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August 7, 2026
नगर परिषद पार्षद के लिए 2.50 लाख और नगर पालिका पार्षद के लिए 1.50 लाख रुपए की सीमा, मतदान के दिन वाहन चलाने के लिए अलग अनुमति जरूरी
जयपुर। राजस्थान में आगामी नगरीय निकाय चुनावों को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग ने प्रत्याशियों के चुनावी खर्च की सीमा तय कर दी है। नगर निगम, नगर परिषद और नगर पालिका के पार्षद प्रत्याशियों के लिए खर्च की अधिकतम सीमा में बढ़ोतरी की गई है।
नई व्यवस्था के तहत नगर निगम पार्षद प्रत्याशी अब अधिकतम 3.50 लाख रुपए, नगर परिषद पार्षद 2.50 लाख रुपए और नगर पालिका पार्षद 1.50 लाख रुपए तक चुनावी खर्च कर सकेंगे।
नगर निगम में खर्च सीमा एक लाख रुपए बढ़ी, नगर निगम के पार्षद प्रत्याशियों के लिए पहले चुनाव खर्च की अधिकतम सीमा 2.50 लाख रुपए थी। इसे बढ़ाकर अब 3.50 लाख रुपए कर दिया गया है। यानी सीमा में सीधे एक लाख रुपए की बढ़ोतरी हुई है।
नगर परिषद में भी एक लाख की बढ़ोतरी
नगर परिषद के पार्षद प्रत्याशियों के लिए पहले अधिकतम चुनावी खर्च सीमा 1.50 लाख रुपए थी। नई व्यवस्था में इसे बढ़ाकर 2.50 लाख रुपए कर दिया गया है।इस श्रेणी में भी प्रत्याशियों को पहले के मुकाबले एक लाख रुपए अधिक खर्च करने की अनुमति होगी।
नगर पालिका प्रत्याशी 1.50 लाख तक कर सकेंगे खर्च, नगर पालिका के पार्षद प्रत्याशियों के लिए खर्च सीमा एक लाख रुपए से बढ़ाकर 1.50 लाख रुपए कर दी गई है। इस तरह नगर पालिका स्तर पर खर्च की सीमा में 50 हजार रुपए की वृद्धि की गई है।
निकाय | पुरानी खर्च सीमा | नई खर्च सीमा | बढ़ोतरी |
नगर निगम | 2.50 लाख रुपए | 3.50 लाख रुपए | 1 लाख रुपए |
नगर परिषद | 1.50 लाख रुपए | 2.50 लाख रुपए | 1 लाख रुपए |
नगर पालिका | 1 लाख रुपए | 1.50 लाख रुपए | 50 हजार रुपए |
आयोग की गाइडलाइन के अनुसार मतदान के दिन यदि कोई प्रत्याशी चुनावी कार्य के लिए वाहन का उपयोग करना चाहता है तो उसे इसके लिए अलग से अनुमति लेनी होगी।
प्रत्याशियों के लिए चुनाव प्रचार में इस्तेमाल किए जाने वाले वाहनों की संख्या भी निर्धारित की गई है। उपलब्ध जानकारी में अलग-अलग निकायों के लिए वाहनों की सटीक संख्या का विवरण नहीं दिया गया है।
चुनाव कार्यालय पर लाउडस्पीकर पर प्रतिबंध
चुनाव आयोग ने प्रत्याशियों के चुनाव कार्यालयों पर लाउडस्पीकर लगाने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया है। इसका मतलब है कि प्रत्याशी अपने चुनावी कार्यालय पर स्थायी रूप से लाउडस्पीकर लगाकर प्रचार नहीं कर सकेंगे।इन दिशा-निर्देशों के जरिए आयोग का उद्देश्य चुनावी खर्च और प्रचार गतिविधियों पर निगरानी रखते हुए सभी प्रत्याशियों के लिए समान चुनावी परिस्थितियां सुनिश्चित करना है।
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