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September 30, 2026
जयपुर। राजस्थान में आगामी पंचायती राज चुनाव से पहले सियासी आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार पर सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग का आरोप लगाया है। जूली का दावा है कि सरकार चुनाव कार्यक्रम घोषित होने से पहले ही जिला प्रमुख, प्रधान, जिला परिषद सदस्य और पंचायत समिति सदस्य के संभावित उम्मीदवारों की जानकारी अधिकारियों के जरिए जुटा रही है। अपने आरोप के समर्थन में उन्होंने सोशल मीडिया पर एक कथित पत्र की प्रति भी साझा की है।जूली ने अपनी पोस्ट में मुख्यमंत्री से सवाल किया कि सरकार यह जानकारी क्यों जुटा रही है कि कौन व्यक्ति जिला प्रमुख, प्रधान, जिला परिषद सदस्य या पंचायत समिति सदस्य का संभावित उम्मीदवार हो सकता है ‘नगर निकाय चुनाव के जनादेश से घबराई भाजपा सरकार अब पंचायती राज चुनाव से पहले संभावित उम्मीदवारों की सूची सरकारी मशीनरी से निकलवाने में लगी है। मुख्यमंत्री जी, चुनाव अभी शुरू भी नहीं हुए और हार का डर अभी से सताने लगा क्या?’ उन्होंने कहा कि संभावित प्रत्याशियों की राजनीतिक जानकारी जुटाना सरकारी विभागों का सामान्य प्रशासनिक काम नहीं है। जूली का आरोप है कि इस तरह की सूची का इस्तेमाल संबंधित लोगों पर दबाव बनाने, नोटिस जारी करने, रिकवरी निकालने या अन्य प्रशासनिक कार्रवाई के लिए किया जा सकता है। उन्होंने यह भी पूछा कि मुख्यमंत्री कार्यालय में कौन अधिकारी संभावित उम्मीदवारों की ऐसी जानकारी जुटाने के निर्देश दे रहा है।
नगर निकाय चुनाव के जनादेश से घबराई भाजपा सरकार अब पंचायती राज चुनाव से पहले संभावित उम्मीदवारों की सूची सरकारी मशीनरी से निकलवाने में लगी है। मुख्यमंत्री जी, चुनाव अभी शुरू भी नहीं हुए और हार का डर अभी से सताने लगा क्या?”
मेरा व्यक्तव्य :- माननीय मुख्यमंत्री जी, यह कौन नए-नए… pic.twitter.com/65mX1jHQKs
— Tika Ram Jully (@TikaRamJullyINC) September 30, 2026
निकाय चुनाव का हवाला देकर सरकार को घेरा
नेता प्रतिपक्ष ने हाल के नगरीय निकाय चुनाव का भी जिक्र किया। उनका आरोप है कि निकाय चुनाव के दौरान भी पुलिस और प्रशासनिक तंत्र का सत्तारूढ़ दल के पक्ष में इस्तेमाल किया गया था। कांग्रेस ने मंगलवार को राज्य निर्वाचन आयोग को ज्ञापन देकर चुनाव के दौरान कथित सरकारी दबाव और अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग भी की थी।जूली ने कहा कि कांग्रेस इस मामले में भी राज्य निर्वाचन आयोग के सामने शिकायत रखेगी और संभावित उम्मीदवारों की जानकारी मांगे जाने की पूरी प्रक्रिया की जांच की मांग करेगी।
निकाय चुनाव के नतीजे क्या कहते हैं
निकाय चुनाव में प्रदेश की 309 निकायों के कुल 10,244 वार्डों के नतीजे आए थे। इनमें भाजपा सबसे बड़ी पार्टी रही, लेकिन बहुमत के लिहाज से उसका आंकड़ा कुल वार्डों के आधे से काफी कम रहा। निर्दलीय उम्मीदवारों का प्रदर्शन भी उल्लेखनीय रहा।
| दल | जीते वार्ड | हिस्सेदारी |
|---|---|---|
| भाजपा | 4,182 | 40.8% |
| कांग्रेस | 3,619 | 35.3% |
| निर्दलीय | 2,273 | 22.2% |
| अन्य दल | 170 | 1.7% |
| कुल वार्ड | 10,244 | 100% |
यही आंकड़े दोनों पक्षों के दावों का आधार बन रहे हैं — भाजपा इसे सबसे बड़ी पार्टी बनने के तौर पर देख रही है, जबकि कांग्रेस इसे सरकार के खिलाफ जनादेश बता रही है।
पंचायत चुनाव की तारीखों का अभी इंतजार
राजस्थान में पंचायती राज चुनाव की तारीखों की औपचारिक घोषणा अभी नहीं हुई है। राजस्थान हाईकोर्ट ने स्थानीय निकाय चुनाव की पूरी प्रक्रिया 15 नवंबर 2026 तक पूरी कराने की समयसीमा तय की है और राज्य सरकार ने अदालत को इसका भरोसा दिलाया था। राज्य निर्वाचन आयोग चुनावी कार्यक्रम तैयार करने में जुटा है।पोलिंग एजेंट को लेकर आयोग की पाबंदीइसी बीच राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायत चुनाव में पोलिंग एजेंट को लेकर नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इनके तहत सरकारी और अर्द्ध-सरकारी कर्मचारी, सार्वजनिक उपक्रमों के अधिकारी, स्थानीय निकायों के सदस्य एवं पदाधिकारी तथा सरकार से मानदेय लेने वाले व्यक्ति पोलिंग एजेंट नहीं बनाए जा सकेंगे।नियमों के अनुसार सरकारी सेवा में रहते हुए किसी उम्मीदवार का चुनाव एजेंट, पोलिंग एजेंट या काउंटिंग एजेंट बनने पर तीन महीने तक की कैद या जुर्माना, अथवा दोनों हो सकते हैं। आयोग ने इसे सभी उम्मीदवारों और दलों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करने से जुड़ा कदम बताया है।
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