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July 2, 2026
बांसवाड़ा में जांच के बाद सभी शैक्षणिक दस्तावेज पाए गए फर्जी, पूरी सेवा अवधि का वेतन और देय राशि होगी वसूल
बांसवाड़ा। बांसवाड़ा जिले में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सरकारी नौकरी करने का गंभीर मामला सामने आया है। एक शिक्षक ने कथित रूप से फर्जी शैक्षणिक दस्तावेजों के सहारे करीब 35 साल तक सरकारी सेवा की, लेकिन सेवानिवृत्ति से ठीक एक दिन पहले उसकी सेवा समाप्त कर दी गई। जांच में दस्तावेज फर्जी पाए जाने के बाद जिला परिषद ने शिक्षक को राजकीय सेवा से बर्खास्त करने का आदेश जारी किया है।
मामला धौलपुर जिले के फूलपुरा निवासी लक्ष्मीनारायण से जुड़ा है। उसने वर्ष 1992 में सामान्य श्रेणी अध्यापक पद के लिए आवेदन करते समय जो शैक्षणिक दस्तावेज प्रस्तुत किए थे, वे जांच में संदिग्ध पाए गए। वर्ष 2022 में उसके भाई की शिकायत के बाद मामले की जांच शुरू की गई थी। जांच पूरी होने पर सामने आया कि शिक्षक द्वारा प्रस्तुत सभी शैक्षणिक दस्तावेज फर्जी थे।
जांच में यह भी सामने आया कि लक्ष्मीनारायण ने सैकण्डरी और सीनियर सैकण्डरी की अंकतालिकाओं में अंक बढ़ाकर उन्हें प्रथम श्रेणी का दर्शाया था। इसके अलावा बिना एसटीसी किए फर्जी अंकतालिका संलग्न कर दी गई थी। विभागीय रिकॉर्ड में संबंधित दस्तावेजों का कोई अस्तित्व नहीं मिला, जिसके बाद मामला गंभीर माना गया।
शिक्षक ने इस कार्रवाई से बचने के लिए कानूनी राहत लेने का प्रयास भी किया, लेकिन विभिन्न स्तरों पर दस्तावेजों की जांच में वे फर्जी प्रमाणित हुए। इसके बाद जिला स्थापना समिति ने राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 91(3) के तहत उसे राजकीय सेवा से हटाने का निर्णय लिया।
जिला परिषद की ओर से सोमवार को शिक्षक की सेवा समाप्त करने का आदेश जारी कर दिया गया। विशेष बात यह है कि यह कार्रवाई उसकी सेवानिवृत्ति से ठीक एक दिन पहले की गई। विभागीय जांच में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नियुक्ति प्राप्त करना प्रमाणित होने के बाद अब उससे पूरी सेवा अवधि के दौरान प्राप्त वेतन और अन्य देय राशि की वसूली की जाएगी।
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जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी गोपाललाल स्वर्णकार ने बताया कि आरोपी शिक्षक से पूरी सेवा राशि की वसूली की जाएगी। प्रशासन की इस कार्रवाई को सरकारी सेवा में दस्तावेज सत्यापन और नियुक्ति प्रक्रिया की गंभीरता से जोड़कर देखा जा रहा है।
यह मामला सरकारी नौकरियों में दस्तावेज सत्यापन व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करता है। 35 साल तक फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सेवा करने का मामला सामने आने के बाद विभागीय स्तर पर रिकॉर्ड जांच और सत्यापन प्रक्रिया को और मजबूत करने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
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