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July 14, 2026
जयपुर। राजस्थान में तबादला सूची जारी होने के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं की नाराजगी खुलकर सामने आई है। संगठन की अनुशंसाओं के अनुरूप तबादले नहीं होने और अंतिम सूची से कई नाम हटाए जाने की शिकायतों के बीच सोमवार को बड़ी संख्या में कार्यकर्ता भाजपा प्रदेश कार्यालय पहुंचे।
कार्यकर्ताओं की बढ़ती नाराजगी को देखते हुए संगठन भी सक्रिय हो गया। सूत्रों के अनुसार भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने राजस्व मंत्री हेमंत मीणा और ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर को प्रदेश कार्यालय बुलाकर करीब आधे घंटे तक बंद कमरे में चर्चा की। इस दौरान तबादला सूची, संगठन की अनुशंसाओं और कार्यकर्ताओं की शिकायतों पर मंथन किया गया।
बताया जा रहा है कि संगठन की ओर से भेजी गई अनुशंसाओं की अनदेखी और जरूरतमंद कार्यकर्ताओं के मामलों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिए जाने को लेकर नाराजगी जताई गई। वहीं मंत्रियों ने अपनी ओर से सफाई देते हुए कहा कि अंतिम स्तर पर कई बदलाव अधिकारियों के स्तर पर हुए हैं।
सूत्रों के अनुसार शिक्षा मंत्री मदन दिलावर और जलदाय मंत्री कन्हैयालाल चौधरी से भी फोन पर चर्चा कर फीडबैक लिया गया। हालांकि, मंत्रियों ने इस मुलाकात को नियमित संगठनात्मक चर्चा बताया है।
शिकायतों का फीडबैक लेने में जुटा संगठन
तबादलों को लेकर सामने आई नाराजगी के बाद भाजपा संगठन अब जिलों और विभिन्न विभागों से मिले फीडबैक को देख रहा है। कई कार्यकर्ताओं ने शिकायत की है कि जिन कर्मचारियों और अधिकारियों के तबादले के लिए अनुशंसा की गई थी, उनके नाम अंतिम सूची में शामिल नहीं किए गए।
पार्टी नेतृत्व की कोशिश है कि कार्यकर्ताओं के असंतोष को जल्द दूर किया जाए, ताकि इसका असर संगठनात्मक गतिविधियों और आगामी राजनीतिक कार्यक्रमों पर नहीं पड़े।
प्रदेश कार्यालय में बढ़ी भीड़, गेट बंद करना पड़ा
प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ के कक्ष के बाहर बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और अन्य लोग एकत्र हो गए। भीड़ बढ़ने पर व्यवस्था बनाए रखने के लिए अंदर का गेट बंद कर दिया गया और बाहर से ही मिलने की व्यवस्था की गई।
इस दौरान कुछ नाराज कार्यकर्ताओं ने गार्ड से गेट खुलवाने की कोशिश की, जिससे कुछ देर के लिए खींचतान की स्थिति बन गई। बाद में सभी कार्यकर्ताओं को हॉल में बैठाया गया, जहां प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने उनकी शिकायतें और नाराजगी सुनी।
सीएमओ ने मंत्रियों से मांगा ब्योरा
तबादलों को लेकर लगातार मिल रही शिकायतों के बाद मुख्यमंत्री कार्यालय ने भी मंत्रियों से जनप्रतिनिधियों की अनुशंसाओं का ब्योरा मांगा है। सूत्रों के अनुसार कई विधायकों और सांसदों की नाराजगी सामने आने के बाद मंत्रियों से पूछा गया है कि किस जनप्रतिनिधि ने किस अधिकारी या कर्मचारी के तबादले की सिफारिश की और उस पर क्या निर्णय लिया गया।
इसका उद्देश्य तबादला प्रक्रिया को लेकर मिले राजनीतिक फीडबैक का आकलन करना और विभागवार फैसलों की समीक्षा करना बताया जा रहा है। फिलहाल संगठन और सरकार दोनों स्तरों पर तबादला सूची से उपजे असंतोष को शांत करने की कोशिशें तेज हो गई हैं।
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