राजस्थान न्यूज़: जयपुर। सीकर रोड स्थित खेतान चौराहे के पास बुधवार, 14 अक्टूबर को दोपहर एक बेकाबू रोडवेज बस ने चार वाहनों को टक्कर मार दी। हादसे में बाइक पर अपने बेटे के साथ जा रहीं 49 वर्षीय तुलसी देवी की मौत हो गई, जबकि स्कूटी सवार महेश चौधरी गंभीर रूप से घायल हो गए। उनके पैर में फ्रैक्चर आया है। पुलिस ने बस चालक राकेश कुमार (30) निवासी श्रीमाधोपुर को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। हादसे का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है, जिसमें बस पहले एक कार को पीछे से टक्कर मारती और फिर दूसरे वाहनों को चपेट में लेती दिख रही है। पहले कार को पीछे से टक्कर, फिर बाइक चपेट में मुरलीपुरा थानाधिकारी वीरेंद्र कुरील के अनुसार हादसा दोपहर करीब 2:45 बजे हुआ। उस समय खेतान चौराहे के पास सड़क के कट पर कुछ वाहन खड़े थे। श्रीमाधोपुर से जयपुर की ओर आ रही रोडवेज बस ने आगे चल रही नीले रंग की कार को पीछे से जोरदार टक्कर मारी। फुटेज के मुताबिक टक्कर के बाद कार चालक वाहन पर नियंत्रण नहीं रख पाया और कार पास खड़ी बाइक से टकरा गई, जिस पर तुलसी देवी अपने बेटे के साथ सवार थीं। तुलसी देवी गंभीर रूप से घायल हो गईं और उनके बेटे को भी चोटें आईं। बस के अगले टायर के नीचे फंसी स्कूटी कार और बाइक को चपेट में लेने के बाद अनियंत्रित बस ने एक स्कूटी को भी टक्कर मार दी। टक्कर इतनी तेज थी कि स्कूटी बस के अगले टायर के नीचे फंस गई। इसमें सवार महेश चौधरी के पैर में फ्रैक्चर के साथ शरीर के अन्य हिस्सों में भी चोटें आईं। हादसे के बाद सड़क पर अफरा-तफरी मच गई और मौके पर भीड़ जमा हो गई। अस्पताल पहुंचने से पहले तुलसी देवी ने दम तोड़ा आसपास की दुकानों पर मौजूद व्यापारी और राहगीर तुरंत मदद के लिए पहुंचे। लोगों ने घायल तुलसी देवी, उनके बेटे और महेश चौधरी को कांवटिया अस्पताल पहुंचाया। गंभीर रूप से घायल तुलसी देवी ने अस्पताल पहुंचने से पहले ही दम तोड़ दिया। बाकी घायलों का उपचार कराया गया। चालक ने कहा— ब्रेक के नीचे वस्तु आ जाने से नहीं लगे ब्रेक प्रारंभिक पूछताछ में बस चालक राकेश कुमार ने कहा कि ब्रेक के नीचे कोई वस्तु आ जाने के कारण वह समय पर ब्रेक नहीं लगा पाया और बस अनियंत्रित हो गई। पुलिस सीसीटीवी फुटेज, वाहन की तकनीकी स्थिति और मौके से जुड़े अन्य साक्ष्यों के आधार पर जांच कर रही है। हादसा तकनीकी खराबी से हुआ, ब्रेक फेल होने से या चालक की लापरवाही से — यह जांच के बाद ही तय होगा। बस पर पहले से 13 चालान, 92 हजार का जुर्माना हादसे में शामिल रोडवेज बस के यातायात नियमों के उल्लंघन से जुड़े रिकॉर्ड भी सामने आए हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार बस के खिलाफ पहले से 13 चालान लंबित हैं, जिनमें कुल 92 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया है। इनमें शाहजहांपुर टोल से बिना परमिट गुजरने के सात चालान शामिल हैं, जो जनवरी में काटे गए और जिनमें प्रत्येक पर 10 हजार रुपए का जुर्माना लगा — यानी अकेले इसी मद में 70 हजार रुपए। बाकी छह चालानों में ओवरस्पीडिंग के तीन तथा प्रदूषण प्रमाणपत्र और नो-पार्किंग से जुड़े तीन चालान हैं। बस पर पहले से लंबित चालान चालान संख्या जुर्माना शाहजहांपुर टोल से बिना परमिट 7 प्रत्येक पर 10 हजार, कुल 70 हजार ओवरस्पीडिंग 3 — प्रदूषण प्रमाणपत्र और नो-पार्किंग 3 — कुल 13 92 हजार रुपए रोडवेज बसों से जुड़े हादसे पहले भी राज्य में रोडवेज बसों से जुड़े हादसे पहले भी सामने आते रहे हैं। इसी महीने 4 अक्टूबर को बांसवाड़ा-उदयपुर हाईवे पर रोडवेज बस की टक्कर से दो किशोरों की मौत हो गई थी। सितंबर में नीमराना में हरियाणा रोडवेज की बस ने बाइक को करीब 50 मीटर तक घसीटा था, जिसमें मामा और आठ साल की भांजी की जान गई थी।
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राजस्थान न्यूज़: जयपुर। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत बुधवार को दिल्ली के भाटी कलां पहुंचे और भरतपुर के वैर में मारे गए पूर्व भाजपा विधायक अतर सिंह भड़ाना को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने शोकाकुल परिजनों से मुलाकात कर ढांढस बंधाया। इसके बाद सोशल मीडिया पर लिखी पोस्ट में गहलोत ने राज्य सरकार पर हमला बोलते हुए मुख्यमंत्री और गृह राज्यमंत्री के पद पर बने रहने के नैतिक अधिकार पर ही सवाल उठा दिया। गहलोत ने लिखा कि परिजनों ने जो घटनाक्रम बताया, वह बेहद दुख पहुंचाने वाला है। उन्होंने कहा कि भाजपा के एक पूर्व विधायक की मुख्यमंत्री और गृह राज्यमंत्री के गृह जिले में इस तरह हत्या होना बताता है कि राजस्थान में कानून-व्यवस्था दम तोड़ चुकी है। आज भाटी कलां, दिल्ली पहुंचकर पूर्व भाजपा विधायक स्व. श्री अतर सिंह भड़ाना को श्रद्धांजलि अर्पित की एवं शोकाकुल परिजनों को ढांढस बंधाया। — Ashok Gehlot (@ashokgehlot51) October 14, 2026‘दो साल से विवाद पुलिस की जानकारी में था’ गहलोत ने कहा कि इस इलाके में दो साल से क्रशर और माइंस को लेकर विवाद चल रहा था और यह पूरा प्रकरण पुलिस की जानकारी में था। इसके बावजूद ऐसी घटना होना पुलिस और सरकार की गंभीर लापरवाही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को आईजी और एसपी को जयपुर तलब कर पूरी घटना की जानकारी लेनी चाहिए थी और उसके बाद कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए थी। इससे पहले सोमवार को भी उन्होंने इसी मामले में सरकार को घेरा था। कार्रवाई को बताया ‘फौरी’, नौ अधिकारियों पर हुई थी कार्रवाई गहलोत ने राज्य सरकार की कार्रवाई को फौरी बताते हुए कहा कि एक एसएचओ को सस्पेंड, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक और उप अधीक्षक को एपीओ तथा कुछ पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर कर इतिश्री कर ली गई, जिससे जनता में आक्रोश है। मुख्यमंत्री की उच्चस्तरीय समीक्षा के बाद पुलिस विभाग ने कुल नौ अधिकारियों पर कार्रवाई की थी — वैर थानाधिकारी धीरेन्द्र सिंह को निलंबित किया गया, छह अधिकारियों को एपीओ किया गया और दो को पद से हटाया गया। इस घटना के बाद क्या मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और गृह राज्यमंत्री जवाहर सिंह बेढम का अपने पद पर बने रहने का नैतिक अधिकार बचा है? — अशोक गहलोत, पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत ने क्या कहा परिजनों से मिलकर जो घटनाक्रम पता चला, वह बेहद दुख पहुंचाने वाला मुख्यमंत्री और गृह राज्यमंत्री के गृह जिले में हत्या, कानून-व्यवस्था दम तोड़ चुकी दो साल से क्रशर-माइंस विवाद पुलिस की जानकारी में था, फिर भी घटना हुई मुख्यमंत्री को आईजी-एसपी को जयपुर तलब करना चाहिए था सरकार अब तक प्रकरण की गंभीरता नहीं समझ पाई मामले में अब तक क्या पूर्व विधायक की पत्नी कमलेश भड़ाना की रिपोर्ट पर वैर थाने में मुकदमा दर्ज हुआ था, जिसमें 80 लोगों को आरोपी बनाया गया और 30 नामजद हैं। 13 अक्टूबर तक पांच आरोपी गिरफ्तार किए जा चुके थे, और बाकी की तलाश के लिए 25 से 30 टीमें लगाई गई हैं।
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राजस्थान न्यूज़: जोबनेर के महेशवास पहाड़ी में पत्थरों की खान में मजदूरों के दबने के मामले में रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद गुरुवार सुबह मलबे से एक मजदूर का शव बाहर निकाला गया। पत्थरों की खान में दो मजदूर दबे थे, जिसमें से एक को पहले घायल अवस्था में निकालकर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। दूसरे मजदूर की तलाश में रातभर युद्धस्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया।करीब 60 फीट ऊंची पहाड़ी से हजारों टन पत्थर गिरने से हड़कंप मच गया था। दूसरे मजदूर को निकालने के लिए SDRF और सिविल डिफेंस की टीमें जुटी हुई थीं। आधा दर्जन JCB और पोकलेन मशीनों से युद्धस्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन जारी रहा।स्थानीय ग्रामीणों ने पहाड़ी पर अवैध खनन होने के गंभीर आरोप लगाए हैं। सूचना मिलते ही प्रशासन और पुलिस के आला अधिकारी देर रात से मौके पर मौजूद रहे। सांभर SDM ऋषिराज कपिल, ASP नीरज पाठक सहित पुलिस अधिकारी रेस्क्यू अभियान की निगरानी में जुटे रहे। जोबनेर DSP पन्नालाल जांगिड़, रेनवाल SHO राजेंद्र कुमार, मौखमपुरा SHO सुरेश गुर्जर और फुलेरा SHO हीरालाल सैनी सहित पुलिस जाब्ता मौके पर तैनात रहा। जोबनेर थानाधिकारी मोतीलाल शर्मा ने बताया कि रात्रि से रेस्क्यू ऑपरेशन जारी रहा और गुरुवार सुबह 8 बजे मलबे मे दबे मजदूर के शव को बाहर निकाल लिया गया।पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए राजकीय अस्पताल की मोर्चरी मे रखवाया है।मामले की जांच जारी है।
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उदयपुर न्यूज़: उत्तर पश्चिम रेलवे महिला कल्याण संगठन, अजमेर मंडल के तत्वावधान में आयोजित 'ऑन द स्पॉट' ड्राइंग एवं निबंध प्रतियोगिता का परिणाम घोषित कर पुरस्कार वितरण समारोह आयोजित किया गया।कार्यक्रम संगठन की अध्यक्षा श्रीमती रिंकल भूतड़ा की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। इस अवसर पर संगठन की सचिव श्रीमती ज्योति ऊषाहरा, कोषाध्यक्ष श्रीमती सुषमा कुमारी सहित कार्यकारिणी के अन्य सदस्य विशेष रूप से उपस्थित रहे। प्रतियोगिता में बच्चों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और अपनी रचनात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन किया। निर्णायकों के मूल्यांकन के पश्चात निबंध प्रतियोगिता में 9 तथा ड्राइंग प्रतियोगिता में 9, यानी कुल 18 प्रतिभाशाली बच्चों को उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रमाण-पत्र एवं पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।समारोह को संबोधित करते हुए अध्यक्षा श्रीमती रिंकल भूतड़ा ने सभी विजेता बच्चों को बधाई दी और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि इस प्रकार की रचनात्मक प्रतियोगिताएं बच्चों में आत्मविश्वास और कलात्मक अभिव्यक्ति को बढ़ावा देती हैं। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी सदस्यों और बच्चों का आभार व्यक्त किया गया।
Read more 28th Sep 2026
अजमेर न्यूज़: 1100 वर्ष पूर्व स्थापित मंदिर की बड़ी है मान्यता, दूर दराज से पहुंचते हैं हजारों श्रद्धालु
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अजमेर न्यूज़: 1968 से कस्बे की धार्मिक संस्था श्री ब्रह्म पुष्कर सेवा संघ कर रही है इस अनूठी परंपरा का निर्वहन
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अजमेर न्यूज़: 10 टीमें 8 - 8 वार्डो में जाकर घूम रही गायों का करेंगीं प्राथमिक उपचार
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राष्ट्रीय न्यूज़: नई दिल्ली। 12 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट परिसर में विपक्षी नेताओं के जुटने के मामले में गुरुवार को सुनवाई हुई। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि कोई भी अदालत को डरा-धमकाकर दबाव में नहीं ला सकता और ऐसी कोशिशों पर कोई ध्यान नहीं देता। अदालत ने राहुल गांधी, अखिलेश यादव समेत 16 नेताओं को नोटिस जारी किया। साथ ही एसआईआर और चुनाव आयोग के फैसलों के खिलाफ इन्हीं नेताओं की याचिका पर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग से जवाब मांगा। एक नजर में कब — गुरुवार, सुप्रीम कोर्ट पीठ — मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत नोटिस — राहुल गांधी, अखिलेश यादव समेत 16 नेता एसआईआर याचिका — केंद्र और चुनाव आयोग से जवाब तलब सीसीटीवी — सभी कानूनी एजेंसियों को फुटेज सुरक्षित रखने के निर्देश ‘हम किसी काल्पनिक दुनिया में नहीं जी रहे’ “कोई भी कोर्ट को डरा-धमकाकर दबाव में नहीं ला सकता। ऐसी कोशिशें बेकार हैं, इन पर कोई ध्यान नहीं देता। हमें पता है कि कोर्ट के बाहर क्या कहा जा रहा है और कोर्ट के अंदर क्या। हम किसी काल्पनिक दुनिया में नहीं जी रहे हैं।” सूर्यकांत, मुख्य न्यायाधीश मुख्य न्यायाधीश ने किसी का नाम लिए बिना यह भी कहा कि याचिकाकर्ताओं में से एक के आचरण पर अदालत सवाल करेगी और उसे सफाई देनी होगी। चार वकीलों की याचिका पर नोटिस 12 अक्टूबर के घटनाक्रम के बाद चार वकीलों ने याचिका दाखिल की है। इसमें अदालत परिसर में राजनीतिक प्रदर्शन रोकने के नियम बनाने, सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने और नेताओं की मंशा की जांच की मांग की गई है। याचिका में यह भी कहा गया है कि प्रदर्शन बुलाने वाला व्यक्ति उसके दूसरों पर पड़ने वाले परिणामों की जिम्मेदारी भी ले। मुख्य न्यायाधीश ने इस याचिका पर नोटिस जारी किया।याचिकाकर्ताओं के वकील गौरव भाटिया ने अंतरिम आदेश की मांग करते हुए कहा कि राहुल गांधी के सुप्रीम कोर्ट पहुंचने के समय की सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित कराई जाए। याचिका में आरोप है कि उस दौरान एक गर्भवती महिला पत्रकार को धक्का दिया गया। अदालत ने अभी इस पर कोई निष्कर्ष नहीं दिया है। इस पर न्यायमूर्ति बागची ने सभी कानूनी एजेंसियों को सीसीटीवी और दूसरी डिजिटल फुटेज सुरक्षित रखने के निर्देश दिए, और कहा कि इन्हें कोई भी आकर जमा करा सकता है। केरल कांग्रेस की पोस्ट पर अवमानना की मांग सुनवाई के दौरान केरल कांग्रेस की एक सोशल मीडिया पोस्ट को अदालत की अवमानना बताते हुए कार्रवाई की मांग भी रखी गई। याचिका के मुताबिक यह पोस्ट मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ थी। यह पोस्ट अब हटाई जा चुकी है।मामला यहां तक कैसे पहुंचा तारीख क्या हुआ 10 अक्टूबर खड़गे और राहुल गांधी ने मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर 12 अक्टूबर को शाम 4 से 5 बजे के बीच ज्ञापन सौंपने का समय मांगा 11 अक्टूबर मुख्य न्यायाधीश ने पत्र लिखकर मिलने से इनकार किया — ज्ञापन के विषय पहले से अदालत में विचाराधीन हैं 12 अक्टूबर बाराखंभा रोड से सुप्रीम कोर्ट तक विपक्ष का मार्च; राहुल, प्रियंका और खड़गे समेत सांसद शाम को परिसर के भीतर पहुंचे; उसी दिन 10 दलों के 11 नेताओं की एसआईआर याचिका दाखिल 13 अक्टूबर रजिस्ट्री ने एसआईआर याचिका में करीब 14 प्रक्रियागत खामियां गिनाईं 15 अक्टूबर सुनवाई — 16 नेताओं को नोटिस, केंद्र और चुनाव आयोग से जवाब तलब ज्ञापन में मुख्य निर्वाचन आयुक्त और चुनाव आयोग के अलावा छात्रों की गिरफ्तारी, मेट्रो स्टेशन बंद किए जाने और ट्रेनें रद्द होने जैसे मुद्दे भी थे। रजिस्ट्री की 14 आपत्तियां प्रक्रियागत थीं — अदालत का आदेश या याचिका पर राय नहीं — और सुनवाई से पहले उन्हें दूर किया जाना था।
Read more 15th Oct 2026
राष्ट्रीय न्यूज़: नई दिल्ली। अंकिता भंडारी के माता-पिता को दिल्ली पुलिस ने गुरुवार तड़के इंडिया गेट से हिरासत में ले लिया। वे वहां रातभर धरने पर बैठे थे। हिरासत करीब पौने चार बजे की बताई जा रही है और समाचार एजेंसी के मुताबिक उन्हें करीब पांच बजे छोड़ दिया गया। सभी को तिलक मार्ग थाने ले जाया गया था। कार्रवाई दिल्ली पुलिस ने सीआरपीएफ के साथ मिलकर की। अंकिता के माता-पिता भाजपा नेता दुष्यंत कुमार गौतम की सिक्किम के राज्यपाल पद पर नियुक्ति के विरोध में धरने पर बैठे हैं और मांग कर रहे हैं कि सीबीआई जांच पूरी होने तक यह नियुक्ति रोकी जाए। कांग्रेस नेता भी हिरासत में लिए गए इसी दौरान कांग्रेस नेता पवन खेड़ा, सुप्रिया श्रीनेत और काजी निजामुद्दीन समेत कई कार्यकर्ताओं को भी हिरासत में लिया गया। खेड़ा ने थाने के भीतर भी विरोध जताया। उन्होंने कार्रवाई को ज्यादती बताते हुए कहा कि इंडिया गेट पर तड़के चार बजे लोकतंत्र का अंत हो रहा है। परिवार बोला — भूख हड़ताल करेंगे रिहाई के बाद माता-पिता ने कहा कि नियुक्ति वापस होने तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि अगर उन्हें इंडिया गेट पर प्रदर्शन नहीं करने दिया गया तो वे उत्तराखंड में अपने घर से भूख हड़ताल शुरू करेंगे। एक दिन पहले, बुधवार शाम लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा धरनास्थल पर पहुंचकर परिवार से मिले थे और करीब एक घंटा वहां रुके थे।अंकिता भंडारी ऋषिकेश के पास एक रिसॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट थीं। सितंबर 2022 में 19 साल की उम्र में उनकी हत्या कर दी गई थी। मई 2025 में अदालत ने रिसॉर्ट संचालक पुलकित आर्य समेत तीन लोगों को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी।मामले में कथित ‘वीआईपी’ की भूमिका को लेकर सवाल उठते रहे हैं और परिवार उसकी पहचान की मांग करता रहा है। उत्तराखंड सरकार ने 9 जनवरी 2026 को सीबीआई जांच की सिफारिश की थी और सीबीआई ने फरवरी में दिल्ली में मामला दर्ज किया, लेकिन वह एफआईआर अज्ञात के खिलाफ है। अब तक किसी जांच एजेंसी ने किसी को ‘वीआईपी’ के रूप में चिह्नित नहीं किया है।जनवरी 2026 में दिल्ली हाईकोर्ट ने दुष्यंत कुमार गौतम की मानहानि याचिका पर अंतरिम आदेश देते हुए कांग्रेस और आम आदमी पार्टी को इस मामले से उन्हें जोड़ने वाली सोशल मीडिया पोस्ट हटाने के निर्देश दिए थे।
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गुप्त ध्वनि किरणों के साथ ओशो पर किसने हमला किया?...
गुप्त ध्वनि किरणों के साथ ओशो पर किसने हमला किया?... * ओशो के निजी दंत चिकित्सक देवगेट ओशो की मृत्यु से 4 दिन पहले हुई घटनाओं के बारे में बात करते हैं (शरीर को छोड़कर)... * 15 aजनवरी, 1990 को, मेरे जन्मदिन पर, मुझे शुन्यो से एक संदेश मिला: ओशो चाहते थे कि मैं उनके पेट का एक्स-रे ले। हम दंaत कक्ष में मिले। ओशो का शरीर पतला और बेकार लग रहा था, फिर भी मैंने उसे शक्तिशाली रूप से उपस्थित महसूस किया। मुझे शुन्यो से पता था कि वह हर दिन बीस घंटे से अधिक सो रहा था, हर शाम बुद्ध हॉल में कुछ क़ीमती मिनटों के लिए अपनी शारीरिक ऊर्जा को बचा रहा था। ओशो नेa मुझे बताया कि उसके हमलावरों की आवाज़ से उसका शरीर बहुत कमजोर हो गया था। उन्होंने कहा कि उनमें से शायद तीन, दो पुरुष और एक महिला, ध्वनि तरंगों पर ध्यानaa केंद्रित करने और अपने शरीर को लक्षित करने के लिए एक विशेष गठन में बैठे थे। यहां भारत में प्राचीन योगिक प्रथाएं हैं जहां लोग कुछ ध्वनियों, कुछ मंत्रों को जानते हैं, जो लोगों को नुक़सान पहुंचाने के लिए ध्वनि को केंद्रित कर सकते हैं। लेकिन मुझ पर हमला करaaने वाले ये लोग भारतीय नहीं हैं। वे वही लोग हैं जिन्होंने अमेरिका में पहले मुझे मारने की कोशिश की थी। वे तब सफल नहीं हो सके, और अब वे जो शुरू किया उसे पूरा कर ने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने मुझे बोलने से रोकने के लिए ज़हर की कोशिश की लेकिन मैं जारी रखने में कामयाब रहा। अब, पांच साल बाद वे वापस आ गए हैं। उन्होंने पहले बुद्ध हॉल में अपनी ध्वनि किरणों का उपयोग मेरे दिमाग़ पर हमला करने के लिए किया लेकिन मैं अपने दिमाग़ में नहीं हूं। मैं एक नो-मन हूं और उनकी आवाज़ का बहुत कम प्रभाव था। इसलिए उन्होंने अपनी रणनीति बदल दी, अब वे मेरे शरीर पर हमला कर रहे हैं। मेरे गरीब शरीर को उनकी किरणों से कोई सुरक्षा नहीं है। हर दिन यह कमजोर होता जाता है। वे मुझे मार नहीं सकते लेकिन वे मेरे शरीर को नुक़सान पहुंचा सकते हैं। अभी मेरे जिगर के क्षेत्र में बहुत दर्द हो रहा है। क्या आप इसे एक्स-रे कर सकते हैं? दुख की बात है, मैंने समझाया कि मेरी दंत एक्स-रे मशीन शायद अपर्याप्त थी क्योंकि यह केवल दांतों और जबड़े की छोटी फिल्में ले सकती थी, लेकिन हम कोशिश कर सकते थे। अमृतो को हमारे पास सबसे बड़ी एक्स-रे फ़िल्म मिली, जबकि मैंने इसकी बीम को चौड़ा करने के लिए डेंटल एक्स-रे मशीन के साथ जिग्गल किया। मैंने वह करने की कोशिश की जो ओशो पूछ रहा था। मैंने उसके जिगर के क्षेत्र की एक तस्वीर ली और फिर दंत विकास में बड़ी फ़िल्म विकसित करने में कामयाब रहा टैंक जिसे छोटी इंट्रा-ओरल डेंटल फ़िल्मों के लिए डिज़ाइन किया गया था, लेकिन परिणामी छवि धुंधली और अस्पष्ट थी। यह आख़िरी बार था जब मैंने ओशो को उसके भौतिक शरीर में देखा था। 19 जनवरी को शाम 4:30 बजे थे: मैं अपनी प्रेमिका के साथ अपने कमरे में था जब दरवाजे पर एक ज़रूरी दस्तक हुई। मनीषा, पीला और तनावग्रस्त दिख रही थी, ने पूछा कि क्या वह मेरे कमरे के फ़ोन का उपयोग कर सकती है। मुझे पता था कि वह केवल पूछेगी कि क्या कुछ असामान्य हो रहा है। अस्थायी सचिव के रूप में कार्य करते हुए वह इनर सर्कल के सदस्यों को फ़ोन कर रही थी और उन्हें कृष्णा हाउस में एक असाधारण बैठक में तुरंत आने के लिए कह रही थी। ओशो ने पंद्रह महीने पहले इक्कीस लोगों की एक कम्यून प्रबंधन टीम की स्थापना की थी, इसे इनर सर्कल का नाम दिया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका काम कम्यून के दिन-प्रतिदिन चलने का प्रबंधन करना था। मैं मूल चयन में नहीं था, लेकिन कुछ महीने बाद मुझे शामिल होने के लिए कहा गया था। फ़ोन करने के बाद, मनीषा ने कहा, “गीट, तुमने सुना कि मैं दूसरों को क्या बता रहा था। बैठक कृष्णा हाउस की छत पर ब्लू रूम में है। क्या आप वहां तुरंत जा सकते हैं?” इससे पहले कि मैं कोई सवाल पूछ पाता, वह जल्दी से गलियारे में चली गई, स्पष्ट रूप से एक और महत्वपूर्ण कार्य में शामिल थी। मैंने दोपहर के अधिकांश समय अजीब तरह से विपुल महसूस किया था। बाहरी मामलों की उथल-पुथल के बावजूद मैं कई दिनों से उत्साहित महसूस कर रहा था। मेरे दिल में ख़ुशी का एक अकथनीय नृत्य था। अंदर से मुझे उत्साह, आनंद महसूस हुआ। ब्लू रूम में पहुंचने पर, मैंने देखा कि अधिकांश इनर सर्कल पहले से ही वहां इकट्ठा हो चुके थे। माहौल तनावपूर्ण और तनावपूर्ण था। मेरा अपना उत्साह जगह से बाहर लग रहा था। मैं बैठ गया और इंतज़ार किया। कुछ मिनटों के बाद जयेश ने अमृतो के साथ प्रवेश किया। यह देखने के लिए संक्षेप में चारों ओर देखते हुए कि हम सभी मौजूद हैं, उन्होंने एक दृढ़, हालांकि शांत आवाज़ में कहा, “मुझे लगता है कि इसे लपेटने का कोई तरीक़ा नहीं है। मैं आपको सीधे बताऊंगा। ओशो ने कुछ समय पहले लगभग 4:45 बजे अपना शरीर छोड़ दिया था दोपहर।” स्तब्ध, मैंने अपनी घड़ी को देखा। शाम के 5:15 बजे थे। उपस्थित दो या तीन लोग रोने लगे। जयेश ने जल्दी से बीच में टोका, “देखो, मुझे तुम्हारी सारी मदद की ज़रूरत है। कृपया अभी तक अलग न हों। मुझे आप सभी की ज़रूरत है कि ओशो के भेजने को उतना ही सुंदर बनाने में मदद करें जितना वह हकदार है। यह आख़िरी चीज है जो हम उसके लिए कर सकते हैं भौतिक शरीर, चलो इसे अद्भुत बनाते हैं। उसने मुझे ठीक से बताया कि वह कैसे चाहता है कि ऐसा हो। उसने मुझे हर चीज के लिए विस्तृत निर्देश दिए, लेकिन मुझे यहां हर किसी की मदद की ज़रूरत है।” जयेश के शब्दों को सुनकर मेरा पहले का उत्साह सदमे में बदल गया था, लेकिन मैंने ओशो को अपने लोगों के साथ अपने अंतिम उत्सव का आनंद लेने में सक्षम बनाने के लिए हमारी मदद के लिए जयेश की अपील को स्पष्ट रूप से सुना। जैसे ही मैंने ब्लू रूम छोड़ा, जयेश ने मुझे बताया कि ओशो ने अनुरोध किया था कि मैं उनके शरीर को जलते हुए घाटों तक ले जाने के लिए एक वाहक बनूं। गतिविधि और भ्रमित भावनाओं के एक धुंध में मुझे याद है कि ओशो के इस अंतिम उपहार के लिए बेहद आभारी महसूस कर रहा था। - स्वामी देवगीत पुस्तक : ओशो - द फर्स्ट बुद्ध इन द डेंटल चेयर अध्याय: 17 अध्याय का नाम: ओशो का अंतिम दंत नाटक: अधिनियम V अंतिम सुनहरी झलक
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