For News (24x7) : 9829070307
RNI NO : RAJBIL/2013/50688
Visitors - 165367169
Horizon Hind facebook Horizon Hind Twitter Horizon Hind Youtube Horizon Hind Instagram Horizon Hind Linkedin
Breaking News
Ajmer Breaking News: केकड़ी विधायक शत्रुघ्न गौतम सड़क हादसे में बाल-बाल बचे: पीछे से ट्रेलर ने फॉर्च्यूनर को मारी टक्कर, आगे दूसरी गाड़ी से भिड़ी; विधायक और चालक सुरक्षित |  Ajmer Breaking News: मेयर अनामिका शर्मा ने वार्ड 62 का किया औचक निरीक्षण: सुलभ शौचालय और नालों की मरम्मत के दिए निर्देश, स्वच्छता बनाए रखने की अपील |  Ajmer Breaking News: सोशल मीडिया पर इजरायली महिला का आपत्तिजनक वीडियो वायरल करने वाले तीन आरोपी डिटेन |  Ajmer Breaking News: टेंपो चोरी के मामले में सिविल लाइन थाना पुलिस की कार्रवाई, दो आरोपी गिरफ्तार, चोरी किया गया टेंपो बरामद |  Ajmer Breaking News: ब्यावर में डाक महकमें में कार्यरत विवाहिता की संदिग्ध मौत, पीहर पक्ष के हत्या के आरोप से गरमाया मामला; आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग पर अड़े परिजन |  Ajmer Breaking News: विश्व हृदय दिवस पर डॉ. अनिल समरिया का संदेश – संतुलित आहार, व्यायाम और तनावमुक्त जीवन से रखें अपने दिल का ख्याल   |  Ajmer Breaking News: चुनाव आयोग और ईवीएम पर कांग्रेस का हल्ला बोल प्रदर्शन,चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का फूंका पुतला  |  Ajmer Breaking News: अजमेर में पेंशनर्स महासंघ का 24 घंटे का पड़ाव, 12 सूत्रीय मांगों को लेकर सौंपेंगे ज्ञापन |  Ajmer Breaking News: सीआरपीएफ जवान को मदद के बहाने बुलाकर बंधक बनाया, 89 हजार की लूट |  Ajmer Breaking News: नवंबर माह में आयोजित होने वाले पुष्कर पशु मेले की तैयारियों को लेकर पशुपालन विभाग के अधिकारियों ने मंगलवार को मेला स्थल का निरीक्षण कर विभिन्न व्यवस्थाओं का जायजा लिया। | 

राजस्थान न्यूज़: जयपुर की वॉलसिटी का UNESCO दर्जा खतरे में: हाईकोर्ट ने लिया स्वतः संज्ञान, JDA-नगर निगम से 2 सप्ताह में सर्वे रिपोर्ट मांगी

Post Views 01

September 30, 2026

जयपुर के परकोटे को वर्ष 2019 में अजरबैजान के बाकू में हुए विश्व धरोहर समिति के 43वें सत्र में यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया था।

जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने जयपुर की चारदीवारी क्षेत्र की ऐतिहासिक विरासत के लगातार क्षरण और उसके UNESCO World Heritage Site के दर्जे पर मंडरा रहे खतरे को लेकर गंभीर चिंता जताई है। जस्टिस प्रमिल कुमार माथुर ने मीडिया रिपोर्ट के आधार पर स्वतः संज्ञान लेते हुए मामले को जनहित याचिका के रूप में दर्ज करने के लिए मुख्य न्यायाधीश के समक्ष रखने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने कहा कि वॉलसिटी में अवैध निर्माण, अतिक्रमण, ऐतिहासिक भवनों में अनधिकृत बदलाव और संरक्षण नियमों के कमजोर क्रियान्वयन के कारण स्थिति गंभीर हो चुकी है। कोर्ट ने चेताया कि यदि दिसंबर 2026 से पहले प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो जयपुर के विश्व धरोहर दर्जे पर गंभीर खतरा पैदा हो सकता है।

‘समय रहते नहीं चेते तो जयपुर भी खो सकता है दर्जा’

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में UNESCO की World Heritage Committee की ओर से वर्ष 2023 और 2025 में जताई गई चिंताओं का उल्लेख किया। कोर्ट ने कहा कि ऐतिहासिक इमारतों को गिराए जाने, संरक्षण नियमों के कमजोर क्रियान्वयन और Heritage Cell की क्षमता को लेकर पहले भी सवाल उठाए जा चुके हैं।अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि दुनिया में कुछ World Heritage Sites का दर्जा पहले वापस लिया जा चुका है और यदि समय रहते ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो जयपुर को भी इसी तरह के जोखिम का सामना करना पड़ सकता है।

जयपुर को किन आधारों पर मिला था यह दर्जा

जयपुर के परकोटे को वर्ष 2019 में अजरबैजान के बाकू में हुए विश्व धरोहर समिति के 43वें सत्र में यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया था। यह दर्जा तीन मानदंडों — (ii), (iv) और (vi) — के आधार पर दिया गया था।

जयपुर को इन तीन मानदंडों के आधार पर विश्व धरोहर का दर्जा मिला था।

जयपुर को इन तीन मानदंडों के आधार पर विश्व धरोहर का दर्जा मिला था।

शहर की बसावट 1727 में सवाई जयसिंह द्वितीय ने की थी। अहमदाबाद के बाद जयपुर देश का दूसरा ऐसा शहर है, जिसे पूरे शहर के रूप में यह दर्जा मिला। राज्य की आर्थिक समीक्षा 2025-26 के अनुसार राजस्थान में कुल नौ विश्व धरोहर स्थल हैं, जिनमें जयपुर का परकोटा भी शामिल है।

अवैध निर्माण और अतिक्रमण पर हाईकोर्ट सख्त

अदालत ने कहा कि वॉलसिटी के कोर और बफर जोन में बड़ी संख्या में अवैध निर्माण, अनधिकृत बदलाव और अतिक्रमण की शिकायतें सामने आई हैं। कोर्ट के अनुसार Heritage Conservation and Protection Regulations, 2020 का प्रभावी पालन किए बिना कई जगह निर्माण और बदलाव किए गए।पीठ ने कहा कि जयपुर की ऐतिहासिक पहचान केवल कुछ भवनों तक सीमित नहीं है, बल्कि उसकी वास्तुकला, गलियां, बाजार, भवनों की ऊंचाई और पारंपरिक शहरी संरचना मिलकर उसकी विरासत बनाती हैं।कोर्ट ने टिप्पणी की कि पारंपरिक हवेलियां और ऐतिहासिक भवन धीरे-धीरे गायब हो रहे हैं और उनकी जगह ऐसे आधुनिक निर्माण ले रहे हैं, जो आसपास की पारंपरिक वास्तुकला से मेल नहीं खाते। अदालत ने नगर निगम और जयपुर विकास प्राधिकरण की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए और विभागों के बीच समन्वय की कमी को व्यवस्थागत उदासीनता से जोड़ा।

JDA और नगर निगम को 2 सप्ताह में सर्वे का आदेश

हाईकोर्ट ने जयपुर विकास प्राधिकरण और नगर निगम को वॉलसिटी क्षेत्र में अवैध तथा अनियमित निर्माणों का विस्तृत सर्वे कराने के निर्देश दिए हैं। दोनों एजेंसियों को दो सप्ताह के भीतर रिपोर्ट अदालत के सामने पेश करनी होगी, जिसमें ऐसे निर्माणों की पहचान करनी होगी जिनसे वॉलसिटी की ऐतिहासिक और वास्तु विरासत को नुकसान पहुंचने की आशंका है।

4 सप्ताह में 11 बिंदुओं पर मांगा शपथ पत्र

अदालत ने मुख्य सचिव, नगरीय विकास एवं आवासन विभाग, स्वायत्त शासन विभाग, पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग, पर्यटन विभाग तथा देवस्थान विभाग सहित संबंधित अधिकारियों से चार सप्ताह के भीतर विस्तृत शपथ पत्र मांगा है।अधिकारियों को बताना होगा कि पिछले पांच वर्षों में कितने अवैध या अनियमित निर्माण हुए, कितनों के खिलाफ सीलिंग, ध्वस्तीकरण, जुर्माना या अन्य कार्रवाई की गई और Heritage Impact Assessment जैसे उपायों का कितना पालन हुआ। कोर्ट ने भवनों की ऊंचाई, बफर जोन, आर्किटेक्चरल कंट्रोल, सार्वजनिक भागीदारी और विभागों के बीच समन्वय की स्थिति की जानकारी भी मांगी है।हाईकोर्ट ने यह भी पूछा है कि विरासत संरक्षण में लापरवाही या नियमों के उल्लंघन की अनुमति देने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय की गई या नहीं, और ऐसे लोगों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई क्यों नहीं की जाए। कोर्ट ने निर्देश दिया कि UNESCO को अंतिम रिपोर्ट भेजे जाने से पहले तत्काल और दीर्घकालीन चरणबद्ध एक्शन प्लान अदालत के सामने रखा जाए।

‘विरासत एक बार खत्म हुई तो दोबारा नहीं बनाई जा सकती’

जस्टिस माथुर ने कहा कि ऐतिहासिक विरासत एक बार नष्ट हो जाने के बाद उसे वास्तविक स्वरूप में दोबारा नहीं बनाया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि वर्तमान स्थिति को देखते हुए केवल सामान्य प्रशासनिक कदम पर्याप्त नहीं होंगे, बल्कि समयबद्ध, सख्त और लागू किए जा सकने वाले निर्देशों की जरूरत है।अदालत ने संविधान के अनुच्छेद 49 और अनुच्छेद 51A(f) का उल्लेख करते हुए सांस्कृतिक विरासत के

संरक्षण को संवैधानिक जिम्मेदारी बताया और कहा कि सांस्कृतिक विरासत का अधिकार व्यापक रूप से अनुच्छेद 21 के दायरे से भी जुड़ता जा रहा है।

लोगों और विशेषज्ञों से भी मांगे जाएंगे सुझाव

हाईकोर्ट ने नागरिक भागीदारी को महत्वपूर्ण बताते हुए अन्य राज्यों में लागू Social Audit जैसी व्यवस्थाओं का उदाहरण दिया और कहा कि राज्य सरकार विचार कर सकती है कि शहरी योजना और विरासत संरक्षण में नागरिकों की भागीदारी के लिए किसी अतिरिक्त कानूनी ढांचे की जरूरत है या नहीं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह विधायिका के क्षेत्र में हस्तक्षेप नहीं कर रहा। मामले को दस दिनों के भीतर उपयुक्त रोस्टर वाली पीठ के समक्ष सूचीबद्ध करने के निर्देश दिए गए हैं। अदालत ने आदेश को डिजिटल और प्रिंट मीडिया में प्रकाशित करने को भी कहा है, ताकि आम नागरिक और विरासत संरक्षण विशेषज्ञ अपने सुझाव हाईकोर्ट रजिस्ट्री को भेज सकें। अदालत ने मामले में सहायता के लिए अधिवक्ता संदीप पाठक, युवराज सामंत, मधुसूदन सिंह राजपुरोहित और अनिरुद्ध माथुर को न्यायमित्र नियुक्त किया है। मामले को “In Re: Global Identity of the Pink City” शीर्षक से आगे बढ़ाया जा रहा है।


© Copyright Horizonhind 2026. All rights reserved