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August 8, 2026
800 से अधिक साधकों के साथ पुष्कर अरण्य तीर्थ प्रदक्षिणा का भव्य आगाज, 24 कोसी पदयात्रा और 84 कोसी रथयात्रा रवाना,
तीर्थराज पुष्कर की प्राचीन धार्मिक और आध्यात्मिक परंपराओं को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से अखिल विश्व गायत्री परिवार के तत्वावधान में आयोजित 14वीं पुष्कर अरण्य तीर्थ प्रदक्षिणा का शनिवार को विधि-विधान के साथ शुभारंभ हुआ। पांच दिवसीय इस आध्यात्मिक यात्रा में राजस्थान सहित विभिन्न राज्यों से पहुंचे 800 से अधिक महिला-पुरुष साधक भाग ले रहे हैं।
गायत्री शक्ति पीठ में सुबह वैदिक मंत्रोच्चार के बीच यज्ञ-हवन और ब्रह्माजी के रथ का विधिवत पूजन किया गया। इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी और केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी ने हरी झंडी दिखाकर 24 कोसी पदयात्रा और 84 कोसी रथयात्रा को रवाना किया। इस अवसर पर सामाजिक कार्यकर्ता अरुण पाराशर और प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित कैलाश नाथ दाधीच सहित गायत्री परिवार के पदाधिकारी, श्रद्धालु और साधक मौजूद रहे। कार्यक्रम संयोजक घनश्याम पालीवाल ने बताया कि प्रदक्षिणा के माध्यम से पुष्कर अरण्य क्षेत्र में स्थित प्राचीन तीर्थों, देवस्थलों और धार्मिक महत्व के स्थानों के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। यात्रा के दौरान साधक विभिन्न धार्मिक स्थलों पर पहुंचकर पूजा-अर्चना, साधना, सत्संग और सामूहिक प्रार्थना करेंगे।उन्होंने बताया कि यात्रा का पहला रात्रि विश्राम नांद में होगा। यहां शाम को दीपयज्ञ, कथा, सत्संग और सामूहिक प्रार्थना आयोजित की जाएगी। इसके बाद यात्रा निर्धारित मार्ग से विभिन्न प्राचीन तीर्थ क्षेत्रों की परिक्रमा करेगी। पांच दिवसीय प्रदक्षिणा 12 अगस्त को पुनः पुष्कर पहुंचकर पूर्णाहुति और समापन समारोह के साथ संपन्न होगी।पालीवाल ने बताया कि इस वर्ष भी यात्रा को लेकर साधकों में विशेष उत्साह दिखाई दे रहा है। 800 से अधिक श्रद्धालु पदयात्रा में शामिल हुए हैं, जबकि बड़ी संख्या में श्रद्धालु रथ और अन्य वाहनों के माध्यम से भी यात्रा से जुड़ेंगे। गायत्री परिवार की ओर से पुष्कर क्षेत्र की सावित्री और गायत्री साधना परंपरा के साथ प्राचीन परिक्रमा मार्गों को पुनर्जीवित करने पर भी जोर दिया जा रहा है।
इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने कहा कि यह यात्रा केवल धार्मिक परिक्रमा नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति के प्रति जनजागरण का माध्यम भी है। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक परंपराओं और सकारात्मक जीवन मूल्यों से जोड़ने की आवश्यकता है। गायत्री परिवार द्वारा निकाली जा रही यह प्रदक्षिणा इस दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास है।आयोजकों ने जनप्रतिनिधियों के समक्ष पुष्कर अरण्य क्षेत्र के तीर्थों, परिक्रमा मार्गों और श्रद्धालुओं के लिए आवश्यक सुविधाओं के विकास से संबंधित सुझाव भी रखे। यात्रा के शुभारंभ के साथ ही पुष्कर में अगले पांच दिनों तक भक्ति, साधना और आध्यात्मिक गतिविधियों का विशेष माहौल बना रहेगा।
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