Post Views 01
July 14, 2026
जयपुर। राजस्थान में पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव निर्धारित समय-सीमा में नहीं कराने को लेकर राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग के खिलाफ दायर अवमानना याचिका पर मंगलवार को राजस्थान हाईकोर्ट में सुनवाई नहीं हो सकी। जस्टिस इंद्रजीत सिंह और जस्टिस संदीप तनेजा की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई से स्वयं को अलग कर लिया। इसके चलते अब कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के निर्देश पर नई खंडपीठ गठित की जाएगी।मामले की अगली सुनवाई 16 जुलाई को प्रस्तावित है। नई बेंच राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग की ओर से हाईकोर्ट के पूर्व आदेश की पालना नहीं किए जाने के आरोपों पर सुनवाई करेगी।
पूर्व विधायक संयम लोढ़ा और गिर्राज सिंह देवंदा ने लगाई याचिका
पूर्व विधायक संयम लोढ़ा और गिर्राज सिंह देवंदा ने राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग के खिलाफ अवमानना याचिका दायर की है। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि हाईकोर्ट की ओर से स्पष्ट समय-सीमा तय किए जाने के बावजूद पंचायत और निकाय चुनाव की प्रक्रिया शुरू नहीं की गई।
याचिका में कहा गया है कि हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग को शहरी निकायों के वार्ड परिसीमन और मतदाता सूचियों के संशोधन की प्रक्रिया 20 जून तक पूरी करने के निर्देश दिए थे। इसके साथ ही संपूर्ण चुनाव प्रक्रिया 31 जुलाई तक संपन्न कराने को कहा गया था। हाईकोर्ट ने इससे पहले राज्य सरकार की चुनाव दिसंबर तक टालने की मांग भी अस्वीकार कर दी थी।
चुनाव प्रक्रिया अब तक शुरू नहीं हुई’
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि न्यायालय की ओर से निर्धारित अंतिम तारीख नजदीक आने के बावजूद चुनाव कार्यक्रम घोषित नहीं किया गया है। वार्ड परिसीमन, मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन, आरक्षण और चुनाव कार्यक्रम से संबंधित आवश्यक कार्रवाई भी समय पर पूरी नहीं हुई है।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि सरकार और निर्वाचन आयोग का यह रवैया हाईकोर्ट के आदेश की जानबूझकर अवहेलना है। ऐसे में संबंधित अधिकारियों के खिलाफ न्यायालय की अवमानना की कार्रवाई की जानी चाहिए।
चार वरिष्ठ अधिकारियों को बनाया पक्षकार
अवमानना याचिका में राज्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह, आयोग के सचिव राजेश वर्मा, पंचायतीराज आयुक्त डॉ. जोगाराम और स्वायत्त शासन विभाग के निदेशक प्रतीक चंद्रशेखर जुईकर को पक्षकार बनाया गया है।
याचिकाकर्ताओं ने अदालत से मांग की है कि आदेश की पालना नहीं करने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों को अवमानना का दोषी मानते हुए उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग को 31 जुलाई तक चुनाव प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश देने की भी मांग की गई है।
चुनावों में देरी को लेकर पहले भी सख्त रुख अपना चुका हाईकोर्ट
पंचायत और निकाय चुनावों में लगातार हो रही देरी को लेकर हाईकोर्ट पूर्व में भी नाराजगी जता चुका है। राज्य सरकार की ओर से चुनाव आगे बढ़ाने के लिए मौसम, परिसीमन और प्रशासनिक तैयारियों से संबंधित कारण बताए गए थे, लेकिन अदालत ने समयबद्ध तरीके से लोकतांत्रिक प्रक्रिया बहाल करने पर जोर दिया था।
राज्य निर्वाचन आयोग भी पूर्व में सरकार को पत्र लिखकर स्पष्ट कर चुका है कि चुनाव प्रक्रिया में देरी होने पर अदालत की अवमानना की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। आयोग ने आवश्यक आरक्षण और परिसीमन संबंधी विवरण शीघ्र उपलब्ध कराने की मांग की थी।
अब 16 जुलाई को गठित होने वाली नई खंडपीठ यह तय करेगी कि राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग ने हाईकोर्ट के आदेश की पालना के लिए पर्याप्त कदम उठाए हैं या नहीं।
© Copyright Horizonhind 2026. All rights reserved