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February 12, 2026
विभिन्न श्रमिक संगठनों द्वारा नई श्रम कानून के विरोध में राष्ट्रव्यापी हड़ताल,
अजमेर में संयुक्त श्रमिक समन्वय समिति के बैनर तले रेलवे, बैंक, बीमा, मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव सहित अन्य विभागों से जुड़े कार्मिकों ने रैली निकालकर प्रधानमंत्री के नाम कलेक्टर को दिया ज्ञापन
सरकार द्वारा श्रम कानून में किए गए बदलाव के विरोध में राष्ट्रव्यापी हड़ताल के तहत अजमेर जिला कलेक्ट्रेट पर जोरदार प्रदर्शन, विभिन्न श्रम संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बड़ी संख्या में कार्मिक भी हुए शामिल, सरकार से पुनर्विचार की मांग
सरकार द्वारा श्रम कानूनों में किए गए बदलाव के विरोध में देशव्यापी हड़ताल के तहत अजमेर में भी विभिन्न श्रम संगठनों के प्रतिनिधियों ओर कार्मिकों ने जोरदार प्रदर्शन किया। अजमेर रेलवे स्टेशन से रैली के रूप में कलेक्ट्रेट पहुंचे श्रमिक नेताओं और कर्मचारियों ने लेबर कोड वापस लेने की मांग का ज्ञापन कलेक्टर को सौंपा। प्रदर्शन के दौरान नारेबाजी करते हुए सरकार से फैसले पर पुनर्विचार की अपील की गई। राष्ट्रीय श्रम संगठनों के आह्वान पर अजमेर में गुरुवार को संयुक्त श्रमिक समन्वय समिति के बैनर तले विभिन्न कार्यालयों के कर्मचारी हाथों में स्लोगन लिखी तख्तियां लेकर जिला कलेक्टर पहुंचे और जिला कलेक्टर लोकबंधु को प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंप कर नए श्रम कानून में बदलाव की मांग की।
प्रदर्शन में रेलवे,बैंक, बीमा, पोस्ट ऑफिस,मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव सहित कई विभागों के अधिकारी कर्मचारी शामिल हुए।
नॉर्थ वेस्टर्न रेलवे एम्पलॉइज यूनियन के मंडल सचिव मोहन चेलानी ने बताया कि देश के श्रमिकों के हितों से संबंधित 29 श्रम कानून को समाप्त करके 4 नए श्रम कानून लागू करने से श्रमिकों में आक्रोश है। पुराने श्रम कानून में संगठित और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के अधिकार संरक्षित थे। श्रम कानून की पालना के लिए उद्योगपति बाध्य थे लेकिन नए श्रम कानून में श्रमिक हितों से संबंधित मुद्दों पर श्रमिकों के हित शिथिल कर दिए गए हैं और उद्योगपतियों के हितों का अधिक ध्यान रखा गया है। संगठित क्षेत्र के पंजीकृत श्रमिक यूनियनों के अधिकारों को ही संकुचित कर दिया गया है, ऐसी स्थिति में असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के हितों की रक्षा की कल्पना ही नहीं की जा सकती है।
बैंक एम्पलाइज यूनियन के लीडर रवि वर्मा ने बताया कि नए श्रम कानून 4 लेबर कोड में पुराने 29 श्रम कानून में श्रमिकों को प्राप्त सभी अधिकारों को शामिल करने की कार्रवाई की जाए। जिससे भारत देश की प्रगति के साथ-साथ देश के श्रमिक वर्ग का भी आर्थिक और सामाजिक विकास सुनिश्चित हो सके।
आज इन्हीं सब मांगों को लेकर पूरे देश भर में राष्ट्रव्यापी हड़ताल की गई है यदि सरकार ने इस बिल पर पुनर्विचार नहीं किया तो आंदोलन और उग्र हो सकता है।
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