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September 18, 2026
हत्या के मामले में सजा काट रहा अजहरुद्दीन उर्फ कुका मंगलवार शाम की रोल कॉल में नहीं मिला, सिविल लाइंस थाने में मामला दर्ज
अजमेर। अजमेर केंद्रीय कारागार के अधीन संचालित खुली जेल से आजीवन कारावास की सजा काट रहा बंदी अजहरुद्दीन उर्फ कुका फरार हो गया। मंगलवार शाम नियमित हाजिरी के दौरान वह मौजूद नहीं मिला तो जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया। कर्मचारियों ने जेल परिसर और आसपास के इलाकों में उसकी तलाश की, लेकिन उसका पता नहीं चला। इसके बाद सिविल लाइंस थाना पुलिस को सूचना दी गई और मामला दर्ज कराया गया। पुलिस के अनुसार अजहरुद्दीन हत्या के मामले में दोषी है और भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। वह अजमेर केंद्रीय कारागार से संबद्ध ओपन जेल में सजा काट रहा था। राजस्थान कारागार विभाग की आधिकारिक सूची में भी अजमेर में ओपन एयर कैंप संचालित होने का उल्लेख है।
शाम की हाजिरी में नहीं मिला बंदी
खुली जेल में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार बंदियों की नियमित हाजिरी ली जाती है। मंगलवार शाम जब कर्मचारियों ने बंदियों की उपस्थिति जांची तो अजहरुद्दीन अपनी जगह पर नहीं मिला। पहले जेल प्रशासन ने अपने स्तर पर उससे संपर्क करने और आसपास तलाश करने का प्रयास किया, लेकिन देर शाम तक कोई सुराग नहीं मिलने पर पुलिस को इसकी जानकारी दी गई। इसके बाद जेल प्रहरी कुलदीप की ओर से सिविल लाइंस थाने में रिपोर्ट दी गई। पुलिस ने फरार बंदी के संबंध में मामला दर्ज कर संभावित ठिकानों पर तलाश शुरू कर दी है। उपलब्ध स्थानीय रिपोर्ट के मुताबिक मामले की जांच एएसआई रेवंतराम कर रहे हैं।
कैसे निकला ओपन जेल से, पुलिस कर रही जांच
पुलिस और जेल प्रशासन अब यह पता लगाने में जुटे हैं कि अजहरुद्दीन जेल से कब और किस रास्ते बाहर निकला। यह भी जांच का विषय है कि उसने अकेले फरारी की योजना बनाई या बाहर से किसी व्यक्ति ने उसकी मदद की।
पुलिस उसके परिचितों, पुराने ठिकानों और संभावित संपर्कों के बारे में जानकारी जुटा रही है। हालांकि अभी तक किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। फरारी के सही समय और तरीके को लेकर भी जांच जारी है।
खुली जेल में अपेक्षाकृत कम होती है सुरक्षा पाबंदियां
ओपन जेल व्यवस्था सामान्य बंद जेल से अलग होती है। अच्छे आचरण और निर्धारित पात्रता वाले सजायाफ्ता बंदियों को ऐसी व्यवस्था में अपेक्षाकृत अधिक स्वतंत्रता और पुनर्वास का अवसर दिया जाता है, जबकि उनसे निर्धारित नियमों का पालन और नियमित हाजिरी अपेक्षित होती है। बाड़मेर ओपन जेल से हाल में हुई एक अन्य फरारी की रिपोर्ट में भी इसी व्यवस्था का उल्लेख किया गया था। अजमेर की घटना के बाद यह भी जांचा जा रहा है कि निर्धारित निगरानी व्यवस्था में कहीं कोई कमी तो नहीं रही और बंदी के लापता होने का पता उससे पहले क्यों नहीं चल सका।
सितंबर में राजस्थान की खुली जेलों से कई फरारी की घटनाएं
अजमेर की घटना इस महीने राज्य की खुली जेलों से सामने आई अकेली फरारी नहीं है। 6 सितंबर को अलवर केंद्रीय कारागार की ओपन जेल से गोपाल उर्फ रामगोपाल फरार हुआ था। वह भी हत्या और आर्म्स एक्ट के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहा था। बाद में उसे पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया।इसी तरह 11 सितंबर को बाड़मेर की ओपन जेल से भावेश उर्फ बंटी फरार हुआ। वह हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहा था और नियमित हाजिरी के दौरान उसके गायब होने का पता चला था। उसकी तलाश के लिए पुलिस ने मामला दर्ज किया।
धौलपुर की खुली जेल से भी 11 सितंबर को सुरेंद्र नाम का उम्रकैदी फरार हुआ था। पुलिस ने बाद में उसे धौलपुर रेलवे स्टेशन के पास से गिरफ्तार कर लिया। वह रेप और हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहा था। ऐसे में सितंबर के भीतर अलग-अलग जिलों में सामने आई इन घटनाओं ने ओपन जेलों की निगरानी और हाजिरी व्यवस्था पर ध्यान खींचा है। हालांकि खुली जेल का मॉडल स्वयं न्यूनतम सुरक्षा और पुनर्वास की अवधारणा पर आधारित होता है, इसलिए प्रत्येक घटना में वास्तविक प्रशासनिक चूक थी या बंदी ने उपलब्ध स्वतंत्रता का दुरुपयोग किया, यह संबंधित जांच से ही तय होगा।
संभावित ठिकानों पर पुलिस की नजर
अजमेर सिविल लाइंस थाना पुलिस अब अजहरुद्दीन के संभावित ठिकानों और परिचितों के संबंध में सूचनाएं जुटा रही है। जेल प्रशासन से भी उसकी पृष्ठभूमि, जेल में व्यवहार और हाल के संपर्कों की जानकारी लिए जाने की संभावना है।
फिलहाल अजहरुद्दीन की गिरफ्तारी की पुष्टि सामने नहीं आई है। पुलिस और जेल प्रशासन की जांच का मुख्य फोकस उसकी तलाश के साथ इस बात पर भी है कि वह खुली जेल से किस परिस्थिति में बाहर निकला।
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