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September 25, 2026
जोधपुर। जोधपुर नगर निगम के महापौर चुनाव का परिणाम घोषित हो गया है। भाजपा प्रत्याशी प्रसन्नचंद मेहता ने 53 वोट हासिल कर मेयर पद का चुनाव जीत लिया, जबकि कांग्रेस प्रत्याशी राजेंद्र सिंह सोलंकी को 47 वोट मिले। 100 सदस्यीय नगर निगम में महापौर बनने के लिए 51 मतों की आवश्यकता थी। इस तरह मेहता ने बहुमत का आंकड़ा पार करते हुए 6 मतों के अंतर से चुनाव जीता।जोधपुर नगर निगम के हालिया चुनाव में भाजपा के 45, कांग्रेस के 44, 10 निर्दलीय और एक अन्य/RLP पार्षद निर्वाचित हुए थे। किसी भी दल को अपने दम पर बहुमत नहीं मिला था, इसलिए चुनाव के बाद से ही निर्दलीय पार्षद महापौर पद के राजनीतिक गणित में महत्वपूर्ण बने हुए थे। भाजपा ने चुनाव से पहले कई निर्दलीय पार्षदों का समर्थन मिलने का दावा किया था। सार्वजनिक रिपोर्टों के मुताबिक सात निर्दलीयों के समर्थन से भाजपा ने अपनी समर्थित संख्या 52 बताई थी।
| प्रत्याशी | मत |
|---|---|
| प्रसन्नचंद मेहता (भाजपा) | 53 |
| राजेंद्र सिंह सोलंकी (कांग्रेस) | 47 |
| जीत का अंतर | 6 |
| दल | पार्षद |
|---|---|
| भाजपा | 45 |
| कांग्रेस | 44 |
| निर्दलीय | 10 |
| अन्य / RLP | 1 |
| कुल | 100 |
| बहुमत के लिए जरूरी | 51 |
मतगणना में प्रसन्नचंद मेहता को 53 और राजेंद्र सोलंकी को 47 वोट मिले। दोनों प्रत्याशियों के मतों का कुल योग 100 है, यानी उपलब्ध परिणाम के अनुसार निगम के सभी 100 मत मेयर पद के दोनों प्रत्याशियों के खाते में दर्ज हुए।भाजपा के अपने 45 निर्वाचित पार्षद थे। पार्टी ने मतदान से पहले सात निर्दलीयों के समर्थन के आधार पर 52 पार्षदों का समर्थन होने का दावा किया था। अंतिम परिणाम में मेहता को 53 मत मिले। हालांकि मतदान गुप्त था, इसलिए यह निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता कि किस व्यक्तिगत पार्षद ने किस प्रत्याशी को वोट दिया या अतिरिक्त वोट किस खेमे से आया।इसी तरह कांग्रेस के अपने 44 पार्षद थे, जबकि उसके प्रत्याशी राजेंद्र सोलंकी को 47 वोट मिले। परिणाम से केवल दलगत मूल संख्या और अंतिम मतों के बीच अंतर स्पष्ट होता है; व्यक्तिगत मतदान की पहचान नहीं की जा सकती।
वार्ड 82 से पार्षद हैं प्रसन्नचंद मेहता
प्रसन्नचंद मेहता हालिया नगर निगम चुनाव में वार्ड संख्या 82 से भाजपा के पार्षद निर्वाचित हुए थे। उन्होंने अपने वार्ड में 3,270 वोट हासिल कर 486 मतों के अंतर से जीत दर्ज की थी।मेहता भाजपा संगठन में भी लंबे समय से सक्रिय रहे हैं। उनके महापौर प्रत्याशी बनाए जाने से पहले भी संगठन में विभिन्न जिम्मेदारियां संभालने का उल्लेख सार्वजनिक रिपोर्टों में किया गया था। भाजपा ने पार्टी पार्षदों से रायशुमारी के बाद उन्हें महापौर उम्मीदवार घोषित किया था।
कांग्रेस ने उनके मुकाबले पूर्व मंत्री राजेंद्र सिंह सोलंकी को मैदान में उतारा था। सोलंकी ने इस बार पार्षद का चुनाव नहीं लड़ा था और कांग्रेस ने महापौर चुनाव के लिए उन्हें प्रत्याशी बनाया था। दोनों के नामांकन पर लगाई गई आपत्तियां भी चुनाव से पहले रिटर्निंग अधिकारी ने खारिज कर दी थीं।
बसों से निगम पहुंचे भाजपा-कांग्रेस के पार्षद
शुक्रवार को मतदान से पहले भाजपा और कांग्रेस दोनों खेमों के पार्षद अलग-अलग बसों से नगर निगम मुख्यालय पहुंचे। भाजपा के साथ उसके समर्थक निर्दलीय पार्षद भी मौजूद रहे। मतदान समाप्त होने के बाद दोनों दलों के पार्षद बसों में बैठकर वहां से रवाना हो गए और इसके बाद मतगणना शुरू हुई।राज्य निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम के अनुसार महापौर पद के लिए मतदान सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक रखा गया था और मतदान समाप्त होने के तुरंत बाद मतगणना कर उसी दिन परिणाम घोषित किया जाना था।
चुनाव से पहले 45 बनाम 44 का था मुकाबला
जोधपुर नगर निगम में शुरुआत से ही भाजपा और कांग्रेस के बीच बेहद करीबी संख्या बल था। भाजपा ने 45 वार्ड जीते थे, जबकि कांग्रेस के 44 पार्षद निर्वाचित हुए थे। इसके अलावा 10 निर्दलीय और एक अन्य प्रत्याशी विजयी हुआ था। इस कारण बहुमत के 51 के आंकड़े तक पहुंचने के लिए दोनों दलों की नजर निर्दलीयों पर थी।चुनाव के बाद सात निर्दलीय पार्षदों के भाजपा को समर्थन देने की खबर सामने आई थी, जिसके बाद पार्टी ने अपने पक्ष में 52 सदस्यों का समर्थन होने का दावा किया। अंतिम मतदान में मेहता को इससे एक मत अधिक यानी 53 वोट मिले।
मतपत्र के सीरियल नंबर पर कांग्रेस ने उठाया था सवाल
मतदान के दौरान कांग्रेस नेता एवं पार्षद नरेश जोशी ने मतपत्र पर सीरियल नंबर दर्ज किए जाने को लेकर आपत्ति जताई थी। उनका आरोप था कि इससे मतदान की गोपनीयता प्रभावित हो सकती है और मतपत्र को किसी पार्षद से जोड़ने की संभावना पैदा हो सकती है।यह कांग्रेस पार्षद की ओर से लगाया गया आरोप है। निर्वाचन अधिकारियों की ओर से इस विशिष्ट आरोप पर विस्तृत सार्वजनिक स्पष्टीकरण उपलब्ध होने पर ही यह स्पष्ट होगा कि सीरियल नंबर की व्यवस्था किस उद्देश्य से थी और मत की गोपनीयता सुनिश्चित करने के लिए क्या प्रक्रिया अपनाई गई थी।
निर्दलीय वोटों ने फिर निभाई महत्वपूर्ण भूमिका
100 सदस्यीय सदन में भाजपा और कांग्रेस में केवल एक पार्षद का अंतर होने के कारण निर्दलीय पहले दिन से निर्णायक स्थिति में थे। मेयर चुनाव से पहले भाजपा और कांग्रेस दोनों ने अपने-अपने समर्थन का दावा किया था।अब घोषित 53-47 के परिणाम ने राजनीतिक तस्वीर साफ कर दी है और भाजपा के प्रसन्नचंद मेहता जोधपुर नगर निगम के महापौर बन गए हैं। हालांकि गुप्त मतदान के कारण कौन से निर्दलीय या अन्य पार्षद किस प्रत्याशी के साथ गए, इसका व्यक्तिगत तौर पर निष्कर्ष निकालना संभव नहीं है।
अब उपमहापौर चुनाव पर रहेगी नजर
महापौर चुनाव पूरा होने के बाद अब नगर निगम में अगला महत्वपूर्ण चरण उपमहापौर पद का चुनाव होगा। पूर्व निर्धारित चुनाव कार्यक्रम के अनुसार जयपुर, जोधपुर और कोटा में महापौर चुनाव 25 सितंबर को तथा उपमहापौर पद की प्रक्रिया अगले दिन रखी गई है।प्रसन्नचंद मेहता के महापौर निर्वाचित होने के साथ जोधपुर नगर निगम के नए बोर्ड का नेतृत्व तय हो गया है। अब निगम के भीतर समितियों, उपमहापौर चुनाव और शहर से जुड़े प्रशासनिक मुद्दों पर नए बोर्ड की भूमिका पर नजर रहेगी।
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