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August 22, 2026
अजमेर, राजस्थान... 1501वां जश्ने ईद मिलादुन्नबी 26 अगस्त को, निकलेगा विशाल जुलूस, डीजे की पिकअप और आतिशबाजी पर रहेगा प्रतिबंध, मुस्लिम समाज में उत्साह
धार्मिक नगरी अजमेर में 1501वां जश्ने ईद मिलादुन्नबी आगामी 26 अगस्त को अकीदत और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। इस अवसर पर सुबह 9 बजे ढाई दिन के झोपड़े से जुलूस की शुरुआत होगी। जुलूस को लेकर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में अंजुमन सचिव सैयद कलीमुद्दीन चिश्ती और सूफी इंटरनेशनल के सचिव नवाब हिदायत उल्ला ने व्यवस्थाओं, अनुशासन, स्वच्छता और सामाजिक सद्भाव को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए।
आयोजकों ने स्पष्ट किया कि जुलूस के दौरान डीजे की पिकअप पर प्रतिबंध रहेगा और आतिशबाजी भी नहीं की जाएगी। सभी लोगों से जुलूस को शांतिपूर्ण, अनुशासित और गरिमापूर्ण तरीके से निकालने तथा प्रशासन और पुलिस के निर्देशों का पालन करने की अपील की गई।
जुलूस मार्ग पर स्वच्छता पर रहेगा विशेष जोर
जुलूस मार्ग पर स्वच्छता बनाए रखने के लिए विशेष व्यवस्था करने की अपील की गई है। जहां-जहां लंगर, शरबत और तबर्रुक वितरित किया जाएगा, वहां पर्याप्त संख्या में डस्टबिन रखने पर जोर दिया गया है। आयोजकों ने लोगों से इस्तेमाल की गई प्लेट, गिलास और अन्य सामग्री सड़क पर नहीं डालने की अपील की।
इस्लामी लिबास में शामिल होने की युवाओं से अपील
आयोजकों ने युवाओं से अपने-अपने क्षेत्रों से अधिक से अधिक संख्या में जुलूस में शामिल होने और इस्लामी लिबास में जुलूस का हिस्सा बनने की अपील की। वक्ताओं ने कहा कि युवाओं की गरिमापूर्ण और अनुशासित भागीदारी जुलूस की भव्यता बढ़ाने के साथ ही समाज में सकारात्मक संदेश देगी।
युवाओं से जुलूस के दौरान अनुशासन बनाए रखने और ऐसी किसी गतिविधि से बचने की अपील की गई, जिससे किसी को परेशानी हो। वक्ताओं ने कहा कि जुलूस के माध्यम से मोहब्बत, भाईचारे और इंसानियत का संदेश समाज तक पहुंचना चाहिए।
मोहब्बत, भाईचारे और इंसानियत का संदेश
प्रेस कॉन्फ्रेंस में वक्ताओं ने कहा कि जश्ने ईद मिलादुन्नबी केवल धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि मोहब्बत, इखलास, भाईचारे और इंसानियत का संदेश देने का अवसर है। उन्होंने कहा कि पैगम्बर हजरत मोहम्मद साहब ने लोगों को आपसी मोहब्बत, इखलास और पड़ोसियों का ख्याल रखने की शिक्षा दी।
आयोजकों ने कहा कि 1501वां जश्ने ईद मिलादुन्नबी का जुलूस मोहब्बत, भाईचारे, स्वच्छता और अनुशासन की मिसाल बने तथा अजमेर की गंगा-जमुनी तहजीब और आपसी सौहार्द को और मजबूत करने का संदेश दे।
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