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May 5, 2026
उदयपुर | संभाग में बांसवाड़ा जिले के घाटोल ब्लॉक स्थित अमरथून के राजकीय उच्च माध्यमिक स्कूल में आज सुबह 11वीं साइंस की कक्षा में पढ़ाई के दौरान अचानक छत का प्लास्टर गिर गया। इस हादसे में चार छात्राएं गंभीर रूप से घायल हो गईं। गनीमत रही कि प्लास्टर का भारी हिस्सा किसी के सिर पर नहीं गिरा। स्कूल में दो साल पहले मरम्मत पर 10 लाख रुपये खर्च किए गए थे, लेकिन यह हादसा निर्माण कार्य की गुणवत्ता और सरकारी नीतियों पर गंभीर सवाल खड़े करता है। चोटिल छात्राओं पूजा, काली कुमारी, शारदा कुमारी और एक अन्य को प्राथमिक उपचार के बाद घर भेजा गया।
स्थानीय लोग और स्कूल प्रशासन बताते हैं कि भवन की जर्जर स्थिति के बारे में कई बार प्रार्थना पत्र, ज्ञापन और सर्वे रिपोर्ट भेजी जा चुकी हैं, लेकिन मरम्मत के लिए बजट स्वीकृत नहीं हुआ। प्रधानाचार्य अरुण व्यास ने कहा कि स्कूल के 13 कमरों में से 8 जर्जर हैं और तीन कमरे तो अधिक खतरनाक स्थिति में हैं। गर्मी और जर्जर कक्षों के कारण छात्रों को टिन शेड और आंशिक रूप से खराब कमरों में बैठाकर पढ़ाया जा रहा था। मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी, सीबीईओ, एसडीएम और अन्य अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर जांच और भवन की मजबूती सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। लेकिन सवाल यही है कि क्या दो साल पहले 10.65 लाख रुपये खर्च कर मरम्मत कराने के बाद भी अधिकारियों ने सही ढंग से काम किया? राजस्थान में हालात और भी चिंताजनक हैं। राज्य के 502 स्कूल जर्जर भवनों में पढ़ाई कर रहे हैं, जिनमें से 212 भवन बच्चों के लिए पूरी तरह असुरक्षित हैं। प्रतापगढ़ जिले में 26, बीकानेर में 18, बालोतरा में 16 और झालावाड़ में 15 स्कूल भवन खतरनाक स्थिति में हैं। मासूम बच्चों की जान खतरे में है और सरकारी जिम्मेदारियाँ केवल आंकड़ों तक सीमित न रहें। आखिर कौन जवाब देगा जब जर्जर भवनों में बैठकर हमारी अगली पीढ़ी पढ़ाई कर रही है?
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