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June 12, 2026
जेएलएन मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, अजमेर में दुर्लभ रोगों पर व्याख्यान कार्यक्रम का आयोजन
जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के शिशु रोग विभाग तथा भारतीय बाल रोग अकादमी (IAP), अजमेर चैप्टर के संयुक्त तत्वावधान में "दुर्लभ रोग" विषय पर एक सतत चिकित्सा शिक्षा (सीएमई) कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य चिकित्सकों को दुर्लभ आनुवंशिक रोगों के शीघ्र निदान एवं प्रबंधन के प्रति जागरूक करना था।
सीएमई में शिशु रोग विभाग के वरिष्ठ चिकित्सकों, रेजिडेंट्स तथा मित्तल अस्पताल के रेजिडेंट्स ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।
मुख्य वक्ता एवं उनकी विषय-वस्तु:
· डॉ. प्रियांशु माथुर (प्रोफेसर, आनुवंशिक रोग विभाग, एसएमएस मेडिकल कॉलेज, जयपुर) ने बताया कि दुर्लभ रोगों का सरल एवं व्यावहारिक तरीके से निदान और प्रबंधन कैसे किया जा सकता है। उन्होंने शुरुआती क्लिनिकल संदेह और आनुवंशिक जांच के समुचित उपयोग पर जोर दिया।
· डॉ. लाखन पोसवाल (वरिष्ठ प्रोफेसर, विभागाध्यक्ष शिशु रोग विभाग) ने अपने अनुभव साझा किए।
· डॉ. लोकेश अग्रवाल (निदेशक, संबल पोर्टल, जयपुर) ने दुर्लभ रोगों की ट्रैकिंग एवं सहायता में डिजिटल हेल्थ प्लेटफॉर्म की भूमिका पर प्रकाश डाला।
· डॉ. मनोज कुमार ने नई चिकित्सा पद्धतियों और वैश्विक सहयोग पर विचार रखे।
संस्थान की ओर से आश्वासन:
· डॉ. अनिल सामरिया (प्रिंसिपल एवं कंट्रोलर, जेएलएन मेडिकल कॉलेज) ने कार्यक्रम का उद्घाटन किया तथा दुर्लभ रोगों पर शैक्षणिक पहलों को प्रोत्साहित किया।
· डॉ. अरविंद खरे (चिकित्सा अधीक्षक) ने आश्वासन दिया कि जेएलएन अस्पताल में दुर्लभ रोगों की जांच एवं उपचार सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। उन्होंने उन्नत निदान एवं थेरेपी तक पहुंच सुधारने की प्रतिबद्धता दोहराई।
· डॉ. जयप्रकाश नारायण (अति अधीक्षक), डॉ. अमित यादव (उप अधीक्षक) एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने भी इस पहल में सहयोग का आश्वासन दिया।
अन्य प्रमुख उपस्थित एवं आयोजक (शिशु रोग विभाग):
डॉ. ललित प्रकाश माली (प्रोफेसर), डॉ. ममता (एसोसिएट प्रोफेसर), डॉ. लक्ष्मण सिंह चारण (एसोसिएट प्रोफेसर), डॉ. महेंद्र नीमल, डॉ. चंद्रदीप मस्तान, डॉ. संजीव सुड़िया, डॉ. कमल, डॉ. भारती, डॉ. दया सोलंकी, डॉ. महेश हेमनानी, डॉ. रामावतार एन. मीठा वाल, तथा बाल रोग विभाग के सीनियर रेजिडेंट और रेजिडेंट्स।
सीएमई का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिसमें दुर्लभ रोग देखभाल को सुदृढ़ करने के सामूहिक प्रयास की सराहना की गई।
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