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September 12, 2026
पुष्कर निकाय चुनाव के बाद भाजपा की ‘बाड़ाबंदी’, 23 प्रत्याशी बस से प्रशिक्षण के लिए रवाना, प्रत्याशियों को करीब 10 दिन के कपड़े साथ लाने को कहा, भाजपा बोली—पार्टी की रीति-नीति और संगठन निष्ठा का दिया जाएगा प्रशिक्षण
नगर परिषद चुनाव के लिए मतदान संपन्न होने के साथ ही पुष्कर में अब राजनीतिक हलचल का नया दौर शुरू हो गया है। चुनाव परिणाम से पहले भाजपा ने अपने प्रत्याशियों को एक साथ रखते हुए उन्हें बस से अज्ञात स्थान के लिए रवाना किया है। राजनीतिक गलियारों में इसे भाजपा की ‘बाड़ाबंदी’ के रूप में देखा जा रहा है, जबकि पार्टी इसे प्रत्याशियों का प्रशिक्षण कार्यक्रम बता रही है। शनिवार को पुष्कर के मेला ग्राउंड क्षेत्र स्थित एक निजी रेस्टोरेंट के पास भाजपा प्रत्याशियों और संगठन से जुड़े पदाधिकारियों को एकत्रित किया गया। इसके बाद भाजपा के 23 प्रत्याशी एक बस में सवार होकर प्रशिक्षण के लिए रवाना हुए।
इस दौरान पुष्कर निकाय चुनाव प्रभारी नरेंद्र सिंह चुंडावत, भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व सभापति कमल पाठक सहित अन्य पार्टी पदाधिकारी मौजूद रहे। प्रत्याशियों को अपने साथ करीब 10 दिन के कपड़े और आवश्यक सामान लेकर आने के लिए भी कहा गया था।भाजपा की ओर से इसे प्रदेश नेतृत्व के निर्देश पर आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम बताया जा रहा है। भाजपा जिला प्रवक्ता एवं प्रशिक्षण प्रमुख अरुण वैष्णव ने कहा कि नगर परिषद चुनाव संपन्न होने के बाद पार्टी के सभी उम्मीदवारों के लिए प्रशिक्षण शिविर रखा गया है।उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान नए जनप्रतिनिधियों और प्रत्याशियों को भाजपा की रीति-नीति, संगठनात्मक कार्यप्रणाली, पार्टी के प्रति निष्ठा और पार्षद के रूप में जिम्मेदारियों के संबंध में विस्तार से जानकारी दी जाएगी। वैष्णव ने दावा किया कि पुष्कर की जनता ने भाजपा के पक्ष में समर्थन दिया है और पार्टी को उम्मीद है कि नगर परिषद में लगातार तीसरी बार भाजपा का बोर्ड बनेगा। पुष्कर नगर परिषद के 25 वार्डों के लिए 11 सितंबर को मतदान हुआ था। अब सभी की नजर 14 सितंबर को होने वाली मतगणना पर टिकी है। चुनाव नतीजे आने से पहले भाजपा प्रत्याशियों को एक साथ शहर से बाहर ले जाने के बाद राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। नगर परिषद सभापति का पद इस बार अनुसूचित जाति वर्ग के लिए आरक्षित है। ऐसे में वार्डों के चुनाव परिणाम के बाद सभापति पद को लेकर भी राजनीतिक जोड़-तोड़ और रणनीति महत्वपूर्ण रहने वाली है। भाजपा इसे संगठनात्मक प्रशिक्षण बता रही है, लेकिन चुनाव परिणाम से ठीक पहले प्रत्याशियों को एक साथ अज्ञात स्थान पर ले जाने को राजनीतिक तौर पर संभावित क्रॉस वोटिंग और दल-बदल की आशंका से जोड़कर भी देखा जा रहा है। फिलहाल पार्टी का पूरा फोकस अपने प्रत्याशियों को एकजुट रखने और आगामी बोर्ड गठन की रणनीति पर है।
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