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September 13, 2026
गंज थाने में वकील को बैठाए जाने और पुलिस कार्रवाई में देरी को लेकर वकीलों और पुलिस प्रशासन के बीच उपजा विवाद आखिरकार बातचीत के बाद सुलझ गया है।
मामले की शुरुआत तब हुई जब एक जूनियर अधिवक्ता के साथ हुई घटना के बाद पुलिस में तहरीर दी गई, लेकिन आरोप है कि 24 घंटे तक एफआईआर दर्ज नहीं की गई। इसके अलावा, वकीलों ने पुलिस द्वारा अधिवक्ता को थाने में नीचे बैठाए जाने और सुरक्षा में लापरवाही बरतने पर कड़ा विरोध और रोष जताया।
मामला बढ़ता देख वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने हस्तक्षेप किया, जिसके बाद दोनों पक्षों की तरफ से एफआईआर दर्ज कर ली गई है और पुलिस अधिकारियों ने घटना पर खेद जताते हुए निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया है।
वकीलों का आरोप था कि तहरीर देने के बावजूद 24 घंटे तक पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। साथ ही थाने में वकील को दीवानजी के पीछे बैठाने और अभिरक्षा के दौरान सुरक्षा मानकों का ध्यान न रखने पर अधिवक्ताओं ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए और निष्पक्षता पर प्रश्न चिह्न लगाया।
जिला बार एसोसिएशन अध्यक्ष योगेंद्र ओझा ने बताया कि हमारे जूनियर अधिवक्ता के साथ कल घटना घटित हुई थी, जिसकी तहरीर दी गई थी। लेकिन तहरीर पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। आज अधिवक्ता दिन में भी आए और शाम को भी आए। जिस प्रकार का पुलिस का व्यवहार होना चाहिए था, वह सही नहीं था। 24 घंटे बाद अधिवक्ता की एफआईआर दर्ज की गई और सामने वाली पार्टी से आधे घंटे बाद एफआईआर ली गई, जो पुलिस की निष्पक्षता पर सवाल खड़ा करता है।
हमारा विरोध इस बात को लेकर भी था कि अधिवक्ता को थाने में नीचे बैठाया गया। हमने अधिकारियों के सामने अपनी बात रखी। पुलिस अधिकारियों ने इस पर खेद प्रकट किया और आश्वासन दिया कि भविष्य में किसी भी व्यक्ति की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाएगा। आश्वासन और खेद प्रकट करने के बाद हमने अपना रोष समाप्त कर दिया है।
वहीं इस पूरे मामले पर पुलिस प्रशासन ने अपना रुख स्पष्ट करते हुए बताया कि परिवादी समीर और दूसरे पक्ष, दोनों की ओर से एफआईआर दर्ज कर ली गई है। पुलिस और वकीलों के बीच बातचीत के बाद मामला शांतिपूर्वक सुलझा लिया गया है।
परिवादी समीर की तरफ से एक एफआईआर दी गई थी और सामने वाले पक्ष की तरफ से भी एफआईआर दी गई थी। दोनों पक्षों की तरफ से गंज थाने में एफआईआर दर्ज कर ली गई है। वकीलों का यह कहना था कि वकील को पुलिस द्वारा बिठा लिया गया था, लेकिन अब पुलिस और वकीलों में समझाइश हो गई है, बातचीत हो गई है और सारा मामला सुलझ गया है।
पुलिस प्रशासन ने निष्पक्ष कानूनी कार्रवाई का भरोसा दिलाया है, जिसके बाद अधिवक्ताओं ने अपना विरोध खत्म कर दिया है।
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