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राष्ट्रीय न्यूज़: नीट पेपर लीक में सीकर कोचिंग हब का काला सच उजागर: छात्रों ने बनाया पेपर बेचने का नेटवर्क, करोड़ों की मनी ट्रेल की जांच में जुटी सीबीआई

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May 14, 2026

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो अब ऐसे छात्रों की पहचान करने में जुटी है, जिन्होंने कथित रूप से प्रश्नपत्र के बदले धनराशि दी या स्वीकार की।

नीट-यूजी 2026 पेपर लीक प्रकरण में राजस्थान के सीकर कोचिंग हब से जुड़ा बड़ा खुलासा सामने आया है। जांच एजेंसियों की पड़ताल में पता चला है कि कुछ छात्र संगठित गिरोह की तरह परीक्षा से पहले ही प्रश्नपत्र बेचने के नेटवर्क में सक्रिय थे। आरोप है कि ये छात्र अपने साथियों के माध्यम से ग्राहकों की तलाश कर रहे थे और लाखों रुपए लेकर पेपर उपलब्ध कराने की तैयारी में थे। मामले में जयपुर जिले के जमवारामगढ़ निवासी एक छात्र का नाम प्रमुख रूप से सामने आया है, जिससे केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो लगातार पूछताछ कर रही है।

सूत्रों के अनुसार सीबीआई अब केवल प्रश्नपत्र वायरल करने वाली श्रृंखला की ही नहीं, बल्कि उससे जुड़ी आर्थिक लेन-देन की पूरी कड़ी की भी जांच कर रही है। एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि किन-किन लोगों तक प्रश्नपत्र पहुंचा, किसने इसके बदले रकम ली और यह पैसा किन माध्यमों से स्थानांतरित हुआ। हालांकि अभी तक प्रश्नपत्र वायरल करने के आरोप में किसी छात्र की औपचारिक गिरफ्तारी नहीं की गई है।

जानकारी के अनुसार 3 मई की रात सीकर में कोचिंग संस्थान के एक शिक्षक और छात्रावास संचालक के पास जो कथित वायरल प्रश्नपत्र पहुंचा था, उसमें मूल प्रश्नपत्र के 180 में से 125 सवाल हूबहू मिले। जांच में सबसे पहले जमवारामगढ़ निवासी छात्र का नाम सामने आया, जिसने अपने करीबी साथियों को पहले ही संकेत दे दिया था कि प्रश्नपत्र उपलब्ध हो जाएगा। इसके बाद उसके साथी छात्रों ने कथित रूप से प्रश्नपत्र बेचने के लिए ग्राहकों की तलाश शुरू कर दी।

बताया जा रहा है कि शुरुआत में छात्रों से प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने के बदले करीब 10 लाख रुपए की मांग की गई थी। पेपर खरीदने के इच्छुक छात्र सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से संपर्क में थे और इसके लिए अलग-अलग समूह भी बनाए गए थे। मामला उस समय उजागर हुआ जब कथित प्रश्नपत्र प्राप्त करने वाले छात्रों ने उसे दूसरे समूहों में भी साझा कर दिया और प्रश्नपत्र तेजी से वायरल हो गया।

जांच में यह भी सामने आया है कि जमवारामगढ़ निवासी छात्र के अलावा काउंसलर राकेश कुमार भी कथित रूप से प्रश्नपत्र बेचने के नेटवर्क से जुड़ा हुआ था। बताया जा रहा है कि छात्रों ने ही उससे संपर्क किया था और रकम जुटाने के लिए उसके माध्यम से सौदेबाजी की जा रही थी। उसके सोशल मीडिया समूहों में बड़ी संख्या में छात्र जुड़े हुए बताए जा रहे हैं।

जांच एजेंसियों की प्रारंभिक पड़ताल में यह भी सामने आया है कि प्रश्नपत्र खरीदने की कोशिश करने वाले छात्रों में अधिकांश वे थे, जो पिछले दो या उससे अधिक वर्षों से सीकर के कोचिंग संस्थानों में तैयारी कर रहे थे। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो अब ऐसे छात्रों की पहचान करने में जुटी है, जिन्होंने कथित रूप से प्रश्नपत्र के बदले धनराशि दी या स्वीकार की।

इस बीच नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामला अब सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंच गया है। फेडरेशन ऑफ़ इंडिया मेडिकल एसोसिएशन ने सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर कर राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी पर छात्रों का भरोसा समाप्त होने का दावा किया है। याचिका में मांग की गई है कि परीक्षा दोबारा सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में कराई जाए तथा राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी को भंग करने या उसका पूर्ण पुनर्गठन कर तकनीकी रूप से अधिक सक्षम और स्वायत्त संस्था गठित की जाए।

याचिका में दावा किया गया है कि टेलीग्राम और व्हाट्सएप जैसे मंचों पर प्रसारित कथित “गेस पेपर” के 100 से अधिक प्रश्न वास्तविक प्रश्नपत्र से मेल खाते पाए गए हैं। राजस्थान विशेष अभियान समूह ने भी पुष्टि की है कि वायरल प्रश्नपत्र में 125 से अधिक सवाल शामिल थे, जिनमें रसायन विज्ञान के 35 और जीव विज्ञान के 90 प्रश्न बताए गए हैं।

याचिकाकर्ताओं ने सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक निगरानी समिति गठित करने की मांग की है, जिसमें साइबर सुरक्षा और फॉरेंसिक विशेषज्ञों को भी शामिल किया जाए। मामले को लेकर देशभर के विद्यार्थियों और अभिभावकों में चिंता और नाराजगी बढ़ती जा रही है।


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