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February 12, 2026
पुष्कर के ट्रेचिंग ग्राउंड में प्लास्टिक का पहाड़, मूक पशुओं के लिए बना मौत का मैदान
अजमेर/पुष्कर। तीर्थ नगरी पुष्कर के खरेकड़ी रोड स्थित ट्रेचिंग ग्राउंड (कचरा संग्रहण केंद्र) की स्थिति गंभीर होती जा रही है। यहां नगर परिषद क्षेत्र का कचरा लगातार डाला जा रहा है, जिससे प्लास्टिक के बड़े-बड़े ढेर लग गए हैं। आरोप है कि केवल नगर परिषद का ही नहीं, बल्कि आसपास की होटल, रिसॉर्ट और गुलकंद फैक्ट्रियों का अपशिष्ट भी ट्रैक्टरों में भरकर इसी स्थल पर खाली किया जा रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि यहां चरने आने वाली गायें प्लास्टिक खाकर दम तोड़ रही हैं। क्षेत्रवासी जितेंद्र रावत ने बताया कि जब उन्होंने पहली बार ट्रेचिंग ग्राउंड की स्थिति देखी तो वे हैरान रह गए। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से इस मुद्दे को उठाने की कोशिश भी की। उनका दावा है कि पिछले पांच-छह दिनों में उन्होंने यहां करीब छह गायों को मृत अवस्था में देखा है।
वहीं सुनील रावत का कहना है कि केवल नगर परिषद ही नहीं, बल्कि निजी प्रतिष्ठानों का कचरा भी यहां डाला जा रहा है, जिससे समस्या और विकराल हो गई है। क्षेत्रवासी सुनील गुर्जर ने इसे अत्यंत निंदनीय बताते हुए कहा कि हिंदू धर्म में गौ माता पूजनीय है और हमारी संस्कृति का अहम हिस्सा है, ऐसे में गायों की यह दुर्दशा अस्वीकार्य है।
इस बीच, स्वयंसेवी संस्था एनिमल केयर सोसाइटी भी सक्रिय है। संस्था से जुड़े रोहित गुर्जर ने बताया कि प्लास्टिक खाने से गायों की आंतों में अवरोध हो जाता है, जिससे उनकी मौत हो जाती है। कई बार गायों के पैरों में तार फंस जाते हैं या स्टील के ढक्कन गले में अटक जाते हैं। ऐसे मामलों में संस्था की टीम मौके पर पहुंचकर घायल पशुओं को अपनी गौशाला में लाकर उपचार करती है।
मामले को लेकर जब पुष्कर एसडीएम गुरु प्रसाद तवर से संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि यह मामला अभी उनके संज्ञान में आया है। उन्होंने नगर परिषद आयुक्त जनार्दन शर्मा से चर्चा की है और जल्द ही टीम गठित कर मौके का निरीक्षण कराया जाएगा। साथ ही गायों को कचरा स्थल से दूर रखने और ट्रेचिंग ग्राउंड को व्यवस्थित ढंग से संचालित करने के निर्देश दिए जाएंगे। प्रशासन ने यह भी बताया कि इस संबंध में टेंडर प्रक्रिया भी की गई है और स्थिति सुधारने के प्रयास किए जाएंगे।
फिलहाल, ट्रेचिंग ग्राउंड की बदहाल स्थिति ने पर्यावरण और मूक पशुओं की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोग प्रशासन से शीघ्र और ठोस कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
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