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October 9, 2026
जयपुर। भूमि आवंटन से जुड़े एक पुराने मामले में जिला उपभोक्ता आयोग क्रम-2 ने जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) के आयुक्त सिद्धार्थ महाजन और जोन-9 के उपायुक्त सूर्यकांत शर्मा के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किए हैं। आयोग ने पुलिस कमिश्नर को निर्देश दिया है कि दोनों अधिकारियों को गिरफ्तार कर 12 अक्टूबर को आयोग के समक्ष पेश किया जाए।
यह आदेश परिवादी कृष्णा की ओर से दायर अवमानना परिवाद पर सुनवाई के दौरान दिया गया। परिवादी की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता उमेश श्रृंगी ने यह जानकारी दी।
| मामला | जेडीए की निलय कुंज आवास योजना में भूखंड का कब्जा न मिलना |
| परिवादी | कृष्णा; लॉटरी में भूखंड संख्या 454 आवंटित |
| आयोग का फैसला | वर्ष 2016 में परिवादी के पक्ष में, कब्जा पत्र जारी करने के निर्देश |
| अवमानना परिवाद | वर्ष 2020 में पेश |
| ताजा आदेश | जेडीए आयुक्त और जोन-9 उपायुक्त के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट |
| अगली तारीख | 12 अक्टूबर, सोमवार |
भूखंड संख्या 454 और निलय कुंज योजना
अधिवक्ता उमेश श्रृंगी के अनुसार परिवादी कृष्णा ने जेडीए की निलय कुंज आवास योजना में भूखंड के लिए आवेदन किया था। लॉटरी में उन्हें भूखंड संख्या 454 आवंटित हुआ, लेकिन एक साल बीतने के बाद भी कब्जा नहीं दिया गया। इसके बाद जिला उपभोक्ता आयोग में परिवाद पेश किया गया।
2016 में आदेश, फिर तीन स्तरों पर चुनौती
करीब चार साल चली सुनवाई के बाद वर्ष 2016 में जिला उपभोक्ता आयोग ने परिवादी के पक्ष में फैसला सुनाते हुए जेडीए को आवंटित भूखंड का कब्जा पत्र जारी करने के निर्देश दिए। जेडीए ने इस आदेश को पहले राज्य उपभोक्ता आयोग, फिर राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग में चुनौती दी और मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, लेकिन किसी भी स्तर पर जेडीए को राहत नहीं मिली।आदेश के बावजूद कब्जा नहीं मिलने पर वर्ष 2020 में अवमानना परिवाद पेश किया गया, जिसमें आदेश की पालना कराने और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की गई। इस लिहाज से मूल आदेश को दस साल और अवमानना परिवाद को छह साल हो चुके हैं।
आयोग पहले भी दिखा चुका है सख्ती
जयपुर का जिला उपभोक्ता आयोग इससे पहले भी आदेश की पालना न होने पर वारंट जारी कर चुका है। इसी साल मार्च में आयोग ने एक अवमानना प्रकरण में अभिनेता सलमान खान को तीसरी बार जमानती वारंट जारी किया था और वारंट की तामील के लिए डीजीपी को विशेष टास्क फोर्स गठित करने के निर्देश दिए थे (पढ़ें— वह मामला)।इस मामले में जेडीए या दोनों अधिकारियों की ओर से अभी कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आदेश किस पीठ ने पारित किया, इसका ब्योरा भी फिलहाल उपलब्ध नहीं है।
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