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राजस्थान न्यूज़: AI और डीपफेक के जरिए बढ़ी साइबर ठगी, 1930 हेल्पलाइन पर शिकायत की सलाह ,राजस्थान पुलिस ने जारी की हाई अलर्ट एडवाइजरी

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June 12, 2026

किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर देने की अपील की गई है।

राजस्थान में साइबर अपराधियों द्वारा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डीपफेक तकनीक का इस्तेमाल कर लोगों को ठगने के मामलों में लगातार बढ़ोतरी को देखते हुए पुलिस मुख्यालय ने आमजन के लिए विशेष एडवाइजरी जारी की है। साइबर अपराधी अब देश की प्रतिष्ठित हस्तियों, उद्योगपतियों और सेलिब्रिटीज के चेहरे व आवाज की हूबहू नकल तैयार कर लोगों को फर्जी निवेश योजनाओं में फंसाने का प्रयास कर रहे हैं। राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम शाखा ने नागरिकों से ऐसे विज्ञापनों और निवेश प्रस्तावों से सावधान रहने की अपील की है।

अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस (साइबर क्राइम) वीके सिंह ने बताया कि अपराधी इंटरनेट पर उपलब्ध प्रसिद्ध व्यक्तियों के वीडियो और ऑडियो का उपयोग कर एआई टूल्स के माध्यम से उनकी नकली आवाज और चेहरे के हाव-भाव तैयार कर रहे हैं। इन फर्जी वीडियो और विज्ञापनों में यह दिखाया जाता है कि किसी नामी हस्ती ने किसी विशेष ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म या निवेश ऐप के माध्यम से कम समय में भारी मुनाफा कमाया है। लोगों का भरोसा जीतने के लिए इन वीडियो को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बड़े पैमाने पर प्रचारित किया जाता है।

पुलिस के अनुसार साइबर ठग सबसे पहले फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और टेलीग्राम जैसे सोशल मीडिया मंचों पर आकर्षक विज्ञापन चलाते हैं। इनमें कम निवेश पर प्रतिदिन हजारों रुपये कमाने जैसे लुभावने दावे किए जाते हैं। जैसे ही कोई व्यक्ति इन विज्ञापनों पर क्लिक करता है, उसे व्हाट्सएप या टेलीग्राम पर बनाए गए तथाकथित निवेश समूहों में जोड़ दिया जाता है। इन समूहों में मौजूद अधिकांश सदस्य वास्तविक नहीं होते, बल्कि साइबर अपराधियों द्वारा संचालित फर्जी अकाउंट या बॉट्स होते हैं, जो लगातार भारी मुनाफे के नकली स्क्रीनशॉट साझा कर नए निवेशकों का विश्वास जीतते हैं।

विश्वास बनने के बाद पीड़ित को एक विशेष लिंक या एपीके फाइल भेजकर फर्जी ट्रेडिंग ऐप डाउनलोड करवाया जाता है। यह ऐप आमतौर पर आधिकारिक ऐप स्टोर्स पर उपलब्ध नहीं होता। शुरुआत में निवेश करने पर ऐप में मुनाफा बढ़ता हुआ दिखाई देता है, जिससे निवेशक और अधिक धन जमा करने के लिए प्रेरित हो जाता है। कई मामलों में लोग अपनी बचत के साथ-साथ उधार लेकर भी बड़ी रकम इन प्लेटफॉर्म्स में निवेश कर देते हैं।

साइबर ठगी का असली चेहरा तब सामने आता है जब निवेशक अपनी कथित कमाई को निकालने का प्रयास करता है। राशि निकालने के लिए टैक्स, प्रोसेसिंग फीस, सिक्योरिटी चार्ज या अन्य शुल्कों के नाम पर अतिरिक्त रकम जमा कराने की मांग की जाती है। कई बार पीड़ित से बार-बार पैसे जमा करवाए जाते हैं और अंत में ठग समूह को बंद कर सभी संपर्क समाप्त कर देते हैं। इसके बाद निवेशक अपनी पूरी राशि गंवा बैठता है।

राजस्थान पुलिस ने लोगों को सलाह दी है कि किसी भी निवेश योजना में पैसा लगाने से पहले उसकी वैधता की जांच अवश्य करें, केवल अधिकृत और पंजीकृत प्लेटफॉर्म्स का ही उपयोग करें तथा सोशल मीडिया पर दिखने वाले सेलिब्रिटी आधारित निवेश विज्ञापनों पर आंख मूंदकर भरोसा न करें। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर देने की अपील की गई है।


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