July 30, 2020
July 29, 2020
July 28, 2020
July 25, 2020
July 24, 2020
July 23, 2020
May 25, 2020
क़लमकार: *कोरोना महाकाल में ईद मुबारक कहना भी औपचारिकता है। जिस तरह ज़िले में ईद का त्यौहार मनाया जा रहा है, वह परंपराओं की खानापूर्ति जैसा ही है। बच्चों का मन रखने जैसी बात !नाटक के किसी ख़ुश दिखने वाले किरदार जैसा अभिनय ! अभावों और संत्रासों के बीच ,इतिहास के लंबे अंतराल में ऐसी बदनसीब ईद शायद ही कभी मनाई गई हो। दुखी मन से ईद मनाए जाने की मजबूरी पर यह कहकर सब्र किया जा सकता है कि अल्लाह जैसी तेरी मर्जी !! तूने क्या सोचकर दरवाज़े बंद किए तू जाने !! अगर यह हमारे किसी गुनाह की सज़ा है तो हम इसे मंजूर करते हैं। माफ़ी चाहते हैं। हमें माफ़ कर परवरदिगार !! हमें माज़रत दे दे।*
May 22, 2020
क़लमकार: आजकल मैं हर रोज़ अपने घर पर सद्बुद्धि यज्ञ कर रहा हूँ। उसी तरह जिस तरह वैशाली नगर में श्री राधे सोशल फाउंडेशन कोरोना से लड़ने के लिए रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाला काढ़ा बांट रहा है। काढ़े से कोरोना ख़त्म नहीं होता मगर यह निर्विवाद सत्य है कि इससे लोगों में कोरोना से लड़ने के लिए आत्मविश्वस और प्रतिरोधक क्षमता ज़रूर बढ़ जाती है
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