैरिकेड सुबह 7:00 — सीजेपी संस्थापक अभिजीत दीपके दिल्ली के लिए मुंबई से रवाना सुबह 7:45 — पुलिस ने हिरासत में लेना शुरू किया सुबह 8:30 — आंसू गैस के गोले छोड़ने वाली गाड़ियां तैनात सुबह 9:30 — आईजीआई एयरपोर्ट के टर्मिनल-3 पर सुरक्षा बढ़ाई गई; यूट्यूबर ध्रुव राठी को गुरुग्राम स्थित उनके घर से हिरासत में लिया गया सुबह 10:50 — दिल्ली पहुंचने के बाद विमान के भीतर ही तीनों सीजेपी नेता हिरासत में सुबह 11:30 — बांग्ला साहिब गुरुद्वारे के पास से 60 से ज्यादा प्रदर्शनकारी हिरासत में दोपहर 1:05 — दीपके का पहले से रिकॉर्ड किया वीडियो जारी, अजिंक्य शिंदे को आंदोलन का नेतृत्व सौंपा दोपहर 2:00 — जंतर-मंतर जा रहीं ममता बनर्जी हिरासत में; दो अन्य पूर्व मुख्यमंत्री भी हिरासत में दोपहर 3:00 — अरविंद केजरीवाल घर के बाहर से हिरासत में; नेहा बोरा समेत कई वाम नेता भी पकड़े गए पुलिस ने प्रदर्शन रोकने के लिए क्या इंतजाम किए सात इंतजाम 38,000 जवान तैनात — 8 से 12 अक्टूबर तक सीएपीएफ की 221 कंपनियां (करीब 23,000 जवान) बुलाई गईं, इनके अलावा दिल्ली पुलिस के कम से कम 15,000 कर्मी 250 ट्रेनें रद्द — शनिवार सुबह 4 से दोपहर 2 बजे तक दिल्ली आने वाली ट्रेनें; बसों की बुकिंग की जांच शुरू छात्रों को रोकने की अपील — यूनिवर्सिटी-कॉलेज प्रमुखों और पीजी मालिकों से संपर्क 45 मेट्रो स्टेशन बंद — एंट्री और एग्जिट बंद; जंतर-मंतर से पहले 10 फीट ऊंचे बैरिकेड और आंसू गैस की गाड़ियां बॉर्डर पर सख्ती — यूपी से लगी पूर्वी दिल्ली और शाहदरा सीमा तथा राजस्थान से आने वाले रूट पर कीलें और बैरिकेड 150 बॉडीकैम — फ्रंटलाइन पर तैनात पुलिसकर्मियों को दिए गए; स्टेडियमों में अस्थायी हिरासत केंद्र बनाए गए हवाई अड्डे से ही हिरासत — दीपके, रांका और दास को फ्लाइट से ही हिरासत में लिया गया मेट्रो को लेकर शुक्रवार को 57 स्टेशन बंद करने का आदेश जारी हुआ था, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि सेवाएं पूरी तरह न रोकी जाएं। शनिवार को 45 स्टेशनों पर एंट्री-एग्जिट बंद रखी गई।
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गुप्त ध्वनि किरणों के साथ ओशो पर किसने हमला किया?...
गुप्त ध्वनि किरणों के साथ ओशो पर किसने हमला किया?... * ओशो के निजी दंत चिकित्सक देवगेट ओशो की मृत्यु से 4 दिन पहले हुई घटनाओं के बारे में बात करते हैं (शरीर को छोड़कर)... * 15 aजनवरी, 1990 को, मेरे जन्मदिन पर, मुझे शुन्यो से एक संदेश मिला: ओशो चाहते थे कि मैं उनके पेट का एक्स-रे ले। हम दंaत कक्ष में मिले। ओशो का शरीर पतला और बेकार लग रहा था, फिर भी मैंने उसे शक्तिशाली रूप से उपस्थित महसूस किया। मुझे शुन्यो से पता था कि वह हर दिन बीस घंटे से अधिक सो रहा था, हर शाम बुद्ध हॉल में कुछ क़ीमती मिनटों के लिए अपनी शारीरिक ऊर्जा को बचा रहा था। ओशो नेa मुझे बताया कि उसके हमलावरों की आवाज़ से उसका शरीर बहुत कमजोर हो गया था। उन्होंने कहा कि उनमें से शायद तीन, दो पुरुष और एक महिला, ध्वनि तरंगों पर ध्यानaa केंद्रित करने और अपने शरीर को लक्षित करने के लिए एक विशेष गठन में बैठे थे। यहां भारत में प्राचीन योगिक प्रथाएं हैं जहां लोग कुछ ध्वनियों, कुछ मंत्रों को जानते हैं, जो लोगों को नुक़सान पहुंचाने के लिए ध्वनि को केंद्रित कर सकते हैं। लेकिन मुझ पर हमला करaaने वाले ये लोग भारतीय नहीं हैं। वे वही लोग हैं जिन्होंने अमेरिका में पहले मुझे मारने की कोशिश की थी। वे तब सफल नहीं हो सके, और अब वे जो शुरू किया उसे पूरा कर ने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने मुझे बोलने से रोकने के लिए ज़हर की कोशिश की लेकिन मैं जारी रखने में कामयाब रहा। अब, पांच साल बाद वे वापस आ गए हैं। उन्होंने पहले बुद्ध हॉल में अपनी ध्वनि किरणों का उपयोग मेरे दिमाग़ पर हमला करने के लिए किया लेकिन मैं अपने दिमाग़ में नहीं हूं। मैं एक नो-मन हूं और उनकी आवाज़ का बहुत कम प्रभाव था। इसलिए उन्होंने अपनी रणनीति बदल दी, अब वे मेरे शरीर पर हमला कर रहे हैं। मेरे गरीब शरीर को उनकी किरणों से कोई सुरक्षा नहीं है। हर दिन यह कमजोर होता जाता है। वे मुझे मार नहीं सकते लेकिन वे मेरे शरीर को नुक़सान पहुंचा सकते हैं। अभी मेरे जिगर के क्षेत्र में बहुत दर्द हो रहा है। क्या आप इसे एक्स-रे कर सकते हैं? दुख की बात है, मैंने समझाया कि मेरी दंत एक्स-रे मशीन शायद अपर्याप्त थी क्योंकि यह केवल दांतों और जबड़े की छोटी फिल्में ले सकती थी, लेकिन हम कोशिश कर सकते थे। अमृतो को हमारे पास सबसे बड़ी एक्स-रे फ़िल्म मिली, जबकि मैंने इसकी बीम को चौड़ा करने के लिए डेंटल एक्स-रे मशीन के साथ जिग्गल किया। मैंने वह करने की कोशिश की जो ओशो पूछ रहा था। मैंने उसके जिगर के क्षेत्र की एक तस्वीर ली और फिर दंत विकास में बड़ी फ़िल्म विकसित करने में कामयाब रहा टैंक जिसे छोटी इंट्रा-ओरल डेंटल फ़िल्मों के लिए डिज़ाइन किया गया था, लेकिन परिणामी छवि धुंधली और अस्पष्ट थी। यह आख़िरी बार था जब मैंने ओशो को उसके भौतिक शरीर में देखा था। 19 जनवरी को शाम 4:30 बजे थे: मैं अपनी प्रेमिका के साथ अपने कमरे में था जब दरवाजे पर एक ज़रूरी दस्तक हुई। मनीषा, पीला और तनावग्रस्त दिख रही थी, ने पूछा कि क्या वह मेरे कमरे के फ़ोन का उपयोग कर सकती है। मुझे पता था कि वह केवल पूछेगी कि क्या कुछ असामान्य हो रहा है। अस्थायी सचिव के रूप में कार्य करते हुए वह इनर सर्कल के सदस्यों को फ़ोन कर रही थी और उन्हें कृष्णा हाउस में एक असाधारण बैठक में तुरंत आने के लिए कह रही थी। ओशो ने पंद्रह महीने पहले इक्कीस लोगों की एक कम्यून प्रबंधन टीम की स्थापना की थी, इसे इनर सर्कल का नाम दिया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका काम कम्यून के दिन-प्रतिदिन चलने का प्रबंधन करना था। मैं मूल चयन में नहीं था, लेकिन कुछ महीने बाद मुझे शामिल होने के लिए कहा गया था। फ़ोन करने के बाद, मनीषा ने कहा, “गीट, तुमने सुना कि मैं दूसरों को क्या बता रहा था। बैठक कृष्णा हाउस की छत पर ब्लू रूम में है। क्या आप वहां तुरंत जा सकते हैं?” इससे पहले कि मैं कोई सवाल पूछ पाता, वह जल्दी से गलियारे में चली गई, स्पष्ट रूप से एक और महत्वपूर्ण कार्य में शामिल थी। मैंने दोपहर के अधिकांश समय अजीब तरह से विपुल महसूस किया था। बाहरी मामलों की उथल-पुथल के बावजूद मैं कई दिनों से उत्साहित महसूस कर रहा था। मेरे दिल में ख़ुशी का एक अकथनीय नृत्य था। अंदर से मुझे उत्साह, आनंद महसूस हुआ। ब्लू रूम में पहुंचने पर, मैंने देखा कि अधिकांश इनर सर्कल पहले से ही वहां इकट्ठा हो चुके थे। माहौल तनावपूर्ण और तनावपूर्ण था। मेरा अपना उत्साह जगह से बाहर लग रहा था। मैं बैठ गया और इंतज़ार किया। कुछ मिनटों के बाद जयेश ने अमृतो के साथ प्रवेश किया। यह देखने के लिए संक्षेप में चारों ओर देखते हुए कि हम सभी मौजूद हैं, उन्होंने एक दृढ़, हालांकि शांत आवाज़ में कहा, “मुझे लगता है कि इसे लपेटने का कोई तरीक़ा नहीं है। मैं आपको सीधे बताऊंगा। ओशो ने कुछ समय पहले लगभग 4:45 बजे अपना शरीर छोड़ दिया था दोपहर।” स्तब्ध, मैंने अपनी घड़ी को देखा। शाम के 5:15 बजे थे। उपस्थित दो या तीन लोग रोने लगे। जयेश ने जल्दी से बीच में टोका, “देखो, मुझे तुम्हारी सारी मदद की ज़रूरत है। कृपया अभी तक अलग न हों। मुझे आप सभी की ज़रूरत है कि ओशो के भेजने को उतना ही सुंदर बनाने में मदद करें जितना वह हकदार है। यह आख़िरी चीज है जो हम उसके लिए कर सकते हैं भौतिक शरीर, चलो इसे अद्भुत बनाते हैं। उसने मुझे ठीक से बताया कि वह कैसे चाहता है कि ऐसा हो। उसने मुझे हर चीज के लिए विस्तृत निर्देश दिए, लेकिन मुझे यहां हर किसी की मदद की ज़रूरत है।” जयेश के शब्दों को सुनकर मेरा पहले का उत्साह सदमे में बदल गया था, लेकिन मैंने ओशो को अपने लोगों के साथ अपने अंतिम उत्सव का आनंद लेने में सक्षम बनाने के लिए हमारी मदद के लिए जयेश की अपील को स्पष्ट रूप से सुना। जैसे ही मैंने ब्लू रूम छोड़ा, जयेश ने मुझे बताया कि ओशो ने अनुरोध किया था कि मैं उनके शरीर को जलते हुए घाटों तक ले जाने के लिए एक वाहक बनूं। गतिविधि और भ्रमित भावनाओं के एक धुंध में मुझे याद है कि ओशो के इस अंतिम उपहार के लिए बेहद आभारी महसूस कर रहा था। - स्वामी देवगीत पुस्तक : ओशो - द फर्स्ट बुद्ध इन द डेंटल चेयर अध्याय: 17 अध्याय का नाम: ओशो का अंतिम दंत नाटक: अधिनियम V अंतिम सुनहरी झलक
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