Post Views 31
July 18, 2022
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में 28 , 29 जून को चंडीगढ़ में जीएसटी काउंसिल की 47 वीं बैठक में आवश्यक वस्तुओं पर पैकेजिंग और लेबलिंग के नाम पर 5% जीएसटी की अनुशंसा की गई थी जिसे आज 18 जुलाई से देश भर में लागू कर दिया गया। जीएसटी काउंसिल के इस फैसले से सोमवार से देशभर में खाद्य वस्तुएं जिनमें आटा, पनीर, दही, पैक्ड मसाले व अन्य खाद्य वस्तुएं महंगी हो जाएंगी। व्यापारियों ने बताया कि 5% जीएसटी का असर व्यापारियों के साथ साथ आम उपभोक्ताओं पर भी पड़ने वाला है। आटे पर लगभग 3 से 4 रुपये प्रति किलो दालों पर भी दो से तीन रुपए किलो का अंतर आ जाएगा, तो वही लोडिंग अनलोडिंग के भाव बढ़ने से भी खाद्य वस्तुओं की खुदरा कीमतों में वृद्धि होगी। वही बीज, अनाज, दालों की सफाई सर्टिंग, ग्रेडिंग और पिसाई मशीनरी सहीत सोलर वाटर हीटर व सिस्टम पर 5% की जगह 18% जीएसटी लागू होने से चारों ओर महंगाई का तांडव होगा। पूर्व विधायक डॉक्टर श्रीगोपाल बाहेती ने बताया कि मोदी सरकार को सिर्फ सरकारें तोड़कर अपनी सरकार बनाने का वक्त है। आम उपभोक्ता और आम नागरिक की चिंता नहीं है किस तरह से विपक्ष और उसके नेताओं को ईडी सीबीआई के नाम से परेशान किया जाए इस काम में नरेंद्र मोदी और अमित शाह अपना समय लगाते हैं। आम जनता के दुख दर्द से उन्हें कोई लेना देना नहीं है। पहले ही महंगाई पर लगाम नहीं लग पा रही ऊपर से इनकी केंद्रीय वित्त मंत्री ने रोजमर्रा की जरूरतों में शामिल आटा, दूध, दही, पनीर जैसी वस्तुओं पर 5% जीएसटी लगाकर दो जून की रोटी पर भी पहरा लगा दिया है। ऐसे में उनकी मांग है कि इस संवेदनशील मुद्दे पर प्रधानमंत्री खुद संज्ञान ले और प्रत्येक नागरिक की रोजमर्रा के काम आने वाली खाद्य वस्तुओं के दामों को ना बढ़ाएं उन पर लगाए गए जीएसटी को वापस ले। पड़ाव अनाज मंडी और किराना का खुदरा व्यापार करने वाले व्यापारियों का कहना था कि 5% जीएसटी यदि रोजमर्रा के खाने पीने के सामान पर लगेगी तो आम आदमी का मासिक बजट गड़बड़ा जाएगा। पहले ही महंगाई सिर चढ़कर बोल रही है ऊपर से जीएसटी लगने के बाद खाद्यान्न वस्तुओं और महंगी हो जाएंगी। वहीं व्यापारियों का लिखत पड़त में ही समय खराब हो जाएगा, इसलिए आमजन और व्यापारियों की परेशानी को मद्देनजर रखते हुए प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री को खाद्यान्न पदार्थों पर लगाई गई 5% जीएसटी को तत्काल वापस लेना चाहिए। गौरतलब है कि जीएसटी काउंसिल की पिछले महीने हुई बैठक की सिफारिशों को केंद्र सरकार ने अधिसूचित कर दिया। इसी के साथ 18 जुलाई से प्री पैकेज्ड व प्री लेबल्ड दाल, चावल, आटा, मैदा, सूजी, गुड, मुरमुरे, मखाना सहित अन्य खाद्य उत्पादों पर 5% जीएसटी लागू कर दी गई। जिसका देश भर के व्यापारी विरोध कर रहे हैं।
© Copyright Horizonhind 2026. All rights reserved