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September 19, 2026
जयपुर महापौर चुनाव: सियासी बाड़ेबंदी, शह-मात का खेल और पुष्कर में गुप्त मंथन
जयपुर नगर निगम के महापौर चुनाव से पहले सत्ता की चौसर बिछ चुकी है। राजनीतिक दांव-पेंच का केंद्र अब जयपुर नहीं, बल्कि 145 किलोमीटर दूर पुष्कर की शांत वादियां बन गई हैं। 'क्रॉस वोटिंग' की आशंका और आंतरिक असंतोष को भांपते हुए भारतीय जनता पार्टी ने अपने पार्षदों की किलेबंदी सख्त कर दी है। बगरू से हटाकर सभी पार्षदों को दो लग्ज़री बसों के जरिए पुष्कर के खरेखड़ी रोड स्थित एक एकांत रिसॉर्ट में गोपनीय तरीके से शिफ़्ट कर दिया गया है। रिसॉर्ट के बाहर जयपुर पंजीकरण की गाड़ियों की लंबी कतारें राजनीतिक हलचल की गवाही दे रही हैं। सुबह पार्षदों की लॉन और बालकनी में मौजूदगी के फुटेज जैसे ही मीडिया के कैमरों में कैद हुए, आनन-फानन में रिसॉर्ट का मुख्य द्वार बंद कर 'नो एंट्री' का पहरा बैठा दिया गया। संगठन इसे महज 'अभ्यास वर्ग' और 'प्रशिक्षण शिविर' का आवरण दे रहा है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषक इसे स्पष्ट तौर पर खरीद-फरोख्त और सेंधमारी से बचने की घेराबंदी मान रहे हैं। जनादेश के आंकड़ों पर नजर डालें तो 150 वार्डों वाले निगम में बहुमत का जादुई आंकड़ा 76 है, जबकि भाजपा के पास 78 पार्षदों का स्पष्ट संख्याबल है। कांग्रेस 57 और निर्दलीय 15 पर सिमटे हैं। इसके बावजूद मात्र दो पार्षदों के पतले मार्जिन ने पार्टी आलाकमान की पेशानी पर बल ला दिए हैं। भीतरघात रोकने के लिए पार्षदों से बंद लिफाफे में गुप्त रायशुमारी कराई गई है, जिसमें तीन प्राथमिक नाम तलब किए गए हैं। महापौर पद की दौड़ में पांच कद्दावर चेहरे चर्चा में हैं, लेकिन सबसे बड़ा मास्टरस्ट्रोक यह है कि संभावित प्रत्याशी और उनके प्रस्तावक पार्षदों के इस बाड़े में मौजूद ही नहीं हैं। उन्हें राजधानी जयपुर में रोक कर रणनीति को पूरी तरह अभेद्य रखा गया है, ताकि अंतिम क्षण तक कोई गुटबाजी सिर न उठा सके। पार्षदों की निष्ठा को बांधकर रखने की यह रिज़ॉर्ट पॉलिटिक्स क्या जयपुर की सत्ता पर भाजपा का परचम फहरा पाएगी, या मतपेटी खुलने से पहले कोई सियासी उलटफेर होगा? निगाहें अब पार्टी हाईकमान की अंतिम मुहर पर टिकी हैं।
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