राजस्थान न्यूज़: नगरीय विकास एवं स्वायत्त शासन राज्यमंत्री झाबर सिंह खर्रा ने नीट (NEET) पेपर लीक प्रकरण पर बड़ा और स्पष्ट बयान देते हुए इसे पूरे प्रशासनिक एवं परीक्षा प्रबंधन तंत्र की विफलता करार दिया है। बीकानेर दौरे पर पहुंचे मंत्री खर्रा ने कहा कि इस राष्ट्रीय स्तर की महत्वपूर्ण परीक्षा में हुई गड़बड़ी ने लाखों विद्यार्थियों के भविष्य को प्रभावित किया है और इसके लिए जिम्मेदार लोगों को किसी भी स्थिति में बख्शा नहीं जाना चाहिए। बीकानेर सर्किट हाउस में आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान नगरीय विकास एवं स्वायत्त शासन राज्यमंत्री झाबर सिंह खर्रा ने कहा कि जिन अधिकारियों और कर्मचारियों को परीक्षा को निष्पक्ष, पारदर्शी और सुरक्षित तरीके से संपन्न कराने की जिम्मेदारी दी गई थी, उनमें से कुछ लोगों ने ही व्यवस्था को नुकसान पहुंचाया। उन्होंने कहा कि सिस्टम के भीतर बैठे ऐसे लोगों ने विद्यार्थियों के विश्वास को तोड़ा और मेहनत के दम पर सफलता पाने का सपना देखने वाले लाखों युवाओं के साथ अन्याय किया। नगरीय विकास एवं स्वायत्त शासन राज्यमंत्री झाबर सिंह खर्रा ने कहा कि एक जिम्मेदार जनप्रतिनिधि होने के नाते वे इस पूरे घटनाक्रम से प्रभावित विद्यार्थियों की पीड़ा को समझते हैं। उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रक्रिया के दौरान युवाओं को जिस मानसिक तनाव, अनिश्चितता और परेशानी का सामना करना पड़ा, उसके लिए वे व्यक्तिगत रूप से केंद्र और राज्य सरकार की ओर से युवाओं से क्षमा प्रार्थी हैं। उनका यह बयान राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है, क्योंकि आमतौर पर ऐसे मामलों में सीधे तौर पर जिम्मेदारी स्वीकार करने वाले बयान कम ही देखने को मिलते हैं। पत्रकार वार्ता के दौरान नगरीय विकास एवं स्वायत्त शासन राज्यमंत्री झाबर सिंह खर्रा से राजस्थान में प्रस्तावित पंचायतीराज और नगरीय निकाय चुनावों को लेकर भी सवाल पूछा गया। इस पर उन्होंने स्पष्ट किया कि चुनाव कार्यक्रम घोषित करना और चुनाव की तारीख तय करना पूरी तरह से राज्य निर्वाचन आयोग का अधिकार क्षेत्र है। सरकार इस प्रक्रिया में हस्तक्षेप नहीं करती। उन्होंने कहा कि स्थानीय निकायों और पंचायतों में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को आरक्षण देने के संबंध में सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों की पालना सुनिश्चित की जा रही है। वर्तमान में राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग विभिन्न जिलों के आंकड़ों और सामाजिक परिस्थितियों का अध्ययन कर रहा है। आयोग की अंतिम रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद चुनावी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ होगा।
Read more 3rd Jun 2026
राजस्थान न्यूज़: राजस्थान सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग सेवाओं की पहुंच बढ़ाने के लिए एक महत्वाकांक्षी पहल शुरू की है। सहकारिता विभाग के ‘सहकार से समृद्धि’ अभियान के तहत अब ग्राम सेवा सहकारी समितियों (पैक्स) और प्राथमिक डेयरी सहकारी समितियों के माध्यम से ग्रामीणों को घर-घर बैंकिंग सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण आबादी को उनके गांव और घर के निकट ही आधुनिक बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध कराना है। सहकारिता विभाग के शासन सचिव एवं रजिस्ट्रार, सहकारी समितियां डॉ. समित शर्मा ने बुधवार को शासन सचिवालय में राजस्थान राज्य सहकारी बैंक के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक में इस योजना की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने सभी सक्रिय प्राथमिक डेयरी समितियों को ‘बैंक मित्र’ के रूप में विकसित कर उन्हें माइक्रो एटीएम उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। डॉ. शर्मा ने बताया कि राज्य सरकार का लक्ष्य 30 सितंबर 2026 तक 5,000 सहकारी समितियों और 31 मार्च 2027 तक सभी 12,000 सक्रिय प्राथमिक दुग्ध उत्पादक सहकारी समितियों को बैंक मित्र बनाकर माइक्रो एटीएम उपलब्ध कराना है। इस योजना के लिए नाबार्ड की वित्तीय सहायता भी प्राप्त हो रही है। माइक्रो एटीएम के माध्यम से ग्रामीणों को खाते का बैलेंस देखने, नकद निकासी एवं जमा, वित्तीय लेन-देन, ऋण वितरण और ऋण जमा कराने जैसी कई सुविधाएं उपलब्ध होंगी। अब तक लगभग 2,700 पैक्स और 557 प्राथमिक डेयरी समितियों को माइक्रो एटीएम उपलब्ध कराए जा चुके हैं। योजना का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि सहकारी बैंक अपने एफआईजी (FIG) पोर्टल पर ऐसी व्यवस्था विकसित कर रहे हैं, जिसके जरिए पैक्स और डेयरी समितियों के प्रबंधक ग्रामीणों के घर या कार्यस्थल तक पहुंचकर नए बैंक खाते खोल सकेंगे तथा जमा राशि संग्रहित कर सकेंगे। इससे ग्रामीणों को बैंक शाखाओं के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और बैंकिंग सेवाएं सीधे उनके द्वार तक पहुंच सकेंगी।
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राजस्थान न्यूज़: जयपुर में मॉडिफाइड वाहनों, फर्जी नंबर प्लेटों तथा वाहनों पर लगे अनधिकृत बोर्ड, पोस्टर और लाल पट्टियों के खिलाफ परिवहन विभाग और यातायात पुलिस ने संयुक्त रूप से विशेष अभियान शुरू किया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्देशों के बाद बुधवार से शहर के प्रमुख निकास मार्गों और टोल प्लाजा पर व्यापक जांच अभियान चलाया गया। अभियान के पहले ही दिन परिवहन विभाग और यातायात पुलिस की संयुक्त टीमों ने 1000 से अधिक वाहनों की जांच की। जांच के दौरान विभिन्न नियमों के उल्लंघन के मामलों में 200 से अधिक चालान जारी किए गए। अधिकारियों का कहना है कि यह अभियान आगामी दिनों में भी जारी रहेगा और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। आरटीओ प्रथम राजेंद्र सिंह शेखावत ने बताया कि जांच के दौरान कई वाहनों पर नियम विरुद्ध बोर्ड, स्टिकर और अन्य पहचान चिह्न लगे मिले। एक मामले में स्विफ्ट कार (RJ01 CE 5434) की नंबर प्लेट के ऊपर “सचिव प्रदेश कांग्रेस कमेटी, राज.” का बोर्ड लगा हुआ पाया गया। परिवहन विभाग के अनुसार वाहन पर इस प्रकार का बोर्ड लगाना निर्धारित नियमों के अनुरूप नहीं था। जांच के बाद वाहन चालक के खिलाफ कार्रवाई करते हुए 5,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया और वाहन से बोर्ड को तत्काल हटवा दिया गया। अभियान के दौरान अधिकारियों ने फर्जी नंबर प्लेट, नंबर प्लेट के डिजाइन में बदलाव, अनधिकृत लाल-नीली बत्ती, सरकारी या राजनीतिक पदनाम लिखे बोर्ड, अवैध मोडिफिकेशन और अन्य यातायात नियम उल्लंघनों की भी जांच की। कई वाहनों पर निर्धारित मानकों के विपरीत नंबर प्लेट और संशोधित संरचनाएं पाई गईं, जिन पर नियमानुसार कार्रवाई की गई। परिवहन विभाग का कहना है कि सड़क सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को मजबूत बनाने के उद्देश्य से यह अभियान चलाया जा रहा है। अधिकारियों ने वाहन मालिकों से अपील की है कि वे अपने वाहनों पर केवल वैध और अनुमत पहचान चिह्न ही लगाएं तथा मोटर वाहन अधिनियम के प्रावधानों का पालन करें। विभाग ने संकेत दिए हैं कि भविष्य में भी टोल प्लाजा, प्रमुख मार्गों और शहर के विभिन्न हिस्सों में ऐसे विशेष अभियान चलाए जाएंगे। नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों के खिलाफ चालान, जुर्माना और अन्य कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी।
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अजमेर न्यूज़: 1100 वर्ष पूर्व स्थापित मंदिर की बड़ी है मान्यता, दूर दराज से पहुंचते हैं हजारों श्रद्धालु
Read more 31st Aug 2022
अजमेर न्यूज़: 1968 से कस्बे की धार्मिक संस्था श्री ब्रह्म पुष्कर सेवा संघ कर रही है इस अनूठी परंपरा का निर्वहन
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अजमेर न्यूज़: 10 टीमें 8 - 8 वार्डो में जाकर घूम रही गायों का करेंगीं प्राथमिक उपचार
Read more 31st Aug 2022
राष्ट्रीय न्यूज़: गुजरात के अहमदाबाद में अवैध घुसपैठ और फर्जी पहचान के मामलों के खिलाफ क्राइम ब्रांच ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 300 से अधिक संदिग्ध लोगों को हिरासत में लिया है। प्रारंभिक जांच में इनमें से 166 लोगों की पहचान बांग्लादेशी नागरिकों के रूप में होने का दावा किया गया है, जबकि अन्य लोगों के दस्तावेजों और पहचान संबंधी रिकॉर्ड की जांच जारी है। जानकारी के अनुसार 2 जून की रात अहमदाबाद पुलिस और क्राइम ब्रांच की संयुक्त टीमों ने शहर के चंडोला, गुलाबनगर और खोडियारनगर क्षेत्रों में व्यापक तलाशी अभियान चलाया। अभियान के दौरान बड़ी संख्या में लोगों को पूछताछ और दस्तावेज सत्यापन के लिए हिरासत में लिया गया। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक हिरासत में लिए गए सभी व्यक्तियों को फिलहाल क्राइम ब्रांच परिसर में रखा गया है, जहां उनके पहचान पत्र, निवास संबंधी दस्तावेज और नागरिकता से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। जिन लोगों के दस्तावेज संदिग्ध पाए जा रहे हैं, उनके संबंध में विस्तृत सत्यापन की प्रक्रिया अपनाई जा रही है। क्राइम ब्रांच के अधिकारियों का कहना है कि चंडोला क्षेत्र में पिछले कुछ समय से लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं। इन कार्रवाइयों के कारण अवैध रूप से रहने वाले कई लोग अब एक स्थान पर स्थायी रूप से नहीं रह रहे हैं। जांच एजेंसियों को आशंका है कि कई लोग अपनी पहचान बदलकर शहर के विभिन्न हिस्सों में किराए के मकानों, झुग्गी-झोपड़ियों, मजदूर आवासों, होटलों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में रह रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार अभियान का उद्देश्य केवल अवैध रूप से रह रहे लोगों की पहचान करना ही नहीं, बल्कि फर्जी दस्तावेजों के संभावित नेटवर्क का भी पता लगाना है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि इन लोगों को स्थानीय स्तर पर किसने आवास उपलब्ध कराया और पहचान संबंधी दस्तावेज किस प्रकार प्राप्त किए गए। क्राइम ब्रांच ने संकेत दिए हैं कि यह अभियान आगे भी जारी रहेगा और शहर के अन्य क्षेत्रों में भी दस्तावेज सत्यापन तथा तलाशी अभियान चलाए जा सकते हैं। पुलिस ने मकान मालिकों, होटल संचालकों और व्यवसायिक प्रतिष्ठानों से भी किरायेदारों और कर्मचारियों का उचित सत्यापन सुनिश्चित करने की अपील की है। फिलहाल जांच एजेंसियां हिरासत में लिए गए सभी लोगों के दस्तावेजों की जांच कर रही हैं और सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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राष्ट्रीय न्यूज़: कर्नाटक की राजनीति में नए अध्याय की शुरुआत करते हुए वरिष्ठ कांग्रेस नेता डी. के. शिवकुमार ने बुधवार को राज्य के 24 वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण की। बेंगलुरु स्थित लोक भवन में आयोजित समारोह में शिवकुमार ने हाथ में भारतीय संविधान लेकर पद और गोपनीयता की शपथ ली। उनके इस कदम को संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता के प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है। डीके शिवकुमार को 30 मई को कांग्रेस विधायक दल की बैठक में सर्वसम्मति से नेता चुना गया था। इसके बाद पार्टी नेतृत्व ने उन्हें राज्य की कमान सौंपने का निर्णय लिया। वे पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया का स्थान लेंगे, जिन्होंने 28 मई को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया था। शपथ ग्रहण समारोह में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता, जनप्रतिनिधि और गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री के साथ वरिष्ठ कांग्रेस नेता जी. परमेश्वर ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली। इसके अलावा शिवकुमार मंत्रिमंडल के 13 अन्य विधायकों ने भी मंत्री पद की शपथ ग्रहण की। नए मंत्रिमंडल में कई अनुभवी और युवा चेहरों को स्थान दिया गया है। शपथ लेने वालों में सिद्धारमैया के पुत्र और एमएलसी यतींद्र सिद्धारमैया भी शामिल हैं। उनकी नियुक्ति को राजनीतिक और संगठनात्मक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सिद्धारमैया ने 20 मई 2023 से 28 मई 2026 तक मुख्यमंत्री पद संभाला। उनके कार्यकाल के बाद अब डीके शिवकुमार के नेतृत्व में कांग्रेस सरकार राज्य की नई नीतियों और प्रशासनिक प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाएगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मुख्यमंत्री बनने के बाद शिवकुमार के सामने विकास, बुनियादी ढांचे, निवेश, रोजगार और सामाजिक कल्याण योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने की बड़ी चुनौती होगी। साथ ही उन्हें पार्टी संगठन और सरकार के बीच संतुलन बनाए रखने की जिम्मेदारी भी निभानी होगी।
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गुप्त ध्वनि किरणों के साथ ओशो पर किसने हमला किया?...
गुप्त ध्वनि किरणों के साथ ओशो पर किसने हमला किया?... * ओशो के निजी दंत चिकित्सक देवगेट ओशो की मृत्यु से 4 दिन पहले हुई घटनाओं के बारे में बात करते हैं (शरीर को छोड़कर)... * 15 aजनवरी, 1990 को, मेरे जन्मदिन पर, मुझे शुन्यो से एक संदेश मिला: ओशो चाहते थे कि मैं उनके पेट का एक्स-रे ले। हम दंaत कक्ष में मिले। ओशो का शरीर पतला और बेकार लग रहा था, फिर भी मैंने उसे शक्तिशाली रूप से उपस्थित महसूस किया। मुझे शुन्यो से पता था कि वह हर दिन बीस घंटे से अधिक सो रहा था, हर शाम बुद्ध हॉल में कुछ क़ीमती मिनटों के लिए अपनी शारीरिक ऊर्जा को बचा रहा था। ओशो नेa मुझे बताया कि उसके हमलावरों की आवाज़ से उसका शरीर बहुत कमजोर हो गया था। उन्होंने कहा कि उनमें से शायद तीन, दो पुरुष और एक महिला, ध्वनि तरंगों पर ध्यानaa केंद्रित करने और अपने शरीर को लक्षित करने के लिए एक विशेष गठन में बैठे थे। यहां भारत में प्राचीन योगिक प्रथाएं हैं जहां लोग कुछ ध्वनियों, कुछ मंत्रों को जानते हैं, जो लोगों को नुक़सान पहुंचाने के लिए ध्वनि को केंद्रित कर सकते हैं। लेकिन मुझ पर हमला करaaने वाले ये लोग भारतीय नहीं हैं। वे वही लोग हैं जिन्होंने अमेरिका में पहले मुझे मारने की कोशिश की थी। वे तब सफल नहीं हो सके, और अब वे जो शुरू किया उसे पूरा कर ने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने मुझे बोलने से रोकने के लिए ज़हर की कोशिश की लेकिन मैं जारी रखने में कामयाब रहा। अब, पांच साल बाद वे वापस आ गए हैं। उन्होंने पहले बुद्ध हॉल में अपनी ध्वनि किरणों का उपयोग मेरे दिमाग़ पर हमला करने के लिए किया लेकिन मैं अपने दिमाग़ में नहीं हूं। मैं एक नो-मन हूं और उनकी आवाज़ का बहुत कम प्रभाव था। इसलिए उन्होंने अपनी रणनीति बदल दी, अब वे मेरे शरीर पर हमला कर रहे हैं। मेरे गरीब शरीर को उनकी किरणों से कोई सुरक्षा नहीं है। हर दिन यह कमजोर होता जाता है। वे मुझे मार नहीं सकते लेकिन वे मेरे शरीर को नुक़सान पहुंचा सकते हैं। अभी मेरे जिगर के क्षेत्र में बहुत दर्द हो रहा है। क्या आप इसे एक्स-रे कर सकते हैं? दुख की बात है, मैंने समझाया कि मेरी दंत एक्स-रे मशीन शायद अपर्याप्त थी क्योंकि यह केवल दांतों और जबड़े की छोटी फिल्में ले सकती थी, लेकिन हम कोशिश कर सकते थे। अमृतो को हमारे पास सबसे बड़ी एक्स-रे फ़िल्म मिली, जबकि मैंने इसकी बीम को चौड़ा करने के लिए डेंटल एक्स-रे मशीन के साथ जिग्गल किया। मैंने वह करने की कोशिश की जो ओशो पूछ रहा था। मैंने उसके जिगर के क्षेत्र की एक तस्वीर ली और फिर दंत विकास में बड़ी फ़िल्म विकसित करने में कामयाब रहा टैंक जिसे छोटी इंट्रा-ओरल डेंटल फ़िल्मों के लिए डिज़ाइन किया गया था, लेकिन परिणामी छवि धुंधली और अस्पष्ट थी। यह आख़िरी बार था जब मैंने ओशो को उसके भौतिक शरीर में देखा था। 19 जनवरी को शाम 4:30 बजे थे: मैं अपनी प्रेमिका के साथ अपने कमरे में था जब दरवाजे पर एक ज़रूरी दस्तक हुई। मनीषा, पीला और तनावग्रस्त दिख रही थी, ने पूछा कि क्या वह मेरे कमरे के फ़ोन का उपयोग कर सकती है। मुझे पता था कि वह केवल पूछेगी कि क्या कुछ असामान्य हो रहा है। अस्थायी सचिव के रूप में कार्य करते हुए वह इनर सर्कल के सदस्यों को फ़ोन कर रही थी और उन्हें कृष्णा हाउस में एक असाधारण बैठक में तुरंत आने के लिए कह रही थी। ओशो ने पंद्रह महीने पहले इक्कीस लोगों की एक कम्यून प्रबंधन टीम की स्थापना की थी, इसे इनर सर्कल का नाम दिया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका काम कम्यून के दिन-प्रतिदिन चलने का प्रबंधन करना था। मैं मूल चयन में नहीं था, लेकिन कुछ महीने बाद मुझे शामिल होने के लिए कहा गया था। फ़ोन करने के बाद, मनीषा ने कहा, “गीट, तुमने सुना कि मैं दूसरों को क्या बता रहा था। बैठक कृष्णा हाउस की छत पर ब्लू रूम में है। क्या आप वहां तुरंत जा सकते हैं?” इससे पहले कि मैं कोई सवाल पूछ पाता, वह जल्दी से गलियारे में चली गई, स्पष्ट रूप से एक और महत्वपूर्ण कार्य में शामिल थी। मैंने दोपहर के अधिकांश समय अजीब तरह से विपुल महसूस किया था। बाहरी मामलों की उथल-पुथल के बावजूद मैं कई दिनों से उत्साहित महसूस कर रहा था। मेरे दिल में ख़ुशी का एक अकथनीय नृत्य था। अंदर से मुझे उत्साह, आनंद महसूस हुआ। ब्लू रूम में पहुंचने पर, मैंने देखा कि अधिकांश इनर सर्कल पहले से ही वहां इकट्ठा हो चुके थे। माहौल तनावपूर्ण और तनावपूर्ण था। मेरा अपना उत्साह जगह से बाहर लग रहा था। मैं बैठ गया और इंतज़ार किया। कुछ मिनटों के बाद जयेश ने अमृतो के साथ प्रवेश किया। यह देखने के लिए संक्षेप में चारों ओर देखते हुए कि हम सभी मौजूद हैं, उन्होंने एक दृढ़, हालांकि शांत आवाज़ में कहा, “मुझे लगता है कि इसे लपेटने का कोई तरीक़ा नहीं है। मैं आपको सीधे बताऊंगा। ओशो ने कुछ समय पहले लगभग 4:45 बजे अपना शरीर छोड़ दिया था दोपहर।” स्तब्ध, मैंने अपनी घड़ी को देखा। शाम के 5:15 बजे थे। उपस्थित दो या तीन लोग रोने लगे। जयेश ने जल्दी से बीच में टोका, “देखो, मुझे तुम्हारी सारी मदद की ज़रूरत है। कृपया अभी तक अलग न हों। मुझे आप सभी की ज़रूरत है कि ओशो के भेजने को उतना ही सुंदर बनाने में मदद करें जितना वह हकदार है। यह आख़िरी चीज है जो हम उसके लिए कर सकते हैं भौतिक शरीर, चलो इसे अद्भुत बनाते हैं। उसने मुझे ठीक से बताया कि वह कैसे चाहता है कि ऐसा हो। उसने मुझे हर चीज के लिए विस्तृत निर्देश दिए, लेकिन मुझे यहां हर किसी की मदद की ज़रूरत है।” जयेश के शब्दों को सुनकर मेरा पहले का उत्साह सदमे में बदल गया था, लेकिन मैंने ओशो को अपने लोगों के साथ अपने अंतिम उत्सव का आनंद लेने में सक्षम बनाने के लिए हमारी मदद के लिए जयेश की अपील को स्पष्ट रूप से सुना। जैसे ही मैंने ब्लू रूम छोड़ा, जयेश ने मुझे बताया कि ओशो ने अनुरोध किया था कि मैं उनके शरीर को जलते हुए घाटों तक ले जाने के लिए एक वाहक बनूं। गतिविधि और भ्रमित भावनाओं के एक धुंध में मुझे याद है कि ओशो के इस अंतिम उपहार के लिए बेहद आभारी महसूस कर रहा था। - स्वामी देवगीत पुस्तक : ओशो - द फर्स्ट बुद्ध इन द डेंटल चेयर अध्याय: 17 अध्याय का नाम: ओशो का अंतिम दंत नाटक: अधिनियम V अंतिम सुनहरी झलक
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