क़लमकार: राजस्थान में बीजेपी और कांग्रेस का चाल चरित्र ख़तरे में
गहलोत का जादू बदला हाथ की सफ़ाई में_
पूनिया पर भारी पड़ रही हैं वसुंधरा_
कोरोना ले रहा है दोनों के ही मज़े_
सुरेन्द्र चतुर्वेदी
राजस्थान में सियासत कोरोना पर भारी पड़ रही है।
क़लमकार: एक बहुत कड़वा किन्तु सच्चा ब्लॉग, जरूर पढ़ें फिर चाहे गालियाँ दें या शाबाशी
सुरेन्द्र चतुर्वेदी
राजस्थान अपने सबसे बुरे समय से गुज़र रहा है। कोरोना का कहर, आर्थिक संकट और सियासत की उठापटक के कारण राजस्थान का विकास सिर्फ़ काग़ज़ों और सरकारी फाइलों पर ही नज़र आने लगा है।
क़लमकार: राम के लौटने की बधाई दे रहा कोरोना भी
सूर्यागढ़ बना तिहाड़_
वसुंधरा दिल्ली तलब_
सुरेन्द्र चतुर्वेदी
ज़िले वासियों को राम मंदिर की बधाई। वनवास के बाद जैसे भगवान राम की घर वापसी हुई हो।
क़लमकार: जादूगर सइयाँ, छोड़ो मेरी बइयाँ, हो गई आधी रात, अब घर जाने दो
सचिन और गहलोत के बाड़े में अब ये गीत बजना शुरू_
गहलोत की प्रत्यंचा पड़ी ढीली_
हाईकमान का रुख़ नर्म भाजपा के गर्म_
सुरेन्द्र चतुर्वेदी
_जादूगर सैयां, छोड़ो मोरी बैयां , हो गई आधी रात ,अब घर जाने दो.......।
क़लमकार: कोरोना ,काँग्रेस और भाजपा तीनों ही निबटा रहे हैं राजस्थान को
अजमेर में काँग्रेस और भाजपा दोनों के हाल बेहाल_
वसुंधरा की चिंगारी फूटी तो सचिन, गहलोत जैसा ही युद्ध होगा भाजपा में_
सुरेन्द्र चतुर्वेदी
कोरोना की तबाही कोंग्रेस की बेहयाई और भाजपा की कार्रवाई राज्य में जारी है।
क़लमकार: सचिन रखना चाहते हैं दोनों हाथों में लड्डू वो भी मोतीचूर के
भाजपा बनाए तो मुख्यमंत्री काँग्रेस बनाए तो भी मुख्यमंत्री_
हाई कमान समझौता एक्सप्रेस चलाने में जुटी_
गहलोत को केंद्र में सर्वोच्च पद की उम्मीद_
भाजपा मछली को पानी में डुबो कर मारने के मूड में_
सुरेन्द्र चतुर्वेदी
क़लमकार: क्या सचिन ही होंगे अगले मुख्यमंत्री
जैसलमेर के अभेद्य दुर्ग में विधायकों से मिलने पहुंचा कोरोना_
क्या गहलोत सत्ता बचा पाएंगे_
अदालत पर ही टिका है सब गणित_
सुरेन्द्र चतुर्वेदी
सरकार जैसलमेर रहे या जयपुर कोरोना पूरे राज्य में अब लॉकडाउन की स्थिति में पहुंच गया है।
क़लमकार: तुम मुझे मारोगे इसकी तो मुझे उम्मीद थी, मगर उस दिन क्यों मारा जिस दिन बकरा ईद थी
बकरे हुए जैसलमेर ट्रांसफ़र_
सूर्या गढ़ ! जहाँ सबसे बड़ा समलैंगिक विवाह हुआ था बकरों का ख़ुदा हाफ़िज़_
सुरेन्द्र चतुर्वेदी
क़लमकार: प्रकाशन हेतु- दानवीर सही भी हो ,जरूरी तो नहीं।
कर्ण की छवि आज भी भारतीय जनमानस में एक ऐसे महायोद्धा की है जो जीवनभर प्रतिकूल परिस्थितियों से लड़ता रहा। बहुत से लोगों का यह भी मानना है कि कर्ण को कभी भी वह सब नहीं मिला जिसका वह वास्तविक रूप से अधिकारी था।
क़लमकार: प्रकाशन हेतु :- रंग गोरा ही देते (कविता )
थोड़ा ही देते
लेकिन रंग गोरा ही देते
इस लाचार बदन पे
न स्याह रातों का बसेरा देते
कैसा खिलेगा यौवन मेरा
कब मैं खुद पे इतराऊँगी
उच्छ्वास की बारिश करा के
न कोहरों का घना पहरा देते