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April 3, 2025
पुष्कर में श्रीमद् भागवत कथा का भव्य आयोजन, भक्तिभाव में डूबी पवित्र नगरी
पवित्र नगरी पुष्कर के प्रेम प्रकाश आश्रम में आज, 3 अप्रैल 2025 को, प्रख्यात कथावाचक श्री पुंडरीक महाराज के श्रीमुख से श्रीमद् भागवत कथा का शुभारंभ हुआ। इस भव्य आयोजन में देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु उपस्थित रहे, वहीं यूट्यूब पर लाइव प्रसारण के माध्यम से भी भक्तों ने इस आध्यात्मिक यात्रा का आनंद लिया। कथा 9 अप्रैल तक चलेगी, जिसमें भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं का विस्तार से वर्णन किया जाएगा।
पुष्कर तीर्थ की महिमा पर प्रकाश
कथा के प्रथम दिन श्री पुंडरीक महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं के साथ-साथ पुष्कर तीर्थ की अपार महत्ता को श्रद्धालुओं के समक्ष रखा। उन्होंने कहा, "पुष्कर एक ऐसा तीर्थ है जहां भगवान ब्रह्मा ने सृष्टि रचने का संकल्प लिया। यहाँ का पवित्र सरोवर केवल जल नहीं, बल्कि अमृत है जो आत्मा को शुद्ध करता है।"
महाराज ने यह भी बताया कि श्रीमद्भागवत पुराण में पुष्कर का उल्लेख विशेष रूप से किया गया है, क्योंकि यह स्थान तप, ध्यान और भक्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। "यहां की पवित्रता श्रीकृष्ण की भक्ति को और गहरा करती है, क्योंकि जहां ब्रह्मा ने सृष्टि रची, वहीं कृष्ण का आशीर्वाद स्वतः प्राप्त होता है,"
श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन
श्री पुंडरीक महाराज ने कथा में भगवान श्रीकृष्ण के बाल रूप की लीलाओं का सुंदर वर्णन किया। उन्होंने विशेष रूप से माखन चोरी की कथा सुनाई और भक्तों को संबोधित करते हुए कहा, "जिस प्रकार श्रीकृष्ण माखन के लिए माता यशोदा से छिपते थे, वैसे ही भक्त को अपने मन की माया से बचकर भगवान के चरणों में शरण लेनी चाहिए।"
उन्होंने कहा कि पुष्कर की यह भूमि हमें सिखाती है कि सच्ची भक्ति ही जीवन का आधार है और जो व्यक्ति अपने अहंकार का त्याग कर प्रभु की शरण में जाता है, वही वास्तविक मोक्ष प्राप्त कर सकता है।
पुष्कर तीर्थ – भक्ति और मोक्ष का द्वार
महाराज ने पुष्कर तीर्थ की महिमा का गुणगान करते हुए कहा, "प्राचीन काल में ऋषियों ने यहां तपस्या की और भगवान से साक्षात्कार प्राप्त किया। आज भी यह स्थान भक्तों के लिए मोक्ष का द्वार है।" उन्होंने भक्तों से आह्वान किया कि वे इस पवित्र भूमि की आध्यात्मिकता को अपने जीवन में अपनाएं और श्रीकृष्ण के गुणों को आत्मसात करें।
डिजिटल माध्यम से भक्तों की सहभागिता
इस कथा का एक विशेष आकर्षण इसका डिजिटल प्रसारण रहा। यूट्यूब के माध्यम से भारत, अमेरिका, यूरोप और अन्य देशों के हजारों भक्त इस कथा से जुड़े और आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव किया। आयोजकों डोल्या परिवार, समापन होगा। पंडित सुरेश चंद्र शास्त्री, लक्ष्मीनारायण शर्मा, विनोद शर्मा, प्रेमचंद शर्मा, नरेंद्र शर्मा, वेंकटेश शर्मा, मनीष शर्मा, दीपक शर्मा, मोहित शर्मा, मयूर शर्मा, रितिक शर्मा, मानस शर्मा, युवराज शर्मा रविकांत शर्मा, शशिकांत शर्मा, विकास भड़ाना, संदीप, राजीव लोचन, पंडित लक्ष्मीनारायण शास्त्री, और गोपाल करीठ ने बताया कि यह तकनीकी पहल दूर-दराज के भक्तों को भी इस पावन कथा से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम बन गई है।
भव्य कलश यात्रा और श्रद्धालुओं का उत्साह
कथा के शुभारंभ से पहले, वराह घाट से भव्य कलश यात्रा निकाली गई, जिसमें सैकड़ों महिलाओं ने भाग लिया। श्रद्धालु महिलाओं ने लाल चुनरी धारण कर पवित्र जल से भरे कलश अपने सिर पर उठाए और पूरे पुष्कर नगर में भक्ति और श्रद्धा का वातावरण बना दिया। इस दौरान विभिन्न स्थानों पर स्थानीय नागरिकों ने फूलों की वर्षा कर यात्रा का भव्य स्वागत किया।
कथा सुनने वालों के लिए विशेष उपहार की घोषणा
श्री पुंडरीक महाराज ने इस कथा को और भी रोचक बनाने के लिए एक विशेष घोषणा की। उन्होंने कहा कि जो भी भक्त कथा के सातों दिन ध्यानपूर्वक भगवान श्रीकृष्ण के 108 नामों को सुनकर उन्हें लिखकर प्रस्तुत करेगा, उसे उनकी ओर से विशेष उपहार प्रदान किया जाएगा। इस अनूठे प्रयोग से भक्तों में अनुशासन और भक्ति की भावना और भी प्रबल हो रही है।
श्रोताओं के मन में जागृत भक्ति की भावना
कथा के अंत में महाराज ने कहा, "जो व्यक्ति दूसरों के लिए जीता है, वही सच्चा भक्त है। यह कथा केवल सुनने के लिए नहीं, बल्कि जीवन में उतारने के लिए है।" उनका यह संदेश श्रद्धालुओं के हृदय में गहराई तक उतर गया।
आने वाले दिनों में कथा में भगवान श्रीकृष्ण की रासलीला, कंस वध, गोवर्धन पूजा और अन्य महत्वपूर्ण प्रसंगों का वर्णन किया जाएगा। पुष्कर में हो रही यह भागवत कथा आधुनिक युग में आध्यात्मिकता के प्रसार का एक उत्तम उदाहरण बन रही है।
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