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September 18, 2026
पूर्व मेयर धर्मेंद्र गहलोत ने नगर निगम कमिश्नर और निर्वाचन अधिकारी को सौंपा ज्ञापन, निष्पक्ष कार्रवाई की मांग
अजमेर में नगर निगम से चोरी छुपके रात के अंधेरे में कथित फाइल और गोपनीय दस्तावेज चोरी किए जाने के गंभीर आरोप लगाते हुए पूर्व मेयर धर्मेंद्र गहलोत ने शुक्रवार को अजमेर नगर निगम कमिश्नर और जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंप कर सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक करने की मांग की है। धर्मेंद्र गहलोत ने निगम आयुक्त (कमिशनर) और रिटर्निंग ऑफिसर को ज्ञापन सौंपकर फाइलों के गायब होने और चुनावी आपत्तियों पर त्वरित व निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की है।
मीडिया से बात करते हुए गहलोत ने आरोप लगाया कि 16 सितम्बर 2026 की रात को नगर निगम की पुरानी बिल्डिंग के ताले खोलकर कई महत्वपूर्ण फाइलें गायब कर दी गईं। उन्होंने नामजद आरोप लगाते हुए भाजपा के जिलाध्यक्ष रमेश सोनी और निगम अधिकारी रमेश चौधरी पर इस मामले में संलिप्त होने का दावा किया है।
गहलोत ने मांग की है कि पुरानी और नई नगर निगम बिल्डिंग की सीसीटीवी फुटेज (रात 9:30 बजे के बाद की) को सार्वजनिक किया जाए। उन्होंने कमिशनर को याद दिलाया कि वे दस्तावेजों के कस्टोडियन (संरक्षक) हैं और यदि चोरी की घटनाओं पर कार्रवाई नहीं की जाती, तो 'भारतीय न्याय संहिता' की धारा 199 के तहत उन पर भी कानूनी जिम्मेदारी तय होगी।
धर्मेंद्र गहलोत ने कहा कि मैंने नगर निगम के कमिश्नर साहब को ज्ञापन दिया है। 16 तारीख की रात को पुरानी बिल्डिंग से फाइलें गायब की गईं। हमने रमेश सोनी और रमेश चौधरी का नामजद आरोप लगाया है। सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक की जानी चाहिए। कमिश्नर साहब कस्टोडियन हैं और अगर कार्रवाई नहीं होती तो भारतीय न्याय संहिता की धारा 199 के तहत वे भी जिम्मेदार होंगे।"
इसके साथ ही, उन्होंने रिटर्निंग ऑफिसर (RO) की अनुपस्थिति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि नाम वापसी का समय होने के बावजूद अधिकारी दफ्तर में मौजूद नहीं थे। उन्होंने झूठे हलफनामे (Affidavit) जमा करने वालों के खिलाफ परिवाद दर्ज कराने और राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देशों के अनुसार निष्पक्ष जांच की मांग की है।
प्रशासन द्वारा इस मामले में अब क्या कदम उठाया जाता है और सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक की जाती है या नहीं, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
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