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August 17, 2026
राजस्थान राज्य अन्य पिछड़ा वर्ग (राजनीतिक प्रतिनिधित्व) आयोग के अपूर्ण, अविश्वसनीय एवं भ्रम की स्थिति उत्पन्न करने वाले सर्वेक्षण (दिनांक 05 अगस्त 2026) की पारदर्शिता, पूर्णता एवं विश्वसनीयता सुनिश्चित करने तथा ओबीसी वर्ग को जनसंख्या के अनुपात में राजनीतिक प्रतिनिधित्व एवं आरक्षण प्रदान करने के संबंध में मु्ख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन
दिनांक 05 अगस्त 2026 को राजस्थान राज्य अन्य पिछड़ा वर्ग (राजनीतिक प्रतिनिधित्व) आयोग के सर्वेक्षण से संबंधित जो आंकड़े सामने आए हैं, उनसे राजस्थान के ओबीसी वर्ग की किसी भी जाति में संतोष एवं विश्वास की स्थिति नहीं बन पाई है। दुर्भाग्यवश, विभिन्न समाचार माध्यमों द्वारा इस सर्वेक्षण को जातिगत जनगणना के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है, जबकि यह वास्तविक जातिगत जनगणना नहीं, बल्कि आयोग द्वारा कराया गया सर्वेक्षण है।
प्राप्त जानकारी एवं विभिन्न क्षेत्रों से सामने आए अनुभवों के अनुसार सर्वेक्षण की प्रक्रिया में गंभीर कमियां रही हैं। उदाहरण के लिए, रावणा राजपूत समाज के संबंध में सामने आया आंकड़ा भी उसकी वास्तविक संख्या के पांचवे हिस्से तक भी नहीं पहुंचता दिखाई देता है। इससे सर्वेक्षण की पूर्णता, पद्धति एवं विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्न खड़े होते हैं।
ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार की ढुलमुल नीति, निकाय एवं पंचायतीराज चुनावों को टालने की मंशा तथा ओबीसी वर्ग के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को प्रभावित करने वाली परिस्थितियों के कारण सर्वेक्षण में विलंब हुआ और माननीय न्यायालय के निर्देशों के पश्चात इसे जल्दबाजी में पूरा किया गया। इस दौरान अनेक प्रगणकों द्वारा वास्तविक एवं प्रमाणित जानकारी एकत्र करने के स्थान पर अनुमानित अथवा अपूर्ण आंकड़े दर्ज किए जाने की शिकायतें सामने आई हैं।
राजस्थान के अनेक शहरों एवं गांवों में ऐसे ओबीसी परिवार भी हैं, जिनसे सर्वेक्षण के दौरान कोई संपर्क ही नहीं किया गया। कई स्थानों पर सर्वेक्षण के लिए प्रयुक्त एप्लीकेशन के ठीक प्रकार से कार्य नहीं करने के कारण डेटा एंट्री में कठिनाइयां आईं। इसके अतिरिक्त, कुछ स्थानों पर प्रगणकों द्वारा केवल सादे कागज पर परिवार के मुखिया का नाम लिखकर बाद में अपनी सुविधा के अनुसार डेटा दर्ज किए जाने की शिकायतें भी सामने आई हैं। कई प्रगणकों ने मतदाता सूचि के आधार पर अनुमानित जाति के आधार पर डेटा एंट्री भी की है।
यदि ऐसी परिस्थितियों में एकत्र किए गए अपूर्ण एवं अमानक आंकड़ों के आधार पर ओबीसी वर्ग के राजनीतिक प्रतिनिधित्व अथवा आरक्षण से संबंधित कोई महत्वपूर्ण निर्णय लिया जाता है, तो इससे सामाजिक न्याय की मूल भावना प्रभावित हो सकती है।
अतःउपरोक्त विषय की गंभीरता को देखते हुए राजस्थान के ओबीसी वर्ग के हितों, सामाजिक न्याय, समान राजनीतिक प्रतिनिधित्व एवं पारदर्शिता को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए आयोग की रिपोर्ट एवं उसके आंकड़ों को सार्वजनिक कराया जाए तथा सर्वेक्षण की कमियों का निष्पक्ष एवं स्वतंत्र सत्यापन कराया जाए। साथ ही, ओबीसी वर्ग की वास्तविक जनसंख्या एवं सामाजिक-राजनीतिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए आरक्षण एवं राजनीतिक प्रतिनिधित्व की व्यवस्था को न्यायसंगत एवं संख्यानुपातिक बनाने की दिशा में आवश्यक कदम उठाए जाएं।
यदि सरकार हमारी ये मांगे नही मानती है तो सरकार को आगामी चुनावो में इसके विपरीत परिणाम भुगतने पड़ सकते है।
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