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October 5, 2026
मॉस्को/इरकुत्स्क। रूस के साइबेरिया में एक एंटी-प्लेग रिसर्च इंस्टीट्यूट की 28 वर्षीय कर्मचारी की मौत के बाद हड़कंप है। दारिया शिपिलोवा नाम की यह लैब सहायक खतरनाक रोगाणुओं पर काम करती थीं। रिपोर्ट्स के मुताबिक 25 सितंबर को काम के दौरान जीवित जैविक नमूने वाली एक टेस्ट ट्यूब टूट गई थी, जिसमें प्लेग फैलाने वाला बैक्टीरिया Yersinia pestis था।
उनकी तबीयत तेजी से बिगड़ी और वेंटिलेटर पर रखने के बाद 2 अक्टूबर की सुबह शेलेखोव जिला अस्पताल की आईसीयू में उनकी मौत हो गई — हादसे के ठीक एक हफ्ते बाद। संपर्क में आए करीब 197 लोगों की पहचान की गई है और इनमें से करीब 189 को मेडिकल निगरानी या आइसोलेशन में रखा गया है।
अब तक क्या-क्या हुआ
रूस की स्वास्थ्य एजेंसी Rospotrebnadzor ने मौत का कारण ‘अज्ञात कारण वाली निमोनिया’ (pneumonia of unknown aetiology) बताया है। एजेंसी का कहना है कि इरकुत्स्क और शेलेखोव में स्वच्छता एवं महामारी विज्ञान की स्थिति स्थिर है।
“आगे की जांच में उनके पेशे से जुड़ा कोई सूक्ष्मजीव सामने नहीं आया।”
— Rospotrebnadzor, रूसी स्वास्थ्य एजेंसी
केंद्र और क्षेत्रीय अधिकारियों के बयानों में फर्क
इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि केंद्रीय एजेंसी और क्षेत्रीय अधिकारियों की बात एक जैसी नहीं है। इरकुत्स्क के गवर्नर इगोर कोबजेव ने शुरुआत में ‘प्लेग’ शब्द का इस्तेमाल नहीं किया और इसे ‘विशेष रूप से खतरनाक संक्रमण’ बताया। कुछ अन्य क्षेत्रीय अधिकारियों ने प्लेग से संक्रमण की बात कही, लेकिन बाद में उन बयानों को नरम कर दिया गया।दूसरी ओर Rospotrebnadzor की जांच में महिला की बीमारी और उनके काम से जुड़े खतरनाक सूक्ष्मजीवों के बीच सीधा संबंध स्थापित नहीं हुआ है। यही वजह है कि इसे अब तक प्लेग का पुष्ट प्रकोप नहीं माना गया है। अब तक चिह्नित करीबी संपर्कों में लक्षण सामने नहीं आने और परीक्षण निगेटिव रहने की जानकारी दी गई है।
अस्पताल तीन हफ्ते क्वारंटीन, प्लांट में मास्क अनिवार्य
घटना के बाद शेलेखोव जिला अस्पताल और आसपास की कुछ स्वास्थ्य सुविधाओं में एहतियाती प्रतिबंध लगाए गए। रिपोर्ट्स के मुताबिक कई अस्पतालों को तीन हफ्ते के लिए क्वारंटीन किया गया है और शेलेखोव स्थित इरकुत्स्क एल्युमिनियम प्लांट में मास्क पहनना अनिवार्य कर दिया गया।
न्यूमोनिक प्लेग क्या है
चर्चा सबसे ज्यादा न्यूमोनिक प्लेग की आशंका को लेकर है। यह प्लेग का वह रूप है जो फेफड़ों को प्रभावित करता है और संक्रमित व्यक्ति से सांस की बूंदों के जरिए दूसरों तक पहुंच सकता है। समय पर एंटीबायोटिक इलाज मिलने पर यह ठीक हो सकता है, और यही वजह है कि संपर्क में आए लोगों की जल्द पहचान पर जोर दिया जाता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिकी प्रशासन भी इस मामले पर नजर रखे हुए है और व्हाइट हाउस को घटनाक्रम की जानकारी है।
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