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September 8, 2026
भरतपुर। महाराजा सूरजमल बृज विश्वविद्यालय, भरतपुर में शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए गेस्ट फैकल्टी भर्ती प्रक्रिया को लेकर गंभीर प्रशासनिक और प्रक्रियात्मक सवाल उठे हैं। भर्ती विज्ञापन जारी करने की समय-सीमा, आदर्श आचार संहिता के दौरान प्रक्रिया शुरू किए जाने, सरकारी परिपत्रों की तारीखों में कथित बदलाव और अभ्यर्थियों को आवेदन के लिए बेहद कम समय दिए जाने जैसे मुद्दों को लेकर कुलाधिपति के समक्ष शिकायत प्रस्तुत कर स्वतंत्र और उच्चस्तरीय जांच की मांग की गई है। शिकायतकर्ता ने भर्ती प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेज भी प्रस्तुत किए हैं और मांग की है कि विश्वविद्यालय की फाइल, नोटशीट, डिस्पैच रिकॉर्ड और वेबसाइट से जुड़े डिजिटल लॉग की जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जाए।
आचार संहिता के बाद विज्ञापन प्रकाशित होने पर सवाल
शिकायत के अनुसार राज्य निर्वाचन आयोग ने 19 अगस्त 2026 को नगरीय निकाय चुनावों की घोषणा के साथ आदर्श आचार संहिता लागू कर दी थी। इसके अगले दिन, 20 अगस्त 2026 को विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर गेस्ट फैकल्टी भर्ती का विज्ञापन प्रकाशित किए जाने का आरोप है। शिकायतकर्ता ने सवाल उठाया है कि आचार संहिता प्रभावी होने के बाद भर्ती विज्ञापन जारी करने से पहले क्या राज्य निर्वाचन आयोग या किसी सक्षम प्राधिकारी से अनुमति ली गई थी। इस संबंध में अनुमति पत्र, फाइल नोटिंग और सक्षम अधिकारी के आदेश की जांच की मांग की गई है।
विज्ञापन पर 14 अगस्त का डिस्पैच, वेबसाइट पर 20 अगस्त को अपलोड
मामले में एक और महत्वपूर्ण सवाल विज्ञापन पर दर्ज तारीख को लेकर उठाया गया है। शिकायत के अनुसार विज्ञापन पर 14 अगस्त 2026 का डिस्पैच अंकित है, जबकि इसे वेबसाइट पर 20 अगस्त 2026 को सार्वजनिक किया गया। शिकायतकर्ता ने मांग की है कि 14 से 20 अगस्त के बीच विज्ञापन सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया और आचार संहिता लागू होने के ठीक अगले दिन वेबसाइट पर अपलोड करने का निर्णय किस स्तर पर लिया गया, इसका रिकॉर्ड के आधार पर परीक्षण किया जाए।
सरकारी परिपत्रों की तारीख बदलने का गंभीर आरोप
शिकायत में सबसे गंभीर आरोप राजस्थान सरकार के वित्त विभाग से जुड़े परिपत्रों की तारीखों को लेकर लगाया गया है। दावा किया गया है कि भर्ती विज्ञापन में जिन मूल सरकारी परिपत्रों का संदर्भ दिया गया, उनकी वास्तविक तारीखें 30.03.2021 और 07.08.2023 थीं, जबकि विज्ञापन में कथित तौर पर इन्हें 30.03.2026 और 07.08.2026 दर्शाया गया। शिकायतकर्ता ने मांग की है कि यह जांच की जाए कि यदि तारीखों में वास्तव में परिवर्तन हुआ तो वह किस स्तर पर, किस अधिकारी या कर्मचारी द्वारा और किसके निर्देश पर किया गया। इसके लिए मूल सरकारी परिपत्र और विश्वविद्यालय की ओर से जारी विज्ञापन का अभिलेखीय और तकनीकी परीक्षण कराने की मांग भी की गई है।
आवेदन के लिए केवल करीब 24 घंटे का समय
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि भर्ती विज्ञापन वेबसाइट पर 20 अगस्त को अपलोड किया गया और आवेदन की अंतिम तारीख 21 अगस्त 2026 रखी गई। इस तरह अभ्यर्थियों को आवेदन करने के लिए लगभग 24 घंटे का समय ही मिला। शिकायतकर्ता का कहना है कि इतनी कम समय-सीमा व्यापक प्रतिस्पर्धा और समान अवसर के सिद्धांत पर सवाल खड़ा करती है। यह भी जांच का विषय बनाने की मांग की गई है कि भर्ती का पर्याप्त प्रचार समाचार पत्रों या अन्य माध्यमों से क्यों नहीं किया गया।
पहले से कार्यरत गेस्ट फैकल्टी के बावजूद नई भर्ती क्यों?
शिकायत में यह भी कहा गया है कि विश्वविद्यालय के संबंधित विभागों में पहले से गेस्ट फैकल्टी कार्यरत हैं। ऐसे में सवाल उठाया गया है कि आचार संहिता की अवधि में नई भर्ती शुरू करने की तत्काल प्रशासनिक और शैक्षणिक आवश्यकता क्या थी। शिकायतकर्ता ने इस निर्णय से संबंधित प्रस्ताव, स्वीकृति और संबंधित अधिकारियों की नोटिंग की जांच की मांग की है।
वेबसाइट से विज्ञापन हटने पर डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की मांग
शिकायतकर्ता ने विज्ञापन को वेबसाइट पर अपलोड करने के बाद हटाए जाने को भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया है।
मांग की गई है कि यह पता लगाया जाए कि विज्ञापन—
किस User ID या Admin Login से अपलोड किया गया,
किस अधिकारी के आदेश पर वेबसाइट पर डाला गया,
और बाद में किसके निर्देश पर हटाया गया।
इसके लिए विश्वविद्यालय के Server Logs, CMS Logs, Admin Logs, IP Logs और Upload/Delete Logs को तत्काल सुरक्षित रखने की मांग की गई है।शिकायतकर्ता ने इन डिजिटल रिकॉर्ड की जांच किसी स्वतंत्र तकनीकी विशेषज्ञ से कराने की भी मांग की है, ताकि बाद में रिकॉर्ड में बदलाव की संभावना न रहे।
भर्ती प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग
कुलाधिपति को भेजी गई शिकायत में पूरे मामले की जांच विश्वविद्यालय से बाहर के किसी वरिष्ठ स्वतंत्र अधिकारी या उच्चस्तरीय समिति से कराने की मांग की गई है। साथ ही जांच पूरी होने तक विवादित गेस्ट फैकल्टी भर्ती की आगे की प्रक्रिया पर रोक लगाने का अनुरोध किया गया है। विज्ञापन की मूल प्रति, फाइल एवं नोटशीट, डिस्पैच रजिस्टर और वेबसाइट से जुड़े डिजिटल रिकॉर्ड को भी सुरक्षित रखने की मांग की गई है।
दोष सिद्ध होने पर कार्रवाई की मांग
शिकायतकर्ता ने कहा है कि यदि जांच में सरकारी दस्तावेजों में अनधिकृत परिवर्तन, आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन, पद के दुरुपयोग या भर्ती प्रक्रिया में जानबूझकर अनियमितता की पुष्टि होती है तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। फिलहाल ये सभी बिंदु शिकायत में लगाए गए आरोप हैं। किसी अधिकारी की जिम्मेदारी या किसी दस्तावेज में कूटरचना की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
चुनाव आयोग और उच्च शिक्षा विभाग को भी भेजी प्रतिलिपि
शिकायत की प्रतिलिपि आवश्यक कार्रवाई और जानकारी के लिए राज्य निर्वाचन आयोग राजस्थान, वित्त विभाग, कॉलेज शिक्षा आयुक्तालय और उच्च शिक्षा विभाग (ग्रुप-4) को भी भेजी गई है। शिकायतकर्ता का कहना है कि स्वतंत्र जांच से वास्तविक तथ्य सामने आएंगे और भर्ती में समान अवसर, पारदर्शिता तथा विश्वविद्यालय प्रशासन की विश्वसनीयता सुनिश्चित की जा सकेगी। अब नजर इस बात पर रहेगी कि कुलाधिपति कार्यालय और संबंधित विभाग इस शिकायत पर क्या कार्रवाई करते हैं तथा विश्वविद्यालय प्रशासन इन आरोपों पर क्या पक्ष रखता है।
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