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September 18, 2026
जोधपुर से नामांकन भरने निकले थे काबरा, देसूरी के आसपास फोन हुआ बंद, परिजनों ने अपहरण की आशंका जताकर दिया धरना, सांसद महिमा कुमारी और विधायक विश्वराज सिंह भी पहुंचे, पुलिस पर लगे आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं
नाथद्वारा। नगर पालिका अध्यक्ष पद के चुनाव से पहले नाथद्वारा में भाजपा के भीतर ऐसा घटनाक्रम सामने आया जिसने पूरे दिन सियासी हलचल बनाए रखी। वार्ड नंबर 4 से निर्वाचित भाजपा पार्षद प्रदीप काबरा अध्यक्ष पद के लिए नामांकन दाखिल करने जोधपुर से नाथद्वारा रवाना हुए, लेकिन रास्ते में उनसे संपर्क टूट गया। नामांकन का समय गुजरता रहा और काबरा उपखंड कार्यालय नहीं पहुंचे। इसी बीच भाजपा ने वार्ड नंबर 24 से निर्वाचित परेश सोनी से अध्यक्ष पद का नामांकन दाखिल करवा दिया और उन्हें अधिकृत प्रत्याशी बना दिया।नाथद्वारा नगरपालिका के 40 वार्डों में भाजपा के 20, कांग्रेस के 19 और एक निर्दलीय पार्षद निर्वाचित हुआ है। प्रदीप काबरा वार्ड 4 से 375 वोट लेकर 66 मतों से जीते हैं, जबकि परेश सोनी वार्ड 24 से 410 वोट लेकर 213 मतों से निर्वाचित हुए।
सुबह नामांकन के लिए निकले, देसूरी के पास टूट गया संपर्क
परिजनों के अनुसार प्रदीप काबरा बुधवार सुबह करीब 6 बजे जोधपुर से नाथद्वारा के लिए रवाना हुए थे। उनके साथ संदीप श्रीमाली और एक प्रस्तावक भी थे। सुबह करीब 9:28 बजे परिवार से उनकी आखिरी बातचीत हुई। इसके बाद देसूरी क्षेत्र के आसपास उनका मोबाइल बंद आने लगा और परिवार उनसे संपर्क नहीं कर सका।समय बीतने के साथ परिवार और समर्थकों की चिंता बढ़ गई। अध्यक्ष पद के लिए नामांकन की समय सीमा भी करीब आती जा रही थी। परिजनों ने पुलिस अधिकारियों को लिखित शिकायत देकर काबरा और उनके साथ मौजूद लोगों की तलाश कराने की मांग की तथा अपहरण की आशंका जताई। पुलिस ने उस समय किसी अपहरण की पुष्टि नहीं की थी।
तहसील कार्यालय के बाहर शुरू हुआ धरना
काबरा के नहीं पहुंचने के बाद बड़ी संख्या में उनके परिजन और समर्थक उपखंड कार्यालय के बाहर जमा हो गए। उन्होंने उनकी सुरक्षित वापसी की मांग करते हुए धरना शुरू कर दिया। देर शाम तक काबरा का पता नहीं चलने पर विरोध और तेज हो गया।स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार परिवार की ओर से पुलिस की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए गए और आरोप लगाया गया कि काबरा को कहीं रोका गया है। हालांकि पुलिस द्वारा उन्हें देसूरी में पकड़कर नामांकन अवधि तक अपने साथ रखने या बाड़ेबंदी में पहुंचाने जैसी चर्चाओं की किसी आधिकारिक जांच या पुलिस बयान से पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इन दावों को स्थानीय राजनीतिक आरोप और चर्चाओं से आगे तथ्य नहीं माना जा सकता।
सांसद महिमा कुमारी और विधायक विश्वराज सिंह पहुंचे
धरने की जानकारी मिलने के बाद नाथद्वारा विधायक विश्वराज सिंह मेवाड़ और राजसमंद सांसद महिमा कुमारी मेवाड़ भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने परिजनों से बातचीत की और पुलिस अधीक्षक से फोन पर काबरा की तलाश के संबंध में जानकारी ली। स्थानीय रिपोर्ट में दोनों नेताओं की ओर से यह कहे जाने का उल्लेख है कि उनकी पसंद भी प्रदीप काबरा थे और पूरे घटनाक्रम की जानकारी उन्हें भी स्पष्ट नहीं थी। इसके बाद सांसद महिमा कुमारी ने भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ से फोन पर बात की। रिपोर्ट के अनुसार राठौड़ ने कहा कि उनकी प्रदीप काबरा से बातचीत हुई है और अपहरण जैसी कोई बात नहीं है। उन्होंने काबरा के अगले दिन नाथद्वारा पहुंचने की बात कही। इसके बाद देर रात धरना समाप्त हुआ।
इधर नामांकन का वक्त निकला, भाजपा ने परेश सोनी को उतारा
जब तक प्रदीप काबरा से संपर्क नहीं हो पाया, अध्यक्ष पद के नामांकन का समय निकलता जा रहा था। इसी दौरान भाजपा की ओर से परेश सोनी ने अध्यक्ष पद के लिए अपना नामांकन दाखिल कर दिया। पार्टी ने भी उन्हें अधिकृत प्रत्याशी बना दिया। उनके नामांकन के दौरान निर्दलीय पार्षद प्रकाश सनाढ्य और भाजपा पार्षद जितेंद्र सोमानी की मौजूदगी की भी रिपोर्ट है।कांग्रेस की ओर से अजय गुर्जर और कमलेश कुमावत ने भी नामांकन दाखिल किए थे। नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही अंतिम उम्मीदवारों की स्थिति स्पष्ट होनी थी।
अगली सुबह करीब साढ़े छह बजे नाथद्वारा लौटे काबरा
रातभर चले घटनाक्रम के बाद प्रदीप काबरा अगली सुबह करीब 6:30 बजे सुरक्षित नाथद्वारा पहुंच गए। उनके लौटने के साथ परिवार की ओर से जताई गई अपहरण की आशंका तत्काल समाप्त हो गई। उनके साथ संपर्क से बाहर रहे अन्य लोग भी सुरक्षित वापस लौटे।लेकिन तब तक अध्यक्ष पद के लिए उनका नामांकन दाखिल करने का अवसर निकल चुका था और भाजपा परेश सोनी को अधिकृत प्रत्याशी बना चुकी थी। इस तरह काबरा अध्यक्ष पद के लिए औपचारिक चुनाव मैदान में नहीं आ सके।
पुलिस की भूमिका को लेकर सवाल, पर आरोप अभी अपुष्ट
घटनाक्रम के बाद नाथद्वारा में यह चर्चा तेज रही कि आखिर काबरा इतने घंटे कहां थे और उनसे संपर्क क्यों नहीं हो पाया। परिजनों ने धरने के दौरान पुलिस पर भी सवाल उठाए थे। दूसरी ओर उपलब्ध रिपोर्टों में पुलिस ने कहा था कि वह उनकी तलाश कर रही है।देसूरी क्षेत्र में पुलिस द्वारा काबरा को रोकने, उन्हें नामांकन की समय सीमा तक अपने साथ रखने या बाद में किसी बाड़ेबंदी में पहुंचाने के दावों के समर्थन में अभी कोई आधिकारिक पुलिस रिकॉर्ड या स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। ऐसे में इन दावों को तथ्य के रूप में प्रकाशित करने के बजाय आरोप अथवा स्थानीय चर्चा के रूप में ही उल्लेख करना उचित होगा।
20-19-1 का है नाथद्वारा का गणित
नाथद्वारा नगरपालिका में भाजपा को 20 सीटें, कांग्रेस को 19 और निर्दलीय को एक सीट मिली है। बहुमत के लिए 21 पार्षदों का समर्थन आवश्यक है। यह संख्या अध्यक्ष चुनाव में निर्दलीय पार्षद की भूमिका को महत्वपूर्ण बनाती है, लेकिन किस उम्मीदवार को वास्तव में किस पार्षद का वोट मिलेगा, इसका निर्धारण मतदान के दौरान ही होगा। इसलिए किसी उम्मीदवार की जीत को पहले से तय मानना उचित नहीं होगा। काबरा के कुछ घंटों तक संपर्क से बाहर रहने, परिवार के धरने और उसी दौरान भाजपा की ओर से दूसरे उम्मीदवार का नामांकन दाखिल होने का घटनाक्रम अब नाथद्वारा की स्थानीय राजनीति में चर्चा का विषय बना हुआ है। इसके बावजूद काबरा के संपर्क से बाहर रहने की वास्तविक परिस्थितियां अभी पूरी तरह सार्वजनिक नहीं हुई हैं।
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