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September 18, 2026
25 दुकानों में आग से भारी नुकसान के बाद मणिहारों का कटला और पुरोहित जी का कटला में पसरा सन्नाटा, पूर्व मुख्यमंत्री ने फायर सेफ्टी सिस्टम पर उठाए सवाल, कहा— सरकार का प्रतिनिधि व्यापारियों की पीड़ा सुने
जयपुर। बड़ी चौपड़ के पास पुरोहित जी का कटला स्थित सेठी कॉम्प्लेक्स में गुरुवार को हुए भीषण अग्निकांड के अगले दिन शुक्रवार को भी आसपास के बाजारों में सन्नाटा रहा। मणिहारों का कटला और पुरोहित जी का कटला की दुकानें बंद रहीं और आग से प्रभावित व्यापारी अपनी जली हुई दुकानों के बाहर नुकसान का आकलन करते नजर आए। अग्निकांड में करीब 25 दुकानें और गोदाम प्रभावित हुए थे। आग कपड़े, प्लास्टिक, कॉस्मेटिक और लाख की चूड़ियों के स्टॉक तक फैलने के कारण कई घंटे तक बुझाने में मुश्किल आई थी। कोई जनहानि नहीं हुई, क्योंकि आग सुबह बाजार खुलने से पहले लगी थी।
त्योहारी सीजन से ठीक पहले आग लगने के कारण व्यापारियों का बड़ी मात्रा में स्टॉक जल गया। नुकसान का अंतिम सरकारी आकलन अभी सामने नहीं आया है, हालांकि व्यापारियों ने नुकसान करोड़ों रुपए में होने की बात कही है। अब प्रभावित दुकानदार सरकार और प्रशासन से आर्थिक सहायता तथा बाजार की स्थायी फायर सेफ्टी व्यवस्था की उम्मीद कर रहे हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत शुक्रवार को सेठी कॉम्प्लेक्स पहुंचे और आग से प्रभावित दुकानदारों से मुलाकात की। उन्होंने दुकानों में हुए नुकसान और आग बुझाने के दौरान आई परेशानियों की जानकारी ली। गहलोत ने कहा कि प्रभावित व्यापारियों के नुकसान को देखते हुए राज्य सरकार को उनकी सहायता के लिए आगे आना चाहिए और सरकार के किसी प्रतिनिधि को मौके पर आकर उनकी समस्याएं सुननी चाहिए।
गहलोत ने कहा कि व्यापारियों की ओर से उन्हें नगर निगम और फायर सेफ्टी व्यवस्था से जुड़ी कमियों के बारे में बताया गया है। उन्होंने कहा कि बाजारों और बड़ी व्यावसायिक इमारतों में लगे अग्निशमन उपकरणों की नियमित जांच नगर निकायों की जिम्मेदारी है और सिस्टम केवल कागजों में नहीं, वास्तविक आपात स्थिति में भी काम करने की स्थिति में होना चाहिए।
गहलोत ने दावा किया कि व्यापारियों से बातचीत में उन्हें बताया गया कि बाजार में स्थापित फायर फाइटिंग सिस्टम प्रभावी रूप से काम नहीं कर रहा था। इस अग्निकांड के बाद फायर सुरक्षा प्रणाली पर पहले से उठ रहे सवाल और गहरे हुए हैं। घटनास्थल की रिपोर्टिंग में भी व्यापारियों ने बाजार में लगे फायर हाइड्रेंट, स्मोक डिटेक्टर और अन्य उपकरणों के काम नहीं करने का आरोप लगाया है।
गहलोत ने फायर ब्रिगेड और राहत कार्य में जुटे कर्मचारियों के प्रयासों की सराहना की। गुरुवार को करीब 30 फायर टेंडर और 50 से 60 दमकलकर्मी अभियान में लगाए गए थे। संकरी गलियों और कमजोर वेंटिलेशन के कारण फायर टीमों को दुकानों तक पहुंचने में काफी परेशानी हुई। मुख्य आग दोपहर करीब 2:30 बजे नियंत्रण में आई, लेकिन कई हिस्सों से देर शाम तक धुआं और चिंगारियां उठती रहीं।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी व्यावसायिक भवन को फायर NOC देने से पहले वहां उपलब्ध अग्निशमन व्यवस्था की सही तरीके से जांच होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ मामलों में राजनीतिक या दूसरे दबावों के कारण भी NOC जारी होने की शिकायतें सामने आती हैं और ऐसी शिकायतों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
गहलोत ने कहा कि उन्हें आसपास की एक इमारत को लेकर भी कथित रूप से प्रभाव का इस्तेमाल कर NOC लेने की शिकायत बताई गई है। इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इससे पहले किशनपोल विधायक अमीन कागजी ने भी परकोटे में फायर NOC और फायर सिस्टम के निरीक्षण की व्यवस्था की दोबारा जांच की मांग की थी।
गहलोत ने कहा कि आग जिस समय लगी, उस वक्त बाजार बंद था और लोगों की आवाजाही शुरू नहीं हुई थी। उन्होंने आशंका जताई कि यही घटना व्यस्त कारोबारी समय में होती तो जानमाल का नुकसान कहीं अधिक गंभीर हो सकता था। यह चिंता स्थानीय व्यापारियों ने भी जताई है। पुरोहित जी का कटला व्यापार एसोसिएशन के अध्यक्ष ने कहा था कि यदि आग सुबह 11 बजे के आसपास लगती तो बाजार में मौजूद बड़ी संख्या में लोगों को बाहर निकालना मुश्किल हो सकता था, क्योंकि कई रास्ते बेहद संकरे हैं।
गहलोत ने कहा कि व्यापारी सरकार को टैक्स देते हैं और ऐसे बड़े हादसे के बाद सरकार को देखना चाहिए कि प्रभावित कारोबारियों को किस तरह सहायता उपलब्ध कराई जा सकती है। उन्होंने कहा कि बीमा कंपनियों से मिलने वाली राशि अलग विषय है, लेकिन राज्य सरकार को भी व्यापारियों की स्थिति का आकलन कर राहत के विकल्प तलाशने चाहिए। उनके इस दौरे की रिपोर्टों में भी उन्होंने प्रभावित व्यापारियों के लिए उचित मुआवजा देने की मांग की है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि आवश्यक हो तो प्रभावित व्यापारियों के प्रतिनिधिमंडल को मुख्यमंत्री कार्यालय बुलाकर उनकी समस्याएं सुनी जा सकती हैं।
मीडिया से बातचीत के दौरान गहलोत ने राजस्थान के निकाय चुनाव और अब चल रही मेयर-चेयरमैन चुनाव प्रक्रिया पर भी भाजपा को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि विभिन्न निकायों में भाजपा निर्दलीय और विपक्षी पार्षदों को अपने पक्ष में करने के लिए धनबल और राजनीतिक दबाव का इस्तेमाल कर रही है। एक दिन पहले भी गहलोत ने पार्षदों को कथित रूप से डेढ़ से ढाई करोड़ रुपए तक के प्रस्ताव दिए जाने का आरोप लगाया था। भाजपा और राज्य सरकार के नेताओं ने ऐसे आरोपों को बेबुनियाद बताया है।
जोधपुर को लेकर गहलोत ने पार्षदों के भाजपा के साथ जाने पर सवाल उठाए। यहां एक तथ्य स्पष्ट करना जरूरी है—ताजा रिपोर्टों के अनुसार भाजपा के साथ आने वाले सात पार्षद निर्दलीय निर्वाचित हुए थे, न कि कांग्रेस के टिकट पर चुने गए सात पार्षद। इन सात निर्दलीयों के समर्थन के बाद भाजपा ने अपने साथ 52 पार्षद होने का दावा किया है। इन पार्षदों पर किसी तरह के प्रलोभन या दबाव के गहलोत के आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
गहलोत ने चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कांग्रेस नेता राहुल गांधी की ओर से मतदाता सूचियों और Special Intensive Revision यानी SIR को लेकर लगाए जा रहे आरोपों का भी उल्लेख किया। उन्होंने पश्चिम बंगाल में नाम हटाए जाने के मामलों का हवाला दिया।
पश्चिम बंगाल की SIR प्रक्रिया से संबंधित विवाद फिलहाल न्यायिक जांच के दायरे में भी है। चुनाव आयोग ने 18 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि नाम जोड़ने या हटाने से जुड़े 37 लाख से अधिक अपील/प्रतिवेदन लंबित हैं। इससे मतदाता सूची को लेकर बड़े पैमाने पर विवाद की पुष्टि होती है, लेकिन कांग्रेस की ओर से इस्तेमाल किया जा रहा व्यापक “वोट चोरी” का आरोप स्वयं में सिद्ध तथ्य नहीं है और इसे राजनीतिक आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
गहलोत ने राजस्थान के निकाय चुनावों में परिसीमन को लेकर भी भाजपा पर अपने लाभ के लिए वार्ड सीमाएं तय करने का आरोप दोहराया। इस मुद्दे पर हाल के चुनाव परिणामों के विश्लेषण में जयपुर, जोधपुर और कोटा के तीनों निगमों में कांग्रेस को भाजपा से कुछ अधिक कुल वोट मिलने के बावजूद भाजपा के अधिक वार्ड जीतने का अंतर सामने आया है। हालांकि इससे अपने-आप यह साबित नहीं होता कि परिसीमन राजनीतिक उद्देश्य से किया गया था; यह गहलोत और कांग्रेस की ओर से लगाया गया आरोप है।
गहलोत ने प्रदेश के कुछ हिस्सों में कम बारिश का जिक्र करते हुए राज्य सरकार से रोजगार, पेयजल और पशुओं के चारे के लिए समय रहते तैयारी करने को कहा। उन्होंने पूर्व के सूखे के समय रोजगार योजनाओं की भूमिका का उल्लेख किया और ग्रामीण क्षेत्रों में परिस्थितियां खराब होने से पहले सरकारी स्तर पर आवश्यक व्यवस्थाएं करने की बात कही। इस दौरान कांग्रेस विधायक रफीक खान और जयपुर शहर कांग्रेस अध्यक्ष सुनील शर्मा सहित अन्य नेता भी मौजूद रहे।
फिलहाल सेठी कॉम्प्लेक्स अग्निकांड के मामले में पुलिस और नगर निगम स्तर पर जांच जारी है। व्यापारियों के लिए तत्काल चिंता जले हुए कारोबार को दोबारा खड़ा करने की है, जबकि प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती यह तय करने की है कि परकोटे की संकरी गलियों वाले बाजारों में अगली आपात स्थिति से पहले फायर सेफ्टी सिस्टम को वास्तविक रूप से कार्यशील कैसे बनाया जाए।
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