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September 24, 2026
अजमेर नगर निगम में बड़ा सियासी घमासान,
नगर निगम में मेयर ओर डिप्टी मेयर के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन ,कांग्रेस ने शपथ ग्रहण समारोह के बाहर जताया कड़ा विरोध!
"लोकतंत्र की हत्या का आरोप" – कांग्रेस नेताओं ने सिर पर बांधी काली पट्टी, निगम गेट पर ताला लगाने का लगाया आरोप। कांग्रेस का दावा: 37 पार्षदों के बहुमत के बावजूद सत्ता और पुलिस प्रशासन के दम पर कराई गई धांधली। विधायकों और पुलिस अधिकारियों पर पार्षदों को डराने-धमकाने और खरीद-फरोख्त के गंभीर आरोप।
अजमेर नगर निगम में महापौर और उपमहापौर के चुनाव व शपथ ग्रहण समारोह को लेकर राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस नेताओं ने भारतीय जनता पार्टी और स्थानीय प्रशासन पर सत्ता के दुरुपयोग, धांधली और लोकतंत्र की हत्या के गंभीर आरोप लगाए हैं। नगर निगम परिसर के बाहर एकत्र हुए कांग्रेस नेताओं और पार्षदों ने सिर पर काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन किया और इसे 'लोकतंत्र का काला दिवस' करार दिया। कांग्रेस का आरोप है कि उनके बहुमत वाले पार्षदों को निगम के अंदर जाने से रोक दिया गया। अजमेर नगर निगम के बाहर का यह नजारा शहर के सियासी पारे को बयां कर रहा है। निगम के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान कांग्रेस नेताओं और निर्वाचित पार्षदों को निगम भवन के मुख्य द्वार पर ही रोक दिया गया। कांग्रेस के उपमहापौर प्रत्याशी पार्षद नोरत गुर्जर का आरोप है कि गेट पर ताला लगा दिया गया, जिससे चिलचिलाती धूप में महिला प्रत्याशियों और पार्षदों को बाहर ही खड़े रहने पर मजबूर होना पड़ा। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि उनकी मेयर प्रत्याशी किरण गढ़वाल का नामांकन खारिज कराने और NOC रद्द करने के लिए देर रात तक साजिशें रची गईं।
रात को 2 बजे निगम खोलकर हमारी मेयर प्रत्याशी किरण गढ़वाल का पर्चा खारिज करने की पूरी कोशिश की गई। अजमेर उत्तर और दक्षिण के दोनों विधायकों (देवनानी जी और अनिता भदेल जी) ने पूरा जोर लगा रखा था। पुलिस के अधिकारियों—CI, डिप्टी और एडिशनल SP तक को आगे करके हमारे पार्षदों को डराया-धमकाया गया। कांग्रेस के पास 37 पार्षद थे, जबकि बीजेपी के पास सिर्फ 32 थे। लेकिन फर्जी वोटों और खरीद-फरोख्त के दम पर मेयर और डिप्टी मेयर बना दिया गया। आज हमारे चुने हुए पार्षदों को अंदर नहीं जाने दिया जा रहा है, इसलिए हम काली पट्टी बांधकर 'लोकतंत्र का काला दिवस' मना रहे हैं। हम सड़कों पर उतरकर ईंट से ईंट बजा देंगे।
प्रदर्शन कर रहे कांग्रेसियो ने दावा किया कि डॉ. राजकुमार जयपाल, धर्मेंद्र राठौड़, डॉ. बाहेती, द्रौपदी कोली, हेमंत भाटी और विजय जैन समेत पूरी कांग्रेस पार्टी इस चुनाव में एकजुट थी। उन्होंने आरोप लगाया कि जनमत कांग्रेस के साथ था, लेकिन पुलिस और प्रशासन के दबाव में परिणाम को बदला गया। कांग्रेस नेताओं ने चेतावनी दी है कि वे इस तानाशाही के खिलाफ चुप नहीं बैठेंगे और अजमेर की जनता आने वाले विधानसभा चुनावों में इसका माकूल जवाब देगी।
अजमेर नगर निगम चुनाव के बाद उठा यह विवाद अब थमता नजर नहीं आ रहा है। एक तरफ बीजेपी ने अपना बोर्ड बनाकर शपथ ग्रहण प्रक्रिया पूरी की, वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस ने सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है। अब देखना होगा कि इस राजनीतिक घमासान का आने वाले समय में क्या असर पड़ता है।
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