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July 16, 2026
रायपुर: देशभर में प्रदूषण कम करने और कच्चे तेल के आयात को घटाने के लिए 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित ईंधन यानी E20 पेट्रोल के इस्तेमाल को तेजी से बढ़ावा दिया जा रहा है। इसी बीच छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से E20 पेट्रोल के कारण कार का इंजन पूरी तरह खराब होने का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है।
इस संवेदनशील मामले पर ऐतिहासिक सुनवाई करते हुए उपभोक्ता अदालत (कंज्यूमर कोर्ट) ने कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड और उसके अधिकृत (ऑथराइज्ड) डीलर को सेवा में गंभीर लापरवाही का दोषी माना है। कोर्ट ने ग्राहक के पक्ष में कड़ा फैसला सुनाते हुए आदेश दिया है कि कंपनी या तो पीड़ित ग्राहक को नई कार दे, अन्यथा वाहन की पूरी कीमत करीब 20.5 लाख रुपए ब्याज और अन्य खर्चों समेत लौटाए। E20 ईंधन से वाहन खराब होने पर ग्राहक को इस तरह का भारी मुआवजा दिए जाने का यह देश का पहला और ऐतिहासिक मामला है।
इंजन नहीं था E20 के अनुकूल, फिर भी ग्राहक को धोखे से बेची पुरानी कार
मामले की सुनवाई के दौरान कंज्यूमर कोर्ट ने पाया कि बेची गई कार का इंजन E20 फ्यूल (20% एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल) को झेलने के तकनीकी रूप से अनुकूल नहीं था, इसके बावजूद कंपनी और डीलर ने यह बात छिपाकर ग्राहक को गाड़ी बेच दी।
इस मामले के पीड़ित डॉ. प्रेमराज देबता ने बताया कि उन्होंने जून 2024 में मारुति सुजुकी की प्रीमियम नेक्सा (NEXA) डीलरशिप से 'ग्रैंड विटारा स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड जेटा प्लस' (Grand Vitara Strong Hybrid Zeta Plus) कार खरीदी थी। कार खरीदते समय डीलर ने उन्हें भरोसा दिया था कि यह गाड़ी दिसंबर 2023 की मैन्युफैक्चरिंग (निर्मित) है। हालांकि, बाद में जब विवाद बढ़ा और उपभोक्ता आयोग के समक्ष रिकॉर्ड पेश हुए, तो एक और बड़ा धोखा सामने आया। रिकॉर्ड के अनुसार, वह कार वास्तव में जनवरी 2023 में मैन्युफैक्चर हुई थी, यानी डीलर ने ग्राहक को करीब डेढ़ साल पुराना स्टॉक धोखे से बेच दिया था।
5 महीने बाद अचानक बंद हुई हाइब्रिड कार, टैंक से निकला सफेद पदार्थ
चूंकि डॉ. प्रेमराज देबता को अपने पेशे के सिलसिले में रोजाना करीब 150 से 200 किलोमीटर तक का लंबा सफर तय करना पड़ता था, इसीलिए उन्होंने बेहतर माइलेज के उद्देश्य से मारुति की महंगी स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड गाड़ी का चयन किया था।
शुरुआती 5 महीनों तक तो वाहन का परफॉर्मेंस ठीक रहा, लेकिन 11 नवंबर 2024 को अचानक सफर के दौरान कार के डैशबोर्ड पर 'इंजन मालफंक्शन' (Engine Malfunction) का रेड अलर्ट आ गया और चलती गाड़ी बीच सड़क पर ही पूरी तरह बंद हो गई। इसके बाद कार को टो करके डीलरशिप के वर्कशॉप ले जाया गया।
डीलर ने लगाया मिलावटी पेट्रोल का आरोप, पेट्रोल पंप की जांच में ईंधन निकला सही
वर्कशॉप में जब तकनीकी जांच की गई, तो डीलरशिप के मैकेनिक्स और अधिकारियों ने कार की खराबी का ठीकरा मिलावटी पेट्रोल पर फोड़ दिया। उन्होंने कार का फ्यूल टैंक खाली किया। टैंक से निकाले गए पेट्रोल की जब जांच की गई, तो उसके नीचे एक अलग ही तरह का गाढ़ा सफेद पदार्थ जमा हुआ मिला (जो कि असल में पेट्रोल में मिश्रित एथेनॉल के इंजन पार्ट्स से रिएक्शन के कारण अलग होने से बना था)।
इसके बाद डॉ. देबता ने तुरंत संबंधित पेट्रोल पंप और कार कंपनी से लिखित शिकायत दर्ज कराई। हालांकि, जब पेट्रोल पंप के ईंधन की आधिकारिक लैब जांच की गई, तो वहां का पेट्रोल पूरी तरह मानकों के अनुरूप और सही पाया गया। इसके बावजूद, वर्कशॉप से ठीक होकर आने के बाद भी डॉ. देबता की कार बार-बार तकनीकी खराबी के कारण बंद होती रही और उसका इंजन जवाब दे गया।
45 दिन का अल्टीमेटम: E20 कंपैटिबल नई कार दे कंपनी, वरना चुकाए पूरा हर्जाना
परेशान होकर डॉ. प्रेमराज ने कंज्यूमर कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जहां तकनीकी विशेषज्ञों और दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने माना कि यह कार E20 ईंधन के अनुकूल नहीं थी और पुराना मॉडल होने के कारण एथेनॉल मिश्रण ने इसके इंजन को तबाह कर दिया।
कंज्यूमर कोर्ट ने अपने सख्त आदेश में मारुति सुजुकी और डीलर को 45 दिनों का अल्टीमेटम दिया है। कोर्ट ने कहा है कि इस समयावधि के भीतर ग्राहक को उसी मॉडल की बिल्कुल नई कार दी जाए, जो पूरी तरह E20 फ्यूल कंपैटिबल (अनुकूल) हो। यदि कंपनी 45 दिनों में नई कार देने में विफल रहती है, तो उसे अनिवार्य रूप से वाहन की पूरी ऑन-रोड कीमत (लगभग 20.5 लाख रुपए), अदालती कार्रवाई का खर्च और मानसिक प्रताड़ना का हर्जाना ग्राहक के बैंक खाते में ट्रांसफर करना होगा।
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