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February 12, 2026
उदयपुर | देशभर के किसान और मजदूर संगठनों ने केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ एक बार फिर मोर्चा खोल दिया है। संयुक्त किसान मोर्चा और केंद्रीय श्रमिक संगठनों की समन्वय समिति के बैनर तले उदयपुर में टाउन हॉल से कलेक्ट्रेट तक आक्रोश रैली निकाली गई। प्रदर्शन के बाद राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपते हुए संगठनों ने चेतावनी दीकृ मांगें नहीं मानी गईं तो देशव्यापी बड़ा संघर्ष होगा।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सरकार रेलवे, बिजली, बैंक और बीमा जैसे सार्वजनिक क्षेत्रों का निजीकरण कर रही है, जिससे रोजगार के अवसर कम हो रहे हैं।
इंटक प्रदेशाध्यक्ष जगदीश राज श्रीमाली ने कहा कि आशा सहयोगिनी, आंगनबाड़ी और मिड-डे मील कर्मचारियों को न उचित वेतन मिल रहा है और न सामाजिक सुरक्षा।
किसान नेताओं ने कहा कि एमएसपी को लेकर सरकार अपने वादों से पीछे हट गई है। उनकी मांग है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य को कानूनी गारंटी दी जाए ताकि किसान बाजार के उतार-चढ़ाव से सुरक्षित रह सकें। बिजली संशोधन बिल 2023 का भी विरोध करते हुए कहा गया कि इससे खेती की लागत बढ़ सकती है।
संगठनों ने न्यूनतम मजदूरी 26,000 रुपए प्रतिमाह और कम से कम 10,000 रुपए पुरानी पेंशन तय करने की मांग रखी है। साथ ही विवादित श्रम कानूनों को वापस लेने और सरकारी संपत्तियों के निजीकरण पर रोक लगाने की मांग की गई।
प्रदर्शनकारियों ने संभावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर भी चिंता जताई। उनका कहना है कि इससे किसानों की सब्सिडी और बीजों पर अधिकार प्रभावित हो सकता है, जिससे खाद्य सुरक्षा पर असर पड़ेगा।
बीमा कर्मचारी यूनियन के मोहन सिंयाल ने कहा- “किसान और मजदूर देश की बुनियाद हैं। यदि जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं हुआ तो पूरे देश में बड़ा साझा आंदोलन खड़ा किया जाएगा।” संगठनों का कहना है कि यह संघर्ष संवैधानिक अधिकारों और आजीविका की सुरक्षा के लिए जारी रहेगा।
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